Saturday, 06 Jun 2026 | 07:32 PM

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विदेश में पढ़ाई का अब नया फॉर्मूला:छात्र अब संस्थानों से पूछ रहे- ‘क्या इस महंगी डिग्री से नौकरी मिलेगी?’

विदेश में पढ़ाई का अब नया फॉर्मूला:छात्र अब संस्थानों से पूछ रहे- ‘क्या इस महंगी डिग्री से नौकरी मिलेगी?’

भारतीय छात्रों की पसंद के मामले में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की चमक अब फीकी पड़ती जा रही है। लीप ग्लोबल एजुकेशन की एक रिपोर्ट कहती है कि भारतीय छात्र अब इटली, फ्रांस और न्यूजीलैंड जैसे देशों में नर्सिंग, एआई और फाइनेंस जैसे कोर्स चुन रहे हैं। इन देशों में नौकरी का रास्ता सीधा और पढ़ाई का खर्च कम है। अब इनका नया मंत्र है- डिग्री नहीं, जॉब। यूरोप भारतीय छात्रों के नए पसंदीदा ठिकाने के रूप में उभर रहा है। 30 लाख छात्रों के सर्वे पर आधारित रिपोर्ट यूरोप, न्यूजीलैंड जैसे देशों में ब्रिटेन, यूएस सरीखे एजुकेशन हब से किफायती पढ़ाई करीब 30 लाख छात्रों के विश्लेषण पर आधारित लीप ग्लोबल एजुकेशन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप के देशों में हेल्थकेयर, मास्टर ऑफ नर्सिंग साइंस, फिजियोथेरेपी, मास्टर ऑफ एआई प्रोग्राम जैसे कोर्सेज लिए आवेदन 37.6% से लेकर 33,800% तक बढ़े हैं। एआई कोर्सेज के मामले में भारतीय छात्र न्यूजीलैंड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप और न्यूजीलैंड जैसे देशों में पढ़ाई का खर्च अमेरिका और ब्रि​टेन जैसे पारंपरिक एजुकेशन हब से कम है।

टाइम मैगजीन के शीर्ष 100 परोपकारियों में भारतीय और भारतवंशी:गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे नाडर; बच्चों को कुपोषण से निकाल लाए मेहता बंधु, शाह

टाइम मैगजीन के शीर्ष 100 परोपकारियों में भारतीय और भारतवंशी:गरीब बच्चों का भविष्य संवार रहे नाडर; बच्चों को कुपोषण से निकाल लाए मेहता बंधु, शाह

टाइम मैगजीन ने 2026 की टाइम 100 फिलैन्थ्रॉपी लिस्ट जारी की है। इसके मुताबिक दानवीर अब पारंपरिक समाज सेवा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपनी अकूत दौलत से समाज और व्यवस्था की सूरत बदल रहे हैं। इसमें भारतीय व भारतवंशी भी हैं। मेहता बंधु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ झीलों-प्रकृति का संरक्षण कर रहे हैं, तो नाडर जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाकर अमेरिका तक भेज रहे हैं। भारतवंशी राजीव शाह बच्चों को शुद्ध खाना दिलवाने का प्रण ले चुके हैं, तो वहीं दीपक भार्गव बुनियादी अधिकारों की राह मजबूत कर रहे हैं। जानिए इन्हें… शिव नाडर- किसानों व मजदूरों के बच्चों को चुनकर मुफ्त में पढ़ा रहे एचसीएल टेक्नोलॉजीज के 80 वर्षीय फाउंडर का विजन ‘क्रिएटिव फिलैन्थ्रॉपी’ पर टिका है, जहां पारदर्शिता सबसे अहम है। शिक्षा को बदलाव की चाबी मानने वाले नाडर ‘विद्याज्ञान’ बोर्डिंग स्कूलों के जरिए यूपी के ग्रामीण इलाकों से गरीब किसानों-मजदूरों के होनहार बच्चों को चुनकर मुफ्त पढ़ाते हैं। इस साल दो बच्चों को अमेरिका भेजा। पिछले 5 वर्षों में 4 बार देश के ‘शीर्ष दानदाता’ रहे। 2025 में अकेले 2660 करोड़ रु. दिए। यूनिवर्सिटी, म्यूजियम व अस्पतालों को अब तक ₹14,000 करोड़ दे चुके हैं। सुधीर-समीर मेहता – पौने दो लाख बच्चों का हेल्थ चेकअप करवा चुके 1.17 लाख करोड़ से बड़े साम्राज्य वाले ‘टोरेंट ग्रुप’ के मालिक मेहता बंधुओं ने 2024 में पिता उत्तमभाई नत्थूलाल मेहता की जन्मशती पर 5 हजार करोड़ रु. दान करने का महा-संकल्प लिया था। इसी मुहिम के तहत अहमदाबाद में 30 हजार वर्गफुट का न्यूरो-रिहैबिलिटेशन केंद्र शुरू किया गया है। इनके ‘यूएनएम फाउंडेशन’ ने 10 साल में पौने दो लाख बच्चों की सेहत की जांच की, 70 हजार नौनिहालों को कुपोषण से मुक्ति दिलाई है। बच्चों के लिए अस्पताल भी खोला है। राजीव शाह – 30 करोड़ अफ्रीकियों को बिजली से जोड़ने का मिशन चला रहे राजीव जे. शाह भारतीय मूल के अमेरिकी नेता हैं, जो 2017 से 5.5 लाख करोड़ वाले रॉकफेलर फाउंडेशन के प्रेसिडेंट हैं। यूट्यूबर मि.बीस्ट के साथ मिलकर केन्या में स्कूल किचन खोला। 1 लाख भोजन थाली का लक्ष्य है। फाउंडेशन ने मिशन 300 शुरू किया है, इसमें 2030 तक 30 करोड़ अफ्रीकियों को बिजली से जोड़ना और बच्चों के लिए 8 हजार करोड़ की राशि से पौष्टिक और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना है। बराक ओबामा प्रशासन में यूएसएड के प्रमुख रहे शाह कहते हैं,‘हर जिंदगी कीमती है। दीपक भार्गव- दुनियाभर में परोपकार से लोकतंत्र को मजबूत बनाने में जुटे लंबे समय तक एक्टिविस्ट रहे। 2024 में ‘फ्रीडम टुगेदर फाउंडेशन’ की कमान संभाली। भारतीय मूल के भार्गव मानते हैं कि बुनियादी अधिकारों व लोकतंत्र पर मंडराते खतरों के इस दौर में परोपकार का तरीका भी असाधारण होना चाहिए। आमतौर पर ट्रस्ट संपत्ति का 5% ही दान करते हैं, पर भार्गव ने इसे 10% तक पहुंचाया। 2025 में संस्था ने ₹3,300 करोड़ रु. दिए, जिसमें 70% लोकतंत्र की मजबूती में लगा। मैकआर्थर फाउंडेशन के साथ मिलकर दुनियाभर में ‘दान की स्वतंत्रता’ की पैरवी कर रहे हैं।

