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Raghav Chadha BJP Joining Controversy; AAP Sanjay Singh

Raghav Chadha BJP Joining Controversy; AAP Sanjay Singh

Hindi News National Raghav Chadha BJP Joining Controversy; AAP Sanjay Singh | Sandeep Pathak Swati Maliwal नई दिल्ली43 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को शुक्रवार शाम को भाजपा कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। आम आदमी पार्टी (AAP) अपने सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की घोषणा के बाद उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए राज्यसभा चेयरमैन को लेटर लिखेगी। AAP का आरोप है कि इन सांसदों का कदम असंवैधानिक है और उन्हें अयोग्य घोषित करना चाहिए। सांसद संजय सिंह ने कहा कि दलबदल विरोधी कानून के तहत राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार के विभाजन या गुटबाजी को मान्यता नहीं दी जाती, चाहे वह दो-तिहाई बहुमत के साथ ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची भी ऐसे किसी अलग गुट को वैध नहीं मानती। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से राघव चड्‌ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने शुक्रवार को BJP जॉइन कर ली थी। राघव चड्‌ढा ने कहा था कि हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल, राजेंदर गुप्ता भी हमारे साथ हैं। BJP में शामिल होने की घोषणा के 24 घंटे के भीतर राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स करीब 13 लाख घटकर 14.6 मिलियन से 13.3 मिलियन रह गए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये युवा यूजर्स की प्रतिक्रिया हो सकती है। स्वाति मालीवाल बोलीं- केजरीवाल महिला विरोधी हैं स्वाति मालीवाल ने AAP और अरविंद केजरीवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 2006 से केजरीवाल के साथ काम किया, हर आंदोलन में साथ दिया, लेकिन बाद में उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर में उनके साथ मारपीट कराई गई और FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। मालीवाल ने कहा कि उन्हें दो साल तक संसद में बोलने का मौका नहीं दिया गया जो बेहद शर्मनाक है। उन्होंने केजरीवाल को महिला विरोधी, भ्रष्ट और गुंडागर्दी करने वाला नेता बताया। साथ ही पंजाब सरकार पर भी आरोप लगाया कि वहां अवैध खनन और ड्रग्स का कारोबार चरम पर है और सरकार रिमोट कंट्रोल से चलाई जा रही है। मालीवाल ने यह भी कहा कि उन्होंने BJP किसी दबाव में नहीं, बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वास के चलते भाजपा जॉइन की है। विपक्ष के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया सौरभ भारद्वाज- BJP ऐसी पार्टियों से डरती है जो सत्ता से सवाल पूछती हैं। AAP सिर्फ सांसदों की पार्टी नहीं, बल्कि आम कार्यकर्ताओं की पार्टी है, जो बिना किसी पद के भी संघर्ष करते हैं। बड़े नेताओं को ED और CBI जैसी एजेंसियों के डर से तोड़ा जा सकता है, लेकिन AAP के जमीनी कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं और वे लगातार सवाल उठाते रहेंगे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश- BJP की वॉशिंग मशीन फिर चालू हो गई है। जो नेता पहले खुद को ईमानदार और सिद्धांतवादी बताते थे, अब उनका असली चेहरा सामने आ गया है। संजय राउत- भाजपा बकासुर जैसी हो गई है, जिसकी भूख कभी खत्म नहीं होती। BJP किसी भी नेता को अपने साथ शामिल कर लेती है और दलबदल करने वाले नेताओं को गलत जगह पर जाने वाला बताया। अन्ना हजारे- व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पार्टी बदलना सही नहीं है। जनप्रतिनिधियों को संविधान की भावना के अनुसार काम करना चाहिए और ऐसे फैसले लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Sreesanth Harbhajan Singh IPL Slap Video Controversy; Instagram

