Monday, 20 Apr 2026 | 10:43 AM

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उमरिया में सुबह से तेज बारिश, गेंहू की फसलें बर्बाद:कटाई में देरी और रंग फीका पड़ने से भाव गिरने की आशंका

उमरिया में सुबह से तेज बारिश, गेंहू की फसलें बर्बाद:कटाई में देरी और रंग फीका पड़ने से भाव गिरने की आशंका

उमरिया में बुधवार सुबह से तेज बारिश हो रही है। बूंदाबांदी के बाद तेज बारिश के कारण गेहूं की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिससे किसान चिंतित हैं। फसल कटाई में देरी और गेहूं का रंग फीका पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पाली क्षेत्र में भी सुबह से हो रही बारिश जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में बुधवार सुबह 5 बजे से बूंदाबांदी शुरू हुई, जो बाद में तेज बारिश में बदल गई। सुबह 8:30 बजे तक बारिश की तीव्रता और बढ़ गई। पाली क्षेत्र में भी सुबह से तेज बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। दूध पहुंचाने वाले भी रेनकोट पहनकर अपने गंतव्य तक पहुंचे। मौसम में आए इस बदलाव से जिले में ठंडक बढ़ गई है। किसान बोले-बारिश से गेहूं की फसलों का रंग होगा खराब बारिश से किसान विशेष रूप से चिंतित हैं। किसान गुड्डा ने बताया कि इस बारिश से सभी फसलों पर असर पड़ेगा, खासकर गेहूं की फसल का रंग खराब हो जाएगा। इससे बाजार में गेहूं का सही भाव नहीं मिल पाएगा। सुबह से आसमान में बादल भी छाए हुए हैं। जिले में 8 अप्रैल को लगभग 3 घंटे में 2.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। तापमान में भी गिरावट आई है; जहां 7 अप्रैल को अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस था, वहीं 8 अप्रैल को यह 19.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अधिकारी रजनीश यादव के मुताबिक, जिले में बूंदाबांदी जारी रह सकती है।

विजयवर्गीय बोले-एसपी को बचाने अनुनय की थी दिग्विजय ने:विधानसभा समितियों के पावर विधानसभा जैसे, सदस्य चाहें तो अधिकारी की खाट खड़ी कर सकते हैं

विजयवर्गीय बोले-एसपी को बचाने अनुनय की थी दिग्विजय ने:विधानसभा समितियों के पावर विधानसभा जैसे, सदस्य चाहें तो अधिकारी की खाट खड़ी कर सकते हैं

