Saturday, 23 May 2026 | 02:36 PM

Trending :

EXCLUSIVE

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

भारत में महिलाएं प्राचीन काल से ही सजने-संवरने और सौंदर्य देखभाल के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती रही हैं। कभी उबटन, चंदन, गुलाबजल, काजल, मेहंदी और प्राकृतिक तेलों तक सीमित रहने वाला ब्यूटी कल्चर आज अरबों रुपए के विशाल बाजार में बदल चुका है। पहले सौंदर्य देखभाल का मतलब केवल पारंपरिक घरेलू नुस्खे और सामाजिक अवसरों पर सजना-संवरना होता था, लेकिन अब यह आत्मविश्वास, लाइफस्टाइल, सेल्फ-केयर, सोशल मीडिया उपस्थिति और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बन गया है। भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल अब सिर्फ काजल, पाउडर और एक लिपस्टिक तक सीमित नहीं रही। बीते दो दशकों में भारत का ब्यूटी कल्चर तेजी से बदला है। पहले जहां ‘गोरा दिखाना’ ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वादा था, वहीं अब ‘स्किन हेल्थ’, ‘ग्लो’, ‘सन प्रोटेक्शन’, ‘हाइड्रेशन’ और ‘एंटी-एजिंग’ जैसे शब्द आम हो चुके हैं। महिलाएं अब यह जानना चाहती हैं कि किसी प्रोडक्ट में कौन-सा सक्रिय तत्व है और वह त्वचा पर क्या असर डालेगा।

कोविड के बाद ‘स्किन-फर्स्ट” और ‘स्किन मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। यानी कम लेकिन असरदार उत्पादों का इस्तेमाल। ग्लोबल डेटा, वोग इंडिया जैसे प्रकाशनों के मुताबिक अब ‘हाइब्रिड ब्यूटी’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यानी ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल जो मेकअप और स्किनकेयर दोनों का काम करें। जैसे- एसपीएफ वाला फाउंडेशन, सीरम युक्त कंसीलर या मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो। ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते एक दशक में परिवारों के मासिक खर्च में स्किनकेयर, हेयरकेयर और कॉस्मेटिक्स का हिस्सा लगातार बढ़ा है। प्रति महिला ब्यूटी और पर्सनल केयर मासिक खर्च पांच गुना तक बढ़ गया है। बदलता ट्रेंड: फेयर स्किन, ग्लास स्किन, मैट स्किन… हाइब्रिड 1950-60 और पहले – घरेलू नुस्खों और सादगी का दौर ब्यूटी केयर मतलब बेसन, मलाई, हल्दी, गुलाबजल और नारियल तेल। ड्रेसिंग टेबल पर टैल्कम पाउडर, काजल और सिंदूर ही मुख्य उत्पाद होते थे। मेकअप शादी या विशेष अवसरों तक सीमित था। 1960-80- फिल्मों का असर, गोरापन सुंदरता का प्रतीक हीरोइनों की हेयरस्टाइल और चटक मेकअप का असर बढ़ा। रंगीन लिपस्टिक, नेल पॉलिश, कॉम्पैक्ट पाउडर लोकप्रिय हुए। गोरी त्वचा सुंदरता का प्रतीक बनी। फेयरनेस क्रीम का बाजार तेजी से बढ़ा। 1990 का दशक – उदारीकरण और विदेशी ब्रांड्स का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत आए। अलग-अलग शेड्स की लिपस्टिक, फाउंडेशन और हेयर कलर के विकल्प मिले। फैशन मैगजीन और टीवी विज्ञापनों ने ‘ग्लैमरस लुक’ को लोकप्रिय बनाया। 2000 का दशक – सलून संस्कृति का उदय छोटे शहरों में भी फेशियल, हेयर स्पा, स्किन ट्रीटमेंट आम होने लगे। युवा लड़कियां भी नियमित ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगीं। 2010 के बाद – इन्फ्लुएंसर्स ने बदला ट्रेंड ‘नो-मेकअप मेकअप’, ‘कोरियन स्किनकेयर’, ‘सनस्क्रीन’, ‘रेटिनॉल’, ‘नियासिनामाइड’ और ‘क्लीन ब्यूटी’ जैसे शब्द आम हो गए। (स्रोत- इंस्टीट्यूटो मारांगोनी, वोग)
अब ब्यूटी यानी स्किन हेल्थ ब्यूटी काउंसलर लवीना मनवानी कहती हैं, भारतीय महिलाओं की सोच में सबसे बड़ा बदलाव ‘स्किन हेल्थ’ को लेकर आया है। सोशल मीडिया, कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स ने भी पसंद बदली है। पहले ड्रेसिंग टेबल पर 4-5 उत्पाद होते थे, अब 20-30 होना सामान्य है। 10 साल में ब्यूटी केयर खर्च 5 गुना बढ़ गया है। तेजी से बढ़ रहा ब्यूटी बाजार रेडसीर, रिसर्च एंड मार्केट्स जैसी कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर (बीपीसी) बाजार का आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए था, जो 2030 तक 4 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। 3-4 वर्षों में भारत चौथा सबसे बड़ा बीपीसी मार्केट होगा। बदल रहा है ब्यूटी प्रोडक्ट की खरीदारी का तरीका 85% उपभोक्ता अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इंग्रेडिएंट्स पर ध्यान देते हैं। 48% लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से प्रभावित होकर खरीदारी करते हैं। 55% उपभोक्ताओं को कोलेजन आधारित उत्पाद आकर्षक लगते हैं। 46% लोग हायल्यूरोनिक एसिड वाले उत्पाद पसंद कर रहे हैं। (स्रोत- ग्लोबल डेटा)

