Monday, 20 Apr 2026 | 05:48 AM

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मेसी का खुलासा- स्पेन से खेलने का ऑफर ठुकराया:अंग्रेजी न सीख पाने का आज भी मलाल, बोले- भाषा की कमी से कई बड़े लोगों से खुलकर बात नहीं कर सका

मेसी का खुलासा- स्पेन से खेलने का ऑफर ठुकराया:अंग्रेजी न सीख पाने का आज भी मलाल, बोले- भाषा की कमी से कई बड़े लोगों से खुलकर बात नहीं कर सका

अर्जेंटीना के वर्ल्ड कप विजेता कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की है। एक मैक्सिकन पॉडकास्ट के दौरान मेसी ने स्वीकार किया कि बचपन में अंग्रेजी न सीख पाना उन्हें अब भी खलता है। 38 वर्षीय मेसी ने कहा, ‘मुझे कई बातों का अफसोस है, लेकिन बचपन में अंग्रेजी न सीखना सबसे बड़ा पछतावा है। मेरे पास समय था, मैं पढ़ सकता था। करियर के दौरान मुझे दुनिया की कई बड़ी और प्रभावी हस्तियों से मिलने का मौका मिला, लेकिन भाषा की कमी के कारण मैं उनसे खुलकर संवाद नहीं कर सका। मैं ऐसे पलों में खुद को आधा अनजान महसूस करता था। अमेरिका के मेजर लीग सॉकर क्लब इंटर मियामी के लिए खेल रहे मेसी अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और तैयारी के महत्व के बारे में लगातार समझाते हैं। मेसी 13 साल की उम्र में अपने शहर रोसारियो से स्पेन पहुंचे और बार्सिलोना की प्रसिद्ध एकेडमी ला मासिया से जुड़े। उन्होंने भावुक होकर याद किया, ‘पूरा मोहल्ला हमें एयरपोर्ट छोड़ने आया था। वे लियो मेसी को नहीं, बल्कि मेसी परिवार को विदा कर रहे थे।’ स्पेन में उनका पहला साल बहुत कठिन था। ट्रांसफर नियमों के कारण वे छह महीने तक नहीं खेल पाए और जब खेलने का मौका मिला, तो चोटिल होकर 3 महीने के लिए बाहर हो गए थे। स्पेन में पले-बढ़े और पूरा क्लब करियर वहीं बनाने के कारण मेसी के पास स्पेन की नेशनल टीम से खेलने का विकल्प भी था। उस समय स्पेनिश फुटबॉल फेडरेशन ने उन्हें मनाने की कोशिश की। लेकिन मेसी ने साफ किया कि उनके मन में कभी भ्रम नहीं था। उनका दिल हमेशा अर्जेंटीना के साथ था। करियर के कठिन दौर में जब अर्जेंटीना बड़े टूर्नामेंटों के फाइनल हार रहा था, तब कुछ आलोचकों ने सवाल उठाए थे कि शायद स्पेन के साथ खेलते तो मेसी ज्यादा ट्रॉफी जीतते। लेकिन मेसी ने फैसले पर कभी पछतावा नहीं किया। आठ बार बैलेन डि’ओर जीत चुके मेसी ने स्वीकारा कि भले ही उन्होंने फुटबॉल में इतना कुछ हासिल किया, लेकिन सीखने व बेहतर बनने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। रास्ते में कई अनुभव और सबक मिलते हैं, जो इंसान को बनाते हैं। मैंने एंटोनेला को बार्सिलोना में डिनर के दौरान प्रपोज किया था। हम कई साल से साथ थे और हमारे दो बच्चे भी थे। यह अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि स्वाभाविक कदम था। यह थोड़ा फिल्मी और रोमांटिक अंदाज में था।

