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थमने का नाम नहीं ले रहा वंदे मातरम् विवाद:मालिनी गौड़ बोलीं- हम ऐसे लोगों से वोट ही नहीं मांगते, आकाश विजयवर्गीय ने कहा-ऐसे लोग देशद्रोही

थमने का नाम नहीं ले रहा वंदे मातरम् विवाद:मालिनी गौड़ बोलीं- हम ऐसे लोगों से वोट ही नहीं मांगते, आकाश विजयवर्गीय ने कहा-ऐसे लोग देशद्रोही

इंदौर में नगर निगम बजट परिषद के दौरान शुरू हुआ वंदे मातरम् का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इंदौर में बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने ऐलान किया है कि वह उन जगहों पर वोट मांगने भी नहीं जाती, जहां लोग वंदे मातरम् नहीं बोलते हैं। वहीं आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो लोग वंदेमातरम नहीं बोलते वो लोग आतंकी से कम नहीं है, ये लोग देशद्रोही हैं। बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने कहा कि जो इस देश में रहेगा, उसे “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” बोलना ही होगा। यह देशभक्ति से जुड़ा विषय है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने दिवंगत नेता लखन दादा का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी यही कहते थे और वह स्वयं भी उसी विचारधारा पर चलती हैं। मुझे उनके वोट भी नहीं चाहिए जो वंदे मातरम् नहीं बोलते और भारत माता की जय नहीं बोलते। वहीं पूर्व मंत्री व विधायक ऊषा ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम गाना होगा, नहीं तो भारत से जाना होगा। ऐसे लोगों के वोट नहीं चाहिए मालिनी गौड़ ने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् या भारत माता की जय बोलने से परहेज करते हैं, उनके वोट की उन्हें आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे क्षेत्रों में वे चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं जातीं। विधायक के इस बयान के बाद पहले से चल रहा वंदे मातरम् विवाद और तेज हो गया है। राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विवाद में आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि ये तो भाजपा का शासन, मोदी जी की सरकार है। आरएसएस जैसी संस्था है। वरना वंदे मातरम् पर आपत्ति लेने वाले लोग अवसर मिलने पर देश और समाज का बड़ा नुकसान कर सकते हैं। इस देश में रहना है तो वंदे मातरम् बोलना होगा इधर, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद पर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि इस देश में रहना होगा तो वंदे मातरम् कहना होगा। इस्लाम इजाजत नहीं देता, तो ये इस्लामिक कंट्री तो है नहीं, भारत स्वतंत्र एक देश है जो संविधान के सिद्धांतों पर चलता है। तुम्हें गाड़ने की जो अनुमति मिली है वह भी भारत माता की असीम कृपा से ही मिली है, जिसकी गोद में आप समाहित होते हैं उसकी प्रार्थना करने से आपको परहेज है। भारत में रहना है तो वंदे मातरम् गाना होगा, नहीं तो भारत से जाना होगा। खामनेई की मौत पर छाती पीटने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के भाई-बहन इस देश में सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं और सबसे ज्यादा योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं और उसके बाद इनके लोगों के भीतर इतनी राष्ट्रद्रोहिता बसी हुई है। मामले को लेकर परिवाद दायर सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने एडवोकेट आकाश शर्मा के माध्यम से जिला कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि संबंधित पार्षदों ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह बयान दिया कि इस्लाम में ‘वंदे मातरम्’ गाना प्रतिबंधित है। शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई है। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर की पार्षद रुबीना खान का वंदे मातरम् गाते VIDEO इंदौर नगर निगम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी विवाद में नया मोड़ आ गया है। जिस गीत को इस्लाम का हवाला देकर पार्षद रुबीना खान ने गाने से इनकार किया था, अब उसी को गाते हुए उनके दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो 2023-24 बजट सत्र का है, दूसरा 2026-27 का। दोनों में रुबीना वंदे मातरम् गाते और नारे लगाते दिख रही हैं।

