इजराइल बोला- पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा नहीं:वहां हमास नेता बहुत दौरे कर रहे; ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो पलटवार करेंगे

भारत में इजराइल के राजदूत रियुवेन अजार ने पाकिस्तान को समस्याग्रस्त देश बताते हुए कहा है कि उस पर क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ के रूप में आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता। PTI को दिए एक इंटरव्यू में अजार ने कहा कि पाकिस्तान की भूमिका को लेकर उनके मन में सवाल हैं। अगर कोई मध्यस्थ किसी एक पक्ष के ज्यादा करीब हो जाए, तो बातचीत मुश्किल हो सकती है। अजार ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ सालों में हमास नेताओं की पाकिस्तान और बांग्लादेश यात्राएं बढ़ी हैं। भारत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इजराइल जिन सुरक्षा खतरों का सामना कर रहा है, उनसे दूसरे देश भी सीख ले सकते हैं। वहीं, ईरान का कहना है कि अगर उसके ऊपर हमला किया जाता है तो वह उसका जवाब जरूर देगा। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कुवैत और बहरीन भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते, क्योंकि उन्होंने अमेरिका को अपनी जमीन और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Trump Wants World Kneel; Dictatorship Pushing World Back: Israeli Historian

11 मिनट पहले कॉपी लिंक चर्चित इतिहासकार युवाल नोआ हरारी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इजराइल के इतिहास में नेतन्याहू से बड़ा इजराइली राष्ट्रवाद का दुश्मन कोई नहीं रहा। उन्होंने देश को अंदर से बांट दिया और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प और उनके जैसे नेताओं की सोच यह है कि कमजोर हमेशा ताकतवर के सामने घुटने टेक दे, तभी शांति बनी रहेगी। यह अनैतिक और मूर्खतापूर्ण है क्योंकि इससे हर देश अपनी ऊर्जा सिर्फ हथियारों पर खर्च करेगा। हरारी ने कहा कि दुनिया ट्रम्पवाद और दक्षिणपंथी राजनीति कि ओर तेजी से बढ़ रही है। इसकी राजनीति करने वालों का मानना है कि दुनिया एक दूसरी की मदद करने से नहीं बल्कि ताकत और दबदबे से चलती है। लेकिन यह सोच इंसानी सभ्यता और दुनिया को पीछे धकेल रही है। युवाल नोआ हरारी इजराइल के इतिहासकार, सैन्य मामलों के जानकार, विचारक और विज्ञान लेखक हैं। वे यरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में इतिहास के प्रोफेसर भी हैं। हरारी बोले- सहयोग से ही दुनिया की तरक्की हुई युवाल नोआ हरारी ने कहा कि उनकी सबसे चर्चित किताबें, जैसे सेपियंस और होमोडेयस को ध्यान से देखें तो एक बड़े विचार के इर्द-गिर्द घूमती हैं। सहयोग यानी कोऑपरेशन। हरारी ने कहा कि इंसानों की असली ताकत यही है कि वे बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक मिलकर काम कर सकते हैं। यही वह चीज है जिसने इंसानों को कमजोर जीव से दुनिया की सबसे प्रभावशाली प्रजाति बना दिया। अकेला इंसान न तो शेर से लड़ सकता है और न भालू से, लेकिन करोड़ों लोग मिलकर समाज, देश, कानून, बाजार और तकनीक बना सकते हैं। युवाल नोआ हरारी की मशहूर किताबें- सेपियंस और होमोडेयस। हरारी बोले- ताकत ही सबकुछ होता तो हम आज भी शिकारी होते हरारी का मानना है कि अगर केवल ताकत ही सब कुछ होती, तो इंसान आज भी छोटे-छोटे शिकारी समूहों में जी रहे होते। मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि इंसान लड़ सकता है, बल्कि यह है कि इंसान बड़ी संख्या में एक-दूसरे पर भरोसा कर सकता है। हरारी के मुताबिक सिर्फ डर या हिंसा के दम पर बड़ी सभ्यताएं नहीं चल सकतीं। किसी भी बड़े समाज को चलाने के लिए साझा विश्वास और सहयोग जरूरी होता है। लेकिन ट्रम्पवाद और राष्ट्रवादी सोच इस मामले में अलग राय रखती है। उनका मानना है कि देशों के बीच सहयोग तभी मजबूत हो सकता है, जब लोगों के पास अपनी मजबूत राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान हो। उनके मुताबिक किसी देश को मजबूत बनाने के लिए लोगों का एक जैसी सोच और पहचान से जुड़ा होना जरूरी है। कई बार इसके लिए सख्त सत्ता और मजबूत नेतृत्व की भी जरूरत पड़ती है। हरारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प