पुल टूटने पर जागे अफसर…:अब 15 साल पुराने आरओबी और ओबी की होगी जांच

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बीते दिनों भोपाल-जबलपुर हाइवे पर टूट पुल के बाद अब अफसरों की नींद टूटी है। मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और लोक निर्माण विभाग के सभी रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) और ओवर ब्रिज (ओबी) की जांच कराई जा रही है। इस जांच में 15 साल पहले बने ये सभी पुल शामिल किए गए हैं और उनका कंडीशनल सर्वे होगा। इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मेंटेनेंस एवं निर्माण की लिस्ट फाइनल होगी। साथ ही ये तय किया जाएगा कि कौन से पुल मेंटेनेंस से सुधर जाएंगे और किन पुलों पर सिर्फ मेंटेनेंस से काम नहीं बन सकेगा। ग्वालियर चंबल संभाग के 8 जिलों में भी इन विभागों के आरओबी एवं ओबी का सर्वे हो रहा है। ज्ञात रहे बीते दिनों भोपाल-जबलपुर हाइवे पर 400 करोड़ रुपए की लागत का पुल गिर गया था। जो कि कुछ महीने पहले भी क्षतिग्रस्त हुआ था। ग्वालियर के आठ पुलों की भी जांच होगी ग्वालियर के 8 पुलों की भी जांच होगी। जिसमें सिंध नदी पर करैरा-भितरवार, चाचूड नदी पर डबरा-जंगीपुरा, पार्वती नदी पर करैरा-भितरवार, बिरला नगर रेल ओवर ब्रिज, नोन नदी पर देवरा-छिरेनता, नोन नदी पर चिनौर-करहिया, सिंध नदी पर करियावटी-बडगोर और मेघरा नाला पर डबरा-चिनोर रोड पर बना पुल शामिल है। इनके अलावा भिंड, मुरैना, दतिया, गुना, अशोकनगर, श्योपुर और शिवपुरी के 24 पुल की भी जांच हो रही है। डबरा आरओबी जर्जर, भारी वाहन रोके, बाकी निकाले डबरा में एमपीआरडीसी का आरओबी काफी जर्जर हालत में है। जिसकी हालत देखते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने 7 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर भारी वाहनों (डंपर, ट्रक, ट्रैक्टर-टॉली) के आवागमन पर रोक लगा दी। लेकिन कार व छोटे लोडिंग वाहन यहां से आ-जा रहे हैं। वहीं यहां फिर से पुल निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो गई है। मगर इसका एलाइमेंट फाइनल नहीं हो पा रहा।

विदिशा में शराब दुकानों की नीलामी तीन चरणों में आज से होगी शुरू

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विदिशा| नई आबकारी नीति 2026-27 के अंतर्गत विदिशा जिले की शराब दुकानों की नीलामी 27 फरवरी से शुरू होगी। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन में जिला निष्पादन समिति ई-टेण्डर एवं ई-टेण्डर-कम-ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से पूरी नीलामी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराएगी। इस वर्ष जिले की 74 कंपोजिट मदिरा दुकानों को 16 समूहों में विभाजित किया गया है, जिनका कुल आरक्षित मूल्य 422.68 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। जिला आबकारी अधिकारी शरद पाठक के अनुसार नीलामी तीन चरणों में होगी: प्रथम चरण 27 फरवरी से 02 मार्च, द्वितीय 03 से 05 मार्च और तृतीय 06 से 17 मार्च 2026 तक। इच्छुक टेंडरदाता ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कंपोजिट प्रपत्र डाउनलोड कर, दस्तावेज अपलोड कर और वित्तीय प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेंगे। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कड़ी निगरानी में संपन्न कराई जाए। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और शासन को अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना बढ़ेगी। इस कदम से जिले में व्यवस्थित एवं पारदर्शी निष्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

कस्बों में डॉक्टरों की खुशामद:60 लाख तक प्री बोनस, मुफ्त फ्लैट-कार दे रहे, आधी रात कार पंक्चर तो भी सेवक हाजिर; कनाडा में चिकित्सकों की कमी

