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Last Updated:May 22, 2026, 19:51 IST Asli Shahad Ki Pehchan: क्या आप जानते हैं कि शहद का रंग ही उसकी शुद्धता, स्वाद और औषधीय गुणों का असली सर्टिफिकेट है? फूलों के आधार पर बदलने वाला शहद का रंग न सिर्फ असली-नकली का फर्क साफ करता है. बल्कि सेहत के कई राज भी खोलता है. जानिए क्यों हल्का शहद स्वाद में ज्यादा मीठा और गहरा शहद पोषक तत्वों व मिनरल्स के मामले में सबसे पावरफुल माना जाता है. ख़बरें फटाफट समस्तीपुर: शहद को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. लोग इसे स्वाद, ऊर्जा और औषधीय गुणों के कारण नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शहद का रंग ही उसकी पहचान और गुणवत्ता का बड़ा संकेत होता है. दरअसल मधुमक्खियां जिस फूल के रस यानी नेक्टर को इकट्ठा करती हैं, उसी के अनुसार शहद का रंग, स्वाद और उसकी खासियत तय होती है. यही कारण है कि बाजार में मिलने वाला हर शहद एक जैसा नहीं दिखता. कोई हल्का सफेद या गोल्डन होता है तो कोई गहरा भूरा और एम्बर रंग का नजर आता है. जानकारी के अभाव में लोग इसे सामान्य अंतर समझते हैं, जबकि इसके पीछे फूलों और पौधों की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया जुड़ी होती है. ऐसे में यह खबर उन लोगों के लिए खास है जो लंबे समय से शहद का उपयोग कर रहे हैं लेकिन उसके रंग के पीछे छिपे संकेतों को अब तक नहीं समझ पाए हैं. कौन सा फूल तैयार करता है कैसा शहदडॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ.राजेंद्र कुमार ने बताया कि मधुमक्खियां अलग-अलग फूलों के रस से विभिन्न प्रकार का शहद तैयार करती हैं. उन्होंने कहा कि अगर लोग रंग के आधार पर शहद को पहचानना सीख जाएं तो वे आसानी से समझ सकते हैं कि यह किस फूल से तैयार हुआ है. वैज्ञानिक के अनुसार लीची और सरसों के फूलों से बनने वाला शहद हल्का सफेद, क्रीम या चमकीला पीला रंग का होता है. सहजन के फूलों से तैयार शहद हल्का गोल्डन या एम्बर दिखाई देता है. वहीं सूरजमुखी का शहद सुनहरे पीले रंग का होता है. नीम और यूकेलिप्टस के फूलों से तैयार शहद हल्का से गहरा भूरा रंग लिए रहता है. वैज्ञानिक ने उदाहरण देते हुए बताया कि जामुन का फल और फूल गहरे रंग के होते हैं, इसलिए उससे बनने वाला शहद भी डार्क ब्राउन या हल्का पर्पल टोन लिए नजर आ सकता है. बहुफूल यानी मल्टीफ्लोरा शहद का रंग हल्के पीले से लेकर गहरे एम्बर तक हो सकता है, क्योंकि इसमें कई फूलों का मिश्रण होता है. रंग से समझें शहद की गुणवत्ता, स्वाद और औषधीय महत्वविशेषज्ञों के मुताबिक शहद का रंग केवल उसकी खूबसूरती नहीं बताता, बल्कि उसके स्वाद, घनत्व और औषधीय गुणों की भी जानकारी देता है. हल्के रंग का शहद स्वाद में मीठा और हल्का माना जाता है. जबकि गहरे रंग का शहद अधिक मजबूत स्वाद और अधिक मिनरल्स वाला माना जाता है. यही कारण है कि कई लोग खास बीमारी या स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष प्रकार का शहद चुनते हैं. उदाहरण के तौर पर लीची और सरसों का शहद ऊर्जा और स्वाद के लिए पसंद किया जाता है. जबकि नीम और जंगल से मिलने वाला गहरा शहद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर लोग शहद के रंग और उसके स्रोत को समझ लें तो नकली और असली शहद की पहचान करना भी आसान हो जाएगा. यही वजह है कि आजकल लोग सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि शहद के रंग और उसके फूलों की जानकारी को भी महत्व देने लगे हैं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Samastipur,Bihar
