Wednesday, 24 Jun 2026 | 07:41 AM

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Ceasefire, Sanctions Relief, Hormuz Reopening and Nuclear Commitments Explained

Ceasefire, Sanctions Relief, Hormuz Reopening and Nuclear Commitments Explained

Hindi News International US Iran Interim MoU Signed: Ceasefire, Sanctions Relief, Hormuz Reopening And Nuclear Commitments Explained वॉशिंगटन डीसी7 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाले डील की पूरी जानकारी दी है। इसके मुताबिक होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। वही, ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है। इसके बदले में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) का फंड बनाया जाएगा। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पॉइंट-1: सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा समझौते के पहले पॅाइंट में कहा गया है कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका की नजर में यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ हुए इस समझौते को कमजोर कर सकती है। इसे इजराइल की चिंताओं को नजरअंदाज करने के रूप में देखा जा रहा है। इजराइल का कहना है कि लेबनान में मौजूद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह बहुत बड़ा खतरा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-2: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे समझौते में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के घरेलू मामलों में दखल भी नहीं देंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों को समझौते का जो हिस्सा पढ़कर सुनाया, उसमें यह बात साफ तौर पर शामिल थी। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते में एक-दूसरे के आंतरिक मामलों से दूर रहने की बात कही गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-3: 60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य अमेरिका और ईरान ने अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने और उसे लागू करने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि, दोनों देशों की सहमति होने पर इस समयसीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। दोनों देशों के नेताओं द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही 60 दिनों की यह समयसीमा शुरू हो गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक 60 दिनों की यह समयसीमा काफी छोटी मानी जा रही है। अमेरिकी अधिकारी भी निजी तौर पर मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा, खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु वार्ताओं में कई साल लग चुके हैं। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने जानबूझकर यह महत्वाकांक्षी समयसीमा तय की है। अगर 60 दिनों के भीतर कोई अंतिम समझौता हो जाता है, तो यह अमेरिका के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से पहले राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है। ऐसे समय में जब उनकी घरेलू लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही है, यह समझौता उन्हें राजनीतिक फायदा भी पहुंचा सकता है। पॉइंट-4: अमेरिका समुद्री नाकाबंदी हटाएगा अमेरिका दस्तखत के बाद ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। यह नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटने के बाद ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान निर्यात कर सकेगा। साथ ही दूसरे देशों से आने वाला माल भी बिना बड़ी रुकावट के ईरान पहुंच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा और राजस्व आना शुरू हो जाएगा, जिससे उसकी मौजूदा आर्थिक मुश्किलें काफी हद तक कम हो सकती हैं। लेकिन इस फैसले का एक दूसरा पहलू भी है। नाकेबंदी हटने से अमेरिका अपने सबसे प्रभावी दबाव के साधनों में से एक खो देगा। पॉइंट-5: होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा समझौते पर हस्ताक्षर होते ही ईरान ने वादा किया है कि वह अपनी पूरी कोशिश करके फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी और इस दौरान जहाजों से कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के इसका मतलब है कि अगले 60 दिनों तक ईरान होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से कोई पैसा नहीं लेगा। लेकिन 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। इसलिए अगर भविष्य में फीस लगाई जाती है, तो यह एक बड़ा बदलाव होगा और होर्मुज से गुजरने वाली वैश्विक समुद्री व्यापार लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-6: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना समझौते के तहत अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) की योजना तैयार करने का वादा किया

Ceasefire, Sanctions Relief, Hormuz Reopening and Nuclear Commitments Explained

Ceasefire, Sanctions Relief, Hormuz Reopening and Nuclear Commitments Explained

Hindi News International US Iran Interim MoU Signed: Ceasefire, Sanctions Relief, Hormuz Reopening And Nuclear Commitments Explained वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाले डील की पूरी जानकारी दी है। इसके मुताबिक होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। वही, ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है। इसके बदले में ईरान के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) का फंड बनाया जाएगा। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पॉइंट-1: सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा समझौते के पहले पॅाइंट में कहा गया है कि अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका की नजर में यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ हुए इस समझौते को कमजोर कर सकती है। इसे इजराइल की चिंताओं को नजरअंदाज करने के रूप में देखा जा रहा है। इजराइल का कहना है कि लेबनान में मौजूद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह बहुत बड़ा खतरा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-2: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे समझौते में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। दोनों देश एक-दूसरे के घरेलू मामलों में दखल भी नहीं देंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों को समझौते का जो हिस्सा पढ़कर सुनाया, उसमें यह बात साफ तौर पर शामिल थी। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते में एक-दूसरे के आंतरिक मामलों से दूर रहने की बात कही गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-3: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका और ईरान ने अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत पूरी करने और उसे लागू करने का टारगेट तय किया है। हालांकि, दोनों देशों की सहमति होने पर इस समयसीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है। दोनों देशों के नेताओं द्वारा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ ही 60 दिनों की यह समयसीमा शुरू हो गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक 60 दिनों की यह समयसीमा काफी छोटी मानी जा रही है। अमेरिकी अधिकारी भी निजी तौर पर मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा, खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु वार्ताओं में कई साल लग चुके हैं। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने जानबूझकर यह महत्वाकांक्षी समयसीमा तय की है। अगर 60 दिनों के भीतर कोई अंतिम समझौता हो जाता है, तो यह अमेरिका के मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों से पहले राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि साबित हो सकता है। ऐसे समय में जब उनकी घरेलू लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही है, यह समझौता उन्हें राजनीतिक फायदा भी पहुंचा सकता है। पॉइंट-4: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा अमेरिका दस्तखत के बाद ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा। यह नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म कर दी जाएगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी हटने के बाद ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान निर्यात कर सकेगा। साथ ही दूसरे देशों से आने वाला माल भी बिना बड़ी रुकावट के ईरान पहुंच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा और राजस्व आना शुरू हो जाएगा, जिससे उसकी मौजूदा आर्थिक मुश्किलें काफी हद तक कम हो सकती हैं। लेकिन इस फैसले का एक दूसरा पहलू भी है। नाकेबंदी हटने से अमेरिका अपने सबसे प्रभावी दबाव के साधनों में से एक खो देगा। पॉइंट-5: होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा समझौते पर दस्तखत होते ही ईरान ने वादा किया है कि वह अपनी पूरी कोशिश करके फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच आने-जाने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी और इस दौरान जहाजों से कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि अगले 60 दिनों तक ईरान होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से कोई पैसा नहीं लेगा। लेकिन 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। इसलिए अगर भविष्य में फीस लगाई जाती है, तो यह एक बड़ा बदलाव होगा और होर्मुज से गुजरने वाली वैश्विक समुद्री व्यापार लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-6: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना समझौते के तहत अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) की योजना तैयार करने का वादा किया

