क्या सबकुछ आसानी से मिल जाना खतरनाक? मनोवैज्ञानिक से जानिए ये नई पीढ़ी के लिए कितना घातक

Last Updated:March 29, 2026, 20:54 IST Mental Health Tips : आधुनिक जीवनशैली में लोगों को अब सबकुछ आसानी से मिल रहा है लेकिन ‘लो फ्रस्ट्रेशन टॉलरेंस’ के चलते लोगों का खुद पर कंट्रोल नहीं है. पिछले दिनों एक डॉक्टर ने ही खुदकुशी कर ली. कहा जा रहा है कि उन्हें अपना मानसिक शोषण और पिता की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई. देहरादून के मनोवैज्ञानिक डॉ. मुकुल शर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि वक्त बदलने के साथ-साथ लोगों के व्यवहार पर भी असर पड़ा है. आज की युवा पीढ़ी पुराने समय की युवा पीढ़ी से बिल्कुल अलग है. इसमें सहनशीलता नहीं है. देहरादून. आजकल के बिजी शेड्यूल और स्ट्रेस के लगातार बने रहने से लोग अपनी परेशानियों को दूसरे को नहीं बता पाते हैं और धीरे-धीरे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं. कई बार खुद की जान तक ले लेते हैं. कई बार गुस्से में लोग दूसरों की जान भी ले लेते हैं. वक्त बदलने के साथ-साथ लोगों के व्यवहार पर भी असर पड़ा है. आज की युवा पीढ़ी पुराने समय की युवा पीढ़ी से बिल्कुल अलग है. इसमें सहनशीलता नहीं है. देहरादून में दो छात्र गुटों के झगड़े में मौत और एक डॉक्टर का खुदकुशी करना, इस बात का ताजा उदाहरण है. फिर करें क्या देहरादून के मनोवैज्ञानिक डॉ. मुकुल शर्मा बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में आपको सब कुछ आसानी से मिलता जा रहा है, लेकिन ‘लो फ्रस्ट्रेशन टॉलरेंस’ के चलते लोगों का खुद पर कंट्रोल नहीं है. हाल ही में एक दुखद घटना सामने आई है, जिसमें एक क्वालिफाइड डॉक्टर जो पीजी कर रही थी, उन्होंने कथित तौर पर खुदकुशी कर ली. डॉ. मुकुल कहते हैं कि मानसिक शोषण काम करने के दौरान होता है, कई तरह की परेशानियां भी होती हैं, लेकिन आत्महत्या इसका समाधान नहीं है. हर परेशानी का हल है. उन्हें अपने मानसिक शोषण के साथ ही अपने पिता की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई. इससे उनके अभिभावकों को उम्र भर परेशानी होगी. वह अपने सीनियर्स से मदद ले सकती थीं, परिवार से बात कर सकती थीं. डॉक्टर दूसरों का जीवन बचाते हैं. इस तरह के कदम समाज के लिए अच्छे नहीं हैं. घरवाले क्या करें डॉ. मुकुल कहते हैं कि आजकल युवाओं का बिजी शेड्यूल और डिजिटल आइसोलेशन उनके व्यवहार में बदलाव ला रहा है. पहले लोग सोशल होते थे. कोई भी परेशानी होती थी तो एक-दूसरे से साझा करते थे, लेकिन आज अपने में ही सिमटे रहते हैं, जिससे उनका गुस्सा, चिड़चिड़ापन और स्ट्रेस दूर नहीं हो पता है. धीरे-धीरे में डिप्रेशन में चले जाते हैं. एक-दूसरे से ईर्ष्या रखना और हिंसक बनाना सोशल मीडिया का नतीजा हो सकता है. इसलिए खुद को थोड़ा समय दें. जिन काम से आपको स्ट्रेस रिलीफ मिलता है, वह काम करें. इमोशनल सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश करें. अभिभावकों और टीचर्स को भी इमोशनल इंटेलिजेंस पर जोर देने की जरूरत है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : March 29, 2026, 20:54 IST
प्रदूषण से डायबीटीज की चपेट में आ रहे लोग? नोएडा से कानपुर तक नई आफत, पता भी नहीं चलेगा हो जाओगे रोगी

Last Updated:March 29, 2026, 20:29 IST Diabetes Causes : डायबिटीज (शुगर) को अब तक गलत खानपान या खराब लाइफस्टाइल से हुई बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण ने इसे और खतरनाक बना दिया है. हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण सीधे शरीर के अंदर जाकर ऐसी प्रक्रियाएं शुरू कर देते हैं, जो धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं और व्यक्ति को डायबिटीज की ओर धकेल देती हैं. लोकल 18 ने इस बारे में कानपुर के चिकित्सक डॉ. एसके गौतम से बात की. वे बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामलों में जो तेजी आई है, उसमें प्रदूषण की भूमिका अब साफ दिखने लगी है. कानपुर. अब डायबिटीज सिर्फ गलत खानपान या खराब लाइफस्टाइल की बीमारी नहीं रह गई है. तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण ने इस बीमारी को और खतरनाक बना दिया है. डॉक्टरों के अनुसार, हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण सीधे शरीर के अंदर जाकर ऐसी प्रक्रियाएं शुरू कर देते हैं, जो धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं और व्यक्ति को डायबिटीज की ओर धकेल देती हैं. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके गौतम बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामलों में जो तेजी आई है, उसमें प्रदूषण की भूमिका अब साफ दिखाई देने लगी है. पहले जहां इसे सिर्फ खानपान और लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता था, अब हवा की गुणवत्ता भी एक बड़ा कारण बन चुकी है. कैसे करते हैं काम डॉ. एसके गौतम के मुताबिक, हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे बेहद महीन कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे फेफड़ों से होते हुए ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं. इसके बाद ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उनसे हानिकारक केमिकल रिलीज कराते हैं. यही केमिकल इंसुलिन के काम करने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि शरीर में शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और व्यक्ति डायबिटीज की चपेट में आ जाता है. इन शहरों को खतरा ज्यादा जिन शहरों में प्रदूषण का स्तर ज्यादा है, वहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहर इसका बड़ा उदाहरण हैं. यहां की खराब हवा लोगों के शरीर पर लगातार असर डाल रही है. कानपुर जैसे शहरों में भी सर्दियों और गर्मियों में धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है. लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने वाले लोग धीरे-धीरे इस बीमारी की ओर बढ़ते जाते हैं, उन्हें इसका पता भी नहीं चलता. फिर करें क्याडॉ. गौतम का कहना है कि इस खतरे से पूरी तरह बच पाना मुश्किल जरूर है, लेकिन सावधानी से जोखिम कम किया जा सकता है. जहां प्रदूषण अधिक हो, वहां मास्क का उपयोग जरूर करना चाहिए. सुबह-शाम जब हवा में धूल ज्यादा हो, उस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए. शरीर को मजबूत रखना भी जरूरी है, ताकि प्रदूषण का असर कम हो सके. समय-समय पर जांच कराना और शुगर लेवल पर नजर रखना भी बेहद जरूरी है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : March 29, 2026, 20:29 IST
painkiller side effects | kidney health risk from painkillers | पेनकिलर के नुकसान | दर्द का आयुर्वेदिक इलाज |

Last Updated:March 29, 2026, 18:04 IST Painkiller Side Effects: क्या आप भी सिरदर्द या बदन दर्द होने पर तुरंत पेनकिलर खा लेते हैं? तो रूक जाइए, पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के ली जाने वाली ये दवाएं आपकी किडनी को हमेशा के लिए डैमेज कर सकती हैं. ‘शॉर्टकट’ राहत का ये चक्कर आपको डायलिसिस की दहलीज पर खड़े कर सजता है. जानिए कैसे आयुर्वेद के प्राचीन नुस्खे जैसे हल्दी, गिलोय और गुग्गुल, बिना किसी साइड इफेक्ट के आपके पुराने से पुराने दर्द को जड़ से खत्म कर सकते हैं और आपकी किडनी को सुरक्षित रख सकते हैं. पीलीभीत: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मामूली दर्द होने पर भी लोग तुरंत राहत पाने के लिए पेनकिलर्स का सहारा लेते हैं. खासकर युवाओं में यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है. लेकिन बिना डॉक्टरी परामर्श के बार-बार ली जाने वाली ये दवाएं आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खास तौर पर किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे ने पेनकिलर्स के अत्यधिक उपयोग के बजाय आयुर्वेद वाले सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह दी है. किडनी पर पड़ता है बुरा असरडॉ. आदित्य पांडे के मुताबिक, पेनकिलर्स को तकनीकी भाषा में ‘NSAIDs’ कहा जाता है और इनका सबसे घातक प्रभाव किडनी पर पड़ता है. लंबे समय तक या आदत के तौर पर पेनकिलर्स लेने से किडनी के ग्लोमेरुलो नेफ्रॉन्स धीरे-धीरे डैमेज होने लगते हैं. इससे किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है और स्टोनिंग या ब्लैडर खाली होने में दिक्कत जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. गंभीर मामलों में पेशाब के साथ खून आने की समस्या भी आम हो जाती है. इसलिए, किसी