Saturday, 06 Jun 2026 | 08:54 PM

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प्लैटिनम पर आयात शुल्क दोगुना:डीजल, हाइब्रिड कारों के दाम 18 हजार रुपए तक बढ़ सकते हैं

प्लैटिनम पर आयात शुल्क दोगुना:डीजल, हाइब्रिड कारों के दाम 18 हजार रुपए तक बढ़ सकते हैं

देश में डीजल एसयूवी और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें खरीदना महंगा पड़ेगा। प्लैटिनम पर प्रभावी आयात शुल्क 6.4% से बढ़कर 15.4% होना इसकी वजह है। इसका असर उन गाड़ियों पर होगा, जिनमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए कीमती मेटल इस्तेमाल होते हैं। ऑटो कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इससे मिड-साइज डीजल एसयूवी के दाम 12 हजार और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की कीमतें 18 हजार तक बढ़ सकती हैं। एंट्री-लेवल पेट्रोल कारें भी 4 हजार तक महंगी हो सकती हैं। प्लैटिनम का इस्तेमाल गाड़ियों में बीएस-6 मानक पूरा करने के लिए होता है। नीति आयोग के पूर्व निदेशक रणधीर सिंह के मुताबिक, प्लैटिनम पर ड्यूटी बढ़ने से प्रदूषण नियमों के पालन की लागत बढ़ जाएगी। टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित होंगी। स्कॉर्पियो-एन, थार, एक्सयूवी-700 जैसे मॉडलों पर महिंद्रा का खर्च बढ़ेगा। टोयोटा और मारुति की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की लागत भी बढ़ेगी। हाइब्रिड गाड़ियों में इंजन बार-बार स्टार्ट होता है। इनके फिल्टर में ज्यादा प्लैटिनम लगता है। भारी वाहनों में प्लैटिनम की खपत ज्यादा होती है इंजन में प्रदूषण रोकने के लिए प्लैटिनम का इस्तेमाल होता है। भारी वाहनों में इसकी मात्रा अधिक होने से उनकी निर्माण लागत पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। वाहन की कैटेगरी – प्लैटिनम की खपत कमर्शियल वाहन – 20+ हाइब्रिड कारें – 10-15 मंझौली डीजल एसयूवी – 6-10 पेट्रोल कारें – 2-4 (आंकड़े ग्राम में) राहत – पुराने साइलेंसर से निकलेगा सस्ता प्लैटिनम साइलेंसर फिल्टर के लिए विदेशी प्लैटिनम पर 7.5% टैक्स ही लगेगा। सरकार ने अब विदेश से पुराने और खराब फिल्टर मंगाने पर टैक्स घटाकर 4.35% कर दिया है। इससे खराब साइलेंसर से प्लैटिनम निकालकर और उसे दोबारा इस्तेमाल करना सस्ता होगा। इस फैसले से देश में रिसाइकिलिंग को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, प्लैटिनम महंगा होने से वेंडर अब ऑटो कंपनियों से ज्यादा कीमतें वसूलेंगे। असर – ईवी में बढ़ सकती है ग्राहकों की दिलचस्पी प्लैटिनम महंगा होने से इलेक्ट्रिक कारों की डिमांड बढ़ सकती है। इनमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए कैटालिटिक कन्वर्टर्स की जरूरत नहीं होती। कंपनियां हाइड्रोजन तकनीक पर भी फोकस बढ़ा सकती हैं। रिसर्च बढ़ने से भविष्य में ये कारें सस्ती हो सकती हैं। कंपनियां अभी ड्यूटी बढ़ने का असर आंक रही हैं।

क्रिकेट में पकड़ मजबूत कर रहा जापान:एशियन गेम्स के लिए तैयार किया खास मैदान, रूल बुक साथ लेकर मैच देख रहे लोग

क्रिकेट में पकड़ मजबूत कर रहा जापान:एशियन गेम्स के लिए तैयार किया खास मैदान, रूल बुक साथ लेकर मैच देख रहे लोग

