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असम चुनाव के लिए बीजेपी की पहली सूची जारी: जालुकबारी से हिमंत, दिसपुर से पूर्व कांग्रेस सांसद बोरदोलोई | राजनीति समाचार

बीजेपी ने असम में बड़े बदलाव की योजना बनाई, विधानसभा चुनाव से पहले 30 विधायकों को बदला जा सकता है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 12:34 IST बीजेपी ने असम चुनाव के लिए 88 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की, जिसमें जालुकबरी सीट से हिमंत बिस्वा सरमा का नाम शामिल है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा। (फाइल फोटो) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को आगामी असम विधानसभा चुनाव के लिए 88 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को जालुकबारी सीट से मैदान में उतारा गया है। पहली सूची में नए शामिल होने वाले प्रद्युत बोरदोलोई का नाम शामिल है, जो कांग्रेस छोड़ने के ठीक एक दिन बाद बुधवार को पार्टी में शामिल हुए। बोरदोलोई को असम की दिसपुर विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है। असम कांग्रेस के पूर्व प्रमुख भूपेन कुमार बोरा, जो हाल ही में कांग्रेस छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल हुए, आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में बिहपुरिया से चुनाव लड़ेंगे। माधवी दास बिरसिंग-जरूआ से, ज्योत्सना कलिता चमारिया से और नीलिमा देवी मंगलदाई से मैदान में उतरेंगी। उम्मीदवारों की पहली सूची को भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की अध्यक्षता में हुई बैठक में अंतिम रूप दिया। बैठक में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा चुनाव निकाय के अन्य सदस्य शामिल हुए। भाजपा द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची: एक और विकल्प चुनें एक और अधिक पढ़ें एक और विकल्प चुनें मेरे पास एक अच्छा विकल्प है। pic.twitter.com/93wawBGuCn– भाजपा असम प्रदेश (@भाजपा4असम) 19 मार्च 2026 असम विधानसभा चुनाव 2026 असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 2021 के असम चुनाव में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सहयोगियों के साथ राज्य के 126 विधानसभा क्षेत्रों में से 75 पर जीत हासिल की। बीजेपी अकेले 60 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) ने 9 सीटें और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने 6 सीटें जीतीं। जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने 50 सीटें जीतीं और अखिल गोगोई के नेतृत्व वाले रायजोर दल ने कुल 126 सीटों में से 1 सीट जीती। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 12:11 IST समाचार राजनीति असम चुनाव के लिए बीजेपी की पहली सूची जारी: जालुकबारी से हिमंत, दिसपुर से पूर्व कांग्रेस सांसद बोरदोलोई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)बीजेपी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)प्रद्युत बोरदोलोई(टी)भूपेन कुमार बोरा

