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Heat Headache Symptoms Explained; Trigger Points & Treatment

Heat Headache Symptoms Explained; Trigger Points & Treatment
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19 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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गर्मियों में कुछ लोगों को सिरदर्द, भारीपन जैसी समस्याएं होती हैं। कभी अचानक चक्कर आ जाता है। कई बार तो इसकी वजह से डेली रुटीन तक प्रभावित हो जाता है।

तेज गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। पसीने के साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकलते हैं। इससे सिरदर्द, थकान, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं।

मेडिसिन की भाषा में इसे ‘हीट हेडेक’ कहते हैं। यह कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर का एक संकेत है कि वह गर्मी से परेशान है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • हीट हेडेक क्या है? ये क्यों होता है?
  • इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट- डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- हीट हेडेक (सिरदर्द) क्या होता है?

जवाब- हीट हेडेक गर्म टेम्परेचर की वजह से होने वाला सिरदर्द है। यह तेज गर्मी, धूप या शरीर के ज्यादा गर्म होने की वजह से होता है। इसे ‘हीट-इंड्यूस्ड हेडेक’ भी कहा जाता है।

पॉइंटर्स से इसे समझिए-

  • हीट हेडेक शरीर की एक प्रतिक्रिया है।
  • जब शरीर को ज्यादा गर्मी लगती है या पानी की कमी होती है तो सिरदर्द हो सकता है।
  • यह दर्द अक्सर सिर के दोनों तरफ या कनपटियों के पास महसूस होता है।
  • कुछ लोगों को चक्कर, ज्यादा प्यास, कमजोरी या थकान भी महसूस हो सकती है।

सवाल- हीट हेडेक क्यों होता है?

जवाब- हीट हेडेक आमतौर पर तीन मुख्य कारणों से होता है-

  • डिहाइड्रेशन।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी।
  • बॉडी टेम्परेचर इंबैलेंस।

इसे ऐसे समझिए–

  • मौसम बहुत गर्म होने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है।
  • इससे शरीर से पानी और सोडियम-पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं।
  • गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए ब्लड फ्लो भी बढ़ जाता है।
  • इससे सिर की नसों पर दबाव बढ़ सकता है और सिरदर्द शुरू हो सकता है।
  • लंबे समय तक धूप में रहने, कम पानी कम पीने या बहुत ज्यादा थकान से हीट हेडेक का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- क्या हीट हेडेक नॉर्मल हेडेक या माइग्रेन से अलग होता है?

जवाब- हीट हेडेक सामान्य सिरदर्द या माइग्रेन से अलग है, क्योंकि इसका मुख्य कारण गर्मी और शरीर में पानी की कमी है।

  • सामान्य सिरदर्द अक्सर तनाव, थकान या नींद की कमी से होता है।
  • माइग्रेन में सिर के एक तरफ तेज दर्द के साथ मतली और उल्टी हो सकती है।
  • तेज रोशनी और आवाज से दर्द ट्रिगर हो सकता है।

सवाल- किन स्थितियों में हीट हेडेक होने का रिस्क बढ़ जाता हैं?

जवाब- कुछ परिस्थितियों में हीट हेडेक का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल- हीट हेडेक के लक्षण और संकेत क्या होते हैं?

जवाब- हीट हेडेक के लक्षण शुरुआत में अमूमन हल्के होते हैं, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये बढ़ सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में कौन-सी आदतें हीट हेडेक को ट्रिगर करती हैं?

जवाब- गर्मियों में रोजमर्रा की कुछ आदतें हीट हेडेक बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए-

1. बॉडी सिग्नल इग्नोर करना

  • प्यास लगने पर पानी न पीना।
  • सिर भारी लगने पर भी ब्रेक न लेना।
  • थकान को नजरअंदाज करना।

2. गलत टाइमिंग

  • तेज धूप में बाहर निकलना।
  • गलत टाइम पर वर्कआउट करना।
  • देर रात तक जागना।
  • सुबह डिहाइड्रेटेड उठना।

3. इंस्टेंट एनर्जी पर निर्भरता

  • बार-बार चाय/कॉफी पीना।
  • शुगरी ड्रिंक्स पीना।

4. रेस्ट और रिकवरी की कमी

  • बिना ब्रेक के लगातार काम करना।
  • AC/कूल एरिया में टाइम न बिताना।
  • ट्रैवल के दौरान खुद को कूल न रखना।

सवाल- गर्मियों में किन लोगों को हीट हेडेक का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- कुछ लोगों में हीट हेडेक का जोखिम दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इस ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट हेडेक से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- कुछ आसान आदतें अपनाकर हीट हेडेक से काफी हद तक बचा जा सकता है। सभी हेल्दी आदतें ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर हीट हेडेक हो तो क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए?

