Sunday, 17 May 2026 | 09:38 AM

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Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Hindi News National Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | Dk Shivakumar | Siddaramaiah बेंगलुरु/नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 सीनियर विधायकों में 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। दूसरी ओर पहली बार चुने गए विधायकों ने भी दबाव बढ़ाते हुए मंत्री बनाने की मांग दोहराई है। कर्नाटक कांग्रेस के विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बांटते समय रणदीप सुरजेवाला ने भरोसा दिया था कि सभी को मौका मिलेगा, लेकिन वही लोग बार-बार चौथी बार भी उन्हीं मंत्रालयों में नियुक्त किए जा रहे हैं। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को सिर्फ उसका पुराना वादा याद दिलाने आए हैं। पहली बार चुने गए 38 MLA ने भी मंत्री पद मांगा कैबिनेट फेरबदल की मांग सिर्फ सीनियर विधायकों तक सीमित नहीं है। पहली बार विधायक बने 38 कांग्रेस MLA भी लामबंद हो गए हैं। इन विधायकों ने हाल ही में पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग की है कि फेरबदल के दौरान उनमें से कम से कम 5 को मंत्री बनाया जाए। मांड्या से पहली बार विधायक बने रविकुमार गौड़ा (रवि गनीगा) ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर विधायक की होती है और नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि पहली बार चुने गए विधायकों में से कम से कम पांच लोगों को कैबिनेट में शामिल किया जाए। मांग करना गलत नहीं है।” उन्होंने कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ मंत्री न तो उपलब्ध रहते हैं और न ही काम ठीक से हो रहा है। 2 कैबिनेट पद पहले से खाली कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए। दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, के. शदाक्षरी, एआर कृष्णमूर्ति, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से भी मुलाकात करेंगे। वरिष्ठ विधायक टीबी जयचंद्र ने कहा कि यह एक नियमित राजनीतिक प्रक्रिया है और उनका मुख्य एजेंडा सिर्फ कैबिनेट फेरबदल है। उन्होंने साफ किया कि नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उनके एजेंडे में नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं और अब केवल दो साल का कार्यकाल बचा है। ऐसे में वरिष्ठ विधायकों को भी मंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए।” फेरबदल के पीछे नेतृत्व की खींचतान भी कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है। 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। शिवकुमार ने कहा था- सब मंत्री या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इस बीच डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने भी गुरुवार को कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Hindi News National Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | Dk Shivakumar | Siddaramaiah बेंगलुरु/नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 सीनियर विधायकों में 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। वहीं पहली बार चुने गए 38 कांग्रेस विधायक भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर कम से कम 5 नए विधायकों को मंत्री बनाने की मांग की है। मांड्या विधायक रविकुमार गौड़ा ने कहा कि नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। 2 कैबिनेट पद पहले से खाली कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए। दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। कर्नाटक कांग्रेस विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बंटवारे के समय रणदीप सुरजेवाला ने सभी को मौका देने का भरोसा दिया था, लेकिन कुछ लोग चौथी बार भी मंत्री बने। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को उसका पुराना वादा याद दिला रहे हैं। शिवकुमार ने कहा था- सब मंत्री या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इस बीच डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने भी गुरुवार को कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। फेरबदल के पीछे नेतृत्व की खींचतान भी कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है। 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। क्या है रोटेशन फॉर्मूला? 2023 विधानसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं में तीखी प्रतिस्पर्धा थी। उस समय ढाई-ढाई साल के रोटेशन फॉर्मूले की चर्चा थी, जिसके मुताबिक शिवकुमार 2.5 साल बाद CM बन सकते थे, लेकिन कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। 2 दिसंबर: सिद्धारमैया ने कहा था- जब हाईकमान कहेगा डीके शिवकुमार CM होंगे, हमारे बीच मतभेद नहीं कर्नाटक CM सिद्धारमैया ​​​​​​ने कहा कि जब हाईकमान कहेगा, तब डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। उन्होंने यह बात ‘शिवकुमार को कब CM बनाया जाएगा’ से जुड़े सवाल पर कही। सिद्धारमैया ​​​​​​ने कहा कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और दोनों राज्य सरकार को एकजुट होकर चला रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ———————————– ये खबर भी पढ़ें… सिद्धारमैया कर्नाटक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले सीएम बनेंगे, देवराज उर्स के कार्यकाल की बराबरी की कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बनने जा रहे हैं। वे 7 जनवरी को यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद पर 2,792 दिन पूरे कर लिए हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Ahmedabad Plane Crash: Families Demand Black Box Data