ग्लोरी’ के लिए पुलकित बने असली बॉक्सर:9 महीने की ट्रेनिंग से हुए थे ट्रांसफॉर्म; ट्रेलर लॉन्च में बॉक्सर नीरज के साथ उतरे रिंग में

ग्लोरी’ के लिए पुलकित बने असली बॉक्सर:9 महीने की ट्रेनिंग से हुए थे ट्रांसफॉर्म; ट्रेलर लॉन्च में बॉक्सर नीरज के साथ उतरे रिंग में

बॉलीवुड में स्पोर्ट्स ड्रामा की विश्वसनीयता हमेशा एक बड़ी कसौटी रही है और इसी कसौटी पर खरे उतरने के लिए पुलकित सम्राट ने अपनी अपकमिंग नेटफ्लिक्स सीरीज़ ‘ग्लोरी’ में खुद को पूरी तरह ढाल दिया है। हाल ही में रिलीज हुई इस सीरीज में वह एक प्रोफेशनल बॉक्सर के रोल में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर लॉन्च के दौरान उन्होंने पेशेवर बॉक्सर नीरज गोयत के साथ लाइव रिंग में उतरकर सभी को चौंका दिया था। एक्टर से फाइटर जैसा बनने की जर्नी काफी चैलेंजिंग रही पुलकित के ट्रेनर ड्रयू नील के मुताबिक उनका मकसद केवल उन्हें बॉक्सिंग सिखाना नहीं था, बल्कि उन्हें एक असली बॉक्सर में बदलना था। ड्रयू ने इस प्रक्रिया को एक इंस्पायरिंग जर्नी बताया, जिसमें पुलकित को सिर्फ रिंग में सही दिखना ही नहीं, बल्कि एक फाइटर की तरह सोचना और महसूस करना भी सिखाया गया। ड्रयू के अनुसार उन्होंने शूटिंग से करीब 9 महीने पहले ट्रेनिंग शुरू की, जो बेहद कम समय माना जाता है। तैयारी में सिर्फ फिटनेस नहीं, फंक्शनल स्ट्रेंथ पर रहा फोकस बॉक्सर बनने की तैयारी में सबसे बड़ा बदलाव पुलकित की फिटनेस अप्रोच में आया। जहां आमतौर पर एक्टर्स स्क्रीन पर अच्छे दिखने के लिए मसल्स पर काम करते हैं, वहीं ड्रयू ने उनके शरीर को फंक्शनल बनाने पर जोर दिया। पुलकित पहले से ही फिट और रिप्ड थे, लेकिन उन्हें रिंग के हिसाब से मजबूत बनाने के लिए उनका वजन संतुलित किया गया ताकि वह मुकाबले के दौरान लंबे समय तक टिक सकें और प्रभावी प्रदर्शन कर सकें। हजारों रियल पंच मारे, पूरी ट्रेनिंग शरीर की असली परीक्षा भी हुई ट्रेनिंग का सबसे कठिन हिस्सा था स्टैमिना और रिपिटेशन। ड्रयू के मुताबिक पुलकित को रोजाना हजारों जैब्स और क्रॉसेस मारने पड़ते थे, जिससे उनके कंधों पर जबरदस्त दबाव पड़ा। यह उनके लिए नया अनुभव था, क्योंकि पहले उन्होंने इस तरह की लगातार पंचिंग ट्रेनिंग नहीं की थी। शरीर को लंबे समय तक लगातार एक्टिव रखने और उसी तीव्रता से प्रदर्शन करने के लिए उन्हें कड़े मैराथन सेशन्स से गुजरना पड़ा। पुलकित के इस सफर की गवाह उनकी पत्नी और कृति खरबंदा भी रहीं, जिन्होंने उनकी मेहनत की सराहना की और एक इमोशनल नोट भी शेयर किया।

