Monday, 20 Apr 2026 | 12:54 AM

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शेयर बाजार में आ सकती है सबसे बड़ी गिरावट:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

शेयर बाजार में आ सकती है सबसे बड़ी गिरावट:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। कियोसाकी ने कहा है कि शेयर बाजार में इतिहास का सबसे बड़ी गिरावट अब आने ही वाली है। वैसे उन्होंने 2013 में आई अपनी किताब ‘रिच डैड्स प्रोफेसी’ में ही इस बड़े संकट का जिक्र कर दिया था। कियोसाकी का मानना है कि 2008 के वित्तीय संकट के मूल कारण आज भी जड़ें जमाए हुए हैं। दुनिया में बढ़ता कर्ज और फाइनेंशियल सिस्टम की कमजोरियां नए संकट की आशंका बढ़ा रही हैं। कियोसाकी के मुताबिक, ब्लैकरॉक का प्राइवेट क्रेडिट मॉडल संकट की वजह बन सकता है। यदि यह होता है, तो पूरी दुनिया में ‘बेबी बूमर्स’ (62-80 के बुजुर्ग) की रिटायरमेंट बचत पूरी तरह खत्म हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब ऐसे कर्ज के बोझ तले दबी है, जिसे चुकाना नामुमकिन है। मौजूदा भू-राजनैतिक तनाव के बीच कियोसाकी ने आम निवेशकों को एक सख्त और व्यावहारिक सलाह दी है। उनका कहना है कि वित्तीय शिक्षा की शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से होती है। यदि आपके पास निवेश के लिए 10 डॉलर (करीब 900 रुपए) की अतिरिक्त राशि भी नहीं है, तो एक दिन का खाना छोड़ दें, लेकिन निवेश करना न छोड़ें। यह छोटी राशि भी चांदी खरीदने में लगाएं। यह न केवल धन संचय का सुरक्षित माध्यम है, बल्कि डीलर से बाजार की व्यावहारिक समझ पाने का भी अच्छा जरिया है। कियोसाकी के अनुसार, डीलर के साथ लंबे समय तक जुड़ने से निवेशकों को भविष्य के वित्तीय जोखिम समझने में बहुत मदद मिलती है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच मंगलवार को घरेलू सराफा बाजार में चांदी में तेजी रही। आईबीजेए के मुताबिक, मंगलवार को चांदी 10,888 रुपए महंगी हुई और औसत कीमत 4.2% बढ़कर 2,70,944 रुपए किलो हो गई। 29 जनवरी को चांदी 3,79,988 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर थी। इस साल मंगलवार तक चांदी 40,524 रुपए (17.6%) चढ़ चुकी है। यानी निवेश बढ़ रहा है। बीते साल 31 दिसंबर को चांदी 2,30,420 रुपए प्रति किलो थी। रणनीति: जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा, सोने-चांदी के दाम बढ़ते जाएंगे रॉबर्ट कियोसाकी का मानना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में पारंपरिक वित्तीय साधनों के मुकाबले सोने-चांदी जैसे फिजिकल एसेट्स कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। वे लगातार सोना, चांदी, बिटकॉइन, इथेरियम और कच्चे तेल के कुओं में हिस्सेदारी खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनके अनुसार, जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा और महंगाई बढ़ेगी, इन फिजिकल एसेट्स की कीमतें आसमान छुएंगी। वे चांदी को औद्योगिक इस्तेमाल और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर शुरुआती विकल्प मानते हैं। कियोसाकी का मानना है कि आम आदमी को छोटी-छोटी बचत कर ऐसी संपत्तियां अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना शुरू करना चाहिए।

रोजर्स ने बताए टेक सेक्टर में नौकरी पाने के गुर:अनुभवी सीईओ की सलाह- बड़ी कंपनियों के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखें

रोजर्स ने बताए टेक सेक्टर में नौकरी पाने के गुर:अनुभवी सीईओ की सलाह- बड़ी कंपनियों के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखें