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा की समितियों को विधानसभा के बराबर बताते हुए कहा है कि इन समितियों के सदस्य और सभापति के अधिकार ऐसे हैं कि अधिकारी झुकने को मजबूर हो जाते हैं। विधायक यह न समझें कि समितियां कम पावर की होती हैं। मैं समिति का सदस्य रहने के दौरान स्टडी करके जब सवाल करता था तो अधिकारियों की खाट खड़ी हो जाती थी। समिति के तथ्यों को गंभीरता से रखा जाए तो ब्यूरोक्रेसी को सुनना पड़ता है। मंत्री विजयवर्गीय ने ये बातें मंगलवार को विधानसभा में विधानसभा की समितियों के सभापतियों और सदस्यों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहीं। विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा की यह समिति जो होती हैं, इसके महत्व को आप विधायक लोग बढ़ा सकते हैं। समितियों की रिपोर्ट को सरकार भी गंभीरता से लेती है ब्यूरोक्रेसी को सुनना पड़ता है। एसपी-कलेक्टर ने बदसलूकी की तो तबके सीएम दिग्विजय सिंह ने जोड़े थे हाथ संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा जब वे पहली बार के विधायक थे तो विशेषाधिकार समिति में थे। उस समय सागर के कलेक्टर-एसपी ने विधायकों के साथ बदसलूकी की थी। तब एसपी को प्रताड़ित किया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पर्सनली बात की थी और कहा था कि अधिकारी के जीवन में दाग लग जाएगा। उन्होंने बहुत अनुनय विनय की थी। दिग्विजय सिंह अनुनय विनय में माहिर थे। उन्होंने कहा था कि जो नाराजगी है, विधायक उनसे कह सकते हैं। तब जाकर सब माने थे। इसके बाद ब्यूरोक्रेसी में एक अच्छा मैसेज गया। विधानसभा की रिपोर्ट मानी जाती है समितियों की रिपोर्ट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो महत्व विधानसभा का है वही महत्व विधानसभा की समिति का है। विधानसभा की समिति जो रिपोर्ट प्रस्तुत करती है वह विधानसभा की रिपोर्ट मानी जाती है। उन्होंने कहा कि पिछली बार विधानसभा अध्यक्ष से और पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह से उन्होंने समितियों के कामकाज को लेकर पूछा था कि समितियों की क्या हाल हैं तो उन्होंने बताया था कि बहुत स्लो गति है। फिर हम लोगों ने तय किया कि एक बार बैठकर सभी कमेटी के लोगों से चर्चा करना चाहिए। विजयवर्गीय ने कहा कि इस समिति को आप बहुत छोटा नहीं समझें, हर समिति बड़ी महत्वपूर्ण होती है। आश्वासन समिति की रिपोर्ट को गंभीरता से लेती है सरकार मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि अभी मैंने पिछले दिनों अपने विभाग के आश्वासन समिति की रिपोर्ट का अध्ययन किया और एसीएस को कहा कि आश्वासन समिति की रिपोर्ट देखिए। इसके बाद बताया गया कि 95 प्रतिशत आश्वासन पूरे हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को समितियों की रिपोर्ट पर सुनना पड़ता है। जरूरी है कि आपकी समिति एक निर्णय ऐसा दे दे जो सिस्टम की गंभीरता से जुड़ा हो। विधायकों के विशेष अधिकार की सुरक्षा का ध्यान रखती है विशेषाधिकार समिति विजयवर्गीय ने कहा कि विशेष अधिकार समिति आपके अधिकारों की सुरक्षा का ध्यान रखती है। इसलिए विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष का दायित्व है कि वह हर 15 दिन में 10 दिन में बैठक करे। विधायक प्रॉपर तरीके से शिकायत करेंगे तो अधिकारियों पर कार्रवाई समिति कर सकती है। उन्होंने कहा कि मीटिंग में जाने से पहले एजेंडे को पढ़ना, समझना जरूरी है। सदस्य समिति की महत्व को समझेंगे और गंभीरता से लेकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे तो समितियों के परिणाम बहुत अच्छे आएंगे। समितियों की बैठक नियमित होने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए-तोमर इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अगर सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा है तो पंचायत व नगरीय निकाय छोटी इकाई हैं। विधानसभा पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करती है। विधानसभा की भूमिका मां की तरह होती है। जिस तरह मां अपने बच्चे को जन्म देती है, उसका लालन−पालन कर उसे देश के हित में तैयार करने की कल्पना करती है, ठीस उसी तरह हम भी विधानसभा को मां की भूमिका में देखेंगे तो हम भी अपने दायित्व को उसके संपूर्ण रूप में देख पाएंगे। तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश के विधायी इतिहास में विधानसभा की समितियों ने उल्लेखनीय कार्य किया है। मगर बीते कुछ वर्षों में कुछ सदस्य लगातार इन समितियों की बैठकों में अनुपस्थित रहे। इस पर चिंतन की आवश्यकता बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि समितियों की बैठक नियमित होने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। एक वर्ष में कम से कम 12 बैठकें होने की अपेक्षा है। समिति की बैठक होने से विधानसभा के कार्य व्यवहार में सुधार की संभावना होगी। समितियों की बैठक का यदि परिणाम नहीं भी निकलता है तो भी अध्ययन प्रक्रिया से हमारा ज्ञान समृद्ध होगा। सदस्यों के आचरण पर चिंतन की जरूरत- सीएम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में कुछ सदस्यों के आचरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार कुछ सदस्य दायरे के बाहर जाकर कार्य कर जाते हैं। सकारात्मक आलोचना का स्वागत है, लेकिन इस तरह का आचरण अपेक्षित नहीं होता। ऐसे में संसदीय समितियों का बड़ा महत्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के संसदीय ज्ञान व नवाचारों के माध्यम से मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाहियां संसदीय इतिहास की परंपरा को समृद्ध करेगी। समितियों की संयुक्त बैठक को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी संबोधित किया। आभार प्रदर्शन प्राक्कलन समिति के सभापति अजय विश्नोई ने किया। इस बैठक में मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 21 समितियों के सभापति एवं सदस्यगण तथा मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा एवं सचिवालय के अधिकारीगण उपस्थित थे।