Vijay Thalapathy Success Story Facts Explained; Tamil Nadu CM Divorce Affair

Vijay Thalapathy Success Story Facts Explained; Tamil Nadu CM Divorce Affair

21 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक विजय की फिल्मों की रिलीज तमिलनाडु में किसी त्योहार जैसी मानी जाती है। फैंस बड़े कटआउट, दूध चढ़ाने और पटाखों के साथ सेलिब्रेट करते हैं। साउथ सुपरस्टार थलापति विजय की कहानी फिल्मों की सफलता के साथ संघर्ष, आलोचना, पारिवारिक विवाद और राजनीति तक पहुंचने की भी रही है। करियर की शुरुआत में उनके लुक्स, आवाज और एक्टिंग का मजाक उड़ाया गया। लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद वह एक्टिंग छोड़ने का सोचने लगे थे। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को लवर बॉय इमेज से निकालकर फैमिली स्टार और फिर तमिल सिनेमा के बड़े मास सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया। घिल्ली, थुप्पाक्की और सरकार जैसी फिल्मों में राजनीतिक और सामाजिक संदेशों ने उनकी अलग पहचान बनाई। इसी दौरान पिता एस.ए. चंद्रशेखर से राजनीतिक संगठन को लेकर विवाद भी चर्चा में रहा। बाद में विजय ने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) लॉन्च की और अब वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं थलापति विजय के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। थलापति विजय का बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि साउथ सिनेमा के बड़े सितारों में गिने जाने वाले थलापति विजय का पूरा नाम जोसेफ विजय चंद्रशेखर है। उनका जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में हुआ था। वह ऐसे परिवार से आते हैं, जिसका फिल्म इंडस्ट्री से गहरा संबंध रहा है। उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर तमिल फिल्मों के जाने-माने निर्देशक रहे हैं, जबकि मां शोभा चंद्रशेखर सिंगर, राइटर और प्रोड्यूसर रही हैं। घर में फिल्मी माहौल होने की वजह से विजय बचपन से कैमरा और सिनेमा की दुनिया के करीब रहे। हालांकि उनका बचपन पूरी तरह ग्लैमर से भरा नहीं था। छोटी बहन विद्या का कम उम्र में निधन हो गया था। कई इंटरव्यूज और तमिल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस घटना के बाद विजय काफी शांत और अंतर्मुखी हो गए थे। फैंस मानते हैं कि उन्होंने बहन की याद में कई निजी प्रोजेक्ट्स में विद्या नाम का इस्तेमाल किया। पढ़ाई बीच में छोड़ी, एक्टिंग को चुना विजय ने शुरुआती पढ़ाई चेन्नई के फातिमा मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल और बाललोक मैट्रिकुलेशन स्कूल से की थी। इसके बाद उन्होंने लोयोला कॉलेज में विजुअल कम्युनिकेशन कोर्स में एडमिशन लिया। लेकिन उसी दौरान फिल्मों में उनकी व्यस्तता बढ़ने लगी। उन्होंने महसूस किया कि उनका पूरा फोकस एक्टिंग पर जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी। विजय के पास कोई बड़ी प्रोफेशनल डिग्री नहीं है, लेकिन बाद के वर्षों में कई संस्थानों ने उन्हें मानद सम्मान दिए। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाला यह लड़का आगे चलकर करोड़ों लोगों का सुपरस्टार बनेगा। पेरेंट्स के साथ विजय की तस्वीर। पिता की फिल्म से डेब्यू, लेकिन शुरुआत रही मुश्किल विजय ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट वेट्री, कुटुम्बम, नान सिगप्पु मनिथन, वसंत रागम, सत्तम ओरु विलयाट्टु और इधु एंगाल नीती जैसी फिल्मों में काम किया। इनमें से अधिकांश फिल्मों का निर्देशन उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने किया था। इसके बाद विजय ने 1992 में फिल्म ‘नालैया थीरपु’ से लीड एक्टर के रूप में करियर शुरू किया था। लुक्स और आवाज का मजाक उड़ाया गया हालांकि शुरुआत उनके लिए बेहद कठिन रही। शुरुआती फिल्मों के फ्लॉप होने के साथ विजय को उनके लुक्स, आवाज और एक्टिंग के लिए आलोचना सहनी पड़ी। उस दौर की कई मैगजीन्स में लिखा गया कि वह हीरो मटेरियल नहीं हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय ने बाद में कहा था कि लोग उनके लुक्स और आवाज का मजाक उड़ाते थे। एक्टिंग छोड़ने तक का मन बना लिया था। विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि इंडस्ट्री के कई लोगों ने उन्हें लॉन्च करने के फैसले पर सवाल उठाए थे। लगातार आलोचना से विजय इतने परेशान हो गए थे कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन परिवार, खासकर उनके पिता ने उन्हें हिम्मत दी और मेहनत जारी रखने की सलाह दी। बहन की मौत ने बदल दिया स्वभाव विजय की जिंदगी में बहन विद्या की मौत सबसे बड़ा भावनात्मक झटका मानी जाती है। परिवार के करीबी लोगों के मुताबिक, पहले विजय काफी शरारती थे, लेकिन बहन के निधन के बाद उनमें गंभीरता आ गई। इसी दौर में उनका फिल्मों और किताबों की तरफ झुकाव बढ़ा। कई फिल्म समीक्षकों का मानना है कि उनकी फिल्मों में दिखाई देने वाली इमोशनल डेप्थ उनके निजी संघर्षों से जुड़ी रही। इंडस्ट्री में शुरुआती रिजेक्शन और आलोचना के बावजूद विजय टूटे नहीं। उन्होंने डांस, स्क्रीन प्रेजेंस, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी पर लगातार मेहनत की। यही मेहनत आगे चलकर उनकी पहचान बनी। विजय की फिल्मों में अक्सर आम जनता, सिस्टम और सामाजिक मुद्दों से जुड़े मैसेज देखने को मिलते हैं। ‘लवर बॉय’ से बने फैमिली स्टार 1996 में रिलीज हुई ‘पूवे उनाक्कागा’ विजय के करियर का पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। यह उनके करियर की पहली बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म थी। इस रोमांटिक-ड्रामा फिल्म ने विजय को तमिल सिनेमा का बड़ा स्टार बना दिया और उनकी छवि स्थापित रोमांटिक हीरो की बन गई। वह फैमिली ऑडियंस और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए। इसके बाद उन्होंने कई रोमांटिक और फैमिली फिल्में कीं। धीरे-धीरे उनकी इमेज लवर बॉय स्टार के रूप में बनने लगी। उस दौर में विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी सरलता और साफ छवि मानी जाती थी। वह बाकी स्टार्स की तरह ज्यादा विवादों में नहीं रहते थे और मीडिया से सीमित बातचीत करते थे। बिहाइंडवुड्स के एक पुराने इंटरव्यू में विजय ने कहा था- ‘मैं ज्यादा बोलने वाला इंसान नहीं हूं।’ यही रिजर्व्ड पर्सनैलिटी आगे चलकर उनकी पब्लिक इमेज का अहम हिस्सा बनी। घिल्ली और थुप्पाक्की ने बनाया ‘मास सुपरस्टार’ 2003 की थिरुमलाई और 2004 की ब्लॉकबस्टर घिल्ली ने विजय की इमेज पूरी तरह बदल दी। अब वह सिर्फ रोमांटिक हीरो नहीं रहे, बल्कि मास एक्शन स्टार बन गए। उनकी एंट्री, डांस स्टेप्स और पंच डायलॉग्स युवाओं के बीच लोकप्रिय होने लगे। इसके बाद थुप्पाक्की, मर्सल, मास्टर और लियो जैसी फिल्मों ने उनके स्टारडम को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। खास बात यह रही कि विजय ने आलोचनाओं का जवाब विवादों से नहीं दिया। उन्होंने अपने काम से लोगों की सोच बदली।

Riteish Deshmukh Success Story Explained; Raja Shivaji Ek Villain | Comedy Movies

Riteish Deshmukh Success Story Explained; Raja Shivaji Ek Villain | Comedy Movies

