Sunday, 17 May 2026 | 08:45 AM

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Supreme Court: Reforms on Public Demand, Not Forced

Supreme Court: Reforms on Public Demand, Not Forced

नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने समाज की जरूरतों के अनुसार प्रावधान बनाए हैं, जिन्हें नौ जजों की बेंच बदला नहीं सकती। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की बेंच सबरीमाला मंदिर समेत धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। सुनवाई सोमवार को 14वें दिन जारी रही। जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता को सामाजिक सुधार के नाम पर खत्म नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने संकेत दिया कि जनता की सहमति से सुधार की मांग उठे तो उस पर विचार हो सकता है। मामले की सुनवाई बुधवार को फिर होगी। 7 सवाल, जिन पर बहस हो रही… सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि धर्म के जरूरी पहलुओं को सामाजिक सुधार के नाम पर हटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में पूजा का अधिकार महत्वपूर्ण है और यह पवित्र स्थानों पर होता है, इन्हें हटाना अधिकार का उल्लंघन होगा। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जा सकता। धर्मों में सुधार की गुंजाइश रखी है कोर्ट में तर्क दिया गया कि राज्य सामाजिक कल्याण के लिए कानून बनाता है तो उसे धार्मिक प्रथाओं के आधार पर रद्द नहीं किया जाना चाहिए। महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने कहा कि तर्कवादी हर चीज को तर्क की कसौटी पर देखते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में वैज्ञानिक सोच और सुधार की भावना को बढ़ावा देने की बात अनुच्छेद 51A(h) में कही गई है। स्वामी अग्निवेश की ओर से वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि संविधान ने धर्मों में सुधार की गुंजाइश रखी है। उन्होंने अनुच्छेद 26 का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें “मैनेज” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, “कंट्रोल” नहीं। इससे साफ होता है कि धार्मिक संस्थाओं के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन है। धर्म में सुधार से सभ्यता का संतुलन नहीं बिगड़ेगा जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए अनुच्छेद 30 जैसे प्रावधान उनकी परिस्थितियों को देखते हुए बनाए गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नौ जजों की बेंच इस व्यवस्था को बदल सकती है, जिसे संविधान निर्माताओं ने सोच-समझकर तय किया था। गुरुस्वामी ने जवाब में कहा कि संविधान निर्माताओं को भरोसा था कि धर्म में सुधार से सभ्यता का संतुलन नहीं बिगड़ेगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि अगर हर धार्मिक प्रथा को अदालत में चुनौती दी जाएगी, तो बड़ी संख्या में याचिकाएं आएंगी और धर्मों की संरचना प्रभावित हो सकती है। सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है। इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता 17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी 21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं 22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं 23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं 28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते 29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे 5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें 6 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते 7 मई- सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला-हर धार्मिक प्रथा को चुनौती गलत ——————————————————————- ये खबर भी पढ़ें: सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला-हर धार्मिक प्रथा को चुनौती गलत:इससे धर्म और समाज दोनों टूट जाएंगे, अदालतों में सैकड़ों केस आएंगे सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और समाज पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Madalsa Sharma Casting Couch Shock: 19yo Bikini Demand

