Arman Malik vs Salman Khan Controversy

15 मिनट पहले कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले सिंगिंग से ब्रेक लेने वाले अरमान मलिक ने हाल ही में सलमान खान और उनके प्रोडक्शन के खिलाफ कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें प्रोडक्शन की हालिया पोस्ट में फिल्म हीरो के गाने में क्रेडिट नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उन्हें सोशल मीडिया पर ये कहते हुए ट्रोल किया जाने लगा कि जिन सलमान ने उन्हें करियर में सपोर्ट किया, वह उन्हीं सलमान की आलोचना कर रहे हैं। अब इस विवाद पर सिंगर अमाल मलिक भी भाई के सपोर्ट में उतरे हैं। भाई अमाल के सपोर्ट में उतरे अरमान मलिक ऐसी ही एक पोस्ट के जवाब में अरमान ने लिखा, “कृपया पहले कोई ओरिजिनल गाना बनाइए, उसे लिखिए या गाइए। फिर देखिए कि जहां आपका नाम होना चाहिए, वहां उसे आसानी से छोड़ दिया जाए।” उन्होंने कहा, “मैं जानना चाहूंगा कि तब आपको कैसा लगेगा। कृतज्ञता की बात मत कीजिए। मैं अपनी शुरुआत के लिए हमेशा आभारी रहा हूं। लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि जहां पहुंचा हूं, वहां तक पहुंचना कितना मुश्किल रहा है। अगर हम अपने हक के लिए नहीं लड़ेंगे, तो कोई और नहीं लड़ेगा।” भाई और गीतकार के क्रेडिट के लिए बोले अरमान एक फैन ने अरमान से ट्रोल्स पर ध्यान नहीं देने को कहा। इस पर उन्होंने साफ किया कि उनका जवाब भाई और गीतकार को सही क्रेडिट दिलाने के लिए था। अरमान ने कहा, “मैं सच में सिर्फ अपने भाई और गीतकार के क्रेडिट को लेकर चिंतित था। उनके बिना यह गाना कुछ भी नहीं है। मेरा क्रेडिट तो छोड़ ही दीजिए। मैंने उम्मीद करना बंद कर दिया है। मेरे लिए आप लोग ही काफी हैं।” जानिए क्या है पूरा विवाद? 11 सितंबर को साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म हीरो की रिलीज के 11 साल पूरे हुए। इस मौके पर सलमान खान फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस की तरफ से इंस्टाग्राम और X अकाउंट पर फिल्म से जुड़ी एक पोस्ट शेयर की गई। इस फिल्म के गानों का कंपोजिशन अमाल मलिक ने किया था, लेकिन पोस्ट में उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था। क्रेडिट ने मिलने पर अमाल मलिक ने नाराजगी जताई और लिखा, “सलमान खान फिल्म्स का पेज संभालने वाले व्यक्ति में संगीतकार और गीतकार को छोड़ने की इतनी हिम्मत कैसे हुई? यह अच्छा नहीं लगता।” उन्होंने कहा कि गाना संगीतकार और गीतकार की मेहनत, खून-पसीने और दर्द से बनता है। ऐसे गाने का जश्न मनाते समय उसके क्रिएटर्स का सम्मान और जिक्र होना चाहिए। अमाल ने आगे लिखा, “बुनियादी बातें सीखिए, वरना यह पेज डिलीट कर दीजिए। मेरा कमेंट डिलीट मत करना। सलमान सर को भी इसे देखने दीजिए, ताकि उन्हें पता चले कि आप लोगों ने गलती की है।” प्रोडक्शन ने पोस्ट एडिट कर जोड़ा अमाल का नाम अमाल की पोस्ट सामने आने के बाद सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस ने पोस्ट एडिट की और इसमें अमाल मलिक का नाम जोड़ा। इंस्टाग्राम पोस्ट एडिट कर क्रेडिट जोड़ा गया है, हालांकि X पर अब भी क्रेडिट नहीं दिया गया है। सलमान खान ने दिया था अमाल को ब्रेक अमाल मलिक के करियर में सलमान खान का योगदान रहा है। सलमान ने साल 2014 में अपनी फिल्म ‘जय हो’ से अमाल को बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक कंपोजर ब्रेक दिया था। साथ ही सलमान ने अरमान मलिक के म्यूजिक एल्बम लॉन्च में पहुंचकर उनका सपोर्ट किया था। बुक लॉन्च में मलिक परिवार के साथ सलमान। बाएं से दाहिने अमाल मलिक, सलमान खान, डब्बू मलिक, अरमान मलिक। इसके बाद साल 2015 में सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म ‘हीरो’ के लिए अमाल मलिक ने ही संगीत तैयार किया था। इस फिल्म का गाना “मैं हूं हीरो तेरा” ब्लॉकबस्टर रहा, जिसे ओरिजिनली अमाल के भाई अरमान मलिक ने गाया था और बाद में खुद सलमान खान ने भी अपनी आवाज में इसका एक स्पेशल वर्जन रिकॉर्ड किया था। बयानों से चर्चा में हैं अमाल मलिक, इंडस्ट्री पर लगाए आरोप ब्रेक का फैसला अमाल के पिछले कुछ महीनों में किए गए कई भावनात्मक पोस्ट के बाद आया है। इन पोस्ट में उन्होंने इंडस्ट्री में अपने संघर्ष के बारे में बात की थी। मई में उन्होंने फिल्म और म्यूजिक बिजनेस के कुछ प्रभावशाली लोगों पर उन्हें किनारे करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि पिछले कई सालों में उन्हें करीब पांच दर्जन प्रोजेक्ट्स से हटा दिया गया। बॉलीवुड में काम जारी रखने की अपनी कोशिशों के बारे में अमाल ने कहा था, “मैं पिछले 8 साल से पूरी ईमानदारी और काम की कुछ सम्मानजनक शर्तों के साथ अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं, लेकिन दुख की बात है कि इस जगह पर यह काम नहीं करता।” उन्होंने आगे कहा, “इस जगह और इसके काम करने के तरीके के बारे में सच छिपाने में मेरी असमर्थता उन्हें और परेशान करती है। इसकी वजह से मुझे और मेरे परिवार को बेकार की धमकियां मिलती हैं। कुछ बहुत ताकतवर लोगों का समूह है, जो नहीं चाहता कि मैं उनकी फिल्मों या किसी भी फिल्म का हिस्सा बनूं। यह सिर्फ लेबल्स की बात नहीं है, अब मामला इससे आगे बढ़ चुका है। यह अहंकारी लोगों का मिला-जुला सिंडिकेट है।” ग्रुपिज्म और इंडस्ट्री