18 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी/वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक एक्टर बनने से पहले रितेश देशमुख ने न्यूयॉर्क की एक आर्किटेक्चर फर्म में काम किया था। कॉमेडी फिल्मों से पहचान बनाने वाले रितेश देशमुख आज ‘राजा शिवाजी’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि एक दौर ऐसा भी था, जब लगातार फ्लॉप फिल्मों और ट्रोलिंग से परेशान होकर उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे होने की वजह से लोग उन्हें अक्सर एक्टर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का बेटा कहते थे। डेब्यू फिल्म ‘तुझे मेरी कसम’ के बाद उनकी कई फिल्में नहीं चलीं और उन्होंने दोबारा आर्किटेक्ट की नौकरी करने का फैसला कर लिया था। बाद में ‘मस्ती’, ‘धमाल’, ‘हे बेबी’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में बनाए रखा। फिर ‘एक विलेन’ में निगेटिव किरदार निभाकर उन्होंने अलग पहचान बनाई। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं रितेश देशमुख के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। रितेश देशमुख महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के सबसे छोटे बेटे हैं। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक, लेकिन राजनीति से दूरी रितेश देशमुख का जन्म 17 दिसंबर 1978 को लातूर, महाराष्ट्र में हुआ था। वह महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे हैं। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक होने की वजह से उनका बचपन राजनीति और सार्वजनिक जीवन के माहौल में बीता। हालांकि रितेश ने कभी राजनीति में आने की इच्छा जाहिर नहीं की। उनका झुकाव शुरुआत से ही क्रिएटिव फील्ड और डिजाइनिंग की तरफ था। आर्किटेक्चर की पढ़ाई, न्यूयॉर्क में नौकरी रितेश की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के जी.डी. सोमानी मेमोरियल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने कमला रहेजा कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज, मुंबई से आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय न्यूयॉर्क की एक आर्किटेक्चर फर्म में काम किया। उस दौर में उनका फोकस पूरी तरह आर्किटेक्चर करियर पर था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि फिल्मों में काम करेंगे। रितेश को कॉलेज के दिनों से ही स्टेज, एक्टिंग और एंटरटेनमेंट पसंद था। हालांकि वह काफी शर्मीले स्वभाव के थे। राजनीतिक परिवार से होने की वजह से वह सीमित दायरे में रहते थे और उन्हें लगता था कि संभलकर रहना चाहिए। फिल्म ‘तुझे मेरी कसम’ 3 जनवरी 2003 को रिलीज हुई थी। ‘तुझे मेरी कसम’ से फिल्मों में एंट्री रितेश का फिल्मों में आने का विचार धीरे-धीरे बना। उस समय तेलुगु फिल्म ‘नुव्वे कवाली’ बड़ी हिट हुई थी और इसके हिंदी रीमेक की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान रितेश तक फिल्म की स्क्रिप्ट पहुंची। शुरुआत में उन्होंने ओरिजिनल फिल्म देखने की कोशिश की, लेकिन भाषा समझ नहीं आने की वजह से ज्यादा देर नहीं देख पाए। बाद में निर्देशक के. विजय भास्कर ने उन्हें हैदराबाद बुलाकर पूरी स्क्रिप्ट सुनाई। रितेश स्क्रिप्ट और किरदार की सादगी से प्रभावित हुए। उन्हें लगा कि यह किरदार उनकी कॉलेज लाइफ जैसा है। रितेश कहते हैं- ‘तुझे मेरी कसम’ के जरिए मुझे सब करने का मौका मिला, जो मैं कॉलेज के दिनों में कभी खुलकर नहीं कर पाया था। ‘तुझे मेरी कसम’ में रितेश देशमुख के साथ जेनेलिया डिसूजा थीं, जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनीं। लोग एक्टर से ज्यादा सीएम का बेटा मानते थे उस समय इंडस्ट्री में चर्चा थी कि मुख्यमंत्री के बेटे होने की वजह से उन्हें आसानी से लॉन्च मिल गया। लेकिन रितेश मानते हैं कि इस बैकग्राउंड की वजह से उन पर दबाव भी बहुत ज्यादा था। लोग उन्हें एक्टर से ज्यादा सीएम का बेटा मानते थे। डेब्यू के बाद उनका करियर आसान नहीं रहा। उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप रहीं और इंडस्ट्री में धारणा बनने लगी कि वह ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएंगे। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में रितेश ने बताया था कि जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, तब उन्हें भरोसा नहीं था कि वह इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिक पाएंगे। फिल्में फ्लॉप हुईं तो एक्टिंग छोड़ने का ख्याल आया रितेश ने बताया कि एक समय ऐसा आया जब उनकी लगातार पांच फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं। उस दौर में उन्हें लगने लगा था कि उनका करियर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा था- एक वक्त ऐसा आया जब मेरी लगातार पांच फिल्में फ्लॉप हुईं। तब मैंने सोचा- बस, अब पैकअप… मैं वापस आर्किटेक्चर में चला जाऊंगा। उस दौर में इंडस्ट्री में चर्चा शुरू हो गई थी कि रितेश शायद लंबे समय तक बॉलीवुड में टिक नहीं पाएंगे। लगातार असफल फिल्मों की वजह से उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हुआ। कॉमेडी फिल्मों ने इंडस्ट्री में टिकने का मौका दिया लगातार असफलताओं के बाद रितेश के करियर ने नया मोड़ लिया। फ्लॉप फिल्मों के बाद जब उनकी फिल्में सफल होने लगीं, तो उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में उनकी नई जिंदगी शुरू हो गई है। कॉमेडी फिल्मों में रितेश देशमुख की टाइमिंग दर्शकों को पसंद आने लगी। ‘मस्ती’, ‘क्या कूल हैं हम’, ‘मालामाल वीकली’, ‘हे बेबी’, ‘धमाल’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई। दैनिक भास्कर से बातचीत में रितेश देशमुख कहते हैं- मैं लोगों का आभारी हूं। उस दौर में जब मैंने डेब्यू किया था, अगर किसी एक तरह की फिल्म हिट हो जाती थी तो उसी तरह के और काम मिलते थे। इसलिए मेरी एक कॉमेडी फिल्म चली, तो फिर मुझे दूसरी और तीसरी कॉमेडी फिल्म मिलीं। मैं खुशकिस्मत था कि कॉमेडी-जेनर ने मुझे लंबे समय तक इंडस्ट्री में बनाए रखा। रितेश के मुताबिक, राजनीतिक परिवार से आने की वजह से उन्होंने बचपन से हार और वापसी दोनों करीब से देखी हैं। यही वजह है कि वह असफलता से जल्दी टूटते नहीं हैं। कॉमेडी इमेज तोड़ने का फैसला किया रितेश देशमुख लंबे समय तक बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों के लिए पहचाने जाते रहे। लेकिन करियर के एक दौर में उन्होंने अपनी इमेज तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने ऐसे किरदार चुनने शुरू किए, जिनमें उनका डार्क और खतरनाक अंदाज दिखाई दे। दिलचस्प बात यह रही कि विलेन के रूप में भी उन्हें काफी सराहना मिली। ‘एक विलेन’ बना करियर का टर्निंग पॉइंट रितेश के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट ‘एक विलेन’ रही। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने राकेश महाडकर नाम के सीरियल किलर का किरदार निभाया

Prateek Yadav Story Explained; BJP Aparna Yadav | Pulmonary Embolism

Prateek Yadav Story Explained; BJP Aparna Yadav | Pulmonary Embolism

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। महज 38 साल की उम्र में उनकी मौत की खबर से लोग हैरान हैं। प्रतीक की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। यादव परिवार से होने के बावजूद प्रतीक को राजनीति पसंद नहीं थी। वह कभी सार्वजनि . प्रतीक जब 3 साल के थे, तभी उनके माता-पिता का तलाक हो गया। फिर मां साधना ने मुलायम सिंह यादव से शादी की। मुलायम ने प्रतीक को बेटे का हक दिया। प्रतीक ने 15 साल पहले अपर्णा बिष्ट से लव मैरिज की। इसके बाद प्रतीक कभी पत्नी से विवाद, तो कभी प्रॉपर्टी विवाद को लेकर ही चर्चा में आए। करीबी बताते हैं कि प्रतीक ने धीरे-धीरे दोस्तों से भी दूरी बना ली थी। कहा जा रहा है कि प्रतीक पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। लेकिन इसकी जानकारी सिर्फ परिवार तक ही सीमित थी। 13 दिन पहले यानी 30 अप्रैल को भी प्रतीक की तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें गंभीर हालत में लखनऊ के निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 3 दिन बाद आराम मिल गया था। इसके बाद वे बिना डॉक्टर की परमिशन लिए घर चले गए थे। लग्जरी कारों और बॉडी बिल्डिंग के शौकीन प्रतीक यादव की कहानी… प्रतीक की 4 तस्वीरें… प्रतीक को लग्जरी गाड़ियों का शौक था। उनके पास लैंबोर्गिनी और पोर्शे जैसी गाड़ियां थीं। प्रतीक यादव फिटनेस को लेकर काफी सजग थे। वे न सिर्फ खुद बॉडी बिल्डर थे, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते थे। प्रतीक और अपर्णा की 2 बेटियां है। हाल ही में उन्होंने बेटी का जन्मदिन मनाया था। प्रतीक ने सोशल मीडिया पर आखिरी पोस्ट 3 अप्रैल को किया था। उन्होंने लिखा था- ‘इंजन दहाड़ उठा, आसमान ने रास्ता दिया और मैंने पूरी तरह कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। बचपन में पिता ने छोड़ा, फिर मां ने मुलायम से शादी की 7 जुलाई 1987। फर्रुखाबाद के व्यवसायी चंद्रप्रकाश गुप्ता के घर प्रतीक का जन्म हुआ। मां साधना नर्स थीं। लेकिन एक साल बाद ही पिता चंद्रप्रकाश गुप्ता ने उनकी मां को छोड़ दिया। तीन साल बाद यानी 1990 में दोनों का तलाक हो गया। बहुत कम उम्र में प्रतीक की दुनिया सिर्फ मां तक सिमट गई। उस वक्त साधना सैफई मेडिकल कॉलेज में तैनात थीं। एक बार मुलायम की मां मूर्ति देवी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। मेडिकल कॉलेज में एक नर्स मूर्ति देवी को गलत इंजेक्शन लगाने जा रही थी। उस समय साधना वहां मौजूद थीं और उन्होंने नर्स को ऐसा करने से रोक दिया। साधना की वजह से ही मूर्ति देवी की जान बची थी। मुलायम इससे काफी प्रभावित हुए और दोनों के बीच रिश्ता शुरू हो गया। 2007 में साधना ने मुलायम सिंह यादव से शादी कर ली। इसके बाद प्रतीक को मुलायम ने अपना लिया। 2007 में मुलायम ने अपने खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक शपथपत्र दिया। इसमें लिखा था- मैं स्वीकार करता हूं कि साधना गुप्ता मेरी पत्नी हैं और प्रतीक मेरा बेटा है। चार साल पहले साधना गुप्ता का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। ये तस्वीर मई 2019 की है। तब मुलायम अपने नए घर में शिफ्ट होने वाले थे। ये उसी घर के पूजा के वक्त तस्वीर है। तस्वीर में साधना और अपर्णा दोनों हैं। ब्रिटेन से MBA, राजनीति नहीं कारोबार चुना प्रतीक यादव की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीकॉम किया। फिर ब्रिटेन चले गए और यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी कर जब वे भारत लौटे, तो पिता मुलायम चाहते थे कि वह राजनीति में कदम रखें। लेकिन प्रतीक ने राजनीति की राह नहीं चुनी और रियल एस्टेट में अपनी किस्मत आजमाने लगे। तस्वीर पिछले साल नंवबर की है। जब प्रतीक, पत्नी अपर्णा और बच्चों के साथ सैफई (इटावा) में एक शादी में हिस्सा लेने पहुंचे थे। अपर्णा से बर्थडे पार्टी में मिले, लव-मैरिज की प्रतीक और अपर्णा यादव की लव स्टोरी काफी चर्चित रही। दोनों स्कूल के दिनों से दोस्त थे। एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में दोनों की मुलाकात हुई, जहां ई-मेल आईडी एक्सचेंज होने से दोस्ती की शुरुआत हुई। यह दोस्ती कब 8-10 साल की रिलेशनशिप में बदल गई, पता ही नहीं चला। 2011 में दोनों की सैफई में शाही अंदाज में शादी हुई, जिसमें अमिताभ बच्चन जैसे बड़े मेहमान शामिल हुए। प्रतीक और अपर्णा की दो बेटियां हैं। शादी की 3 तस्वीरें देखिए- पिता ने चैलेंज दिया, तो जिम का शौक चढ़ा एक बार प्रतीक यादव का वजन 103 किलो हो गया था। पिता मुलायम सिंह ने उन्हें देखा तो कहा- वजन कम करो, तो तुम्हें बड़ा इनाम देंगे। प्रतीक ने पिता का चैलेंज स्वीकार किया और वजन घटाने के लिए जिम जाना शुरू किया। उन्होंने अपना वजन 36 किलो तक घटा लिया। यहीं से उन्हें जिम का शौक चढ़ गया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के गोमतीनगर में जिम भी खोल लिया और बॉडी बिल्डिंग करने लगे। रियल एस्टेट बिजनेस और जिम से पैसा आने पर उन्हें लग्जरी कारों का भी शौक हो गया। उन्होंने लैंबोर्गिनी और पोर्शे जैसी गाड़ियां खरीदीं। वे ‘जीव आश्रय फाउंडेशन’ नाम की एक एनजीओ भी चलाते थे, जो पशु कल्याण और बेघर लोगों की मदद जैसे सामाजिक कार्यों पर फोकस करती थी। प्रतीक पशु प्रेमी थी। वे ‘जीव आश्रय फाउंडेशन’ नाम की एक एनजीओ भी चलाते थे। पत्नी और कारोबार की वजह से सुर्खियों में रहे… तलाक का ऐलान किया, 9 दिन बाद सुलह हुई: प्रतीक यादव ने 19 जनवरी को अचानक पत्नी अपर्णा से तलाक लेने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने कहा था- अपर्णा ने मेरी जिंदगी नरक बना दी। हालांकि, 9 दिन बाद दोनों के बीच सुलह हो गई। इंस्टाग्राम पर प्रतीक ने अपर्णा के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- “All is good यानी सब अच्छा है। चैंपियन वो होते हैं, जो अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल समस्याओं को खत्म कर देते हैं। हम चैंपियंस का परिवार हैं।” कारोबारी पर 5 करोड़ की रंगदारी मांगने की FIR कराई: प्रतीक रियल एस्टेट

