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सेहत और रिश्तों के लिए वरदान हैं खुशी के आंसू:13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था, एक्सपर्ट के अनुसार यह दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाते हैं

सेहत और रिश्तों के लिए वरदान हैं खुशी के आंसू:13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था, एक्सपर्ट के अनुसार यह दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाते हैं

कई बार दोस्तों की शादी, किसी की बहादुरी की कहानी या किसी अजनबी की मदद करना जैसे खुशी के मौके पर भी आंखें भर आती हैं। वैज्ञानिकों ने इसे नाम ‘काम मुत’ दिया है। यह शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका मतलब है प्यार से अभिभूत होना। इसे हफ्ते में औसतन दो बार महसूस कर सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों ने इसे करीब 13 साल पहले औपचारिक तौर पर पहचाना था। एक्सपर्ट के अनुसार, यह भावना न केवल हमें सुकून देती है, बल्कि हमें दूसरों के प्रति अधिक निस्वार्थ और दयालु भी बनाती है। रिसर्च के अनुसार, ‘काम मुत’ जीवन को अधिक अर्थपूर्ण बनाता है और हमें छोटी परेशानियों से ऊपर उठकर सोचने में मदद करता है। जर्मन वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दौरान शरीर की हलचल कम हो जाती है, जिससे हम खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्थिर और शांत महसूस करते हैं। राजनीतिक दूरियां मिटाती है खुशी के आंसुओं वाली भावना 2023 की एक अमेरिकी स्टडी में पाया गया कि जब लोगों ने तूफान पीड़ितों की मदद करने वाले स्वयंसेवकों का भावुक वीडियो देखा, तो उनमें अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति नफरत कम हुई। काम मुत महसूस करने वाले नागरिकों में विरोधियों के लिए अधिक गर्मजोशी और भरोसा देखा गया। साफ है कि जितनी गहराई से हम इस भावना को महसूस करते हैं, उतनी ही सामाजिक और राजनीतिक दूरियां कम होती हैं। काम मुत के साथ महसूस होने वाले शारीरिक संकेत रिसर्च के अनुसार, ‘कामा मुत’ महसूस होने पर गले में भारीपन, गर्दन और पीठ के पीछे हल्की झनझनाहट, शरीर पर रोंगटे खड़े होना और छाती के भीतर एक सुखद गर्माहट का अहसास शामिल है। रिश्तों का अचानक गहरा होना सबसे बड़ा ट्रिगर अध्ययनों के अनुसार, ‘रिश्तों में अचानक आई गहराई ‘काम मुत’ का मुख्य कारण है। जैसे सैनिक की घर वापसी देख परिवारवाले भावुक होते हैं, क्योंकि खोने के डर के मुकाबले सुरक्षित लौटने की खुशी और राहत अधिक प्रभावी होती है। काम मुत कैसे बढ़ाएं? एक अध्ययन के अनुसार, जब दो लोग सक्रिय बातचीत करते हैं, यानी एक-दूसरे को पूरी एकाग्रता के साथ सुनते हैं, तो दोनों में काम मुत की भावना जागृत हो सकती है।

Historic rematch between Mayweather and Pacquiao in September

Historic rematch between Mayweather and Pacquiao in September

Hindi News Sports Boxing: Historic Rematch Between Mayweather And Pacquiao In September लास वेगास2 घंटे पहले कॉपी लिंक फ्लॉयड मेवेदर जूनियर और मैनी पैकियाओ 11 साल बाद एक बार फिर आमने-सामने होंगे। मुक्केबाजी की दुनिया के दो सबसे बड़े दिग्गज फ्लॉयड मेवेदर जूनियर और मैनी पैकियाओ एक बार फिर प्रोफेशनल रिंग में आमने-सामने होंगे। इस ऐतिहासिक री-मैच की घोषणा कर दी गई है, जो 19 सितंबर को लास वेगास के अत्याधुनिक ‘द स्फीयर’ में होगा। दोनों ​खिलाड़ी 11 साल बाद एक बार फिर आमने-सामने होंगे। इससे पहले 2 मई 2015 को हुई उनकी पहली भिड़ंत ने कमाई और व्यूअरशिप के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। उस फाइट से 410 मिलियन डॉलर (करीब 2680 करोड़ रुपए) का रेवेन्यू जनरेट हुआ था जबकि टिकट विंडो से 72.2 मिलियन डॉलर (करीब 470 करोड़) की कमाई हुई थी। वह मुकाबला मेवेदर ने अपने नाम किया था। मेवेदर का 50-0 का परफेक्ट रिकॉर्ड जबकि पैकियाओ ​ने पिछले साल की थी वापसी अमेरिका के मेवेदर ने हाल ही में रिंग में वापसी की पुष्टि की। 49 वर्षीय मेवेदर 2017 में कोनोर मैक्ग्रेगोर को हराने के बाद 50-0 के परफेक्ट रिकॉर्ड के साथ रिटायर हुए थे। वहीं, फिलीपींस के 47 वर्षीय पैकियाओ ने भी 2025 में मारियो बैरियोस के खिलाफ ड्रॉ खेलकर रिंग में वापसी की है। उन्होंने करियर में 73 फाइट में से 62 जीती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी

जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी

जापान की संसद में इन दिनों एक शख्स चर्चा में है… ताकाहिरो एनो। 35 साल के एनो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और राजनीतिक पार्टी ‘टीम मिराई’ के प्रमुख नेता हैं। टीम मिराई यानी भविष्य की टीम। पार्टी को टेक इंजीनियर्स ने बनाया है। हाल के चुनावों में सबको चौंकाते हुए जापान की संसद (निचले सदन) में पार्टी ने 11 सीटें जीतीं। पार्टी ने राजनीतिक दिग्गजों को पछाड़कर 30 लाख वोट भी अपने खाते में बटोरे हैं, जबकि सिर्फ 14 ही प्रत्याशी उतारे थे। एनो कहते हैं,‘एआई आग की तरह है, जो सभ्यता को पूरी तरह बदल देगा। जहां पश्चिमी देश इस एआई को ‘टर्मिनेटर’ जैसा खतरनाक मानकर डरते हैं, वहीं जापान के लोग इसे ‘डोरेमोन’ जैसा मददगार और प्यारा दोस्त समझते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि टीम मिराई की जीत की वजह उनका ‘प्रैक्टिकल’ होना है। उनका तरीका ‘न वामपंथी है, न दक्षिणपंथी’। जापान फोरसाइट के संस्थापक टोबियस हैरिस के अनुसार, वे सिर्फ समस्याओं को हल करने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने लोकलुभावन वादों के बजाय जटिल मुद्दों को सुलझाने की बात की। 40 से 50 की उम्र के शहरी मतदाताओं ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। जीते उम्मीदवारों में टोक्यो और बर्कले जैसे बड़े संस्थानों के पढ़े एक्सपर्ट और आईबीएम-सोनी के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। सिलिकॉन वैली में इंजीनियर रहे नवनिर्वाचित सांसद आओई फुरुकावा, कहते हैं,‘कोडिंग और कानून बनाना एक जैसा है, क्योंकि दोनों के लिए तर्क और सटीक संरचना की जरूरत होती है।’ प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट, 39 हजार सवालों के जवाब दिए टीम मिराई की कार्यशैली की झलक वादों में भी दिखी। इन्होंने चुनाव जीतने के हाई-टेक समाधानों पर जोर दिया। ड्राइवरलेस बसें लाना, राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता के लिए डिजिटल डेटाबेस बनाना, ताकि भ्रष्टाचार रुके। AI के जरिए सरकारी खर्चों में कमी करके मध्यम वर्ग को पेंशन व स्वास्थ्य बीमा में राहत जैसे वादे किए। पार्टी ने प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट भी शुरू किया। इसने 39 हजार सवालों के जवाब दिए और 6,200 से ज्यादा सुझाव जुटाए। बड़ी चुनौती संसद तक तो इंजीनियर्स पहुंच गए, लेकिन असली जंग अब शुरू हुई है। जापान की नौकरशाही आज भी ‘फैक्स मशीन’, ‘फ्लॉपी डिस्क’ और कागज के ढेरों पर टिकी है। संसद के कई कमरों में लैपटॉप और टैबलेट ले जाने पर पाबंदी है। बोर्ड पर ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ व ‘मशीन लर्निंग’ जैसे शब्द लिखने वाले इन युवा सांसदों को अब उन बुजुर्ग नेताओं के साथ काम करना होगा जो अब भी डिजिटल युग से दूर हैं। टीम मिराई का नारा है… सुस्त राजनीति को तेज बनाओ… इसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। आमतौर पर सफेद शर्ट और फॉर्मल सूट में दिखने वाले जापानी राजनेताओं के बीच अब ‘लाइन्स ऑफ कोड’ लिखी टी-शर्ट, पोनीटेल और इंडिगो सूट वाले चेहरे दिखने लगे हैं। संकेत साफ हैं कि भविष्य की राजनीति कोड, चैटबॉट व डेटा के सहारे भी लिखी जा सकती है।

No cheating case was reported in the Class 10 Mathematics exam.