Ahmedabad Plane Crash: Families Demand Black Box Data

नई दिल्ली/अहमदाबाद9 मिनट पहले कॉपी लिंक अहमदाबाद में एअर इंडिया प्लेन क्रैश के 10 महीने बाद पीड़ित परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। परिवारों ने कहा कि वे यह जानना चाहते हैं कि विमान हादसा क्यों हुआ और क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी थी। परिजनों ने कहा कि अगर ब्लैक बॉक्स डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे निजी तौर पर परिवारों के साथ साझा किया जाए। 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहा बोइंग 787-8 विमान टेकऑफ के तुरंत बाद मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर गिर गया था। इस हादसे में 241 यात्री और 19 अन्य लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Ahmedabad Plane Crash: Families Demand Black Box Data

Ahmedabad Plane Crash: Families Demand Black Box Data

नई दिल्ली/अहमदाबाद43 मिनट पहले कॉपी लिंक 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही बोइंग 787-8 फ्लाइट टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। अहमदाबाद में एअर इंडिया प्लेन क्रैश के 10 महीने बाद करीब 30 पीड़ित परिवारों ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा है। उन्होंने PM से फ्लाइट का ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है। परिजनों ने कहा, “हमें पैसे नहीं चाहिए। हमें सच्चाई जाननी है। हम जानना चाहते हैं कि हादसा क्यों हुआ और क्या इसमें कोई तकनीकी खराबी थी।” परिजनों का कहना है कि अगर ब्लैक बॉक्स डेटा सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, तो कम से कम इसे निजी तौर पर परिवारों के साथ साझा किया जाए। 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहा बोइंग 787-8 विमान टेकऑफ के तुरंत बाद मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर गिर गया था। इस हादसे में 241 यात्री और 19 अन्य लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी। बोइंग विमान क्रैश में मारे गए लोगों में 60 विदेशी नागरिक थे। परिवारों का आरोप- वेबसाइट पर मृतकों के सामान की साफ फोटो नहीं पीड़ित परिवारों ने PM को लिखे लेटर में एअर इंडिया की तरफ से मदद की कमी का आरोप लगाया। हादसे में अपनी मां को खोने वाली किंजल पटेल ने एअर इंडिया की वेबसाइट के इस्तेमाल में आ रही दिक्कतों का जिक्र किया, जहां पीड़ितों के सामान की पहचान करनी होती है। उन्होंने कहा, “वेबसाइट पर 25,000 से ज्यादा सामानों की लिस्ट हैं, लेकिन तस्वीरें साफ नहीं हैं। इससे कुछ भी ढूंढ पाना या पहचान कर पाना लगभग नामुमकिन है।” वहीं अपनी मां, भाई और बेटी को खोने वाले खेड़ा के रोमिन वोरा ने बताया कि डिजिटल साधनों की जानकारी न होने के कारण कई परिवारों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक ईमेल आईडी है और जवाब आने में 15 दिन तक लग जाते हैं। गांव के कई लोग ईमेल इस्तेमाल करना भी नहीं जानते।” उन्होंने यह भी कहा कि वेबसाइट पर निजी सामान को सार्वजनिक रूप से दिखाना असंवेदनशील है। प्लेन क्रैश में 24 साल के बेटे की मौत के बाद निलेश पुरोहित ने कहा, “अब मेरा घर बिल्कुल खाली लगने लगा है। कोई भी मुआवजा इस कमी को पूरा नहीं कर सकता। हमें पैसे नहीं, बल्कि सच्चाई जाननी है।” इस साल जून में प्लेन क्रैश की फाइनल रिपोर्ट आने की संभावना पीड़ित परिवारों ने लेटर की कॉपी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी हैं। इस मामले में एअर इंडिया की प्रतिक्रिया का इंतजार है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में प्लेन क्रैश की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। फाइनल रिपोर्ट इस साल जून में, यानी हादसे की पहली बरसी के आसपास आने की संभावना है। 12 फरवरी : AAIB बोला- पायलट को दोषी ठहराने वाली रिपोर्ट गलत AAIB ने 12 फरवरी को बताया था कि अहमदाबाद प्लेन क्रैश की जांच अभी भी जारी है। AAIB ने इटली के नामी अखबार कोरिएरे डेला सेरा की उस रिपोर्ट को गलत बताया जिनमें घटना के लिए पायलट को दोषी ठहराए जाने की बात कही गई थी। इटली के अखबार ने अज्ञात सूत्रों का हवाला देते हुए बताया था कि जांचकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हादसा किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं हुई थी। बल्कि पायलट ने जानबूझकर फ्यूल स्विच बंद कर दिया था। इस पर AAIB ने कहा- जांच अभी जारी है। किसी भी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। ब्यूरो ने मीडिया से संयम बरतने और समय से पहले अटकलें लगाने से बचने का आग्रह किया। ————————— अहमदाबाद प्लेन क्रैश से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… अहमदाबाद प्लेन क्रैश- विमान में पहले से खराबी थी: अमेरिकी रिपोर्ट में इलेक्ट्रिकल फेलियर की आशंका अमेरिका स्थित फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने दावा किया है कि अहमदाबाद में क्रैश एअर इंडिया के विमान में इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होने से एक के बाद एक कई सिस्टम बंद हुए। हो सकता है कि यही हादसे की वजह बना हो। विमान टेकऑफ के कुछ ही सेकेंड बाद अहमदाबाद के रिहायशी इलाके में गिर गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Punjab Warehouse Suicide Case | CBI Probe Demand by Randhawas Wife