जवाब- कुछ लोग सिरदर्द होने पर कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है। जैसेकि–

  • ज्यादा चाय-कॉफी पीना।
  • मसालेदार या हैवी डाइट लेना।
  • तेज धूप में काम करना।
  • कम पानी पीना।
  • शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना।

सवाल- क्या सनस्ट्रोक और हीट हेडेक में कोई रिलेशन होता है?

जवाब- हां, कई बार हीट हेडेक सनस्ट्रोक या हीट-इलनेस का शुरुआती संकेत हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • जब बॉडी का टेम्परेचर बढ़ जाता है और वह खुद को ठंडा नहीं कर पाता तो हीट एग्जॉशन या सनस्ट्रोक जैसी कंडीशन बन सकती है।
  • इन कंडीशंस में सिरदर्द के साथ चक्कर, उल्टी, तेज बुखार या बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • अगर सिरदर्द के साथ बुखार के लक्षण हों, उल्टी हो या बेहोशी आए तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- क्या बार-बार होने वाला हीट हेडेक किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है?

जवाब- हां, कभी-कभी ये गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

कब चिंता की बात हो सकती है?

  • अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना।
  • तेज बुखार।
  • गर्दन अकड़ना।
  • लगातार उल्टी होना।
  • चक्कर या बेहोशी।
  • बार-बार ब्लड प्रेशर बढ़ना।

सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है?

जवाब- ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं-

  • दर्द बहुत तेज हो।
  • दर्द लंबे समय तक बना रहे।
  • उल्टी, चक्कर, तेज बुखार या बेहोशी के लक्षण दिखें।

कुल मिलाकर, हीट हेडेक के रूप में शरीर हमसे ये कह रहा होता है कि मुझे पानी, आराम और ठंडे माहौल की जरूरत है। गर्मियों में बस थोड़ी–सी सावधानी बरतकर और शरीर को हाइड्रेटेड रखकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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तेज गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। पसीने के साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकलते हैं। इससे सिरदर्द, थकान, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं।

मेडिसिन की भाषा में इसे ‘हीट हेडेक’ कहते हैं। यह कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर का एक संकेत है कि वह गर्मी से परेशान है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि-

  • हीट हेडेक क्या है? ये क्यों होता है?
  • इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट- डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- हीट हेडेक (सिरदर्द) क्या होता है?

जवाब- हीट हेडेक गर्म टेम्परेचर की वजह से होने वाला सिरदर्द है। यह तेज गर्मी, धूप या शरीर के ज्यादा गर्म होने की वजह से होता है। इसे ‘हीट-इंड्यूस्ड हेडेक’ भी कहा जाता है।

पॉइंटर्स से इसे समझिए-

  • हीट हेडेक शरीर की एक प्रतिक्रिया है।
  • जब शरीर को ज्यादा गर्मी लगती है या पानी की कमी होती है तो सिरदर्द हो सकता है।
  • यह दर्द अक्सर सिर के दोनों तरफ या कनपटियों के पास महसूस होता है।
  • कुछ लोगों को चक्कर, ज्यादा प्यास, कमजोरी या थकान भी महसूस हो सकती है।

सवाल- हीट हेडेक क्यों होता है?

जवाब- हीट हेडेक आमतौर पर तीन मुख्य कारणों से होता है-

  • डिहाइड्रेशन।
  • इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी।
  • बॉडी टेम्परेचर इंबैलेंस।

इसे ऐसे समझिए–

  • मौसम बहुत गर्म होने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है।
  • इससे शरीर से पानी और सोडियम-पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं।
  • गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए ब्लड फ्लो भी बढ़ जाता है।
  • इससे सिर की नसों पर दबाव बढ़ सकता है और सिरदर्द शुरू हो सकता है।
  • लंबे समय तक धूप में रहने, कम पानी कम पीने या बहुत ज्यादा थकान से हीट हेडेक का रिस्क बढ़ जाता है।

सवाल- क्या हीट हेडेक नॉर्मल हेडेक या माइग्रेन से अलग होता है?