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Hindi News National State Assembly Election West Bengal Assam Tamilnadu Kerala Puducherry Live गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई/तिरुवनंतपुरम27 मिनट पहले कॉपी लिंक तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौजूदा विधायक को टिकट ना दिए जाने पर विरोध प्रदर्शन किया। असम के कांग्रेस से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा राज्य में विधानसभा चुनावों से ठीक 20 दिन पहले आया है। राज्य मीडिया विभाग के अध्यक्ष बेदाब्रत बोरा ने PTI को बताया कि बोरदोलोई ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री और नगांव निर्वाचन क्षेत्र से दो बार सांसद रहे बोरदोलोई के बेटे, 9 अप्रैल को होने वाले राज्य चुनावों के लिए मार्घेरिटा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। सांसद ने खड़गे को भेजे पत्र में कहा, आज अत्यंत दुख के साथ, मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं। उधर, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र से टिकट न दिए जाने के बाद उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किया। TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाए और नारेबाजी की। असम CM बोले- अभी बोरदोलोई के संपर्क में नहीं, आगे हो सकता है असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई के संपर्क में नहीं हैं। बोरदोलोई ने मंगलवार को नगांव से मौजूदा सांसद के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। CM ने आगे कहा कि भविष्य में उनसे संपर्क होने की संभावना है। TMC कार्यतकर्ताओं ने टायर जलाए, नारेबाजी की… पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना में TMC कार्यकर्ताओं ने सड़क पर टायर जलाएं। TMC कार्यकर्ताओं मौजूदा विधायक शौकत मोल्ला को टिकट ना दिए जाने पर नारेबाजी की। ममता ने 74 विधायकों के टिकट काटे तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की कुल 294 सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। बाकी 3 सीटें सहयोगी बीजीपीएम को दी हैं। ममता ने 74 विधायकों (करीब एक तिहाई) के टिकट काट दिए हैं। 15 विधायकों की सीटें बदली गई हैं। TMC ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई, 52 महिलाएं उम्मीदवार ममता ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई। जमीनी नेता और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। 2021 में 15 सेलिब्रिटी को टिकट दिया था। इस बार 2 सेलिब्रिटीज को टिकट मिला है। लिस्ट में 52 महिलाएं हैं। 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। 40 साल से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को टिकट मिला। लिस्ट में 95 कैंडिटेट्स SC/ST कैंडिडेंट्स हैं। खाड़ी की जंग पर केरल-तमिलनाडु में दंगल शुरू, प्रवासी नए ‘वोट फैक्टर’ खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय हैं। इनमें से 35 लाख से ज्यादा केवल केरल और तमिलनाडु से हैं। युद्ध क्षेत्र में उनकी सुरक्षा और रोजगार जाने का खतरा इन राज्यों के लाखों परिवारों को सीधे प्रभावित कर रहा है। इसे देखते हुए सभी पार्टियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। एक ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने तमाम अमले को सक्रिय कर दिया है। दूसरी ओर तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रमुक और केरल में वामपंथी दलों की सरकारों ने भी केंद्र पर हमले तेज कर दिए हैं। कांग्रेस प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और आर्थिक संकट को बड़ा मुद्दा बना रही है। इस सबके बीच, भाजपा दक्षिण के दुर्ग में सेंध लगाने के लिए विकास और नए नारों के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में है। केरल में 40 तो तमिलनाडु में 50 सीट पर निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते बुधवार को केरल और तमिलनाडु में 16 हजार करोड़ की रेलवे सहित अनेक विकास योजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं से केरल में 35-40 तो तमिलनाडु में 45-50 विधानसभा क्षेत्र के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। भाजपा ने ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी उतारी केरल में भाजपा ने कोट्टायम जिले की दो महत्वपूर्ण ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र की जोड़ी को मैदान में उतारा है। अनुभवी नेता पीसी जॉर्ज अपनी पारंपरिक सीट पूंजार से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उनके बेटे शोन जॉर्ज को पास की पाला सीट से टिकट दिया गया है। पीसी सात बार विधायक रह चुके हैं। तमिलनाडु में पहले दो दिन में ही 23 करोड़ रुपए जब्त तमिलनाडु में 15 मार्च से आचार संहिता लागू हो गई है। यहां दो दिनों में ही 23.28 करोड़ की नकदी और सामान जब्त किया गया है। 2021 में पिछले विधानसभा चुनाव में 428 करोड़ रुपए की जब्ती की गई थी। 4 मई को आएंगे 5 राज्यों को चुनाव के नतीजे चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। बंगाल में दो फेज 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव होंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का रिजल्ट 4 मई को आएगा। राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल… 4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था। अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद

West Bengal TMC, Assam BJP Govt Likely; Stalin in Tamil Nadu: Opinion Poll

West Bengal TMC, Assam BJP Govt Likely; Stalin in Tamil Nadu: Opinion Poll

Hindi News National West Bengal TMC, Assam BJP Govt Likely; Stalin In Tamil Nadu: Opinion Poll नई दिल्ली53 मिनट पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया है। चुनाव की घोषणा के बाद सर्वे एजेंसी Matrize-IANS ने ओपिनियन पोल जारी किया है। सर्वे के मुताबिक पश्चिम बंगाल में एक बार फिर टीएमसी की सरकार बन सकती है, जबकि असम में बीजेपी की सरकार बनी रहने का अनुमान है। तमिलनाडु की 231 सीटों में से सर्वे में DMK+ को 104-114 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि AIADMK-BJP गठबंधन को 114-127 सीटें मिल सकती हैं। वहीं केरल में भी लेफ्ट और कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के बीच कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। राज्यवार ओपिनियन पोल… पश्चिम बंगाल में दो फेज में चुनाव होंगे चुनाव आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में वोटिंग होगी। पहले चरण में 23 अप्रैल और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा। पिछली बार बंगाल में 8 फेज में चुनाव हुए थे। वहीं तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में चुनाव एक ही चरण में होंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। वहीं केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। पांचों राज्यों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। तमिलनाडु- भाजपा-कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकीं: आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। केरल- दक्षिण का इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में: देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता। असम- कांग्रेस ने किया 8 पार्टियों से अलायंस: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं। पुडुचेरी- सबसे कम सीटों वाली विधानसभा: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगास्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है। ———— विधानसभा चुनाव से जुड़ी यब खबर भी पढ़ें… पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग:तमिलनाडु में 23 अप्रैल, असम-केरल-पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग; नतीजे 4 मई को चुनाव आयोग ने रविवार को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। बंगाल में दो फेज 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव होंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा। पांचों राज्यों का रिजल्ट 4 मई को आएगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Mayank Chakraborty, first king of the North-East on the chessboard, grandmaster, Grandmaster from Assam and North-east India