Sreesanth Harbhajan Singh IPL Slap Video Controversy; Instagram

Hindi News Sports Sreesanth Harbhajan Singh IPL Slap Video Controversy; Instagram | Cricket News 7 मिनट पहले कॉपी लिंक यह क्लिप करीब 8 महीने पहले पूर्व IPL कमिश्नर ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी किया था। भारतीय क्रिकेट टीम के दो पूर्व दिग्गज, एस श्रीसंत और हरभजन सिंह के बीच 2008 का ‘थप्पड़ कांड’ फिर चर्चा में है। 16 साल पुराने इस विवाद ने दोनों के रिश्ते खत्म कर दिए हैं। श्रीसंत ने खुलासा किया कि उन्होंने हरभजन सिंह को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया है और अब कोई संबंध नहीं रखना चाहते। केरल के मीडिया हाउस ‘मातृभूमि’ को दिए इंटरव्यू में श्रीसंत ने कहा, ‘मैंने आज तक किसी इंटरव्यू में भज्जी (हरभजन) के बारे में बात नहीं की, यह पहली बार है। कुछ समय पहले तक सब ठीक था, लेकिन उन्होंने उस विवाद पर फिर से एक विज्ञापन बनाया। उन्होंने इसके लिए करीब 80 लाख से 1 करोड़ रुपए लिए। इसके बाद उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि मैं अपने सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन को लेकर स्टोरी पोस्ट करूं।’ जनवरी में पर गणतंत्र दिवस सेल पर जारी किया गया था यह विज्ञापन जनवरी 2026 में एक मार्केटिंग ऐप की गणतंत्र दिवस सेल के लिए जारी किया गया था। इसमें हरभजन सिंह को ‘चांटा क्लास’ के टीचर के रूप में दिखाया गया है, जो लोगों को यह समझाते हैं कि खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को थप्पड़ मारकर ठीक करने की पुरानी आदत छोड़ें और उसकी जगह एप से नए प्रोडक्ट खरीदें। विज्ञापन में मजाकिया अंदाज में हरभजन कहते हैं, ‘सही से थप्पड़ लगाओ, सब ठीक हो जाता है,’ जो परोक्ष रूप से उनके और श्रीसंत के बीच 2008 में हुए विवाद की याद दिलाता है। ‘माफ कर सकता हूं, लेकिन भूल नहीं सकता’ हरभजन सिंह के बर्ताव पर नाराजगी जताते हुए श्रीसंत ने कहा, ‘मैंने उनसे साफ कह दिया कि मैं माफ कर सकता हूं, लेकिन भूल नहीं सकता। अगर आप किसी को भूल जाते हैं, तो वह दोबारा वही गलती करेगा। वह (हरभजन) इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। इसमें कोई शक नहीं है।’ श्रीसंत ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें सिखाया है कि माफी दे दो, लेकिन सबक याद रखो। भाई कहता था, पर अब रिश्ता खत्म; सब एक दिखावा है श्रीसंत ने कहा कि अब उनके बीच कोई बॉन्ड नहीं बचा है। उन्होंने कहा,’मेरा उस व्यक्ति के साथ अब कोई रिश्ता नहीं है। मैं उन्हें भाई कहता था, लेकिन पिछले एक-दो महीनों में उन्होंने जो विज्ञापन किया, उसके बाद मैंने उन्हें इंस्टाग्राम पर ब्लॉक कर दिया है। वे एक महान व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन मेरे लिए भारतीय टीम में खेलने से लेकर अब तक, वह जो भी करते हैं, वह सब एक ‘एक्ट’ (दिखावा) है। श्रीसंत इस दिखावे को स्वीकार नहीं करता। क्या था ‘थप्पड़ कांड’ विवाद? यह पूरा विवाद IPL के पहले सीजन यानी 2008 का है। 25 अप्रैल को मोहाली में मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मैच के बाद हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ जड़ दिया था। मैच खत्म होने के बाद श्रीसंत मैदान पर रोते हुए नजर आए थे। इरफान पठान और महेला जयवर्धने ने किया था बीच-बचाव इरफान पठान और महेला जयवर्धने ने बीच-बचाव कर उन्हें अलग किया। इसके बाद पठान, हरभजन को पीछे ले जाते दिखे। हरभजन सिंह पर लगा था 8 मैचों का प्रतिबंध मैदान पर श्रीसंत के रोने की तस्वीरें और वीडियो ने क्रिकेट जगत में सुर्खियां बटोरी थीं। हरभजन सिंह को तत्काल बचे 8 मैच से बैन किया गया था और उन पर मैच फीस का जुर्माना भी लगा था। श्रीसंत ने दावा किया था कि हरभजन बहुत गुस्से में पेश आए और बिना वजह थप्पड़ जड़ा। इस घटना पर मीडिया और फैंस के बीच बहस हुई। हरभजन ने इस घटना पर कई बार अफसोस जता चुके हैं हरभजन इस घटना पर कई बार अफसोस जता चुके हैं। उन्होंने टीम इंडिया के दिग्गज स्पिनर ने रविचंद्रन अश्विन के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरी जिंदगी का एक ऐसा पल जिसे मैं बदलना चाहता हूं, वो है श्रीसंत को थप्पड़ मारने का किस्सा। अगर मुझे मौका मिले तो मैं इसे अपनी लाइफ से हटा दूं। जो हुआ गलत हुआ और मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। मैंने उसके लिए सैकड़ों बार माफी मांगी। आज भी जब मौका मिलता है तो माफी मांगता हूं। यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी। कई बार सार्वजनिक मंच से हरभजन सिंह इस घटना पर अफसोस जता चुके हैं। श्रीसंत की बेटी बात नहीं करती हरभजन ने आगे कहा कि इस घटना का बोझ वह आज भी उठाते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार जब वह श्रीसंत की बेटी से मिले तो वह उनसे बात करने से कतराने लगी और बोली- मैं आपसे बात नहीं करना चाहती, क्योंकि आपने मेरे पापा को मारा था। उसकी यह बात सुनकर मेरा दिल टूट गया। मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोचने लगा कि मैंने उसके मन में कैसी छवि छोड़ी है? वो मुझे ऐसे इंसान के रूप में देख रही है जिसने उसके पिता को मारा। यह सोचकर मुझे बहुत बुरा लगा और मैं आज भी उसके लिए माफी मांगता हूं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Sreesanth Harbhajan Singh IPL Slap Video Controversy; Instagram