मंदसौर में आंधी-तूफान, बोट से गिरी युवती की मौत:शादी समारोह में जा रही थी आशा, रात में मिला शव

मंदसौर में आंधी-तूफान, बोट से गिरी युवती की मौत:शादी समारोह में जा रही थी आशा, रात में मिला शव

मंदसौर जिले में मंगलवार देर शाम से रात तलक आए तेज आंधी-तूफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तेज हवाओं के चलते जहां कई जगह पेड़ गिर गए, वहीं शादी समारोहों के लिए लगाए गए पंडाल तक उखड़ गए। इस बीच एक दर्दनाक हादसे में मोटर बोट (स्टीमर) से नदी में गिरने पर एक युवती की मौत हो गई। नदी में डोली बोट, युवती गिरी पानी में जानकारी के अनुसार, गांव कुशालपुरा निवासी 24 वर्षीय आशा पिता कन्हैयालाल सूर्यवंशी, गांव खात्याखेड़ी में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने जा रही थी। इसी दौरान ग्राम ढौर्री के पास नदी पार करते समय तेज हवा के झोंकों से मोटर बोट अनियंत्रित हो गई। बोट के डोलने से आशा संतुलन खो बैठी और नदी में गिर गई। घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन, देर रात मिला शव घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। नाहरगढ़ थाना पुलिस ने स्थानीय गौताखोरों और एसडीईआरएफ की मदद से तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत और घंटों की खोजबीन के बाद मंगलवार देर रात युवती का शव नदी से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा शव शव को पोस्टमार्टम के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र नाहरगढ़ लाया गया है। बुधवार सुबह पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। परिवार में पसरा मातम, इलाके में शोक की लहर अचानक हुए इस हादसे से मृतका के परिवार में गहरा शोक है और पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर दुख का माहौल है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में युवती की मौत नदी में गिरने से होना सामने आया है। मंगलवार देर शाम को आए तेज आंधी-तूफान ने जिलेभर में व्यापक असर डाला। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और शादी के पंडाल उखड़ने की घटनाएं सामने आईं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

