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EHS Sleep Disorder; Exploding Head Syndrome Symptoms Reason Treatment Explained

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52 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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कभी-कभी सोते वक्त या नींद से ठीक पहले अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई देती है। पल भर के लिए ऐसा लगता है, जैसे कोई बम फट गया हो, दरवाजा जोर से बंद हुआ हो या बिजली गिरी हो। डर से नींद टूट जाती है और हार्ट बीट बढ़ जाती है।

यह एक ‘स्लीपिंग कंडीशन’ है, जिसे ‘एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम’ कहते हैं। इसमें सुनाई देने वाली आवाज असली नहीं होती, बल्कि दिमागी भ्रम होता है। इससे घबराहट और नींद टूटने की समस्या हो सकती है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • किन लोगों को ये दिक्कत ज्यादा होती है?
  • कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है?
  • इससे बचाव के तरीके क्या हैं?

सवाल- नींद में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज क्यों सुनाई देती है?

जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर पीयूष गोयल बताते हैं कि सोने और जागने के बीच ब्रेन का कंट्रोल सिस्टम कुछ सेकेंड के लिए इंबैलेंस हो जाता है। उसी समय ब्रेन ऐसे सिग्नल बनाता है, जिससे तेज आवाज का अहसास होता है, जबकि असल में कोई आवाज नहीं होती।

सवाल- क्या यह कोई बीमारी है या ब्रेन का नॉर्मल रिएक्शन है?

जवाब- डॉक्टर पीयूष कहते हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है। यह दिमाग का असामान्य, लेकिन हार्मलेस रिएक्शन है।

  • नींद के दौरान ब्रेन धीरे-धीरे रेस्ट मोड में जाता है।
  • कभी-कभी इसमें रुकावट होती है।
  • ऐसे में ब्रेन अजीब सिग्नल बनाने लगता है।
  • इससे तेज आवाज का भ्रम होता है।
  • मेडिकल टेस्ट में रिपोर्ट नॉर्मल आती है।
  • ब्रेन, नर्व्स या कान में कोई खराबी नहीं मिलती।
  • EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) जैसे टेस्ट भी सामान्य आते हैं।
  • इसलिए डॉक्टर इसे ब्रेन की अस्थायी कंडीशन मानते हैं।
  • ज्यादातर लोगों को यह समस्या जिंदगी में एक-दो बार होती है और अपने आप ठीक हो जाती है।

सवाल- क्या इससे ब्रेन या शरीर को कोई नुकसान होता है?

जवाब- नहीं, इससे कोई नुकसान नहीं होता।

  • इसके कारण ब्रेन में कोई स्ट्रक्चरल डैमेज नहीं होता।
  • दिमाग की नसें, ब्रेन सेल्स और कान सुरक्षित रहते हैं।
  • इस कंडीशन में दर्द नहीं होता।
  • इसमें सिर्फ डर, घबराहट, तेज हार्ट बीट या पसीना आता है।
  • डर के कारण कुछ लोगों की नींद खराब हो सकती है।
  • इसका असर धीरे-धीरे कम हो जाता है।

सवाल- क्या यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है?

जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता। एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम का हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर से सीधा संबंध नहीं है।

  • पहली बार होने पर लोग डर जाते हैं।
  • उन्हें लगता है कि ब्रेन में गंभीर रिएक्शन हुआ है।
  • जबकि मेडिकल टेस्ट में यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होता।
  • सिर्फ तेज आवाज सुनाई देना आमतौर पर बीमारी का संकेत नहीं है।
  • अगर इसके साथ शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में दिक्कत या दर्द जैसे लक्षण हों तो टेस्ट कराना चाहिए।

सवाल- किन लोगों को यह समस्या ज्यादा होती है?

जवाब- यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

डॉक्टर मानते हैं कि स्ट्रेस और थकान से ब्रेन सोते समय पूरी तरह रेस्ट मोड में नहीं जा पाता। इससे नींद का बैलेंस बिगड़ता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी हो सकता है।

सवाल- इस कंडीशन में घबराने की बजाय क्या करना चाहिए?

जवाब- सबसे पहले यह समझें कि यह खतरनाक कंडीशन नहीं है। इसलिए–

  • खुद को शांत रखें।
  • गहरी सांस लें।
  • डर से दिल की धड़कन तेज हो सकती है। इसके लिए तैयार रहें।
  • रोज एक तय समय पर सोएं।
  • रोज 7-8 घंटे की क्वालिटी स्लीप लें।
  • सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रखें।
  • रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करें।
  • डीप ब्रीदिंग, ध्यान या हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • ज्यादा थकान और तनाव से बचें।

अगर आवाज के बाद नींद टूट जाए तो खुद को याद दिलाएं कि यह ब्रेन का सिर्फ इंबैलेंस्ड रिएक्शन भर है, असली धमाका नहीं। धीरे-धीरे ब्रेन इस डर से बाहर आ जाता है। सवाल- कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है?