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Hindi News Sports Sreesanth Harbhajan Singh IPL Slap Video Controversy; Instagram | Cricket News स्पोर्ट्स डेस्क1 घंटे पहले कॉपी लिंक यह क्लिप करीब 8 महीने पहले पूर्व IPL कमिश्नर ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी किया था। भारतीय क्रिकेट टीम के दो पूर्व खिलाड़ियों, एस श्रीसंत और हरभजन सिंह के बीच 2008 का ‘थप्पड़ कांड’ फिर चर्चा में है। 16 साल पुराने इस विवाद ने दोनों के रिश्ते खत्म कर दिए हैं। श्रीसंत ने खुलासा किया कि उन्होंने हरभजन सिंह को सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया है और अब कोई संबंध नहीं रखना चाहते। केरल के मीडिया हाउस ‘मातृभूमि’ को दिए इंटरव्यू में श्रीसंत ने कहा, ‘मैंने आज तक किसी इंटरव्यू में भज्जी (हरभजन) के बारे में बात नहीं की, यह पहली बार है। कुछ समय पहले तक सब ठीक था, लेकिन उन्होंने उस विवाद पर फिर से एक विज्ञापन बनाया। उन्होंने इसके लिए करीब 80 लाख से 1 करोड़ रुपए लिए। इसके बाद उन्होंने मुझे फोन किया और कहा कि मैं अपने सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन को लेकर स्टोरी पोस्ट करूं।’ रिपब्लिक डे पर विज्ञापन जारी किया गया था यह विज्ञापन जनवरी 2026 में एक मार्केटिंग ऐप की गणतंत्र दिवस सेल के लिए जारी किया गया था। इसमें हरभजन सिंह को ‘चांटा क्लास’ के टीचर के रूप में दिखाया गया है, जो लोगों को यह समझाते हैं कि खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को थप्पड़ मारकर ठीक करने की पुरानी आदत छोड़ें और उसकी जगह एप से नए प्रोडक्ट खरीदें। विज्ञापन में मजाकिया अंदाज में हरभजन कहते हैं, ‘सही से थप्पड़ लगाओ, सब ठीक हो जाता है,’। यह डायलॉग उनके और श्रीसंत के बीच 2008 में हुए विवाद की याद दिलाता है। ‘माफ कर सकता हूं, लेकिन भूल नहीं सकता’ हरभजन सिंह के बर्ताव पर नाराजगी जताते हुए श्रीसंत ने कहा, ‘मैंने उनसे साफ कह दिया कि मैं माफ कर सकता हूं, लेकिन भूल नहीं सकता। अगर आप किसी को भूल जाते हैं, तो वह दोबारा वही गलती करेगा। वह (हरभजन) इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। इसमें कोई शक नहीं है।’ श्रीसंत ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें सिखाया है कि माफी दे दो, लेकिन सबक याद रखो। भाई कहता था, पर अब रिश्ता खत्म; सब दिखावा है श्रीसंत ने कहा कि अब उनके बीच कोई बॉन्ड नहीं बचा है। उन्होंने कहा,’मेरा उस व्यक्ति के साथ अब कोई रिश्ता नहीं है। मैं उन्हें भाई कहता था, लेकिन पिछले एक-दो महीनों में उन्होंने जो विज्ञापन किए, उसके बाद मैंने उन्हें इंस्टाग्राम पर ब्लॉक कर दिया है। वे एक महान व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन मेरे लिए भारतीय टीम में खेलने से लेकर अब तक, वह जो भी करते हैं, वह सब एक ‘एक्ट’ (दिखावा) है।’ श्रीसंत ने कहा कि वह इश दिखावे को स्वीकार नहीं करते। क्या था ‘थप्पड़ कांड’ विवाद? यह पूरा विवाद IPL के पहले सीजन यानी 2008 का है। 25 अप्रैल को मोहाली में मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मैच के बाद हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ जड़ दिया था। मैच खत्म होने के बाद श्रीसंत मैदान पर रोते हुए नजर आए थे। इरफान पठान और महेला जयवर्धने ने किया था बीच-बचाव इरफान पठान और महेला जयवर्धने ने बीच-बचाव कर उन्हें अलग किया। इसके बाद इरफान, हरभजन को पीछे ले जाते दिखे। हरभजन सिंह पर लगा था 8 मैचों का प्रतिबंध मैदान पर श्रीसंत के रोने की तस्वीरें और वीडियो ने क्रिकेट जगत में सुर्खियां बटोरी थीं। हरभजन सिंह को तत्काल बचे 8 मैच से बैन किया गया था और मैच फीस का जुर्माना भी लगा था। श्रीसंत ने दावा किया था कि हरभजन ने गुस्से में बिना वजह थप्पड़ जड़ा। इस घटना पर मीडिया और फैंस के बीच बहस हुई। हरभजन इस घटना पर कई बार अफसोस जता चुके हैं हरभजन इस घटना पर कई बार अफसोस जता चुके हैं। उन्होंने रविचंद्रन अश्विन के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि ‘मेरी जिंदगी का एक ऐसा पल जिसे मैं बदलना चाहता हूं- वो है श्रीसंत को थप्पड़ मारने का किस्सा।’ उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे मौका मिले तो मैं इसे अपनी लाइफ से हटा दूं। जो हुआ गलत हुआ और मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। मैंने उसके लिए सैकड़ों बार माफी मांगी। आज भी जब मौका मिलता है तो माफी मांगता हूं। यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी।’ कई बार सार्वजनिक मंच से हरभजन सिंह इस घटना पर अफसोस जता चुके हैं। श्रीसंत की बेटी बात नहीं करती हरभजन ने आगे कहा कि इस घटना का बोझ वह आज भी उठाते हैं। उन्होंने बताया कि एक बार जब वह श्रीसंत की बेटी से मिले तो वह उनसे बात करने से कतराने लगी और बोली- मैं आपसे बात नहीं करना चाहती, क्योंकि आपने मेरे पापा को मारा था। हरभजन ने कहा- ‘उसकी यह बात सुनकर मेरा दिल टूट गया। मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोचने लगा कि मैंने उसके मन में कैसी इमेज बनाई है? वह मुझे एक ऐसे इंसान के रूप में देख रही है, जिसने उसके पिता को मारा। यह सोचकर मुझे बहुत बुरा लगा और मैं आज भी उसके लिए माफी मांगता हूं।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

कनाडा में सिख हेरिटेज प्रोग्राम में हंगामा, VIDEO:युवती बोली- मेरे बाल खींचे-थप्पड़ मारे, पुलिस बुलाओ; युवक गालियां देता दिखा