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
भास्कर IPL रैंकिंग- चेन्नई या मुंबई, कौन है ऑलटाइम नंबर-1:दिल्ली-पंजाब से आगे विराट की RCB, पिछले चार साल में गिल की टीम टॉप पर

March 30, 2026/
5:12 am

IPL की ऑलटाइम बेस्ट टीम कौन सी है- इस सवाल का जवाब हमेशा बहस में उलझा रहता है। कोई ट्रॉफियों...

authorimg

May 21, 2026/
5:56 pm

CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल...

परेश रावल के विचारों से प्रेरित फिल्म ‘मर्सी’:सिनेमाघरों में रिलीज हुई, यूथेनेशिया के जटिल सवालों को उठाकर दर्शकों के बीच बहस छेड़ती है

April 29, 2026/
8:12 pm

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मर्सी 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में आई है और अपने संवेदनशील विषय के...

हज यात्रियों को छोड़कर लौट रही कार पेड़ से टकराई:छिंदवाड़ा हादसे में 3 लोगों की मौत, 3 घायल; नागपुर से सिंगोड़ी जा रहे थे

April 27, 2026/
11:33 am

छिंदवाड़ा जिले के उमरानाला क्षेत्र में सोमवार तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच एक भीषण सड़क हादसा हो...

अधिकारी ने हनी सिंह के गानों पर चिंता जताई:पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र, गानों से शराब और गन कल्चर को बढ़ावा देने का आरोप लगाया

April 3, 2026/
11:22 am

पुणे जिला बाल संरक्षण अधिकारी मंगेश जाधव ने शहर के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार को पत्र लिखकर सिंगर हनी सिंह...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

भारत में महिलाएं प्राचीन काल से ही सजने-संवरने और सौंदर्य देखभाल के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती रही हैं। कभी उबटन, चंदन, गुलाबजल, काजल, मेहंदी और प्राकृतिक तेलों तक सीमित रहने वाला ब्यूटी कल्चर आज अरबों रुपए के विशाल बाजार में बदल चुका है। पहले सौंदर्य देखभाल का मतलब केवल पारंपरिक घरेलू नुस्खे और सामाजिक अवसरों पर सजना-संवरना होता था, लेकिन अब यह आत्मविश्वास, लाइफस्टाइल, सेल्फ-केयर, सोशल मीडिया उपस्थिति और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बन गया है। भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल अब सिर्फ काजल, पाउडर और एक लिपस्टिक तक सीमित नहीं रही। बीते दो दशकों में भारत का ब्यूटी कल्चर तेजी से बदला है। पहले जहां ‘गोरा दिखाना’ ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वादा था, वहीं अब ‘स्किन हेल्थ’, ‘ग्लो’, ‘सन प्रोटेक्शन’, ‘हाइड्रेशन’ और ‘एंटी-एजिंग’ जैसे शब्द आम हो चुके हैं। महिलाएं अब यह जानना चाहती हैं कि किसी प्रोडक्ट में कौन-सा सक्रिय तत्व है और वह त्वचा पर क्या असर डालेगा।