भी दवा का सेवन केवल चिकित्सक की अनुमति से ही करना चाहिए. आयुर्वेद में दर्द निवारण के सुरक्षित विकल्पडॉ. पांडे बताते हैं कि आयुर्वेद एक प्राचीन विज्ञान है, जिसमें दर्द निवारण के कई प्रभावी तरीके मौजूद हैं. हालांकि आयुर्वेद से राहत मिलने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों को सुरक्षित रखता है. अकरकरा का काढ़ा और गिलोय का सेवन दर्द और सूजन को कम करने में काफी मददगार होता है. इसके अलावा, हल्दी एक प्राकृतिक हीलर है. चोट लगने या आंतरिक दर्द की स्थिति में गर्म दूध में हल्दी डालकर पी सकते है, जो सूजन और दर्द को तेजी से कम करती है. पुरानी सूजन और दर्द के लिए गुग्गुल का इस्तेमालआयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के गुग्गुल जैसे कैशोर गुग्गुल और महायोगराज गुग्गुल का उल्लेख है, जो शरीर की पुरानी सूजन और दर्द को जड़ से खत्म करने में सक्षम हैं. वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे का मानना है कि दवाओं के चयन में सावधानी बरतना ही जीवन की सुरक्षा है. पेनकिलर्स की जगह जीवनशैली में सुधार और आयुर्वेद के प्राकृतिक नुस्खों को अपनाकर हम अपनी किडनी और अन्य अंगों को भविष्य के खतरों से बचा सकते हैं. थोड़ी सी राहत के लिए किया गया शॉर्टकट जीवन पर भारी पड़ सकता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Pilibhit,Pilibhit,Uttar Pradesh First Published : March 29, 2026, 18:04 IST
ट्यूमर-कैंसर से लड़ने में कारगर किचन की दो इंच की यह चीज, चेहरे की समस्या की भी दुश्मन! जानें आयुर्वेदिक फायदे

Last Updated:March 29, 2026, 16:39 IST Health Tips: जो लोग अक्सर सर्दी, जुकाम और बुखार की चपेट में आ जाते हैं, तो पीपली का सेवन उनके लिए उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है. आइए एक्सपर्ट से पीपली के फायदों के बारे में जानते हैं. देहरादून: हमारे किचन में मौजूद रखी चीजें हमारे लिए कई तरह से उपयोगी होती हैं. सब्जियों का स्वाद बढ़ाने वाले गर्म मसाले कई बीमारियों के इलाज के तोड़ होते हैं. ऐसा ही है पीपली, जिसे आयुर्वेद के लिए वरदान माना गया है. आयुर्वेद के अनुसार, इसमें पाइपरलोंगुमाइन नाम का एक केमिकल कंपाउंड है, जो कैंसर की कोशिकाओं को खत्म में मदद करता है. यह अलग तरह के ट्यूमर की कोशिकाओं को भी नष्ट करता है, जिसमें से एक ब्रेन ट्यूमर भी है. पीपली कफ और सूजन को खत्म करती है. यह कील-मुंहासे, खुजली और कई त्वचा समस्याओं को दूर करती है. इन बीमारियों में कारगरआयुर्वेदिक चिकित्सक सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि पीपली को आयुर्वेद में बहुत लाभकारी बताया गया है, क्योंकि इससे कई फायदे हैं. यह ऐसा मसाला है, जो कफ दोष के इलाज में काम आता है. जिन लोगों को सर्दी, खांसी, जुकाम और सिर दर्द की समस्या होती है, उन्हें आधा चम्मच पीपली पाउडर को गुनगुने पानी से ले लेना चाहिए, इससे आराम मिलता है. उन्होंने बताया कि चेस्ट इनफेक्शन, टीबी और श्वसन तंत्र की समस्याओं में भी यह राहत देता है. लंग्स इनफेक्शन वाले भी इसका उपयोग कर सकते हैं. इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर कर सकते हैं यूजडॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि जो लोग अक्सर सर्दी, जुकाम और बुखार की चपेट में आ जाते हैं, तो पीपली का सेवन उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है. इसमें पाइपरीन नामक तत्व मौजूद होता है, जो शरीर में औषधियों के अवशोषण को बढ़ा देता है. इससे इसके चिकित्सकीय गुणों का प्रभाव ज्यादा होता है. हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन में कारगरइसके अलावा इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और हिपैटोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं. कई रिसर्च में यह पाया गया है कि यह ट्यूमर, कैंसर कोशिकाओं को धीरे-शोर खत्म करता है. पीपली हार्ट और ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यह रक्त संचार को बढ़ाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है. इसके साथ ही यह शरीर की कमजोरी को दूर कर ताकत देता है. खून साफ रहने से स्किन साफ रहती है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : March 29, 2026, 16:39 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