कनाडा में सिख हेरिटेज प्रोग्राम में हंगामा, VIDEO:युवती बोली- मेरे बाल खींचे-थप्पड़ मारे, पुलिस बुलाओ; युवक गालियां देता दिखा

कनाडा के ओंटारियो में सिख हेरिटेज मंथ के एक कार्यक्रम के अचानक हंगामा हो गया। कार्यक्रम में एक युवती के बाल खींचने और थप्पड़ मारने के आरोप लगे। यह कार्यक्रम सिख समुदाय के इतिहास और उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। ओंटारियो के कविंज पार्क स्थित गुरुद्वारा में सिख समुदाय के लोग प्रांत की सरकार से मिलकर इस महीने को मनाने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान कई ओंटारियो इमिग्रेंट नॉमिनी प्रोग्राम (OINP) वर्कर्स प्रदर्शन करने लगे और कनाडा सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए। उनका कहना था कि उनके OINP अर्जियों के रिजेक्शन से वे काफी नाराज हैं और वे इस मुद्दे पर सरकार से जवाब चाहते थे। तभी सवाल पूछ रही युवती से मारपीट हो गई। हंगामे का वीडियो भी सामने आया है। 1 मिनट 23 सेकेंड के वीडियो में क्या दिखा… युवती ने कनाडाई अधिकारियों से पूछे थे सवाल हालांकि, प्रदर्शन करने आए OINP वर्कर्स में से 6 लोगों को अंदर कार्यक्रम में जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन युवती के सवालों पर कुछ लोग भड़क गए और हाथापाई हो गई। इसके बाद कुछ समय बाद जब कनाडाई अधिकारी वहां से जाने लगे, तो कुछ लोगों ने दोबारा सवाल उठाने शुरू कर दिए और वीडियो बनाने लगे। ओंटारियो गुरुद्वारा कमेटी और OINP के बीच बहस इस दौरान ओंटारियो गुरुद्वारा कमेटी और OINP वर्कर्स के बीच बहस शुरू हो गई। इसका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति दावा कर रहा है कि पगड़ी पहने शख्स ने एक युवती को थप्पड़ मारा और उसके बाल खींचे हैं।

Ujjain Swami Harshanand Gir Foreign Funding Challenge: ₹1 Cr Defamation

Ujjain Swami Harshanand Gir Foreign Funding Challenge: ₹1 Cr Defamation

हर्षानंद गिरि (पहले हर्षा रिछारिया) ने वीडियो जारी कर संन्यास पर सवाल उठाने वाले संतों को जवाब दिया है। उज्जैन में संन्यास विवाद के बीच स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने नया वीडियो जारी कर संतों के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने फॉरेन फंडिंग के आरोपों को खारिज किया। . कहा कि एक भी आरोप सही साबित हुआ तो वह अपनी पूरी संपत्ति अर्पित कर देंगी। वहीं आरोप गलत साबित होने पर संबंधित पक्ष से ₹1 करोड़ मानहानि की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी बैंक डिटेल्स सार्वजनिक करने को तैयार हैं। दो दिन पहले संत समाज के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने उनके संन्यास पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बार-बार संन्यास लेने की प्रक्रिया सनातन परंपराओं का मजाक बना रही है और यह सब पब्लिसिटी के लिए हो सकता है। साथ ही विदेशी फंडिंग की संभावना भी जताई थी। हर्षा बोलीं- सेहत का ख्याल रखूं तो भी सवाल? हर्षानंद गिरि ने अपने पहनावे और लुक पर हो रही आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर वह चश्मा पहनती हैं, लेकिन इसे भी फैशन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या वह अपनी सेहत का ख्याल भी दूसरों की सोच के हिसाब से रखें? उन्होंने कहा कि उनके आध्यात्मिक जीवन पर बिना जानकारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि वे 2019 से उत्तराखंड में रहकर गुरु के सानिध्य में कठिन परिस्थितियों में साधना कर रही थीं। एक महिला के संन्यास लेने पर ही विरोध क्यों हो रहा हर्षानंद गिरि ने कुछ संतों के पुराने विवादों का जिक्र करते हुए पूछा कि तब इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक महिला के संन्यास लेने पर ही विरोध क्यों हो रहा है। साथ ही स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद को पहले संन्यासी घोषित नहीं किया था और यह बात मीडिया के जरिए कई बार कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। “नचनिया-कुदनिया” जैसे शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। अंत में उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के मार्ग पर चल रही हैं और सच्चा साधु ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार से दूर होता है। अब जानिए हर्षा के संन्यास लेने पर क्या कंट्रोवर्सी हो रही…? दरअसल, उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज है। महाराज अनिलानंद ने कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती। प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्षा को दीक्षा दिलाने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच हो। यह संन्यास नहीं, परंपरा का अपमान महाराज अनिलानंद ने कहा- हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित रुख अपना चुकी हैं। ऐसे आचरण वाले व्यक्ति का संन्यास लेना संदेह पैदा करता है। संन्यास एक पवित्र और अनुशासित परंपरा है, जिसे कोई भी व्यक्ति अचानक नहीं अपना सकता। उन्होंने कहा- जो लोग पहले अलग जीवन जीते रहे, वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। यह हमारे सनातन धर्म के लिए घोर अपमान की बात है। अखाड़ा परिषद से कार्रवाई की मांग मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा- जो लोग सनातन धर्म को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज की भूमिका पर भी सवाल उठाए। दीक्षा दिलाने की जांच की मांग भी की। कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाया जाता है। संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है। इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाए अनिलानंद महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि उज्जैन में आगामी धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सनातन परंपरा से छेड़छाड़ की गई, तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है। इससे पहले स्वामी हर्षानंद गिरि ने संन्यास को अपने जीवन का नया अध्याय बताया था। उन्होंने कहा था कि गुरुदेव के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग चुना है और आगे धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेंगी। प्रयागराज महाकुंभ में संतों के साथ रथ पर बैठी थीं हर्षा 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी। उस वक्त 30 साल की मॉडल हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। पेशवाई के दौरान हर्षा रिछारिया से पत्रकारों ने साध्वी बनने पर सवाल किया था। इस पर हर्षा ने कहा था- मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था। इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं। मीडिया चैनल ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम भी दे दिया। इस पर हर्षा फिर से मीडिया के सामने आईं। कहा- मैं साध्वी नहीं हूं। मैं केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हूं। पिता बस कंडक्टर, मां बुटिक चलाती हैं हर्षा रिछारिया का परिवार उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है। उनके पिता दिनेश रिछारिया बस कंडक्टर हैं, मां किरण बुटिक चलाती हैं। एक भाई कपिल है, जो प्राइवेट जॉब करता है। फिलहाल, पूरा परिवार भोपाल में रहता है। हर्षा स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं। वे सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े वीडियो बनाती थीं। ग्रेजुएट हैं और अहमदाबाद से योग स्पेशल कोर्स कर रखा है। वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं। ये खबरें भी पढ़ें… 1. महाकुंभ की वायरल साध्वी हर्षा के मेकअप पर सवाल सोशल मीडिया ट्रेंड से चर्चा में आईं महाकुंभ-24 की वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया

भोपाल कोर्ट में वकीलों के दो गुटों के बीच विवाद:आम सभा के दौरान झूमाझटकी; पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ

भोपाल कोर्ट में वकीलों के दो गुटों के बीच विवाद:आम सभा के दौरान झूमाझटकी; पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ

जिला बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर भोपाल कोर्ट में सरगर्मी तेज है। शुक्रवार को कोर्ट परिसर में जमकर हंगामा हुआ और वकीलों के बीच झूमाझटकी तक की नौबत आ गई। एक पक्ष का आरोप है कि कार्यकारिणी ने पहले बहुमत से 19 वोटों के साथ जगमोहन शर्मा को मुख्य चुनाव अधिकारी चुना था, लेकिन बाद में अचानक अध्यक्ष की सहमति से इंद्रजीत राजपूत को मुख्य चुनाव अधिकारी बना दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार शाम को भी वकीलों ने हंगामा किया था। तय हुआ था कि शुक्रवार को मुख्य चुनाव अधिकारी के चयन को लेकर आमसभा बुलाई जाएगी। हालांकि, शुक्रवार को आयोजित आमसभा में भी विवाद हो गया और वकीलों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि कार्यकारिणी का कार्यकाल तीन महीने पहले ही समाप्त हो चुका है। लंबे विरोध के बाद आमसभा को निरस्त कर दिया गया। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया। वहीं जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक खरे ने बताया कि आम सभा बुलाई गई थी, लेकिन उसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। चुनाव अधिकारी की घोषणा कर दी गई है और अब चुनाव की तारीख तय की जा रही है, जिसे जल्द घोषित किया जाएगा।