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एपल, मेटा जैसी टेक कंपनियों में नौकरी करने के इच्छुक युवाओं को एक सीईओ की सलाह काम आ सकती है। 1.8 अरब डॉलर (16,500 करोड़ रुपए) वैल्युएशन वाली वर्कफ्लो सॉफ्टवेयर कंपनी असाना के नए सीईओ डैन रोजर्स खुद भी माइक्रोसॉफ्ट, डेल, अमेजन वेब सर्विसेज, सेल्सफोर्स और सर्विसनाउ सहित प्रमुख तकनीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। रोजर्स का कहना है कि पहले की पीढ़ी के मुकाबले जेन जी के लिए सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना ज्यादा आसान है। सबसे अच्छा रास्ता बड़ी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखना है। बड़ी टेक कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो पहले से किसी छोटी या मध्यम कंपनी में अनुभव हासिल करके आते हैं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो रोजर्स कहते हैं, ‘भले ही इसमें कुछ साल लग जाएं और कम प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करना पड़े। लेकिन आपके रेज्यूमे में दर्ज आपके अनुभव और कौशल को खारिज कर पाना एआई के लिए भी आसान नहीं होगा। हो सकता है कि सीधे मुख्य द्वार के बजाय थोड़ा घूमकर टेक सेक्टर की बड़ी कंपनियों में प्रवेश मिले, लेकिन ऐसा होगा जरूर।’ सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है अगर आप छोटी उम्र से ही धीरे-धीरे कौशल विकसित करते हैं, तो अच्छा वेतन और पद बाद में अपने आप मिल जाएंगे। यह किसी अचानक होने वाले कारनामे से धीमा लेकिन ज्यादा भरोसेमंद है। आप जितना ज्यादा सीखेंगे उतनी ही अच्छी नौकरी पाने के अवसर ज्यादा बनेंगे। सफल होने के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने का कोई शॉर्टकट नहीं है।’ डैन रोजर्स के सुझाव सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट, तकनीकी कौशल और वास्तविक काम का अनुभव दिखाएं। करियर की शुरुआत छोटे रोल से करें और धीरे-धीरे अपनी विश्वसनीयता बनाएं। सीधे बड़ी कंपनियों में प्रवेश की बजाय अलग-अलग भूमिकाओं का अनुभव लेकर टेक ईकोसिस्टम में जगह बनाएं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो

‘वाटरगेट’ के नायक बटरफील्ड का निधन:इनके विस्फोटक सच ने अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन की कुर्सी हिला दी थी; पहली बार किसी राष्ट्रपति को देना पड़ा था इस्तीफा

‘वाटरगेट’ के नायक बटरफील्ड का निधन:इनके विस्फोटक सच ने अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन की कुर्सी हिला दी थी; पहली बार किसी राष्ट्रपति को देना पड़ा था इस्तीफा

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की सत्ता गिराने में अहम रोल निभाने वाले वाइट हाउस के पूर्व अधिकारी (डिप्टी असिस्टेंट टू द प्रेसिडेंट) अलेक्जेंडर बटरफील्ड का 99 की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 1973 में अमेरिकी सीनेट के सामने गवाही देते हुए ‘वाटरगेट जासूसी कांड’ का खुलासा किया और बताया कि वाइट हाउस में बातचीत रिकॉर्ड करने वाला गुप्त टेप सिस्टम मौजूद है। दरअसल, 1972 में वाटरगेट कॉम्प्लेक्स में डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी में जासूसी करते 5 लोग पकड़े गए। इनके संबंध निक्सन की पार्टी से जुड़े थे। दबाव बढ़ने पर 1974 में निक्सन को इस्तीफा देना पड़ा। ऐसा करने वाले वह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने। पढ़िए अलेक्जेंडर की गवाही की वो कहानी… 2 साल से चल रही रिकॉर्डिंग में जासूसी छिपाने की बातें भी दर्ज जांच में जब राष्ट्रपति के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिल रहे थे, तभी बटरफील्ड की गवाही ने मामला पलट दिया। सीनेट के वकील ने पूछा कि क्या ओवल ऑफिस में रिकॉर्डिंग डिवाइस है। बटरफील्ड ने जवाब दिया, ‘हां, वहां टेप मौजूद है।’ उन्होंने बताया कि निक्सन के आदेश पर लगातार टेप दो साल से ओवल ऑफिस समेत अन्य जगहों पर सभी बातचीत व फोन कॉल रिकॉर्ड करता था। यह आवाज से सक्रिय होकर राष्ट्रपति, सहयोगियों, कांग्रेस नेताओं की बात सहेजकर रखता था। इसमें जासूसी छिपाने से जुड़ी बातें भी दर्ज थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खुले टेप, महाभियोग के डर से दिया इस्तीफा घटना के बाद अमेरिकी राजनीति में तूफान सा आ गया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जब ये टेप सार्वजनिक हुए, तो निक्सन बेनकाब हो गए। स्थिति महाभियोग तक पहुंचती उससे पहले ही डर से निक्सन ने इस्तीफा दे दिया। बटरफील्ड निक्सन के चीफ ऑफ स्टाफ के पुराने दोस्त थे। उन्होंने ही वाइट हाउस में सीक्रेट सर्विस के साथ मिलकर यह रिकॉर्डिंग सिस्टम लगवाया था। बटरफील्ड ने बाद में माना कि उन्होंने भारी मन से गवाही दी, लेकिन वे राष्ट्रपति के झूठ के साथ नहीं रह सकते थे। निक्सन के विदाई भाषण पर उन्होंने कहा था ‘इंसाफ की जीत हुई है, मैं भीतर से इस बात को लेकर बेहद खुश था।’ बतौर पायलट युद्ध में दुश्मन की मिसाइल से बचे थे बटरफील्ड बटरफील्ड का जन्म 6 अप्रैल 1926 को फ्लोरिडा में हुआ था। वाइट हाउस जाने से पहले वह अमेरिकी एयरफोर्स में पायलट थे। वे 21 साल तक सेवाएं दे चुके थे। 1955 में वियतनाम युद्ध के दौरान उन्होंने कई खतरनाक मिशनों को अंजाम दिया। उस दौरान 98 कॉम्बैट मिशन उड़ाए। उन्हें वायु सेना का सर्वोच्च सम्मान ‘डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस’ मिला था। एक बार उनका विमान लगभग दुश्मन की मिसाइल की जद में आ गया था, लेकिन उनकी सूझबूझ ने उन्हें बचा लिया था। यही नहीं राष्ट्रपति रहते निक्सन के पास तीन कुत्ते थे। जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी बटरफील्ड को दी गई थी।