Punjab Warehouse Suicide Case | CBI Probe Demand by Randhawas Wife

अमृतसर में वेयरहाउस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा सुसाइड केस में पूर्व AAP मंत्री लालजीत भुल्लर की तीसरे दिन गिरफ्तारी हो गई। यह एक्शन तब हुआ, जब लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने CBI जांच का भरोसा दे दिया। हालांकि, भुल्लर की . उनकी मांग है कि इस मामले की CBI जांच होनी चाहिए। उपिंदर कहती हैं कि पंजाब में सरकार भुल्लर की है। पुलिस भी उनकी है, ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे होगी? पोस्टमॉर्टम भी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के अंडर डॉक्टरों की टीम से करवाया जाए। भुल्लर की गिरफ्तारी के बाद दैनिक भास्कर ने DM रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इसमें उन्होंने पति को धमकाने से लेकर मौजूदा हालात और आगे की रणनीति को लेकर खुलकर बात की। DM गगनदीप सिंह रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर तीनों बच्चों के साथ। सवाल: यह पूरा मामला कब शुरू हुआ? उपिंदर कौर: मेरे पति पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉर्पोरेशन में डिस्ट्रिक्ट मैनेजर थे। उनके पास अमृतसर के साथ तरनतारन का भी चार्ज था। अक्टूबर 2025 में अलग–अलग जिलों में गोदाम बनाने के टेंडर निकाले गए। इसमें मंत्री लालजीत भुल्लर ने भी पिता सुखदेव भुल्लर के नाम पर टेंडर भरा था। सवाल: टेंडर किसने निकाले, कैसे मिलने थे? उपिंदर कौर: फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने ये टेंडर निकाले थे। नियमों के मुताबिक, वही इसे पास भी करती है। मेरे पति के अधीन आते पट्‌टी एरिया में भी टेंडर निकाले गए थे। लालजीत भुल्लर पट्‌टी सीट से MLA व सरकार में मंत्री था। इन टेंडरों के लिए मंजूरी चंडीगढ़ से मिलनी थी। टेंडर देने या न देने में मेरे पति का कोई बड़ा रोल नहीं था। सवाल: फिर टेंडरों को लेकर मंत्री से विवाद कैसे शुरू हुआ? उपिंदर कौर: टेंडर भरने के बाद ही पति को धमकियां मिलने लगीं। उन्हें कहा गया कि अगर ये टेंडर ट्रांसपोर्ट मंत्री के पिता सुखदेव भुल्लर के नाम पर मंजूर नहीं हुए, तो इसका खामियाजा तुझे और तेरे बच्चों को बुरी तरह भुगतना पड़ेगा। यहां तक कहा गया कि हमें पता है कि तेरे बच्चे कहां-कहां पढ़ते हैं और तेरी पत्नी कहां नौकरी करती है। सवाल: आपके पति ने इसके बारे में आपको क्या बताया? उपिंदर कौर: मेरे पति लगातार पड़ रहे दबाव के कारण घर आकर रोते हुए सारी बातें बताते थे। वह बहुत टेंशन में थे। पति कहते थे कि मैं नियमों के बाहर जाकर किसी की मदद नहीं कर सकता। सवाल: टेंडर नहीं मिला तो फिर मंत्री भुल्लर ने आगे क्या किया? उपिंदर कौर: टेंडर नहीं मिला तो मंत्री और उनके पिता ने मेरे पति को बहुत बुरी तरह बेइज्जत किया। उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया। मंत्री मेरे पति को वॉट्सऐप कॉल्स कर धमकाने लगा। उन पर दबाव डाला कि तू ये टेंडर कैंसिल कर और इन्हें मेरे पिता सुखदेव भुल्लर के नाम पर जारी कर। नहीं तो तुझे, तेरे बच्चों, पूरे परिवार को जान से मरवा