कस्बों में डॉक्टरों की खुशामद:60 लाख तक प्री बोनस, मुफ्त फ्लैट-कार दे रहे, आधी रात कार पंक्चर तो भी सेवक हाजिर; कनाडा में चिकित्सकों की कमी

कनाडा की पहचान जिस स्वास्थ्य व्यवस्था से थी, वही आज डॉक्टरों की भारी कमी की वजह से गंभीर संकट में है। देश की करीब 25% आबादी के पास अपना फैमिली डॉक्टर नहीं है। हालात ऐसे हैं कि छोटे शहर डॉक्टरों को नियुक्त करने के लिए एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं। कस्बों और शहर में आईपीएल नीलामी की तरह डॉक्टरों पर बोली लगा रहे हैं। कहीं, डॉक्टरों को रिझाने के लिए मेयर खुद गाइड बन रहे हैं तो कहीं मुफ्त कार, तो कहीं कोई फ्लैट दे रहा है। अल्बर्टा प्रांत के स्टेटलर कस्बे की कहानी से इसे समझ सकते हैं। स्टेटलर और इसके आसपास के इलाके की आबादी करीब 12 हजार है। कोरोना के बाद कई डॉक्टर मानसिक थकावट के कारण जल्दी रिटायरमेंट ले रहे हैं। 2023 में यहां के 14 फैमिली डॉक्टरों में से 7 ने रिटायरमेंट या ट्रांसफर ले लिया। हालात इतने बिगड़े कि डॉक्टरों की कमी के कारण इमरजेंसी विभाग कुछ दिनों तक बंद रहने लगा। तब मेयर समेत अन्य नेताओं ने बैठक बुलाई। भर्ती टीम के प्रमुख डीन लोवेल बताते हैं, ‘वह संकट का समय था। हमने तय किया कि हम डॉक्टरों को सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि एक वीआईपी लाइफस्टाइल ऑफर करेंगे।’ स्टेटलर ने 7 नए डॉक्टर लाने के लिए करीब 2.5 करोड़ रु. खर्च किए। मेयर ने डॉक्टर के लिए गाइड बनना तय किया। डॉक्टरों के परिवार की हर जरूरत पूरी करने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की गई है। चाहे रात 12 बजे कार का टायर पंक्चर हो जाए या बच्चों के लिए बेस्ट स्कूल और आइसक्रीम पार्लर खोजना हो। वो व्यक्ति तैयार मिलेगा। घाना से आई डॉ. एवुरा कंकम बताती हैं, ‘जब मैं कस्बे में गई, मेरे बच्चे परेशान हो रहे थे, लेकिन यहां के अपनेपन ने दिल जीत लिया।’ तथ्य – स्टेटलर में आए 7 नए डॉक्टरों में से 6 नाइजीरिया से स्टेटलर में आए 7 नए डॉक्टरों में से 6 नाइजीरिया से हैं। भर्ती टीम के प्रमुख डीन लोवेल कहते हैं, ‘नाइजीरिया जैसे देश डॉक्टर ट्रेंड करते हैं और हम उन्हें ले आते हैं।’ डॉक्टरों को लुभाने के तरीके, नकद बोनस – ओंटारियो के कई कस्बे 60 लाख रु. तक का नकद बोनस दे रहे हैं। वहीं, स्टेटलर हर डॉक्टर को 30 से 43 लाख रु. का नकद जॉइनिंग बोनस दिया गया। लग्जरी सुविधाएं – एक साल के लिए मुफ्त कार और गोल्फ क्लब की मेंबरशिप। ओंटारियो के मुख्यमंत्री डग फोर्ड ने तो डॉक्टरों को अपना फोन नंबर तक दे दिया है कि ‘बस एक कॉल करो और यहां आ जाओ।’