Relationship Hot And Cold Behavior Explained; Avoidance

Relationship Hot And Cold Behavior Explained; Avoidance

15 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी उम्र 28 साल है। मैं पिछले कुछ महीनों से एक लड़की को डेट कर रहा हूं। उसका व्यवहार बहुत अजीब है। कभी तो वो खूब बातें करती है, ढेरों प्लान बनाती है, फोन करती है, मिलती है, हम साथ घूमते हैं। कभी अचानक कई-कई दिनों के लिए गायब हो जाती है। फोन नहीं उठाती, मैसेज का जवाब नहीं देती। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है? क्या वो इस रिलेशनशिप को लेकर सीरियस है? मैं इस बिहेवियर को कैसे समझूं, क्या करूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। रिलेशनशिप की शुरुआत में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार लगातार ऐसा ही बना हुआ है तो इसे मनोविज्ञान में ‘हॉट-एंड-कोल्ड बिहेवियर’ कहा जाता है। हालांकि, आपने अपने सवाल में ये नहीं स्पष्ट किया है कि- क्या ये रिलेशनशिप दोतरफा है? कहीं आप अपने दिमाग में अकेले डेट तो नहीं कर रहे? कहीं ये दूसरे व्यक्ति के लिए सिर्फ दोस्ती तो नहीं है? हम इन संभावनाओं के बारे में इसलिए पूछ रहे हैं, क्योंकि आपके सवाल से ये क्लियर नहीं है कि आपको लेकर डेटिंग पार्टनर का नजरिया क्या है? हालांकि, अगर दोनों ओर से प्यार-मोहब्बत का एहसास नहीं भी है, इसके बावजूद किसी रिश्ते में ऐसी कंडीशन हेल्दी नहीं है। प्यार कोई ‘लुका-छिपी’ का खेल नहीं किसी भी रिलेशनशिप में स्थिरता नींव की तरह होती है। इसी के आधार पर रिश्ते का भविष्य तय होता है। यह कोई ‘लुका-छिपी’ का खेल नहीं है कि कुछ दिन साथ में हैं और कुछ दिनों के लिए अचानक गायब हो गए। इस तरह की कंडीशंस रिलेशनशिप को टॉक्सिक बना सकती हैं। ग्राफिक में देखिए, टॉक्सिक रिलेशनशिप के संकेत- पार्टनर ऐसा कब बिहेव करता है? आमतौर पर पार्टनर ऐसा व्यवहार तब करता है, जब वह रिलेशनशिप को लेकर अनिश्चितता में होता है। मुमकिन है कि वह आपको पसंद तो करती हो, लेकिन भविष्य को लेकर श्योर न हो। आपने बताया कि आप अभी डेटिंग फेज में हैं। इसका मतलब है कि रिश्ते को लेकर कमिटमेंट नहीं है। ऐसी स्थिति में संभव है कि वह आपके अलावा अन्य विकल्प भी एक्सप्लोर कर रही हो। इसे अवॉइडेंट बिहेवियर कहते हैं। इसके सभी कारण ग्राफिक में देखिए- लड़की का नजरिया भी समझें जरूरी नहीं है कि लड़की जानबूझकर आपका दिल दुखा रही हो। कुछ लोग रिश्तों में ज्यादा करीब आने से घबराते हैं। जब भावनाएं बहुत तीव्र हो जाती हैं, तो वे थोड़ी दूरी बनाने लगते हैं। कभी-कभी पुराने रिश्तों के बुरे अनुभव, जिम्मेदारी से डर या जिंदगी की दूसरी परेशानियां भी वजह हो सकती हैं। इसलिए कोई फैसला लेने से पहले खुलकर बात करना जरूरी है। ब्रेन का ‘डोपामिन लूप’ में फंसना अगर कोई व्यक्ति किस्तों में प्यार करता है तो इससे दिमाग ‘डोपामिन लूप’ में फंस जाता है। जब पार्टनर अच्छे से बात करता है तो हाई महसूस होता है और जब वो गायब होता है तो बेचैनी महसूस होती है। Gen-Z इसे ‘बेडक्रंबिंग’ भी कहते हैं। इसका मतलब है कि व्यक्ति को सिर्फ उतने ही प्यार के टुकड़े देना, जिससे वह रिश्ता छोड़कर न जाए, लेकिन उसे पूरा हक भी न मिले। अब आपको यह पता करना होगा कि कहीं आप भी ‘डोपामिन लूप’ में तो नहीं फंस गए हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- रिलेशनशिप में जिम्मेदारी भी जरूरी रिलेशनशिप सिर्फ एक शख्स के हिसाब से नहीं चलता है। इसमें दोनों की अपनी-अपनी मौजूदगी मायने रखती है। इसमें दोनों लोगों के बराबर के इन्वेस्टमेंट्स होते हैं। इसके साथ दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां भी होती हैं। आपको क्या करना चाहिए? जिस स्थिति में अभी आप फंसे हुए हैं, उसमें कोई भी जल्दबाजी का फैसला आपको गिल्ट में डाल सकता है। इसलिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें- स्पष्ट बातचीत करें सही समय चुनकर आप अपनी फीलिंग्स शेयर करें। पार्टनर को स्पष्ट तौर पर बताएं कि “जब तुम कई दिनों तक गायब होती हो तो मैं कन्फ्यूज और इनसिक्योर महसूस करता हूं।” इस तरह के वाक्य स्थिति को बेहतर ढंग से बयां कर सकते हैं। साथ ही रिश्ते की दिशा और उम्मीदों पर खुलकर बात करना जरूरी है। कम्युनिकेशन की अपेक्षाएं तय करें यह साफ करें कि कितनी बातचीत या अपडेट आपके लिए जरूरी है। अगर पार्टनर को स्पेस चाहिए तो वह पहले से बताए। ऐसा एक बेसिक नियम बनाना रिलेशनशिप को स्थिर बना सकता है। इमोशनल बाउंड्री बनाएं अपनी खुशियों और मूड को सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धता पर निर्भर न होने दें। यह किसी भी रिलेशनशिप के लिए हेल्दी नहीं है। दोस्तों, काम और हॉबीज पर फोकस रखने से भावनात्मक संतुलन बना रहता है। समयसीमा तय करें रिश्ते को समझने के लिए खुद को एक तय समय दें। अगर इस दौरान भी व्यवहार में निरंतरता नहीं आती तो यह संकेत है कि सामने वाला अपना 100 प्रतिशत नहीं दे रहा है। सम्मान को प्राथमिकता दें याद रखें, जहां आपकी मौजूदगी की कद्र नहीं होती, वहां स्वस्थ और लंबे समय तक चलने वाला प्यार बन पाना मुश्किल होता है। अंतिम सलाह जो रिश्ता बार-बार आपको खुद की वैल्यू पर सवाल करने को मजबूर करे, वह लंबे समय में खुशी नहीं दे सकता। प्यार में उत्साह जरूरी है, लेकिन स्थिरता उससे भी ज्यादा जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति आपकी मौजूदगी को सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहा है तो यह भी उसका एक जवाब हो सकता है। ……………… ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- गर्लफ्रेंड अपनी जरूरतें सीधे नहीं बताती:इनडायरेक्ट ताने देती है, मैं इमोशनल स्ट्रेस में हूं, क्या करूं? रिलेशनशिप में अपनी बात रखना हर किसी का हक है, लेकिन उसे कहने का तरीका स्पष्ट होना चाहिए। बार-बार बातों को घुमाना और खुद को ‘बेचारा’ दिखाना इमोशनल मैनिपुलेशन है। यह स्थिति धीरे-धीरे रिश्ते की सहजता को खत्म कर सकती है। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Yash Success Story Explained; KGF Ramayana Toxic