‘अमरी’ के बाद चर्चा में आई अमृता प्रीतम की बायोपिक:भंसाली का सपना और साहिर का इश्क; क्या बड़े पर्दे पर दिखेगा अमृता-इमरोज का रिश्ता?

‘अमरी’ के बाद चर्चा में आई अमृता प्रीतम की बायोपिक:भंसाली का सपना और साहिर का इश्क; क्या बड़े पर्दे पर दिखेगा अमृता-इमरोज का रिश्ता?

फिल्ममेकर मीरा नायर ने हाल ही में मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल के जीवन से प्रेरित अपनी नई फिल्म ‘अमरी’ का ऐलान किया। इसके बाद से इंडस्ट्री में एक बार फिर अमृता प्रीतम की भी बायोपिक को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। खबरें सामने आते ही बॉलीवुड में उस दूसरी ‘अमृता’ यानि अमृता प्रीतम की अधूरी कहानी फिर याद की जाने लगी, जिस पर सालों से फिल्म बनाने की कोशिशें होती रही हैं। भंसाली का ड्रीम प्रोजेक्ट बनकर रह गई ‘गुस्ताखियां’ अमृता प्रीतम की जिंदगी को बड़े परदे पर उतारने की सबसे बड़ी कोशिश संजय लीला भंसाली ने की थी। ‘गुस्ताखियां’ नाम के प्रोजेक्ट पर वह लंबे समय तक काम करते रहे हैं। शाहरुख- प्रियंका के नाम ने भी बटोरी थीं सुर्खियां भंसाली की फिल्म के लिए पहले ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम सामने आया था। बाद में करीना कपूर खान भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ीं। हालांकि, मेल लीड और डेट्स की समस्याओं के चलते फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई। भंसाली के अलावा डायरेक्टर जसमीत के. रीन ने भी अमृता प्रीतम और साहिर की कहानी पर काम शुरू किया था। शाहरुख खान, रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के जरिए इसे प्रोड्यूस कर करने वाले थे और संभवतः खुद साहिर का किरदार भी प्ले करते। वहीं, अमृता प्रीतम के रोल के लिए सबसे ज्यादा चर्चा प्रियंका चोपड़ा जोनास के नाम की थी। ‘अमरी’ का रिस्पॉन्स मेकर्स को देगा एक नई हिम्मत माना जा रहा है कि अगर ‘अमरी’ दर्शकों और क्रिटिक्स के बीच चर्चा का विषय बनती है, तो फिल्ममेकर्स फिर से अमृता प्रीतम की कहानी को बड़े परदे पर लाने का रिस्क ले सकते हैं। फिलहाल, हिंदी सिनेमा की यह सबसे चर्चित अधूरी बायोपिक्स में से एक बनी हुई है, जिसका इंतजार दर्शकों को सालों से है। जानकारों के मुताबिक, अमृता प्रीतम की कहानी में प्रेम, दर्द, विद्रोह और साहित्य का ऐसा मेल है, जो बड़े परदे के लिए परफेक्ट माना जाता है। साहिर लुधियानवी के लिए उनका प्रेम, उनकी कविताएं और बाद में इमरोज के साथ उनका रिश्ता हमेशा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। यही वजह है कि हर दौर के बड़े फिल्ममेकर्स उनकी जिंदगी को बेहद सिनेमैटिक मानते रहे हैं।

समुद्र की लहरों पर क्रूज कंपनियां बेच रहीं सेहत:योग, ध्यान और लॉन्जेविटी को अब नया बिजनेस मॉडल बना रहीं लग्जरी क्रूज इंडस्ट्री

समुद्र की लहरों पर क्रूज कंपनियां बेच रहीं सेहत:योग, ध्यान और लॉन्जेविटी को अब नया बिजनेस मॉडल बना रहीं लग्जरी क्रूज इंडस्ट्री