बेसबॉल के दीवाने देश जापान में अब क्रिकेट की आवाज भी सुनाई देने लगी है। नागोया शहर से करीब 40 मिनट दूर बने कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में जब बल्लेबाज ने गेंद को जोरदार छक्का लगाकर मैदान के बाहर रेत और झाड़ियों में पहुंचाया, तो दर्शक तालियां तो बजा रहे थे, लेकिन साथ ही हाथ में नियमों की किताब भी पकड़े हुए थे। उन्हें खेल समझ नहीं आ रहा था, लेकिन रोमांच जरूर महसूस हो रहा था। दरअसल, सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स से पहले जापान में क्रिकेट को लेकर माहौल बनना शुरू हो गया है। पहली बार यहां क्रिकेट के लिए खास मैदान तैयार किया गया है। इसी मैदान पर 2028 टी20 वर्ल्ड कप के ईस्ट एशिया-पैसिफिक क्वालिफायर खेले जा रहे हैं। इन मुकाबलों में जापान, वानुआतु, फिजी, समोआ, इंडोनेशिया, फिलीपींस, पापुआ न्यू गिनी, कुक आइलैंड्स और दक्षिण कोरिया जैसी टीमें हिस्सा ले रही हैं। भले ही ये बड़ी क्रिकेट ताकतें न हों, लेकिन जापान के लिए यह टूर्नामेंट किसी बड़े मौके से कम नहीं है। मैदान पर मौजूद 34 साल के स्थानीय निवासी यूया ओकिमासु पत्नी और बच्चों के साथ मैच देखने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने क्रिकेट का नाम पहली बार बच्चों के मशहूर ऑस्ट्रेलियाई कार्टून ‘ब्लूई’ में सुना था। मैच देखते हुए वे नियमों की किताब पलट रहे थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मुझे खेल पूरी तरह समझ नहीं आ रहा, लेकिन देखने में मजेदार लग रहा है।’ करीब 300 लोग जापान और वानुआतु का मुकाबला देखने पहुंचे थे। कई लोग कुर्सियां लगाकर बैठे थे और कमेंटेटर उन्हें आसान भाषा में क्रिकेट के नियम समझा रहा था। एशियन गेम्स के दौरान यहां अस्थाई स्टैंड लगाए जाएंगे, जिससे करीब 2000 दर्शक मैच देख सकेंगे। जापान में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है और टोक्यो के आसपास क्रिकेट धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। बेसबॉल के देश जापान में क्रिकेट अभी नया मेहमान है, लेकिन जिस तरह लोग नियमों की किताब लेकर भी मैदान तक पहुंच रहे हैं, उससे साफ है कि यह खेल यहां धीरे-धीरे दिलों में जगह बना रहा है। श्रीलंका के क्यूरेटर तैयार करेंगे मैदान की पिच यह मैदान पहले बेसबॉल का था, इसलिए बाउंड्री लाइन के पास अब भी पिचर का छोटा टीला दिखाई देता है। मैदान की पिच तैयार करने की जिम्मेदारी श्रीलंका के अनुभवी क्यूरेटर असिथा विजयसिंघे के पास है, जो पल्लेकेले इंटरनेशनल स्टेडियम की पिच भी संभालते हैं। आयोजकों का कहना है कि यहां की पिच पाकिस्तान जैसी होगी, जहां गेंद उछाल भी लेगी और स्पिन गेंदबाजों को भी मदद मिलेगी।

10,000 students in America are under investigation.

10,000 students in America are under investigation.