Madalsa Sharma Casting Couch Shock: 19yo Bikini Demand

17 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्टर मिथुन चक्रवर्ती की बहु और टीवी शो ‘अनुपमा’ में काव्या का रोल निभाने वाली मदालसा शर्मा ने कास्टिंग काउच को लेकर खुलासा किया है। एक्ट्रेस ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में एक नामी डायरेक्टर ने उनकी ‘बॉडी लैंग्वेज’ चेक करने के बहाने उनके सामने बिकिनी पहनने की डिमांड रखी थी। मदालसा ने उस वक्त डायरेक्टर पर गुस्सा हो गईं और मीटिंग छोड़कर बाहर निकल गईं। एक्ट्रेस मदालसा शर्मा। मीटिंग में की गई अजीब डिमांड मदालसा शर्मा ने हाल ही में ‘द मेल फेमिमिस्ट’ पॉडकास्ट में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि यह वाकया तब का है जब उनकी उम्र केवल 19 साल थी। एक नामी फिल्ममेकर ने उन्हें फिल्म के सिलसिले में मीटिंग के लिए बुलाया था। डायरेक्टर ने उनसे कहा कि वे फिल्म के लिए एक ऐसी लड़की की तलाश में हैं जो पर्दे पर बिकिनी पहनने में सहज हो। मदालसा ने बताया कि प्रोफेशनल तौर पर उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं थी, इसलिए उन्होंने हां कह दिया। मदालसा ने 2018 में मिथुन चक्रवर्ती के बेटे महाक्षय से शादी की है। एक्ट्रेस ने अपनाया कड़ा रुख बातचीत के दौरान डायरेक्टर ने मदालसा से कहा कि वह अभी उनके सामने बिकिनी पहनकर दिखाएं, क्योंकि वह उनकी ‘बॉडी लैंग्वेज’ देखना चाहते हैं। इस पर मदालसा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने डायरेक्टर से कहा, “मैं एक प्रोफेशनल एक्ट्रेस हूं। अगर फिल्म के सीन की डिमांड है, तो मैं कैमरे के सामने बिकिनी या कुछ भी पहनने को तैयार हूं क्योंकि वह मेरी जॉब का हिस्सा है। लेकिन आपके सामने इस तरह कपड़े पहनना मेरे काम का हिस्सा नहीं है।” मदालसा ने साफ शब्दों में कहा कि अगर उनके टैलेंट पर भरोसा है तो कास्ट करें, वरना उन्हें बाहर जाने का रास्ता पता है। बाद में पता चली फिल्म की सच्चाई मदालसा ने बताया कि वह तुरंत वहां से चली गईं। कुछ दिनों बाद जब उन्होंने उस फिल्म की कास्टिंग से जुड़ी खबरें पढ़ीं, तो उन्हें एक और सच पता चला। जिस लड़की को उस रोल के लिए चुना गया था, वह असल में उस डायरेक्टर को डेट कर रही थी। मदालसा ने कहा कि उस वक्त उन्हें समझ आया कि वहां प्रोफेशनल काम से ज्यादा कुछ और ही चल रहा था। साउथ फिल्मों से की थी करियर की शुरुआत मदालसा शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2009 में तेलुगु फिल्म ‘फिटिंग मास्टर’ से की थी। इसके बाद उन्होंने कई साउथ इंडियन फिल्मों में काम किया। साल 2020 में उन्हें स्टार प्लस के शो ‘अनुपमा’ में काव्या के किरदार से घर-घर में पहचान मिली। हालांकि, कुछ समय पहले ही उन्होंने इस शो को अलविदा कह दिया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Akshay Kumar Daughter Nude Photo Demand

Akshay Kumar Daughter Nude Photo Demand

4 मिनट पहले कॉपी लिंक मामला 2025 में सामने आया था, जिसके बारे में अक्षय ने खुद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बताया था। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की बेटी से न्यूड तस्वीरें मांगने से जुड़े मामले में महाराष्ट्र की साइबर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। महाराष्ट्र साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) यशस्वी यादव ने शुक्रवार को गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जांच के बाद आरोपी को हिरासत में लिया गया। महाराष्ट्र साइबर डिपार्टमेंट ने मुंबई के आर.डी. नेशनल कॉलेज में साइबर अवेयरनेस पर एक स्पेशल सेशन भी ऑर्गनाइज किया। इस दौरान ADGP यशस्वी यादव ने बताया कि अक्षय की बेटी ने हिम्मत दिखाते हुए तुरंत अपने परिवार को इस बारे में बताया, जिसके बाद मामला साइबर पुलिस तक पहुंचा और कार्रवाई की गई। ADGP यशस्वी यादव साइबर अवेयरनेस कार्यक्रम में घटना के बारे में बताते हुए। इस दौरान अक्षय कुमार का अक्टूबर 2025 का एक पुराना वीडियो भी चलाया गया, जिसमें उन्होंने इस घटना का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि शुरुआत में गेम के दौरान सामान्य बातचीत हुई, लेकिन बाद में अजनबी ने पहले लोकेशन पूछी, फिर जेंडर पूछा और उसके बाद न्यूड फोटो भेजने की मांग की। पिछले साल अक्षय ने घटना के बारे में बताया था पिछले साल अक्षय ने बताया था कि ऑनलाइन गेम खेलते वक्त उनकी बेटी से न्यूड फोटोज मांगी गई थी। 3 अक्टूबर 2025 को मुंबई पुलिस के ‘साइबर अवेयरनेस मंथ 2025’ के उद्घाटन कार्यक्रम में अक्षय कुमार पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। जहां एक्टर ने कहा था, मैं आप सभी को एक छोटी-सी घटना बताना चाहता हूं, जो कुछ महीने पहले मेरे घर पर हुई थी। मेरी बेटी एक वीडियो गेम खेल रही थी और कुछ ऐसे वीडियो गेम्स होते हैं जिन्हें आप किसी के साथ ऑनलाइन खेल सकते हैं। उस समय वह एक अनजान व्यक्ति के साथ खेल रही थी। जब आप गेम खेलते हैं, तो वहां से कभी-कभी मैसेज आने लगते हैं। एक मैसेज आया तुम लड़का हो या लड़की? मेरी बेटी ने जवाब दिया लड़की। उसके बाद उस व्यक्ति ने मैसेज भेजा कि क्या तुम अपनी न्यूड तस्वीरें भेज सकती हो? उसने तुरंत गेम बंद कर दिया और जाकर अपनी मां ट्विंकल को बताया। यहीं से चीजें शुरू होती हैं। यह भी साइबर क्राइम का हिस्सा है। मुंबई पुलिस के साइबर अवेयरनेस कार्यक्रम में पत्रिका का भी विमोचन हुआ था। अक्षय कुमार ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से कहा था कि हमारे महाराष्ट्र राज्य में सातवीं, आठवीं, नौवीं और दसवीं कक्षा के बच्चों के लिए हर हफ्ते एक ‘साइबर पीरियड’ होना चाहिए, जिसमें उन्हें इस बारे में समझाया जाए। अक्षय और ट्विंकल के दो बच्चे एक बेटा और बेटी हैं। अक्षय कुमार की बेटी करीब 13 साल की हैं। एक्टर अक्सर मीडिया की नजरों से अपनी बेटी को सुरक्षित रखते हैं। हालांकि, वे कभी-कभार सोशल मीडिया पर बेटी के साथ फोटोज भी शेयर करते हैं, लेकिन ज्यादातर तस्वीरों में बेटी का चेहरा छुपा होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Premium Phone Demand Soars; ₹80K+ Segment Sees 37% Growth