सहयोग में विश्वास नहीं रखते, वे सिर्फ सैन्य ताकत से कमजोर देशों पर दबादबा बनाना चाहते है। हरारी बोले- राष्ट्रवाद को नफरत से बचाना जरूरी है हरारी का कहना है कि राष्ट्रवाद मानव इतिहास की सबसे सफल और सकारात्मक कहानियों में से एक रहा है। उनके मुताबिक राष्ट्रवाद का असली मतलब दूसरे लोगों से नफरत करना नहीं, बल्कि उन लाखों अनजान लोगों के लिए अपनापन महसूस करना है जिन्हें आप व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, फिर भी उनके लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं। वे कहते हैं कि राष्ट्र कोई परिवार नहीं होता और न ही छोटा कबीला। छोटे कबीलों में लोग एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। लेकिन राष्ट्र अलग चीज है। भारत, चीन या इजराइल जैसे देशों में करोड़ों लोग रहते हैं और कोई भी व्यक्ति उनमें से ज्यादातर लोगों को नहीं जानता। फिर भी राष्ट्रवाद लोगों को इस हद तक जोड़ देता है कि वे टैक्स देते हैं ताकि दूसरे नागरिकों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। जरूरत पड़ने पर लोग देश के लिए अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं। हरारी मानते हैं कि कई बार राष्ट्रवाद नफरत की तरफ भी मुड़ जाता है, लेकिन यह उसकी मूल पहचान नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रवाद बिना बाहरी लोगों से नफरत किए भी मौजूद रह सकता है, लेकिन अपने लोगों के लिए अपनापन और प्रेम के बिना नहीं। हरारी कहते हैं कि आज जो लोग खुद को राष्ट्रवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताते हैं, उनमें से कई राष्ट्र के भीतर ही नफरत फैला रहे हैं। वे बाहरी दुश्मनों से ज्यादा अपने ही समाज को बांट रहे हैं। इजराइल का उदाहरण देते हुए हरारी कहते हैं कि देश के इतिहास में शायद ही किसी नेता ने समाज को उतना बांटा हो जितना बेंजामिन नेतन्याहू ने। युवाल हरारी ने नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इजराइल को अंदर से बांट दिया है। उनके मुताबिक, यह इजराइल के लिए बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरनाक है। दुनिया ताकत के नियम पर चले तो बर्बाद हो जाएगी हरारी ने ट्रम्पवादी सोच की आलोचना करते हुए कहा कि यह दुनिया को ताकत और दबदबे के नजरिए से देखती है। इस सोच के मुताबिक दुनिया में शांति तभी हो सकती है जब कमजोर देश मजबूत देशों की मांग मान लें। वे उदाहरण देते हैं कि अगर अमेरिका, ग्रीनलैंड मांगता है, तो डेनमार्क को अमेरिकी ताकत से डरकर उसे सौंप देना चाहिए। अगर डेनमार्क इनकार करे और संघर्ष हो जाए, तो इस सोच के मुताबिक गलती डेनमार्क की मानी जाएगी, क्योंकि उसने ताकतवर देश की बात नहीं मानी। हरारी कहते हैं कि यह सोच गंभीर समस्या पैदा करती है। अगर दुनिया केवल ताकत के नियम पर चलेगी, तो हर देश खुद को ज्यादा मजबूत बनाने की दौड़ में लग जाएगा। फिर सभी देशों को अपनी अर्थव्यवस्था और संसाधनों का बड़ा हिस्सा सेना और हथियारों पर खर्च करना पड़ेगा। हरारी ने AI को सबसे बड़ा खतरा बताया इसी बीच हरारी ने AI को आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि परमाणु बम सिर्फ एक हथियार है, लेकिन AI खुद फैसले लेने की क्षमता रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि AI इंसानों की तरह प्यार और भावनाएं दिखाना सीख रहा है, जबकि वह असली भावनाओं को समझता नहीं। आने
पाकिस्तान बोला- इजराइल को देश नहीं मानेंगे:विचारधारा से समझौता मंजूर नहीं, ट्रम्प मुस्लिम देशों से बोले थे- इजराइल से दोस्ती करें

पाकिस्तान ने इजराइल से दोस्ती करने और उसे देश की मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान अपनी मौलिक विचारधाराओं से समझौता नहीं कर सकता। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान से कहा था कि अगर वह अमेरिका-ईरान शांति समझौते की प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहता है, तो उसे अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजराइल को अलग देश की मान्यता देनी होगी। इसके बाद पाकिस्तान ने साफ कहा है कि वह इस मांग को मानने के मूड में नहीं है। आसिफ ने इजराइल पर निशाना साधते हुए कहा, “हम उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता।” आसिफ ने पाकिस्तान की पासपोर्ट नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया का शायद इकलौता देश है, जिसके पासपोर्ट पर साफ लिखा होता है कि यह इजराइल के लिए मान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रुख पूरी तरह साफ है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। ट्रम्प ने कई मुस्लिम देशों से इजराइल से रिश्ते सुधारने को कहा डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कई मुस्लिम और अरब देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की अपील की। ट्रम्प ने इसे ईरान के साथ संभावित शांति बातचीत से भी जोड़ा। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम भी उन देशों में शामिल किया था, जिनसे अमेरिका इजराइल को मान्यता देने की उम्मीद कर रहा है। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका मध्य-पूर्व में नई रणनीतिक साझेदारियां बनाने की कोशिश कर रहा है। ट्रम्प पहले भी अब्राहम अकॉर्ड्स को अपनी बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बता चुके हैं। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान पर इजराइल को मान्यता देने का दबाव पड़ा हो। 2021 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी कहा था कि अमेरिका और कुछ दूसरे देशों की तरफ से पाकिस्तान पर इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने का दबाव बनाया जा रहा है। पाकिस्तान के लिए अब्राहम समझौते में शामिल होना मुश्किल पाकिस्तान के लिए अब्राहम समझौते में शामिल होने का मामला बेहद संवेदनशील और राजनीतिक रूप से मुश्किल है। पाकिस्तान लंबे समय से खुद को फिलिस्तीन के समर्थक देश के तौर पर पेश करता रहा है। वहां आम जनता के बीच फिलिस्तीन का मुद्दा भावनात्मक और धार्मिक दोनों स्तर पर बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहेगा लेकिन वह अपनी घरेलू राजनीति को भी नजरअंदाज नहीं कर सकता है। पाकिस्तान ने पिछले 78 साल में कभी इजराइल को मान्यता नहीं दी है। उसका आधिकारिक रुख यह रहा है कि जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनता, तब तक वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा। इसी वजह से पाकिस्तान में इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने का मुद्दा हमेशा घरेलू राजनीति से भी जुड़ा रहा है। किसी भी सरकार के लिए इस पर नरम रुख अपनाना राजनीतिक जोखिम माना जाता है। पाकिस्तान ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस में हिस्सा लेने पर भी सफाई दी थी इस साल जनवरी में पाकिस्तान ने गाजा बोर्ड ऑफ पीस में हिस्सा लिया था। उस समय भी पाकिस्तान के भीतर यह चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या वह धीरे-धीरे अब्राहम समझौते की तरफ बढ़ रहा है। इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा था कि गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का अब्राहम समझौते से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और वह इस समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा। पाकिस्तान की मुश्किल इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि खाड़ी के कई देश अब अमेरिका के दबाव में इजराइल के साथ संबंध बढ़ा रहे हैं। इनमें सऊदी अरब समेत कई अहम देश शामिल हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खाड़ी देशों की मदद पर निर्भर है। उसे वहां से आर्थिक सहायता और सैन्य सहयोग भी मिलता है। ऐसे में ट्रम्प की मांग को सीधे खारिज करना पाकिस्तान के लिए जोखिम भरा कदम माना जा रहा है। अमेरिकी समर्थक गठबंधन बनाना चाहते हैं ट्रम्प एक्सिओस के मुताबिक ट्रम्प की सबसे बड़ी रणनीतिक कोशिश यह है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद पश्चिम एशिया में एक नया अमेरिकी समर्थक गठबंधन तैयार किया जाए, जिसमें इजराइल और प्रमुख अरब देश एक साथ हों। दशकों तक अरब देशों की नीति थी कि फिलिस्तीन मुद्दा सुलझे बिना इजराइल को मान्यता नहीं दी जाएगी। ट्रम्प की कोशिशों के बाद 2020 में अब्राहम समझौते ने उस पुरानी नीति को तोड़ दिया। इसके तहत UAE, बहरीन और मोरक्को जैसे देशों ने इजराइल के साथ आधिकारिक संबंध बनाए।