सुनयना चड्ढा. नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है। अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय छात्रों के लिए नई चिंता खड़ी हो गई है। अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) प्रोग्राम में बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू की है। जांच के दायरे में करीब 10,000 विदेशी छात्र बताए जा रहे हैं, इनमें बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि कई छात्रों ने ऐसी शेल कंपनियों या फर्जी कंपनियों के जरिए नौकरी दिखाकर अपना वीसा स्टेटस बचाए रखा, जिनका असली कारोबार लगभग नहीं था। कुछ कंपनियां सिर्फ छात्रों को कानूनी रोजगार दिखाने और वीसा नियमों से बचाने के लिए ही बनाई गई थीं। जांच में कई कंपनियों के पते खाली इमारतों, बंद ऑफिसों या रिहायशी मकानों में मिले। कुछ मामलों में कंपनियों के अमेरिकी ऑफिस की जगह भारत में बैठे एचआर एजेंट छात्रों को मैनेज करते पाए गए। आईसीई के कार्यकारी निदेशक टॉड लायंस ने कहा कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान शुरू किए गए ओपीटी कार्यक्रम में केवल कुछ हजार लाभार्थियों के प्रशिक्षण प्राप्त करने और फिर घर लौटने की उम्मीद थी। इसके बजाय, ओपीटी के जरिये लाखों विदेशी छात्र अमेरिका में काम कर रहे हैं। कार्यक्रम का आकार बढ़ने के साथ ही धोखाधड़ी भी बढ़ गई है। हालांकि जांच एजेंसियों ने साफ किया है कि कार्रवाई किसी देश विशेष या सभी भारतीय छात्रों के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल संदिग्ध नेटवर्क और कंपनियों पर केंद्रित है। फिर भी इस कार्रवाई ने अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ओपीटी प्रोग्राम से पढ़ाई के बाद नौकरी में आसानी ओपीटी प्रोग्राम अमेरिका में एफ-1 स्टूडेंट वीजा पर पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी करने की अनुमति देता है। एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) संकाय के छात्रों को इसके जरिये 36 महीने तक काम करने का मौका मिलता है। भारतीय छात्रों के लिए यह प्रोग्राम एच-1बी वीजा और अमेरिका में लंबा करियर बनाने की महत्वपूर्ण सीढ़ी माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार 68,000 भारतीय ओपीटी छात्र हाल के वर्षों में कई अमेरिकी टेक कंपनियों में काम कर रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

प्रोडूसर करण जौहर की ‘चांद मेरा दिल’ का ट्रेलर रिलीज:लक्ष्य लालवानी और अनन्या पांडे पहली बार एक साथ फिल्म में नजर आएंगे

प्रोडूसर करण जौहर की ‘चांद मेरा दिल’ का ट्रेलर रिलीज:लक्ष्य लालवानी और अनन्या पांडे पहली बार एक साथ फिल्म में नजर आएंगे

डायरेक्टर और प्रोडूसर करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। इस फिल्म में लक्ष्य लालवानी और अनन्या पांडे मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दोनों कलाकार पहली बार साथ काम कर रहे हैं। फिल्म में अनन्या पांडे ‘चांदनी’ का किरदार निभा रही हैं, जबकि लक्ष्य ‘आरव’ के रोल में हैं। फिल्म का निर्देशन विवेक सोनी ने किया है। ट्रेलर की शुरुआत एक ‘सॉरी’ से होती है, जहां आरव से ऐसी गलती हो जाती है जिसे चांदनी माफ नहीं कर पाती। इसके बाद आरव उसे दूसरा मौका देने के लिए बार-बार कोशिश करता है, लेकिन चांदनी अपने प्यार से ज्यादा अपनी इज्जत को चुनती है। कहानी दोस्ती, प्यार और हार्टब्रेक के इर्द-गिर्द घूमती है। दो इंजीनियरिंग छात्रों की यह लव स्टोरी धीरे-धीरे इमोशनल और दर्दभरी मोड़ ले लेती है। ट्रेलर में एक डायलॉग ‘इज्जत प्यार से बड़ी होती है’ खास तौर पर दर्शकों को प्रभावित कर रहा है। फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी अच्छी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। फिल्म 22 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