Premium Phone Demand Soars; ₹80K+ Segment Sees 37% Growth

Hindi News Business Oppo India Head: Premium Phone Demand Soars; ₹80K+ Segment Sees 37% Growth नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक ओप्पो के भारत में 11 साल के सफर और 10 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों के भरोसे के साथ कंपनी अब अपनी रणनीति बदल रही है। आखिर क्यों अब लोग सस्ते फोन के बजाय प्रीमियम और महंगे फोन पसंद कर रहे हैं? और क्या आने वाले समय में मोबाइल की कीमतें कम होंगी? इन सभी सवालों पर ओप्पो इंडिया कम्युनिकेशन हेड गोल्डी पटनायक ने खुलकर बात की। पढ़ें इंटरव्यू के मुख्य अंश… सवाल: भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे कॉम्पिटिटिव स्मार्टफोन बाजारों में से एक बना हुआ है। ओप्पो के नजरिए से देखें तो पिछले पांच सालों में कामयाबी के पैमाने किस तरह बदले हैं? जवाब 1 : भारत में हमें 11 साल से ज्यादा हो चुके हैं और हमारे पास 10 करोड़ से ज्यादा यूजर्स का बेस है। हमने इस कड़े मुकाबले वाले मार्केट को करीब से बदलते देखा और खुद को उसी हिसाब से ढाला। पांच साल पहले कामयाबी का मतलब बड़े पैमाने पर सेल, डिस्ट्रीब्यूशन और कम कीमतें था। तब ब्रांड्स का ध्यान हर सेगमेंट तक पहुंच और ऑफलाइन मौजूदगी पर था। आज मार्केट मैच्योर है। अब लोग प्रीमियम फोन की तरफ बढ़ रहे हैं और फोन लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक अब सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि वैल्यू देखते हैं। स्मार्टफोन की भूमिका बदल गई है, खासकर युवाओं के लिए। यह अब सिर्फ डिवाइस नहीं, बल्कि खुद को एक्सप्रेस करने का जरिया है। सवाल 2 : पिछले कुछ सालों में भारत के स्मार्टफोन मार्केट में कई रेगुलेटरी और मार्केट बदलाव आए हैं। इसे देखते हुए ओप्पो ने अपनी लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी में क्या बदलाव किए हैं? जवाब: स्मार्टफोन का इस्तेमाल बदल गया है। 5G, AI और बदलती लाइफस्टाइल ने इसे डायनेमिक बना दिया है। UPI पेमेंट, OTT पर फिल्में, गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन—सब में स्मार्टफोन रोजमर्रा का हिस्सा है। ओप्पो में हम इन बदलावों, खासकर युवाओं की आदतों को ट्रैक कर उन्हें प्रोडक्ट्स में शामिल करते हैं। सवाल 3 : सैमसंग और एप्पल जैसे बड़े खिलाड़ियों से मिल रही टक्कर के बीच, प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कंपनी का क्या प्लान है? जवाब: भारत में प्रीमियम सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। लोग ऐसे फोन चाहते हैं जिनमें कैमरा, परफॉरमेंस और डिजाइन फ्लैगशिप लेवल का हो। ओप्पो के लिए कैमरा और इमेजिंग खास रहे हैं, खासकर Find X और Reno सीरीज में। फोकस पोर्ट्रेट फोटोग्राफी पर है। इसके लिए भारतीय यूजर्स के हिसाब से कैमरा ट्यून किया जाता है, जिसमें LUMO इमेज इंजन और हैसलब्लैड की पार्टनरशिप मदद करती है। ColorOS और AI फोन को स्मूथ और स्मार्ट बनाते हैं। सवाल 4: क्या आपको लगता है कि भारत धीरे-धीरे फ्लैगशिप स्मार्टफोन मार्केट बन रहा है? या मिड-प्रीमियम कैटेगरी ही सबसे ज्यादा एक्टिव रहेगी? जवाब: दोनों सेगमेंट की अपनी जगह है। अहम यह है कि युवा पहला स्मार्टफोन खरीदते समय क्या सोचते हैं। IDC के मुताबिक, 2025 में प्रीमियम सेगमेंट 37% बढ़ा, जबकि मिड-प्रीमियम 23% बढ़ा। कई लोगों के लिए फ्लैगशिप फोन खरीदना बड़ी उपलब्धि है, जो उनकी पर्सनैलिटी और काम से जुड़ा है। इसमें कैमरा, परफॉरमेंस और डिजाइन अहम हैं। EMI, एक्सचेंज और ऑफर्स से फ्लैगशिप खरीदना आसान हुआ है। सवाल 4: आज स्मार्टफोन तेजी से AI-ड्रिवन हो रहे हैं। ओप्पो नई टेक्नोलॉजी और यूजर की प्राइवेसी के बीच कैसे तालमेल बिठा रहा है? जवाब: ओप्पो के लिए AI एक्स्ट्रा फीचर नहीं, बल्कि डिजाइन का हिस्सा है। हमने AI पहले ही अपना लिया था, चाहे HyperTone इंजन हो या बैटरी और प्रोडक्टिविटी फीचर्स। हमारा फोकस AI इमेजिंग, क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी पर है। मकसद AI को असल जिंदगी में उपयोगी बनाना है। प्राइवेसी के लिए ‘प्राइवेट कंप्यूटिंग क्लाउड’ से जरूरी डेटा सुरक्षित रखा जाता है। सवाल 5: हाल ही में, आपकी कंपनी ने चिप की कमी के कारण मोबाइल की कीमतें बढ़ाई थीं। क्या चिप की सप्लाई ठीक होने के बाद कीमतें फिर से कम होने की उम्मीद कर सकते हैं? जवाब: इंडस्ट्री में लागत और सप्लाई की चुनौतियां हैं, लेकिन फोकस ग्राहकों को ज्यादा वैल्यू देने पर है। कीमतों पर फैसला इनोवेशन, क्वालिटी और पहुंच को ध्यान में रखकर होगा। सवाल 6: स्मार्टवॉच और ईयरबड्स सेगमेंट में आप अभी सैमसंग और रेडमी जैसे मुकाबले में पीछे हैं। क्या इस कैटेगरी में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का कोई प्लान है? जवाब: ओप्पो इंडिया के पोर्टफोलियो में स्मार्टफोन, टैबलेट और ईयरबड्स हैं, जिनमें ग्रोथ की गुंजाइश है। 2026 में लक्ष्य इन कैटेगरीज में पकड़ मजबूत करना है। फिलहाल फोकस मौजूदा प्रोडक्ट्स में नई टेक्नोलॉजी लाने और उन्हें बेहतर बनाने पर है। इसी आधार पर वियरेबल मार्केट में धीरे-धीरे विस्तार होगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Asia Conflict Hits Supply; Petrol-Diesel Demand Jumps 8%