जवाब- हीट हेडेक सामान्य सिरदर्द या माइग्रेन से अलग है, क्योंकि इसका मुख्य कारण गर्मी और शरीर में पानी की कमी है।

  • सामान्य सिरदर्द अक्सर तनाव, थकान या नींद की कमी से होता है।
  • माइग्रेन में सिर के एक तरफ तेज दर्द के साथ मतली और उल्टी हो सकती है।
  • तेज रोशनी और आवाज से दर्द ट्रिगर हो सकता है।

सवाल- किन स्थितियों में हीट हेडेक होने का रिस्क बढ़ जाता हैं?

जवाब- कुछ परिस्थितियों में हीट हेडेक का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल- हीट हेडेक के लक्षण और संकेत क्या होते हैं?

जवाब- हीट हेडेक के लक्षण शुरुआत में अमूमन हल्के होते हैं, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये बढ़ सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए-

सवाल- गर्मियों में कौन-सी आदतें हीट हेडेक को ट्रिगर करती हैं?

जवाब- गर्मियों में रोजमर्रा की कुछ आदतें हीट हेडेक बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए-

1. बॉडी सिग्नल इग्नोर करना

  • प्यास लगने पर पानी न पीना।
  • सिर भारी लगने पर भी ब्रेक न लेना।
  • थकान को नजरअंदाज करना।

2. गलत टाइमिंग

  • तेज धूप में बाहर निकलना।
  • गलत टाइम पर वर्कआउट करना।
  • देर रात तक जागना।
  • सुबह डिहाइड्रेटेड उठना।

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  • बार-बार चाय/कॉफी पीना।
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  • ट्रैवल के दौरान खुद को कूल न रखना।

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जवाब- कुछ लोगों में हीट हेडेक का जोखिम दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इस ग्राफिक में देखिए-

सवाल- हीट हेडेक से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

जवाब- कुछ आसान आदतें अपनाकर हीट हेडेक से काफी हद तक बचा जा सकता है। सभी हेल्दी आदतें ग्राफिक में देखिए-

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  • मसालेदार या हैवी डाइट लेना।
  • तेज धूप में काम करना।
  • कम पानी पीना।
  • शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना।

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जवाब- हां, कई बार हीट हेडेक सनस्ट्रोक या हीट-इलनेस का शुरुआती संकेत हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • जब बॉडी का टेम्परेचर बढ़ जाता है और वह खुद को ठंडा नहीं कर पाता तो हीट एग्जॉशन या सनस्ट्रोक जैसी कंडीशन बन सकती है।
  • इन कंडीशंस में सिरदर्द के साथ चक्कर, उल्टी, तेज बुखार या बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
  • अगर सिरदर्द के साथ बुखार के लक्षण हों, उल्टी हो या बेहोशी आए तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

सवाल- क्या बार-बार होने वाला हीट हेडेक किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है?

जवाब- हां, कभी-कभी ये गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

कब चिंता की बात हो सकती है?

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  • तेज बुखार।
  • गर्दन अकड़ना।
  • लगातार उल्टी होना।
  • चक्कर या बेहोशी।
  • बार-बार ब्लड प्रेशर बढ़ना।

सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है?

जवाब- ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं-

  • दर्द बहुत तेज हो।
  • दर्द लंबे समय तक बना रहे।
  • उल्टी, चक्कर, तेज बुखार या बेहोशी के लक्षण दिखें।

कुल मिलाकर, हीट हेडेक के रूप में शरीर हमसे ये कह रहा होता है कि मुझे पानी, आराम और ठंडे माहौल की जरूरत है। गर्मियों में बस थोड़ी–सी सावधानी बरतकर और शरीर को हाइड्रेटेड रखकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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गर्मियों में लोग आइसक्रीम को ‘कूलिंग फूड’ मानकर खाते हैं। लेकिन ज्यादा आइसक्रीम खाने से कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता है। ये शरीर में इंफ्लेमेशन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ाते हैं। इससे मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम भी बढ़ता है। पूरी खबर पढ़ें…

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