पॉलिटिक्स पर भी बोले अमाल ने दावा किया था कि इंडस्ट्री की पॉलिटिक्स और ग्रुपिज्म की वजह से फिल्मों में उनका संगीत कम सुनाई देता है। ब्रेक का ऐलान करने से सिर्फ दो दिन पहले अमाल ने फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर उनके और उनके काम के खिलाफ सोशल मीडिया पर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था। कुछ समय पहले ही अमाल मलिक कंपोजर तनिष्क बागची से विवाद होने से भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘करीब 10 साल तक मैंने अपने गुस्से को दबाकर रखा, लेकिन आज एक दशक बाद मुझे खुलकर सामने आना पड़ा, क्योंकि यहां कोई भी सही बात के लिए खड़ा नहीं होता और न ही इंडस्ट्री के गलत लोगों को बेनकाब करता है। यहां किसी में सच को सच कहने की हिम्मत नहीं है, लेकिन किसी न किसी को यह करना ही था। मैं उसके गलत कामों और अनैतिक हरकतों पर बहुत समय से चुप था।’
Arman Malik vs Salman Khan Controversy

31 मिनट पहले कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले सिंगिंग से ब्रेक लेने वाले अरमान मलिक ने हाल ही में सलमान खान और उनके प्रोडक्शन के खिलाफ कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें प्रोडक्शन की हालिया पोस्ट में फिल्म हीरो के गाने में क्रेडिट नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उन्हें सोशल मीडिया पर ये कहते हुए ट्रोल किया जाने लगा कि जिन सलमान ने उन्हें करियर में सपोर्ट किया, वह उन्हीं सलमान की आलोचना कर रहे हैं। अब इस विवाद पर सिंगर अमाल मलिक भी भाई के सपोर्ट में उतरे हैं। भाई अमाल के सपोर्ट में उतरे अरमान मलिक ऐसी ही एक पोस्ट के जवाब में अरमान ने लिखा, “कृपया पहले कोई ओरिजिनल गाना बनाइए, उसे लिखिए या गाइए। फिर देखिए कि जहां आपका नाम होना चाहिए, वहां उसे आसानी से छोड़ दिया जाए।” उन्होंने कहा, “मैं जानना चाहूंगा कि तब आपको कैसा लगेगा। कृतज्ञता की बात मत कीजिए। मैं अपनी शुरुआत के लिए हमेशा आभारी रहा हूं। लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि जहां पहुंचा हूं, वहां तक पहुंचना कितना मुश्किल रहा है। अगर हम अपने हक के लिए नहीं लड़ेंगे, तो कोई और नहीं लड़ेगा।” भाई और गीतकार के क्रेडिट के लिए बोले अरमान एक फैन ने अरमान से ट्रोल्स पर ध्यान नहीं देने को कहा। इस पर उन्होंने साफ किया कि उनका जवाब भाई और गीतकार को सही क्रेडिट दिलाने के लिए था। अरमान ने कहा, “मैं सच में सिर्फ अपने भाई और गीतकार के क्रेडिट को लेकर चिंतित था। उनके बिना यह गाना कुछ भी नहीं है। मेरा क्रेडिट तो छोड़ ही दीजिए। मैंने उम्मीद करना बंद कर दिया है। मेरे लिए आप लोग ही काफी हैं।” जानिए क्या है पूरा विवाद? 11 सितंबर को साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म हीरो की रिलीज के 11 साल पूरे हुए। इस मौके पर सलमान खान फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस की तरफ से इंस्टाग्राम और X अकाउंट पर फिल्म से जुड़ी एक पोस्ट शेयर की गई। इस फिल्म के गानों का कंपोजिशन अमाल मलिक ने किया था, लेकिन पोस्ट में उन्हें क्रेडिट नहीं दिया गया था। क्रेडिट ने मिलने पर अमाल मलिक ने नाराजगी जताई और लिखा, “सलमान खान फिल्म्स का पेज संभालने वाले व्यक्ति में संगीतकार और गीतकार को छोड़ने की इतनी हिम्मत कैसे हुई? यह अच्छा नहीं लगता।” उन्होंने कहा कि गाना संगीतकार और गीतकार की मेहनत, खून-पसीने और दर्द से बनता है। ऐसे गाने का जश्न मनाते समय उसके क्रिएटर्स का सम्मान और जिक्र होना चाहिए। अमाल ने आगे लिखा, “बुनियादी बातें सीखिए, वरना यह पेज डिलीट कर दीजिए। मेरा कमेंट डिलीट मत करना। सलमान सर को भी इसे देखने दीजिए, ताकि उन्हें पता चले कि आप लोगों ने गलती की है।” प्रोडक्शन ने पोस्ट एडिट कर जोड़ा अमाल का नाम अमाल की पोस्ट सामने आने के बाद सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस ने पोस्ट एडिट की और इसमें अमाल मलिक का नाम जोड़ा। इंस्टाग्राम पोस्ट एडिट कर क्रेडिट जोड़ा गया है, हालांकि X पर अब भी क्रेडिट नहीं दिया गया है। सलमान खान ने दिया था अमाल को ब्रेक अमाल मलिक के करियर में सलमान खान का योगदान रहा है। सलमान ने साल 2014 में अपनी फिल्म ‘जय हो’ से अमाल को बॉलीवुड में बतौर म्यूजिक कंपोजर ब्रेक दिया था। साथ ही सलमान ने अरमान मलिक के म्यूजिक एल्बम लॉन्च में पहुंचकर उनका सपोर्ट किया था। बुक लॉन्च में मलिक परिवार के साथ सलमान। बाएं से दाहिने अमाल मलिक, सलमान खान, डब्बू मलिक, अरमान मलिक। इसके बाद साल 2015 में सलमान खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म ‘हीरो’ के लिए अमाल मलिक ने ही संगीत तैयार किया था। इस फिल्म का गाना “मैं हूं हीरो तेरा” ब्लॉकबस्टर रहा, जिसे ओरिजिनली अमाल के भाई अरमान मलिक ने गाया था और बाद में खुद सलमान खान ने भी अपनी आवाज में इसका एक स्पेशल वर्जन रिकॉर्ड किया था। बयानों से चर्चा में हैं अमाल मलिक, इंडस्ट्री पर लगाए आरोप ब्रेक का फैसला अमाल के पिछले कुछ महीनों में किए गए कई भावनात्मक पोस्ट के बाद आया है। इन पोस्ट में उन्होंने इंडस्ट्री में अपने संघर्ष के बारे में बात की थी। मई में उन्होंने फिल्म और म्यूजिक बिजनेस के कुछ प्रभावशाली लोगों पर उन्हें किनारे करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि पिछले कई सालों में उन्हें करीब पांच दर्जन प्रोजेक्ट्स से हटा दिया गया। बॉलीवुड में काम जारी रखने की अपनी कोशिशों के बारे में अमाल ने कहा था, “मैं पिछले 8 साल से पूरी ईमानदारी और काम की कुछ सम्मानजनक शर्तों के साथ अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं, लेकिन दुख की बात है कि इस जगह पर यह काम नहीं करता।” उन्होंने आगे कहा, “इस जगह और इसके काम करने के तरीके के बारे में सच छिपाने में मेरी असमर्थता उन्हें और परेशान करती है। इसकी वजह से मुझे और मेरे परिवार को बेकार की धमकियां मिलती हैं। कुछ बहुत ताकतवर लोगों का समूह है, जो नहीं चाहता कि मैं उनकी फिल्मों या किसी भी फिल्म का हिस्सा बनूं। यह सिर्फ लेबल्स की बात नहीं है, अब मामला इससे आगे बढ़ चुका है। यह अहंकारी लोगों का मिला-जुला सिंडिकेट है।” ग्रुपिज्म और इंडस्ट्री पॉलिटिक्स पर भी बोले अमाल ने दावा किया था कि इंडस्ट्री की पॉलिटिक्स और ग्रुपिज्म की वजह से फिल्मों में उनका संगीत कम सुनाई देता है। ब्रेक का ऐलान करने से सिर्फ दो दिन पहले अमाल ने फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री के कुछ लोगों पर उनके और उनके काम के खिलाफ सोशल मीडिया पर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था। कुछ समय पहले ही अमाल मलिक कंपोजर तनिष्क बागची से विवाद होने से भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘करीब 10 साल तक मैंने अपने गुस्से को दबाकर रखा, लेकिन आज एक दशक बाद मुझे खुलकर सामने आना पड़ा, क्योंकि यहां कोई भी सही बात के लिए खड़ा नहीं होता और न ही इंडस्ट्री के गलत लोगों को बेनकाब करता है। यहां किसी में सच को सच कहने की हिम्मत नहीं है, लेकिन किसी न किसी को यह करना ही था। मैं उसके गलत कामों और अनैतिक हरकतों पर बहुत समय से चुप था।’
Chhindwara School Mid Day Meal Controversy

Hindi News Career Chhindwara School Mid Day Meal Controversy | Rotten Potatoes Video 15 मिनट पहले कॉपी लिंक एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्कूल का वीडियो सामने आया है जिसमें स्टूडेंट्स को कच्चे आलू खिलाए जा रहे थे जिनकी क्वालिटी भी बेहद खराब थी। मिड डे मील की ग्रामीणों ने शिकायत की थी मानेगांव के इस स्कूल में बच्चों को खराब खाना मिलने की शिकायत ग्रामीणों ने की थी कि बच्चों को स्कूल में बेहद घटिया क्वालिटी का खाना दिया जा रहा है। मिड डे मील बनाने वाली वर्कर ने प्रिंसिपल की शिकायत भी की है। उनका कहना है कि प्रिंसिपल मेडम हमें कोई भी राशन उपलब्ध नहीं करवाती हैं जिससे हम अच्छा और जरूरत के मुताबिक खाना बना सकें। प्रिंसिपल के मुताबिक स्कूल में मिड डे मील बनाने की व्यवस्था स्कूल प्रबंधन ही देखता है इसीलिए हम खाने में क्वालिटी बेहतर हो इसका ध्यान रखते हैं। कहीं खाने में बाल, कीड़े आते हैं इसी हफ्ते डिंडौरी विकासखंड के देवरी मिंगडी एकीकृत माध्यमिक स्कूल में बच्चों को मैन्यू के मुताबिक मध्यान्ह भोजन नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई थी। छात्राओं ने खाने की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कभी-कभी खाने में बाल और कीड़े भी मिलते हैं। बुधवार को स्कूल में कढ़ी-चावल परोसे गए थे। रसोइयों से पूछने पर उनका कहना था कि जैसा राशन मिलता है, उसी के अनुसार भोजन बनाया जाता है। यूपी के हमीरपुर के स्कूल का भी वीडियो वायरल 7 सितंबर को यूपी के हमीरपुर में बच्चे चावल और दाल का पानी खाते नजर आए। बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर केवल चावल, हल्दी, जीरा और पानी परोसे जाने का वीडियो और मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें सब्जी या दाल की जगह केवल हल्दी-पानी जैसा घोल मिलने के आरोप लगे। इससे पहले भी पूनिया देवली गांव के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 27 छात्र बीमार पड़ गए थे। बच्चों ने जी मिचलाने, उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की थी। प्रिंसिपल- शिकायत की तो, केस कर देंगे गुरुवार 10 सितंबर को बिहार के चाकंद ग्राम में उर्दू मध्य विद्यालय अमराहा के छात्रों ने खराब मिड डे मील के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। छात्रों का आरोप है कि मिड डे मील की क्वालिटी बहुत ज्यादा खराब है। स्कूल में शिकायत करने पर प्रिंसिपल कहते हैं कि ‘खाना है तो खाओ, वर्ना घर चले जाओ’ । साथ ही बच्चों को धमकाया जाता है कि अगर कहीं शिकायत की तो केस कर देंगे। बिहार में कहीं नमक की जगह डिटर्जेंट, कहीं सब्जी में कीड़े बीते हफ्ते बिहार के सिर्फ अरवल जिले के सदर प्रखंड के करीब 75 सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए गए खाने में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई थी। खाने में कीड़े देखकर बच्चों ने खाना खाने से इंकार कर दिया था। कई जगहों पर प्लेटों में रखा खाना बच्चों ने फेंक दिया। स्कूल में खाना परोसने के दौरान कई स्कूलों में सब्जी के अंदर छोटे-छोटे सफेद कीड़े दिखाई दिए। खाने में कीड़े देखने के बाद शिक्षा विभाग में शिकायत की गई। बिहार के नालंदा में स्कूल में मिड डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर मिलाने की खबर सामने आई थी। मिड-डे-मील खाने के बाद 34 बच्चों