जवाब- अगर यह समस्या बार-बार होने लगे तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। ग्राफिक में देखिए कब डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए-

कुछ कंडीशंस में डॉक्टर EEG, MRI या स्लीप टेस्ट करा सकते हैं। इससे यह पक्का किया जाता है कि कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है। ज्यादातर मामलों में जांच सामान्य आती है, जिससे मरीज को मानसिक राहत मिलती है।

सवाल- क्या इसमें दवाओं की जरूरत पड़ती है या ये अपने आप ठीक हो जाती है?

जवाब- अधिकतर मामलों में यह समस्या बिना दवा के ठीक हो जाती है। इसके अलावा-

  • सिर्फ स्लीप क्वालिटी सुधारने और स्ट्रेस कम करने से भी आराम मिलता है।
  • अगर ये समस्या बार-बार हो और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो, तब डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं।
  • ये दवाएं आमतौर पर नर्व्स को रिलेैक्स करने के लिए होती हैं। जैसे कुछ एंटीडिप्रेसेंट या एंटी-सीजर दवाएं।
  • ज्यादातर लोगों को सिर्फ सही जानकारी और लाइफस्टाइल सुधार से राहत मिल जाती है।

सवाल- इस समस्या से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए पूरी नींद लेना सबसे जरूरी है। साथ ही कुछ और बाताें का ख्याल रखें। जैसेकि-

  • रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
  • सोने से पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद करें।
  • कैफीन, शराब और स्मोकिंग कम करें।
  • बहुत ज्यादा थकान हो तो तुरंत न सोएं।
  • पहले थोड़ा रिलैक्स करें।
  • तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या वॉक करें।
  • पीठ के बल सोने से कुछ लोगों में समस्या बढ़ती है, इसलिए साइड में सोने की कोशिश करें।
  • अगर दवाएं ले रहे हैं, तो उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक बंद न करें।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- वरुण धवन की बेटी को DDH: डॉक्टर से जानें क्या है ये बीमारी, इसके लक्षण, डायग्नोसिस, सही इलाज और जरूरी सावधानियां

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH डायग्नोज हुआ था। DDH यानी ‘डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ हिप।’ यह कंडीशन हिप जॉइंट के पूरी तरह विकसित न हो पाने से बनती है। आगे पढ़िए…

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52 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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कभी-कभी सोते वक्त या नींद से ठीक पहले अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई देती है। पल भर के लिए ऐसा लगता है, जैसे कोई बम फट गया हो, दरवाजा जोर से बंद हुआ हो या बिजली गिरी हो। डर से नींद टूट जाती है और हार्ट बीट बढ़ जाती है।

यह एक ‘स्लीपिंग कंडीशन’ है, जिसे ‘एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम’ कहते हैं। इसमें सुनाई देने वाली आवाज असली नहीं होती, बल्कि दिमागी भ्रम होता है। इससे घबराहट और नींद टूटने की समस्या हो सकती है।

इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • किन लोगों को ये दिक्कत ज्यादा होती है?
  • कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है?
  • इससे बचाव के तरीके क्या हैं?

सवाल- नींद में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज क्यों सुनाई देती है?

जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर पीयूष गोयल बताते हैं कि सोने और जागने के बीच ब्रेन का कंट्रोल सिस्टम कुछ सेकेंड के लिए इंबैलेंस हो जाता है। उसी समय ब्रेन ऐसे सिग्नल बनाता है, जिससे तेज आवाज का अहसास होता है, जबकि असल में कोई आवाज नहीं होती।

सवाल- क्या यह कोई बीमारी है या ब्रेन का नॉर्मल रिएक्शन है?

जवाब- डॉक्टर पीयूष कहते हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है। यह दिमाग का असामान्य, लेकिन हार्मलेस रिएक्शन है।

  • नींद के दौरान ब्रेन धीरे-धीरे रेस्ट मोड में जाता है।
  • कभी-कभी इसमें रुकावट होती है।
  • ऐसे में ब्रेन अजीब सिग्नल बनाने लगता है।
  • इससे तेज आवाज का भ्रम होता है।
  • मेडिकल टेस्ट में रिपोर्ट नॉर्मल आती है।
  • ब्रेन, नर्व्स या कान में कोई खराबी नहीं मिलती।
  • EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) जैसे टेस्ट भी सामान्य आते हैं।
  • इसलिए डॉक्टर इसे ब्रेन की अस्थायी कंडीशन मानते हैं।
  • ज्यादातर लोगों को यह समस्या जिंदगी में एक-दो बार होती है और अपने आप ठीक हो जाती है।

सवाल- क्या इससे ब्रेन या शरीर को कोई नुकसान होता है?

