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निजी स्कूल संचालकों-प्रिंसिपलों-बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से झटका:कहा- कॉपी-किताबों में कमीशनखोरी के सबूत नजरअंदाज नहीं किए जा सकते, FIR रद्द नहीं होंगे

निजी स्कूल संचालकों-प्रिंसिपलों-बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से झटका:कहा- कॉपी-किताबों में कमीशनखोरी के सबूत नजरअंदाज नहीं किए जा सकते, FIR रद्द नहीं होंगे

जबलपुर में मनमानी फीस वसूली और कॉपी किताबों में कमीशनखोरी के मामले में निजी स्कूलों के संचालकों, प्रिंसिपल और बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों, बुक सेलर्स और पब्लिशर्स के गठजोड़ से जुड़ी एफआईआर को रद्द कराने की मांग ठुकरा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मामले में गंभीर आरोप और पर्याप्त सुबूत मौजूद हैं, इसलिए एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट में यह मामला जारी रहेगा। दो साल पहले जिला प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ था कि स्कूल प्रबंधन ने निर्धारित सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाई और छात्रों को चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया। जांच में ये भी पाया गया था कि कुछ किताबों पर डुप्लीकेट या संदिग्ध ISBN नंबर दर्ज थे, और स्कूल प्रबंधन, बुक सेलर्स ,पब्लिशर्स के गठजोड़ से पैरेंट्स को ऊंचे दामों पर किताबें बेचीं गईं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर के ओमती, बेलबाग, संजीवनी नगर, ग्वारीघाट और गोराबाजार थानों में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिन्हें स्कूल प्रिंसिपल्स, प्रबंधन और बुक सेलर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कई मामलों में फीस में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई और छात्रों को विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज, जब्त सामग्री और गवाहों के बयान ,आपराधिक साजिश और अवैध आर्थिक लाभ के प्रयास की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे में तथ्यों की जांच और साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट का विषय है, ना कि हाईकोर्ट से एफआईआर रद्द करने का। कोर्ट ने आरोपी स्कूल प्रिंसिपल, बुक सेलर्स की सभी याचिकाएं खारिज करते हुए एसपी जबलपुर को निर्देश दिया है कि वो मामले की लंबित जांच, जल्द से जल्द पूरा करें और ट्रायल कोर्ट मामले में निष्पक्ष सुनवाई कर अपना फैसला सुनाए। अदालत ने इस मामले में दाखिल कुल 13 याचिकाओं को खारिज किया है। किन-किन पर लगे आरोप मामले में जबलपुर और कटनी के कई मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं, जैसे अतुल अनुपम इब्राहम, लवी मैथ्यू, एकता पीटर्स, चंद्रशेखर विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त प्रिंसिपल) के साथ चिल्ड्रन्स बुक हाउस संचालक सूर्यप्रकाश वर्मा और शशांक श्रीवास्तव के नाम भी सामने आए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्कूलों, बुकसेलर्स और पब्लिशर्स के बीच संगठित मिलीभगत थी। एक मोनोपोलिस्टिक सप्लाई चेन तैयार की गई। अभिभावकों पर दबाव बनाकर महंगी किताबें खरीदवाई गईं। इससे अवैध और अत्यधिक मुनाफा कमाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं बल्कि आपराधिक षड्यंत्र का संकेत देता है। आरोपियों को पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन उन्होंने एफआईआर रद्द कराने के लिए याचिकाएं दायर की थीं। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता दिनेश प्रसाद पटेल ने कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

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निजी स्कूल संचालकों-प्रिंसिपलों-बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से झटका:कहा- कॉपी-किताबों में कमीशनखोरी के सबूत नजरअंदाज नहीं किए जा सकते, FIR रद्द नहीं होंगे

निजी स्कूल संचालकों-प्रिंसिपलों-बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से झटका:कहा- कॉपी-किताबों में कमीशनखोरी के सबूत नजरअंदाज नहीं किए जा सकते, FIR रद्द नहीं होंगे

जबलपुर में मनमानी फीस वसूली और कॉपी किताबों में कमीशनखोरी के मामले में निजी स्कूलों के संचालकों, प्रिंसिपल और बुक सेलर्स को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों, बुक सेलर्स और पब्लिशर्स के गठजोड़ से जुड़ी एफआईआर को रद्द कराने की मांग ठुकरा दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मामले में गंभीर आरोप और पर्याप्त सुबूत मौजूद हैं, इसलिए एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। ट्रायल कोर्ट में यह मामला जारी रहेगा। दो साल पहले जिला प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ था कि स्कूल प्रबंधन ने निर्धारित सीमा से ज्यादा फीस बढ़ाई और छात्रों को चुनिंदा दुकानों से किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया। जांच में ये भी पाया गया था कि कुछ किताबों पर डुप्लीकेट या संदिग्ध ISBN नंबर दर्ज थे, और स्कूल प्रबंधन, बुक सेलर्स ,पब्लिशर्स के गठजोड़ से पैरेंट्स को ऊंचे दामों पर किताबें बेचीं गईं। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर के ओमती, बेलबाग, संजीवनी नगर, ग्वारीघाट और गोराबाजार थानों में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं, जिन्हें स्कूल प्रिंसिपल्स, प्रबंधन और बुक सेलर्स ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कई मामलों में फीस में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई और छात्रों को विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया गया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज, जब्त सामग्री और गवाहों के बयान ,आपराधिक साजिश और अवैध आर्थिक लाभ के प्रयास की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे में तथ्यों की जांच और साक्ष्यों का परीक्षण ट्रायल कोर्ट का विषय है, ना कि हाईकोर्ट से एफआईआर रद्द करने का। कोर्ट ने आरोपी स्कूल प्रिंसिपल, बुक सेलर्स की सभी याचिकाएं खारिज करते हुए एसपी जबलपुर को निर्देश दिया है कि वो मामले की लंबित जांच, जल्द से जल्द पूरा करें और ट्रायल कोर्ट मामले में निष्पक्ष सुनवाई कर अपना फैसला सुनाए। अदालत ने इस मामले में दाखिल कुल 13 याचिकाओं को खारिज किया है। किन-किन पर लगे आरोप मामले में जबलपुर और कटनी के कई मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं, जैसे अतुल अनुपम इब्राहम, लवी मैथ्यू, एकता पीटर्स, चंद्रशेखर विश्वकर्मा (सेवानिवृत्त प्रिंसिपल) के साथ चिल्ड्रन्स बुक हाउस संचालक सूर्यप्रकाश वर्मा और शशांक श्रीवास्तव के नाम भी सामने आए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्कूलों, बुकसेलर्स और पब्लिशर्स के बीच संगठित मिलीभगत थी। एक मोनोपोलिस्टिक सप्लाई चेन तैयार की गई। अभिभावकों पर दबाव बनाकर महंगी किताबें खरीदवाई गईं। इससे अवैध और अत्यधिक मुनाफा कमाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं बल्कि आपराधिक षड्यंत्र का संकेत देता है। आरोपियों को पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन उन्होंने एफआईआर रद्द कराने के लिए याचिकाएं दायर की थीं। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता दिनेश प्रसाद पटेल ने कार्रवाई को पूरी तरह वैध बताया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

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