Mayank Chakraborty, first king of the North-East on the chessboard, grandmaster, Grandmaster from Assam and North-east India

Hindi News Sports Mayank Chakraborty, First King Of The North East On The Chessboard, Grandmaster, Grandmaster From Assam And North east India स्टॉकहोम/गुवाहाटी42 मिनट पहले कॉपी लिंक असम के मयंक चक्रवर्ती भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बने हैं। वे नॉर्थ ईस्ट से इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी हैं। शतरंज की बिसात पर जब मोहरे अपनी चालें चलते हैं, तो अक्सर जीत और हार के बीच का फासला केवल एक ‘चेकमेट’ का होता है, लेकिन स्वीडन के स्टॉकहोम में जब 16 साल के एक लड़के ने अपना आखिरी दांव चला, तो वह जीत केवल एक टूर्नामेंट की नहीं थी। वह जीत थी- वर्षों के गुमनाम संघर्ष की, एक पिता के त्याग की और पूर्वोत्तर भारत के उस भरोसे की, जिसने पहली बार दुनिया को अपना ‘ग्रैंडमास्टर’ दिया। असम के मयंक चक्रवर्ती अब भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं। वे नॉर्थ ईस्ट से इस मुकाम तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी हैं। ‘होटल स्टॉकहोम नॉर्थ यंग टैलेंट टूर्नामेंट’ में मयंक जब उतरे, तो उनके कंधों पर उम्मीदों का भारी बोझ था, लेकिन उन्होंने गजब का संयम दिखाया। आठवें राउंड में फिलिप लिंडबर्ग को मात देते ही मयंक ने एक राउंड बाकी रहते अपना अंतिम ‘ग्रैंडमास्टर नॉर्म’ पक्का कर लिया। उन्होंने 9 में से 7 अंक हासिल कर न केवल खिताब जीता, बल्कि अपनी लाइव रेटिंग को 2508 तक पहुंचा दिया। यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि मयंक ने दिग्गज अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को एकतरफा मुकाबले में पीछे छोड़ दिया। किसी फिल्म जैसी है मयंक की कहानी मयंक की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। पूर्वोत्तर भारत, जहां युवाओं के हाथों में अक्सर फुटबॉल या मुक्केबाजी के दस्ताने दिखते हैं, वहां मयंक ने शतरंज की बिसात चुनी। गुवाहाटी जैसे शहर में शतरंज का बुनियादी ढांचा बहुत सीमित था। शुरुआती दिनों में मयंक के पास कोई प्रोफेशनल कोच नहीं था। उन्होंने घंटों यूट्यूब वीडियो और ‘चेस-बेस’ की डीवीडी देखकर खेल की पेचीदगियां समझीं। बाद में उन्हें ग्रैंडमास्टर सप्तर्षि राय चौधरी का साथ मिला, जिन्होंने उनके हुनर को धार दी। मयंक के पिता केशब चक्रवर्ती ने बेटे के इंटरनेशनल दौरों के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरी तक छोड़ दी। यह एक पिता का बेटे की प्रतिभा पर अटूट विश्वास ही था, जिसने मयंक को दुनिया के सामने ‘ग्रैंडमास्टर’ बनाकर खड़ा कर दिया। सबसे ज्यादा ग्रैंडमास्टर वाले देश देश – ग्रैंडमास्टर रूस- 255 अमेरिका- 101 जर्मनी- 96 भारत- 94 यूक्रेन- 93 साल 2026 में भारत को मिला तीसरा ग्रैंडमास्टर मयंक इस साल ग्रैंडमास्टर (जीएम) बनने वाले तीसरे भारतीय हैं। उन्होंने 2019 में नेशनल अंडर-11 चैम्पियनशिप जीती थी। दो बार नेशनल अंडर-17 खिताब भी जीते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal, Tamil Nadu, Kerala, Assam & Puducherry Elections 2026