West Asia Conflict Hits Supply; Petrol-Diesel Demand Jumps 8%

Hindi News Business West Asia Conflict Hits Supply; Petrol Diesel Demand Jumps 8% | LPG Consumption Drops 13% नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव की वजह से मार्च में देश की रसोई गैस (LPG) सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। आधिकारिक डेटा के मुताबिक, पिछले महीने यानी मार्च में घरेलू LPG की खपत में 13% की भारी गिरावट दर्ज की गई। सप्लाई में आई इस कमी की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग का बंद होना और खाड़ी देशों से सप्लाई प्रभावित होना है। मार्च में 2.379 मिलियन टन रही खपत पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में LPG की खपत 2.379 मिलियन टन रही। यह पिछले साल इसी अवधि में हुई 2.729 मिलियन टन खपत के मुकाबले करीब 13% कम है। भले ही मार्च में खपत कम रही हो, लेकिन पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में LPG की कुल खपत 6% बढ़कर 33.212 मिलियन टन रही है। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा लकड़ी और अन्य प्रदूषित ईंधनों की जगह स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। जंग के कारण आयात में आई रुकावट भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60% हिस्सा आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाली सप्लाई बाधित होने के बाद सरकार ने घरेलू रसोई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटलों और उद्योगों जैसी कॉमर्शियल संस्थाओं की सप्लाई में कटौती की है। कॉमर्शियल और घरेलू गैस बिक्री के आंकड़े PPAC डेटा के मुताबिक, मार्च में घरों को बेचे गए घरेलू LPG सिलेंडर की बिक्री में 8.1% की गिरावट आई और यह 2.219 मिलियन टन रही। वहीं नॉन-डोमेस्टिक या कॉमर्शियल यूजर्स की बिक्री में लगभग 48% की कमी आई है। थोक LPG की बिक्री में तो 75.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, सरकार का दावा है कि LPG की सप्लाई सामान्य है और घरेलू मांग पूरी की जा रही है, लेकिन डेटा इसके उलट स्थिति दिखा रहा है। उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को निर्देश सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिए हैं कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के बजाय LPG आउटपुट बढ़ाने पर ध्यान दें। इसके चलते मार्च में घरेलू LPG उत्पादन बढ़कर 1.4 मिलियन टन हो गया, जो पिछले साल 1.1 मिलियन टन था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) के दौरान कुल LPG उत्पादन 13.1 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले दो सालों में यह 12.8 मिलियन टन था। पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ी जंग के कारण जहां LPG और विमान ईंधन (ATF) प्रभावित हुए हैं, वहीं पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी तेजी देखी गई है। पेट्रोल: इसकी बिक्री 7.6% बढ़कर 3.78 मिलियन टन रही। डीजल: इसकी खपत 8.1% बढ़कर 8.727 मिलियन टन तक पहुंच गई। ATF: खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के रद्द होने से जेट फ्यूल (ATF) की खपत लगभग स्थिर रही। क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और यह क्यों जरूरी है? यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का एक संकरा जलमार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े निर्यातक इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। यहां तनाव होने से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर सीधा असर पड़ता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

West Asia Conflict Hits Supply; Petrol-Diesel Demand Jumps 8%

West Asia Conflict Hits Supply; Petrol-Diesel Demand Jumps 8%

Hindi News Business West Asia Conflict Hits Supply; Petrol Diesel Demand Jumps 8% | LPG Consumption Drops 13% नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग की वजह से मार्च में देश की रसोई गैस (LPG) सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। आधिकारिक डेटा के मुताबिक, पिछले महीने यानी मार्च में घरेलू LPG की खपत में 13% की भारी गिरावट दर्ज की गई। सप्लाई में आई इस कमी की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलमार्ग का बंद होना और खाड़ी देशों से सप्लाई प्रभावित होना है। मार्च में 2.379 मिलियन टन रही खपत पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में LPG की खपत 2.379 मिलियन टन रही। यह पिछले साल इसी अवधि में हुई 2.729 मिलियन टन खपत के मुकाबले करीब 13% कम है। भले ही मार्च में खपत कम रही हो, लेकिन पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में LPG की कुल खपत 6% बढ़कर 33.212 मिलियन टन रही है। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा लकड़ी और अन्य प्रदूषित ईंधनों की जगह स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। जंग के कारण आयात में आई रुकावट भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60% हिस्सा आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मार्ग प्रभावी रूप से बंद हो गया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाली सप्लाई बाधित होने के बाद सरकार ने घरेलू रसोई की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए होटलों और उद्योगों जैसी कॉमर्शियल संस्थाओं की सप्लाई में कटौती की है। कॉमर्शियल और घरेलू गैस बिक्री के आंकड़े PPAC डेटा के मुताबिक, मार्च में घरों को बेचे गए घरेलू LPG सिलेंडर की बिक्री में 8.1% की गिरावट आई और यह 2.219 मिलियन टन रही। वहीं नॉन-डोमेस्टिक या कॉमर्शियल यूजर्स की बिक्री में लगभग 48% की कमी आई है। थोक LPG की बिक्री में तो 75.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, सरकार का दावा है कि LPG की सप्लाई सामान्य है और घरेलू मांग पूरी की जा रही है, लेकिन डेटा इसके उलट स्थिति दिखा रहा है। उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरियों को निर्देश सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिए हैं कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के बजाय LPG आउटपुट बढ़ाने पर ध्यान दें। इसके चलते मार्च में घरेलू LPG उत्पादन बढ़कर 1.4 मिलियन टन हो गया, जो पिछले साल 1.1 मिलियन टन था। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) के दौरान कुल LPG उत्पादन 13.1 मिलियन टन रहा, जबकि पिछले दो सालों में यह 12.8 मिलियन टन था। पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ी जंग के कारण जहां LPG और विमान ईंधन (ATF) प्रभावित हुए हैं, वहीं पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी तेजी देखी गई है। पेट्रोल: इसकी बिक्री 7.6% बढ़कर 3.78 मिलियन टन रही। डीजल: इसकी खपत 8.1% बढ़कर 8.727 मिलियन टन तक पहुंच गई। ATF: खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों के रद्द होने से जेट फ्यूल (ATF) की खपत लगभग स्थिर रही। क्या है ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ और यह क्यों जरूरी है? यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का एक संकरा जलमार्ग है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े निर्यातक इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। यहां तनाव होने से भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पर सीधा असर पड़ता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Nifty Rallies 35 Points to 24,250; FMCG Shares in Demand