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने एक बार ‘बैजबॉल’ को परिभाषित करते हुए कहा था कि यह खेल को वैसे खेलने की कोशिश है, जैसा हमने बचपन में कल्पना की थी- रोमांचक, तेज और मजेदार। दिलचस्प बात यह है कि इस सोच की सबसे सजीव और भावुक झलक अब इंग्लैंड के लीजर सेंटरों और खेल के मैदानों पर दिख रही है, जहां 50 से 87 साल तक के लोग ‘वॉकिंग क्रिकेट’ के जरिए खेल का नया आनंद ले रहे हैं। वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अकेलेपन के खिलाफ प्रभावी हथियार है। केंट क्रिकेट कम्युनिटी ट्रस्ट की प्रोजेक्ट ऑफिसर एमी इलिज के अनुसार, हर काउंटी में इसकी टीमें फल-फूल रही हैं। लॉर्ड्स के इंडोर स्कूल में पहला इंटर-काउंटी वॉकिंग क्रिकेट फेस्टिवल आयोजित हुआ, जिसने इसकी बढ़ती लोकप्रियता पर मुहर लगा दी। केंट के फोकस्टोन स्थित थ्री हिल्स स्पोर्ट्स सेंटर में वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, सामुदायिक जुड़ाव का मंच बन चुका है। यहां 87 वर्ष तक के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। सुनने में दिक्कत, डिमेंशिया या गतिशीलता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग भी बिना झिझक मैदान में उतरते हैं। आधा रन लेने जैसी छूट इसे और रोचक बनाती है। इस खेल ने कई जिंदगियों को नई दिशा दी है। 62 वर्षीय कप्तान मार्क कहते हैं कि यहां प्रतिभा से ज्यादा भागीदारी और खुशी मायने रखती है। साल 2022 में दोनों घुटनों के ऑपरेशन के बाद ग्राहम दो स्टिक के सहारे चलते थे। वॉकिंग क्रिकेट से जुड़ने के महज 18 महीनों में उनका वजन एक-चौथाई कम हो गया और उन्होंने एक ओवर में छह छक्के जड़कर सबको हैरान कर दिया। सेना के दिनों में माल्टा के लिए खेल चुके जॉन कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इस खेल ने उन्हें नई जिंदगी दी है। कई बार खिलाड़ियों को यह भी याद नहीं रहता कि मैच कौन जीता क्योंकि यहां जीत से ज्यादा मायने मुस्कान के हैं। क्या है वॉकिंग क्रिकेट और नियम – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस खेल में दौड़ने की सख्त मनाही है। यह क्रिकेट का एक धीमा, सुरक्षित और सरल प्रारूप है, जिसे विशेष रूप से बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी (मोबिलिटी इश्यूज) का सामना कर रहे लोगों के लिए डिजाइन किया गया है। – इसमें चोट के जोखिम को कम करने के लिए लेदर बॉल की जगह सॉफ्ट बॉल और अक्सर प्लास्टिक के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। – गेंदबाज चलकर गेंद फेंकता है, फील्डर चलकर गेंद पकड़ते हैं और बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़ता नहीं, बल्कि चलता है। सबसे मजेदार नियम यह है कि बल्लेबाज आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, बस गेंदबाज टीम को बोनस के रूप में पांच रन मिल जाते हैं।

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

वॉकिंग क्रिकेट, खिलाड़ियों को मिल रहा ‘बैजबॉल’ का मजा:ब्रिटेन में 87 की उम्र तक के लोग खेल रहे; बैटर आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, आधा रन लेने की छूट