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Hindi News National Assembly Polls Announced: West Bengal, Tamil Nadu, Kerala, Assam & Puducherry Elections 2026 नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल,असम और पुडुचेरी राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान करेगा। बंगाल, असम, तमिलनाडु में 2-2 फेज में और केरल, पुडुचेरी में सिंगल फेज में चुनाव कराए जाने के आसार हैं। पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई में खत्म हो रहा है। 2021 में इन सभी पांच राज्यों के चुनाव का ऐलान 26 फरवरी को किया गया था। पिछली बार बंगाल में 8 चरणों में चुनाव हुए थे। असम में 3 और तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में सिंगल फेज में मतदान हुआ था। पांचों राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति पश्चिम बंगाल: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। इससे पहले जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। असम: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं। तमिलनाडु: एकमात्र ऐसा राज्य है जहां पिछले 60 साल से BJP या कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है। BJP जयललिता की पार्टी AIADMK से गठबंधन कर सकती है। इधर सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK भी मैदान में हैं। केरल: देश का इकलौता राज्य है, जहां अभी भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता। पुडुचेरी: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगासामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

‘कांग्रेस देश के भीतर दहशत पैदा कर रही है’: पश्चिम एशिया युद्ध के बीच पीएम मोदी ने असम में पार्टी की आलोचना की | राजनीति समाचार

Kuldeep Yadav's wedding is expected to be a star-studded affair. (Picture Credit: IG/kuldeep_18)

आखरी अपडेट:मार्च 14, 2026, 15:00 IST पीएम मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भारत के पूर्वोत्तर की उपेक्षा की, स्वतंत्रता और विभाजन के दौरान सीमाओं का निर्धारण करते समय बराक घाटी को समुद्र तक पहुंच की अनुमति दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के सिलचर में विभिन्न विकास कार्यों के शिलान्यास और अनावरण समारोह के दौरान एक सभा को संबोधित किया। (पीटीआई) प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि “युद्ध जैसी स्थिति” उभरी है, उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार इसे प्रभावी ढंग से संभाल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस देश में दहशत पैदा करने की कोशिश करके “गैरजिम्मेदाराना” तरीके से काम कर रही है। पीएम मोदी ने असम के सिलकाहर में एक रैली में कहा, ”युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है और हमारी सरकार इसे संभाल रही है, लेकिन कांग्रेस देश में दहशत पैदा करने की हर कोशिश कर रही है।” प्रधान मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भारत के पूर्वोत्तर की उपेक्षा की, स्वतंत्रता और विभाजन के दौरान सीमाओं का निर्धारण करते समय बराक घाटी को समुद्र तक पहुंच की अनुमति दी। उन्होंने दावा किया, ”उनके पास असम या देश के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि वे केवल मोदी को गाली देना, अफवाहें फैलाना और लोगों को गुमराह करने के लिए झूठ बोलना जानते हैं।” क्षेत्रीय विकास पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और बराक घाटी दोनों लगातार प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने बराक घाटी को भाषा, साहित्य और संस्कृति से समृद्ध क्षेत्र बताया और कहा कि यह विकास के एक नए केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया, “जिस तरह कांग्रेस ने उत्तर-पूर्व को अपने हाल पर छोड़ दिया, उसी तरह उसने बराक घाटी को कमजोर करने में प्रमुख भूमिका निभाई। जब भारत स्वतंत्र हुआ, तो कांग्रेस ने एक सीमा खींचने की अनुमति दी जिससे बराक घाटी की समुद्र तक पहुंच कट गई।” उन्होंने कहा, “बराक घाटी, जिसे कभी औद्योगिक केंद्र के रूप में जाना जाता था, उसकी ताकत छीन ली गई। आजादी के बाद दशकों तक कांग्रेस सरकारें सत्ता में रहीं, फिर भी इस क्षेत्र में बहुत कम विकास हुआ। आज, भाजपा सरकार इसे बदलने के लिए काम कर रही है।” पीएम मोदी ने कांग्रेस पर असम के युवाओं को हिंसा और आतंकवाद के लिए गुमराह करने का आरोप लगाया और दावा किया कि भाजपा ने राज्य को उनके लिए “अवसरों के सागर” में बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा, ”जहां कांग्रेस सोचना बंद कर देती है, हम काम करना शुरू कर देते हैं।” उन्होंने कहा कि भाजपा का ध्यान विकास में पीछे रह गए लोगों को प्राथमिकता देने पर है। प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पहले असम के अपने दो दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में सिलचर में 23,550 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 14, 2026, 15:00 IST समाचार राजनीति ‘कांग्रेस देश के भीतर दहशत पैदा कर रही है’: पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया युद्ध के बीच असम में पार्टी की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नरेंद्र मोदी(टी)प्रधानमंत्री(टी)कांग्रेस(टी)असम(टी)बराक घाटी(टी)क्षेत्रीय विकास(टी)बीजेपी सरकार(टी)विधानसभा चुनाव