बारिश कम हुई, हवा में नमी नहीं, इस कारण तेजी से बढ़ रही गर्मी

बारिश कम हुई, हवा में नमी नहीं, इस कारण तेजी से बढ़ रही गर्मी

जिले में मानसून की बारिश कम हुई, साथ ही पहाड़ों पर बर्फबारी नहीं हुई, इस कारण मार्च के दूसरे सप्ताह में ही हवा गर्म लगने लगी है। तापमान सामान्य से 7 डिग्री ऊपर चला गया है। ऐसी स्थिति मार्च के तीसरे सप्ताह के बाद होती थी। औसत सामान्य तापमान 32 डिग्री है लेकिन 5 दिनों से यह सामान्य से अधिक है। मंगलवार को दिन का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 7 डिग्री ज्यादा है। इसी कारण सुबह 11 बजे से ही हवा गर्म लगने लगी है। दोपहर बाद लू जैसी स्थिति बनने लगी है। विशेषकर शहर के अंदर गर्म हवा के थपेड़े लगने लगे हैं। दिन के अधिकतम तापमान के साथ ही रात का तापमान सामान्य से ज्यादा है। मंगलवार को रात का तापमान 20.4 डिग्री दर्ज किया गया। यह सामान्य से 3 डिग्री ज्यादा है। 1230 मिमी की जगह 996 मिमी हुई बारिश मौसम वैज्ञानिक विवेक छलोत्रे के मुताबिक तेज धूप व गर्मी के अलग-अलग कारण हैं। एक कारण औसत से कम बारिश होना भी है। जिले की औसत बारिश 1230 मिमी है। इस साल 996 मिमी ही बारिश हुई। इस कारण इस साल मार्च के दूसरे सप्ताह में ही हवा शुष्क हो गई है। पहाड़ों पर भी बर्फबारी नहीं हुई, इस कारण उत्तर से आने वाली हवा भी ठंडी नहीं है। भरपूर बर्फबारी होने पर गर्मी जल्दी नहीं आती, इस साल ऐसा नहीं हुआ है। साथ ही शहर व आसपास पत्थर व पहाड़ियां हैं। ये गर्म होने के बाद हवा भी गर्म हो जाती है। इस कारण दिन में हवा गर्म लग रही है। अपेक्षाकृत रात में स्थिति ठीक है लेकिन तापमान फिर भी सामान्य से अधिक है। अगले 4-5 दिन यही स्थिति रहेगी। इसके बाद बादल आ सकते हैं।

20 साल से ट्रैक्टर चलाने वालों को बहरेपन का खतरा:55 ड्राइवरों पर रिसर्च के बाद सीआईएई भोपाल के वैज्ञानिकों का खुलासा

20 साल से ट्रैक्टर चलाने वालों को बहरेपन का खतरा:55 ड्राइवरों पर रिसर्च के बाद सीआईएई भोपाल के वैज्ञानिकों का खुलासा