कोविड के बाद ‘स्किन-फर्स्ट” और ‘स्किन मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। यानी कम लेकिन असरदार उत्पादों का इस्तेमाल। ग्लोबल डेटा, वोग इंडिया जैसे प्रकाशनों के मुताबिक अब ‘हाइब्रिड ब्यूटी’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यानी ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल जो मेकअप और स्किनकेयर दोनों का काम करें। जैसे- एसपीएफ वाला फाउंडेशन, सीरम युक्त कंसीलर या मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो। ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते एक दशक में परिवारों के मासिक खर्च में स्किनकेयर, हेयरकेयर और कॉस्मेटिक्स का हिस्सा लगातार बढ़ा है। प्रति महिला ब्यूटी और पर्सनल केयर मासिक खर्च पांच गुना तक बढ़ गया है। बदलता ट्रेंड: फेयर स्किन, ग्लास स्किन, मैट स्किन… हाइब्रिड 1950-60 और पहले – घरेलू नुस्खों और सादगी का दौर ब्यूटी केयर मतलब बेसन, मलाई, हल्दी, गुलाबजल और नारियल तेल। ड्रेसिंग टेबल पर टैल्कम पाउडर, काजल और सिंदूर ही मुख्य उत्पाद होते थे। मेकअप शादी या विशेष अवसरों तक सीमित था। 1960-80- फिल्मों का असर, गोरापन सुंदरता का प्रतीक हीरोइनों की हेयरस्टाइल और चटक मेकअप का असर बढ़ा। रंगीन लिपस्टिक, नेल पॉलिश, कॉम्पैक्ट पाउडर लोकप्रिय हुए। गोरी त्वचा सुंदरता का प्रतीक बनी। फेयरनेस क्रीम का बाजार तेजी से बढ़ा। 1990 का दशक – उदारीकरण और विदेशी ब्रांड्स का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत आए। अलग-अलग शेड्स की लिपस्टिक, फाउंडेशन और हेयर कलर के विकल्प मिले। फैशन मैगजीन और टीवी विज्ञापनों ने ‘ग्लैमरस लुक’ को लोकप्रिय बनाया। 2000 का दशक – सलून संस्कृति का उदय छोटे शहरों में भी फेशियल, हेयर स्पा, स्किन ट्रीटमेंट आम होने लगे। युवा लड़कियां भी नियमित ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगीं। 2010 के बाद – इन्फ्लुएंसर्स ने बदला ट्रेंड ‘नो-मेकअप मेकअप’, ‘कोरियन स्किनकेयर’, ‘सनस्क्रीन’, ‘रेटिनॉल’, ‘नियासिनामाइड’ और ‘क्लीन ब्यूटी’ जैसे शब्द आम हो गए। (स्रोत- इंस्टीट्यूटो मारांगोनी, वोग)
अब ब्यूटी यानी स्किन हेल्थ ब्यूटी काउंसलर लवीना मनवानी कहती हैं, भारतीय महिलाओं की सोच में सबसे बड़ा बदलाव ‘स्किन हेल्थ’ को लेकर आया है। सोशल मीडिया, कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स ने भी पसंद बदली है। पहले ड्रेसिंग टेबल पर 4-5 उत्पाद होते थे, अब 20-30 होना सामान्य है। 10 साल में ब्यूटी केयर खर्च 5 गुना बढ़ गया है। तेजी से बढ़ रहा ब्यूटी बाजार रेडसीर, रिसर्च एंड मार्केट्स जैसी कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर (बीपीसी) बाजार का आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए था, जो 2030 तक 4 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। 3-4 वर्षों में भारत चौथा सबसे बड़ा बीपीसी मार्केट होगा। बदल रहा है ब्यूटी प्रोडक्ट की खरीदारी का तरीका 85% उपभोक्ता अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इंग्रेडिएंट्स पर ध्यान देते हैं। 48% लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से प्रभावित होकर खरीदारी करते हैं। 55% उपभोक्ताओं को कोलेजन आधारित उत्पाद आकर्षक लगते हैं। 46% लोग हायल्यूरोनिक एसिड वाले उत्पाद पसंद कर रहे हैं। (स्रोत- ग्लोबल डेटा)

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.