के बीमार पड़े थे और जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह को निलंबित कर दिया था। राजस्थान में गंदे कंटेनर में खाना जोधपुर के कुछ सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मिड-डे मील का वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें बच्चों के लिए लाए जा रहे खाने के बर्तन (ड्रम) बेहद गंदे और खाना (रोटियां व सब्जियां) खराब व जली हुई स्थिति में थीं। मामले के तूल पकड़ने और वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन किया था। केंद्र सरकार के मुताबिक मिड डे मील का फॉर्मेट मिड-डे मील का साप्ताहिक मैन्यु और खाने की मात्रा राज्य सरकार और केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक तय किया जाता है। देशभर में 10.35 लाख से ज्यादा सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल हैं जहां रोज लगभग 8.5 करोड़ बच्चे स्कूल में मिड डे मील खाते हैं। ———————— ये खबर भी पढ़ें.. ‘इतनी फोर्स लगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा’:गोरखपुर की यूनिवर्सिटी में छात्रों को धमकाते SI का वीडियो वायरल, एक महीने में 10 से ज्यादा कॉलेज प्रोटेस्ट दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी यानी DDU कैंपस का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सब इंस्पेक्टर (दरोगा) स्टूडेंट्स को धमकाते हुए कह रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मराठी बोलने से इनकार करने पर विवादों में हैं। वह कुछ समय पहले दही हांडी प्रोग्राम में पहुंचे थे, जहां शिवसेना नेता (शिंदे गुट) और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने कहा था। संजय ने इनकार कर दिया और कहा कि वो 6 साल तक जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख सके। संजय के बयान पर विवाद हो गया, जिसके बाद अब उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को कॉल कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अच्छी मराठी आती है। गलत संदेश गया, तो माफी मांगता हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताप सरनाईक एक बैठक में थे, तभी संजय दत्त का फोन आया। एक्टर ने बातचीत की शुरुआत मराठी में “प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र” कहकर की। संजय दत्त ने सफाई देते हुए कहा कि ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी। उन्होंने सरनाईक से कहा, “अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।” बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन दौर में बालासाहेब ठाकरे मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे। संजय दत्त ने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे के प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं। जानिए क्या है पूरा विवाद? संजय दत्त रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर प्रताप सरनाईक ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।
मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मराठी बोलने से इनकार करने पर विवादों में हैं। वह कुछ समय पहले दही हांडी प्रोग्राम में पहुंचे थे, जहां शिवसेना नेता (शिंदे गुट) और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने कहा था। संजय ने इनकार कर दिया और कहा कि वो 6 साल तक जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख सके। संजय के बयान पर विवाद हो गया, जिसके बाद अब उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को कॉल कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अच्छी मराठी आती है। गलत संदेश गया, तो माफी मांगता हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताप सरनाईक एक बैठक में थे, तभी संजय दत्त का फोन आया। एक्टर ने बातचीत की शुरुआत मराठी में “प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र” कहकर की। संजय दत्त ने सफाई देते हुए कहा कि ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी। उन्होंने सरनाईक से कहा, “अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।” बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन दौर में बालासाहेब ठाकरे मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे। संजय दत्त ने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे के प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं। जानिए क्या है पूरा विवाद? संजय दत्त रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर प्रताप सरनाईक ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।
Amritsar Woman UK Marriage Grooming Controversy