समुद्री यात्राएं अब बदल रही हैं। कभी जुआघर, आलीशान खान-पान और नाच-गाने के लिए मशहूर यह सेक्टर ‘वेलनेस टूरिज्म’ की ओर मुड़ चुका है। 2026 के रुझान बताते हैं कि अब यात्रियों को सिर्फ छुट्टियां नहीं, बल्कि मानसिक शांति और शरीर को ऊर्जावान बनाने का अनुभव बेचा जा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है ओरिएंट एक्सप्रेस और सौंदर्य जगत के बड़े नाम गुर्लेन की ‘ओशन रीबर्थ’ स्कीम। अक्टूबर 2026 में पुर्तगाल से बारबाडोस तक चलने वाली यह 14 दिनों की समुद्री यात्रा दुनिया के सबसे बड़े पाल वाले जहाज ओरिएंट एक्सप्रेस कोरिंथियन पर शुरू होगी। इस विशेष अनुभव के लिए शुरुआती किराया 67 लाख रुपए तय किया गया है। कंपनी के अनुसार, यह केवल एक आलीशान जहाज की यात्रा नहीं है, बल्कि ‘पूर्ण स्वास्थ्य यात्रा’ है। इसमें हर यात्री की सेहत की जांच कर उनके लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधियों और उपचार की व्यक्तिगत स्कीम तैयार की जाएगी। गुर्लेन ने आधिकारिक बयान में कहा, ‘इस यात्रा का उद्देश्य यात्रियों को स्वास्थ्य का गहरा अनुभव देना है। बीमारियों से बचाव और मानसिक मजबूती को यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है।’ जहाज पर ध्यान, योगासन और सांस संबंधी वर्कशॉप के साथ-साथ उच्च तकनीक वाले उपचार भी मिलेंगे। गुर्लेन का दावा है कि उनका विशेष उपकरण पहली बार 7 उन्नत सौंदर्य तकनीकों को एक साथ पेश करता है, जो त्वचा और स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। इस यात्रा में मार्गदर्शन के लिए कई विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। इनमें प्रख्यात सौंदर्य विशेषज्ञ अमेली डेमांजे, श्वसन क्रिया विशेषज्ञ आर्थर गुएरिन और आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डेबोरा पासुती होंगे। 5,380 वर्ग फुट का गुर्लेन केंद्र इस यात्रा का मुख्य आकर्षण है, जहां भाप स्नान, विश्राम कक्ष और खुले आसमान के नीचे तैरने के लिए खास पूल जैसी सुविधाएं हैं। संपन्न यात्री अब दिखावे वाली सुविधाओं के बजाय ‘परिवर्तनकारी अनुभव’ चाहते हैं, जहां लग्जरी के साथ बेहतर स्वास्थ्य का मेल हो। सालाना 14% की रफ्तार से बढ़ रहा लग्जरी क्रूज बाजार, 2035 में 273 अरब डॉलर का होगा यह बदलाव सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है। वर्जिन वॉयेज और एक्सप्लोरा जर्नीज जैसी बड़ी कंपनियां भी अब मानसिक शांति और ध्वनि उपचार जैसे कार्यक्रमों पर जोर दे रही हैं। बिजनेस रिसर्च इनसाइट की रिपोर्ट के अनुसार यह लग्जरी क्रूज बाजार 13.9% की सालाना रफ्तार से बढ़ रहा है। 2026 में 9.9 अरब डॉलर (करीब 94.7 हजार करोड़ रुपए) और 2035 तक 31 अरब डॉलर के पार जा सकता है। स्वास्थ्य पर्यटन बाजार के 2026 तक 273 अरब डॉलर (करीब 26 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।

Bhuvneshwar is the most successful bowler of this IPL with 21 wickets.

Bhuvneshwar is the most successful bowler of this IPL with 21 wickets.