दूंगा। सवाल: आपके पति ने क्या कहा? मंत्री का क्या रवैया था? उपिंदर कौर: मेरे पति ने उन्हें कई बार समझाया कि टेंडर कैंसिल कर उसे उनके पिता के नाम पर जारी करने का अधिकार मेरे पास नहीं है। इससे मंत्री और गुस्से में आ गया। मंत्री ने धमकाते हुए कहा कि तुझे नहीं पता, जितने भी गैंगस्टर हैं, मेरे ही पाले हुए हैं। तुझे व तेरे परिवार को मरवाने के लिए एक इशारा ही काफी है। इससे पति काफी डर चुके थे। सवाल: क्या इसके बाद मंत्री ने धमकाना बंद किया? उपिंदर कौर: नहीं, 13 मार्च को मंत्री ने पति को घर में बने ऑफिस में बुलाया। वहां मंत्री, उसका पिता, PA और कुछ और लोग मौजूद थे। वहां अंदर जाते ही मंत्री के पिता और पीए ने मेरे पति के मुंह पर थप्पड़ मारे। इसके बाद दूसरे व्यक्तियों के साथ मिलकर मेरे पति से मारपीट की। सवाल: मंत्री के ऑफिस में आपके पति के साथ क्या बर्ताव हुआ? उपिंदर कौर: मारपीट के बाद सुखदेव भुल्लर ने बेटे लालजीत भुल्लर को कहा कि तू किस चीज का मंत्री है, जब तेरे कहने पर दो टके का अफसर तेरे बाप के नाम पर टेंडर भी जारी नहीं कर सकता। इससे मंत्री पूरे गुस्से में आ गया। उसने जेब से पिस्टल निकाल ली और उसका बट मेरे पति के सिर पर मारा। इसके बाद मंत्री ने पिस्टल मेरे पति की कनपटी पर रखकर कहा कि हमारे कहे पर नहीं चलता, अब देखना, हम तेरा क्या हश्र करेंगे। सवाल: आपके पति का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह रिश्वत लेने की बात कह रहे हैं? उपिंदर कौर: वह वीडियो जबरन बनवाया गया। 13 मार्च को ही मारपीट करने के बाद मंत्री ने अपने साथी को कहा कि जो भी मैं कहता हूं, तू वही शब्द गगनदीप के मुंह से बुलवा और उसका वीडियो बना। अगर ये नहीं बोलता तो गोली मार देना और लाश को नदी में फेंककर खुर्द-बुर्द कर देना। सवाल: 13 मार्च को इस व्यवहार के बाद पति ने आपको क्या बताया? उपिंदर कौर: पति ने घर आकर मुझे सारी बातें बताईं। उन्होंने कहा कि अब मैं जीने के लायक नहीं रहा। मैंने उन्हें समझाया कि इसके बारे में पुलिस को बताते हैं। मगर, पति ने कहा कि भुल्लर सरकार में मंत्री है। पुलिस भी उन्हीं की है। कोई हमारी फरियाद नहीं सुनेगा। उन्हें परिवार की भी चिंता होने लगी। सवाल: परिवार की सुरक्षा के लिए आप लोगों ने क्या किया? उपिंदर कौर: हमने तीनों बच्चों को मामा के घर भेज दिया। मेरी सास भी बाहर रहने लगी। मैं अजनाला रोड पर सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में साइंस टीचर हूं। मैं भी स्कूल में ड्यूटी करने के बाद अपने घर आने के बजाय मायके चली जाती थी। उन्हें परिवार का बहुत डर रहता था। सवाल: पुलिस आपसे बार-बार मोबाइल मांग रही है, उसमें ऐसा क्या राज है? उपिंदर कौर: सबूत तो मैं नहीं बता सकती लेकिन पुलिस को मोबाइल नहीं दूंगी। मुझे पुलिस पर भरोसा नहीं है। मैं CBI टीम को ही मोबाइल दूंगी। सवाल: भुल्लर अरेस्ट हो गए, क्या अब आप पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हो? उपिंदर कौर: हमारी मांग है कि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के अंडर डॉक्टरों की टीम बने। वह उनका पोस्टमॉर्टम करे, ताकि इस दौरान सबूत