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नई दिल्ली37 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है। यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। 14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था। ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’ केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे। सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है। एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के सा​थ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की ​शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके। यूट्यूब के लिए नियम, जिनमें एक्शन होता है… उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 19: भ्रामक विज्ञापन या गलत दावे पर 10-50 लाख तक का जुर्माना। IT एक्ट की धारा 66D व 69A: गलत जानकारी फैलाने पर वीडियो ब्लॉक व जेल हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) : गलत सलाह से जान को खतरा हो तो धारा 318 में एफआईआर। खामियां, जो बचा लेती हैं… डिस्क्लेमर: वीडियो में शैक्षिक उद्देश्य लिखने से ये जानकारी बन जाती है, जवाबदेही खत्म। विशेषज्ञता की परिभाषा: कानून में इन्फ्लुएंसर के लिए कोई न्यूनतम योग्यता तय नहीं। धीमी न्यायिक प्रक्रिया: डिजिटल नुकसान के लिए फास्ट ट्रैक कानून नहीं है। छोटे आर्थिक या शारीरिक नुकसान के लिए पीड़ित कोर्ट नहीं जाता। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है। यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। 14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था। ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’ केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे। सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है। एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के सा​थ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की ​शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Hike Export Duty on Jet Fuel, Diesel