Nifty Rallies 35 Points to 24,250; FMCG Shares in Demand

Hindi News Business Nifty Rallies 35 Points To 24,250; FMCG Shares In Demand | Sensex Up 150 Points नई दिल्ली26 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी गुरुवार, 16 अप्रैल को सेंसेक्स 150 अंक (0.21%) की तेजी के साथ 78,100 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.13%) की तेजी है, ये 24,250 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में FMCG में सबसे ज्यादा खरीदारी है, जबकि मेटल के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली है। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 शेयरों में तेजी और 14 शेयरों में गिरावट है। एशियन मार्केट में तेजी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 6184 -42 0.67% निक्केई (जापान) 58931 -587 0.99% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 26029 -366 1.38% 16 अप्रैल को अमेरिकी मार्केट में तेजी रही इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 48579 115 0.24% नैस्डैक 24103 87 0.36% S&P 500 7041 18 0.26% सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,940 | 23,850 | 23,462 | 23,330 | 22,857 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,143 | 24,387 | 24,450 | 24,538 | 24,650 | 25,002 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। गुरुवार को सेंसेक्स 123 अंक चढ़कर बंद हुआ था शेयर बाजार में 15 अप्रैल को गिरावट रही। सेंसेक्स 123 अंक (0.16%) गिरकर 77,989 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 35 अंक (0.14%) बढ़कर 24,197 पर आ गया। कारोबार में मेटल और आईटी शेयरों में खरीदारी रही, जबकि ऑटो और प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Nifty Rallies 35 Points to 24,250; FMCG Shares in Demand

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Hindi News Business Nifty Rallies 35 Points To 24,250; FMCG Shares In Demand | Sensex Up 150 Points नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी गुरुवार, 16 अप्रैल को सेंसेक्स 150 अंक (0.21%) की तेजी के साथ 78,100 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 50 अंकों (0.13%) की तेजी है, ये 24,250 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में FMCG में सबसे ज्यादा खरीदारी है, जबकि मेटल के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली है। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 शेयरों में तेजी और 14 शेयरों में गिरावट है। एशियन मार्केट में तेजी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 6184 -42 0.67% निक्केई (जापान) 58931 -587 0.99% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 26029 -366 1.38% 16 अप्रैल को अमेरिकी मार्केट में तेजी रही इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 48579 115 0.24% नैस्डैक 24103 87 0.36% S&P 500 7041 18 0.26% सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,940 | 23,850 | 23,462 | 23,330 | 22,857 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,143 | 24,387 | 24,450 | 24,538 | 24,650 | 25,002 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। गुरुवार को सेंसेक्स 123 अंक चढ़कर बंद हुआ था शेयर बाजार में 15 अप्रैल को गिरावट रही। सेंसेक्स 123 अंक (0.16%) गिरकर 77,989 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 35 अंक (0.14%) बढ़कर 24,197 पर आ गया। कारोबार में मेटल और आईटी शेयरों में खरीदारी रही, जबकि ऑटो और प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Displaced Demand Justice | Officer Bribe Scam; Compensation Cheating