जब डीके शिवकुमार ने एआई से पूछा ‘असम चुनाव कैसे जीतें’ | राजनीति समाचार

Nahid Rana bowls a delivery to Pakistan's Saad Masood (Picture credit: AP)

आखरी अपडेट:मार्च 13, 2026, 21:53 IST शिवकुमार ने कहा कि सरकारी प्रशासन में एआई के उपयोग के लिए कोई भी औपचारिक निर्णय लेने से पहले व्यापक शोध और सावधानीपूर्वक विचार की आवश्यकता होती है उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एआई का सुझाव कर्नाटक के वर्तमान कल्याण कार्यक्रमों के संबंध में विश्लेषण किए गए डेटा में निहित था। (फ़ाइल छवि: News18) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को विधान परिषद में एक चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन किया, उन्होंने साझा किया कि एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच ने आगामी असम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के लिए निश्चित रणनीति के रूप में शासन के “कर्नाटक मॉडल” की पहचान की है। राज्य प्रशासन में उभरती प्रौद्योगिकियों के एकीकरण पर केंद्रित एक सत्र के दौरान, शिवकुमार ने पूर्वोत्तर राज्य की हालिया यात्रा के दौरान एआई के साथ अपने व्यक्तिगत प्रयोग के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने असम में जीतने वाली चुनावी रणनीति के लिए टूल को प्रेरित किया, तो सिस्टम ने विशेष रूप से पालन करने के लिए प्राथमिक ब्लूप्रिंट के रूप में कर्नाटक की पांच गारंटी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला। शिवकुमार ने सदन को संबोधित करते हुए कहा, “मैंने इसे आजमाया और बहुत सारी जानकारी मिली। मैंने एआई के साथ प्रयोग किया है, लेकिन इसकी सटीकता में अभी भी सुधार की जरूरत है।” उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने शुरू में उन्हें अनुसंधान और भाषण की तैयारी के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया था, जिससे उन्हें यह पता चला कि उपकरण राजनीतिक डेटा को कैसे संसाधित करता है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि एआई का सुझाव कर्नाटक के वर्तमान कल्याण कार्यक्रमों के संबंध में विश्लेषण किए गए डेटा में निहित था, हालांकि उन्होंने आगाह किया कि प्रौद्योगिकी अभी भी प्रगति पर है और यह सुनिश्चित करने के लिए मानव निरीक्षण की आवश्यकता है कि जानकारी उच्च-स्तरीय निर्णय लेने के लिए पूरी तरह से विश्वसनीय है। इस खुलासे से परिषद के सदस्यों के बीच एक आकर्षक संवाद छिड़ गया, क्योंकि शिवकुमार ने सरकार में इसकी भूमिका पर एक मापा परिप्रेक्ष्य के साथ प्रौद्योगिकी में अपनी रुचि को संतुलित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां राज्य की नीतियों के लिए डिजिटल टूल का समर्थन उल्लेखनीय है, वहीं प्रशासन में एआई का व्यापक अनुप्रयोग एक वैश्विक बातचीत है जिसमें वर्तमान में प्रधान मंत्री और न्यायपालिका शामिल हैं। शिवकुमार ने कहा कि सरकारी प्रशासन में एआई के उपयोग के लिए किसी भी औपचारिक निर्णय लेने से पहले व्यापक शोध और सावधानीपूर्वक विचार की आवश्यकता होती है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मानवीय निर्णय नीति में सबसे आगे रहे। जैसे-जैसे कांग्रेस पार्टी असम में अपने अभियान के लिए तैयार हो रही है, “कर्नाटक मॉडल” उसकी राजनीतिक पहचान के केंद्रीय स्तंभ के रूप में काम कर रहा है, जो अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विश्लेषणात्मक सहसंबंधों द्वारा प्रबलित है। पहले प्रकाशित: मार्च 13, 2026, 21:53 IST समाचार राजनीति जब डीके शिवकुमार ने एआई से पूछा ‘असम चुनाव कैसे जीतें’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक(टी)कांग्रेस(टी)एआई(टी)डीके शिवकुमार(टी)असम