MP Couple Murder | Chhatarpur Jungle Rape & Murder Case

MP Couple Murder | Chhatarpur Jungle Rape & Murder Case

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि छतरपुर के जंगलों में मिले दो कंकाल ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया था। ये कंकाल 14 दिन से लापता साक्षी और मोनू के थे। शुरू में परिजनों को लगा कि दोनों प्यार के चक्कर में साथ भाग गए होंगे, इसलिए ब . 14 दिन बाद जंगल में दोनों के कंकाल मिले। यह दृश्य इतना भयावह था कि गांववालों और परिजनों के होश उड़ गए। करीब 200 मीटर के दायरे में खोपड़ी और हड्डियां बिखरी पड़ी थीं। कपड़े, सैंडल और बैग के आधार पर दोनों की पहचान की गई। घटना स्थल से सल्फास की गोलियों की खाली शीशियां, इस्तेमाल किए गए दो कंडोम मिले। दोनों के मोबाइल और अन्य सामान गायब थे। फॉरेंसिक जांच ने साफ कर दिया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि लूट, गैंगरेप और हत्या का मामला है। मोबाइल ट्रेस करने पर मिला सुराग जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिला। मृतकों में से एक का मोबाइल पास के गांव में ट्रेस हुआ। यह मोबाइल कामता कुशवाहा नाम के व्यक्ति के पास से बरामद किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि यह मोबाइल उसे गांव के ही देवेंद्र राय ने दिया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने जंगल में शव देखे थे, लेकिन पुलिस को सूचना नहीं दी। शक की सूई फार्महाउस तक पहुंची इसके बाद पुलिस ने देवेंद्र राय, कामता कुशवाहा सहित कई लोगों से सख्ती से पूछताछ की। धीरे-धीरे मामले की परतें खुलने लगीं। देवेंद्र राय करीब 15 साल से राकेश गोस्वामी के फार्महाउस में काम करता था, जो घटना स्थल के पास ही था। आपत्तिजनक हाल में देवेंद्र ने देखा था जब पुलिस ने देवेंद्र और राकेश से अलग-अलग पूछताछ की तो देवेंद्र ने सच्चाई उगल दी। उसने बताया कि जंगल में उसने एक युवक और युवती को आपत्तिजनक हालत में देखा। उसने इसकी सूचना अपने मालिक राकेश को दी। इसके बाद राकेश लाठी और देवेंद्र कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे। दोनों चुपचाप उनके करीब गए, जबकि युवक-युवती को इसका आभास तक नहीं था। मौका मिलते ही राकेश ने युवक के सिर पर लाठी से वार किया, जिससे वह बेहोश हो गया। युवती घबराकर उनसे छोड़ देने की गुहार लगाने लगी, लेकिन आरोपियों के इरादे खतरनाक थे। अधमरी हालत में दोनों को पिलाई सल्फास इसके बाद राकेश और देवेंद्र ने सोचा कि अगर युवती जिंदा बच गई तो वह उन्हें पहचान लेगी। इसी डर से उन्होंने उसका गला दबा दिया, जिससे वह भी बेहोश हो गई। दोनों पीड़ित अधमरी हालत में पड़े थे। अब बचने के लिए आरोपियों ने एक और साजिश रची। राकेश ने देवेंद्र को फार्महाउस से सल्फास की गोलियां लाने को कहा। देवेंद्र वहां से दो डिब्बियां और पानी की बोतल लेकर आया। लूटपाट और सबूत मिटाने की कोशिश आरोपियों ने युवक के पर्स से 2500-2600 रुपए निकाल लिए। पहचान छिपाने के लिए दस्तावेज और फोटो अलग कर दिए। बैग में रखे दो मोबाइल में से एक उन्होंने अपने पास रख लिया। घटना के कुछ दिन बाद ये सामान फार्महाउस में छिपा दिया गया। दोनों आरोपियों को दोहरी उम्रकैद की सजा मिली पुलिस ने राकेश गोस्वामी और उसके ड्राइवर देवेंद्र राय को रेप और हत्या का आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सहित सभी सबूत कोर्ट में पेश किए गए। 30 दिसंबर 2023 को छतरपुर जिला कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए हत्या और रेप के मामले में दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई। ………………. पढ़ें पार्ट वन छात्रा से जंगल में गैंगरेप फिर हत्या: बॉयफ्रेंड के साथ 14 दिन से थी लापता मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी छतरपुर के एक ऐसे केस की, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया था। कहते हैं, हर प्रेम कहानी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंचती-कुछ रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं और पीछे छोड़ जाती हैं ऐसा सच, जिसे सुनकर रूह कांप उठे। पढ़ें पूरी खबर

दीवाली से पहले एमपी में यूसीसी लागू करने की तैयारी:सीएम ने मंत्रियों की बैठक में दिए संकेत; गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

दीवाली से पहले एमपी में यूसीसी लागू करने की तैयारी:सीएम ने मंत्रियों की बैठक में दिए संकेत; गोवा-उत्तराखंड मॉडल का होगा अध्ययन