ससुराल वालों ने कोमलप्रीत के ड्रिंक करते हुए कि ये फोटो जारी की है। अमृतसर से इंग्लैंड जाकर मुस्लिम व्यक्ति के साथ शादी करने वाली कोमलप्रीत को लेकर ससुराल ने कई खुलासे किए। सास ने बताया कि कोमलप्रीत के साथ बेटे नवप्रीत सिंह की शादी 2023 में की थी। कोमलप्रीत के परिवार ने कहा था कि बेटी अमृतधारी है और कीर्तन करती है। अ . उन्होंने कहा कि बेटे को शादी के बाद उसने अंडा तक खाने से हटा दिया। बेटे ने शादी से पहले केश नहीं रखे थे। इसने उसके केश भी रखवा दिए लेकिन बाद में धोखा कर दिया। सास ने बताया कि बेटा उसके पास इंग्लैंड गया तो उसे उसका व्यवहार ठीक नहीं लगा। बेटे ने कोमलप्रीत का फोन देखना चाहा तो उसने उसकी कॉलर पकड़ ली। इसके बाद बेटे को अपने साथ नहीं रखा। इसने बेटे को अगवा करने की भी कोशिश की। उसने नंगा कर घर भेजा। उन्होंने बताया कि उन्हें भी कोमलप्रीत ने फोन पर अम्मीजान कहना शुरू कर दिया था। 2 बार तो कोमलप्रीत को वीजा रिफ्यूज होने के बाद 40 लाख रुपए लगाकर इंग्लैंड भेजा था। कोमलप्रीत ने ग्रूमिंग की भी स्क्रिप्ट घड़ी है। बहू का परिवार चाहता है कि जत्थेबंदियां बेटी को मुस्लिम के पास से ले आएंगी, लेकिन कोमलप्रीत ने सोच समझकर शादी की है। ससुराल वालों ने कोमलप्रीत के ड्रिंक करते के फोटो शेयर किए हैं। ससुराल वालों ने दावा किया कोमलप्रीत ड्रिंक करती है।- फाइल फोटो सास-ससुर ने सुनाई बहू की पूरी कहानी… डेढ़ साल तक साथ रही, भनक नहीं लगने दी: सास बीर कौर और ससुर बलविंदर सिंह ने निजी चैनल से बातचीत करते हुए बताया कि बहू के इंग्लैंड जाने के बाद उसने करीब डेढ़ साल तक बेटे को अपने पास नहीं बुलाया। कई बार कहने पर उसने पति को फरवरी 2026 में इंग्लैंड बुलाया, लेकिन वहां पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ने लगा। मोबाइल फोन को लेकर भी दोनों में कहासुनी हुई। बहू ने बेटे के साथ हाथापाई की। इसके बाद बेटे ने उसके मायके वालों से संपर्क किया, लेकिन वहां से भी उसे ही गलत ठहराया गया। अमृतधारी थी और कीर्तन करती थी: उन्होंने कहा कि बहू ने इंग्लैंड जाने के बाद अपने ककार उतार दिए। शादी के समय बहू अमृतधारी थी और कीर्तन करती थी। उन्होंने कभी इस बात पर आपत्ति नहीं की कि बहू किसके साथ रहना चाहती है। उनकी मुख्य शिकायत यह है कि विदेश भेजने में खर्च किए गए 35-40 लाख रुपए और बेटे के साथ हुए धोखे का समाधान होना चाहिए। बहू को बेटी की तरह रखा: सास ने बताया कि शादी के समय उन्होंने बहू को बेटी की तरह रखा। यहां तक कि उसके विदेश जाने के लिए घर में मांस और अंडा तक बंद कर दिया था। उन्हें उम्मीद थी कि शादी के बाद बेटा-बहू विदेश में साथ रहेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक होगी। बहू के मायके वालों ने बाद में उनसे संपर्क रखना लगभग बंद कर दिया। विवाद के बाद कई बार पंचायत और पुलिस स्तर पर समझौते की कोशिश हुई, लेकिन परिवार के अनुसार बहू तलाक लेने पर अड़ी रही। बेटे को नंगा कर घर भेजा: उन्होंने बताया कि बेटे नवप्रीत को जब कोमलप्रीत के बारे में सब पता चला तो उसने उसके 1 लाख रुपए भी ले लिए। इसके बाद उसे कार में बैठाकर कहीं बाहर ले गई। वहां पर उसके कपड़े उतरवा लिए। बेटे को नंगा कर कार से उतार लिया। इसके बाद बेटे ने रिश्तेदारों को फोन कर कपड़े मंगवाए और घर गया। बेटे ने कोमलप्रीत के वीडियो इसलिए बनाए ताकि उसके साथ हुई घटना का सच सामने आ सके। सास बीर कौर और ससुर बलविंदर सिंह ने बताया कि कोमलप्रीत को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था। कार में घुमाया, फिर गलत व्यवहार करने लगी वहीं, नवदीप के भाई ने बताया कि इंग्लैंड जाने के बाद छोटे भाई ने उसे फोन पर बताया कि कोमलप्रीत का व्यवहार ठीक नहीं लग रहा है। उसने एक दिन उसे कार में घुमाया और उसके बाद अजीब व्यवहार कर रही है। उसके चाय के कप रखने, बाथरूम में नहाने तक पर गलतियां निकाल रही है। कोमलप्रीत की हरकतों के बारे में जब नवदीप ने अपने ससुर घुग्गी को बताया तो उसने उसे गालियां निकालीं, जिससे कोमलप्रीत पर शक बढ़ता गया। परिवार की प्रशासन से पैसा वापस दिलाने की मांग परिवार ने प्रशासन से विदेश भेजने में खर्च हुए 40 लाख रुपए वापस दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने बेटे की शादी और विदेश भेजने के लिए अपनी इनकम से ज्यादा खर्च किया। उन्हें न तो युवती की ओर से कोई आर्थिक मदद मिली और न ही अब तक उनका खर्च वापस हुआ। परिवार ने पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने की मांग की है। कोमलप्रीत की नवदीप के साथ 2023 में शादी हुई थी। कोमलप्रीत कैसे बनी आइरा, 4 पॉइंट… मुस्लिम ड्राइविंग टीचर के संपर्क में आई: कोमलप्रीत कौर लंदन में करीब 6 महीने पहले ड्राइविंग सीखने के दौरान वह पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम ड्राइविंग टीचर के संपर्क में आई, जिसने उसका ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन करवा दिया। आरोपी पहले कर चुका दो शादियां: परिवार का आरोप है कि आरोपी पहले से दो शादियां कर चुका है। उसने कोमलप्रीत का नाम बदलकर आइरा रख दिया और उसे परिवार से दूर कर दिया। पिछले एक महीने से वह माता-पिता के फोन भी नहीं उठा रही थी। पहले धार्मिक थी कोमलप्रीत: पिता के मुताबिक, उनकी बेटी पहले नियमित रूप से पाठ और सेवा करती थी। परिवार को आशंका है कि उसके साथ गलत हो सकता है और वह किसी खतरे में हो सकती है। बेटी को सुरक्षित वापस लाने की मांग: परिवार ने केंद्र सरकार, ब्रिटेन की सिख संस्थाओं और गुरुद्वारा कमेटियों से मदद की अपील की है। उनकी मांग है कि कोमलप्रीत को सुरक्षित निकालकर भारत वापस लाया जाए। ———– ये खबर भी पढ़ें… सिख से मुस्लिम बनी पंजाबी युवती पहले से शादीशुदा निकली:पति ने इंग्लैंड में 7 दिन झाड़ियों में छिपकर रखी नजर, युवक संग
DDU Gorakhpur University Controversy | SI Threatens Students Video Viral