Yash Success Story Explained; KGF Ramayana Toxic

23 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक यश ने अपने करियर की शुरुआत न चाहते हुए भी टेलीविजन से की, जहां उन्हें प्रतिदिन 500 रुपए मिलते थे। यश आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनका सफर संघर्षों से भरा रहा। कर्नाटक के साधारण परिवार में जन्मे यश के पिता BMTC बस ड्राइवर थे, जबकि मां हाउसवाइफ थीं। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक्टर बनना है। घरवालों की चिंता और पैसों की तंगी के बावजूद वे महज ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचे। शुरुआत में थिएटर में बैकस्टेज काम किया, जहां उन्हें ₹50 मिलते थे। वहीं से उन्होंने एक्टिंग सीखी और छोटे-छोटे रोल करने लगे। बाद में टीवी सीरियल्स में मौका मिला, जहां शुरुआत में उन्हें ₹500 प्रतिदिन मिलते थे। मेहनत और संघर्ष के दम पर यश ने कन्नड़ सिनेमा में पहचान बनाई। फिर केजीएफ: चैप्टर 1 और केजीएफ: चैप्टर 2 से देशभर में सुपरस्टार बन गए। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं यश के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को हुआ था, उनके बचपन का नाम नवीन कुमार गौड़ा है। बचपन से ही एक्टर बनना चाहता था इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में यश ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें साझा की थीं। यश कहते हैं- मेरा जन्म कर्नाटक के हासन जिले के गांव भुवानाहल्ली में हुआ था। मेरे पिता मैसूर में रहते थे, इसलिए मेरा बचपन भी वहीं बीता। मेरे पिता BMTC बस ड्राइवर थे और मां हाउसवाइफ थीं। हम एक आम मिडिल क्लास परिवार की तरह खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। फिर मैंने एक्टर बनने का सपना देखा। बचपन से ही मुझे एक्टर के तौर पर मिलने वाला एक्स्ट्रा अटेंशन पसंद था। इसी वजह से मुझे एक्टिंग, मोनो एक्टिंग, फैंसी ड्रेस और डांस में हिस्सा लेना अच्छा लगता था। इन सबसे मुझे बहुत खुशी मिलती थी। वहीं से यह सफर शुरू हुआ। एक्टिंग के अलावा दूसरा विकल्प नहीं था एक्टिंग के अलावा मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। मेरे जीवन में कोई प्लान-बी नहीं था। मैं सिर्फ एक्टर बनना चाहता था। सच कहूं तो मैं स्टार बनना चाहता था। उस उम्र में मुझे यह समझ नहीं थी कि एक्टर बनना कितना मुश्किल है या इसके लिए कितनी मेहनत और समर्पण चाहिए। लेकिन बचपन से ही लगता था कि मैं एक दिन एक्टर जरूर बनूंगा। टीचर्स हीरो कहकर बुलाते थे मेरे स्कूल के टीचर्स मुझे हीरो कहकर बुलाते थे। बचपन में मैंने एक मोनो एक्टिंग की थी, जिसमें मैं वीरप्पन को पकड़ने की बात करता था। इसी वजह से स्कूल में सब मुझे चिढ़ाते थे। जब भी वीरप्पन की कोई खबर आती, लोग मजाक में कहते, “अरे, अभी तक पकड़ा नहीं क्या?” लेकिन मैं अंदर से मान चुका था कि एक दिन एक्टर बनूंगा। फिल्मों में आने से पहले मैं किसी एक्टिंग इंस्टीट्यूट या फिल्म स्कूल में पढ़ना चाहता था, लेकिन मेरे माता-पिता डरे हुए थे। उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री आसान जगह नहीं है और वहां सफल होना मुश्किल है। 10वीं के बाद ही मैं एक्टिंग में जाना चाहता था, क्योंकि मुझे पता था कि क्या करना है। लेकिन घरवालों ने कहा कि पहले डिग्री पूरी करनी होगी। पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था मैंने PUC (Pre-University Course) पूरा किया, लेकिन धीरे-धीरे एहसास हुआ कि मेरा मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है। पढ़ाई बुरी नहीं लगती थी, लेकिन मैं जल्दी एक्टर बनना चाहता था। मुझे लगता था कि यही सही उम्र है, जब मुझे अपने हुनर को समझना और सीखना चाहिए। किसी भी पेशे में समय लगाना जरूरी होता है, ताकि उसे अच्छे से सीखा जा सके। इसलिए मैंने तय कर लिया कि अब मुझे एक्टिंग की तरफ ही जाना है। एक्टिंग इंस्टीट्यूट की फीस भरने के पैसे नहीं थे मेरे माता-पिता बहुत परेशान थे। उन्हें लग रहा था कि मैं उनकी बात नहीं सुन रहा हूं। मैंने उनसे कहा कि मुझे सिर्फ एक मौका चाहिए। मैं किसी एक्टिंग इंस्टीट्यूट या थिएटर ग्रुप में शामिल हो जाऊंगा। लेकिन उस समय हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं एक्टिंग इंस्टीट्यूट की फीस भर सकूं। इसलिए मैंने थिएटर जॉइन करने का फैसला किया। मैं घर छोड़कर चला गया। यह घरवालों की मर्जी के खिलाफ था। उन्होंने मुझसे कहा, “ठीक है, जाओ। लेकिन अगर वापस लौटकर आए तो फिर सिर्फ पढ़ाई करना और नौकरी करना।” मैंने कहा, “ठीक है, लेकिन मुझे एक मौका दीजिए।” उन्हें लगा कि मैं जल्द ही वापस आ जाऊंगा, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचा था जब मैं बेंगलुरु पहुंचा तो मेरे पास सिर्फ ₹300 थे। शहर मुझे बहुत बड़ा और डराने वाला लगा। छोटे शहर से आने वाले इंसान के लिए बड़ा शहर डराने वाला हो सकता है। मुझे लगा कि यहां लोग बहुत तेज हैं और हर कोई अपनी जिंदगी में व्यस्त है। लेकिन अच्छी बात यह थी कि हर जगह मुझे मदद करने वाला मिल गया। थिएटर के दौरान यश के. एल. ई. कॉलेज, बेंगलुरु से बैचलर ऑफ आर्ट्स की पढ़ाई पूरी की। थिएटर में इमरजेंसी एक्टर बन गया मैंने ‘बेनाका’ थिएटर ग्रुप जॉइन किया और बैकस्टेज काम करने लगा। बैकस्टेज काम करते हुए मैं दूसरे कलाकारों के रोल प्रैक्टिस करता था। अगर कोई एक्टर लेट हो जाता तो मैं उसके डायलॉग बोल देता। इस तरह रिहर्सल करता रहता था। धीरे-धीरे मैं इमरजेंसी एक्टर बन गया। अगर कोई बीमार हो जाए या कलाकार न आए, तो मुझे स्टेज पर भेज दिया जाता था। वहीं से मेरा असली सफर शुरू हुआ और बाद में बड़े रोल मिलने लगे। थिएटर में बैकस्टेज काम के बदले मुझे ₹50 मिलते थे उस समय मेरे माता-पिता परेशान रहते थे, क्योंकि बेंगलुरु जैसे शहर में रहना आसान नहीं था। रहने की जगह भी नहीं थी। मुझे शहर की सड़कों तक का पता नहीं था। मैं पहले कभी अपनी राजधानी तक नहीं गया था। थिएटर में बैकस्टेज काम के बदले मुझे ₹50 मिलते थे। वही मेरी कमाई थी और उसी से खर्च चलता था। लेकिन आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो वह संघर्ष नहीं, बल्कि रोमांच लगता है। हर दिन नया अनुभव था। एक्टिंग सीखने की चाह ने बनाया रास्ता मेरा पहला स्टेज परफॉर्मेंस मुंबई में हुआ।