Hindi News Sports Bhuvneshwar Is The Most Successful Bowler Of This IPL With 21 Wickets. बेंगलुरू12 मिनट पहले कॉपी लिंक आईपीएल में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड भी भुवी ने इसी साल बनाया। आईपीएल 2026 में जब भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को मुश्किल वक्त में विकेट की जरूरत पड़ी, कप्तान रजत पाटीदार की नजर सबसे पहले एक ही खिलाड़ी पर गई- भुवनेश्वर कुमार। उम्र 36 साल, शरीर पहले जैसा तेज नहीं, लेकिन अनुभव और दिमाग पहले से कहीं ज्यादा मजबूत। मुंबई के खिलाफ रायपुर में आखिरी ओवर का रोमांच खत्म हुए मुश्किल से एक दिन हुआ था, पर चार विकेट लेने और बल्ले से आखिरी ओवर में अहम रन बनाने वाले भुवी के चेहरे पर न कोई अतिरिक्त उत्साह था और न ही कोई दिखावा। वह शांति से बैठे थे, जैसे यह सब उनके लिए सामान्य हो। हाल ही में आर. अश्विन ने मजाक में कहा था कि भुवनेश्वर को फिर से भारत की टी20 टीम में होना चाहिए। जब यह बात उनसे पूछी गई तो वे मुस्कुराए और बोले, ‘अश्विन को ही सलेक्टर बना दो।’ यही सहजता भुवनेश्वर की सबसे बड़ी पहचान है। इस सीजन उनके नाम 21 विकेट हैं और वह पर्पल कैप होल्डर हैं। आईपीएल में 200 विकेट लेने वाले पहले तेज गेंदबाज बनने का रिकॉर्ड भी उन्होंने इसी साल बनाया। लेकिन भुवनेश्वर के लिए आंकड़ों से ज्यादा अहम है मानसिक संतुलन। वे कहते हैं, ‘जिस दिन मुझे भारतीय टीम से बाहर किया गया, उसी दिन मैंने उसे स्वीकार कर लिया था। 10 साल तक सब कुछ देखा था। इसलिए अलग होना आसान था।’ कभी सिर्फ स्विंग गेंदबाज माने जाने वाले भुवनेश्वर ने अब खुद को टी20 के हिसाब से बदल लिया है। उनकी नकल बॉल और डेथ ओवर गेंदबाजी बल्लेबाजों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। वे मानते हैं कि टी20 क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका है। पहले 200 रन बनते थे तो लगता था मैच खत्म। अब 200 भी छोटा स्कोर लगता है। बल्लेबाज बदल रहे हैं, इसलिए गेंदबाजों को भी बदलना पड़ता है। हालांकि, इतने बदलाव के बावजूद भुवनेश्वर खुद को बदला हुआ खिलाड़ी नहीं मानते। उनका कहना है कि उन्होंने कुछ नया नहीं किया। वे कहते हैं, ‘लोग सोचते हैं मैं कुछ अलग कर रहा हूं। लेकिन मैं वही पुरानी चीजें कर रहा हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि विकेट मिल रहे हैं। विकेट से आत्मविश्वास आता है और आत्मविश्वास से गेंद सही जगह पड़ती है।’ यही भुवनेश्वर की असली कहानी है। तेज रफ्तार नहीं, आक्रामक बयान नहीं, सिर्फ अनुशासन, धैर्य, लगातार मेहनत। शायद इसी वजह से बढ़ती उम्र में भी वे आईपीएल के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज बने हुए हैं। खेल से ज्यादा फिटनेस को समय दे रहे हैं भुवी भुवनेश्वर अब सालभर बहुत ज्यादा क्रिकेट नहीं खेलते। आईपीएल, यूपी टी20 लीग और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी तक ही वे सीमित रहते हैं। बाकी समय ट्रेनिंग, जिम और फिटनेस पर ध्यान देते हैं। वे मानते हैं कि 36 की उम्र में रिकवरी आसान नहीं रहती। भुवनेश्वर बताते हैं, ‘अब शरीर को ज्यादा समय चाहिए। लेकिन मेरे पास ट्रेनिंग के लिए ज्यादा वक्त है। इसलिए पहले से ज्यादा मेहनत कर पा रहा हूं।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

आपकी हर हरकत पर नजर, कनेक्टिविटी निजता के लिए खतरा:स्मार्टफोन, टीवी, ओटीटी यहां तक कि कनेक्टेड कार भी चुरा सकती है आपका डेटा

आपकी हर हरकत पर नजर, कनेक्टिविटी निजता के लिए खतरा:स्मार्टफोन, टीवी, ओटीटी यहां तक कि कनेक्टेड कार भी चुरा सकती है आपका डेटा

