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Summer Heart Attack Risk; Heat Wave Dehydration Impact; Cardiologist Disease

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33 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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गर्मियों में पसीने और थकान की समस्या कॉमन है। इस दौरान हार्ट बीट में बदलाव भी होता है। अमूमन लोग इसे मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। इसके चलते हार्ट पर वर्कलोड बढ़ सकता है।

‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ (AHA) के मुताबिक, गर्मी बढ़ने पर कार्डियोवस्कुलर इमरजेंसी और हॉस्पिटल विजिट्स बढ़ जाती हैं। खासतौर पर बुजुर्गों और हार्ट पेशेंट्स को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज जानेंगे कि गर्मियों में हार्ट पर क्या असर पड़ता है। साथ ही जानेंगे कि-

  • कार्डियोवस्कुलर डिजीज का किसे ज्यादा रिस्क होता है?
  • कौन-सी आदतें ये रिस्क बढ़ा सकती हैं?
  • हार्ट को हेल्दी रखने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?

सवाल- गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने से हार्ट पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- गर्मी बढ़ने पर बॉडी को अपना कोर टेम्परेचर कंट्रोल करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसका हार्ट पर ये असर होता है-

  • वैसोलिडेशन (ब्लड वेसल्स का फैलना) होता है, इससे बीपी लो हो सकता है।
  • हार्ट को बॉडी कूलिंग के लिए स्किन की तरफ ब्लड फ्लो बढ़ाना पड़ता है।
  • हार्ट कूलिंग में बिजी होता है तो सभी ऑर्गन्स तक ब्लड पहुंचाने में ज्यादा मेहनत पड़ती है।
  • पसीने से फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स घटने पर हार्ट रेट प्रभावित होती है।
  • ओवरहीटिंग होने पर बॉडी की ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ती है, जिससे हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है।

सवाल- क्या गर्मियों में हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है?

जवाब- हां, तेज गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी से ब्लड गाढ़ा हो सकता है, जिससे-

  • हार्ट को ब्लड पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • ओवरहीटिंग और लो BP से हार्ट पर स्ट्रेस बढ़ सकता है।
  • जिन्हें कोई कार्डियोवस्कुलर डिजीज है, उन्हें ज्यादा जोखिम होता है।

सवाल- क्या हीट वेव के दौरान हार्ट-अटैक के केसेज बढ़ जाते हैं?

जवाब- हां, ‘यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी’ के मुताबिक, हीट वेव में हार्ट अटैक के केस बढ़ जाते हैं। दरअसल, हीट वेव के कारण डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट इंंबैलेंस हो सकता है, जिससे-

  • ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ता है, हार्ट रेट बढ़ जाती है।
  • हीट स्ट्रोक होने पर हार्ट फंक्शनिंग प्रभावित हो सकती है।
  • पर्याप्त कूलिंग और पानी न मिलने पर रिस्क बढ़ सकता है।

सवाल- क्या डिहाइड्रेशन होने पर हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है?

जवाब- डिहाइड्रेशन होने पर शरीर में ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है।

  • इससे हार्ट को ब्लड पंप करने में ज्यादा दबाव पड़ता है।
  • ब्लड गाढ़ा होने से क्लॉटिंग का रिस्क बढ़ सकता है।
  • इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस से हार्टबीट अनियमित हो सकती है।
  • लंबे समय तक डिहाइड्रेशन से कार्डियोवस्कुलर रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- गर्मी के मौसम में और हीटवेव में हार्ट अटैक केसेज बढ़ने का कारण क्या हैं?

जवाब- गर्मी बढ़ने पर शरीर होमियोस्टेसिस (बॉडी का कोर टेम्परेचर कंट्रोल करने की प्रक्रिया) एक्टिव कर देता है।

  • इससे हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • ज्यादा पसीने से फ्लूइड और मिनरल लॉस हो सकता है।
  • शरीर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है।
  • ओवरहीटिंग से हार्ट रेट और ऑक्सीजन डिमांड बढ़ सकती है।
  • इसलिए लंबे समय तक ज्यादा गर्मी रहने से हार्ट अटैक के केसेज बढ़ जाते हैं।

इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हार्ट अटैक के लक्षण क्या हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? क्या ये गर्मियों में अलग हो सकते हैं?