खेतों में ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों की सुनने की शक्ति कमजोर हो रही है। एक ताजा रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जो किसान 20 साल या उससे ज्यादा समय से ट्रैक्टर चला रहे हैं, उनमें से कई को सामान्य बातचीत करने में भी जोर लगाना पड़ता है। ऑफिस वर्कर के मुकाबले देखें तो दफ्तर में यह जोखिम 0.2% है, जबकि ट्रैक्टर चलाने वालो में यह बढ़कर 7.1% तक पहुंच जाता है। जो 35 गुना ज्यादा है। केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई), भोपाल के वैज्ञानिकों ने 55 ट्रैक्टर ड्राइवरों पर यह रिसर्च की है। जो 5 से 43 सालों से खेत जोत रहे हैं। सामने आया कि यह केवल कानों तक सीमित नहीं, बल्कि ड्राइवरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सीधा असर कर रहा है। ड्राइवरों में डिप्रेशन (अवसाद), एंग्जायटी (चिंता) और भारी तनाव जैसी मानसिक बीमारियां घर कर रही हैं। इस अध्ययन में सीआईएई के डॉ. अभिजीत खड़त्कर, सीआर मेहता, विजय कुमार और रतलाम मेडिकल कॉलेज कम्युनिटी मेडिसिन के लोकेंद्रसिंह कोट शामिल रहे। रिसर्च डेटा: कम हाइट वालों को दोगुना नुकसान 55 में से 45 ड्राइवरों के बाएं कान की क्षमता दाएं कान के मुकाबले कम थी। 15-20 ड्राइवर जिन्हें 20 साल से ज्यादा अनुभव है, उनकी स्थिति गंभीर, हर तीसरे ड्राइवर में चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायत भी सामने आई है। ट्रैक्टर की डिजाइन : दाएं से ज्यादा बाएं कान को नुकसान दायां कान: दायां कान कम प्रभावित मिला, बढ़ती उम्र, शोर का असर रहा। बायां कान: कम लंबाई वाले ड्राइवर धुआं निकलने वाले पाइप के ज्यादा करीब होते हैं, जिससे बाएं कान पर ज्यादा असर होता है। यह जानना जरूरी है… कानों की सुरक्षा: इयरप्लग या इयरमफ शोर को 20 से 30 डेसिबल तक कम करते हैं। मशीन का रखरखाव: पुराने ट्रैक्टरों के साइलेंसर और मफलर समय पर बदलें। काम का बंटवारा: लगातार घंटों तक अकेले ट्रैक्टर न चलाएं, बीच-बीच में आराम लें। औजारों का शोर: ट्रैक्टर के साथ इस्तेमाल होने वाला ‘डिस्क हैरो’ ज्यादा शोर करता है। नियमित जांच जरूर करवाएं।

ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में

ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ‎ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है।‎ ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत‎ मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,‎जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से‎ सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच‎ चीन तेल और गैस‎ के लिए मध्य पूर्व की आपूर्ति‎ पर निर्भर हो गया। जब ‎पिछले साल अमेरिका से ‎चीन की व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ी तो वह अमेरिकी‎ बाजार में अपने कई सामान बेचने में असमर्थ रहा,‎ जो कभी चीन का सबसे बड़ा बाजार था। इसके‎ बाद चीन के लिए मिडिल ईस्ट का महत्व और भी‎ अधिक स्पष्ट हो गया था।‎ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) चीनी कारों के‎ लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बन गया।‎ सऊदी अरब और उसके पड़ोसी देशों की ओर से ‎चीनी स्टील की मांग दोगुनी हो गई। 2025 में‎ मिडिल ईस्ट को चीन का निर्यात बाकी दुनिया के ‎‎निर्यात की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ा ‎है। लेकिन अब ये खतरे में है।‎ मध्य पूर्व में चीन के गहरे वित्तीय संबंधों के ‎‎बावजूद उसे जोखिमों का सामना करना पड़ रहा‎ है। चीन ने जल्द लड़ाई बंद करने का आह्वान किया ‎है। ईरानी धमकियों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से ‎‎आवाजाही कम हो गई है। चीनी शिपिंग कोस्को ने ‎इस क्षेत्र के माध्यम से बुकिंग बंद कर दी है।‎ चीनी निवेश मिडिल ईस्ट में दुनिया में कहीं‎ और की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। यूरेसिया ग्रुप‎ में चीन की निदेशक डैन वांग कहा कि 2019 से ‎‎2024 तक चीन ने मध्य पूर्व में सीधे 89‎ बिलियन डॉलर यानी करीब 8 लाख करोड़ रुपए‎ का निवेश किया। ये व्यापारिक संबंध अब निशाने‎ पर हैं क्योंकि अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान‎ पर हमला कर रही हैं और ईरान पूरे क्षेत्र में‎ बंदरगाहों, जहाजों, पाइपलाइनों, डिसेलिनेशन ‎संयंत्रों, डेटा केंद्रों पर जवाबी हमला कर रहा है।‎ विलियम एंड मैरी रिसर्च इंस्टीट्यूट एडडेटा के‎ अनुसार 2023 में मिडिल ईस्ट में चीन का ऋण‎ और अनुदान दोगुना होकर वैश्विक पोर्टफोलियो‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ का 10% हो गया। चीन ईरानी तेल का मुख्य‎ खरीदार है। वह तीन प्रमुख कच्चे तेल की ‎पाइपलाइनों का भी संचालन करता है, जिनमें से‎ दो रूस और कजाकिस्तान से तेल का परिवहन‎ करती हैं। फिर भी ईरानी आपूर्ति के नुकसान से‎ चीन को अन्य स्रोत खोजने के लिए मजबूर होना‎ पड़ेगा। खोज पूरी हो भी जाएगी लेकिन कीमत‎ तेहरान से खरीदे गए रियायती तेल की तुलना में‎ बहुत अधिक होगी। तनाव से कंपनियों का काम थमा‎ मिडिल ईस्ट में कई चीनी कंपनियों ने‎ कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा।‎ 1 मार्च को दिग्गज टेक कंपनी बाइडू ने‎यूएई में रोबोटैक्सी सेवाओं को रोकने की‎ बात कही। चीनी फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ‎कीटा ने भी संकेत दिया है कि क्षेत्र में‎ सेवाएं निलंबित या सीमित हो सकती हैं।‎ इजराइल और यूएई में पोर्ट‎संचालित कर रहा है चीन कतर में चीनी बैंक तरलीकृत प्राकृतिक गैस‎(LNG) उत्पादन सुविधा के बड़े विस्तार को फंड ‎दे रहे हैं। चीनी सरकारी तेल कंपनी सिनोपेक की‎ इसके नॉर्थ फील्ड ईस्ट विस्तार प्रोजेक्ट में‎ हिस्सेदारी है। चीनी निवेशकों ने इजराइल के हाइफा‎पोर्ट और अमीरात के खलीफा पोर्ट को भी फंडिंग‎दी है। कई टर्मिनल चीनी कंपनियों के स्वामित्व में हैं‎ और उनके द्वारा संचालित हैं।‎‎ क्षेत्र में डिसेलिनेशन प्लांट में ‎चीन सबसे बड़ा निवेशक‎ ईरान में चीनी कंपनियों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक‎ग्रिड और पेट्रोकेमिकल संयंत्र बनाए हैं‎। चीन क्षेत्र में ‎डिसेलिनेशन में सबसे बड़ा निवेशक भी है। पावर‎ कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ऑफ चाइना ने सऊदी‎ अरब, यूएई, ओमान और इराक में परियोजनाएं‎‎ बनाई हैं। हुआवे, अलीबाबा, टेनसेंट जैसी प्रमुख‎ चीनी टेक कंपनियों के दुबई में ऑफिस हैं।‎

ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में

ईरान-इजराइल तनाव से चीन को झटका:मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग; चीन के 8 लाख करोड़ दांव पर, डिसेलिनेशन से लेकर टेक प्रोजेक्ट्स तक सब खतरे में

मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध चीन के लिए‎ खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल चीन ने‎ मिडिल ईस्ट में भारी निवेश किया हुआ है। साथ ‎ही ये क्षेत्र उसके इस्पात, इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर पैनलों के लिए बड़ा बाजार है।‎ ईरान के रूप में चीन को तेल का सस्ता स्रोत‎ मिला था। पूरे क्षेत्र में उसे ऐसी सरकारें भी मिलीं,‎जो नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में चीन से‎ सीखने के लिए उत्सुक थीं। इन्हीं सब के बीच‎ चीन तेल और गैस‎ के लिए मध्य पूर्व की आपूर्ति‎ पर निर्भर हो गया। जब ‎पिछले साल अमेरिका से ‎चीन की व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ी तो वह अमेरिकी‎ बाजार में अपने कई सामान बेचने में असमर्थ रहा,‎ जो कभी चीन का सबसे बड़ा बाजार था। इसके‎ बाद चीन के लिए मिडिल ईस्ट का महत्व और भी‎ अधिक स्पष्ट हो गया था।‎ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) चीनी कारों के‎ लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार बन गया।‎ सऊदी अरब और उसके पड़ोसी देशों की ओर से ‎चीनी स्टील की मांग दोगुनी हो गई। 2025 में‎ मिडिल ईस्ट को चीन का निर्यात बाकी दुनिया के ‎‎निर्यात की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ा ‎है। लेकिन अब ये खतरे में है।‎ मध्य पूर्व में चीन के गहरे वित्तीय संबंधों के ‎‎बावजूद उसे जोखिमों का सामना करना पड़ रहा‎ है। चीन ने जल्द लड़ाई बंद करने का आह्वान किया ‎है। ईरानी धमकियों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से ‎‎आवाजाही कम हो गई है। चीनी शिपिंग कोस्को ने ‎इस क्षेत्र के माध्यम से बुकिंग बंद कर दी है।‎ चीनी निवेश मिडिल ईस्ट में दुनिया में कहीं‎ और की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। यूरेसिया ग्रुप‎ में चीन की निदेशक डैन वांग कहा कि 2019 से ‎‎2024 तक चीन ने मध्य पूर्व में सीधे 89‎ बिलियन डॉलर यानी करीब 8 लाख करोड़ रुपए‎ का निवेश किया। ये व्यापारिक संबंध अब निशाने‎ पर हैं क्योंकि अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान‎ पर हमला कर रही हैं और ईरान पूरे क्षेत्र में‎ बंदरगाहों, जहाजों, पाइपलाइनों, डिसेलिनेशन ‎संयंत्रों, डेटा केंद्रों पर जवाबी हमला कर रहा है।‎ विलियम एंड मैरी रिसर्च इंस्टीट्यूट एडडेटा के‎ अनुसार 2023 में मिडिल ईस्ट में चीन का ऋण‎ और अनुदान दोगुना होकर वैश्विक पोर्टफोलियो‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ का 10% हो गया। चीन ईरानी तेल का मुख्य‎ खरीदार है। वह तीन प्रमुख कच्चे तेल की ‎पाइपलाइनों का भी संचालन करता है, जिनमें से‎ दो रूस और कजाकिस्तान से तेल का परिवहन‎ करती हैं। फिर भी ईरानी आपूर्ति के नुकसान से‎ चीन को अन्य स्रोत खोजने के लिए मजबूर होना‎ पड़ेगा। खोज पूरी हो भी जाएगी लेकिन कीमत‎ तेहरान से खरीदे गए रियायती तेल की तुलना में‎ बहुत अधिक होगी। तनाव से कंपनियों का काम थमा‎ मिडिल ईस्ट में कई चीनी कंपनियों ने‎ कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा।‎ 1 मार्च को दिग्गज टेक कंपनी बाइडू ने‎यूएई में रोबोटैक्सी सेवाओं को रोकने की‎ बात कही। चीनी फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ‎कीटा ने भी संकेत दिया है कि क्षेत्र में‎ सेवाएं निलंबित या सीमित हो सकती हैं।‎ इजराइल और यूएई में पोर्ट‎संचालित कर रहा है चीन कतर में चीनी बैंक तरलीकृत प्राकृतिक गैस‎(LNG) उत्पादन सुविधा के बड़े विस्तार को फंड ‎दे रहे हैं। चीनी सरकारी तेल कंपनी सिनोपेक की‎ इसके नॉर्थ फील्ड ईस्ट विस्तार प्रोजेक्ट में‎ हिस्सेदारी है। चीनी निवेशकों ने इजराइल के हाइफा‎पोर्ट और अमीरात के खलीफा पोर्ट को भी फंडिंग‎दी है। कई टर्मिनल चीनी कंपनियों के स्वामित्व में हैं‎ और उनके द्वारा संचालित हैं।‎‎ क्षेत्र में डिसेलिनेशन प्लांट में ‎चीन सबसे बड़ा निवेशक‎ ईरान में चीनी कंपनियों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक‎ग्रिड और पेट्रोकेमिकल संयंत्र बनाए हैं‎। चीन क्षेत्र में ‎डिसेलिनेशन में सबसे बड़ा निवेशक भी है। पावर‎ कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ऑफ चाइना ने सऊदी‎ अरब, यूएई, ओमान और इराक में परियोजनाएं‎‎ बनाई हैं। हुआवे, अलीबाबा, टेनसेंट जैसी प्रमुख‎ चीनी टेक कंपनियों के दुबई में ऑफिस हैं।‎