Holi Color Removal Tips: Skin-Friendly Ubtan

4 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक इस साल होली 4 मार्च, 2026 को मनाई जाएगी। लोग रंग-गुलाल, मिठाई और संगीत के साथ इस पर्व का आनंद लेते हैं। रंग लगाने में तो बहुत मजा आता है, लेकिन जब रंगों को छुड़ाने की बारी आती है तो हालत खराब हो जाती है। होली पर लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि जिद्दी रंग को छुड़ाएं कैसे। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम होली के रंग छुड़ाने के टिप्स बताएंगे। साथ ही जानेंगे कि- होली पर रंग खेलने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए? रंग छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. संदीप अरोड़ा, सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- होली खेलने से पहले क्या तैयारी करें, जिससे स्किन पर रंग ज्यादा गहरा न चढ़े? जवाब- होली पर रंग खेलने से पहले पूरे शरीर और बालों पर नारियल/सरसों का तेल या अच्छा मॉइश्चराइजर लगाएं। इससे स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बन जाती है और रंग नहीं चिपकते हैं। साथ ही कुछ और बातों का ख्याल रखना जरूरी है। नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- चेहरे पर लगे रंगों को कैसे छुड़ाएं? जवाब- चेहरे की स्किन बहुत नाजुक होती है, इसलिए रंग छुड़ाते समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। जैसेकि- सबसे पहले सूखे रंगों को कपड़े या हाथों से झाड़ लें। इसके बाद चेहरे को नॉर्मल पानी से धोएं। आंखों के आसपास खास सावधानी रखें। फिर किसी माइल्ड फेसवॉश या क्लींजर का इस्तेमाल करें। अगर रंग फिर भी न छूटे तो बेसन और दही का पेस्ट बनाकर लगा सकते हैं। इसके अलावा हल्दी और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट लगा सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी में नींबू की कुछ बूंदें डालकर इसे चेहरे पर लगा सकते हैं। एलोवेरा जेल या कोई अच्छा मॉइश्वराइजर जरूर लगाएं, ताकि ड्राईनेस की समस्या न हो। ध्यान रहे, रंग छुड़ाने और चेहरा साफ करने के लिए गर्म पानी यूज न करें। इससे रंग और पक्का हो सकता है। सवाल- स्किन पर लगे रंग को छुड़ाते समय किस तरह की गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- चेहरे का रंग छुड़ाते समय स्किन को जोर से न रगड़ें। इससे जलन और रैशेज हो सकते हैं। हार्श साबुन, डिटर्जेंट या केमिकल वाले प्रोडक्ट बिल्कुल न लगाएं। अगर स्किन पर रेडनेस, खुजली या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। साथ ही कुछ बातों का खास ख्याल रखें, नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- होली के रंगों से बालों को कैसे बचाएं? जवाब- रंग खेलने से पहले बालों में अच्छी तरह नारियल या सरसों का तेल लगा लें। इससे बालों पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बनती है। रंग खेलते वक्त बालों को खुला न छोड़ें, उन्हें बांध लें या स्कार्फ/कैप से ढक लें। ड्राई और केमिकल ट्रीटमेंट वाले बालों पर खास ध्यान दें। रंग खेलने के बाद बालों को हल्के शैंपू से साफ करें और कंडीशनर जरूर लगाएं। सवाल- अगर बालों में रंग गहराई तक पहुंच गया हो तो उसे कैसे हटाएं? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- रंग सूखा हो तो पहले इसे चौड़ी कंघी से धीरे-धीरे निकालें, तुरंत पानी न डालें। अगर रंग गीला है तो सादे पानी से अच्छी तरह धोकर जितना रंग निकल सके, निकालें। फिर माइल्ड शैंपू से हल्के हाथों से साफ करें। बालों को जोर से न रगड़ें। जरूरत पड़े तो एक मग पानी में 1-2 चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाकर रिंस करें। कुछ मिनट बाद साफ पानी से धो लें। अंत में हेयर कंडीशनर लगाएं और कुछ देर बाद बालों काे अच्छी तरह धुलें। सवाल- होली के रंग छुड़ाने के लिए कौन से घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं? जवाब- होली के रंग छुड़ाने के लिए कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाए जा सकते हैं। जैसेकि- बेसन और दूध का उबटन लगाकर 10-15 मिनट बाद धो लें। पका पपीता और हल्दी मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। फिर साफ पानी से धो लें। मुल्तानी मिट्टी और दही का लेप भी रंग छुड़ाने में मदद करता है। खीरे का पेस्ट स्किन को ठंडक देता है और रंग छुड़ाने में मदद करता है। नींबू की कुछ बूंदें बेसन में मिलाकर लगा सकते हैं। किसी भी उपाय के बाद मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, ताकि ड्राईनेस न हो। नीचे दिए ग्राफिक में घर पर बनाए जाने वाले उबटनों की लिस्ट देखिए। सवाल- क्या लंबे समय तक रंग लगा रहना नुकसानदायक हो सकता है? जवाब- हां, केमिकल युक्त रंग स्किन पर ज्यादा देर तक लगे रहने से जलन, खुजली, रेडनेस या एलर्जी हो सकती है। कुछ मामलों में दाग-धब्बे भी पड़ सकते हैं। सेंसिटिव स्किन या स्किन डिजीज से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा रहता है। इसलिए रंग को ज्यादा देर तक स्किन पर लगा न रहने दें। सवाल- नाखूनों से रंग कैसे निकालें? जवाब- सबसे पहले नाखूनों को गुनगुने पानी में कुछ मिनट भिगोएं। फिर नींबू का रस या थोड़ा विनेगर 4-5 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या सूती कपड़े से हल्के हाथों से साफ करें। जरूरत हो तो नेल पॉलिश रिमूवर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अंत में नाखूनों पर क्रीम या तेल लगा लें, ताकि वे ड्राई और कमजोर न हों। इस तरह थोड़ी तैयारी और सही देखभाल से आप होली का आनंद बिना किसी परेशानी के उठा सकते हैं। ……………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- होली पर मिलावटी मावे से सावधान: हो सकते हैं ये हेल्थ रिस्क, इन 4 तरीकों से घर पर करें शुद्धता की जांच होली का त्योहार नजदीक है। इसके चलते बाजारों में मिठाइयों की डिमांड बढ़ गई है। इसी मौके का फायदा उठाकर कुछ मिलावटखोर बाजार में मिलावटी खोया (मावा) सप्लाई कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Menstrual Blood Color; Periods Black Blood Reason And Warning Signs