SC Building National Symbol Demand Rejected

SC Building National Symbol Demand Rejected

Hindi News National SC Building National Symbol Demand Rejected | CJI Says Administrative Matter नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक तस्वीर- फाइल फोटो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग के गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है। यह याचिका बदरवाड़ा वेणुगोपाल उर्फ बरा खतरनाक की तरफ से दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। CJI ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग बन रही है और इस मुद्दे पर उस समय विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इसके बारे में सोचा जाएगा, लेकिन ऐसे मामलों को याचिका के जरिए नहीं उठाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीक में अशोक चक्र के नीचे अशोक स्तंभ का सिंह बना है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लिखित अनुरोध करें। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में इस मुद्दे पर लेटर लिखा था, जिस पर नवंबर 2025 में जवाब मिला था कि सुप्रीम कोर्ट अपना अलग प्रतीक इस्तेमाल करता है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वह जवाब उनके कार्यकाल से पहले का है और अब इस पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सचिव जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले पर एक नोट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि अगर गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के लिए कोई वास्तु या संरचनात्मक व्यवस्था नहीं है, तो जरूरी संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए जाएं। यह सब संविधान और राज्य प्रतीक के उपयोग से जुड़े कानूनों के अनुसार किया जाए। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस प्रक्रिया को तय समय सीमा में लागू किया जाए। इसके लिए करीब 8 सप्ताह का समय सुझाया गया था। यह मांग State Emblem of India (Prohibition of Improper Use) Act, 2005 और State Emblem of India (Regulation of Use) Rules, 2007 के अनुरूप की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के प्रतीक में अशोक चक्र और संस्कृत श्लोक सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक प्रतीक अशोक चक्र के नीचे स्थित अशोक स्तंभ के सिंह को दर्शाता है। इसके नीचे संस्कृत में “यतो धर्मस्ततो जयः” (जहां धर्म है, वहां विजय है) लिखा है। यह प्रतीक 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया था, जिस दिन सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी। यह सारनाथ के सिंह स्तंभ से प्रेरित है, जो न्याय, धर्म और देश की सर्वोच्च अदालत की अधिकारिता का प्रतीक है। वहीं भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सारनाथ स्थित सम्राट अशोक के लायन कैपिटल (सिंह स्तंभ) से लिया गया है। इसमें चार एशियाई शेर पीठ से पीठ मिलाकर खड़े हैं। सामने से केवल तीन शेर दिखाई देते हैं, चौथा पीछे होता है। नीचे एक गोलाकार आधार होता है, जिस पर सिंह, बैल, घोड़े और हाथी की आकृतियां उकेरे गए हैं। इसके बीच में अशोक चक्र होता है और नीचे “सत्यमेव जयते” (सत्य की ही जीत होती है) लिखा होता है। राष्ट्रीय प्रतीक देश की करेंसी और सरकारी दस्तावेजों पर इस्तेमाल होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की संस्था USCIRF की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है। शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं। पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं। USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है। बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं। इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