गेंदा के फूल के फायदे: त्वचा, पाचन और सूजन में प्राकृतिक औषधीय लाभ

Last Updated:March 29, 2026, 16:11 IST गेंदा का फूल केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक उपचार भी है. त्वचा की समस्याओं से लेकर पाचन सुधारने, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक, गेंदा का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना गया है. गेंदा का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा-पाठ और सजावट के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गेंदा एक असरदार औषधि भी है. आयुर्वेद में गेंदा के फूल, पत्तियां और यहां तक कि इसके रस का भी उपयोग कई तरह की समस्याओं के इलाज में किया जाता है. त्वचा से जुड़ी समस्याओं में गेंदा बहुत फायदेमंद है. अगर किसी को खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या जलन की समस्या हो, तो गेंदा के फूल का लेप लगाने से आराम मिलता है. यह त्वचा को ठंडक देता है और जलन को कम करता है. इसके अलावा, गेंदा से बना तेल भी त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है. गेंदा का फूल आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, अगर आंखों में जलन, लालिमा या सूजन हो, तो गेंदा के फूल को पानी में उबालकर ठंडा करके उससे आंख धोने से राहत मिलती है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google मालती वर्मा बताती है कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी गेंदा का उपयोग किया जाता है. गेंदा के फूल से बनी चाय या काढ़ा पेट की गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर के अंदर की सफाई करने में भी मदद करता है और पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है. गेंदा का उपयोग सूजन और दर्द कम करने में भी किया जाता है. इसके फूल में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की सूजन को कम करते हैं. अगर किसी को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो गेंदा के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है. गेंदा का फूल महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका उपयोग मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. गेंदा का फूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. नियमित रूप से इसका सीमित उपयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. गांवों और छोटे कस्बों में गेंदा का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में काफी समय से किया जा रहा है. यह आसानी से मिलने वाला और सस्ता पौधा है, जिसे लोग अपने घरों में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि यह आम लोगों के लिए एक सुलभ औषधि बन चुका है. मालती वर्मा बताती है गेंदा का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या गर्भवती महिला को उसका प्रयोग करने से पहले किसी किसी डॉक्टर या और आयुर्वेदाचार्य के सलाह बिना किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग केवल 7 दिन तक ही करना चाहिए. First Published : March 29, 2026, 16:11 IST
इस मीठे फल के पत्ती-छाल में भी छिपे हैं औषधीय गुण, विटामिन-सी और आयरन से भरपूर, गर्मियों में बेहद फायदेमंद

Last Updated:March 29, 2026, 14:35 IST Summer Health Tips: गर्मियों में शरीर को सेहतमंद और रोगों से सही रखने के लिए शहतूत का फल काफी फायदेमंद होता है. इसके फल ही नहीं. पत्ती और छाल में भी आयुर्वेदिक गुण होते हैं. आइए जानते हैं कि शहतूत के क्या-क्या फायदे होते हैं. फिरोजाबाद: गर्मियों के सीजन में वैसे तो कई तरह के फल खाए जाते हैं, लेकिन शहतूत का फल खाने के कई फायदे हैं. ये फल मीठे होने के साथ-साथ हमारे हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक के अनुसार, गर्मियों के इनका सेवन जरूर करना चाहिए. इससे हमारी स्किन को भी फायदा होता है. ये फल आमतौर पर गांव देहात इलाके में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन बेहद कम समय के लिए ही शहतूत के फल देखने को मिलते हैं. गर्मियों में खाने से होते हैं कई फायदे फिरोजाबाद आयुष विंग हॉस्पिटल की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कविता