Winds of change, youth busy in changing the atmosphere of the area

Winds of change, youth busy in changing the atmosphere of the area

Hindi News Career Winds Of Change, Youth Busy In Changing The Atmosphere Of The Area श्रीनगर16 मिनट पहले कॉपी लिंक दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। वुलर झील के किनारे बसे बांदीपोरा के नायदखाई गांव में एक छोटे-से घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है। गांव वाले, रिश्तेदार और परिचित बधाई देने आ रहे हैं। ये घर इरफान अहमद लोन का है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद इरफान ने अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 957 वीं रैंक हासिल की है। उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ इतनी ज्यादा है कि इरफान के पिता बशीर अहमद को लॉन में एक बड़ा टेंट लगवाना पड़ा। सिंचाई विभाग में दिहाड़ी मजदूर बशीर कहते हैं, हम कई वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। इरफान की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी जमीन भी बेच दी। अब इरफान की सफलता ने उनके छोटे भाई और बहन के मन में भी आईएएस अधिकारी बनने का सपना मजबूत कर दिया है। यूपीएससी में 257 वीं रैंक हासिल करने वाले पुलवामा के तौसीफ अहमद गनी भी एक मजदूर के बेटे हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर से रिकॉर्ड 17 उम्मीदवारों का यूपीएससी में चयन हुआ है। ये बदलाव कश्मीर में शिक्षा, अवसर और नई आकांक्षाओं के उभरते माहौल की भी कहानी है। हर साल औसतन 10-15 उम्मीदवार यूपीएससी में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2010 से 2025 के बीच 150 से ज्यादा उम्मीदवार जम्मू-कश्मीर से यूपीएससी में चुने जा चुके हैं। 2025 यूपीएससी में रिकॉर्ड चयन वर्ष सिलेक्शन 2021 9 2022 16 2023 11 2024 14 2025 17 टॉप 10 में भी आ रहे कश्मीरी नाम एआईआर रैंक शाह फैसल 2010 टॉपर अतहर आमिर 2015 सेकंड अनमोल राठौड़ 2024 सातवीं प्रेरणा – शाह फैसल के टॉपर बनने के बाद कई युवा टॉप 10 में आए दो दशक पहले यूपीएससी की चयन सूची में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के सिर्फ एक या दो ही युवा होते थे। 20 साल के आतंक के दौर में सिर्फ चार आईएएस और आईपीएस ही निकले। 2010 में शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में टॉप करने वाले कश्मीर के पहले उम्मीदवार बने। उनसे प्रेरणा लेकर बड़ी संख्या में युवा यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2016 में अतहर आमिर ने यूपीएससी में दूसरी रैंक हासिल की। इसके बाद कई युवा टॉप 10 में अपना स्थान बनाने में सफल रहे। विस्तार – पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी कर रहे मदद पिछले कुछ वर्षों में, सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी न केवल श्रीनगर बल्कि छोटे कस्बों में भी छात्रों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य बन गई है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोचिंग सेंटरों का विस्तार हो रहा है। श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला और पुलवामा जैसे शहरों में लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर बढ़ रहे हैं। कई पूर्व सैन्य और पुलिस अधिकारी भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। पूर्व आईजीपी बसंत रथ जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के सिविल सेवा उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग दे रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