275 Ex-Judges & Officers Criticize USCIRF Report, Demand US Govt Probe

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की मार्च में जारी हुई रिपोर्ट में RSS पर बैन लगाने की बात कही गई है। भारत के 275 पूर्व जजों, अधिकारियों और सैन्य लोगों ने इसका विरोध किया और कहा कि रिपोर्ट गलत और पक्षपाती है। शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं। पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं। USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है। बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज शामिल इस संयुक्त बयान पर कुल 275 लोगों ने साइन किए हैं। इनमें 25 रिटायर्ड जज, 119 पूर्व सरकारी अधिकारी (जिनमें 10 राजदूत भी हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हैं। इस बयान पर साइन करने वाले प्रमुख लोगों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस पूरे बयान को तैयार करने और जोड़ने का काम भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया। 2025 में खुफिया एजेंसी RAW पर बैन की मांग की USCIRF ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में कहा था कि भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति बिगड़ती जा रहा है और सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिश में कथित रूप से शामिल होने की वजह से सीक्रेट एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) पर बैन लगा दिया जाना चाहिए। भारत सरकार ने USCIRF की रिपोर्ट खारिज करते हुए इसे पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रिपोर्ट तथ्यों को गलत ढंग से पेश करती है। इस आयोग को खुद को “चिंता का विषय संस्था” घोषित कर देना चाहिए। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी रिपोर्ट- ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत को हराया, पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला नहीं माना एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच 4 दिन की लड़ाई (ऑपरेशन सिंदूर) में पाकिस्तान को बड़ी सैन्य कामयाबी मिली थी। इस रिपोर्ट में पहलगाम अटैक को भी आतंकी हमला न मानकर ‘विद्रोही हमला’ माना गया है। 800 पन्नों की इस रिपोर्ट को यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Gold Silver Prices Fall | Dollar Demand Rises

Gold Silver Prices Fall | Dollar Demand Rises

नई दिल्ली20 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही। सोना 11 हजार रुपए घटकर 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 13 मार्च, शुक्रवार को 1,58 लाख रुपए पर था। वहीं चांदी 2.60 लाख किलो से गिरकर 2.32 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 28 हजार रुपए कम हुई। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से निवेशक अपनी ‘गोल्ड होल्डिंग्स’ बेचकर कैश (डॉलर) इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि बाजार की अस्थिरता से निपट सकें। इससे डॉलर डिमांड बढ़ रही है और सोने-चांदी के दाम गिर रहे हैं। देश के अलग-अलग शहरों में सोने की वर्तमान कीमतें मैप में देखें… अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं। खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं। ऑल टाइम हाई से 1.53 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 28,903 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 50 दिन में चांदी 1.53 लाख रुपए सस्ती हो गई है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

LPG gas shortage induction stoves demand; Middle East Import Dependency |US Israel & Iran War

LPG gas shortage induction stoves demand; Middle East Import Dependency |US Israel & Iran War