भगवान शिव के रोल में दिखेंगे रणवीर सिंह:अमिश त्रिपाठी की किताब 'द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा' के खरीदे राइट्स

भगवान शिव के रोल में दिखेंगे रणवीर सिंह:अमिश त्रिपाठी की किताब 'द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा' के खरीदे राइट्स

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह अपने करियर के एक और बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक…‘उन्होंने अपने प्रोडक्शन बैनर ‘मां कसम फिल्म’ के तहत अमिश त्रिपाठी की लोकप्रिय किताब ‘द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा’ के फिल्मी राइट्स हासिल कर लिए हैं। इस कहानी को एक भव्य ट्रिलॉजी के रूप में बड़े स्तर पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए रणवीर ने बिड़ला स्टूडियोज के साथ साझेदारी भी की है। फिलहाल फिल्म का लेखन कार्य शुरुआती चरण में है और स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है। मेकर्स पहले कहानी और विजन को पूरी तरह तैयार करने के बाद डायरेक्टर और बाकी टीम को फाइनल करेंगे।’ सबसे खास बात यह है कि खबरों के अनुसार…‘रणवीर इस ट्रिलॉजी में भगवान शिव का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं। हालांकि बाकी प्रमुख किरदारों के लिए कास्टिंग अभी तय नहीं हुई है। इस प्रोजेक्ट के राइट्स हासिल करने के लिए रणवीर ने बड़ी रकम खर्च की है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है।’ ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद यह प्रोजेक्ट रणवीर के करियर का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा रणवीर सिंह के पास और भी फिल्में हैं। वह मार्च 2027 में आदित्य धर की अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं।

भगवान शिव के रोल में दिखेंगे रणवीर सिंह:अमिश त्रिपाठी की किताब 'द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा' के खरीदे राइट्स

भगवान शिव के रोल में दिखेंगे रणवीर सिंह:अमिश त्रिपाठी की किताब 'द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा' के खरीदे राइट्स

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह अपने करियर के एक और बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक…‘उन्होंने अपने प्रोडक्शन बैनर ‘मां कसम फिल्म’ के तहत अमिश त्रिपाठी की लोकप्रिय किताब ‘द इमॉर्टल्स ऑफ मेलुहा’ के फिल्मी राइट्स हासिल कर लिए हैं। इस कहानी को एक भव्य ट्रिलॉजी के रूप में बड़े स्तर पर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए रणवीर ने बिड़ला स्टूडियोज के साथ साझेदारी भी की है। फिलहाल फिल्म का लेखन कार्य शुरुआती चरण में है और स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है। मेकर्स पहले कहानी और विजन को पूरी तरह तैयार करने के बाद डायरेक्टर और बाकी टीम को फाइनल करेंगे।’ सबसे खास बात यह है कि खबरों के अनुसार…‘रणवीर इस ट्रिलॉजी में भगवान शिव का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं। हालांकि बाकी प्रमुख किरदारों के लिए कास्टिंग अभी तय नहीं हुई है। इस प्रोजेक्ट के राइट्स हासिल करने के लिए रणवीर ने बड़ी रकम खर्च की है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है।’ ‘धुरंधर’ की सफलता के बाद यह प्रोजेक्ट रणवीर के करियर का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा रणवीर सिंह के पास और भी फिल्में हैं। वह मार्च 2027 में आदित्य धर की अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं।

नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास:कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा; कॉमनवेल्थ 2026 की टीम में शामिल थीं केटी आर्चीबाल्ड

नर्स बनने के लिए ओलिंपिक विजेता का संन्यास:कहा- मुझे ‘असली दुनिया’ का आकर्षण खींच रहा; कॉमनवेल्थ 2026 की टीम में शामिल थीं केटी आर्चीबाल्ड