महेश्वरी ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि गर्मियों में शहतूत के फल खूब खाए जाते हैं. आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में इनके पेड़ भी देखने को मिलते हैं. शहतूत का फल मधुर शीत गुण से भरपूर होता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन-सी और आयरन की भरपूर मात्रा पाई जाती है. वही अगर कोई व्यक्ति इस फल का गर्मियों में रोजाना सेवन करता है, तो उसकी कमजोरी भी दूर भागती है. वही इस फल की कई वैरायटी भी होती है. वैसे तो हरे, काले और लाल रंग के शहतूत ही देखने को मिलते हैं. लेकिन और भी तरह की वैरायटी इसमें देखने को मिलती है. गर्मियों में इन्हें खाने का अलग ही आनंद मिलता है. पत्तियां और छाल से भी दूर होती है बीमारियां आयुर्वेदिक चिकित्सक ने कहा कि शहतूत का फल खाने में मीठा लगता है. इसलिए लोग इसे खाते है, लेकिन इसका जूस पीने से कई तरह के फायदे होते हैं. जैसे कब्ज या गले के सूजन में इसका जूस बहुत असरदार होता है. वही फंगल इन्फेक्शन होने पर इनके पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है. गर्मियों में हाथ और पैर में जलन होने पर इसका जूस पीना चाहिए. इससे शरीर को ठंडक मिलती है. शहतूत के फल खाने के बहुत फायदे हैं. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Firozabad,Uttar Pradesh First Published : March 29, 2026, 14:35 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Pumpkin Benefits : वजन घटाए, इम्युनिटी बढ़ाए…99% लोग नहीं जानते कद्दू के ये वाले जादुई फायदे

Last Updated:March 28, 2026, 22:54 IST Pumpkin health benefits : आज हम बात करेंगे कद्दू की, जिसे कोहड़ा के नाम से भी जाना जाता हैं. यह केवल एक साधारण सब्जी नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है. इसमें विटामिन A, C, E, फाइबर और पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके सही सेवन से कई रोग ठीक हो सकते हैं. बलिया की आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह लोकल 18 से कहती हैं कि यह कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है और आंतों को साफ रखता है. यह न केवल नजर को तेज करता है, बल्कि मोतियाबिंद जैसी समस्याओं से भी दूर रखता है. कद्दू कम कैलोरी वाली सब्जी है, जिसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. अगर आप भी पाचन की समस्या से परेशान रहते हैं, तो कद्दू आपकी थाली का अहम हिस्सा जरूर होनी चाहिए. इसमें फाइबर और पानी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं. यह कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है और आंतों को साफ रखता है. हल्का होने के कारण यह पेट पर बोझ भी नहीं डालता और खाने के बाद राहत की अनुभूति होती है. कद्दू यानी कोहड़ा आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी कमाल है. इसमें बीटा-कैरोटीन होता हैं, जो शरीर में जाकर विटामिन A में बदलता है. यह कारण है कि कद्दू आंखों के लिए बेहद जरूरी है. यह न केवल नजर को तेज करता है, बल्कि मोतियाबिंद जैसी समस्याओं से बचाने में भी सहायता कर सकता है. बलिया की सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, कद्दू वजन कम करने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह कम कैलोरी वाली सब्जी है, जिसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. इसी के चलते बार-बार भूख भी नहीं लगती है और अतिरिक्त खाने से बचाव होता है. इस प्रकार से यह वजन नियंत्रित रखने में बड़ा महत्त्वपूर्ण है. Add News18 as Preferred Source on Google कद्दू इम्युनिटी मजबूत करने के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इसके नियमित सही सेवन से सर्दी-जुकाम और संक्रमण से लड़ने की ताकत मिलती है, जिससे आदमी ज्यादा स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करता है. कद्दू का त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में भी कोई जवाब नहीं है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे चमक बनी रहती है. यह समय से पहले झुर्रियां आने से रोकता है और बालों को भी पोषण देकर मजबूत बनाता है यानी यह त्वचा के साथ बालों के लिए भी लाभकारी है. कद्दू दिल की सेहत के लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है. इसमें पोटेशियम और फाइबर पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायता प्रदान करते हैं. इसके नियमित सेवन से हृदय रोगों का खतरा भी कम हो सकता है और दिल लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है. कद्दू के बीज और पत्ते भी कम उपयोगी नहीं हैं. बीजों में मैग्नीशियम, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो हड्डियों और शरीर को मजबूत बनाते हैं. पत्तों में भी पोषक तत्व भरपूर होते हैं. इसको सब्जी पत्ती या फूल की पकौड़ी, चटनी आदि व्यंजन बेहद स्वादिष्ट बनते हैं. ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा सेवन हानिकारक हो सकता है, इसलिए यदि कोई बीमारी हो, तो आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर लें. First Published : March 28, 2026, 22:54 IST
Health Tips: हेल्दी रहना है जरूरी? काला या हरा, कौन देगा ज्यादा हेल्थ बेनिफिट्स? एक्सपर्ट से जानें

Last Updated:March 26, 2026, 20:20 IST Health Tips: आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार पोषक तत्वों की बात करें तो काले अंगूर ज्यादा असरदार माने जाते हैं. इनमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से हेल्दी रखने में मदद करते हैं. हालांकि, विशेषज्ञ बताते है कि, अंगूर का सेवन कभी भी खाली पेट या रात को सोते समय नहीं करना चाहिए. इसका सेवन हमेशा खाने के बाद या दोपहर के समय करना लाभकारी रहता है. Health Tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में कई तरह के ताजे फल आने लगे हैं. इनमें अंगूर की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है. इन दिनों बाजार में दो तरह के अंगूर ज्यादा नजर आ रहे हैं. एक हरे रंग के और दूसरे काले रंग के. लोग स्वाद के हिसाब से इन्हें खरीदते हैं, लेकिन सेहत के हिसाब से कौन सा ज्यादा फायदेमंद है, यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है. आमतौर पर घरों में हरे अंगूर ज्यादा पसंद किए जाते हैं, क्योंकि ये हल्के खट्टे-मीठे होते हैं और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अच्छे लगते हैं. लेकिन आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार पोषक तत्वों की बात करें तो काले अंगूर ज्यादा असरदार माने जाते हैं. इनमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से हेल्दी रखने में मदद करते हैं. हालांकि, विशेषज्ञ बताते है कि, अंगूर का सेवन कभी भी खाली पेट या रात को सोते समय नहीं करना चाहिए. इसका सेवन हमेशा खाने के बाद या दोपहर के समय करना लाभकारी रहता है. काले अंगूर में ज्यादा पोषक तत्व खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ (एमडी) डॉ. संतोष मौर्य बताते हैं कि काले अंगूर में एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और फ्लेवोनॉयड्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व शरीर से गंदगी बाहर निकालने में मदद करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को अंदर से ठंडक देने में भी काले अंगूर उपयोगी माने जाते हैं. उन्होंने बताया कि काले अंगूर में रेस्वेराट्रोल नाम का खास तत्व पाया जाता है. यह तत्व दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है. नियमित मात्रा में काले अंगूर खाने से शरीर की कमजोरी भी कम होती है और थकान जल्दी दूर होती है. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद काले अंगूर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं. इनमें मौजूद फाइबर और पोटेशियम शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक होते हैं. इससे दिल की धमनियां स्वस्थ रहती हैं और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम होता है. इसके अलावा जो लोग वजन कम करना चाहते हैं उनके लिए भी काले अंगूर अच्छा विकल्प माने जाते हैं. इनमें कैलोरी कम होती है और यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करते हैं. इसलिए डाइट में सीमित मात्रा में काले अंगूर शामिल करना फायदेमंद माना जाता है. हरे अंगूर भी कम नहीं हैं उपयोगी हरे अंगूर भी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. गर्मी के मौसम में हरे अंगूर खाने से शरीर को