SBI YONO App Message Scam Alert Advisory Explained; How to Spot

SBI YONO App Message Scam Alert Advisory Explained; How to Spot

Hindi News Lifestyle SBI YONO App Message Scam Alert Advisory Explained; How To Spot | Prevention Tips 17 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक फिशिंग स्कैम को लेकर अलर्ट जारी किया है। इसमें स्कैमर्स ग्राहकों को फर्जी मैसेज भेजकर डराते हैं कि ‘आधार अपडेट न होने पर’ उनका SBI YONO अकाउंट ब्लाॅक कर दिया जाएगा। ऐसे मैसेज लोगों में घबराहट पैदा करते हैं, जिससे वे बिना सोचे-समझे ठग की बात मान लेते हैं और फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं। इस स्कैम से बचने के लिए SBI ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर एडवाइजरी जारी की है। ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में आज हम SBI ‘YONO’ एप से जुड़े इस स्कैम को समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- स्कैमर SBI ग्राहकों को कैसे निशाना बना रहे हैं? इस स्कैम से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- एसबीआई के ‘YONO’ एप से जुड़ा स्कैम क्या है? जवाब- यह एक फिशिंग स्कैम है, जिसमें साइबर ठग SBI ग्राहकों को फर्जी मैसेज भेजते हैं। इसमें लिखा होता है- जरूरी सूचना, प्रिय SBI ग्राहक, आपको सूचित किया जाता है कि आपका SBI YONO अकाउंट आज रात ब्लॉक कर दिया जाएगा, क्योंकि आपके अकाउंट में आधार नंबर अपडेट नहीं है।इस असुविधा के लिए हमें खेद है। आपसे अनुरोध है कि कृपया हमारा आधिकारिक SBI आधार अपडेट APK इंस्टॉल करें और तुरंत अपना आधार अपडेट कर आगे की KYC प्रक्रिया पूरी करें। धन्यवाद,SBI बैंक ये मैसेज अंग्रेजी में लिखा होता है। मैसेज के साथ ‘SBI KYC AADHAR UPDATE’ नाम से एक APK फाइल होती है, जिसे डाउनलोड करने को कहा जाता है। जैसे ही यूजर इसे डाउनलोड करता है या जानकारी भरता है, ठग फोन हैक कर लेते हैं और पैसे ऐंठ लेते हैं। सवाल- स्कैमर SBI के ग्राहकों को कैसे निशाना बना रहे हैं? जवाब- साइबर क्रिमिनल्स डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर SBI ग्राहकों को झांसे में लेते हैं। स्कैम का जाल ग्राफिक में देखिए- सवाल- इस स्कैम के जरिए ठग क्या नुकसान पहुंचा सकते हैं? जवाब- ठग ग्राहक की पर्सनल और बैंकिंग डिटेल्स चुराकर कई तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं। जैसेकि- बैंक अकाउंट से पैसा निकाल सकते हैं। फोन का रिमोट एक्सेस ले सकते हैं। OTP, PIN और पासवर्ड चोरी कर सकते हैं। पर्सनल डेटा और डॉक्यूमेंट्स चुरा सकते हैं। नेट बैंकिंग/UPI का मिसयूज कर सकते हैं। यूजर के नाम से फर्जी लोन ले सकते हैं। फोन में सेव कॉन्टैक्ट्स (रिलेटिव्स और दोस्त) को ब्लैकमेल कर सकते हैं। सवाल- लाेग किन गलतियों के कारण स्कैमर्स के जाल में फंस जाते हैं? जवाब- लोग मैसेज देखने के बाद जल्दबाजी और हड़बड़ाहट में कुछ गलतियां करते हैं, जिससे वह स्कैमर्स के जाल में फंस जाते हैं। जैसेकि- बिना सोचे-समझे मैसेज पर भरोसा करना। मैसेज सोर्स वेरिफाई न करना। डर या दबाव में आकर एक्शन लेना। अनजान लिंक पर क्लिक करना। APK फाइल डाउनलोड करना। OTP, PIN और बैंक डिटेल्स शेयर करना। अनजान एप को गैरजरूरी परमिशन देना। सवाल- SBI ने अपने ग्राहकों को सावधान करने के लिए जारी एडवाइजरी में क्या कहा है? जवाब- SBI ने एडवाइजरी में ग्राहकों को फर्जी मैसेज से सावधान रहने की सलाह दी है- ‘आपका YONO एप आधार अपडेट न होने पर बंद हो जाएगा।’ ऐसे फर्जी मैसेज के झांसे में न आएं। अनजान लिंक या ईमेल, SMS, वॉट्सएप से आए APK फाइल डाउनलोड न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। YONO एप सिर्फ ऑफिशियल एप स्टोर या SBI की वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। फ्रॉड की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। सवाल- इस एडवाइजरी के मुताबिक आपको क्या करना है? जवाब- बैंक से जुड़े कामों के सही और गलत तरीके नीचे पॉइंटर्स से समझिए- मोबाइल बैंकिंग एप डाउनलोड करना गलत- अनजान लिंक या APK से डाउनलोड करना। सही- सिर्फ ऑफिशियल एप स्टोर या वेबसाइट से डाउनलोड करें। अपना अकाउंट लॉगिन करना गलत- फर्जी एप में लॉगिन करना। पिन शेयर करना। पब्लिक वाईफाई से लॉगिन करना। सही- ऑफिशियल एप या वेबसाइट पर ही लॉगिन करें। पिन किसी से शेयर न करें। बैलेंस चेक करना गलत- थर्ड-पार्टी एप या अनजान वेबसाइट पर डिटेल डालना। सही- बैंक एप, ATM या ऑफिशियल USSD/मिस्ड कॉल सर्विस इस्तेमाल करें। पैसे ट्रांसफर करना गलत- जल्दबाजी में बिना जांचे पैसे भेजना। ‘रिवॉर्ड/कैशबैक’ के लालच में पैसे ट्रांसफर करना। सही- पैसे भेजने से पहले रिसीवर का नाम और नंबर वेरिफाई करें। सिर्फ ऑफिशियल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें। UPI लिंक करना गलत- अनजान एप या लिंक पर UPI एक्टिवेट करना। सही- सिर्फ बैंक एप/ऑफिशियल UPI एप में ही लिंक करें। OTP/MPIN इस्तेमाल करना गलत- कॉल/मैसेज पर OTP बताना। स्क्रीन शेयर करके OTP दिखाना। सही- OTP/MPIN पूरी तरह गोपनीय रखें। खुद ही एंटर करें, किसी से शेयर न करें। बैंकिंग रिलेटेड नोटिफिकेशंस चेक करना (SMS/वॉट्सएप/ईमेल) गलत- ‘अकाउंट बंद हो जाएगा’ जैसे डराने वाले मैसेज पर क्लिक करना। सही- मैसेज भेजने वाले का सोर्स चेक करें। संदिग्ध मैसेज को इग्नोर/रिपोर्ट करें। KYC अपडेट करना गलत- कॉल/लिंक के जरिए KYC अपडेट करना। किसी को डॉक्यूमेंट/OTP शेयर करना। सही- सिर्फ बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट/ब्रांच पर ही KYC अपडेट करें। बैंक से जुड़ी कॉल रिसीव करना गलत- कॉल पर OTP, PIN, CVV शेयर करना। दबाव में आना। सही- कॉलर की पहचान वेरिफाई करें। शक होने पर रिपोर्ट करें। टिकट बुकिंग, शॉपिंग गलत- फेक ऑफर या बहुत सस्ते डील पर तुरंत पेमेंट करना। अनजान साइट पर कार्ड डिटेल डालना। सही- सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट/एप का इस्तेमाल करें। ट्रांजैक्शन अलर्ट देखना गलत- अलर्ट को नजरअंदाज करना। देर से शिकायत करना। सही- हर SMS/ईमेल अलर्ट तुरंत चेक करें। अनजान ट्रांजैक्शन पर बैंक को तुरंत सूचित करें। सवाल- फर्जी मैसेज, एप और लिंक की पहचान कैसे करें? जवाब- फर्जी मैसेज, एप और लिंक आजकल साइबर ठगी का सबसे कॉमन तरीके हैं। इनकी पहचान के लिए कुछ संकेत याद रखें। ग्राफिक में देखिए- सवाल- इस स्कैम से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें? जवाब- इसके लिए कुछ बुनियादी सावधानियां अपनाएं। इन्हें ग्राफिक में देखिए- सवाल- SBI का आधिकाारिक एप क्या है? इसे कैसे डाउनलोड करें? जवाब- SBI का आधिकारिक एप ‘YONO SBI’ है। यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का ऑफिशियल मोबाइल बैंकिंग एप है, जिससे आप