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गृह विभाग इसकी तैयारियों में जुट गया है। सीएम ने मंगलवार को मंत्रियों की बैठक में इसके संकेत दिए। इसको लेकर एक राज्य स्तरीय कमेटी भी बनाई जाएगी। दीवाली से पहले एमपी में इसे लागू किया जा सकता है। गोवा, उत्तराखंड के मॉडल का अध्ययन करेंगे एमपी के अधिकारी सूत्र बताते हैं कि समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने से पहले गोवा सिविल कोड और उत्तराखंड में कुछ समय पहले लागू किए गए यूसीसी का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के लिए व्यावहारिक और संतुलित मॉडल तैयार किया जा सके। ड्राफ्ट तैयार होते ही इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा। केन्द्र से मिली हरी झंडी सरकार इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए सही समय पर कैबिनेट में लाने की रणनीति बना रही है। राज्य स्तरीय कमेटी बनने के बाद आगे की प्रक्रिया और ड्राफ्ट को कैबिनेट में पेश करने की टाइमलाइन तय की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूसीसी को प्रमुख एजेंडा बताया था। एमपी सरकार को केन्द्र से इसे लागू करने की सहमति भी मिल गई है। सामाजिक संतुलन यूसीसी में चुनौती मप्र में अलग प्रकार की सामाजिक व्यवस्था है, खासकर आदिवासी समुदायों की परंपराएं, यूसीसी को लागू कराने में एक अलग प्रकार की चुनौती हैं। 230 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश में 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में सरकार हर वर्ग की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है। क्या बदल सकता है यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है और आगे की प्रक्रिया पूरी होती है, तो सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के समान नियम लागू हो सकते हैं। बहुविवाह पर रोक लग सकती है। महिलाओं को समान अधिकार मिल सकते हैं। संपत्ति और उत्तराधिकार में एकरूपता जैसे बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यूसीसी वाले राज्यों के मॉडल भी समझ लीजिए उत्तराखंड: फरवरी 2024 में बिल पास हुआ और 27 जनवरी 2025 से लागू हुआ। देश में उत्तराखंड पहला राज्य है। जहां यूसीसी लागू किया गया। वहां शादी और तलाक का पंजीयन कराना जरूरी है। लिव इन रिलेशनशिप का 30 दिन में पंजीयन जरूरी है। नियमों का पालन न करने पर तीन महीने की जेल हो सकती है। गुजरात: संपत्ति में बेटा, बेटी को बराबरी का हक होगा। एसटी को इस कानून से बाहर रखा गया है। पहचान छिपाकर धोखे से शादी करना अपराध है। ऐसा करने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। 60 दिन में लिव इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। यहां मार्च 2026 में बिल पास हुआ। जल्द ही लागू हो जाएगा। असम: यहां बहुविवाह को अपराध माना गया है। छठीं अनुसूची क्षेत्र और एसटी कानून से बाहर रखे गए हैं। हालांकि यहां यूसीसी कानून पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है।

इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:पीडब्ल्यूडी के दो अधिकारी 90 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार; भुगतान के बदले मांगे थे कमीशन

इंदौर में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:पीडब्ल्यूडी के दो अधिकारी 90 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार; भुगतान के बदले मांगे थे कमीशन

भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग के दो अधिकारियों को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, आवेदक राघवेन्द्र सिंह गुर्जर, निवासी रामनगर आदर्शपुरम, ग्वालियर, जो सांई एसोसिएट फर्म में लायजनिंग मैनेजर हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी फर्म ने सितंबर 2025 में राऊ से बामपुरा तक इलेक्ट्रिक सिटिंग का काम 20 लाख रुपए में लिया था, जिसे एक माह में पूर्ण कर दिया गया था। कार्य पूर्ण होने के बाद जीएसटी सहित 17 लाख रुपए का भुगतान लंबित था। शिकायत में बताया गया कि भुगतान जारी करने के एवज में आरोपी बालकुमार जैन (सहायक यंत्री/प्रभारी कार्यपालन अधिकारी, लोक निर्माण विभाग, विद्युत व यांत्रिकी संभाग इंदौर) ने 4% के हिसाब से 60 हजार रुपए और आरोपी धीरेंद्र कुमार नीमा (सब इंजीनियर/प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी) ने 2% के हिसाब से 30 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की थी। इस प्रकार कुल 90 हजार रुपए की मांग की गई थी। आवेदक ने इसकी शिकायत राजेश सहाय (एसपी, लोकायुक्त) से की। शिकायत के सत्यापन के बाद 7 अप्रैल को ट्रैप दल का गठन किया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपी बालकुमार जैन को 60 हजार रुपए और धीरेन्द्र कुमार नीमा को 30 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 एवं भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