Assam Transfers ₹9000 to 40 Lakh Women

Assam Transfers ₹9000 to 40 Lakh Women

गुवाहाटी10 मिनट पहले कॉपी लिंक असम मुख्यमंत्री ने एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात की। असम में राज्य सरकार की ओरुनोडोई(अरुणोदय) स्कीम के तहत मंगलवार को 40 लाख महिलाओं के खाते में 9 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। इस स्कीन को 2020 में शुरू किया गया था। इसके तहत हर परिवार की एक योग्य महिला को हर महीने 1,250 रुपये मिलते हैं। असम सीएम ने इससे पहले घोषणा की थी कि इस साल जनवरी से चार महीने का पेमेंट, बोहाग बिहू के जश्न के लिए एक्स्ट्रा रकम के साथ मार्च में एक साथ दिया जाएगा। , जिससे कुल रकम 9,000 रुपये हो जाएगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में कहा कि यह कोई चुनावी फ्रीबी नहीं है, बल्कि महिला लाभार्थियों के प्रति सरकार के दयालु रवैये को दिखाता है। हिमंता बोले- ये चुनावी फ्रीबी नहीं है असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सराम ने अपने पोस्ट में कहा कि 40 लाख महिलाओं के बैंक अकाउंट में सीधे 3,600 करोड़ रुपए भेजे गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह कोई चुनावी फ्रीबी नहीं है। सरमा ने कहा कि हर महीने 10 तारीख को, लगभग 40 लाख महिलाओं के नेतृत्व वाले परिवारों को अपने बेसिक खर्चों के लिए 1,250 रुपये मिलते हैं। सीएम ने और क्या कहा… ओरुनोदोई योजना के अच्छे नतीजे जमीन पर दिखाई दे रहे हैं। इस योजना से लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली है। इस योजना का चुनाव से कोई संबंध नहीं है। यह योजना सीमित और नियंत्रित है, इसलिए सभी लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता। अगर यह चुनावी योजना होती, तो इसका लाभ सभी लोगों को दिया जाता। यह योजना महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान को मजबूत करने के लिए है। क्या है अरनोडोई स्कीम? असम सरकार ने 2 अक्टूबर 2020 को अरनोडोई योजना शुरू की थी। यह राज्य की एक प्रमुख गरीबी उन्मूलन योजना है। इसके तहत गरीब परिवारों की महिला मुखिया के बैंक खाते में हर महीने 1,250 रुपए सीधे ट्रांसफर किए जाते हैं। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना, विशेषकर दवाएं, दालें और चीनी जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है। इसमें मुख्य रूप से जरूरतमंद महिलाएं, विधवाएं, तलाकशुदा, विकलांग, या अविवाहित महिलाएं (45 वर्ष से अधिक) को फायदा मिलता है। असम सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत ओरुनोडोई लाभार्थियों को एलपीजी सिलेंडर पर अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। ———– ये खबर भी पढ़ें… असम में क्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता:स्कीम से मुस्लिम भी खुश, बोलीं- हिमंता भले हमें पसंद न करें, हम वोट देंगे असम के कामरूप जिले में एक महिला साइकिल पर बेटी को लेकर जा रही थी। हमने पूछा- सरकारी योजनाओं के पैसे मिले क्या? जवाब मिला- ‘हां, मिले हैं।’ हमने पूछा, अबकी बार किसकी सरकार? वे मुस्कुराकर बोलीं- ‘BJP की…BJP जिंदाबाद, हिमंता जिंदाबाद’। असम में करीब दो महीने बाद चुनाव होने हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। यहां सड़कें चुनावी होर्डिंग और बैनरों से पटी मिलीं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सेन इस बार आस्था और अंधविश्वास के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। ‘चरक’ केवल एक ऐतिहासिक उत्सव की कहानी नहीं है, बल्कि परंपरा, तर्क, समाज और अंधविश्वास के बीच के जटिल संबंधों को दिखाने की कोशिश है। फिल्म की रिसर्च प्रक्रिया, विवाद, सेंसर बोर्ड के मुद्दे, आलोचनाओं और उनके खिलाफ उठ रही आवाजों के बारे में सुदीप्तो ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुदीप्तो ने बताया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से सवाल पूछने और जागरूकता फैलाने का एक जरिया है। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद आप फिर एक सामाजिक मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं। ‘चरक फेयर ऑफ फेथ’ के बारे में बताइए। कितनी रिसर्च की गई है? ‘चरक’ कोई नई परंपरा नहीं है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह उत्सव लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। चैत्र महीने (करीब 15 मार्च से 15 मई) के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है। पश्चिम बंगाल में जैसे दुर्गा पूजा की लोकप्रियता है, उसी तरह ‘चरक’ भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसे मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। लोकविश्वास है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के बीच निवास करते हैं। बचपन में हम जेब खर्च बचाकर इस मेले का इंतजार करते थे। हजारों लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इससे जुड़े हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं। इतिहास में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथाएं रही हैं, जिन्हें अब कानूनन प्रतिबंधित किया जा चुका है। हमारी फिल्म इसी ‘फेथ’ यानी आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। आपकी फिल्में अक्सर विवादों में घिर जाती हैं। क्या आपको लगता है लोग सच से डरते हैं? हमारे समाज में विज्ञान, तर्क और शिक्षा को हम सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। जहां हमें फायदा दिखता है, वहां लॉजिक अपनाते हैं, और जहां परंपरा टकराती है, वहां चुप हो जाते हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं। कई घरों में लड़कियों को रात में खुले बाल लेकर बाहर न जाने या कुछ विशेष रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है। इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन वे पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब अंधविश्वास हिंसा में बदल जाता है। जैसे किसी दंपती को संतान न हो तो किसी मासूम की बलि देने की सोच, यह भयावह है। हाथरस की एक घटना ने मुझे झकझोर दिया, जहां कथित तौर पर स्कूल का रिजल्ट सुधारने के नाम पर एक बच्चे की बलि देने की बात सामने आई। जब तक समाज इन घटनाओं पर सवाल नहीं उठाएगा, तब तक बदलाव कैसे आएगा? ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज डेट टल गई है। आप इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है। आप किसी फिल्म से असहमत हो सकते हैं, आलोचना कर सकते हैं, बहस कर सकते हैं। लेकिन कला को रोक देना समाधान नहीं है। मेरे लिए आर्ट का काम है जो सच दबाया जा रहा है, उसे सामने लाना। सरकारें आएंगी-जाएंगी, राजनीतिक दल बदलेंगे, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ियां यहीं रहेंगी। इसलिए कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह ईमानदारी से अपनी बात कहे। ‘द केरल स्टोरी 2’ में आप निर्देशक के तौर पर नजर नहीं आएंगे। इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या प्रोडक्शन टीम के साथ किसी प्रकार का मतभेद हुआ था? ऐसी कोई अनबन नहीं है। शुरुआत में मुझे ही निर्देशन करना था, लेकिन कहानी का दायरा केरल से आगे बढ़ाया गया। मेरा रिसर्च मुख्यतः केरल पर आधारित था और मैंने उस पर लगभग दस साल काम किया। मैं अखबार की खबरों या सोशल मीडिया फॉरवर्ड के आधार पर फिल्म नहीं बना सकता। जिस विषय को छूता हूं, उस पर गहन अध्ययन करता हूं। इसलिए मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ के बाद आपको धमकियां भी मिलीं। क्या कभी डर लगा? सच कहूं तो हां, शुरुआत में डर लगा। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद और खासकर ‘बस्तर’ के दौरान मेरे नाम पर बाकायदा “रेट कार्ड” चल रहा था किसी ने कहा आंख निकालने का इतना, हाथ काटने का इतना। ये सब सोशल मीडिया पर फैलाया गया। एक-दो दिन के लिए मन में डर आया, लेकिन फिर लगा कि अगर मैं डर गया तो फिल्म बनाना ही छोड़ दूं। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कोई फिल्म सिर्फ प्रोपेगेंडा के दम पर इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अगर दर्शक जुड़ते हैं तो उसकी वजह कहानी होती है, इरादा होता है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के पार्ट 2 को लेकर कई फिल्मकारों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग कश्यप ने इसे ‘बकवास’ कहा, वहीं प्रकाश राज ने भी फिल्म को बेकार बताया। आप इन आलोचनाओं को कैसे देखते हैं? देखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर अनुराग कश्यप या प्रकाश राज को मेरी फिल्म पसंद नहीं आई, तो उन्हें यह कहने की पूरी स्वतंत्रता है। मैं उनके अधिकार का सम्मान करता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी फिल्म को ट्रेलर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। पूरी फिल्म देखने के बाद असहमति हो तो खुलकर आलोचना कीजिए, बहस कीजिए। हमारा संविधान हमें सवाल करने और तर्क करने का अधिकार देता है। आप सोशल मीडिया पर लिखिए, लेख लिखिए, चर्चा कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी फिल्म को रुकवाने या बैन करने की मांग करना सही परंपरा नहीं है। अगर आपको फिल्म खराब लगती है तो दर्शकों से कहिए कि मत देखिए। लेकिन कला को रोकना समाधान नहीं है। कला नदी की तरह है उसे