इंग्लैंड के दिग्गज तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने एक बार ‘बैजबॉल’ को परिभाषित करते हुए कहा था कि यह खेल को वैसे खेलने की कोशिश है, जैसा हमने बचपन में कल्पना की थी- रोमांचक, तेज और मजेदार। दिलचस्प बात यह है कि इस सोच की सबसे सजीव और भावुक झलक अब इंग्लैंड के लीजर सेंटरों और खेल के मैदानों पर दिख रही है, जहां 50 से 87 साल तक के लोग ‘वॉकिंग क्रिकेट’ के जरिए खेल का नया आनंद ले रहे हैं। वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अकेलेपन के खिलाफ प्रभावी हथियार है। केंट क्रिकेट कम्युनिटी ट्रस्ट की प्रोजेक्ट ऑफिसर एमी इलिज के अनुसार, हर काउंटी में इसकी टीमें फल-फूल रही हैं। लॉर्ड्स के इंडोर स्कूल में पहला इंटर-काउंटी वॉकिंग क्रिकेट फेस्टिवल आयोजित हुआ, जिसने इसकी बढ़ती लोकप्रियता पर मुहर लगा दी। केंट के फोकस्टोन स्थित थ्री हिल्स स्पोर्ट्स सेंटर में वॉकिंग क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, सामुदायिक जुड़ाव का मंच बन चुका है। यहां 87 वर्ष तक के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। सुनने में दिक्कत, डिमेंशिया या गतिशीलता संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग भी बिना झिझक मैदान में उतरते हैं। आधा रन लेने जैसी छूट इसे और रोचक बनाती है। इस खेल ने कई जिंदगियों को नई दिशा दी है। 62 वर्षीय कप्तान मार्क कहते हैं कि यहां प्रतिभा से ज्यादा भागीदारी और खुशी मायने रखती है। साल 2022 में दोनों घुटनों के ऑपरेशन के बाद ग्राहम दो स्टिक के सहारे चलते थे। वॉकिंग क्रिकेट से जुड़ने के महज 18 महीनों में उनका वजन एक-चौथाई कम हो गया और उन्होंने एक ओवर में छह छक्के जड़कर सबको हैरान कर दिया। सेना के दिनों में माल्टा के लिए खेल चुके जॉन कहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद इस खेल ने उन्हें नई जिंदगी दी है। कई बार खिलाड़ियों को यह भी याद नहीं रहता कि मैच कौन जीता क्योंकि यहां जीत से ज्यादा मायने मुस्कान के हैं। क्या है वॉकिंग क्रिकेट और नियम – जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस खेल में दौड़ने की सख्त मनाही है। यह क्रिकेट का एक धीमा, सुरक्षित और सरल प्रारूप है, जिसे विशेष रूप से बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी (मोबिलिटी इश्यूज) का सामना कर रहे लोगों के लिए डिजाइन किया गया है। – इसमें चोट के जोखिम को कम करने के लिए लेदर बॉल की जगह सॉफ्ट बॉल और अक्सर प्लास्टिक के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। – गेंदबाज चलकर गेंद फेंकता है, फील्डर चलकर गेंद पकड़ते हैं और बल्लेबाज रन लेने के लिए दौड़ता नहीं, बल्कि चलता है। सबसे मजेदार नियम यह है कि बल्लेबाज आउट होने के बाद भी खेलता रहता है, बस गेंदबाज टीम को बोनस के रूप में पांच रन मिल जाते हैं।

भोंगर्या हाट में दी जानकारी

भोंगर्या हाट में दी जानकारी

बड़वानी | डिजिटल युग में बढ़ते ऑनलाइन अपराधों के मद्देनजर जिले में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, साइबर सतर्कता व सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति संवेदनशील बनाना है। आदिवासी बहुल क्षेत्र के पारंपरिक भोंगर्या हाट में पुलिस विशेष जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है। दूरदराज से आए युवाओं, छात्राओं, महिलाओं और ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित कर उन्हें साइबर अपराधों के नए तरीकों, उनके दुष्परिणाम और बचाव के उपायों की जानकारी दी। बैनर, पोस्टर और पैम्फ्लैट के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और त्वरित शिकायत प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में नागरिकों को ऑनलाइन बैंकिंग व यूपीआई फ्रॉड, फर्जी लोन एप, निवेश प्रलोभन, सोशल मीडिया हैकिंग, वीडियो कॉल ब्लैकमेलिंग और नकली जॉब ऑफर जैसी बढ़ती ऑनलाइन ठगी के प्रति विशेष रूप से सचेत किया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि थोड़ी-सी लापरवाही बड़ी आर्थिक व मानसिक हानि का कारण बन सकती है।