निजी स्कूल संचालकों-प्रिंसिपलों-बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से झटका:कहा- कॉपी-किताबों में कमीशनखोरी के सबूत नजरअंदाज नहीं किए जा सकते, FIR रद्द नहीं होंगे

निजी स्कूल संचालकों-प्रिंसिपलों-बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से झटका:कहा- कॉपी-किताबों में कमीशनखोरी के सबूत नजरअंदाज नहीं किए जा सकते, FIR रद्द नहीं होंगे

जबलपुर में मनमानी फीस वसूली और कॉपी किताबों में कमीशनखोरी के मामले में निजी स्कूलों के संचालकों, प्रिंसिपल और बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों, बुक सेलर्स और पब्लिशर्स के गठजोड़ से जुड़ी एफआईआर को रद्द कराने की मांग ठुकरा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मामले में गंभीर आरोप और पर्याप्त सुबूत मौजूद हैं, इसलिए एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट में यह मामला जारी रहेगा। दो साल पहले जिला प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ था कि स्कूल प्रबंधन ने निर्धारित सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाई और छात्रों को चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया। जांच में ये भी पाया गया था कि कुछ किताबों पर डुप्लीकेट या संदिग्ध ISBN नंबर दर्ज थे, और स्कूल प्रबंधन, बुक सेलर्स ,पब्लिशर्स के गठजोड़ से पैरेंट्स को ऊंचे दामों पर किताबें बेचीं गईं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर के ओमती, बेलबाग, संजीवनी नगर, ग्वारीघाट और गोराबाजार थानों में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिन्हें स्कूल प्रिंसिपल्स, प्रबंधन और बुक सेलर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कई मामलों में फीस में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई और छात्रों को विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज, जब्त सामग्री और गवाहों के बयान ,आपराधिक साजिश और अवैध आर्थिक लाभ के प्रयास की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे में तथ्यों की जांच और साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट का विषय है, ना कि हाईकोर्ट से एफआईआर रद्द करने का। कोर्ट ने आरोपी स्कूल प्रिंसिपल, बुक सेलर्स की सभी याचिकाएं खारिज करते हुए एसपी जबलपुर को निर्देश दिया है कि वो मामले की लंबित जांच, जल्द से जल्द पूरा करें और ट्रायल कोर्ट मामले में निष्पक्ष सुनवाई कर अपना फैसला सुनाए। अदालत ने इस मामले में दाखिल कुल 13 याचिकाओं को खारिज किया है। किन-किन पर लगे आरोप मामले में जबलपुर और कटनी के कई मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं, जैसे अतुल अनुपम इब्राहम, लवी मैथ्यू, एकता पीटर्स, चंद्रशेखर विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त प्रिंसिपल) के साथ चिल्ड्रन्स बुक हाउस संचालक सूर्यप्रकाश वर्मा और शशांक श्रीवास्तव के नाम भी सामने आए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्कूलों, बुकसेलर्स और पब्लिशर्स के बीच संगठित मिलीभगत थी। एक मोनोपोलिस्टिक सप्लाई चेन तैयार की गई। अभिभावकों पर दबाव बनाकर महंगी किताबें खरीदवाई गईं। इससे अवैध और अत्यधिक मुनाफा कमाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं बल्कि आपराधिक षड्यंत्र का संकेत देता है। आरोपियों को पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन उन्होंने एफआईआर रद्द कराने के लिए याचिकाएं दायर की थीं। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता दिनेश प्रसाद पटेल ने कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

खर्च और मारपीट से परेशान मां जनसुनवाई में पहुंची:इंदौर पुलिस की काउंसलिंग के बाद बेटे ने मानी गलती; मां के पैर छूकर माफी मांगी

खर्च और मारपीट से परेशान मां जनसुनवाई में पहुंची:इंदौर पुलिस की काउंसलिंग के बाद बेटे ने मानी गलती; मां के पैर छूकर माफी मांगी