Hindi News Career DDU Gorakhpur University Controversy | SI Threatens Students Video Viral 10 मिनट पहले कॉपी लिंक दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी यानी DDU कैंपस का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सब इंस्पेक्टर (दरोगा) स्टूडेंट्स को धमकाते हुए कह रहे हैं कि ‘इतनी फोर्स लगाऊंगा कि ठंडा कर दूंगा, जानते नहीं हो ये गोरखपुर पुलिस है।’ बता दें कि ये वीडियो DDU कैंपस का है, जहां कुछ स्टूडेंट्स अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। ये वीडियो इन स्टूडेंट्स को हटाने का है, जो अब वायरल हो रहा है। स्टूडेंट्स को हटाने पहुंचे थे एडिशनल प्रॉक्टर ये स्टूडेंट्स DDU कैंपस के प्रशासनिक भवन के सामने अपनी कुछ मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इन्हें हटाने के लिए यूनिवर्सिटी के एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय, पुलिस फोर्स और यूनिवर्सिटी गार्ड पहुंचे थे। जब स्टूडेंट्स ने इसका विरोध किया तो उन्हें प्रशासनिक भवन से हटाने की कोशिश की गई। धक्का-मुक्की हुई और दरोगा (SI) ने धमकी दी DDU कैंपस से जब भूख हड़ताल कर रहे स्टूडेंट्स को हटाने की कोशिश की गई, तो उनके सपोर्ट में बैठे स्टूडेंट भड़क गए। देखते ही देखते छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बहस और नोकझोंक की स्थिति बन गई। विवाद बढ़ने के दौरान मौके पर धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद एडिशनल प्रॉक्टर डॉ. वेद प्रकाश राय को वहां से निकलना पड़ा। ये धरना 25 अगस्त को शुरू हुआ और जब स्टूडेंट्स की मांगे नहीं मानी गईं तो स्टूडेंट्स 5 सितंबर को भूख हड़ताल पर बैठ गए। यूनिवर्सिटी में चल रही अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन DDU में छात्रों का ये प्रदर्शन 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने चल रहा था। छात्र नेता यूनिवर्सिटी से जुड़ी अपनी समस्याओं और कथित अनियमितताओं को लेकर धरने पर बैठे थे। 5 सितंबर से ये धरना भूख हड़ताल में बदल गया। स्टूडेंट्स का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सोशल मीडिया पर पुलिस से सवाल पूछ रहे हैं यूजर इसी पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। इसी दौरान एक दारोगा का वीडियो रिकॉर्ड हुआ, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दारोगा के इस बयान को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सोशल मीडिया पर यूजर स्टूडेंट्स के समर्थन में उतर आए हैं। हालांकि अभी तक इस वीडियो पर DDU ने कोई भी सफाई नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट- शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का सभी को अधिकार हाल ही में दिल्ली में जंतर-मंतर पर पेपर लीक को लेकर हुए बड़े प्रदर्शन में स्टूडेंट्स के खिलाफ हुई FIR पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम CJI सूर्यकांत ने कहा था कि संविधान शांतिपूर्ण ढंग से और कानून के दायरे में रहकर किये गए प्रदर्शन की पूरी तरह आजादी देता है। देशभर के कॉलेज में चल रहे प्रोटेस्ट हाल ही में गांधी मेडिकल कॉलेज (भोपाल) और गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (ग्वालियर) में स्टाइपेंड बढ़ाने और अन्य मांगों को लेकर इंटर्न व जूनियर डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया, जिस दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन भी चलाए। NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ हैदराबाद में कॉन्वोकेशन में मुख्य अतिथि की उपस्थिति और अन्य मुद्दों पर 400 से ज्यादा छात्रों ने विरोध जताया था। IIT दिल्ली में स्टूडेंट के सुसाइड के बाद और अन्य व्यवस्थाओं के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद जांच समिति बनाई गई। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एग्जाम रिजल्ट में पारदर्शिता और अन्य प्रशासनिक मांगों को लेकर छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना किया था। IISER (पुणे) में परिसर में छात्र की मौत के बाद मेंटल हेल्थ और अन्य मांगों को लेकर लगभग 900 छात्रों ने साइन किये थे और विरोध प्रदर्शन किया था। ——————- ये खबर भी पढ़ें.. भारत के 3 राज्यों में मेडिकल इंटर्न की हड़ताल:स्टाइपेंड बढ़ाने की कर रहे मांग, वाटर कैनन, लाठीचार्ज, कहा – हम डॉक्टर हैं, क्रिमिनल नहीं मध्य प्रदेश में MBBS इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में आज भी प्रदर्शन जारी है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