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बैतूल4 मिनट पहले कॉपी लिंक बैतूल| माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षा में मंगलवार को कक्षा 10वीं का गणित (स्टेंडर्ड एवं बेसिक) विषय का प्रश्न पत्र हुआ। इस परीक्षा के लिए जिले में 127 परीक्षा केंद्र बनाए थे। जिनमें कुल 19751 परीक्षार्थी दर्ज थे। इनमें से 19247 विद्यार्थी परीक

क्रॉस-इंडस्ट्री कोलैबोरेशन का ट्रेंड:‘डकैत’ के बाद 'G2' पर जुटेंगे अदिवि, 'G3' भी हो सकती है अनाउंस

क्रॉस-इंडस्ट्री कोलैबोरेशन का ट्रेंड:‘डकैत’ के बाद 'G2' पर जुटेंगे अदिवि, 'G3' भी हो सकती है अनाउंस

भारतीय सिनेमा में क्रॉस-इंडस्ट्री कोलैबोरेशन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस वक्त जिस जोड़ी पर सबसे ज्यादा नजरें टिकी हैं, वह है बॉलीवुड एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर और तेलुगु स्टार अदिवि शेष की। दोनों की अपकमिंग फिल्म ‘डकैत: ए लव स्टोरी’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्र बताते हैं कि यह कोलैबोरेशन केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रहने वाली बल्कि सूत्रों की मानें तो ‘डकैत’ की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री से प्रभावित एक बड़े प्रोडक्शन हाउस ने मृणाल और अदिवि को 2027 की एक और फिल्म के लिए अप्रोच किया है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला, तो ‘डकैत’ से शुरू हुआ यह कोलैबोरेशन आने वाले वर्षों में पैन-इंडिया सिनेमा का बड़ा अध्याय साबित हो सकता है। फिलहाल प्रोजेक्ट का नाम सामने नहीं आया है। बीहड़ों की पृष्ठभूमि पर बुनी गई इमोशनल लव स्टोरी है ‘डकैत’ ‘डकैत’ को सिर्फ एक एक्शन-रोमांस कहना इसके साथ नाइंसाफी होगी। यह बीहड़ों की पृष्ठभूमि पर बुनी गई एक इमोशनल लव स्टोरी है, जिसकी संभावित टैगलाइन “प्यार और बारूद के बीच की कहानी’ बताई जा रही है। फिल्म में अदिवि एक ऐसे शख्स की भूमिका में हैं जो हालातों के चलते हथियार उठाने पर मजबूर होता है। उनका लुक सूटेड-बूटेड स्पाई इमेज से बिल्कुल अलग बढ़ी दाढ़ी, बिखरे बाल और खादी के कुर्ते वाला रखा गया है। वहीं मृणाल पारंपरिक एथनिक अंदाज में नजर आएंगी, लेकिन उनका किरदार महज प्रेमिका का नहीं, बल्कि कहानी की मजबूत कोर का है। ये फिल्म 19 मार्च को रिलीज होने वाली है। अगले साल ‘मेजर 2’ पर भी शुरू हो सकता है काम ‘डकैत’ के तुरंत बाद अदिवि शेष अपनी स्पाई फ्रेंचाइज ‘G2’ (गुडाचारी 2) पर फोकस करेंगे। यह फिल्म उनकी चर्चित स्पाई फिल्म ‘गुडाचारी’ की सीक्वल है और 1 मई 2026 को रिलीज के लिए शेड्यूल बताई जा रही है। चर्चा है कि 2027 की शुरुआत में इसके तीसरे पार्ट या बड़े स्पिन-ऑफ की घोषणा भी हो सकती है। ‘G2’ में अदिवि के साथ वमिका गब्बी नजर आएंगी। फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इन दो बड़ी रिलीज के बाद अदिवि 2027 में किसी मेगा-बजट प्रोजेक्ट संभवतः ‘मेजर 2’ पर भी काम शुरू कर सकते हैं। गोल्डन पैलेट के साथ एनामॉर्फिक लेंस पर शूट हुई है फिल्म फिल्म ‘डकैत’ की शूटिंग ग्रामीण लोकेशन्स और विशाल सेट्स पर की गई है, जो 70-80 के दशक के चंबल के बीहड़ों की याद दिलाते हैं। क्लाइमैक्स का एक बड़ा एक्शन सीन, जिसमें अदिवि घायल हुए थे, फिल्म का टर्निंग पॉइंट होगा। यह हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट और देसी हथियारों वाला रॉ एक्शन सीन है। सिनेमैटोग्राफी शिनिएल देओ संभाल रहे हैं। वह इसे डस्टी और गोल्डन पैलेट के साथ एनामॉर्फिक लेंस पर शूट कर रहे हैं। ‘डकैत’ के संगीत के लिए अमित त्रिवेदी या हर्षवर्धन रामेश्वर के नाम पर चर्चा है। इसमें चंबल और बुंदेलखंड के कई स्थानीय थिएटर आर्टिस्ट्स को भी कास्ट किया गया है। अल्लू अर्जुन की 22वीं फिल्म में भी लीड रोल में दिखेंगी मृणाल दूसरी ओर, मृणाल 2027 में साउथ और हिंदी सिनेमा में बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं। वह तमिल में सिलंबरसन टीआर के साथ एक बड़े प्रोजेक्ट की बातचीत में जुटी हैं। वहीं तेलुगु सिनेमा में उनका नाम अल्लू अर्जुन की 22वीं फिल्म के लिए चर्चा में है, जिसे त्रिविक्रम श्रीनिवास निर्देशित कर सकते हैं। हिंदी में वह एक फीमेल-सेंट्रिक सर्वाइवल थ्रिलर की तैयारी कर रही हैं जो ‘NH10’ जैसी रॉ फिल्म होगी। इसके साथ ही, यह भी चर्चा है कि वह संजय लीला भंसाली के किसी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकती हैं।