गैरेज में नहीं,ड्राइंग रूम में सजती हैं करोड़ों की कारें:लग्जरी स्टोरेज रईसों का स्टेटस सिंबल, महामारी में घर में रहने की आदत ने इस ट्रेंड को हवा दी

गैरेज में नहीं,ड्राइंग रूम में सजती हैं करोड़ों की कारें:लग्जरी स्टोरेज रईसों का स्टेटस सिंबल, महामारी में घर में रहने की आदत ने इस ट्रेंड को हवा दी

अब अमीरी दिखाने का तरीका बदल रहा है। पहले लग्जरी चीजों को सुरक्षित अलमारियों या गैरेज में रखा जाता था, लेकिन अब सुपर-रिच लोग महंगी कारों, हैंडबैग्स और वाइन कलेक्शन को घर के अंदर कलाकृति की तरह सजाकर रखते हैं। अमेरिका के बेवर्ली हिल्स के प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन बेन तालेई इसका उदाहरण हैं। उन्होंने अपने घर का रेनोवेशन इसलिए कराया ताकि उनकी दुर्लभ सुपरकारों का कलेक्शन कांच की दीवारों के पीछे साफ दिखाई दे सके। उनके घर की किचन से ही सुपरकारों की कतार नजर आती है। तालेई अपनी संपत्ति में लगभग 5,000 वर्गफुट की कार गैलरी बनाने की योजना भी बना रहे हैं, जिसकी लागत करीब 130 करोड़ रुपए होगी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमीर लोगों में यह नया ‘लग्जरी ट्रेंड’ तेजी से बढ़ रहा है। अब वे कारों के लिए गैरेज की बजाय डिजाइनर गैलरी या निजी क्लब जैसे स्पेस बनवा रहे हैं। इंग्लैंड के कोट्सवोल्ड्स में आर्किटेक्चर फर्म हॉलैंड ग्रीन ने एक ग्राहक के लिए ऐसा गैरेज तैयार किया, जहां मालिक अपनी फेरारी के पास बैठकर कॉफी पी सकता है, ठीक वैसे ही जैसे कोई आर्ट गैलरी में बैठकर पेंटिंग निहारता है। यह ट्रेंड सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। महंगी वाइन और लग्जरी हैंडबैग्स को भी अब तहखानों या बंद अलमारियों में रखने के बजाय खास डिस्प्ले स्पेस में सजाया जा रहा है। पश्चिम लंदन में आर्किटेक्ट रॉबर्ट डौगे ने एक घर में पारंपरिक वाइन सेलर की जगह ऐसी डिस्प्ले गैलरी बनाई, जिसमें वाइन की गुणवत्ता भी बनी रहती है और पूरा कमरा आर्ट गैलरी जैसा दिखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद लोग घर में अधिक समय बिताने लगे हैं, इसलिए वे अपने शौक और पहचान को घर के भीतर ही प्रदर्शित करना चाहते हैं। आखिरकार, इन बेशकीमती चीजों को देखकर मिलने वाली खुशी भी उनके लिए उतनी ही अहम है जितनी उनकी कीमत। बढ़ते निवेश के बीच थिएटर जैसा अनुभव भी लंदन स्थित मार्टिन केम्प डिजाइन की सीईओ जेमिमा ग्राफ के मुताबिक, अब ऐसे ‘लिफ्ट सिस्टम’ लगाए जा रहे हैं जो मेहमानों के आने पर वाइन कलेक्शन को जमीन के नीचे से ऊपर की ओर लाते हैं। वे इसे ‘स्टोरेज का थिएटर’ कहती हैं। ड्रेसिंग एरिया अब ‘पर्सनल म्यूजियम’ में बदल रहे हैं। बीसीजी और वेस्टियायर कलेक्टिव की एक रिपोर्ट के मुताबिक लग्जरी सेकंड-हैंड मार्केट सालाना 10% से अधिक की दर से बढ़ रहा है और अब यह 200 अरब डॉलर से अधिक का है। यही कारण है कि हर्मीस और चैनल के हैंडबैग्स को अब महज एक्सेसरी नहीं, बल्कि निवेश माना जा रहा है।