इजराइल-ईरान जंग का देश में LPG सिलेंडर की सप्लाई पर असर पड़ा है। LPG सिलेंडर की कमी के बीच इंडक्शन कुकर की डिमांड अचानक कई गुना बढ़ गई है। हालत ये है कि कई इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों में इंडक्शन स्टोव का स्टॉक खत्म हो चुका है। कंपनियों के लिए भी डिमांड प . इलेक्ट्रॉनिक्स डीलर्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकर की बिक्री में 400 से 500% का इजाफा हुआ है। बाजार के जानकारों का कहना है कि इंडक्शन बनाने में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर कच्चा माल चीन से आता है। इसलिए नई सप्लाई आने में करीब 45 दिन का वक्त लग सकता है। ऐसे में कंपनियों के लिए प्रोडक्शन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। इंडक्शन के साथ ही दूसरे कुकिंग अप्लायंस जैसे एयर फ्रॉयर, ओटीजी और माइक्रोवेव की डिमांड भी बढ़ी है। लोग बोले- ईद में कैसे बनेगा खाना, इंडक्शन का ही सहारा भोपाल के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में इंडक्शन स्टोव खरीदने वालों की भीड़ बढ़ गई है। LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कई परिवार एहतियात के तौर पर इंडक्शन खरीद रहे हैं। इसकी डिमांड जानने के लिए हम सबसे पहले बाजार पहुंचे। यहां मिली नुसरत कहती हैं, ‘हमारा परिवार बड़ा है, इसलिए एक साथ तीन इंडक्शन खरीद रही हूं। सिलेंडर के साथ-साथ इंडक्शन के दाम भी बढ़ गए हैं। पिछले महीने जो इंडक्शन 2200 रुपए में मिल रहा था। अब वही करीब 3000 रुपए का हो गया है। लगता है आने वाले दिनों में दाम और बढ़ेंगे।‘ ‘रमजान का महीना चल रहा है, रोज शाम को इफ्तारी के लिए घर में खाना बनाना जरूरी है। ईद की तैयारी भी करनी है, इसलिए एहतियात के तौर पर इंडक्शन खरीदना पड़ रहा है।‘ वहीं बाजार में मिले कैलाश भी गैस सिलेंडर की सप्लाई न होने से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि कई दुकानों पर पूछ चुके लेकिन इंडक्शन नहीं मिल रहा। कैलाश कहते हैं, ‘गैस सिलेंडर के लिए नंबर लगाया है, लेकिन कह रहे हैं कि मिलने में 8–10 दिन लग सकते हैं।’ कई दुकानों में इंडक्शन का स्टॉक भी खत्म इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में ज्यादातर दुकानों पर इंडक्शन स्टोव का स्टॉक भी खत्म हो चुका है। जिन दुकानों में इंडक्शन की गिनी-चुनी यूनिट्स बची भी हैं, वहां दाम काफी ज्यादा हैं। भोपाल में एक इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम मालिक श्याम बंसल बताते हैं, ‘आमतौर पर जो माल एक हफ्ते या दस दिन में आता था, उसे अब हर दिन मंगाना पड़ रहा है। हम खुद महंगे दाम पर माल खरीद रहे हैं, इसलिए कस्टमर को भी महंगे में ही देना पड़ रहा है। हालांकि कोशिश यही है कि जरूरत के समय ज्यादा मुनाफा न लिया जाए।’ बाजार के जानकार बताते हैं कि आमतौर पर गर्मियों में इंडक्शन स्टोव की बिक्री कम हो जाती है। इस वक्त कस्टमर की जरूरत एयर कंडीशनर, कूलर, फ्रिज और पंखे जैसे प्रोडक्ट रहते हैं। इसलिए दुकानदार भी गर्मियों में इंडक्शन का ज्यादा स्टॉक नहीं रखते। अब की LPG को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार का ट्रेंड ही बदल दिया है।’ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन की कीमतें करीब 10 से 20% तक बढ़ गई हैं। 