ब्रिटेन की सबसे सफल और दिग्गज साइकिलिस्ट में से एक, तीन बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट केटी आर्चीबाल्ड ने अचानक संन्यास ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि उन्हें इसी साल होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए स्कॉटलैंड की टीम में चुना गया था। लेकिन 32 वर्षीय केटी ने ट्रैक को हमेशा के लिए अलविदा कहकर अपना नया करियर चुन लिया है। अब वह एक नर्स के रूप में मरीजों की सेवा करती नजर आएंगी। केटी ने बताया कि काफी समय से ‘असली दुनिया’ का आकर्षण उन्हें अपनी ओर खींच रहा था। वह उस दुनिया को छोड़ने से डर रही थीं जिसे वह जानती हैं और उसमें माहिर हैं। लेकिन उनका मानना है कि अब उनके अंदर कोई डर नहीं बचा है। केटी ने कहा कि मैं उस स्टार्ट लाइन तक पहुंचने के लिए बेताब थी लेकिन अब मेरा दिमाग और शरीर साथ नहीं दे रहा है। समय आ गया है कि नई पीढ़ी अपना जलवा बिखेरे। अपने नए सफर के बारे में बात करते हुए केटी ने बताया कि वह फिलहाल एक नर्स बनने की ट्रेनिंग ले रही हैं और उन्हें इस नए पेशे से प्यार हो गया है। उनका कहना है कि जब लोगों को मदद की सख्त जरूरत हो और वे आप पर भरोसा कर सकें, तो उनके लिए वह भरोसेमंद इंसान बनना बहुत ही खास एहसास देता है। इस भावुक मौके पर केटी ने अपने शानदार सफर के लिए कोच, टीम के साथियों और परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी मां और अपने दिवंगत पार्टनर रैब वार्डेल को याद किया। गौरतलब है कि रैब का 2022 में 37 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से अचानक निधन हो गया था। केटी ने कहा कि रैब ने ही उन्हें सिखाया था कि जीवन में रिलैक्स रहने और मजे करने से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं है और वह हर दिन इन दोनों चीजों में बेहतर हो रही हैं। 13 साल लंबा रहा करियर, 7 वर्ल्ड टाइटल जीते – केटी ने 19 साल की उम्र में ब्रिटेन की एंड्योरेंस स्क्वाड में जगह बनाई थी। अपने शानदार करियर में उन्होंने कुल 51 प्रमुख मेडल जीते। उनके नाम ओलिंपिक में दो स्वर्ण और एक रजत पदक, सात वर्ल्ड टाइटल, रिकॉर्ड 21 यूरोपियन टाइटल और एक कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक दर्ज है। – वह महिला ‘टीम परस्यूट’ में विश्व रिकॉर्ड धारक टीम का हिस्सा भी हैं। उनके पदकों की संख्या और भी अधिक हो सकती थी, यदि उन्हें 2022 के बर्मिंघम गेम्स और बाद में ओलिंपिक से ठीक पहले चोट व अन्य कारणों से अपना नाम वापस नहीं लेना पड़ता।

अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

कभी दुनिया की ‘मर्डर कैपिटल’ कहे जाने वाले लैटिन अमेरिकी देश अल सल्वाडोर की सड़कों पर आज बच्चे रात को बेखौफ फुटबॉल खेलते हैं। यह बदलाव मुमकिन हुआ 44 वर्षीय राष्ट्रपति नाएब बुकेले के कारण, जिन्हें उनके प्रशंसक ‘मसीहा’ और विरोधी ‘क्रूर तानाशाह’ कहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनकी तारीफ करते रहे हैं और वाइट हाउस में बुला भी चुके हैं। बुकेले ने अपनी 92% लोकप्रियता के दम पर देश को अमेरिका से भी अधिक सुरक्षित बनाया है, लेकिन कीमत लोकतंत्र चुका रहा है। 64 लाख आबादी के साथ अल साल्वाडोर दुनिया का वह देश है, जहां 1.9% लोग (हर 50 में से 1 शख्स) जेलों में कैद हैं। लोकतंत्र को ताक पर रखने वाला दुनिया का अनोखा प्रयोग बुकेले ने खुद को एक्स पर ‘दुनिया का सबसे कूल तानाशाह’ घोषित किया था। उनके ‘ठोक दो’ मॉडल का नतीजा यह है कि देश में 2015 में हत्या दर 104 थी, जो 2026 में घटकर महज 1.9 (प्रति एक लाख) रह गई है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या बिना निष्पक्ष जांच और मानवाधिकारों के मिली यह ‘शांति’ लंबे समय तक टिक पाएगी? फिलहाल, बुकेले की उल्टी टोपी और सख्त लहजा लैटिन अमेरिका की राजनीति का सबसे शक्तिशाली ‘ब्रांड’ बन चुका है। सुरक्षा की चमक के पीछे सिसकते परिवार 25 मार्च 2022 को शुक्रवार की सुबह अल-सल्वाडोर की सड़कों पर लाशें बिछी थीं। सिर्फ एक दिन में 62 लोगों की हत्या। 1980 के गृहयुद्ध के बाद सबसे खूनी दिन। यह एमएस-13 गैंग की करतूत थी। गैंग राष्ट्रपति बुकेले के सर्फ सिटी टूरिज्म प्रोजेक्ट को रोकना चाहता था। तीन दिन में 87 लोगों को मार दिया गया। तब राष्ट्रपति बुकेले ने आपातकाल लगाया। संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए। अगले दो हफ्ते में 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। अब बुकेले ने ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसमें 12 साल तक के बच्चों को भी आजीवन कैद की सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हजारों निर्दोष युवा सिर्फ शक के आधार पर जेल की कालकोठरियों में ठूंसे गए हैं, जहां न खिड़की है, न परिवार से मिलने की इजाजत। 30 की क्षमता वाली सेल में 100 कैदी हैं। लेकिन बुकेले इसकी परवाह नहीं करते हैं। बिटकॉइन प्रयोग बुकेले ने 2021 में बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाया। ऐसा करने वाला अल-सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना, लेकिन 2025 में आर्थिक अस्थिरता और लोगों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा। ‘बिटकॉइन सिटी’ का सपना अब भी अधूरा है। विश्लेषकों का कहना है, ‘बुकेले ने दिखाया है कि अगर आप जनता को सुरक्षा का अहसास करा दें, तो वे अपने मौलिक अधिकार और प्रेस की आजादी तक कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं।’

अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

अल-सल्वाडोर के तानाशाह का ‘ठोक दो’ मॉडल:हत्या दर 104 से घटकर 1.9 पर आई; अब 12 साल के बच्चों को भी उम्रकैद