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Hindi News Business India Hike Export Duty On Jet Fuel, Diesel | Petrol Diesel Prices Stable नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी यानी विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया है। डीजल पर निर्यात शुल्क ₹34 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹55.5 कर दिया गया है, जो पहले ₹21.5 था। वहीं, ATF यानी जेट फ्यूल पर ड्यूटी ₹29.5 से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दी गई है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार (11 अप्रैल) को नोटिफिकेशन जारी कर नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं। वहीं, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिलहाल शून्य ही रहेगी। हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में जो ₹10-₹10 की बड़ी कटौती की थी, उसका फायदा आम जनता को मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में फ्यूल की सप्लाई बढ़ाने फैसला लिया सरकार ने ये फैसला देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए लिया है। यह कदम उन आशंकाओं को दूर करता है जिनमें कहा जा रहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चा तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए विदेशों में फ्यूल बेचना शुरू कर देती हैं। एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से निर्यात महंगा हो जाता है, जिससे कंपनियां घरेलू बाजार में सप्लाई देने को प्राथमिकता देती हैं। मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में चल रही सैन्य गतिविधियों के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट अस्थिर बना हुआ है। 28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके जवाब में तेहरान ने भी पलटवार किया। 8 अप्रैल: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया है। हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और सेस भी बढ़ा इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी के अलावा अन्य शुल्कों में भी बदलाव किया है। हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर ₹24 कर दी गई है। इसके साथ ही इंफ्रा सेस को बढ़ाकर ₹36 कर दिया गया है। जेट फ्यूल (ATF) पर कुल ड्यूटी अब ₹42 प्रति लीटर हो गई है। 15 दिन पहले ही बढ़ाया था निर्यात शुल्क इससे पहले सरकार ने 26 मार्च को निर्यात शुल्क में संशोधन किया था। उस समय डीजल पर ड्यूटी ₹21.50 प्रति लीटर और ATF पर ₹29.5 प्रति लीटर तय की गई थी। अब महज 15 दिनों के भीतर इसमें दोबारा बड़ी बढ़ोतरी की गई है। जानकारों का कहना है कि सरकार की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर है और उसी के आधार पर टैक्स दरों की समीक्षा की जा रही है। विंडफाल टैक्स क्या होता है? विंडफाल टैक्स उन कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें किसी विशेष स्थिति (जैसे युद्ध या ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कत) के कारण अचानक बहुत ज्यादा मुनाफा होने लगता है। भारत में तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का फायदा उठाने से रोकने और सरकारी खजाना भरने के लिए इसे ‘एक्सपोर्ट ड्यूटी’ के तौर पर लगाया जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News Business India Hike Export Duty On Jet Fuel, Diesel | Petrol Diesel Prices Stable नई दिल्ली50 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी यानी विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया है। डीजल पर निर्यात शुल्क ₹34 प्रति लीटर बढ़ाकर ₹55.5 कर दिया गया है, जो पहले ₹21.5 था। वहीं, ATF यानी जेट फ्यूल पर ड्यूटी ₹29.5 से बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर कर दी गई है। वित्त मंत्रालय ने शनिवार (11 अप्रैल) को नोटिफिकेशन जारी कर नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी हैं। वहीं, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिलहाल शून्य ही रहेगी। हाल ही में पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में जो ₹10-₹10 की बड़ी कटौती की थी, उसका फायदा आम जनता को मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में फ्यूल की सप्लाई बढ़ाने फैसला लिया सरकार ने ये फैसला देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए लिया है। यह कदम उन आशंकाओं को दूर करता है जिनमें कहा जा रहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण कच्चा तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए विदेशों में फ्यूल बेचना शुरू कर देती हैं। एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से निर्यात महंगा हो जाता है, जिससे कंपनियां घरेलू बाजार में सप्लाई देने को प्राथमिकता देती हैं। मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर पिछले कुछ महीनों से मिडिल ईस्ट में चल रही सैन्य गतिविधियों के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट अस्थिर बना हुआ है। 28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जिसके जवाब में तेहरान ने भी पलटवार किया। 8 अप्रैल: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को काफी ऊपर पहुंचा दिया है। हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी और सेस भी बढ़ा इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी के अलावा अन्य शुल्कों में भी बदलाव किया है। हाई-स्पीड डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर ₹24 कर दी गई है। इसके साथ ही इंफ्रा सेस को बढ़ाकर ₹36 कर दिया गया है। जेट फ्यूल (ATF) पर कुल ड्यूटी अब ₹42 प्रति लीटर हो गई है। 15 दिन पहले ही बढ़ाया था निर्यात शुल्क इससे पहले सरकार ने 26 मार्च को निर्यात शुल्क में संशोधन किया था। उस समय डीजल पर ड्यूटी ₹21.50 प्रति लीटर और ATF पर ₹29.5 प्रति लीटर तय की गई थी। अब महज 15 दिनों के भीतर इसमें दोबारा बड़ी बढ़ोतरी की गई है। जानकारों का कहना है कि सरकार की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर है और उसी के आधार पर टैक्स दरों की समीक्षा की जा रही है। विंडफाल टैक्स क्या होता है? विंडफाल टैक्स उन कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें किसी विशेष स्थिति (जैसे युद्ध या ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कत) के कारण अचानक बहुत ज्यादा मुनाफा होने लगता है। भारत में तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का फायदा उठाने से रोकने और सरकारी खजाना भरने के लिए इसे ‘एक्सपोर्ट ड्यूटी’ के तौर पर लगाया जाता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपए घटी: दाम नहीं बढ़ेंगे; कच्चा तेल महंगा होने से कंपनियों को ₹30 प्रति लीटर तक घाटा हो रहा था सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है। एक्साइज ड्यूटी घटाकर पेट्रोल-डीजल के दामों को स्थिर रखा गया है। पूरी खबर पढ़ें… ——————- जेट फ्यूल 100% महंगा, लेकिन भारत में दाम नहीं बढ़ेंगे: सरकार ने कीमतों पर 25% का कैप लगाया; घरेलू उड़ानों का किराया कंट्रोल में रहेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ATF यानी जेट फ्यूल 100% से ज्यादा महंगा हो गया है। इस तेजी के बावजूद सरकार ने ATF में बढ़ोतरी को सिर्फ 25% तक सीमित रखने का फैसला किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