Mumbai Watermelon Death Mystery; Summer Food Poisoning Symptoms Health Risks Explained

Mumbai Watermelon Death Mystery; Summer Food Poisoning Symptoms Health Risks Explained

Hindi News Lifestyle Mumbai Watermelon Death Mystery; Summer Food Poisoning Symptoms Health Risks Explained 17 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक 25 अप्रैल को मुंबई में एक परिवार के चार लोगों की डायरिया और उल्टी के कारण मौत हो गई। पूरे परिवार ने डिनर के बाद देर रात तरबूज खाया था। अटॉप्सी रिपोर्ट में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है। एक हफ्ते पहले, गुजरात के दाहोद में एक शादी समारोह में खाने के बाद 400 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए। इन्हें उल्टी- दस्त होने लगे। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ‘अमेरिकन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (CDC) के अनुसार, गर्मियों में फूड पॉइजनिंग के मामले ज्यादा सामने आते हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- गर्मियों में फूड पॉइजनिंग क्यों होती है? क्या यह संक्रामक भी हो सकती है? इसके लक्षण क्या हैं? एक्सपर्ट: डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- फूड पॉइजनिंग क्या होती है? जवाब- यह खराब या संक्रमित भोजन से होने वाली बीमारी है। इसमें उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। सवाल- फूड पॉइजनिंग क्यों होती है? जवाब- फूड पॉइजनिंग की मुख्य वजह खराब या दूषित भोजन है। गर्मियों में भोजन में जर्म्स या टॉक्सिन्स जल्दी पैदा हो जाते हैं। यह खराब फूड हैंडलिंग और हाइजीन की कमी के कारण होता है। अधपका या बासी खाना खाने से बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं। गंदे हाथ, बर्तन या किचन से खाना दूषित हो सकता है। कच्चे और पके भोजन को साथ रखने (क्रॉस-कंटैमिनेशन) से जर्म्स फैलते हैं। दूषित पानी या खुला स्ट्रीट फूड भी वजह है। आमतौर पर फूड पॉइजनिंग इन कीटाणुओं के कारण होती है– बैक्टीरिया साल्मोनेला (Salmonella) ई. कोलाई (E. coli) वायरस नोरोवायरस (Norovirus) हेपेटाइटिस A पैरासाइट जियार्डिया (Giardia) क्रिप्टोस्पोरिडियम (Cryptosporidium) टॉक्सिन्स स्टैफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (Clostridium botulinum) सवाल- गर्मी के मौसम में फूड पॉइजनिंग के केस क्यों बढ़ जाते हैं? जवाब- गर्मी के मौसम में तापमान और नमी (ह्यूमिडिटी) बढ़ जाती है, जो बैक्टीरिया पनपने और बढ़ने के लिए एकदम अनुकूल है। 4°C से 60°C के बीच का तापमान ‘डेंजर जोन’ होता है, जिसमें जर्म्स तेजी से बढ़ते हैं। इस दौरान साल्मोनेला, ई. कोलाई और स्टैफिलोकोकस जैसे बैक्टीरिया जल्दी फैलते हैं। इससे गर्मियों में खाना जल्दी खराब हो जाता है। यही कारण है कि इस मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले ज्यादा आते हैं। सवाल- क्या फूड पॉइजनिंग संक्रामक भी हो सकती है? जवाब- फूड पॉइजनिंग सीधे तौर पर संक्रामक बीमारी नहीं है। अगर इसकी वजह टॉक्सिन्स हैं, तो ये एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। अगर कारण बैक्टीरिया या वायरस हैं तो ये फैल सकते हैं। गंदे हाथ, संक्रमित भोजन या पानी से बैक्टीरिया दूसरों के शरीर में भी जा सकते हैं। खासकर नोरोवायरस जैसे वायरस तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए साफ-सफाई रखना और हाथ धोना जरूरी है। सवाल- फूड पॉइजनिंग और फूड इन्फेक्शन में क्या फर्क है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझते हैं- फूड पॉइजनिंग भोजन में पनपे टॉक्सिन शरीर में जाकर इन्फेक्शन पैदा करते हैं। टॉक्सिन सीधे पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। आमतौर पर कुछ घंटों के भीतर ही लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसके मुख्य लक्षण उल्टी, मतली, पेट दर्द और दस्त हैं। फूड इन्फेक्शन भोजन के साथ जीवित बैक्टीरिया, वायरस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ये जर्म्स शरीर के अंदर बढ़ते हैं और संक्रमण पैदा करते हैं। आमतौर पर 12-48 घंटे या उससे अधिक समय बाद लक्षण दिखाई देते हैं। इसके मुख्य लक्षण दस्त, पेट दर्द, बुखार और कमजोरी है। सवाल- फूड पॉइजनिंग के लक्षण क्या होते हैं? जवाब- फूड पॉइजनिंग होने पर पाचन तंत्र से जुड़े लक्षण दिखते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या खाने से फूड पॉइजनिंग का रिस्क सबसे ज्यादा होता है? जवाब- कुछ फूड्स में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं। इसलिए इनसे फूड पॉइजनिंग का रिस्क ज्यादा होता है। नीचे पॉइंटर्स में देखिए– कच्चे या अधपके मांस और अंडे में बैक्टीरिया हो सकते हैं। अनपॉश्चराइज्ड दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स से भी जोखिम होता है। कटे हुए फल-सब्जियां और स्ट्रीट फूड जल्दी दूषित हो सकते हैं। बासी या लंबे समय तक बाहर रखा खाना भी खतरनाक होता है। दूषित पानी और बर्फ भी बड़ी वजह हैं। ग्राफिक में सभी फूड्स की लिस्ट देखिए- सवाल- अगर फूड पॉइजनिंग हो जाए तो सबसे पहले क्या घरेलू उपाय करने चाहिए? जवाब- फूड पॉइजनिंग होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसलिए बॉडी को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। साथ ही डाइजेशन को आराम देने वाली चीजें खाएं। सभी उपाय ग्राफिक में देखिए- सवाल- फूड पॉइजनिंग होने पर क्या खाएं और क्या बिल्कुल न खाएं? जवाब- फूड पॉइजनिंग के दौरान ऐसी चीजें खानी चाहिए, जो पेट पर ज्यादा दबाव न डालें और आसानी से पच जाएं। ग्राफिक में देखते हैं, क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए- सवाल- फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- थोड़ी सी सावधानी और हाइजीन अपनाकर इससे आसानी से बचा जा सकता है। ग्राफिक्स में देखिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए- सवाल– क्या फूड पॉइजनिंग जानलेवा भी हो सकती है? जवाब- ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग कुछ घंटों या कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। हालांकि संक्रमण गंभीर होने पर यह खतरनाक भी हो सकती है। सवाल– फूड पॉइजनिंग होने पर कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है? जवाब- अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या ज्यादा गंभीर हो जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। पॉइंटर्स से समझते हैं कौन से लक्षण गंभीर हो सकते हैं- लगातार उल्टी या दस्त। तेज बुखार। चक्कर, कमजोरी और मुंह सूखना। मल में खून आना। छोटे बच्चे, बुजुर्ग या गर्भवती महिला में लक्षण गंभीर होने का इंतजार न करें, उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाएं। …………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- फर्मेंटेड फूड खाने से बच्ची की मौत:गर्मियों में ओवर फर्मेंटेशन से इन हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क, बरतें 5 सावधानियां ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक सरकारी स्कूल में फर्मेंटेड चावल खाने के बाद एक 12 साल की बच्ची की मौत हो गई। वहीं 150 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गए। बच्चों ने पखाला भात (फर्मेंटेड चावल), आलू भरता और आम की चटनी खाई थी। पूरी खबर पढ़ें…