Assam Girl Gang Rape Case Tragedy; Boyfriend

Assam Girl Gang Rape Case Tragedy; Boyfriend

गुवाहाटी4 घंटे पहले कॉपी लिंक AI Generated असम के कछार जिले के सिलचर शहर के पास एक 28 साल की महिला का उसके बॉयफ्रेंड के सामने 7 लोगों ने गैंगरेप किया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले में शिकायत 19 फरवरी को दर्ज कराई गई थी। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि रेप के बाद एक आरोपी ने महिला से 10 हजार रुपए उसके खाते में ट्रांसफर कराए। पीड़ित के घरवालों ने कहा कि वह सिलचर शहर से कुछ किलोमीटर दूर बाईपास रोड पर अपने बॉयफ्रेंड के साथ कार में थी, तभी एक SUV में कुछ लोग आए और उन पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा- आरोपियों ने पहले कपल से उनके ठिकाने के बारे में पूछा और फिर अचानक महिला और उसके दोस्त को पकड़ लिया। वहां करीब 7 आदमी थे, और उन्होंने उसके दोस्त के सामने एक-एक करके उसका रेप किया। न्यजू एजेंसी PTI के मुताबिक पुलिस शुरू में इस मामले पर चुप थी, लेकिन मंगलवार को सिलचर के एक पत्रकार पर एक आरोपी के परिवार वालों ने हमला कर दिया। इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दो की पहचान हुई, 5 अभी भी फरार पुलिस ने बताया कि पीड़ित ने दो लोगों की पहचान की, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में बाकी लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने बताया कि सिलचर सदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 (5) (जान से मारने की धमकी देकर वसूली), 310 (2) (डकैती), 351(2) (आपराधिक धमकी), 61(2) (दो या उससे ज़्यादा लोगों का गैर-कानूनी काम, 70(1) (गैंग रेप) एवं अन्य संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आरोपी के परिवार ने पत्रकार को रोका, मारपीट की पत्रकार ने दावा किया कि आरोपी के घरवालों ने उसे नेशनल हाईवे रोड पुलिस स्टेशन के पास रोका। उससे पूछा कि उसने घटना की रिपोर्ट क्यों की और फिर उसे पीटा। पत्रकार के मुताबिक वहां मौजूद लोगों ने उसे बचा लिया। उसने इस बारे में शिकायत भी दर्ज कराई और पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने लोगों से सोशल मीडिया पर गलत जानकारी न फैलाने की अपील की और जानकारी शेयर की। राज्यसभा MP सुष्मिता देव ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की राज्यसभा MP सुष्मिता देव ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की और पुलिस से मामले पर अपडेट मांगा। गैंगरेप के पिछले बड़े मामले… 24 फरवरी: उत्तराखंड में देवर के सामने भाभी से गैंगरेप ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में सरस मेला देखकर लौट रही एक महिला के साथ उसके देवर के ही दोस्तों ने तमंचे और चाकू के बल पर सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों ने देवर को जान से मारने की धमकी देकर बंधक बना लिया और उसके सामने ही इस घिनौने कृत्य को अंजाम दिया। यह घटना 22 फरवरी की देर रात हुई, जब बाइक सवार तीन युवकों ने महिला को कथित तौर पर हथियार के बल पर अगवा कर लिया। विरोध करने पर महिला के हाथ पर चाकू से वार कर उसे घायल भी कर दिया। पूरी खबर पढ़ें… 18 फरवरी: छत्तीसगढ़ में 17 साल की नाबालिग से गैंगरेप, गला घोंटकर जंगल में फेंका छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नाटक कार्यक्रम देखकर घर लौट रही 17 साल की नाबालिग से 2 युवकों ने गैंगरेप किया है। उसके बाद गला घोंटकर उसे अधमरी हालत में जंगल में फेंक दिया। देर रात राहगीरों ने उसे जंगल किनारे बेहोश पड़ा देखा, तो अस्पताल में भर्ती करवाया। बेहतर इलाज के लिए पीड़िता को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। मामला बागबहार थाना इलाके का है। पूरी खबर पढ़ें… 11 अक्टूबर: पश्चिम बंगाल में मेडिकल स्टूडेंट से गैंगरेप, 3 लोगों ने रास्ता रोका, दरिंदगी की पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर में एक मेडिकल स्टूडेंट के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है। वारदात 10 अक्टूबर की है। पीड़ित अपने एक पुरुष दोस्त के साथ डिनर पर गई थी। वापस लौटते समय 3 लोगों ने उनका रास्ता रोका। छात्रा का दोस्त उसे छोड़कर भाग गया, जिसके बाद आरोपियों ने उससे दरिंदगी की। पूरी खबर पढ़ें… ———— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- नाड़ा खींचना, ब्रेस्ट पकड़ना रेप की कोशिश, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे रेप की तैयारी बताया था सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा खींचना और ब्रेस्ट पकड़ना रेप की कोशिश माना जाएगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें इसे रेप की कोशिश की जगह रेप की तैयारी बताया गया था। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने आपराधिक कानून के स्थापित सिद्धांतों का गलत इस्तेमाल किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…