ग्वालियर में लावारिस शवों को नोच रहे कुत्ते:कब्रों से बाहर खींची लाशें; कहीं हाथ-पैर की हड्डियां तो कहीं खोपड़ियां खुले में बिखरी मिलीं

ग्वालियर में लावारिस शवों को नोच रहे कुत्ते:कब्रों से बाहर खींची लाशें; कहीं हाथ-पैर की हड्डियां तो कहीं खोपड़ियां खुले में बिखरी मिलीं

ग्वालियर में लावारिस शवों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। नीडम मुक्तिधाम के पीछे करीब 100×100 फीट के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से अज्ञात शवों को दफनाया जाता रहा है। हाल ही में महाराजपुरा क्षेत्र के एक शव की शिनाख्त के लिए कब्र खोदी गई, तो वहां का दृश्य बेहद भयावह मिला। कहीं हाथ-पैर की हड्डियां तो कहीं खोपड़ियां खुले में बिखरी पड़ी थीं। मौके पर आवारा कुत्तों द्वारा कब्रों से शव निकालकर नोचने के प्रमाण भी मिले। उथली कब्रों में दफन होने के कारण शव अक्सर बाहर आ जाते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्वच्छता और दुर्गंध फैलती रहती है। आसपास के रहवासियों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। हर दस कदम पर बिखरी मिलीं हड्डियां दैनिक भास्कर की टीम जब गेट खोलकर अंदर पहुंची तो मिट्टी से एक पैर की हड्डी बाहर निकली दिखाई दी। कुछ दूरी पर मिट्टी से कपड़ा झांकता नजर आया। पास जाकर देखने पर उसमें एक शव दबा मिला। यह शव हाल ही में दफनाया गया था, लेकिन एक दिन पहले हुई बारिश के कारण ऊपर की मिट्टी बह गई थी। इसके बाद अंदर घुसे आवारा कुत्तों ने शव को नोचकर बाहर खींच लिया था। करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में हर कुछ कदम पर मानव हड्डियां बिखरी पड़ी थीं। उथली कब्रों में दफनाए जाते हैं शव ग्वालियर में लावारिस शवों को नीडम मुक्तिधाम के पीछे निर्धारित क्षेत्र में दफनाया जाता है। पहचान की संभावना को ध्यान में रखते हुए शवों को कम गहराई वाले गड्ढों में दफनाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से निकाला जा सके। हालांकि, कब्रों की यही उथली बनावट समय के साथ समस्या बनी रहती है, क्योंकि आवारा जानवर इन्हें आसानी से खोदकर बाहर निकाल देते हैं। कुत्ते खोद रहे कब्रें, फैल रही दुर्गंध नीडम मुक्तिधाम कभी शहर से दूर, सुनसान इलाके में स्थित था, लेकिन अब यह शहरी क्षेत्र के बीच आ चुका है। इसके पीछे बने विशेष स्थान पर लावारिस शवों को दफनाया जाता है। मुक्तिधाम के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहां अक्सर आवारा कुत्ते मिट्टी खोदकर शवों को बाहर निकाल लेते हैं और उन्हें नोचते हैं। गेट खुला रह जाए तो जानवर आसानी से अंदर पहुंचकर कब्रों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस कारण कई बार शव उथले दिखाई देने लगते हैं और पूरे इलाके में दुर्गंध बनी रहती है। चौकीदार का दावा- कोई जिम्मेदार नहीं, जल्दबाजी में दफनाए जा रहे शव लावारिस शवों के कब्रिस्तान की देखरेख कर रहे नरेश वाल्मीकि ने चौंकाने वाली जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस स्थल के प्रबंधन के लिए कोई अधिकृत कर्मचारी तैनात नहीं है। शव लाने के बाद कर्मचारी अक्सर शराब पीते हैं और फिर जल्दबाजी में उन्हें कम गहराई वाली कब्रों में दफना देते हैं। नरेश का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से यही स्थिति देख रहे हैं। उन्हें इस काम के लिए कोई भुगतान भी नहीं मिलता। हर माह 10–12 शव दफन, सिर्फ दो फीट गहराई में ऑनलाइन सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश बाबू कुशवाहा ने बताया कि उनकी टीम केवल शवों को लाने-ले जाने में पुलिस की सहायता करती है। दफनाने की पूरी प्रक्रिया पुलिस की निगरानी में होती है और इस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है और मेरे पास कोई स्थायी कर्मचारी नहीं हैं उन्होंने कहा कि हर महीने करीब 10 से 12 लावारिस शव यहां दफनाए जाते हैं। पहचान की संभावना को ध्यान में रखते हुए इन्हें करीब दो फीट या उससे कम गहराई में दफनाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। हालांकि, इसी कारण आवारा कुत्ते कई बार कब्र खोदकर शवों को बाहर निकाल लेते हैं।