Displaced Demand Justice | Officer Bribe Scam; Compensation Cheating

45 हजार करोड़ रुपए के केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का सेंटर पॉइंट-डौढ़न (दौधन) बांध। सरकार इसे बुंदेलखंड के लिए ‘अमृत’ बता रही है। लेकिन इस बांध को बनाने के लिए जिन लोगों को उजाड़ा जा रहा है, वे 42 डिग्री की तपिश में अधनंगे हाल में 12 दिनों से पंच तत्व सत्य . ये लोग नदी के बीच फांसी का फंदा लगाकर खड़े हो जाते हैं और चिताओं पर लेटकर विरोध जताते हैं। इनकी जुबान पर सरकारी धोखे की अलग-अलग कहानियां हैं। किसी को मकान के बदले 25 हजार रुपए का मुआवजा मिला है, तो किसी को 14 हजार। राहत पैकेज के 12.5 लाख रुपए हासिल करने के लिए 2 लाख रुपए एडवांस देना पड़ा है। अजोध्या प्रसाद कहते हैं- हम जिंदा हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में हमारी मौत हो चुकी है। रिश्वत नहीं दी, तो हमें कागजों पर मरा हुआ घोषित कर दिया गया। दैनिक भास्कर ने ग्राउंड पर पहुंचकर समझा कि ये लोग कौन हैं? क्या ये महज प्रतीकात्मक प्रदर्शन है या वाकई इनसे इनके हिस्से का हक छीना गया है? केन और बेतवा नदी को 220 किमी लंबी नहर से जोड़ने का प्रोजेक्ट है। छतरपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर है दौधन। पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में केन नदी पर ये डैम बन रहा है। इसके लिए यहां आसपास के करीब 20 गांव को हटाया जाना है। जाहिर है गांव हैं तो यहां इंसान भी हैं और उनकी पीढ़ियों की निशानी भी। जमीन भी, जायदाद भी, जानवर भी और पुरखों की यादें भी। लेकिन सरकारी अफसरों के लिए ये सिर्फ चंद रुपयों के पैकेज हैं। विस्थापितों के हिस्से में सरकारी मुलाजिमों का हिस्सा पहले से रिजर्व है। ज्यादातर विस्थापित आदिवासी हैं। कम पढ़े-लिखे हैं। इन्हें न समग्र आईडी का मतलब समझ आता है न मार्कशीट पर अंकित जन्मतिथि का। लेकिन मुआवजा हासिल करने के लिए ये सब जरुरी है। इन्हीं दस्तावेजों की दरकार सरकारी बाबुओं के लिए कमाई की पक्की गारंटी है। प्रदर्शन में बड़ी तादाद में प्रभावित शामिल हो रहे हैं। आरोप-पहले भ्रष्टाचार किया अब अत्याचार कर रहे अफसर अनशन का सबसे प्रमुख चेहरा है-35 साल का नौजवान अमित भटनागर। पानी के बीच घंटों से फांसी का फंदा लटकाकर खड़े अमित कहते हैं- प्रशासन ने यहां खूब भ्रष्टाचार किया है। भ्रष्टाचार को छिपाने अब हम पर अत्याचार कर रहे हैं। यदि आपको समग्र आईडी चाहिए या वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना है तो पैसा लगता है। मुआवजे के लिए सूची में नाम जुड़वाने का भी पैसा लगता है। फिर पैसा आ जाए तो पैसा लेने के लिए फिर रिश्वत देनी पड़ती है। दलालों का गिरोह काम कर रहा, लोग कर्जदार हो गए अमित ने बताया कि यहां लोग कर्जदार हो गए हैं। उनका घर भी गया और कर्ज भी चढ़ गया। सत्ता दल के नेताओं और दलालों का यहां एक गिरोह है। लोकायुक्त ने हाल ही में एक पटवारी को यहां एक आदिवासी महिला से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। मुआवजे में चार तरह की गड़बड़ी 1. राहत पैकेज के लिए 2.50 लाख एडवांस रिश्वत विस्थापितों को राहत पैकेज के तहत 12.50 लाख रुपए देने का प्रावधान है। लेकिन पटवारी और ग्राम सचिव इसके लिए लोगों से 2 से 4 लाख रुपए तक एडवांस रिश्वत मांग रहे हैं। जिन्होंने रिश्वत नहीं दी, उनके नाम मुआवजा सूची में शामिल ही नहीं किए गए। 