आइसक्रीम से वैश्विक कंपनियों का मोहभंग:नेस्ले ने भी समेटा कारोबार, शुरू किया ऑपरेशन क्लीनअप; फोकस- मुनाफे वाले मुख्य सेगमेंट पर

आइसक्रीम से वैश्विक कंपनियों का मोहभंग:नेस्ले ने भी समेटा कारोबार, शुरू किया ऑपरेशन क्लीनअप; फोकस- मुनाफे वाले मुख्य सेगमेंट पर

दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य और पेय कंपनी नेस्ले आइसक्रीम के कारोबार को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने जा रही है। दरअसल वैश्विक एफएमसीजी सेक्टर में कुछ समय से एक ट्रेंड देखा जा रहा है। दिग्गज कंपनियों का आइसक्रीम बिजनेस से मोहभंग हो रहा है। नेस्ले ने पुष्टि की है कि वह अपने शेष आइसक्रीम पोर्टफोलियो को संयुक्त उद्यम साझेदार ‘फ्रोनेरी’ को बेचने के लिए बातचीत कर रही है। इस सौदे में हागेन-डाज और ड्रमस्टिक जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड शामिल हैं, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 1.3 बिलियन डॉलर (करीब 11,800 करोड़ रुपए) आंकी गई है। नेस्ले के नए सीईओ फिलिप नवरतिल ने पद संभालते ही कंपनी के बिखरे हुए साम्राज्य को समेटने का फैसला किया है। नवरतिल के मुताबिक, आइसक्रीम ब्रांड कंपनी के मुख्य बिजनेस के लिए एक भटकाव बन गए थे। कंपनी अब अपना पूरा ध्यान उन 4 सेगमेंट पर लगाएगी, जहां उसका दबदबा सबसे ज्यादा है- कॉफी, पेट केयर, न्यूट्रिशन और स्नैक्स। नवरतिल ने स्पष्ट किया, ‘हम इन ब्रांड्स को उस गति से आगे नहीं बढ़ा सकते, जिस तरह फ्रोनेरी जैसी विशेषज्ञ कंपनियां बढ़ा सकती हैं।’ नेस्ले जैसा दिग्गज अब लागत कम करने के लिए एआई और ऑटोमेशन का सहारा ले रहा है और दुनियाभर में 16,000 नौकरियां घटाने की योजना बना रहा है। ऐसे में कंपनी उन सेक्टर में पूंजी लगाना चाहती है जहां मार्जिन अधिक और स्थिर है। ये कंपनियां भी पीछे हटीं नेस्ले अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जो जमी हुई मिठास से दूरी बना रही है। यह पूरी दुनिया में एफएमसीजी और डेयरी दिग्गजों के बीच एक ‘स्ट्रक्चरल शिफ्ट’ है। यूनिलीवर ने बीते दिसंबर में प्रसिद्ध आइसक्रीम डिवीजन मैग्नम को अलग कर दिया। अमेरिकी दिग्गज कंपनी जनरल मिल्स अपनी आइसक्रीम यूनिट को पहले ही लैक्टालिस को बेच चुकी है। दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी निर्यातक कंपनी फोंटेरा भी अपने ग्लोबल कंज्यूमर और आइसक्रीम बिजनेस को बेचने की प्रक्रिया में है। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी लैक्टालिस ने 20,000 करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम बोली लगाई है। आखिर आइसक्रीम बिजनेस से किनारा क्यों बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जटिल कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स, बिजली की भारी खपत और सीजन पर निर्भरता ने आइसक्रीम को एक ‘मुश्किल बिजनेस’ बना दिया है। शुगर टैक्स और अनहेल्डी प्रोडक्ट पर सख्ती लोग अब चीनी और कैलोरी के सेवन को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं। कई देशों में बढ़ते ‘शुगर टैक्स’ और ‘अनहेल्दी’ उत्पादों के प्रति सख्त नियमों के कारण कंपनियां अब प्लांट-बेस्ड और पोषण-आधारित उत्पादों की ओर रुख कर रही हैं। कम मार्जिन आइसक्रीम की बिक्री मौसम पर निर्भर है; गर्मी में मांग चरम पर होती है। सर्दियों और मानसून में बिक्री सुस्त रहती है। वास्तविक मुनाफा कम बचता है। ब्यूटी और पर्सनल केयर के 20-25% मार्जिन की तुलना में आइसक्रीम का 10-14% मार्जिन निवेशकों के लिए कम आकर्षक है। कॉर्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य बड़ी चुनौती उत्पादन से लेकर ग्राहक तक पहुंचने तक आइसक्रीम माइनस 18°सी या उससे कम तापमान की जरूरत होती है। विशेष फ्रीजर ट्रकों, गोदामों के रखरखाव की लागत अन्य प्रोडक्ट्स से अधिक है। बढ़ते बिजली खर्च और कार्बन उत्सर्जन कम करने के वैश्विक दबाव ने इस सप्लाई चेन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