10 मिनट पहले कॉपी लिंक जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन AfD की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD पार्टी की चीफ एलिस वीडेल खुद लेस्बियन हैं। उनकी शादी श्रीलंका में जन्मी एक महिला से हुई है। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडेल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडेल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? AfD चीफ एलिस वीडल चुनाव के बाद रविवार को बर्लिन स्थित पार्टी मुख्यालय में जर्मनी का झंडा लहराती हुईं। बचपन: नाजी अतीत वाले फैमिली में जन्म जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई और उन्हें जज बना दिया गया। उनका परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो उनका परिवार सिलेसिया से भागकर पश्चिमी जर्मनी आ गया। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। 1985 में जब वीडल के दादा की मौत हुई, तब वह सिर्फ छह साल की थीं। वीडल के मुताबिक, उनके दादा ने नाजी शासन के दौरान जो काम किए थे, उस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, “वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए वह कभी-कभी अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं।” स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनकी सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और इसके बाद जर्मनी लौट आईं। राजनीति में आने से पहले वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री 45 साल की एलिस वीडल की शादी एक श्रीलंकाई मूल की महिला से हुई है। उनकी पत्नी फिल्ममेकर हैं। साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था और बचपन में एक स्विस परिवार ने उन्हें गोद ले लिया था। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई और 2009 से वे साथ रहने लगीं। आज वीडल और सारा स्विट्जरलैंड में अपने दो गोद लिए हुए बेटों के साथ रहती हैं। दोनों बच्चों की परवरिश साथ मिलकर करती हैं। सारा के मुताबिक वह खुद घर में पत्नी की जिम्मेदारियां निभाती हैं। दोनों ने अपने रिश्ते को काफी निजी रखा है और उनकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई। राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं एलिस वीडल 5 जुलाई 2026 को एरफुर्ट में पार्टी कांग्रेस के दौरान भाषण देती हुईं। 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गई थीं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की राजनीति, शरणार्थी बने बड़ा मुद्दा फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध तब तक और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए सीरिया के लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे
Alice Weidel Controversy | AfD Leader Against Same-Sex Marriage Germany

6 घंटे पहलेलेखक: संजय झा कॉपी लिंक जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन इस पार्टी की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD की चीफ एलिस वीडल खुद लेस्बियन हैं। उनकी पार्टनर श्रीलंका में जन्मी हैं। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? AfD चीफ एलिस वीडल चुनाव के बाद रविवार को बर्लिन स्थित पार्टी मुख्यालय में जर्मनी का झंडा लहराती हुईं। बचपन: दादा हिटलर समर्थक थे, घर छोड़कर भागना पड़ा जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई। हिटलर ने उन्हें 1941 में नाजी कब्जे वाले वारसॉ में सैन्य न्यायधीश बनाया था। वीडल परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो वे भागकर पश्चिमी जर्मनी पहुंचे। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। वह सिर्फ 6 साल की थीं, जब उनके दादा की मौत हो गई। एलिस के मुताबिक, नाजी शासन के दौरान उनके दादा ने क्या काम किए थे, इस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए मैं अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थी स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनका कहना था कि डॉक्टर की पूरी जिंदगी बीमार लोगों के बीच गुजरती है। ऐसे पेशे में जाने का कोई मतलब नहीं है। पिता की सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और फिर जर्मनी लौट आईं। वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और दुनियादारी की अच्छी समझ हो गई थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री 45 साल की एलिस वीडल की पार्टनर एक श्रीलंकाई मूल की महिला हैं। वह फिल्ममेकर हैं। साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। सारा का जन्म श्रीलंका में हुआ था। जब वह सिर्फ तीन महीने की थीं, तब स्विट्जरलैंड के एक पादरी दंपती ने उन्हें गोद ले लिया था। वीडल और सारा की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। दोनों 2009 से साथ हैं। वे स्विट्जरलैंड में अपने दो बेटों के साथ रहती हैं और मिलकर उनकी परवरिश करती हैं। सारा बोसार्ड ने दोनों बच्चों को स्पर्म डोनेशन की मदद से जन्म दिया। दोनों बच्चों के जैविक पिता अलग-अलग पुरुष हैं। यह कोई गुमनाम स्पर्म बैंक का मामला नहीं था। वीडल और सारा दोनों बच्चों के जैविक पिताओं को जानती हैं और बच्चों को भी अपने जैविक पिता की पहचान पता है। हालांकि, इन दोनों पुरुषों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई… राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं एलिस वीडल 5 जुलाई 2026 को एरफुर्ट में पार्टी कांग्रेस के दौरान भाषण देती हुईं। 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं, बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गईं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की सियासत, शरणार्थी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की
IIT Mandi Bhagavad Gita Poster; Shudra Remark Controversy