हमारी जिंदगी पहले से ज्यादा स्मार्ट और ‘कनेक्टेड’ हो गई है। मनोरंजन, सुविधा और सोशल मीडिया के इस दौर में यही कनेक्टिविटी अब हमारी निजता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट फोन, स्मार्ट कारें और यहां तक कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सेल्फी भी अब डेटा चोरी और निगरानी का जरिया बन रही हैं। मानें या न मानें, आम इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी भी डिजिटल निगरानी के दायरे में आ चुकी है। अक्सर कंपनियां जाने-अनजाने में सहमति ले लेती हैं क्योंकि अधिकांश यूजर गोपनीयता नीति को पढ़े बिना अपनी रजामंदीं दे देते हैं। डिजिटल निगरानी – रोजमर्रा की जिंदगी पर है उपकरण या सुविधा बेचने वाली कंपनियों की नजर स्मार्टफोन- कई एप बैकग्राउंड में आपकी बातें सुनकर आपको आपकी पसंद के विज्ञापन दिखाते हैं। जीपीएस और सेंसर की मदद से आपकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जाता है। स्मार्ट टीवी- कई स्मार्ट टीवी ऑटोमैटिक कंटेंट रिकॉग्निशन के जरिये ट्रैक करते हैं कि आप क्या देख रहे हैं। टीवी में लगे माइक्रोफोन आपकी निजी बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं। स्मार्ट स्पीकर- एलेक्सा और गूगल होम जैसे डिवाइस ‘वेक वर्ड’ (उन्हें एक्टिव करने वाले आदेश) के इंतजार में हर समय बातें सुनते हैं। ये बातें रिकॉर्ड करके कंपनियों को भेज सकते हैं। वाई-फाई राउटर- साइंस डायरेक्ट मैगजीन में छपे नवीनतम शोध के अनुसार, वाई-फाई राउटर बीम-फॉर्मिंग फीडबैक (बीएफआई) के जरिए कमरे में मौजूद लोगों की गतिविधियों को 99% सटीकता से पहचान सकते हैं। कनेक्टेड कारें- कार की सीटों, डैशबोर्ड, इंजन, स्टीयरिंग व्हील जैसी लगभग हर जगह लगे सेंसर आपका डेटा रिकॉर्ड करते हैं। मोजिला फाउंडेशन की प्राइवेसी नाइटमेयर ऑन व्हील्स रिपोर्ट के मुताबिक कई कारें संवेदनशील डेटा एकत्र कर रही हैं। 25 कारों के सर्वे में 19 ने कहा कि वे ये डेटा बेच सकती हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ मुकदमा अमेरिका में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने नेटफ्लिक्स पर मुकदमा किया है। आरोप है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने यूजर्स यहां तक कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी और बिना स्पष्ट सहमति के उनकी जानकारी इकट्ठा की। सुरक्षा के लिए ये उपाय अपनाएं – किसी भी एप को केवल जरूरी परमिशन ही दें। अलाऊ ऑल जैसी अनुमतियां न दें। – माइक्रोफोन, कैमरा और लोकेशन हमेशा व्हाइल यूजिंग मोड पर एक्टिव करें। – एप परमिशन की नियमित रूप से समीक्षा करें। हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर बदलते रहें। – जहां संभव हो, ‘पासकी’ और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का ही इस्तेमाल करें। – कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में अनावश्यक एप और हर समय अकाउंट लॉगिन न रखें। -नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करें। ब्लूटूथ, वाई-फाई ऑटो-कनेक्ट बंद रखें।

आपकी हर हरकत पर नजर, कनेक्टिविटी निजता के लिए खतरा:स्मार्टफोन, टीवी, ओटीटी यहां तक कि कनेक्टेड कार भी चुरा सकती है आपका डेटा

आपकी हर हरकत पर नजर, कनेक्टिविटी निजता के लिए खतरा:स्मार्टफोन, टीवी, ओटीटी यहां तक कि कनेक्टेड कार भी चुरा सकती है आपका डेटा

हमारी जिंदगी पहले से ज्यादा स्मार्ट और ‘कनेक्टेड’ हो गई है। मनोरंजन, सुविधा और सोशल मीडिया के इस दौर में यही कनेक्टिविटी अब हमारी निजता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। ओटीटी प्लेटफॉर्म, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट फोन, स्मार्ट कारें और यहां तक कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई सेल्फी भी अब डेटा चोरी और निगरानी का जरिया बन रही हैं। मानें या न मानें, आम इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी भी डिजिटल निगरानी के दायरे में आ चुकी है। अक्सर कंपनियां जाने-अनजाने में सहमति ले लेती हैं क्योंकि अधिकांश यूजर गोपनीयता नीति को पढ़े बिना अपनी रजामंदीं दे देते हैं। डिजिटल निगरानी – रोजमर्रा की जिंदगी पर है उपकरण या सुविधा बेचने वाली कंपनियों की नजर स्मार्टफोन- कई एप बैकग्राउंड में आपकी बातें सुनकर आपको आपकी पसंद के विज्ञापन दिखाते हैं। जीपीएस और सेंसर की मदद से आपकी हर मूवमेंट को ट्रैक किया जाता है। स्मार्ट टीवी- कई स्मार्ट टीवी ऑटोमैटिक कंटेंट रिकॉग्निशन के जरिये ट्रैक करते हैं कि आप क्या देख रहे हैं। टीवी में लगे माइक्रोफोन आपकी निजी बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं। स्मार्ट स्पीकर- एलेक्सा और गूगल होम जैसे डिवाइस ‘वेक वर्ड’ (उन्हें एक्टिव करने वाले आदेश) के इंतजार में हर समय बातें सुनते हैं। ये बातें रिकॉर्ड करके कंपनियों को भेज सकते हैं। वाई-फाई राउटर- साइंस डायरेक्ट मैगजीन में छपे नवीनतम शोध के अनुसार, वाई-फाई राउटर बीम-फॉर्मिंग फीडबैक (बीएफआई) के जरिए कमरे में मौजूद लोगों की गतिविधियों को 99% सटीकता से पहचान सकते हैं। कनेक्टेड कारें- कार की सीटों, डैशबोर्ड, इंजन, स्टीयरिंग व्हील जैसी लगभग हर जगह लगे सेंसर आपका डेटा रिकॉर्ड करते हैं। मोजिला फाउंडेशन की प्राइवेसी नाइटमेयर ऑन व्हील्स रिपोर्ट के मुताबिक कई कारें संवेदनशील डेटा एकत्र कर रही हैं। 25 कारों के सर्वे में 19 ने कहा कि वे ये डेटा बेच सकती हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ मुकदमा अमेरिका में टेक्सास के अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन ने नेटफ्लिक्स पर मुकदमा किया है। आरोप है कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने यूजर्स यहां तक कि बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी और बिना स्पष्ट सहमति के उनकी जानकारी इकट्ठा की। सुरक्षा के लिए ये उपाय अपनाएं – किसी भी एप को केवल जरूरी परमिशन ही दें। अलाऊ ऑल जैसी अनुमतियां न दें। – माइक्रोफोन, कैमरा और लोकेशन हमेशा व्हाइल यूजिंग मोड पर एक्टिव करें। – एप परमिशन की नियमित रूप से समीक्षा करें। हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें और समय-समय पर बदलते रहें। – जहां संभव हो, ‘पासकी’ और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का ही इस्तेमाल करें। – कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में अनावश्यक एप और हर समय अकाउंट लॉगिन न रखें। -नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करें। ब्लूटूथ, वाई-फाई ऑटो-कनेक्ट बंद रखें।