वर्षों से लोगों के मन में यह डर था कि एआई और रोबोट उनकी नौकरियां छीन लेंगे। पर हाल में यह सोच बदल गई। अब एआई इंसानों को काम पर रख रहे हैं। एक नए ऑनलाइन मार्केटप्लेस रेंट-ए-ह्यूमन पर 5 लाख से भी ज्यादा लोग सेवाएं देने के लिए जुड़ चुके हैं। यहां मालिक एआई प्रोग्राम हैं। ये एआई बॉट्स उन कामों के लिए इंसानों को पैसे दे रहे हैं जो वे खुद नहीं कर सकते, जैसे- बाजार से सामान लाना, फोटो खींचना या किसी इवेंट में शामिल होना। यह इनोवेशन 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेक्जेंडर लिटेप्लो के दिमाग की उपज है। लिप्टेलो ने देखा कि दुनिया में करोड़ों ‘एआई एजेंट’ (जैसे क्लाउड) मौजूद हैं, जिनके पास दिमाग तो है, लेकिन हाथ-पैर नहीं थे। वे कोडिंग कर सकते हैं, शेयर बाजार संभाल सकते हैं, पर भौतिक दुनिया में जाकर काम नहीं कर सकते। इसी कमी को भरने के लिए रेंट-ए-ह्यूमन का जन्म हुआ। इसकी टैगलाइन भी आकर्षक है… ‘एआई कान्ट टच ग्रास, यू कैन’। ऐसा बाजार जहां एआई बॉट्स इंसानों को किराए पर लेते हैं। लिप्टेलो ने प्लेटफॉर्म बनाने के लिए खुद कोडिंग नहीं की। उन्होंने एआई एजेंटों को काम सौंपा और पोलो खेलने अर्जेंटीना निकल गए। जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उनके डिजिटल एजेंट प्लेटफॉर्म बना रहे थे। रजिस्ट्रेशन को लेकर उत्साह देखकर पता चलता है कि लिप्टेलो का निशाना सही बैठा है। प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले काम भी बेहद दिलचस्प हैं। वॉशिंगटन में एक एआई ने 2700 रु. प्रति घंटे पर इंसान को कबूतर गिनने के लिए रखा। वहीं, खेल रणनीति सीख रहे एआई ने 9 हजार रु. प्रति घंटे पर बैडमिंटन पार्टनर किराए पर लिया। टोरंटो के मिन्जे कांग दुनिया के पहले व्यक्ति बने जिन्हें एआई ने काम दिया। उन्हें एक बोर्ड पकड़कर खड़े होना था। जिस पर लिखा था- ‘एआई ने मुझे बोर्ड पकड़ने के पैसे दिए हैं।’ कैसे काम करता है सिस्टम प्लेटफॉर्म पर इंसानी मैनेजर नहीं है। एआई बॉट विज्ञापन डालता है, इंटरव्यू लेता है और काम सौंपता है। इंसान काम पूरा करने के बाद फोटो या वीडियो से सबूत देता है। पुष्टि होते ही क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन वॉलेट से पेमेंट होता है। पैसा सुरक्षित एस्क्रो फंड में रखा जाता है ताकि रोबोट पैसा न मार सके। भुगतान और हादसों जैसे मुद्दों पर विवाद को लेकर स्पष्टता नहीं रिसर्चर एडम डॉर कहते हैं- एआई के जरिए इंसानों से काम करवाने में नियम और कानून बहुत पीछे हैं। अगर किसी एआई का इरादा गलत हो तो वह बड़े खतरनाक काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इंसानों से करवा सकता है। यानी लोग बिना समझे किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं जो नुकसान पहुंचाए। डॉर मानते हैं कि हमें जल्द कड़े नियम और सुरक्षा उपाय बनाने होंगे, ताकि एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो। गुड टेक एडवायजरी की सीईओ केफिर्थ बटरफील्ड कहती हैं कि कई देशों में एआई से इंसानों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं, इसलिए पेमेंट कौन देगा और हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह तय करना जरूरी है।