इंदौर में जनसुनवाई के दौरान एक भावुक मामला सामने आया, जहां रोती हुई मां ने अपने ही बेटे के खिलाफ गुहार लगाई। मां ने शिकायत में बताया कि बेटा खर्च नहीं देता, मारपीट करता है और बहू भी प्रताड़ित करती है। एसीपी रूबिना मिजवानी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मां और बेटे को काउंसलिंग के लिए बुलाया। एसीपी कार्यालय में थाना प्रभारी सुशील पटेल और अनुभवी महिला काउंसलरों की मौजूदगी में पूरे परिवार को बैठाकर दोनों पक्षों की बात सुनी गई। काउंसलिंग के दौरान मां की भावनाओं को समझाते हुए बेटे को उसके कर्तव्यों का एहसास कराया गया। इसके बाद बेटे ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मां से माफी मांगी। मां ने अपने खर्च के लिए हर महीने 8 हजार रुपए और रहने के लिए दो कमरों के किराए की मांग रखी, जिसे बेटे ने सहर्ष मान लिया। इसके बाद बेटे ने मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और मिठाई खिलाकर विवाद खत्म किया। इस पहल के बाद बुजुर्ग महिला ने पुलिस का आभार जताया।

राजगढ़ में 5 माह का भ्रूण मिला:जांच में लड़की होने की पुष्टि; छोड़ने वाले की तलाश में पुलिस ने CCTV खंगाले

राजगढ़ में 5 माह का भ्रूण मिला:जांच में लड़की होने की पुष्टि; छोड़ने वाले की तलाश में पुलिस ने CCTV खंगाले

राजगढ़ जिले के जीरापुर नगर की आवास कॉलोनी में मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे 4 से 5 माह का भ्रूण मिला। इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। कॉलोनी के कुछ लोगों ने भ्रूण देखकर तुरंत आसपास के लोगों को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने भ्रूण को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। प्रारंभिक चिकित्सकीय परीक्षण में भ्रूण की उम्र लगभग 4 से 5 माह आंकी गई है। बीएमओ डॉ. सुनील चौरसिया ने बताया कि जांच में यह पुष्टि हुई है कि भ्रूण एक लड़की का था। पुलिस ने CCTV खंगाले लेकिन कोई सुराग नहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही, कॉलोनी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि भ्रूण को यहां किसने और किन परिस्थितियों में छोड़ा। हालांकि देर रात तक यह पता नहीं लग सका कि इसे कौन यहां छोड़ गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जोमैटो से मंगाई कोल्ड कॉफी में कॉकरोच निकलने का दावा:देवास में ग्राहक बोला- भाई की तबीयत बिगड़ गई, दुकानदार ने कहा-हमने कोई लापरवाही नहीं की

जोमैटो से मंगाई कोल्ड कॉफी में कॉकरोच निकलने का दावा:देवास में ग्राहक बोला- भाई की तबीयत बिगड़ गई, दुकानदार ने कहा-हमने कोई लापरवाही नहीं की

देवास शहर के अलंकार मार्केट क्षेत्र में कस्टमर ने ऑनलाइन फूड ऑर्डर में कॉकरोच निकलने का दावा किया है। जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम को कस्टमर ने जोमैटो के जरिए साईं पूजा नाम की दुकान से कोल्ड कॉफी और सैंडविच ऑर्डर किया था। आरोप है कि ऑर्डर किए गए खाने में कॉकरोच निकला, जिसके बाद ग्राहक और दुकान संचालक के बीच जमकर बहस हो गई। ग्राहक का कहना है कि खाने के बाद उसके भाई की तबीयत बिगड़ गई और उल्टियां शुरू हो गईं, जिसके चलते उसे एमजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। ग्राहक ने साफ कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए, लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दुकानदार बोला- कंपनी से शिकायत करें वहीं, कैफे संचालक तुषार तलरेजा ने अपनी सफाई में कहा कि उनकी ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई है और इस मामले में शिकायत जोमैटो कंपनी से की जानी चाहिए। विवाद बढ़ने पर ग्राहक ने पुलिस को बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी। ग्राहक ने मामले में औपचारिक शिकायत करने की बात कही है।