5 दिन में इंडक्शन की महीने भर से ज्यादा बिक्री फिलिप्स डीए के मुंबई और एमपी में ब्रांच मैनेजर सेल्स विवेक गौर बताते हैं, ‘LPG की कमी की खबरों के बीच इंडक्शन एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। लोगों ने एहतियात के तौर पर इसे खरीदना शुरू कर दिया है। इसलिए इंडक्शन की डिमांड में करीब 400–500% का इजाफा हुआ है। सप्लाई बनी रहे इसलिए बढ़ती डिमांड पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं।‘ वहीं, उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के भोपाल में डिप्टी सेल्स मैनेजर बिनीत शर्मा बताते हैं, अगर किसी महीने में आम तौर पर इंडक्शन की 1,000 यूनिट बिकती हैं, तो इस बार पिछले पांच दिन में ही करीब 8,000 से 10,000 यूनिट बिक चुकी हैं। यानी इसकी डिमांड 8 से 10 गुना तक बढ़ गई है। वे आगे कहते हैं कि फिलहाल इंडक्शन कैटेगिरी में कई ब्रांड कच्चे माल की कमी का सामना कर रहे हैं। बाजार में बड़ी संख्या में छोटे और अनऑर्गनाइज्ड ब्रांड हैं, इसलिए इसका सटीक डेटा नहीं है। कोविड काल जैसे हालात, अचानक बढ़ा बाजार केनस्टार में एमपी के स्टेट हेड रोहित श्रीवास्तव कहते हैं कि मौजूदा हालात कोविड के दौर की याद दिला रहे हैं, जब इलेक्ट्रॉनिक किचन अप्लायंसेज की डिमांड बढ़ गई थी। वे बताते हैं, ‘इंडक्शन और इंफ्रारेड की बिक्री का ये दौर बिल्कुल कोविड के समय जैसा है, जब अचानक माइक्रोवेव और डिशवॉशर की मांग बढ़ गई थी। अब भी उसी तरह की आर्टिफिशियल ग्रोथ देखने को मिल रही है। पहले ही दिन हमने 7 हजार से ज्यादा यूनिट बेचीं।’ LPG सिलेंडर न मिलने की वजह से चाय की दुकानों पर भी इंडक्शन का ही इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियों के लिए सप्लाई देना और कच्चा माल जुटाना चैलेंज इंडक्शन बनाने वाली कंपनियों के लिए भी अचानक बढ़ी डिमांड चुनौती बन गई है। प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कच्चा माल, फैक्ट्री क्षमता और सप्लाई चेन की तैयारी पहले से करनी पड़ती है। डीलरों का कहना है कि अगर डिमांड ऐसे ही बढ़ती रही तो कुछ वक्त के लिए बाजार में इंडक्शन की सप्लाई कम हो सकती है। मध्यप्रदेश में उषा इंटरनेशनल लिमिटेड के ब्रांच मैनेजर मोहनीश जैन बताते है, ‘इंडक्शन स्टोव बनाने में इस्तेमाल होने वाला लगभग सारा कच्चा माल चीन से आता है, खासकर हीट प्लेट जैसे बाकी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट। ऐसे में चीन में भी डिमांड बढ़ने का असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।‘ ‘कंपनियों के लिए ये अप्रत्याशित संकट है। कंपनियां चीन में सप्लाई सेंटर्स से लगातार कॉन्टैक्ट में हैं, लेकिन नए ऑर्डर की शिपमेंट आने में करीब 45 दिन का वक्त लग सकता है।‘ डीलरों के मुताबिक, सिर्फ फिलिप्स ब्रांड में ही एक लाख से ज्यादा यूनिट की डिमांड आ चुकी है। कंपनियां फिलहाल अपने मौजूदा स्टॉक के आधार पर प्रोडक्शन बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। LPG पर निर्भरता कम करने के लिए कई कंपनियां अब कमर्शियल किचन के लिए बड़े इंडक्शन सिस्टम तैयार करने का भी काम कर रही हैं। उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि होटल और बड़े किचन के लिए अलग से कमर्शियल इंडक्शन यूनिट डेवलप