जवाब- हार्ट अटैक होने पर अचानक हार्ट तक ब्लड सप्लाई कम हो जाती है, जिससे टिश्यू डैमेज होने लगते हैं। इससे असहजता महसूस होती है। गर्मियों में इसके साथ डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के लक्षण भी दिख सकते हैं, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को गर्मियों में हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर बीपी, डायबिटीज या मोटापे की समस्या है तो क्या इससे भी हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- हां, हाई BP में ब्लड वेसल्स पर लगातार दबाव रहता है, जिससे हार्ट पर लोड बढ़ता है।

  • डायबिटीज में ब्लड शुगर ज्यादा रहने से नर्व्स और हार्ट टिश्यू डैमेज हो सकते हैं।
  • मोटापे से शरीर की ऑक्सीजन जरूरत और कार्डियक वर्कलोड बढ़ जाता है।
  • इन सभी कंडीशंस में ब्लड क्लॉटिंग का ज्यादा रिस्क रहता है।

सवाल- गर्मियों में कौन-सी आदतें हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिनसे बचना चाहिए?

जवाब- ये आदतें हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं-

  • तेज धूप में लंबे समय तक बिना ब्रेक काम करना।
  • कम पानी पीना और कैफीन या एनर्जी ड्रिंक लेना।
  • हैवी, ऑयली और ज्यादा नमक वाला भोजन करना।
  • बहुत देर रात कर जागना।
  • इंटेंस एक्सरसाइज या ओवरवर्क करना।
  • स्ट्रेस और गुस्सा कंट्रोल न करना।

सवाल- गर्मियों में हेल्दी हार्ट के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए?

जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव-

  • सुबह या शाम मॉडरेट वॉक और योग करें।
  • दिन में काम के बीच ब्रेक लें और शरीर को आराम दें।
  • वजन संतुलित रखने के लिए डेली एक्टिव रूटीन अपनाएं।
  • माइंडफुल ब्रीदिंग या मेडिटेशन से नर्वस सिस्टम को कूल रखें।
  • मौसम के अनुसार हल्के कपड़े पहनें और आरामदायक शेड्यूल रखें।
  • आउटडोर प्लानिंग करते समय टेम्परेचर और हीट इंडेक्स का ध्यान रखें।

सवाल- गर्मियों में हार्ट हेल्थ के लिए कैसी डाइट लेनी चाहिए?

जवाब- हेल्दी हार्ट के लिए पानी से भरपूर फल खाएं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- जिन लोगों को कोई हार्ट डिजीज है, उन्हें गर्मियों में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- तेज धूप और हीट एक्सपोजर से बचने के लिए ये करें-

  • टेम्परेचर बढ़ने पर भारी काम या इंटेंस एक्सरसाइज करने से बचें।
  • कूल, हवादार और शेड वाली जगह पर रहें।
  • मेडिकेशन पर हैं तो दवाएं सही समय पर लें।
  • हार्ट हेल्थ के लिए सुपाच्य, कम नमक और कम फैट वाली डाइट लें।
  • ट्रैवल या आउटडोर एक्टिविटी से पहले अपनी हेल्थ कंडीशन मॉनिटर करें।
  • असामान्य थकान या धड़कन तेज होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- अगर तेज गर्मी में हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- सबसे पहले तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं ताकि शरीर को आराम मिल सके।

  • ठंडी और सुरक्षित जगह पर जाएं, जिससे ओवरहीटिंग कम हो सके।
  • आसपास के लोगों को परेशानी बताएं और इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लें।
  • अगर कपड़े टाइट हों तो ढीले कर दें, ताकि ब्लड फ्लो सही बना रहे।
  • खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें, एम्बुलेंस बेहतर विकल्प है।