प्राइवेट जेट अब बिना ब्रोकर 30 सेकेंड में बुक करें:‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल से विमान मालिक खुद घटा रहे हैं दाम, छिपे खर्चों से छुटकारा

प्राइवेट जेट अब बिना ब्रोकर 30 सेकेंड में बुक करें:‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल से विमान मालिक खुद घटा रहे हैं दाम, छिपे खर्चों से छुटकारा

प्राइवेट एविएशन यानी निजी विमानन का क्षेत्र अब डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जो काम पहले घंटों और दिनों की बातचीत के बाद होता था, वह अब स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सिमट गया है। फ्लाईहाउस, जेटली और लेवो डॉट एयरो जैसे नए स्टार्टअप के साथ व्हील्स अप और एक्सओ जैसे पुराने खिलाड़ी ऐसे एप लेकर आए हैं, जो महज 30 सेकेंड में प्राइवेट जेट बुक करने का वादा करते हैं। एविएशन एक्सपर्ट के मुताबिक पारंपरिक रूप से प्राइवेट जेट बुक करना एक सिरदर्द भरा काम रहा है। इसमें किसी ब्रोकर को कॉल करना, बजट पर चर्चा करना और फिर ब्रोकर द्वारा एयरक्राफ्ट मालिकों से संपर्क करने की लंबी प्रक्रिया होती थी। इसमें कई बार सही विमान ढूंढने में कई दिन तक लग जाते थे और कीमतें भी पारदर्शी नहीं होती थीं। नए एप्स इस पूरी प्रक्रिया से ‘मिडलमैन’ यानी ब्रोकर को हटा रहे हैं। फ्लाईहाउस के फाउंडर सैनफोर्ड मिचेलमैन कहते हैं, ‘अब कोई दूसरा मेरे लिए विमान नहीं चुन रहा है। मेरे पास रियल-टाइम में ढेरों विकल्प हैं और चूंकि ब्रोकर की फीस नहीं है, इसलिए कीमतें भी कम हैं।’ कंपनी ने एक ‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल पेश किया है, जहां विमान मालिक बिजनेस पाने के लिए अपनी कीमतें कम करते हैं, जिसे यूजर लाइव देख सकते हैं। डिजिटल क्रांति के बावजूद, कुछ विशेषज्ञ अब भी पुराने तरीके को बेहतर मानते हैं।’ प्राइवेट जेट कार्ड कंपैरिजन के संपादक डग गोलन का कहना है कि एक अनुभवी ब्रोकर विमान की बारीकियों के बारे में एप से बेहतर जानकारी दे सकता है। बड़ी सुविधा, पूरी फ्लाइट नहीं, सिर्फ एक सीट भी बुक करने की आजादी फ्रेंडशेयर- फ्लाई हाउस का नया फीचर यूजर्स को समान रुचि वाले लोगों के साथ मिलकर पूरी फ्लाइट के बजाय सिर्फ पसंद की सीटें बुक करने की सुविधा देता है। एक्सओ का नेटवर्क – विस्टा ग्लोबल की यूनिट 2,000 से अधिक विमानों के डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करती है, जिससे वे 96% सटीक और गारंटीड कीमतें दे पाते हैं। हाइब्रिड मॉडल- व्हील्स अप ने अपने एप में निजी जेट के साथ कमर्शियल उड़ानों को भी जोड़ दिया है, ताकि सदस्य अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा चुन सकें। बुकिंग से पहले एआई अब फ्यूल कैपेसिटी, एयरपोर्ट नियम जांच रहा एलीवेट जेट जैसी कंपनियां बुकिंग प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सिस्टम न केवल विमान बुक करता है, बल्कि यह भी जांचता है कि वह विमान उस खास रूट पर उड़ान भर सकता है या नहीं। इसमें ईंधन की क्षमता, क्रू की सीमा और एयरपोर्ट की पाबंदियों का रियल-टाइम डेटा विश्लेषण किया जाता है। कंपनी के सीईओ ग्रेग रैफ के मुताबिक, ‘हम उन पेचीदगियों को पहले ही पकड़ लेते हैं जो अक्सर ब्रोकर छिपा जाते हैं।’