जवाब- नहीं, इससे कोई नुकसान नहीं होता।

  • इसके कारण ब्रेन में कोई स्ट्रक्चरल डैमेज नहीं होता।
  • दिमाग की नसें, ब्रेन सेल्स और कान सुरक्षित रहते हैं।
  • इस कंडीशन में दर्द नहीं होता।
  • इसमें सिर्फ डर, घबराहट, तेज हार्ट बीट या पसीना आता है।
  • डर के कारण कुछ लोगों की नींद खराब हो सकती है।
  • इसका असर धीरे-धीरे कम हो जाता है।

सवाल- क्या यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है?

जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता। एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम का हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर से सीधा संबंध नहीं है।

  • पहली बार होने पर लोग डर जाते हैं।
  • उन्हें लगता है कि ब्रेन में गंभीर रिएक्शन हुआ है।
  • जबकि मेडिकल टेस्ट में यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होता।
  • सिर्फ तेज आवाज सुनाई देना आमतौर पर बीमारी का संकेत नहीं है।
  • अगर इसके साथ शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में दिक्कत या दर्द जैसे लक्षण हों तो टेस्ट कराना चाहिए।

सवाल- किन लोगों को यह समस्या ज्यादा होती है?

जवाब- यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए-

डॉक्टर मानते हैं कि स्ट्रेस और थकान से ब्रेन सोते समय पूरी तरह रेस्ट मोड में नहीं जा पाता। इससे नींद का बैलेंस बिगड़ता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी हो सकता है।

सवाल- इस कंडीशन में घबराने की बजाय क्या करना चाहिए?

जवाब- सबसे पहले यह समझें कि यह खतरनाक कंडीशन नहीं है। इसलिए–

  • खुद को शांत रखें।
  • गहरी सांस लें।
  • डर से दिल की धड़कन तेज हो सकती है। इसके लिए तैयार रहें।
  • रोज एक तय समय पर सोएं।
  • रोज 7-8 घंटे की क्वालिटी स्लीप लें।
  • सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रखें।
  • रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करें।
  • डीप ब्रीदिंग, ध्यान या हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • ज्यादा थकान और तनाव से बचें।

अगर आवाज के बाद नींद टूट जाए तो खुद को याद दिलाएं कि यह ब्रेन का सिर्फ इंबैलेंस्ड रिएक्शन भर है, असली धमाका नहीं। धीरे-धीरे ब्रेन इस डर से बाहर आ जाता है। सवाल- कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है?

जवाब- अगर यह समस्या बार-बार होने लगे तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। ग्राफिक में देखिए कब डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए-

कुछ कंडीशंस में डॉक्टर EEG, MRI या स्लीप टेस्ट करा सकते हैं। इससे यह पक्का किया जाता है कि कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है। ज्यादातर मामलों में जांच सामान्य आती है, जिससे मरीज को मानसिक राहत मिलती है।

सवाल- क्या इसमें दवाओं की जरूरत पड़ती है या ये अपने आप ठीक हो जाती है?

जवाब- अधिकतर मामलों में यह समस्या बिना दवा के ठीक हो जाती है। इसके अलावा-

  • सिर्फ स्लीप क्वालिटी सुधारने और स्ट्रेस कम करने से भी आराम मिलता है।
  • अगर ये समस्या बार-बार हो और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो, तब डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं।
  • ये दवाएं आमतौर पर नर्व्स को रिलेैक्स करने के लिए होती हैं। जैसे कुछ एंटीडिप्रेसेंट या एंटी-सीजर दवाएं।
  • ज्यादातर लोगों को सिर्फ सही जानकारी और लाइफस्टाइल सुधार से राहत मिल जाती है।

सवाल- इस समस्या से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

जवाब- इसके लिए पूरी नींद लेना सबसे जरूरी है। साथ ही कुछ और बाताें का ख्याल रखें। जैसेकि-

  • रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें।
  • सोने से पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद करें।
  • कैफीन, शराब और स्मोकिंग कम करें।
  • बहुत ज्यादा थकान हो तो तुरंत न सोएं।
  • पहले थोड़ा रिलैक्स करें।
  • तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या वॉक करें।
  • पीठ के बल सोने से कुछ लोगों में समस्या बढ़ती है, इसलिए साइड में सोने की कोशिश करें।
  • अगर दवाएं ले रहे हैं, तो उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक बंद न करें।

……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- वरुण धवन की बेटी को DDH: डॉक्टर से जानें क्या है ये बीमारी, इसके लक्षण, डायग्नोसिस, सही इलाज और जरूरी सावधानियां

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH डायग्नोज हुआ था। DDH यानी ‘डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ हिप।’ यह कंडीशन हिप जॉइंट के पूरी तरह विकसित न हो पाने से बनती है। आगे पढ़िए…

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