ताजगी मिलती है और पानी की कमी भी कम महसूस होती है. हरे अंगूर खास तौर पर पाचन के लिए अच्छे माने जाते हैं. इन्हें खाने से गैस, एसिडिटी और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. इसलिए जिन लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी रहती है उनके लिए हरे अंगूर उपयोगी साबित हो सकते हैं. स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन विशेषज्ञों के अनुसार काले अंगूर में पोषक तत्व ज्यादा होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हरे अंगूर कम उपयोगी हैं. दोनों ही तरह के अंगूर शरीर को अलग-अलग तरीके से फायदा पहुंचाते हैं. इसलिए मौसम के अनुसार दोनों का सेवन करना बेहतर माना जाता है. अगर शरीर को ज्यादा पोषण देना चाहते हैं तो काले अंगूर को डाइट में शामिल करना अच्छा विकल्प हो सकता है. वहीं रोजाना हल्के और आसानी से पचने वाले फल के रूप में हरे अंगूर भी अच्छा चुनाव माने जाते हैं. About the Author Deepti Sharma Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें Location : Khargone,Madhya Pradesh First Published : March 26, 2026, 20:20 IST
चाय के साथ सभी खाते हैं नमकीन, पर गर्मी में ये आदत कर देगी बड़ा नुकसान! जानें क्या-क्या नहीं खाना चाहिए

Last Updated:March 24, 2026, 22:05 IST Summer Health Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन सहित निमाड़ अंचल में तेज गर्मी के बावजूद चाय पीने वालों की संख्या कम नहीं होती. एमपी ही नहीं यूपी, बिहार, राजस्थान करीब-करीब हर जगह यही हाल है. लेकिन गर्मी में चाय के साथ कुछ चीजें खाना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट मानते हैं कि यह आदत बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है. जानें सब… चाय हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा माना जाता है. कई लोगों को सुबह उठते से ही चाय पीने की आदत होती है तो कई लोग दिन में कई बार चाय पीना और साथ में कुछ खाना भी पसंद करते हैं. लेकिन, गर्मी में यह आदत आपकी सेहत को बिगाड़ सकती है. कुछ चीजें ऐसी है जिन्हें चाय के साथ नहीं खाने की सलाह दी जाती है. खरगोन के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य बताते हैं कि गर्मी में चाय के साथ नमकीन और तली चीजें न खाएं गर्मी के मौसम में चाय के साथ नमकीन, कचौरी, समोसा या ज्यादा तली हुई चीजें खाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है. इससे पेट में जलन और गैस की समस्या बढ़ सकती है. लगातार ऐसा करने से Acidity और Indigestion की परेशानी बढ़ सकती है. कई लोग चाय पीने के बाद या साथ में दही या ठंडे पेय पदार्थ भी ले लेते हैं. डॉक्टर के अनुसार गर्म और ठंडी चीजें एक साथ लेने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है. इससे पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्या हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मी में फल खाना शरीर के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन चाय के साथ फल खाना सही नहीं है. इससे पाचन धीमा हो सकता है और पेट में भारीपन महसूस होता है. लंबे समय तक ऐसा करने से गैस और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है. चाय के साथ भजिया या बेसन से बनी चीजें खाने की आदत कई लोगों में होती है. गर्मी के मौसम में यह आदत शरीर का तापमान बढ़ा सकती है. इससे त्वचा पर दाने या Skin Allergy की समस्या भी हो सकती है. हालांकि, डॉक्टरों का यह भी मानना है कि, गर्मी में खाली पेट चाय पीना सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. इससे पेट में जलन और सिर दर्द की शिकायत हो सकती है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि चाय पीने से पहले हल्का नाश्ता जरूर करें. हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार गर्मी में कम मात्रा में चाय पीना बेहतर होता है. चाय के साथ हल्का और सुपाच्य नाश्ता लें. साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है ताकि शरीर का तापमान संतुलित बना रहे. First Published : March 24, 2026, 22:05 IST
Kurja Plant Benefits : नवजात बच्चों के लिए दादी-नानी से कम नहीं ये पौधा, इसकी कोमल गर्माहट के कहने ही क्या, जानें उपयोग