North Korea’s mysterious ‘football diplomacy’, Women’s Asian Cup

North Korea's mysterious 'football diplomacy', Women's Asian Cup

Hindi News Sports North Korea’s Mysterious ‘football Diplomacy’, Women’s Asian Cup सिडनी/प्योंगयोंग1 घंटे पहले कॉपी लिंक सितंबर 2024 में नॉर्थ कोरिया की नेशनल महिला फुटबॉल टीम ने U-20 विमंस वर्ल्ड कप जीता था। – फाइल फोटो दुनिया के सबसे रहस्यमयी देशों में शुमार नॉर्थ कोरिया एक बार फिर सुर्खियों में है। एक मार्च से ऑस्ट्रेलिया में शुरू हो रहे विमंस एशियन कप में नॉर्थ कोरिया की महिला फुटबॉल टीम हिस्सा लेने जा रही है। लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से लगभग गायब रहने के 16 साल बाद वर्ल्ड नंबर-9 टीम टूर्नामेंट में उतर रही है। नॉर्थ कोरिया के महिला फुटबॉल की कहानी 1986 में शुरू हुई थी। कहा जाता है कि जब फीफा कांग्रेस में महिलाओं के लिए वर्ल्ड कप की मांग उठी, तो नॉर्थ कोरियाई प्रतिनिधियों ने इसे अपनी गिरती राजनीतिक साख को बचाने के एक मौके के तौर पर देखा। नॉर्थ कोरिया ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत महिलाओं के खेल में भारी निवेश किया। स्कूल पाठ्यक्रम में फुटबॉल कार्यक्रम जोड़े गए, सेना में महिला टीमें बनाई गईं और देशभर में फुटबॉल से जुड़ी फेसिलिटी तैयार की गईं। तत्कालीन नेता किम जोंग-इल (फुटबॉल प्रेमी) ने महिला फुटबॉल को ‘पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा’ का जरिया बनाया। 2010 तक नॉर्थ कोरिया एशिया की सबसे मजबूत टीमों में से एक थी। 2011 में टीम की रफ्तार पर तब ब्रेक लग गया, जब वर्ल्ड कप के दौरान पांच खिलाड़ी डोप टेस्ट में फेल हो गईं। तब नॉर्थ कोरिया ने अजीबोगरीब दलील दी थी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों पर बिजली गिरी थी, जिसके इलाज के लिए उन्हें ‘कस्तूरी मृग’ की ग्रंथियों से बनी प्राकृतिक दवा दी गई थी। फीफा ने इस दलील को खारिज कर टीम पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद आर्थिक प्रतिबंधों, राजनीतिक अलगाव और कोरोना के कारण टीम गायब रही। हालांकि बैकग्राउंड में काम जारी रहा। 2013 में ‘प्योंगयोंग इंटरनेशनल फुटबॉल स्कूल’ खोला गया। नॉर्थ कोरिया की अंडर-17 और अंडर-20 टीमें मौजूदा वर्ल्ड चैम्पियन हैं। युवाओं के स्तर पर नॉर्थ कोरिया के पास रिकॉर्ड 14 खिताब हैं। महिला एशियन कप में उसकी वापसी अहम है। नॉर्थ कोरिया का शुरुआती मैच उज्बेकिस्तान से है। देखना दिलचस्प होगा कि युवा स्तर की सफलता सीनियर मंच पर कितनी प्रभावी साबित होती है। सफल खिलाड़ी ‘नेशनल हीरो’ थीं, इनाम में घर दिए जाते थे नॉर्थ कोरिया ने 2001 से 2008 के बीच तीन एशियन कप खिताब जीते। प्योंगयोंग के 1.5 लाख की क्षमता वाले स्टेडियम में महिला फुटबॉल मैच देखने भीड़ उमड़ती थी। सफल खिलाड़ियों को ‘नेशनल हीरो’ माना जाता। खिलाड़ियों को सफलता के बदले अपार्टमेंट और राजधानी में रहने का अवसर मिलता था, जहां जीवन स्तर ग्रामीण इलाकों से बेहतर माना जाता है। सरकार ने डाक टिकट, पोस्टर और टीवी धारावाहिकों के जरिए महिला फुटबॉल को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में पेश किया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