प्राइवेट जेट अब बिना ब्रोकर 30 सेकंड में बुकिंग करें:‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल से विमान मालिक खुद घटा रहे हैं दाम, छिपे खर्चों से छुटकारा

प्राइवेट जेट अब बिना ब्रोकर 30 सेकंड में बुकिंग करें:‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल से विमान मालिक खुद घटा रहे हैं दाम, छिपे खर्चों से छुटकारा

प्राइवेट एविएशन यानी निजी विमानन का क्षेत्र अब डिजिटल क्रांति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। जो काम पहले घंटों और दिनों की बातचीत के बाद होता था, वह अब स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सिमट गया है। फ्लाईहाउस, जेटली और लेवो डॉट एयरो जैसे नए स्टार्टअप के साथ व्हील्स अप और एक्सओ जैसे पुराने खिलाड़ी ऐसे एप लेकर आए हैं, जो महज 30 सेकंड में प्राइवेट जेट बुक करने का वादा करते हैं। एविएशन एक्सपर्ट के मुताबिक पारंपरिक रूप से प्राइवेट जेट बुक करना एक सिरदर्द भरा काम रहा है। इसमें किसी ब्रोकर को कॉल करना, बजट पर चर्चा करना और फिर ब्रोकर द्वारा एयरक्राफ्ट मालिकों से संपर्क करने की लंबी प्रक्रिया होती थी। इसमें कई बार सही विमान ढूंढने में कई दिन तक लग जाते थे और कीमतें भी पारदर्शी नहीं होती थीं। नए एप्स इस पूरी प्रक्रिया से ‘मिडलमैन’ यानी ब्रोकर को हटा रहे हैं। फ्लाईहाउस के फाउंडर सैनफोर्ड मिचेलमैन कहते हैं, ‘अब कोई दूसरा मेरे लिए विमान नहीं चुन रहा है। मेरे पास रियल-टाइम में ढेरों विकल्प हैं और चूंकि ब्रोकर की फीस नहीं है, इसलिए कीमतें भी कम हैं।’ कंपनी ने एक ‘रिवर्स ऑक्शन’ मॉडल पेश किया है, जहां विमान मालिक बिजनेस पाने के लिए अपनी कीमतें कम करते हैं, जिसे यूजर लाइव देख सकते हैं। डिजिटल क्रांति के बावजूद, कुछ विशेषज्ञ अब भी पुराने तरीके को बेहतर मानते हैं।’ प्राइवेट जेट कार्ड कंपैरिजन के संपादक डग गोलन का कहना है कि एक अनुभवी ब्रोकर विमान की बारीकियों के बारे में एप से बेहतर जानकारी दे सकता है। बड़ी सुविधा, पूरी फ्लाइट नहीं, सिर्फ एक सीट भी बुक करने की आजादी फ्रेंडशेयर- फ्लाई हाउस का नया फीचर यूजर्स को समान रुचि वाले लोगों के साथ मिलकर पूरी फ्लाइट के बजाय सिर्फ पसंद की सीटें बुक करने की सुविधा देता है। एक्सओ का नेटवर्क – विस्टा ग्लोबल की यूनिट 2,000 से अधिक विमानों के डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग करती है, जिससे वे 96% सटीक और गारंटीड कीमतें दे पाते हैं। हाइब्रिड मॉडल- व्हील्स अप ने अपने एप में निजी जेट के साथ कमर्शियल उड़ानों को भी जोड़ दिया है, ताकि सदस्य अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा चुन सकें। बुकिंग से पहले एआई अब फ्यूल कैपेसिटी, एयरपोर्ट नियम जांच रहा एलीवेट जेट जैसी कंपनियां बुकिंग प्रक्रिया में एआई का इस्तेमाल कर रही हैं। यह सिस्टम न केवल विमान बुक करता है, बल्कि यह भी जांचता है कि वह विमान उस खास रूट पर उड़ान भर सकता है या नहीं। इसमें ईंधन की क्षमता, क्रू की सीमा और एयरपोर्ट की पाबंदियों का रियल-टाइम डेटा विश्लेषण किया जाता है। कंपनी के सीईओ ग्रेग रैफ के मुताबिक, ‘हम उन पेचीदगियों को पहले ही पकड़ लेते हैं जो अक्सर ब्रोकर छिपा जाते हैं।’