Last Updated:March 24, 2026, 17:48 IST Kurja plant ke fayde : पहाड़ों में नवजात बच्चों की देखभाल के लिए कुरजा पौधा पारंपरिक नुस्खे में शामिल है. इसकी पत्तियों को हल्का गर्म कर कपड़े में लपेटकर छाती, पीठ या पैरों पर सेकाई दी जाती है. इससे शरीर को गर्माहट, बेहतर रक्त संचार और आराम मिलता है. पिथौरागढ़ की बुजुर्ग नंदी देवी लोकल 18 से बताती हैं कि यह तरीका आज भी फायदेमंद है, बस सावधानी जरूरी है. कुरजा एक जंगली पौधा है. इसकी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से गर्म तासीर (हीट) होती है. पहाड़ों की जिंदगी हमेशा से प्रकृति के बेहद करीब रही है. यहां के लोग आज भी कई मामलों में पुराने पारंपरिक नुस्खों पर भरोसा करते हैं, खासकर जब बात नवजात बच्चों की देखभाल की हो. पहाड़ों में एक ऐसा ही खास और अनोखा नुस्खा है– कुरजा पौधा, जिसे नवजात बच्चों को हल्की गर्माहट देने यानी सेकाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कुरजा एक जंगली पौधा होता है, जो पहाड़ी इलाकों में आसानी से मिल जाता है. इसकी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से गर्म तासीर (हीट) होती है. यही वजह है कि पुराने समय से इसे छोटे बच्चों की देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है. खासतौर पर ठंडे इलाकों में, जहां मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है, वहां यह पौधा काफी उपयोगी माना जाता है. कुरजा पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत ही सरल तरीके से किया जाता है. सबसे पहले इसकी ताजी पत्तियां और तेहनिया तोड़ी जाती हैं. फिर इन्हें हल्का सा गर्म किया जाता है (ध्यान रहे, ज्यादा गर्म नहीं करना है), इसके बाद पत्तियों को एक साफ कपड़े में लपेटा जाता है और फिर बच्चे की छाती, पीठ या पैरों पर हल्की-हल्की सेकाई दी जाती है. यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जाती है, ताकि बच्चे की नाजुक त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे. Add News18 as Preferred Source on Google कुरजा पौधे की सेकाई के कई फायदे बताए जाते हैं. पहाड़ों में ठंड ज्यादा होती है, ऐसे में नवजात बच्चों को ठंड से बचाना बहुत जरूरी होता है. कुरजा की पत्तियां शरीर को प्राकृतिक गर्माहट देती हैं. हल्की सेकाई से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, जिससे बच्चे का शरीर स्वस्थ रहता है. नवजात बच्चे जल्दी सर्दी-जुकाम की चपेट में आ जाते हैं. कुरजा की गर्म तासीर उन्हें इस समस्या से बचाने में मदद करती है. सेकाई से बच्चे की मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर में जकड़न नहीं होती. जब बच्चा आराम महसूस करता है, तो उसे अच्छी और गहरी नींद आती है, जो उसके विकास के लिए बहुत जरूरी है. पहाड़ों में आज भी बुजुर्गों के पास ऐसे कई पारंपरिक ज्ञान होते हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. बुजुर्ग नंदी देवी बताती हैं, “हमारे जमाने में तो यही सब उपाय होते थे. कुरजा की पत्तियों से बच्चों को हल्की सेकाई देते थे, इससे बच्चा जल्दी ठीक रहता था और ठंड भी नहीं लगती थी. आज भी अगर सही तरीके से किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद है.” उनकी बातों से पता चलता है कि यह नुस्खा केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुभव पर आधारित है. हालांकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका माना जाता है, फिर भी कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं. पत्तियों को ज्यादा गर्म न करें, वरना बच्चे की त्वचा जल सकती है. हमेशा साफ कपड़े का इस्तेमाल करें. सेकाई बहुत हल्की और थोड़े समय के लिए ही करें, अगर बच्चे की त्वचा पर कोई रिएक्शन या लालपन दिखे तो तुरंत बंद करें. किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें. आजकल जहां लोग छोटी-छोटी बातों के लिए दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं, ऐसे पारंपरिक नुस्खे हमें प्रकृति के करीब ले जाते हैं. हालांकि आधुनिक चिकित्सा बहुत जरूरी है, लेकिन अगर सही जानकारी और सावधानी के साथ इन पुराने तरीकों को अपनाया जाए, तो यह भी काफी लाभदायक हो सकते हैं. First Published : March 24, 2026, 17:48 IST