………………………

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मार्च 2026 में ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, रोज 11 मिनट ज्यादा नींद और 5 मिनट एक्स्ट्रा एक्सरसाइज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम 10% तक कम हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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गर्मियों में पसीने और थकान की समस्या कॉमन है। इस दौरान हार्ट बीट में बदलाव भी होता है। अमूमन लोग इसे मौसम का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है। इसके चलते हार्ट पर वर्कलोड बढ़ सकता है।

‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ (AHA) के मुताबिक, गर्मी बढ़ने पर कार्डियोवस्कुलर इमरजेंसी और हॉस्पिटल विजिट्स बढ़ जाती हैं। खासतौर पर बुजुर्गों और हार्ट पेशेंट्स को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज जानेंगे कि गर्मियों में हार्ट पर क्या असर पड़ता है। साथ ही जानेंगे कि-

  • कार्डियोवस्कुलर डिजीज का किसे ज्यादा रिस्क होता है?
  • कौन-सी आदतें ये रिस्क बढ़ा सकती हैं?
  • हार्ट को हेल्दी रखने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?

सवाल- गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने से हार्ट पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जवाब- गर्मी बढ़ने पर बॉडी को अपना कोर टेम्परेचर कंट्रोल करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसका हार्ट पर ये असर होता है-

  • वैसोलिडेशन (ब्लड वेसल्स का फैलना) होता है, इससे बीपी लो हो सकता है।
  • हार्ट को बॉडी कूलिंग के लिए स्किन की तरफ ब्लड फ्लो बढ़ाना पड़ता है।
  • हार्ट कूलिंग में बिजी होता है तो सभी ऑर्गन्स तक ब्लड पहुंचाने में ज्यादा मेहनत पड़ती है।
  • पसीने से फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स घटने पर हार्ट रेट प्रभावित होती है।
  • ओवरहीटिंग होने पर बॉडी की ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ती है, जिससे हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है।

सवाल- क्या गर्मियों में हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है?

जवाब- हां, तेज गर्मी में शरीर में पानी और नमक की कमी से ब्लड गाढ़ा हो सकता है, जिससे-

  • हार्ट को ब्लड पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • ओवरहीटिंग और लो BP से हार्ट पर स्ट्रेस बढ़ सकता है।
  • जिन्हें कोई कार्डियोवस्कुलर डिजीज है, उन्हें ज्यादा जोखिम होता है।

सवाल- क्या हीट वेव के दौरान हार्ट-अटैक के केसेज बढ़ जाते हैं?

जवाब- हां, ‘यूरोपियन सोसायटी ऑफ कार्डियोलॉजी’ के मुताबिक, हीट वेव में हार्ट अटैक के केस बढ़ जाते हैं। दरअसल, हीट वेव के कारण डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट इंंबैलेंस हो सकता है, जिससे-

  • ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ता है, हार्ट रेट बढ़ जाती है।
  • हीट स्ट्रोक होने पर हार्ट फंक्शनिंग प्रभावित हो सकती है।
  • पर्याप्त कूलिंग और पानी न मिलने पर रिस्क बढ़ सकता है।

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  • इससे हार्ट को ब्लड पंप करने में ज्यादा दबाव पड़ता है।
  • ब्लड गाढ़ा होने से क्लॉटिंग का रिस्क बढ़ सकता है।
  • इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस से हार्टबीट अनियमित हो सकती है।
  • लंबे समय तक डिहाइड्रेशन से कार्डियोवस्कुलर रिस्क बढ़ जाता है।

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  • इससे हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • ज्यादा पसीने से फ्लूइड और मिनरल लॉस हो सकता है।
  • शरीर का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है।
  • ओवरहीटिंग से हार्ट रेट और ऑक्सीजन डिमांड बढ़ सकती है।
  • इसलिए लंबे समय तक ज्यादा गर्मी रहने से हार्ट अटैक के केसेज बढ़ जाते हैं।

इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हार्ट अटैक के लक्षण क्या हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? क्या ये गर्मियों में अलग हो सकते हैं?