सेहत और रिश्तों के लिए वरदान हैं खुशी के आंसू:13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था, एक्सपर्ट के अनुसार यह दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाते हैं

सेहत और रिश्तों के लिए वरदान हैं खुशी के आंसू:13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था, एक्सपर्ट के अनुसार यह दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाते हैं

कई बार दोस्तों की शादी, किसी की बहादुरी की कहानी या किसी अजनबी की मदद करना जैसे खुशी के मौके पर भी आंखें भर आती हैं। वैज्ञानिकों ने इसे नाम ‘काम मुत’ दिया है। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब है प्यार से अभिभूत होना। इसे हफ्ते में औसतन दो बार महसूस कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों ने इसे करीब 13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था। एक्सपर्ट के अनुसार, यह भावना न केवल हमें सुकून देती है, बल्कि हमें दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाती है। रिसर्च के अनुसार, ‘काम मुत’ जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बनाता है और हमें छोटी परेशानियों से ऊपर उठकर सोचने में मदद करता है। जर्मन वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दौरान शरीर की हलचल कम हो जाती है, जिससे हम खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्थिर और शांत महसूस करते हैं। राजनीतिक दूरियां मिटाती है खुशी के आंसुओं वाली भावना 2023 की एक अमेरिकी स्टडी में पाया गया कि जब लोगों ने तूफान पीड़ितों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों का भावुक वीडियो देखा, तो उनमें अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति नफरत कम हुई। काम मुत महसूस करने वाले नागरिकों में विरोधियों के लिए अधिक गर्मजोशी और भरोसा देखा गया। साफ है कि जितनी गहराई से हम इस भावना को महसूस करते हैं, उतनी ही सामाजिक और राजनीतिक दूरियां कम होती हैं। काम मुत के साथ महसूस होने वाले शारीरिक संकेत रिसर्च के अनुसार, ‘कामा मुत’ महसूस होने पर गले में भारीपन, गर्दन और पीठ के पीछे हल्की झनझनाहट, शरीर पर रोंगटे खड़े होना और छाती के भीतर एक सुखद गर्माहट का अहसास शामिल है। रिश्तों का अचानक गहरा होना सबसे बड़ा ट्रिगर अध्ययनों के अनुसार, ‘रिश्तों में अचानक आई गहराई ‘काम मुत’ का मुख्य कारण है। जैसे सैनिक की घर वापसी देख परिवारवाले भावुक होते हैं, क्योंकि खोने के डर के मुकाबले सुरक्षित लौटने की खुशी और राहत अधिक प्रभावी होती है। काम मुत कैसे बढ़ाएं? एक अध्ययन के अनुसार, जब दो लोग सक्रिय बातचीत करते हैं, यानी एक-दूसरे को पूरी एकाग्रता के साथ सुनते हैं, तो दोनों में काम मुत की भावना जागृत हो सकती है।