20 MPs, MLAs Exit; 1 Remains Raghav Chadha Controversy

20 MPs, MLAs Exit; 1 Remains Raghav Chadha Controversy

राज्यसभा सांसद राघव चड्‌ढा आज (24 अप्रैल को) 2 सांसदों के साथ BJP में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि हमारे साथ 7 सांसद हैं, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी है। इनमें 6 पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। हालांकि ये अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, जो विवाद के बाद AAP से किना . AAP की स्थापना से लेकर अब तक 35 बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 20 नेता पंजाब से हैं। पूर्व में पंजाब से पार्टी को अलविदा करने वाले नेताओं में सुच्चा सिंह छोटेपुर, एडवोकेट एचएस फूलका और गुरप्रीत घुग्गी जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। AAP ने पंजाब के सिटिंग सांसदों धर्मवीर गांधी व हरजीत सिंह खालसा को भी पार्टी से निष्काषित कर दिया था। धर्मवीर गांधी कांग्रेस में शामिल होकर दोबारा सांसद चुने गए। यही नहीं AAP ने पंजाब में सिटिंग एमएलए को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया या विधायकों ने खुद पार्टी छोड़ दी। सुखपाल सिंह खैहरा पार्टी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वहीं एडवोकेट एचएस फूलका ने भी LOP रहते हुए पार्टी छोड़ दी थी। कुछ दिन पहले वह BJP में शामिल हो गए। हालांकि कुमार विश्वास अकेले नेता हैं, जिन्होंने न इस्तीफा दिया और न पार्टी ने उन्हें निकाला है। 26 नवंबर 2012 को पार्टी के गठन से लेकर 2026 तक नेताओं को आम आदमी पार्टी से क्यों निकाला गया या फिर नेताओं ने पार्टी से दूरी क्यों बनाई, इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट… भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल को शुक्रवार शाम को भाजपा कार्यालय में पार्टी की सदस्यता दिलाई। 1. शाजिया इल्मी पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख नेता, 2014 लोकसभा उम्मीदवार। कारण: शाजिया इल्मी ने मई 2014 में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, कुछ लोगों द्वारा पार्टी चलाने और मूल मूल्यों से भटकना का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया। उसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी। 2. कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ पद: संस्थापक सदस्य, प्रमुख राष्ट्रीय नेता। कारण: कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने मई 2014 में आम आदमी पार्टी से किनारा कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं पर आरोप लगाया कि पार्टी की रणनीति और कोर लीडरशिप द्वारा अनदेखी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। 3. योगेंद्र यादव पद: संस्थापक सदस्य, पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (PAC) सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: योगेंद्र यादव को आम आदमी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 21 अप्रैल 2015 को पार्टी से निष्काषित कर दिया। योगेंद्र यादव ने अनुशासन भंग, केजरीवाल की तानाशाही और टिकट वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया। जिसकी वजह से उन्हें पार्टी से निकाला गया। 4.प्रशांत भूषण पद: संस्थापक सदस्य, PAC सदस्य, वरिष्ठ वकील। कारण: प्रशांत भूषण को भी योगेंद्र यादव के साथ ही पार्टी से बाहर निकाला गया। प्रशांत भूषण ने भी तानाशाही और टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया था। अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी अप्रैल 2015 में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 5. आनंद कुमार पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, संस्थापक सदस्य। कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां चलाने के आरोप में पार्टी ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण के साथ आनंद कुमार को भी बाहर का रास्ता दिखा। आनंद कुमार ने भी खुलकर AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की खिलाफत की थी। 6. अजीत झा पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: अप्रैल 2015 में इन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया। इन्होंने भी पार्टी में चल रही तानाशाही का विरोध किया था और कहा था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है। 7. मयंक गांधी पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख। कारण: मयंक गांधी को महाराष्ट्र यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2015 में केजरीवाल ने महाराष्ट्र यूनिट भंग की। जिससे नाराज होकर मयंक गांधी ने पार्टी छोड़ दी। 8. अंजलि दामनिया पद: महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख, राष्ट्रीय स्तर की नेता। कारण: अंजलि दामनिया के केजरीवाल से मतभेद हो गए थे। उन्होंने केजरीवाल पर हॉर्स ट्रेडिंग यानि कांग्रेस विधायकों को अपने साथ मिलाने के आरोप लगाए। जिसके बाद उनके केजरीवाल से मतभेद बढ़ गए और मार्च 2015 में में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 9. कपिल मिश्रा पद: दिल्ली की AAP सरकार में मंत्री, करावल नगर से MLA, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेता। कारण: कपिल मिश्रा के सत्येंद्र जैन के साथ मदभेद हो गए थे जिसके बाद केजरीवाल ने उन्हें कैबिनेट से हटा दिया। उन्होंने केजरीवाल व सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पार्टी ने उन्हें निष्काषित कर दिया। 10. अलका लांबा पद: चांदनी चौक से MLA (2015 दिल्ली चुनाव), दिल्ली यूनिट की प्रमुख महिला नेता। कारण: अलका लांबा ने पार्टी की कार्यशैली पर असहमति, राजीव गांधी पर AAP के प्रस्ताव का विरोध और “खास आदमी पार्टी” बनने का आरोप लगाया। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगे। उन्होंने सितंबर 2019 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस जॉइन कर ली। 11. आशुतोष पद: प्रमुख प्रवक्ता, पत्रकार-से-राजनेता, केजरीवाल के करीबी। कारण: आशुतोष राज्यसभा जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। जिसके बाद 2018 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसमें उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी लीडरशिप से मतभेद होने की बात भी कही। 12. अशोक अग्रवाल पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: अशोक अग्रवाल पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2014 में उन्होंने पार्टी नेतृत्व की मनमानी पर सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा दे दिया। जिसके बाद उन्होंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 13. इलियास आजमी पद: संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद। कारण: इलियास आजमी ने पार्टी में केजरीवाल की तानाशाही और आंतरिक लोकतंत्र की कमी पर सवाल खड़े किए। वो बार-बार कहते रहे कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक रही हे। जिसके बाद उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया। 14. स्वाति मालीवाल पद: राज्यसभा सांसद (AAP कोटे से), दिल्ली महिला आयोग पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर की नेता। कारण: स्वाति मालीवाल ने अब राघव चड्‌ढा व अन्य के साथ पार्टी छोड़ दी। वो लगातार पार्टी पर हमले कर रही है। 2024 में केजरीवाल के सहयोगी वैभव कुमार पर हमले का आरोप,

Annu Kapoor Clarifies Tamannaah Bhatia Comment Controversy

Annu Kapoor Clarifies Tamannaah Bhatia Comment Controversy

21 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर अन्नू कपूर एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया के गाने ‘आज की रात’ पर किए गए अपने दूधिया बदन वाले कमेंट पर सफाई दी है। भारी ट्रोलिंग के बाद अब एक्टर का कहना है कि उनके कमेंट को गलत तरीके से लिया गया और उनका इरादा सिर्फ तारीफ करना था। सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में अन्नू कपूर ने कहा, लोगों ने मुझे गालियां दीं, खूसट बूढ़ा और सठिया गया जैसी बातें कहीं। मेरा कहना सिर्फ इतना है कि अगर मैं ‘दूधिया बदन’ कहता हूं तो बवाल मच जाता है, लेकिन अगर यही बात इंग्लिश में ‘मिल्की बॉडी’ कही जाए तो किसी को कोई परेशानी नहीं होती।” उन्होंने आगे कहा कि तमन्ना उनकी बेटी की उम्र की हैं और उनके मन में उनके लिए कोई गलत भावना नहीं है। अन्नू कपूर ने तमन्ना के लुक्स की तारीफ करते हुए ‘दूधिया बदन’ शब्द का इस्तेमाल किया था। ‘बुरा लगा तो पैर छूने के लिए तैयार हूं’ अपनी सफाई के दौरान अन्नू ने यह भी कहा कि अगर तमन्ना भाटिया खुद उनसे इस बारे में पूछेंगी, तो वे अपनी बात पर कायम रहेंगे। उन्होंने कहा, अगर तमन्ना को मेरी बात बुरी लगी है, तो मैं उनके पैर छूने के लिए भी तैयार हूं। अगर एक 71 साल का आदमी उनके पैर छुएगा, तो वे क्या कहेंगी? मेरा इरादा बिल्कुल साफ है और मुझे अपनी सच्चाई पता है। एक्टर अन्नू कपूर। क्या था पूरा मामला? फिल्म ‘स्त्री 2’ के सुपरहिट गाने ‘आज की रात’ में तमन्ना भाटिया के डांस और लुक की हर तरफ चर्चा हुई थी। एक पुराने पॉडकास्ट के दौरान अन्नू कपूर ने तमन्ना के लुक्स की तारीफ करते हुए ‘दूधिया बदन’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे ‘सेक्सिस्ट’ बताते हुए एक्टर को खूब ट्रोल किया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal SIR List Controversy; Election Duty Officers