India Household Gold Value ₹830 Lakh Crore

India Household Gold Value ₹830 Lakh Crore

Hindi News Business India Household Gold Value ₹830 Lakh Crore | Bigger Than Most Nations GDP नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत में 75-80% सोना ज्वेलरी के रूप में है। लोग इसे लॉन्ग टर्म सेविंग और परंपरा की तरह देखते हैं। भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है। भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है। भारतीयों के पास इतना सोना है कि अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के लगभग हर देश की सालाना GDP से भी ज्यादा है। एसोचैम का कहना है कि अगर इस सोने को देश के बैंकिंग सिस्टम या बिजनेस में लगाया जाए, तो भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार कई गुना बढ़ सकती है। RBI के पास 880.3 टन सोने का रिजर्व वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के डेटा के अनुसार, भारत के आधिकारिक सरकारी खजाने (RBI) में 880.3 टन सोना है, जो दुनिया में 8वें नंबर पर है। यह अमेरिका के 8,133 टन के मुकाबले काफी कम है, लेकिन प्राइवेट स्टॉक में भारत सबसे आगे है। घरों में रखा सोना भारत की जीडीपी का 125% तक कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुमान के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच सोने की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय घरों की वेल्थ को जबरदस्त बूस्ट दिया है। वेल्थ का गणित: जनवरी 2026 तक भारतीय घरों में रखे सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर निकल गई है, जो भारत की कुल जीडीपी का लगभग 125% है। बैंक डिपॉजिट से ज्यादा: परिवारों के पास बैंक डिपॉजिट और शेयर बाजार में लगे कुल पैसे की तुलना में सोने की वैल्यू 175% अधिक है। यानी भारतीयों का सबसे ज्यादा भरोसा आज भी सोने पर ही है। संपत्ति का हिस्सा: भारतीयों की कुल ‘नॉन-प्रॉपर्टी वेल्थ’ (जमीन-मकान छोड़कर) में सोने की हिस्सेदारी 65% तक पहुंच गई है। 2047 तक जीडीपी में 7.5 ट्रिलियन डॉलर और जुड़ सकते हैं एसोचैम ने एक रोडमैप तैयार किया है कि कैसे इस ‘डेड इन्वेस्टमेंट’ को काम पर लगाया जा सकता है। मल्टीप्लायर इफेक्ट: अगर हर साल घरों में रखे सोने का सिर्फ 2% हिस्सा गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम या वित्तीय एसेट्स में बदल दिया जाए, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में अतिरिक्त 7.5 ट्रिलियन डॉलर जुड़ जाएंगे। लक्ष्य 2047: रिपोर्ट कहती है कि 2047 तक भारत की अनुमानित 34 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी, सोने के सही इस्तेमाल से 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। गोल्ड लोन का चलन बढ़ा: ₹24 लाख करोड़ के पार पहुंचा कर्ज सोने को अब सिर्फ तिजोरी में रखने के बजाय लोग उत्पादक कार्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। रिटेल क्रेडिट: नवंबर 2025 तक भारत में सोने और गहनों के बदले दिया गया गोल्ड लोन ₹24.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। बदलता नजरिया: अब गोल्ड लोन सिर्फ मजबूरी का सौदा नहीं रहा, बल्कि छोटे बिजनेस, खेती और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक मुख्यधारा का लोन प्रोडक्ट बन गया है। भारतीय एजेंसियों के अनुसार सोने की वर्तमान कीमत… क्या सोने की बढ़ती कीमतों से परचेजिंग पावर बढ़ती है? आमतौर पर माना जाता है कि जब किसी संपत्ति की कीमत बढ़ती है, तो लोग खुद को अमीर महसूस करते हैं और ज्यादा खर्च करते हैं। इसे वेल्थ इफेक्ट यानी धन का प्रभाव कहते हैं। हालांकि एमके ग्लोबल की एक रिपोर्ट इसके उलट दावा करती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 75-80% सोना ज्वेलरी के रूप में है। लोग इसे लॉन्ग टर्म सेविंग और परंपरा की तरह देखते हैं। चूंकि लोग इसे बेचते नहीं हैं, इसलिए कीमतों के बढ़ने का उनकी रोजमर्रा की खपत या खरीदारी पर कोई खास असर नहीं पड़ता। ———— ये खबर भी पढ़ें… चांदी आज ₹3776 बढ़कर ₹2.40 लाख पर पहुंची: सोना ₹390 महंगा होकर ₹1.50 लाख पार, इस साल ₹17 हजार दाम बढ़े सोना-चांदी के दाम में शुक्रवार को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी 3,776 रुपए बढ़कर 2,39,934 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले 9 अप्रैल को कीमत 2,36,158 रुपए प्रति किलो थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 390 रुपए बढ़कर 1,50,327 रुपए पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को कीमत 1,49,937 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Supreme Court Denies Divorce to Husband Separated 16 Years