2. गांव वालों को प्रति एकड़ 3 लाख, बाहरियों को 80 लाख दूसरी बड़ी गड़बड़ी यह है कि जिस गांव में स्थानीय लोगों को 3 लाख रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया गया, वहीं बाहरी लोगों ने किसानों से जमीन खरीदकर उसे डायवर्टेड करा लिया। इसके बाद उसी जमीन को आवासीय प्लॉट मानकर 80 लाख रुपए के हिसाब से मुआवजा दिया गया। सब प्रशासन की मिलीभगत से हुआ। विरोध के बीच प्रोजेक्ट का काम जारी है। 3. आदमी जिंदा है, लेकिन सरकार की सूची में मृत कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें जिंदा व्यक्ति खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। उसे बताया गया कि उसका नाम सूची में नहीं है, बल्कि उसे मृत घोषित कर दिया गया है। 4. चार बच्चों के पिता कहां से लाएं बालिग होने का प्रमाण पत्र ये आदिवासी गांव हैं। यहां जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं है। जो लोग कभी स्कूल ही नहीं गए, वे स्कूल का रिकॉर्ड कहां से लाएं? चार बच्चों के पिता से भी बालिग होने का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। ऐसे लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने साल बाद अब ऐसा प्रमाण पत्र कहां से लाएं? पलकुंआ गांव के अनिल कहते हैं कि 4 एकड़ के लिए 20 लाख मिले। हम यही जमीन यदि बमीठा में या छतरपुर में लें तो हम इतने में एक एकड़ जमीन भी नहीं मिल पाएगी। सरकार कह रही थी कि 4 गुना देंगे। महिलाएं भी प्रदर्शन के दौरान पानी में खड़ी नजर आईं। अब समझिए लोगों का दर्द- रिश्वत देने के पैसे नहीं, इसलिए मुआवजा नहीं मिला आंदोलन में शामिल होने आईं पन्ना जिले के खमरी गांव की कमला आदिवासी कहती हैं कि हमारे पास 5 एकड़ जमीन थी। उसका 14 लाख रुपए मुआवजा मिला है। जहां भी जाते हैं, वहां 8 से 10 लाख रुपए प्रति एकड़ से कम में जमीन नहीं मिलती। हमारे पति चार भाई हैं। हम कैसे जीवन चला पाएंगे? घर-मकान का कोई मुआवजा नहीं मिला। हमने बाल-बच्चों को छोड़कर धूप-पानी में मेहनत कर मकान बनाया था, सब बेकार हो गया। छतरपुर के मैनारी गांव की कल्लू बाई कहती हैं कि हमारे ससुर जी तीन भाई हैं। 18 एकड़ जमीन जा रही है। अभी तक कोई पैसा नहीं मिला है। हमारे पास रिश्वत देने के लिए पैसा ही नहीं है। कहा गया है कि काम बन जाएगा तो पैसा देना पड़ेगा। कहा गया दिल्ली जाओगे तो जेल भेज देंगे हिसाबी राजपूत कहती हैं कि हम दिल्ली जा रहे थे, लेकिन हमें वहां भी नहीं जाने दिया गया। कहा गया कि अगर दिल्ली जाओगे तो जेल भेज दिया जाएगा। वहां से लौटे तो फिर यहीं बांध पर अनशन पर बैठ गए। धीरज बाई कहती हैं कि 11 दिन से यहीं हैं। नमक-रोटी खाकर दिन गुजार रहे हैं।