West Bengal SIR List Controversy; Election Duty Officers

Hindi News National West Bengal SIR List Controversy; Election Duty Officers | Supreme Court CJI नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक बंगाल में पहले फेज की वोटिंग 23 अप्रैल को हुई, इसमें वोटिंग 93% रही। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई रिकॉर्ड वोटिंग की तारीफ की। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने राज्य में चुनावी हिंसा न होने पर संतोष जताया। CJI ने कहा- भारत के नागरिक के रूप में, मुझे मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुशी हुई। जब लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, कि वे लोग समाधान के लिए कोर्ट की तरफ से नियुक्त 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों से संपर्क करें। कोर्ट बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले इस प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों से कहा कि वे उन लोगों को पहले सुनवाई का मौका दें, जो वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाते हैं। कोर्ट ने बंगाल चुनाव ड्यूटी में लोगों की याचिका सुनने से इनकार किया सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल को उन विभिन्न लोगों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से काट दिए गए थे; इनमें लगभग 65 चुनाव ड्यूटी अधिकारी भी शामिल थे। याचिकाकर्ता के वकील एमआर शमशाद ने कहा कि कई अधिकारियों के नाम बिना किसी कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। उनके ड्यूटी ऑर्डर में एपिक नंबरों का उल्लेख है। अब उन नंबरों को हटा दिया गया है। अब चुनाव कराने वाले लोग वोट नहीं दे सकते। यह मनमाना है। कई मामलों में कारण भी नहीं बताए गए हैं।” इस पर जस्टिस बागची ने कहा, “इस चुनाव में शायद वे वोट नहीं दे पाएंगे। में उनका नाम बनाए रखने का महत्वपूर्ण अधिकार सुरक्षित रखा जाएगा।” कोर्ट रूम लाइव एडवोकेट कल्याण बनर्जी: दायर की गई 27 लाख अपीलों में से 136 का ही निपटारा किया गया है। यह बहुत दुख की बात है। इस बार 92% मतदान हुआ। दूर-दूर से प्रवासी मजदूर मतदान करने आए हैं। हिंसा की कोई घटना भी नहीं हुई। CJI सूर्यकांत: मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। SG तुषार मेहता: यह ऐतिहासिक मतदान है। लेकिन मैं बनर्जी से सहमत हूं… कुछ घटनाओं को छोड़कर यह एक शांतिपूर्ण चुनाव था। जस्टिस बागची: राजाये राजाये जुद्धो होये, कुलो कांगरार जान जाए, यानी युद्ध राजाओं के बीच लड़े जाते हैं, लेकिन आम लोग अपनी जान गंवाते हैं। पहली बार चुनाव आयोग के मुवक्किल की सभी लोग सराहना कर रहे हैं। बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजह SIR: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाता संख्या घट गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर वोटिंग करीब 80% और 2021 विधानसभा चुनाव में करीब 82.17% रही थी। यानी कुल मतदाता घटे, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या लगभग बराबर या ज्यादा रही। एंटी इनकंबेंसी: राज्य में 15 साल से तृणमूल सरकार है। नेताओं से असंतोष, रोजगार, भ्रष्टाचार, सिंडिकेट जैसे मुद्दे भी ज्यादा मतदान की वजह हो सकते हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल जिलों और सीमावर्ती इलाकों में यह SIR और NRC के डर से उपजी प्रतिक्रिया भी मानी जा रही है। इस बार ध्रुवीकरण भी जबरदस्त है। इसलिए माना जा रहा है कि हिंदू मतदाताओं का भी वोट प्रतिशत ज्यादा रहा होगा। प्रवासी कामगार: यह भी बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से केवल वोट डालने बंगाल लौटे हैं। उन्हें लगा कि इस बार वोट नहीं दिया, तो हमेशा के लिए अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेन भर कर वोट डालने के लिए लोगों को ला रही है। आयोग की सख्ती: निर्वाचन आयोग की अभूतपूर्व निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती के कारण मतदाताओं ने बिना किसी डर के मतदान किया। पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं को हटाने वाली SIR लिस्ट के पब्लिश होने के बाद चुनाव हो रहे हैं। गुरुवार को हुए मतदान में महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही। महिला वोटर 92.69% रहीं, जबकि पुरुष वोटर 90.92% रहे। थर्ड जेंडर के वोटर का 56.79% थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

राइटर मधु किश्वर मामले में नया मोड:वीडियो वाले दंपति ने की इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन, चंडीगढ़ पुलिस ने भेजा दूसरा नोटिस, 25 को बुलाया

राइटर मधु किश्वर मामले में नया मोड:वीडियो वाले दंपति ने की इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन, चंडीगढ़ पुलिस ने भेजा दूसरा नोटिस, 25 को बुलाया