कभी दुनिया की ‘मर्डर कैपिटल’ कहे जाने वाले लैटिन अमेरिकी देश अल सल्वाडोर की सड़कों पर आज बच्चे रात को बेखौफ फुटबॉल खेलते हैं। यह बदलाव मुमकिन हुआ 44 वर्षीय राष्ट्रपति नाएब बुकेले के कारण, जिन्हें उनके प्रशंसक ‘मसीहा’ और विरोधी ‘क्रूर तानाशाह’ कहते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनकी तारीफ करते रहे हैं और वाइट हाउस में बुला भी चुके हैं। बुकेले ने अपनी 92% लोकप्रियता के दम पर देश को अमेरिका से भी अधिक सुरक्षित बनाया है, लेकिन कीमत लोकतंत्र चुका रहा है। 64 लाख आबादी के साथ अल साल्वाडोर दुनिया का वह देश है, जहां 1.9% लोग (हर 50 में से 1 शख्स) जेलों में कैद हैं। लोकतंत्र को ताक पर रखने वाला दुनिया का अनोखा प्रयोग बुकेले ने खुद को एक्स पर ‘दुनिया का सबसे कूल तानाशाह’ घोषित किया था। उनके ‘ठोक दो’ मॉडल का नतीजा यह है कि देश में 2015 में हत्या दर 104 थी, जो 2026 में घटकर महज 1.9 (प्रति एक लाख) रह गई है। विशेषज्ञों का सवाल है कि क्या बिना निष्पक्ष जांच और मानवाधिकारों के मिली यह ‘शांति’ लंबे समय तक टिक पाएगी? फिलहाल, बुकेले की उल्टी टोपी और सख्त लहजा लैटिन अमेरिका की राजनीति का सबसे शक्तिशाली ‘ब्रांड’ बन चुका है। सुरक्षा की चमक के पीछे सिसकते परिवार 25 मार्च 2022 को शुक्रवार की सुबह अल-सल्वाडोर की सड़कों पर लाशें बिछी थीं। सिर्फ एक दिन में 62 लोगों की हत्या। 1980 के गृहयुद्ध के बाद सबसे खूनी दिन। यह एमएस-13 गैंग की करतूत थी। गैंग राष्ट्रपति बुकेले के सर्फ सिटी टूरिज्म प्रोजेक्ट को रोकना चाहता था। तीन दिन में 87 लोगों को मार दिया गया। तब राष्ट्रपति बुकेले ने आपातकाल लगाया। संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए। अगले दो हफ्ते में 10,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं। अब बुकेले ने ऐसे कानून को मंजूरी दी है, जिसमें 12 साल तक के बच्चों को भी आजीवन कैद की सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि हजारों निर्दोष युवा सिर्फ शक के आधार पर जेल की कालकोठरियों में ठूंसे गए हैं, जहां न खिड़की है, न परिवार से मिलने की इजाजत। 30 की क्षमता वाली सेल में 100 कैदी हैं। लेकिन बुकेले इसकी परवाह नहीं करते हैं। बिटकॉइन प्रयोग बुकेले ने 2021 में बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा बनाया। ऐसा करने वाला अल-सल्वाडोर दुनिया का पहला देश बना, लेकिन 2025 में आर्थिक अस्थिरता और लोगों के विरोध के चलते इसे वापस लेना पड़ा। ‘बिटकॉइन सिटी’ का सपना अब भी अधूरा है। विश्लेषकों का कहना है, ‘बुकेले ने दिखाया है कि अगर आप जनता को सुरक्षा का अहसास करा दें, तो वे अपने मौलिक अधिकार और प्रेस की आजादी तक कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं।’

दुनिया के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर का ट्रैक खुला:बर्फ कम होते ही पहुंचने लगे श्रद्धालु; 12,778 फीट की ऊंचाई पर स्थित है मार्ग

दुनिया के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर का ट्रैक खुला:बर्फ कम होते ही पहुंचने लगे श्रद्धालु; 12,778 फीट की ऊंचाई पर स्थित है मार्ग

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर (युल्ला कांडा) का ट्रैक बर्फ पिघलते ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है। रोरा घाटी में 12,778 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दुर्गम मार्ग भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में बंद रहता है। श्रद्धालु युल्ला खास गांव से 12 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पूरी कर यहां पहुंचते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर और झील का निर्माण पांडवों ने वनवास के दौरान किया था। यहां की सबसे बड़ी खासियत ‘किन्नौरी टोपी’ से जुड़ी परंपरा है। माना जाता है कि यदि श्रद्धालु झील में अपनी टोपी उल्टी कर तैराता है और वह बिना डूबे दूसरे किनारे पहुंच जाती है, तो उसकी मन्नत पूरी होती है। यह स्थान हिंदू और बौद्ध धर्म की आस्था का संगम भी है, जहां लामा भी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर से पवित्र किन्नर कैलाश की पहाड़ियों के स्पष्ट दर्शन होते हैं। हर साल जन्माष्टमी पर यहां ऐतिहासिक मेला भी लगता है। प्रशासन ने आगाह किया है कि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी और संकरे रास्तों के कारण यह ट्रैक जोखिम भरा है, इसलिए यात्री पूरी सावधानी के साथ ही यात्रा शुरू करें।