World News Updates; US Iran Israel Japan Earthquake

14 मिनट पहले कॉपी लिंक जापान के कागोशिमा क्षेत्र में मंगलवार को 6.2 तीव्रता का भूकंप आया। तेज झटकों के बाद लोगों में घबराहट फैल गई, हालांकि फिलहाल सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने हालात पर नजर रखना शुरू कर दिया है। अब तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना सामने नहीं आई है। जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है और यहां अक्सर टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण तेज झटके महसूस किए जाते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World News Updates; US Iran Israel Japan Earthquake

9 मिनट पहले कॉपी लिंक जापान के कागोशिमा क्षेत्र में बुधवार को 5.9 तीव्रता का भूकंप आया। तेज झटकों से कई इलाकों में दहशत फैल गई, हालांकि फिलहाल सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। जापानी मीडिया के मुताबिक, भूकंप ओकिनावा मेन आइलैंड के पास आया। जापान मौसम एजेंसी ने साफ किया कि सुनामी का कोई खतरा नहीं है। भूकंप के बाद कई इलाकों में इमारतें हिल गईं और लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान या मौत की सूचना नहीं मिली है। जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है, क्योंकि यह प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में स्थित है। यह भूकंप चार दिन पहले होंशू द्वीप के पूर्वी तट के पास आए एक और तेज भूकंप के बाद आया है। उस भूकंप से ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई थीं और कई इलाकों में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया था।हालांकि उस समय भी सुनामी का खतरा नहीं था और किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Israel Iraq Military Base Exposed; Iran War Attack

काबुल/वॉशिंगटन डीसीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक तारीख- 3 मार्च जगह- अल-नुखैब कस्बा, पश्चिमी इराक 29 साल का चरवाहा अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी लेकर जरूरी सामान लेने निकला था। सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमाओं के पास बसे इस रेगिस्तानी इलाके में गाड़ियों का गुजरना आम बात थी। कुछ घंटों बाद वही गाड़ी आग की लपटों में घिरी और गोलियों से छलनी हालत में वापस दिखाई दी। लोगों ने बताया कि एक हेलिकॉप्टर ट्रक का पीछा कर रहा था और लगातार उस पर गोलियां चला रहा था, जब तक कि ट्रक रेत में रुक नहीं गया। परिजनों का कहना है कि अवाद गलती से इजराइल के एक सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था। वहां उसे एक अस्थायी हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू दिखाई दिए। उसने तुरंत इराकी सेना के रीजनल कमांड को फोन कर इसकी सूचना दी। परिवार का मानना है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। इजराइली सेना ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में शामिल गवाहों और अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से नाम छिपाने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स से बात की है। ईराक में इजराइल के 2 सीक्रेट सैन्य ठिकाने इजराइल पिछले एक साल से ज्यादा समय तक इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो सीक्रेट मिलिट्री बेस चला रहा था। क्षेत्रीय और इराकी अधिकारियों के अनुसार इजराइल उस जगह का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सहायता के लिए कर रहा था। इनमें से एक वही अड्डा था जिसे अवाद ने देख लिया था। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इराक में एक इजराइली ठिकाने की खबर दी थी, लेकिन इराकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि दूसरा सीक्रेट ठिकाना भी मौजूद था। अधिकारियों ने कहा कि यह ठिकाना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई से पहले ही बनाया जा चुका था। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक इजराइल ने 2024 के आखिर में ही ऐसे सीक्रेट ठिकानों की तैयारी शुरू कर दी थी ताकि भविष्य के युद्धों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। अमेरिका को थी इजराइली सीक्रेट ठिकाने की जानकारी कम से कम एक सीक्रेट अड्डे की जानकारी अमेरिका को जून 2025 या उससे पहले से थी। इससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने इराक से यह बात छिपाई कि उसकी जमीन पर एक दुश्मन देश की सेना काम कर रही थी। इराकी सांसद वाद अल-कदू ने कहा कि इजराइल का इराक की जमीन पर सीक्रेट ठिकाने बनाना देश की संप्रभुता और इराकी लोगों के सम्मान का खुला उल्लंघन है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक इजराइल को भरोसा था कि वह इराक में सीक्रेट ठिकाना चला सकता है, क्योंकि वहां अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी है। अधिकारियों ने कहा कि 2025 की लड़ाई और मौजूदा तनाव के दौरान अमेरिका ने इराक से अपने रडार बंद करवाए थे, ताकि अमेरिकी विमानों की जानकारी बाहर न जाए। इसकी वजह से इराक अपने इलाके में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो गया। इस खुलासे ने इराक के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला ये कि क्या इराकी सुरक्षा बलों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी? या फिर उन्हें पता था लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया? दोनों ही हालात से पता चलता है कि इराक अभी भी अपनी जमीन पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। इराकी सेना के कमांडर बोले- मुझे पहले से शक था इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट के कमांडर मेजर जनरल अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को एक महीने पहले से रेगिस्तान में इजराइली मौजूदगी का शक था। वहां रहने वाले बेदुइन समुदाय के लोग कई हफ्तों से सेना को बता रहे थे कि रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और रेगिस्तान में बने अस्थायी ढांचे देखे थे। अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को शक था कि वहां इजराइली बल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सेना ने सीधे वहां जाने की बजाय दूर से निगरानी करना चुना। उन्होंने बताया कि इराकी सेना ने अमेरिकी अधिकारियों से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ समय बाद जब चरवाहे अवाद ने खुद फोन कर बताया कि उसने एक हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू देखे हैं, तब मामला और गंभीर हो गया। लेकिन कुछ ही समय बाद उसका संपर्क टूट गया। सेना जांच के लिए पहुंची, इजराइल ने हमला कर भगाया अवाद के परिवार ने दो दिन तक उसकी तलाश की। बाद में उन्हें उन बेदुइन लोगों के बारे में पता चला जिन्होंने उसकी हत्या देखी थी। अवाद के चचेरे भाई आमिर अल-शम्मारी ने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि रेगिस्तान में अवाद जैसी एक जली हुई पिकअप गाड़ी पड़ी है, लेकिन डर के कारण कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। जब परिवार वहां पहुंचा तो उन्हें जली हुई गाड़ी और अवाद का शव मिला। परिवार ने उसकी खून से लथपथ तस्वीरें साझा कीं। उसका सिर और उंगलियां बुरी तरह जली हुई थीं। परिवार ने उसी जगह गाड़ी के पास एक साधारण कब्र बनाकर उसे दफना दिया। अली अल-हमदानी के मुताबिक अवाद की सूचना के अगले दिन इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी। लेकिन जैसे ही सैनिक उस इलाके के करीब पहुंचे, उन पर हमला हो गया। एक सैनिक मारा गया, दो घायल हुए और सेना की गाड़ियों पर बमबारी की गई। इसके बाद सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। चरवाहे की गाड़ी पर इजराइली सैनिकों ने हमला किया, जिसके बाद वह जलकर तबाह हो गई। सीनियर अधिकारियों ने जांच को धीमा करने की कोशिश की बगदाद में सीनियर अफसर समझ नहीं पा रहे थे कि हमला किसने किया। कुछ बड़े सैन्य अधिकारियों ने घटना को कम महत्व देकर जांच को धीमा कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इराकी सेना ने सिर्फ इतना कहा कि ‘विदेशी फोर्स’ ने हमला किया और UNSC में शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि अंदरूनी स्तर पर इराकी आर्मी चीफ जनरल अब्दुल-अमीर यारल्लाह ने अमेरिकी सेना से संपर्क किया। मेजर जनरल हमदानी और दो सीनियर अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी पक्ष ने