पाक आतंकी संगठन चैटजीपीटी, क्लाउड-जैमिनी के खिलाफ:जैश-लश्कर ने मदरसों में AI इस्तेमाल के विरुद्ध फतवा जारी किया; कहा- इस्लाम की उदारवादी व्याख्या पसंद नहीं, छात्र मौलवियों से ही सवाल पूछें

पाक आतंकी संगठन चैटजीपीटी, क्लाउड-जैमिनी के खिलाफ:जैश-लश्कर ने मदरसों में AI इस्तेमाल के विरुद्ध फतवा जारी किया; कहा- इस्लाम की उदारवादी व्याख्या पसंद नहीं, छात्र मौलवियों से ही सवाल पूछें

पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने अपने लगभग 5 हजार मदरसों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल्स के खिलाफ फतवा जारी किया है। यहां पर लगभग 12 लाख छात्र पढ़ते हैं। दरअसल, ये एआई टूल्स जैसे चैटजीपीटी, क्लाउड, जैमिनी और ग्रोक इस्लाम धर्म से जुड़े सवालों के उदारवादी जवाब दे रहे थे। जबकि इन मदरसों में मौलवियों द्वारा धर्म की कट्‌टरपंथी व्याख्या छात्रों को बताई जाती है, जो कुरान अथवा हदीस के अनुरूप नहीं होती है। जबकि एआई टूल्स अपने डेटाबेस के इनपुट से सही व्याख्या कर छात्रों को बता रहा है। जैश और लश्कर ने अपने नए आदेश में छात्रों को कहा है कि वे मौलवियों से क्लास में धर्म से जुड़े सवाल व्यक्तिगत रूप से पूछें। मोबाइल पर एआई टूल्स का उपयोग नहीं किया जाए। कैसे काम करते हैं मदरसे पाक में एलीमेंटरी एजुकेशन काफी हद तक मदरसों पर आधारित हैं। देवबंदी सिलसिले से जुड़े जैश-लश्कर के ये मदरसे इससे जुड़ी मस्जिदों से मिलने वाले फंड से संचालित होते हैं। नियंत्रण की हकीकत क्या पाक में मदरसा बोर्ड और वक्फ बोर्ड भी है, पर इनकी असल कमान खुफिया एजेंसी आईएसआई के पास होती है। मदरसों में ब्रेनवॉश कुछ छात्र आईएसआई के लिए भारत के खिलाफ आतंकी करतूतों के लिए रंगरूट साबित होते हैं। पीओके के मुज्जफराबाद और नीलम घाटी से जैश इन छात्रों को भारत में लॉन्च करती है। खाड़ी के देश सऊदी अरब सहित खाड़ी के अन्य इस्लामी देशों में इस्लामी यूनिवर्सिटीज-कॉलेज में धार्मिक तालीम के लिए अपने एआई टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है। ये सॉफ्टवेयर इन देशों ने अपने स्तर पर विकसित किए हुए हैं। ऑपरेशन ​सिंदूर में तबाह बहावलपुर मदरसे में लौटा मसूद ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय हमले में तबाह हुए जैश के बहावलपुर मुख्यालय के मदरसे में जनवरी में मरम्मत पूरी होने के बाद छात्र लौट आए हैं। यहां पर नियमित कक्षाएं शुरू हो गई हैं। पाक सरकार और आर्मी ने फंड जारी किया था। सूत्रों के अनुसार जैश का सरगना मौलाना मसूद अजहर इन दिनों रावलपिंडी के आईएसआई सेफ हाउस से निकलकर बहावलपुर मदरसे में रह रहा है।

Despite GST cuts and festivals, white goods profits fell 35%; companies are now relying on summer to boost profits.

Despite GST cuts and festivals, white goods profits fell 35%; companies are now relying on summer to boost profits.