Hindi News Lifestyle Menstrual Blood Color; Periods Black Blood Reason And Warning Signs | Hormone 1 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक आमतौर पर पीरियड ब्लड लाल या गहरे लाल रंग का होता है। लेकिन कई बार यह काले या भूरे रंग का भी दिख सकता है। पीरियड ब्लड का कलर सामान्य से अलग दिखने पर मन में सवाल उठना लाजिमी है। क्या पीरियड ब्लड का ब्लैक होना सामान्य है या यह किसी हेल्थ कंडीशन का संकेत है? असल में ‘पीरियड ब्लड’ का रंग शरीर के अंदर की कुछ प्रक्रियाओं, हॉर्मोन्स और फ्लो पर निर्भर करता है। यह कई बार सामान्य होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में किसी गंभीर हेल्थ कंडीशन का संकेत भी हो सकता है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज पीरियड ब्लड की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- पीरियड ब्लड काला होने का क्या मतलब है? किस स्थिति में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है? सवाल- अमूमन पीरियड ब्लड रेड या डार्क रेड होता है। लेकिन अगर इसका कलर ब्लैक दिखे तो इसका क्या मतलब है? जवाब- पीरियड ब्लड का ब्लैक कलर आमतौर पर ‘ऑक्सीडाइज्ड ब्लड’ का संकेत होता है। यानी ब्लड गर्भाशय या वजाइना में ज्यादा समय तक रुकने और हवा के संपर्क में आने से काला हो गया है। रंग में ऐसा बदलाव आमतौर पर पीरियड्स के शुरुआती और अंतिम दिनों में अधिक दिखता है। अगर इसका रंग लगातार काला बना रहे या अन्य लक्षण भी दिखें तो डॉक्टर सेे कंसल्ट करना जरूरी है। सवाल- पीरियड ब्लड का कलर काला कब दिखता है? जवाब- आमतौर पर पीरियड ब्लड लाल होता है, कुछ कंडीशंस में यह काला हो सकता है- अगर पीरियड्समें ब्लड फ्लो धीमा हो। अगर कम फ्लो के कारण ब्लड यूटेरस में ज्यादा समय तक रुका रहे। अगर शरीर में हॉर्मोनल इंबैलेंस हो। अगर मेंस्ट्रुअल साइकिल में देरी हो। सवाल- क्या पीरियड ब्लड का कलर ब्लैक होना नॉर्मल है या किसी खतरे का संकेत? जवाब- एक-दो दिन ब्लैक ब्लड दिखना सामान्य है। लेकिन अगर मेंस्ट्रुअल साइकिल में नीचे दिए संकेत भी दिख रहे हैं तो डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है- अगर लगातार ब्लैक ब्लीडिंग हो रही है। अगर पीरियड ब्लड से अजीब स्मेल आ रही है। अगर पीरियड्स के दौरान असामान्य दर्द हो रहा है। अगर असामान्य डिस्चार्ज हो रहा है। ये सभी लक्षण इन्फेक्शन, ब्लॉकेज या एंडोमेट्रियल समस्याओं (यूटेरस की अंदरूनी लेयर में बदलाव) का संकेत हो सकते है। इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सवाल- किन कारणों से पीरियड ब्लड काला हो सकता है? जवाब- कुछ मामलों में यह सामान्य होता है, लेकिन कभी-कभी कुछ हेल्थ कंडीशन के कारण भी पीरियड ब्लड ब्लैक हो सकता है। सभी कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- ब्लड में काले रंग के साथ क्लॉट्स हों तो इसका क्या मतलब है? जवाब- ब्लैक कलर के साथ क्लॉट्स का मतलब है कि ब्लड लंबे समय तक यूटेरस में रुका रहा और बाद में क्लॉट के रूप में बाहर आया। यह इन कंडीशंस में सामान्य हो सकता है- हैवी फ्लो होने पर। अनियमित पीरियड में। अगर क्लॉट्स की समस्या लगातार बनी हुई है तो यह कुछ हेल्थ कंडीशन का संकेत हो सकती है। जैसेकि- फाइब्रॉइड्स (यूटेरस में नॉन कैंसरस गांठें)। हॉर्मोनल डिसऑर्डर। एंडोमेट्रियल असामान्यता। अगर क्लॉट्स