Supreme Court Denies Divorce to Husband Separated 16 Years

Hindi News National Supreme Court Denies Divorce To Husband Separated 16 Years | Maintenance नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से पत्नी से अलग रह रहे 54 साल के एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह अपनी पत्नी को ₹15,000 मासिक गुजारा भत्ता देता रहे और अगर तलाक चाहिए तो स्थायी गुजारा भत्ते का ठोस प्रस्ताव दे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ₹15,000 आज के समय में बहुत कम राशि है। कोर्ट ने साफ कहा, “शांति से ₹15,000 देते रहो, खुश रहो।” इससे पहले हाईकोर्ट ने भी इस व्यक्ति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। पति-पत्नी के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट बोला- पत्नी को साथ रखो, कोर्ट रूम LIVE पति के वकील: ‘मैं पिछले 16 साल से पत्नी से अलग रह रहा हूं। हर महीने ₹15,000 दे रहा हूं। मेरी सैलरी ₹65,000 है, इससे ज्यादा देने की स्थिति में नहीं हूं।’ सुप्रीम कोर्ट: ‘अगर आप स्थायी गुजारा भत्ते के लिए कोई उचित रकम प्रस्तावित करते हैं, तो तलाक पर विचार किया जा सकता था।’ सुप्रीम कोर्ट: ‘आप अपनी पत्नी को साथ क्यों नहीं रख सकते। अपनी पत्नी को साथ रखो, इसमें दिक्कत क्या है। पति के वकील: ‘दोनों के बीच स्वभाव में मतभेद हैं और वे करीब 16 साल से अलग रह रहे हैं। कई बार मध्यस्थता की कोशिश भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।’ कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करने के लिए समय दिया कोर्ट ने यह भी कहा कि पति ने क्रूरता का जो आधार बताया है, वह सिर्फ इतना है कि पत्नी चाहती थी कि वह जहां भी पोस्टेड हो, उसके साथ रहे। इस पर कोर्ट ने सवाल किया, इसमें दिक्कत क्या है। वहीं, पत्नी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह स्थायी गुजारा भत्ता नहीं चाहती और अपने पति के साथ रहना चाहती है। उन्होंने कहा कि दोनों की कोई संतान नहीं है और फिलहाल पत्नी अपनी मां के साथ रह रही है। अंत में कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि दोनों पक्षों को समय दिया कि वे स्थायी गुजारा भत्ते की राशि पर निर्देश लेकर आएं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट इन आधारों पर तय करता है गुजारा भत्ता पति की आय: यहां पति की सैलरी ₹65,000 है, इसलिए ₹15,000 (करीब 23%) कम माना गया। पत्नी की जरूरतें: रहने, खाने, इलाज, रोजमर्रा खर्च-सब शामिल होते हैं। लाइफस्टाइल: शादी के दौरान जैसा जीवनस्तर था, उसे ध्यान में रखा जाता है। निर्भरता: पत्नी कमाती है या नहीं, यह भी अहम फैक्टर है। अन्य जिम्मेदारियां: बच्चों, माता-पिता की जिम्मेदारी भी देखी जाती है। कानून क्या कहता है CrPC की धारा 125: पत्नी खुद का खर्च नहीं उठा सकती तो पति से भत्ता दिलाया जा सकता है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24/25: केस के दौरान और बाद में स्थायी गुजारा भत्ता तय होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें: केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Collection Crosses 1080 Cr; Joins 2026 Top 10 Movies