Hindi News Business Despite GST Cuts And Festivals, White Goods Profits Fell 35%; Companies Are Now Relying On Summer To Boost Profits. मुंबई42 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे वाइट गुड्स की मांग ठंडी, वायर-केबल में उछाल। भारतीय कंपनियों के दिसंबर तिमाही के नतीजों में त्योहारी सीजन की मजबूती दिखी, लेकिन यह कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित रही। नतीजों ने यह भी संकेत दिया है कि मार्जिन के दम पर मुनाफे की ग्रोथ का दौर जल्द खत्म हो सकता है। 3,905 कंपनियों के विश्लेषण से पता चला कि तीसरी तिमाही में कुल आय सालाना आधार पर 10% बढ़ी, जो पिछली सात तिमाहियों में सबसे तेज गति है। हालांकि, मुनाफे की वृद्धि दर पांच तिमाहियों में सबसे धीमी (11%) रही। यह अंतर तब आया जब बि​क्री छह तिमाहियों में सबसे तेज बढ़ी। जीएसटी दरों में कटौती, त्योहारी मांग और आयकर में पिछली रियायतों के कारण उपभोक्ताओं ने खास तौर पर गाड़ियों और टीवी-वॉशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर खर्च किया। लेकिन गहराई में उतरने पर नतीजे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के लिए अलग-अलग कहानियां बयां कर रहे हैं। कोटक सिक्युरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, जहां वायर और केबल कंपनियों ने कमोडिटी की तेजी का फायदा उठाकर जबरदस्त ग्रोथ दिखाई। वहीं एसी, वॉशिंग मशीन जैसे व्हाइट गुड्स और इलेक्ट्रिकल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में मांग सुस्ती बनी हुई है। यह सेगमेंट कच्चे माल की महंगाई से भी जूझ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों और विश्लेषकों के लिए अब सबसे बड़ा ‘ट्रिगर’ गर्मी का आगामी सीजन है। यदि पारा चढ़ता है और कीमतें स्थिर रहती हैं, तो वाइट गुड्स में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। वायर-केबल- आय 37%, मुनाफा 39% बढ़ा,अब मांग पर संदेह तीसरी तिमाही में वायर एंड केबल सेगमेंट ‘शो-स्टॉपर’ रहा। इस सेगमेंट की आय में 37% और एबिटा (कामकाजी मुनाफा) में सालाना 39% बढ़ोतरी हुई। अब असली परीक्षा ये होगी कि क्या बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद मांग बनी रहती है। ग्रोथ की वजह कॉपर और एल्युमीनियम की कीमतों में उछाल के साथ-साथ रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। कीमतें बढ़ने की आशंका के चलते डीलरों द्वारा की गई भारी ‘चैनल स्टॉकिंग’ (स्टोरेज) ने भी बिक्री को सहारा दिया। टॉप परफॉर्मर्स पॉलीकैब (46% वृद्धि) और आरआर केबल (42% वृद्धि) आय के मामले में सबसे आगे रहे। खास तौर पर आरआर केबल के मुनाफे में 90% से अधिक का उछाल ऑपरेटिंग लीवरेज का बेहतरीन उदाहरण है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट- कमाई 2.5% बढ़ी, पर मुनाफा 8.2% घटा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कैटेगरी में आय 2.5% बढ़ी, लेकिन मुनाफे में 8.2% कमी आई। वॉटर हीटर की बिक्री बढ़ी, पर कूलर और पंखों की बिक्री कम रही। इस सेगमेंट के लिए आगामी 3-4 महीने और मौसम का मिजाज सबसे निर्णायक होगा। वाइट गुड्स – लाभ 35% तक घटा एसी, फ्रिज जैसे वाइट गुड्स सेगमेंट में जीएसटी दरें घटने के बावजूद बिक्री उम्मीद से कम बढ़ी। इस सेगमेंट का मुनाफा 35% तक घट गया है। कच्चा माल महंगा होने से कंपनियों को दाम 10% तक बढ़ाने पड़े। यह मांग प्रभावित कर सकता है। ​गर्मियों के सीजन पर दारोमदार कंपनियों से डीलरों को प्राइमरी बिक्री ठीक है। लेकिन सेकंडरी बिक्री (दुकान से ग्राहक को) कमजोर है। इस बीच कीमतों में 10% की नई बढ़ोतरी ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ सकती है। लीडर्स – आय 46% तक बढ़ी ये वो कंपनियां हैं, जिन्होंने आय वृद्धि के मामले में सबसे शानदार प्रदर्शन किया है।39% बढ़ा, अब मांग पर संदेह कंपनी सालाना आय वृद्धि पॉलीकैब 46.1% आरआर केबल 42.3% फिनोलेक्स केबल्स 35.2% केईआई इंडस्ट्रीज 19.5% अपार इंडस्ट्रीज 16.2% दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