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Ujjain Swami Harshanand Gir Foreign Funding Challenge: ₹1 Cr Defamation

Ujjain Swami Harshanand Gir Foreign Funding Challenge: ₹1 Cr Defamation

हर्षानंद गिरि (पहले हर्षा रिछारिया) ने वीडियो जारी कर संन्यास पर सवाल उठाने वाले संतों को जवाब दिया है।

उज्जैन में संन्यास विवाद के बीच स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने नया वीडियो जारी कर संतों के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने फॉरेन फंडिंग के आरोपों को खारिज किया।

.

कहा कि एक भी आरोप सही साबित हुआ तो वह अपनी पूरी संपत्ति अर्पित कर देंगी। वहीं आरोप गलत साबित होने पर संबंधित पक्ष से ₹1 करोड़ मानहानि की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी बैंक डिटेल्स सार्वजनिक करने को तैयार हैं।

दो दिन पहले संत समाज के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने उनके संन्यास पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बार-बार संन्यास लेने की प्रक्रिया सनातन परंपराओं का मजाक बना रही है और यह सब पब्लिसिटी के लिए हो सकता है। साथ ही विदेशी फंडिंग की संभावना भी जताई थी।

हर्षा बोलीं- सेहत का ख्याल रखूं तो भी सवाल?

हर्षानंद गिरि ने अपने पहनावे और लुक पर हो रही आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर वह चश्मा पहनती हैं, लेकिन इसे भी फैशन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या वह अपनी सेहत का ख्याल भी दूसरों की सोच के हिसाब से रखें?

उन्होंने कहा कि उनके आध्यात्मिक जीवन पर बिना जानकारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि वे 2019 से उत्तराखंड में रहकर गुरु के सानिध्य में कठिन परिस्थितियों में साधना कर रही थीं।

एक महिला के संन्यास लेने पर ही विरोध क्यों हो रहा

हर्षानंद गिरि ने कुछ संतों के पुराने विवादों का जिक्र करते हुए पूछा कि तब इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक महिला के संन्यास लेने पर ही विरोध क्यों हो रहा है।

साथ ही स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद को पहले संन्यासी घोषित नहीं किया था और यह बात मीडिया के जरिए कई बार कही थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। “नचनिया-कुदनिया” जैसे शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।

अंत में उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के मार्ग पर चल रही हैं और सच्चा साधु ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार से दूर होता है।

अब जानिए हर्षा के संन्यास लेने पर क्या कंट्रोवर्सी हो रही…?

दरअसल, उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज है।

महाराज अनिलानंद ने कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती।

प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्षा को दीक्षा दिलाने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच हो।

यह संन्यास नहीं, परंपरा का अपमान

महाराज अनिलानंद ने कहा- हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित रुख अपना चुकी हैं। ऐसे आचरण वाले व्यक्ति का संन्यास लेना संदेह पैदा करता है। संन्यास एक पवित्र और अनुशासित परंपरा है, जिसे कोई भी व्यक्ति अचानक नहीं अपना सकता।

उन्होंने कहा- जो लोग पहले अलग जीवन जीते रहे, वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। यह हमारे सनातन धर्म के लिए घोर अपमान की बात है।

अखाड़ा परिषद से कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा- जो लोग सनातन धर्म को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज की भूमिका पर भी सवाल उठाए। दीक्षा दिलाने की जांच की मांग भी की। कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाया जाता है। संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है।

इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाए

अनिलानंद महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि उज्जैन में आगामी धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सनातन परंपरा से छेड़छाड़ की गई, तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

इससे पहले स्वामी हर्षानंद गिरि ने संन्यास को अपने जीवन का नया अध्याय बताया था। उन्होंने कहा था कि गुरुदेव के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग चुना है और आगे धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेंगी।

प्रयागराज महाकुंभ में संतों के साथ रथ पर बैठी थीं हर्षा

4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी। उस वक्त 30 साल की मॉडल हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। पेशवाई के दौरान हर्षा रिछारिया से पत्रकारों ने साध्वी बनने पर सवाल किया था।

इस पर हर्षा ने कहा था- मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था। इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं। मीडिया चैनल ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम भी दे दिया।

इस पर हर्षा फिर से मीडिया के सामने आईं। कहा- मैं साध्वी नहीं हूं। मैं केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हूं।

पिता बस कंडक्टर, मां बुटिक चलाती हैं

हर्षा रिछारिया का परिवार उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है। उनके पिता दिनेश रिछारिया बस कंडक्टर हैं, मां किरण बुटिक चलाती हैं। एक भाई कपिल है, जो प्राइवेट जॉब करता है। फिलहाल, पूरा परिवार भोपाल में रहता है।