जवाब- हार्ट अटैक होने पर अचानक हार्ट तक ब्लड सप्लाई कम हो जाती है, जिससे टिश्यू डैमेज होने लगते हैं। इससे असहजता महसूस होती है। गर्मियों में इसके साथ डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के लक्षण भी दिख सकते हैं, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को गर्मियों में हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों को इसका ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर बीपी, डायबिटीज या मोटापे की समस्या है तो क्या इससे भी हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ता है?

जवाब- हां, हाई BP में ब्लड वेसल्स पर लगातार दबाव रहता है, जिससे हार्ट पर लोड बढ़ता है।

  • डायबिटीज में ब्लड शुगर ज्यादा रहने से नर्व्स और हार्ट टिश्यू डैमेज हो सकते हैं।
  • मोटापे से शरीर की ऑक्सीजन जरूरत और कार्डियक वर्कलोड बढ़ जाता है।
  • इन सभी कंडीशंस में ब्लड क्लॉटिंग का ज्यादा रिस्क रहता है।

सवाल- गर्मियों में कौन-सी आदतें हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिनसे बचना चाहिए?

जवाब- ये आदतें हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं-

  • तेज धूप में लंबे समय तक बिना ब्रेक काम करना।
  • कम पानी पीना और कैफीन या एनर्जी ड्रिंक लेना।
  • हैवी, ऑयली और ज्यादा नमक वाला भोजन करना।
  • बहुत देर रात कर जागना।
  • इंटेंस एक्सरसाइज या ओवरवर्क करना।
  • स्ट्रेस और गुस्सा कंट्रोल न करना।

सवाल- गर्मियों में हेल्दी हार्ट के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए?

जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव-

  • सुबह या शाम मॉडरेट वॉक और योग करें।
  • दिन में काम के बीच ब्रेक लें और शरीर को आराम दें।
  • वजन संतुलित रखने के लिए डेली एक्टिव रूटीन अपनाएं।
  • माइंडफुल ब्रीदिंग या मेडिटेशन से नर्वस सिस्टम को कूल रखें।
  • मौसम के अनुसार हल्के कपड़े पहनें और आरामदायक शेड्यूल रखें।
  • आउटडोर प्लानिंग करते समय टेम्परेचर और हीट इंडेक्स का ध्यान रखें।

सवाल- गर्मियों में हार्ट हेल्थ के लिए कैसी डाइट लेनी चाहिए?

जवाब- हेल्दी हार्ट के लिए पानी से भरपूर फल खाएं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- जिन लोगों को कोई हार्ट डिजीज है, उन्हें गर्मियों में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

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  • टेम्परेचर बढ़ने पर भारी काम या इंटेंस एक्सरसाइज करने से बचें।
  • कूल, हवादार और शेड वाली जगह पर रहें।
  • मेडिकेशन पर हैं तो दवाएं सही समय पर लें।
  • हार्ट हेल्थ के लिए सुपाच्य, कम नमक और कम फैट वाली डाइट लें।
  • ट्रैवल या आउटडोर एक्टिविटी से पहले अपनी हेल्थ कंडीशन मॉनिटर करें।
  • असामान्य थकान या धड़कन तेज होने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- अगर तेज गर्मी में हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- सबसे पहले तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं ताकि शरीर को आराम मिल सके।

  • ठंडी और सुरक्षित जगह पर जाएं, जिससे ओवरहीटिंग कम हो सके।
  • आसपास के लोगों को परेशानी बताएं और इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लें।
  • अगर कपड़े टाइट हों तो ढीले कर दें, ताकि ब्लड फ्लो सही बना रहे।
  • खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें, एम्बुलेंस बेहतर विकल्प है।

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