मजदूरों के बिना सुस्त पड़ा दक्षिण भारत का उद्योग:फ्री फ्लाइट टिकट, बसें; फिर भी बंगाल, असम से लौट नहीं रहे लेबर

मजदूरों के बिना सुस्त पड़ा दक्षिण भारत का उद्योग:फ्री फ्लाइट टिकट, बसें; फिर भी बंगाल, असम से लौट नहीं रहे लेबर

केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों के नियोक्ता इन दिनों एक अजीब जद्दोजहद में हैं। वे मजदूरों को वापस बुलाने के लिए फ्री हवाई टिकट दे रहे हैं, लग्जरी बसें भेज रहे हैं और तनख्वाह बढ़ाने के वादे कर रहे हैं। फिर भी पश्चिम बंगाल और असम से काम करने आने वाले लाखों प्रवासी मजदूर घर पर ही हैं। वजह साफ है। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में वोट डालने गए ज्यादातर मजदूर लौटने में आनाकानी कर रहे हैं। ‘सेंटर फॉर माइग्रेशन एंड इनक्लूसिव डेवलपमेंट’ के ईडी बेनॉय पीटर कहते हैं, ‘इस बार लगभग सभी मजदूर वोट डालने घर गए, खास तौर पर इलेक्टोरल रोल के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चिंताओं की वजह से। दोनों राज्यों के रिकॉर्ड मतदान इसी का नतीजा है।’ वापसी में देरी के कई अन्य कारण भी हैं, मसलन केरल में मानसून की दस्तक, स्कूलों की छुट्टियां, बकरीद का त्योहार और खेतों की बुवाई का सीजन। पश्चिम एशिया में संकट के चलते टाइल्स और प्लाईवुड रेजिन जैसी सामग्रियों की किल्लत से कुछ सेक्टर में काम वैसे भी धीमा है। केरल इस संकट का सबसे बड़ा शिकार है। राज्य में करीब 40 लाख प्रवासी मजदूर काम करते हैं। इनमें से 70% बंगाल और असम से हैं। ‘बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के डायरेक्टर जनरल राजू जॉन कहते हैं कि नियोक्ताओं ने हर हथकंडा अपनाया। फ्लाइट उड़ान टिकट, वेतन वृद्धि, बसें इनमें शामिल हैं। फिर भी ज्यादातर मजदूर आने के लिए तैयार नहीं हैं। तिरुपुर में हालत और भी चिंताजनक है। देश के इस सबसे बड़े निटवियर निर्यात केंद्र में उत्पादन क्षमता घटकर करीब 70% रह गई है। पश्चिम एशिया संकट से ऑर्डर पहले ही कम हैं, अब मजदूरों की कमी ने मुश्किल और बढ़ा दी है। संकट की एक गहरी परत और भी है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में कुछ वर्षों में औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के तेज निर्माण ने वहीं रोजगार के दरवाजे खोल दिए हैं। लेयम ग्रुप के चेयरमैन जी. रमेश चेताते हैं कि अगर पूर्वी और उत्तरी राज्यों में यह रफ्तार बनी रही तो भविष्य में दक्षिण भारत के लिए मजदूर जुटाना और मुश्किल हो जाएगा। इस बीच वेतन को लेकर उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। वेल्डिंग जैसे कामों के लिए मजदूर अब 20,000 की जगह 30,000-33,000 मांग रहे हैं। मौके का फायदा – अभी के मुकाबले डेढ़ गुना वेतन की मांग कर रहे प्रवासी श्रमिक – केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 1.3 करोड़ प्रवासी मजदूर काम करते हैं। ये मुख्यतः यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे उत्तर और पूर्वी भारत से आते हैं। – केरल में करीब 40 लाख प्रवासी श्रमिकों में से 70% पश्चिम बंगाल और असम के हैं। इन्होंने चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, पर वे वापसी के मूड में नहीं हैं। – तिरुपुर के निटवियर इंडस्ट्री की उत्पादन क्षमता घटकर 70% रह गई है। श्रमिकों की किल्लत के बीच मजदूर डेढ़ गुना वेतन की मांग करने लगे हैं।

कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

कॉप की भूमिका में सैफ अली:भक्षक' के बाद अब 'कर्तव्य' की बारी; निर्देशक ने बताया क्यों सैफ थे पहली पसंद

‘भक्षक’ के बाद निर्देशक पुलकित अब नेटफ्लिक्स फिल्म ‘कर्तव्य’ लेकर आ रहे हैं, जिसमें सैफ अली खान कॉप बने हैं। पुलकित ने फिल्म के बैकड्रॉप, सैफ की कास्टिंग आदि पर बातचीत की… पुलकित कहते हैं, ‘कर्तव्य’ किसी एक सच्ची घटना पर आधारित नहीं है। यह विचार मेरे दिमाग में बहुत सालों से चल रहा था। हम अक्सर अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों पर चर्चा कम ही होती है। बतौर इंसान हमारी क्या जिम्मेदारी है? एक पिता का काम सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं है, बल्कि उस बच्चे की जिंदगी में क्या सही है और क्या गलत, यह सिखाना भी उसकी ड्यूटी है। मैं कहानी के जरिए उसी कर्तव्य की परिभाषा को ढूंढ रहा था। मैं एक ऐसी दुनिया बुनना चाहता था जहां कर्तव्य और इंसानियत के बीच का संघर्ष दिखे। बहुत सालों तक यह विचार मेरे अंदर बंद था, जिसे अब मैंने इस फिल्म के रूप में बाहर निकाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं पुलकित बताते हैं, ‘भक्षक’ के बाद रेड चिलीज और नेटफ्लिक्स के साथ रिश्ता और मजबूत हुआ। जब ‘कर्तव्य’ लिखी तो सबसे पहले उन्हें सुनाई और वे तुरंत तैयार हो गए। सैफ ही मेरी पहली पसंद थे। मैं यह स्क्रिप्ट लेकर किसी और एक्टर के पास गया ही नहीं।’ फिल्म के लिए ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है फिल्म की दुनिया पर पुलकित कहते हैं…‘हमने ‘झामली’ नाम की एक काल्पनिक जगह बनाई है, जिसकी टोन पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा बॉर्डर जैसी रखी गई। ‘ओमकारा’ में सैफ का ‘लंगड़ा त्यागी’ वाला किरदार मेरे दिमाग में हमेशा रहा। मुझे मजा आता है जब आप बांद्रा में रहने वाले, इंग्लिश बोलने वाले एक्टर को छोटे शहर की धूल-मिट्टी में डाल देते हैं।’ ‘ओमकारा’ के बाद कम निर्देशकों ने सैफ के देसी और रॉ अंदाज में लिया पुलकित मानते हैं, ‘ओमकारा के बाद बहुत कम निर्देशकों ने सैफ के उस देसी और रॉ अंदाज को इस्तेमाल किया। ‘आरक्षण’ और ‘तांडव’ में कोशिश जरूर हुई, लेकिन मुझे वो वाला सैफ नहीं मिला जो ‘लंगड़ा त्यागी’ में दिखा था। मेरे जेहन में वही इमेज थी, इसलिए मैं उन्हें फिर से उसी दुनिया में वापस लेकर गया।’ ‘99% हिंदुस्तान छोटे शहरों में बसता है’ अपने सिनेमा की जड़ों पर बात करते हुए पुलकित कहते हैं, ‘मैं खुद छोटे शहर से आता हूं, इसलिए मुझे ऐसी कहानियों में मजा आता है। 99% हिंदुस्तान छोटे शहरों और कस्बों में बसता है। जब आप ग्रासरूट लेवल की कहानी लिखते हैं, तो एक्टर्स को भी उसमें कुछ नया नजर आता है। यही वजह है कि मैंने सैफ, रसिका दुग्गल, संजय मिश्रा और मनीष चौधरी जैसे दमदार एक्टर्स को चुना। हम स्टारडम नहीं, परफॉर्मेंस पर दांव लगा रहे हैं।’