Kangana Supports Deepikas 8-Hour Work Demand

Kangana Supports Deepikas 8-Hour Work Demand

1 घंटे पहले कॉपी लिंक फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों (वर्किंग आवर्स) को लेकर चल रही बहस के बीच एक्ट्रेस कंगना रनोट ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। हाल ही में खबरें आई थीं कि दीपिका पादुकोण ने अपनी शर्तों और फिक्स्ड वर्किंग शेड्यूल के कारण कुछ बड़े बजट के प्रोजेक्ट्स छोड़ दिए हैं। दीपिका की मांग है कि वे दिन में केवल 8 घंटे ही काम करेंगी। अब इस मामले पर कंगना ने दीपिका का पक्ष लेते हुए कहा है कि उनका कहना बिल्कुल सही है और उन्होंने यह मुकाम मेहनत से कमाया है। कंगना बोलीं- अब दीपिका रिप्लेसेबल नहीं हैं ANI को दिए एक इंटरव्यू में कंगना रनोट ने कहा कि समय के साथ प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। कंगना ने कहा मुझे नहीं लगता कि इस बात पर कोई विवाद होना चाहिए। दीपिका आज जिस मुकाम पर हैं, वह उन्होंने अपनी मेहनत से हासिल किया है। वे अब एक मां हैं, उनकी एक बेटी है। अगर आज वे 8 घंटे काम करना चाहती हैं, तो उन्होंने यह हक कमाया है। कंगना ने साफ किया कि जब कोई नया कलाकार होता है, तो उसे रिप्लेस (बदला) किया जा सकता है, लेकिन दीपिका जैसी स्टार के लिए मेकर्स को उनके समय के हिसाब से तालमेल बिठाना चाहिए। पुराने दिनों में 12-14 घंटे करती थीं काम कंगना ने अपने और दीपिका के शुरुआती संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में वे दोनों ही सफलता के लिए काफी जुनूनी थीं। कंगना ने कहा, एक वक्त था जब हम 12 से 14 घंटे की शिफ्ट से कम पर राजी नहीं होते थे। दीपिका ने एक बार मुझसे इम्तियाज अली की फिल्म के दौरान कहा था कि वे 12 घंटे काम कर रही हैं। मैंने तब कहा था कि मैं 10 घंटे काम करती हूं। तब हमारे अंदर एक भूख थी, हम कामयाब होना चाहते थे। महिलाओं पर काम के दबाव पर जताई चिंता वर्क-लाइफ बैलेंस पर बात करते हुए कंगना ने कहा कि आज के समय में महिलाओं पर बहुत ज्यादा दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, हम अपनी महिलाओं पर बच्चों के साथ-साथ दोगुना काम करने का बोझ डाल रहे हैं। फिर हम गिरती फर्टिलिटी रेट और टूटती शादियों की बात करते हैं। अगर दीपिका जैसी टॉप एक्ट्रेस अपने परिवार और काम के बीच तालमेल बिठाने के लिए समय मांग रही हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म छोड़ने की थी चर्चा बता दें कि पिछले साल ऐसी खबरें आई थीं कि दीपिका पादुकोण ने डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ छोड़ दी है। इसका मुख्य कारण काम करने की शर्तें और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग को बताया गया था। इसके बाद से ही सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई थी कि क्या एक्टर्स को शिफ्ट के घंटे तय करने चाहिए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