हॉल ऑफ फेम में शामिल दिग्गज कोच के लीडरशिप मंत्र:अमेरिका के फुटबॉल कोच मैक ब्राउन 50 साल तक कोच रहे; बोले- टीम जीत रही हो तो लगाम कसें, टूटने पर सहारा दें

हॉल ऑफ फेम में शामिल दिग्गज कोच के लीडरशिप मंत्र:अमेरिका के फुटबॉल कोच मैक ब्राउन 50 साल तक कोच रहे; बोले- टीम जीत रही हो तो लगाम कसें, टूटने पर सहारा दें

अमेरिका के दिग्गज कोच मैक ब्राउन को खेल जगत के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में गिना जाता है। 50 साल के कोचिंग करियर में उन्होंने 288 मैच जीते। वे 2005 में टेक्सास यूनिवर्सिटी को नेशनल चैम्पियन बनाने वाले कोच रहे और हॉल ऑफ फेम में भी शामिल हैं। उनकी सफलता केवल स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं रही। कोचिंग अनुभव के आधार पर ब्राउन ने लीडरशिप से जुड़े चार सबक बताए, जो मैदान से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक हर लीडर के काम के हैं। लीडर की असली जिम्मेदारी टीम को यह बताना कि वे जीत सकते हैं 1984 में अपनी टीम के खराब खेलने पर उन्होंने खिलाड़ियों को फटकारा था। टीम वह मैच हार गई। तब दिग्गज कोच बैरी स्विट्जर ने कहा था कि तुमने टीम से कहा कि वे हार जाएंगे और वे हार गए। ब्राउन कहते हैं, ‘जब टीम ऊंचाइयों पर हो और आत्ममुग्ध हो रही हो, तब उन पर दबाव डालें। लेकिन जब मुश्किल में हों और आत्मविश्वास गिरा हुआ हो, तब उन्हें प्रेरित कर बताना चाहिए कि वे जीत सकते हैं।’ काम के तनाव के बीच आपस में हंसी-मजाक होना भी बहुत जरूरी है 2005 के रोज बाउल मैच से पहले ब्राउन की टीम काफी दबाव में थी। खिलाड़ी आपस में बात तक नहीं कर रहे थे। ब्राउन को एहसास हुआ कि अगर तनाव बना रहा, तो हार जाएंगे। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ जोक्स शेयर कर तनाव कम करने का तरीका अपनाया। ब्राउन कहते हैं, ‘लीडर को पता होना चाहिए कि माहौल को कब हल्का करना है। तनाव में काम बिगड़ता है, खुशी में टीम पूरी क्षमता से प्रदर्शन करती है।’ हारने के बाद शब्दों का काफी सोच-समझकर चयन करना चाहिए ब्राउन का मानना है कि एक लीडर के शब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं, खासकर हार के बाद। कोच गुस्से में ऐसी बातें कह देते हैं जिनसे बाद में उन्हें पश्चाताप होता है। जब टीम जीते, तो खिलाड़ियों की तारीफ करें जबकि हार की जिम्मेदारी खुद लें। ब्राउन कहते हैं कि हार के बाद मीडिया या टीम से बात करते समय आपकी बॉडी लैंग्वेज मायने रखती है। आप निराश दिख सकते हैं, लेकिन पराजित नहीं। मानवता और सहानुभूति, जीत-हार के नतीजों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण 1999 में टेक्सास बनाम टेक्सास ए एंड एम मैच से पहले ए एंड एम यूनिवर्सिटी में भीषण हादसा हुआ, जिसमें 12 छात्रों की मौत हो गई। ब्राउन ने टीम के साथ मिलकर रक्तदान शिविर लगाया और विरोधी के प्रति संवेदना व्यक्त की। टेक्सास मैच हार गया, लेकिन ब्राउन को मलाल नहीं था। ब्राउन कहते हैं, ‘लीडर को संवेदनशील और भावनात्मक होना चाहिए। कई बार मानवता और सहानुभूति, जीत-हार के नतीजों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।’