India Collection Crosses 1080 Cr; Joins 2026 Top 10 Movies

4 मिनट पहले कॉपी लिंक आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर: द रिवेंज का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1,680 करोड़ रुपए पहुंच गया है। फिल्म ने भारत में भी 1,080 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन का आंकड़ा पार किया है। फिल्म ने रिलीज के पहले हफ्ते से ही रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया था। पहले 8 दिनों में फिल्म ने 690 करोड़ रुपए बटोरे थे। दूसरे हफ्ते में 271 करोड़ और तीसरे हफ्ते में 120 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। वर्किंग डेज होने के बावजूद फिल्म की कमाई स्थिर बनी हुई है। सोमवार से गुरुवार के बीच फिल्म ने हर दिन औसतन 10 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। विदेशी बाजारों में भी बनाया रिकॉर्ड फिल्म सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। अब तक ओवरसीज मार्केट से फिल्म ने 404 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे सफल ग्लोबल फिल्मों में से एक बन गई है। 2026 की दुनियाभर की टॉप-10 फिल्मों में शामिल हुई इससे पहले कल धुरंधर 2 इस साल दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई थी। बॉक्स ऑफिस मोजो की लिस्ट के अनुसार रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने क्रिस हेम्सवर्थ और जेंडया जैसे हॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्ट में ‘प्रोजेक्ट हेल मैरी’, ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी मूवी’ और ‘वुदरिंग हाइट्स’ जैसी बड़ी फिल्में शामिल हैं। फिल्म ने चीनी एनिमेटेड मूवी ‘बूनी बीयर्स: द हिडन प्रोटेक्टर’ (139 मिलियन डॉलर) को पीछे छोड़कर इस एलीट लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों को दी मात रणवीर सिंह की इस फिल्म ने कमाई के मामले में कई हॉलीवुड एक्टर्स की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। क्रिस हेम्सवर्थ की फिल्म ‘क्राइम 101’ ने फरवरी में रिलीज होने के बाद 72 मिलियन डॉलर कमाए थे, जो ‘धुरंधर 2’ के मुकाबले काफी कम है। इसी तरह फिल्म ने राचेल मैकएडम्स की ‘सेंड हेल्प’ (94 मिलियन डॉलर) और रिज अहमद की ‘हैमलेट’ (78 मिलियन डॉलर) को भी मात दी है। जेंडया और रॉबर्ट पैटिनसन की फिल्म ‘द ड्रामा’ ने अब तक सिर्फ 26 मिलियन डॉलर कमाए हैं, जबकि ‘धुरंधर 2’ ने अपने ओपनिंग वीकेंड में ही 80 मिलियन डॉलर बटोर लिए थे। पार्ट 1 के लाइफटाइम रिकॉर्ड को 10 दिन में तोड़ा इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट के ओवरसीज लाइफटाइम कलेक्शन को महज 10 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया था। यह सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड) कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म ने भारत में 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक के सभी माइलस्टोन सबसे कम समय में हासिल किए हैं। साथ ही, यह अब तक की सबसे बड़ी हिंदी ओपनर और सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड देने वाली फिल्म भी बन चुकी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