फेमस राइटर मधु किश्वर मामले में नया मोड़ आ गया है। चंडीगढ़ पुलिस ने मिसलीडिंग वीडियो मामले में जो एफआईआर दर्ज की है उसमें दिखाई दे रहे दंपति ने इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन कर ली है। वहीं दूसरी ओर राइटर मधु किश्वर को चंडीगढ़ पुलिस ने पहला नोटिस दिल्ली में उसके घर देकर 22 अप्रैल को पुलिस स्टेशन 26 में पेश होने के लिए कहा था, लेकिन वह पेश नहीं हुई। इसके बाद मामले में फिर से चंडीगढ़ पुलिस ने दूसरा नोटिस राइटर मधु किश्वर को भेज दिया है और 25 अप्रैल को पेश होने के लिए कहा है। अब देखते हैं कि 25 अप्रैल को भी राइटर मधु किश्वर पेश होती हैं या फिर नहीं। एफआईआर की कॉपी देने से इनकार राइटर मधु किश्वर ने कहा कि दूसरी बार एक और नोटिस लेकर आए पुलिसकर्मी चंडीगढ़ पुलिस के थे, जिनके साथ दिल्ली पुलिस का भी एक व्यक्ति शामिल था। मैं हैरान हूं कि इस टीम ने भी मुझे एफआईआर की कॉपी देने से इनकार कर दिया, लेकिन मुझसे 25 अप्रैल को चंडीगढ़ के पुलिस स्टेशन 26 में पेश होने की उम्मीद कर रहे हैं। मेरे सहायक ने हमारे बीच हुई पूरी बातचीत रिकॉर्ड की है, जिसे मैं कुछ ही मिनटों में साझा करूंगा। जब मैंने इंस्पेक्टर से बार-बार पूछा कि मुझे एफआईआर की कॉपी क्यों नहीं दी जा रही, तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था। दंपति ने की इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन चंडीगढ़ की एसएसपी कवंरदीप कौर ने कहा कि पुलिस स्टेशन 26 में जो राइटर मधु किश्वर व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उस मामले में जो वीडियो में दंपति हैं, उन दोनों ने पुलिस इन्वेस्टिगेशन ज्वाइन कर ली है। साथ ही राइटर मधु किश्वर को 22 अप्रैल को नोटिस जारी कर बुलाया था, लेकिन वह नहीं आईं, जिसके बाद उन्हें दूसरा नोटिस भेजकर फिर से बुलाया गया है। दरअसल, मधु किश्वर समेत अन्य लोगों पर चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाने में 20 अप्रैल को ही एक शिकायत पर FIR दर्ज की गई। शिकायत में कहा गया कि कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने एक वीडियो को गलत पहचान के साथ वायरल किया और उसमें अश्लील व भ्रामक शब्द जोड़कर पेश किया। इससे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश की गई और समाज में भ्रम फैलाया गया। चंडीगढ़ पुलिस रात में दिल्ली पहुंची दिल्ली में मधु किश्वर के दफ्तर में उनके और पुलिस अधिकारियों के बीच बात हुई। इस दौरान मधु किश्वर ने कहा कि न उनकी तरफ से कोई दुर्भावना थी और न दूसरी तरफ से। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस से पूछा कि क्या वह स्थानीय पुलिस के साथ नहीं आए हैं? इस पर चंडीगढ़ से आई महिला पुलिस अधिकारी ने बताया कि उनकी टीम साथ आई है। मधु किश्वर ने इस टीम को कानून का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं के घर पर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस न तो आ सकती है और न ही उन्हें अरेस्ट कर सकती है। उन्होंने इस मुद्दे पर पुलिस टीम के सीनियर अधिकारी से भी बात की तो उसने बताया कि ये टीम चंडीगढ़ में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में सिर्फ नोटिस देने आई है। इस पर उन्होंने कहा कि कानून का पालन करते हुए दिन में आना चाहिए। मधु किश्वर के मुताबिक, दोनों पक्षों ने शालीनता और शिष्टाचार बनाए रखा। जैसे ही उन्हें एफआईआर की कॉपी मिलेगी, वह चंडीगढ़ में दर्ज इस केस में शामिल होंगी। 3 पॉइंट में जानिए पूरा मामला भ्रामक पोस्ट-क्लिप शेयर की जा रही: दरअसल, 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी का बताकर एक फर्जी और भ्रामक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। इसे लेकर चंडीगढ़ पुलिस ने लेखिका मधु किश्वर के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस की एक टीम देर रात उनको नोटिस देने पहुंची थी। यह मामला सेक्टर-26 पुलिस स्टेशन चंडीगढ़ में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ है। SHO बोले- राइटर पर शेयर करने का आरोपः सेक्टर 19 चंडीगढ़ की SHO सरिता रॉय ने कहा कि 19 अप्रैल को सेक्टर 26 पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई है। यह एक वीडियो से जुड़ी है जिसे एक्स पर पोस्ट किया गया था। मधु किश्वर पर इसे रीपोस्ट करने का आरोप है। हम उन्हें 35.3 BNSS का नोटिस देने आए थे। उन्हें पुलिस स्टेशन में पेश होने का नोटिस दिया गया है। अश्लील शब्द यूज किए, नुकसान पहुंचाने का मकसद: शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सब जानबूझकर किया गया, जिसमें अश्लील शब्दों का उपयोग करते हुए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं। आरोप है कि संबंधित लोगों को यह जानकारी थी या उन्हें विश्वास करने का पर्याप्त कारण था। उनका उद्देश्य किसी की छवि को नुकसान पहुंचाना है।