Hindi News Career IIT Mandi Bhagavad Gita Poster; Shudra Remark Controversy | Laxmidhar Behera 18 मिनट पहले कॉपी लिंक IIT मंडी के कैंपस में लगे एक भगवद्गीता-थीम वाले पोस्टर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पोस्टर में शूद्रों का काम ‘ऊंची जातियों की सेवा करना’ बताया गया था। मामला तूल पकड़ता देख संस्थान के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह छात्रों की अपनी व्याख्या थी, संस्थान का इससे कोई लेना-देना नहीं। दिलचस्प बात यह है कि बेहरा खुद लंबे समय से भगवद्गीता पढ़ाते आए हैं और इस्कॉन (ISKCON) से भी उनका पुराना नाता है। वे IIT मंडी में गीता पर एक पूरा कोर्स पढ़ाते हैं और प्रस्तावित भक्तिवेदांत यूनिवर्सिटी के संस्थापक भी हैं, जिसे इस्कॉन की ही एक पहल बताया जाता है। निदेशक ने बताया छात्रों की गलती रविवार को पीटीआई से बात करते हुए बेहरा ने कहा- ‘कुछ छात्रों ने गीता की अपने तरीके से व्याख्या कर दी। मैंने जांच समिति बना दी है। यह एक स्टूडेंट इवेंट था।’ साथ ही उन्होंने साफ किया कि वे और उनका संस्थान, दोनों जातिगत भेदभाव के सख्त खिलाफ हैं। वायरल पोस्टर, जिसमें शूद्रों को अगड़ी जातियों का सेवक बताया गया है। कैंपस को भेजा माफीनामा जैसा ईमेल रविवार को ही बेहरा ने पूरे कैंपस को एक ईमेल भेजा, जिसका टाइटल है- कैंपस में हाल ही में लगाए गए पोस्टर की खुली निंदा।’ इसमें उन्होंने लिखा कि 4 सितंबर को जन्माष्टमी के दौरान यह पोस्टर लगा, और इसकी जानकारी मिलते ही उन्हें ‘झटका’ लगा। उन्होंने साफ किया कि संस्थान ने इसे किसी भी तरह से समर्थन नहीं दिया। ईमेल में बेहरा ने लिखा- ‘मैंने हर मंच पर निजी तौर पर जातिगत भेदभाव के हर रूप के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। मैंने जांच समिति बना दी है, ताकि कैंपस का इस्तेमाल आगे कभी ऐसी किसी हरकत के लिए न हो। जो लोग इससे आहत हुए हैं, मैं उनकी भावनाएं समझता हूं।’ बेहरा- मैंने पोस्टर नहीं देखा उन्होंने आगे लिखा कि संस्थान संविधान में दर्ज समानता, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक सोच जैसे मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, और कैंपस से हर तरह के भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की अपील की। बेहरा के मुताबिक, यह पोस्टर एक छात्र के नेतृत्व में तैयार हुआ था। मामले की जांच के लिए अब फैकल्टी सदस्यों के साथ-साथ SC और OBC समेत अलग-अलग सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों वाली एक समिति बना दी गई है। बेहरा ने बताया कि इस दौरान वे कैंपस से बाहर थे और शनिवार को ही लौटे। विवाद की जानकारी उन्हें रविवार सुबह मिली। उन्होंने कहा- ‘मैंने पोस्टर देखा तक नहीं है। मैं किसी का पक्ष नहीं लेना चाहता, फैसला समिति पर छोड़ता हूं।’ निदेशक कई बार विवादों में आ चुके हैं बेहरा की IIT मंडी प्रोफाइल के मुताबिक, वे पिछले 27 सालों से युवाओं को ‘गीता के जरिए शांति के सार्वभौमिक सिद्धांत’ सिखा रहे हैं। ‘एचजी लीला पुरुषोत्तम दास’ नाम से भी जाने जाने वाले बेहरा, प्रस्तावित भक्तिवेदांत यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं। उन्होंने दावा किया- ‘इस्कॉन ही अकेला संगठन है जो जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ सबसे सख्ती से बोलता है। वहां शूद्र समुदाय के लोग भी पुजारी हैं, मुस्लिम भी पुजारी हैं। हम हर तरह के जातिवाद के खिलाफ हैं- सारे काम गुण और कर्म से तय होते हैं, जाति से नहीं।’ उन्होंने यह भी बताया कि जब वे संस्थान में आए थे, तब OBC, SC और ST वर्गों से कोई फैकल्टी सदस्य नहीं था, अब यह संख्या काफी बढ़ चुकी है। मांस न खाने की कसम दिलवा चुके हैं बेहरा रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पढ़ाने वाले इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग प्रोफेसर बेहरा पहले भी विवादों में रह चुके हैं। 2023 में उन्होंने छात्रों से मांस न खाने की कसम दिलवाई थी, यह कहते हुए कि हिमाचल में हो रहे भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं जानवरों पर हो रही क्रूरता की वजह से हैं। इससे एक साल पहले, निदेशक बनने के तुरंत बाद, एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने मंत्र जपकर एक दोस्त के परिवार को ‘बुरी आत्माओं’ से छुटकारा दिलाया। जून में भी IIT मंडी के इंडियन नॉलेज सिस्टम एंड मेंटल हेल्थ सेंटर ने गीता, आयुर्वेद और पुनर्जन्म पर एक सम्मेलन कराया था, जिसमें बेहरा जनरल चेयर की भूमिका में थे और ‘पुनर्जन्म व मृत्यु के बाद संवाद’ नाम के एक सेशन के सह-आयोजक भी रहे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… हॉस्टल में खराब खाने, बदहाली के खिलाफ छात्राओं का प्रदर्शन:छात्राओं ने रामधुन गाकर किया विरोध, खाने में प्लास्टिक, सिगरेट के टुकड़े मिले सूरत के सरकारी समरस गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने 1 सितंबर की रात को विरोध प्रदर्शन किया। उनका ये प्रदर्शन खाने की खराब क्वालिटी, पानी की सप्लाई और रहने की खराब व्यवस्थाओं को लेकर था। छात्राओं ने “रामधुन” गाया और कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध जारी रहेगा। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…