India Collection Crosses 1080 Cr; Joins 2026 Top 10 Movies

India Collection Crosses 1080 Cr; Joins 2026 Top 10 Movies

2 मिनट पहले कॉपी लिंक आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर: द रिवेंज का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1,680 करोड़ रुपए पहुंच गया है। फिल्म ने भारत में भी 1,080 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन का आंकड़ा पार किया है। फिल्म ने रिलीज के पहले हफ्ते से ही रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया था। पहले 8 दिनों में फिल्म ने 690 करोड़ रुपए बटोरे थे। दूसरे हफ्ते में 271 करोड़ और तीसरे हफ्ते में 120 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। वर्किंग डेज होने के बावजूद फिल्म की कमाई स्थिर बनी हुई है। सोमवार से गुरुवार के बीच फिल्म ने हर दिन औसतन 10 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। विदेशी बाजारों में भी बनाया रिकॉर्ड फिल्म सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। अब तक ओवरसीज मार्केट से फिल्म ने 404 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे सफल ग्लोबल फिल्मों में से एक बन गई है। 2026 की दुनियाभर की टॉप-10 फिल्मों में शामिल हुई इससे पहले कल धुरंधर 2 इस साल दुनिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई थी। बॉक्स ऑफिस मोजो की लिस्ट के अनुसार रणवीर सिंह स्टारर इस फिल्म ने क्रिस हेम्सवर्थ और जेंडया जैसे हॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। इस लिस्ट में ‘प्रोजेक्ट हेल मैरी’, ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी मूवी’ और ‘वुदरिंग हाइट्स’ जैसी बड़ी फिल्में शामिल हैं। फिल्म ने चीनी एनिमेटेड मूवी ‘बूनी बीयर्स: द हिडन प्रोटेक्टर’ (139 मिलियन डॉलर) को पीछे छोड़कर इस एलीट लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों को दी मात रणवीर सिंह की इस फिल्म ने कमाई के मामले में कई हॉलीवुड एक्टर्स की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। क्रिस हेम्सवर्थ की फिल्म ‘क्राइम 101’ ने फरवरी में रिलीज होने के बाद 72 मिलियन डॉलर कमाए थे, जो ‘धुरंधर 2’ के मुकाबले काफी कम है। इसी तरह फिल्म ने राचेल मैकएडम्स की ‘सेंड हेल्प’ (94 मिलियन डॉलर) और रिज अहमद की ‘हैमलेट’ (78 मिलियन डॉलर) को भी मात दी है। जेंडया और रॉबर्ट पैटिनसन की फिल्म ‘द ड्रामा’ ने अब तक सिर्फ 26 मिलियन डॉलर कमाए हैं, जबकि ‘धुरंधर 2’ ने अपने ओपनिंग वीकेंड में ही 80 मिलियन डॉलर बटोर लिए थे। पार्ट 1 के लाइफटाइम रिकॉर्ड को 10 दिन में तोड़ा इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट के ओवरसीज लाइफटाइम कलेक्शन को महज 10 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया था। यह सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड) कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म ने भारत में 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक के सभी माइलस्टोन सबसे कम समय में हासिल किए हैं। साथ ही, यह अब तक की सबसे बड़ी हिंदी ओपनर और सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड देने वाली फिल्म भी बन चुकी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