World News Updates; Trump Xi Iran Israel Hormuz Modi UAE BRICS Breaking News

12 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और नाइजीरिया की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ISIS का दूसरा सबसे बड़ा नेता अबू-बिलाल अल-मिनुकी मारा गया है। ट्रम्प ने कहा कि वह अफ्रीका में छिपा हुआ था। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उनके निर्देश पर अमेरिकी और नाइजीरियाई बलों ने बेहद जटिल और योजनाबद्ध मिशन को अंजाम दिया। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियों को लगातार उसकी गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। उन्होंने कहा कि अल-मिनुकी अब अफ्रीका में आतंक फैलाने या अमेरिकियों को निशाना बनाने की साजिश नहीं कर पाएगा। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन में सहयोग के लिए नाइजीरिया सरकार का धन्यवाद भी किया। हालांकि ISIS की तरफ से ट्रम्प के दावे पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। नाइजीरिया पहले भी ट्रम्प के बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि वहां ईसाइयों पर अत्याचार हो रहे हैं, जिसे नाइजीरिया सरकार ने खारिज किया था। पिछले साल क्रिसमस के दिन अमेरिका ने उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में कथित इस्लामिक ठिकानों पर हमले भी किए थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
World News Updates; Trump Xi Iran Israel Hormuz Modi UAE BRICS Breaking News

28 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका और नाइजीरिया की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ISIS का दूसरा सबसे बड़ा नेता अबू-बिलाल अल-मिनुकी मारा गया है। ट्रम्प ने कहा कि वह अफ्रीका में छिपा हुआ था। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उनके निर्देश पर अमेरिकी और नाइजीरियाई बलों ने बेहद जटिल और योजनाबद्ध मिशन को अंजाम दिया। ट्रम्प के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियों को लगातार उसकी गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। उन्होंने कहा कि अल-मिनुकी अब अफ्रीका में आतंक फैलाने या अमेरिकियों को निशाना बनाने की साजिश नहीं कर पाएगा। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन में सहयोग के लिए नाइजीरिया सरकार का धन्यवाद भी किया। हालांकि ISIS की तरफ से ट्रम्प के दावे पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। नाइजीरिया पहले भी ट्रम्प के बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। ट्रम्प ने आरोप लगाया था कि वहां ईसाइयों पर अत्याचार हो रहे हैं, जिसे नाइजीरिया सरकार ने खारिज किया था। पिछले साल क्रिसमस के दिन अमेरिका ने उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में कथित इस्लामिक ठिकानों पर हमले भी किए थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran US Israel War Ceasefire LIVE Update; Donald Trump Hormuz Strait

Hindi News International Iran US Israel War Ceasefire LIVE Update; Donald Trump Hormuz Strait | Middle East Oil Crisis तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प ने ईरान युद्ध की मंजूरी के लिए संसद में प्रस्ताव रखने का इरादा अभी टाल दिया है। युद्ध की 60 दिन का समय पूरा होने के बाद ट्रम्प को आगे इसे जारी रखने के लिए 1 मई को प्रस्ताव रखना था। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में कहा कि राष्ट्रपति को 60 दिन से ज्यादा युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि ईरान के साथ जो सीजफायर (युद्धविराम) हुआ है, उससे यह 60 दिन की समय सीमा रुक गई है। अमेरिका-ईरान जंग 7 अप्रैल को रुक गया था। इसका मतलब है कि यह जंग करीब 40 दिन चला। हेगसेथ ने यह भी कहा कि इस समय सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि युद्ध विरोधी हैं। इनमें कुछ डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ लगातार दूसरे दिन गुरुवार को संसद में पेश हुए। वियतनाम जंग के बाद 60 दिन का कानून आया अमेरिका में वियतनाम युद्ध के बाद एक कानून बनाया गया था, जिसे ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ कहा जाता है। इस कानून के मुताबिक, राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के बिना सिर्फ 60 दिन ही सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को या तो सेना वापस बुलानी होती है, या युद्ध जारी रखने के लिए संसद से मंजूरी लेनी होती है, या फिर 30 दिन का एक्स्ट्रा समय मांगना होता है। ट्रम्प ने 1 मार्च को संसद में ईरान पर हमले की जानकारी दी थी। ऐसे में 60 दिन की समयसीमा 1 मई को पूरी हो जाएगी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प की धमकी: ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर अपनी फोटो शेयर कर कहा, तूफान आगे बढ़ रहा है। इसे कोई रोक नहीं पाएगा। 2. ईरान का जवाब: सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने कहा, हम हमलावरों को समंदर में डुबो देंगे। फारस की खाड़ी में उनके लिए कोई जगह नहीं है। 3. भारत को राहत: भारत में ईरान के राजदूत ने कहा है कि ईरान होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही तय कर रहा है। भारत के जहाजों पर किसी तरह की रोक नहीं है। 4. मुजतबा की सेहत पर सस्पेंस: मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अब भी साफ जानकारी सामने नहीं आई है। वह अभी तक कभी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। 5. अमेरिकी एयरक्राफ्ट लौटा: दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड अब 300 दिनों से ज्यादा की रिकॉर्ड तैनाती के बाद अमेरिका लौट रहा है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 14 मिनट पहले कॉपी लिंक रिपोर्ट: ईरान के साथ जंग खत्म मानी जा रही रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि ईरान के साथ जो लड़ाई फरवरी में शुरू हुई थी, वह अब ‘खत्म’ मानी जा रही है। अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों ने मंगलवार, 7 अप्रैल को 2 हफ्ते के लिए युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बनाई थी, जिसे बाद में आगे बढ़ा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 7 अप्रैल के बाद से अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच कोई गोलीबारी या हमला नहीं हुआ है। 32 मिनट पहले कॉपी लिंक लेबनान में फिर इजराइली हमले, 32 लोगों की मौत लेबनान में एक बार फिर से इजराइल ने हमले किए। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक हारौफ शहर को निशाना बनाकर की गई एयर स्ट्राइक में एक महिला की मौत हो गई। इस स्ट्राइक में एक बच्चे समेत तीन लोग घायल भी हुए। इसके साथ ही गुरुवार को पूरे लेबनान में इजराइली हमलों में मरने वालों की कुल संख्या 32 हो गई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
World News Updates; Iran US Israel Lebanon North Korea Yemen Breaking News

39 मिनट पहले कॉपी लिंक उत्तर कोरिया ने रविवार सुबह एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। मिसाइलें पूर्वी तट के सिनपो शहर के पास से समुद्र की ओर दागी गईं और करीब 140 किमी तक गईं। यह इस महीने चौथा और साल का सातवां मिसाइल परीक्षण है। दक्षिण कोरिया के पूर्व सुरक्षा सलाहकार किम की-जुंग के मुताबिक, यह कदम अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ संभावित बातचीत से पहले ताकत दिखाने की रणनीति का हिस्सा है। दक्षिण कोरिया ने इस कार्रवाई को उकसावे वाला बताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन कहा है और आपात बैठक बुलाई। जापान ने भी पुष्टि की कि ये उसके आर्थिक क्षेत्र में नहीं गिरीं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी ने हाल ही में कहा कि उत्तर कोरिया अपनी परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है और नए यूरेनियम संवर्धन केंद्र पर काम कर सकता है। मार्च में किम जोंग उन ने कहा था कि उनका देश परमाणु शक्ति बना रहेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इस क्षमता का विस्तार जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