के साथ दर्द, कमजोरी या हैवी ब्लीडिंग हो तो गायनेकोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना जरूरी है। सवाल- ब्लैक पीरियड ब्लड किन इन्फेक्शन या बीमारियों का संकेत हो सकता है? जवाब- लगातार ब्लैक ब्लड इन बीमारियों का संकेत हो सकता है- पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (PID) सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज ( जैसे क्लैमाइडिया और गोनोरिया) वजाइनल इन्फेक्शन अगर काले रंग के साथ बैड स्मेल, पेल्विक पेन (पेट के निचले हिस्से में दर्द) और अनयूजुअल डिस्चार्ज भी दिखे तो यह एंडोमेट्राइटिस (यूटेरस की अंदरूनी लेयर में इंफ्लेमेशन या संक्रमण) का संकेत हो सकता है। सवाल- क्या PCOS या हॉर्मोनल इंबैलेंस के कारण पीरियड ब्लड काला हो सकता है? जवाब- हां, PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) और हॉर्मोनल इंबैलेंस होने पर ओव्यूलेशन अनियमित हो जाता है, जिससे मेंस्ट्रुअल साइकल लंबा हो सकता है। ऐसे मामलों में फ्लो और साइकिल इर्रेगुलर हो सकते हैं। साथ ही हैवी क्लॉटिंग भी हो सकती है। इसलिए PCOS या हॉर्मोनल इंबैलेंस होने पर पीरयड ब्लड ब्लैक हो जाता है। सवाल- क्या मिसकैरेज या अधूरे मिसकैरेज के कारण भी पीरियड ब्लड काला हो सकता है? जवाब- हां, शुरुआती या अधूरे मिसकैरेज में यूटेरस से क्लॉट के साथ रुका हुआ ब्लड भी निकलता है। इससे ब्लड काला दिख सकता है। इसमें अक्सर सीवियर क्रैम्प्स, हैवी ब्लीडिंग, टिश्यू जैसे क्लॉट्स और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखते हैं। अगर कोई महिला प्रेग्नेंट है और ऐसा कोई भी लक्षण दिखे तो यह एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल संकेत है, जिसमें गायनेकोलॉजिस्ट से कंसल्ट करना जरूरी है। सवाल- पीरियड ब्लड के अलग-अलग रंग हमारे शरीर की सेहत के बारे में क्या बताते हैं? जवाब- महिलाओं में ब्राइट रेड पीरियड ब्लड हेल्दी फ्लो का संकेत है। डार्क रेड या ब्राउन कलर इस बात का इशारा है कि यूटेरस में ब्लड रुका हुआ था। पीरियड ब्लड के अलग-अलग कलर हॉर्मोनल हेल्थ, इन्फेक्शन से लेकर यूटेरस की कंडीशन तक कई महत्वपूर्ण क्लिनिकल संकेत देते हैं। कौन सा रंग क्या बताता है, समझिए- ब्राइट रेड: इसका मतलब है कि आपकी ‘प्रोडक्टिव एंडोमेट्रियम शेडिंग’ (गर्भाशय की सफाई) सही तरीके से हो रही है। लेकिन अगर हैवी फ्लो हो और साथ में चक्कर या कमजोरी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें। डार्क रेड: इसका मतलब है कि सब ठीक है, लेकिन ब्लड कुछ देर यूटेरस में रुका हुआ था। अक्सर पीरियड की शुरुआत में या आखिरी दिनों में ऐसा रंग दिखता है। ब्राउन: इसका मतलब है कि ब्लड ऑक्सीजन के संपर्क में आने से ‘ऑक्सीडाइज’ हो गया है। जब पीरियड का फ्लो धीमा होता है या साइकिल में देरी होती है, तब ऐसा रंग दिखता है। यह सामान्य है, लेकिन अगर इसके साथ बैड स्मेल, हैवी क्लॉटिंग या पेट में असामान्य दर्द हो, तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है। ब्लैक: काला रंग देखकर घबराएं नहीं, ब्लड लंबे समय तक यूटेरस में रुकने के कारण ऐसा होता है। पीरियड के शुरू या अंत में यह सामान्य है। लेकिन, अगर लगातार काला रंग दिखे और साथ में हैवी क्रैंप्स हो, बैड स्मेल