Mushroom Supplements Explained; Types Benefits & Side Effects

Mushroom Supplements Explained; Types Benefits & Side Effects

Hindi News Lifestyle Mushroom Supplements Explained; Types Benefits & Side Effects | Lion’s Mane Reishi 12 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक हेल्थ और फिटनेस की दुनिया में इन दिनों एक नया ट्रेंड पॉपुलर हो रहा है- ‘मशरूम सप्लीमेंट।’ सोशल मीडिया से लेकर जिम तक, हर जगह इसके फायदों की चर्चा हो रही है। कोई इसे इम्यूनिटी बूस्टर बता रहा है तो कोई ब्रेन फंक्शन और एनर्जी के लिए गेम-चेंजर। सवाल ये है कि क्या ये सच में इतना असरदार है या सिर्फ एक ट्रेंड है? एक्सपर्ट्स इस बारे में क्या कह रहे हैं? ऐसे सभी सवालों के जवाब जानना जरूरी है, ताकि आप सेहत के लिए सही और सुरक्षित फैसला ले सकें। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज मशरूम सप्लीमेंट की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- ये खाने वाले मशरूम से कैसे अलग है? इसके हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं? ये सारे फैक्ट साइंटिफिकली साबित हुए हैं या नहीं। एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’ सवाल- मशरूम सप्लीमेंट क्या है? जवाब- ये एक ऐसा न्यूट्रिशनल प्रोडक्ट है, जो मशरूम की मेडिसिनल प्रॉपर्टीज से बनाया जाता है। इसके कई प्रकार हैं- रीशी (Reishi)- इम्यूनिटी बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए। लायन्स मेन (Lion’s Mane)- ब्रेन और याददाश्त के लिए। कॉर्डिसेप्स (Cordyceps)- एनर्जी और स्टैमिना बढ़ाने के लिए। चागा (Chaga)- एंटीऑक्सिडेंट्स के लिए। शिटाके (Shiitake)- हार्ट हेल्थ और इम्यून सिस्टम के लिए। सवाल- ये खाने वाले मशरूम से कैसे अलग है? जवाब- मशरूम सप्लीमेंट और खाने वाले मशरूम (एडिबल मशरूम), दोनों एक ही सोर्स से आते हैं, लेकिन इनका उपयोग, प्रोसेसिंग और असर अलग होते हैं। 1. उद्देश्य खाने वाले मशरूम: जैसे बटन मशरूम। इसकी सब्जी बनती है। मशरूम सप्लीमेंट: इम्यूनिटी, ब्रेन, एनर्जी जैसे हेल्थ बेनिफिट्स के लिए लिया जाता है। 2. बनाने का तरीका खाने वाले मशरूम: सीधे उगाकर-पकाकर खाया जाता है। मशरूम सप्लीमेंट: मशरूम को सुखाकर, पीसकर या उसका एक्सट्रैक्ट निकालकर कैप्सूल/पाउडर में बदला जाता है। 3. न्यूट्रिएंट्स खाने वाले मशरूम: सामान्य न्यूट्रिशन (प्रोटीन, फाइबर, विटामिन) देता है। मशरूम सप्लीमेंट: इसमें बीटा-ग्लूकन्स जैसे खास एक्टिव कंपाउंड्स होते हैं। 4. असर खाने वाले मशरूम: धीरे-धीरे हेल्थ को सपोर्ट करता है। मशरूम सप्लीमेंट: याददाश्त, इम्यूनिटी, एनर्जी जैसे स्पेसिफिक गोल के लिए बनाया जाता है। सवाल- मशरूम सप्लीमेंट अभी ट्रेंड में क्यों है? भारत में इसका मार्केट कितना बड़ा है? जवाब- मशरूम एक ‘सुपरफूड’ है। इसलिए इससे बने सप्लीमेंट्स लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इसके कई कारण हैं- मशरूम सप्लीमेंट को कॉग्निटिव हेल्थ और स्ट्रेस कंट्रोल से जोड़ा जा रहा है। केमिकल सप्लीमेंट्स की जगह लोग नेचुरल और आयुर्वेदिक विकल्प अपना रहे हैं। मशरूम को ‘एडाप्टोजेन’ माना जाता है। यानी ये शरीर को परिस्थिति के मुताबिक ढलने के लिए तैयार करता है। कोविड के बाद इम्यूनिटी पर फोकस बढ़ा है, जिससे फिटनेस फ्रीक लोगों के बीच मशरूम सप्लीमेंट्स तेजी से पॉपुलर हुए हैं। भारत में मशरूम सप्लीमेंट का मार्केट मार्केट रिसर्च और कंसल्टिंग कंपनी ‘ग्रांड व्यू रिसर्च’ के मुताबिक, भारत में साल 2023 में मशरूम सप्लीमेंट्स का मार्केट लगभग 5,800 करोड़ रुपए था। इसके साल 2030 तक बढ़कर 11,800 करोड़ रुपए होने की संभावना है। यह लगभग हर साल 10-11% ग्रोथ कर रहा है। सवाल- मशरूम सप्लीमेंट्स किस-किस फॉर्म में आते हैं? जवाब- मशरूम सप्लीमेंट्स कई फॉर्म में बाजार में उपलब्ध हैं- कैप्सूल टैबलेट पाउडर लिक्विड एक्सट्रैक्ट/टिंचर मशरूम कॉफी/टी गमीज रेडी-टू-ड्रिंक/शॉट्स प्रोटीन बार्स चॉकलेट स्नैक्स सवाल- मशरूम सप्लीमेंट्स दावा करते हैं कि ये इम्यूनिटी और ब्रेन के लिए अच्छे हैं। क्या ये दावे साइंटिफिकली प्रूवेन हैं? जवाब- आइए देखते हैं साइंस इस बारे में क्या कहता है- ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में साल 2024 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, कुछ मशरूम में बीटा-ग्लूकन नाम के कंपाउंड होते हैं। ये इम्यून सेल्स को एक्टिवेट कर सकते हैं। लैब और एनिमल स्टडीज में पॉजिटिव असर भी दिखा है। इंसानों पर रिसर्च- क्लिनिकल ट्रायल्स में पता चला है कि- ‘रीशी’ मशरूम इम्यून रिस्पॉन्स को मॉड्यूलेट कर सकता है। ‘शिटाके’ मशरूम इंफ्लेमेशन कम करने में मदद कर सकता है। स्टडी की लिमिटेशंस स्टडीज का सैंपल साइज छोटा है। लॉन्ग-टर्म इंपैक्ट स्पष्ट नहीं है। सभी ब्रांड्स में एक्टिव कंपाउंड एक जैसे नहीं होते हैं। मशरूम सप्लीमेंट्स से इम्यूनिटी बूस्ट हो सकती है, लेकिन इसे स्ट्रॉन्गली प्रूवेन नहीं कहा जा सकता है। ब्रेन हेल्थ और मेमोरी का दावा कितना सच? ‘लायन्स मेन’ में हेरिसेनोन्स, एरिनासिन्स कंपाउंड्स होते हैं। ये नर्व ग्रोथ फैक्टर (NGF) को स्टिमुलेट कर सकते हैं। स्टडी क्या कहती है? इंसानों पर हुई कुछ स्टडीज में हल्का कॉग्निटिव इम्प्रूवमेंट देखा गया है। एनिमल स्टडीज में मेमोरी और न्यूरॉन ग्रोथ बेहतर हुआ। स्टडी की लिमिटेशन स्टडीज बहुत लिमिटेड हैं। अल्जाइमर्स या डिमेंशिया पर स्ट्रॉन्ग एविडेंस नहीं हैं। निष्कर्ष इसके रिजल्ट ब्रेन हेल्थ के लिए प्रॉमिसिंग हैं, लेकिन अभी क्लिनिकली प्रूवेन नहीं हैं। सवाल- अब तक की साइंस स्टडीज के मुताबिक मशरूम सप्लीमेंट्स के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- न्यूट्रिशन साइंस इसके कई फायदे बताता है। सभी फायदे ग्राफिक में देखें- सवाल- क्या मशरूम सप्लीमेंट्स का कोई साइड इफेक्ट भी है? जवाब- मशरूम सप्लीमेंट्स आमतौर पर नेचुरल होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इनके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते। अब तक की स्टडीज में कुछ संभावित साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं- सवाल- क्या ये सप्लीमेंट अन्य दवाओं के साथ रिएक्ट करते हैं? जवाब- हां, मशरूम सप्लीमेंट्स कुछ दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकते हैं। यह हर व्यक्ति में नहीं होता, लेकिन साइंस और क्लिनिकल रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ कॉम्बिनेशन में सावधानी जरूरी है। जैसेकि- ब्लड थिनर दवाओं के साथ। डायबिटीज की दवाओं के साथ। ब्लड प्रेशर की दवाओं के साथ। इम्यूनोसप्रेसेंट दवाओं के साथ। सेडेटिव और स्लीप मेडिसिन के साथ। कीमोथेरेपी या कैंसर ड्रग के साथ। सवाल- क्या मशरूम सप्लीमेंट्स FDA और FSSAI से रेगुलेटेड हैं? जवाब- हां, मशरूम सप्लीमेंट्स FDA (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) दोनों के तहत कुछ हद तक रेगुलेटेड हैं। लेकिन ये फूड सप्लीमेंट्स हैं, इसलिए पूरी तरह टेस्टेड और अप्रूव्ड नहीं होते हैं। इसे खरीदते समय खुद स्मार्ट रहना जरूरी है। सवाल- असली मशरूम खाना ज्यादा फायदेमंद है या उसका सप्लीमेंट लेना? जवाब- खाने वाले मशरूम ज्यादा बेहतर और सुरक्षित विकल्प हैं, लेकिन कुछ खास स्थितियों में सप्लीमेंट भी काम आ