हर्षा स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं। वे सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े वीडियो बनाती थीं। ग्रेजुएट हैं और अहमदाबाद से योग स्पेशल कोर्स कर रखा है। वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं।

ये खबरें भी पढ़ें…

1. महाकुंभ की वायरल साध्वी हर्षा के मेकअप पर सवाल

सोशल मीडिया ट्रेंड से चर्चा में आईं महाकुंभ-24 की वायरल साध्वी हर्षा रिछारिया अब आधिकारिक रूप से संन्यास ले चुकी हैं। अब वे हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। पढ़ें पूरी खबर…

2. उज्जैन में मॉडल हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, कंटेंट क्रिएटर और मॉडल हर्षा रिछारिया ने रविवार को अक्षय तृतीया पर संन्यास ले लिया। उन्हें उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने संन्यास दीक्षा दी। पढ़ें पूरी खबर…

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हर्षानंद गिरि (पहले हर्षा रिछारिया) ने वीडियो जारी कर संन्यास पर सवाल उठाने वाले संतों को जवाब दिया है।

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उन्होंने कहा कि उनके आध्यात्मिक जीवन पर बिना जानकारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि वे 2019 से उत्तराखंड में रहकर गुरु के सानिध्य में कठिन परिस्थितियों में साधना कर रही थीं।

एक महिला के संन्यास लेने पर ही विरोध क्यों हो रहा

हर्षानंद गिरि ने कुछ संतों के पुराने विवादों का जिक्र करते हुए पूछा कि तब इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक महिला के संन्यास लेने पर ही विरोध क्यों हो रहा है।

साथ ही स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद को पहले संन्यासी घोषित नहीं किया था और यह बात मीडिया के जरिए कई बार कही थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। “नचनिया-कुदनिया” जैसे शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है।

अंत में उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के मार्ग पर चल रही हैं और सच्चा साधु ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार से दूर होता है।

अब जानिए हर्षा के संन्यास लेने पर क्या कंट्रोवर्सी हो रही…?

दरअसल, उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दिलाई। उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद को ऐतराज है।

महाराज अनिलानंद ने कहा- यह पूरा घटनाक्रम गलत और सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती।

प्रयागराज कुंभ के दौरान हर्षा ने संन्यास लेने का दावा किया, लेकिन बाद में सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हर्षा को दीक्षा दिलाने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच हो।

यह संन्यास नहीं, परंपरा का अपमान

महाराज अनिलानंद ने कहा- हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित रुख अपना चुकी हैं। ऐसे आचरण वाले व्यक्ति का संन्यास लेना संदेह पैदा करता है। संन्यास एक पवित्र और अनुशासित परंपरा है, जिसे कोई भी व्यक्ति अचानक नहीं अपना सकता।

उन्होंने कहा- जो लोग पहले अलग जीवन जीते रहे, वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की अपेक्षा नहीं कर सकते। यह हमारे सनातन धर्म के लिए घोर अपमान की बात है।

अखाड़ा परिषद से कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा- जो लोग सनातन धर्म को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज की भूमिका पर भी सवाल उठाए। दीक्षा दिलाने की जांच की मांग भी की। कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाया जाता है। संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है।

इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाए

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इससे पहले स्वामी हर्षानंद गिरि ने संन्यास को अपने जीवन का नया अध्याय बताया था। उन्होंने कहा था कि गुरुदेव के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन का मार्ग चुना है और आगे धर्म, संस्कृति और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहेंगी।

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4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई निकली थी। उस वक्त 30 साल की मॉडल हर्षा रिछारिया संतों के साथ रथ पर बैठी नजर आई थीं। पेशवाई के दौरान हर्षा रिछारिया से पत्रकारों ने साध्वी बनने पर सवाल किया था।

इस पर हर्षा ने कहा था- मैंने सुकून की तलाश में यह जीवन चुना है। मैंने वह सब छोड़ दिया, जो मुझे आकर्षित करता था। इसके बाद हर्षा सुर्खियों में आ गईं। मीडिया चैनल ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का नाम भी दे दिया।

इस पर हर्षा फिर से मीडिया के सामने आईं। कहा- मैं साध्वी नहीं हूं। मैं केवल दीक्षा ग्रहण कर रही हूं।

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हर्षा स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रही हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके अच्छे-खासे फॉलोअर्स हैं। वे सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े वीडियो बनाती थीं। ग्रेजुएट हैं और अहमदाबाद से योग स्पेशल कोर्स कर रखा है। वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की शिष्या हैं।

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