Yami Gautam: Personal Life Impact on Career

59 मिनट पहले कॉपी लिंक धुरंधर 2 की सक्सेस के बीच एक्ट्रेस यामी गौतम एक बार फिर अपने अलग फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने हाल ही में खुलासा किया कि उन्होंने जानबूझकर अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखा, जिसका असर उनके करियर पर भी पड़ा। पिंकविला से बातचीत के दौरान यामी गौतम ने बताया कि इंडस्ट्री में ओवरएक्सपोजर के दौर में भी उन्होंने प्राइवेट रहने का रास्ता चुना। यामी ने कहा कि एक सीनियर एक्टर की बात से वह काफी प्रभावित हुई थीं- “जितना कम लोग आपको जानते हैं, उतना ही आसान होता है उन्हें अपने किरदार पर यकीन दिलाना।” उन्होंने माना कि यह फैसला आसान नहीं था। कई बार उन्हें लगा कि अगर वह अपनी निजी जिंदगी को ज्यादा सामने लातीं, तो फिल्ममेकर्स के लिए उन्हें रोल के लिए कन्विंस करना आसान होता। यानी इंडस्ट्री में विजिबिलिटी भी काम दिलाने में अहम भूमिका निभाती है। एक्ट्रेस ने यह भी साफ किया कि वह कभी भी पर्सनल लाइफ को प्रमोशन का हिस्सा नहीं बनाना चाहती थीं। उनका फोकस हमेशा स्क्रिप्ट और किरदार पर रहा। यामी के मुताबिक, वह ऐसे रोल चुनती हैं जो उन्हें एक एक्टर के तौर पर चुनौती दें और दर्शकों को कुछ नया दें। यामी ने यह भी कहा कि समय के साथ इंडस्ट्री में बदलाव आ रहा है और अब कंटेंट व परफॉर्मेंस को ज्यादा अहमियत मिल रही है। यही वजह है कि बिना ज्यादा पब्लिसिटी के भी उन्हें मजबूत भूमिकाएं मिल रही हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो यामी गौतम इन दिनों अपने पति आदित्य धर के साथ चर्चा में हैं। आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘धुरंधर’ के बाद अब ‘धुरंधर 2’ की सिनेमा घरों में रिलीज हो चुकी है। जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने पेड प्रीव्यू और दूसरे दिन तक की कमाई मिलाकर 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Emergency Loan Application Guide; Unsecured Personal Loan

5 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक वो कहावत है न कि ‘मुसीबत किसी भी वक्त आ सकती है।’ कोई मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है, अचानक घर की मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है, शादी के खर्चे हो सकते हैं या कुछ भी और जरूरत पड़ सकती है। जब अचानक कोई बड़ा खर्च आ पड़े तो क्या करें? ऐसी स्थिति में काम आता है इमरजेंसी लोन। ऐसे वक्त में बैंक या NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) से लोन लेना ही प्रैक्टिकल विकल्प है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती जरूरत के समय पैसा मिलना है। अक्सर डॉक्यूमेंट्स पूरे न हों या प्रक्रिया की जानकारी न हो तो लोन रिजेक्ट हो सकता है या इसमें बहुत देरी हो सकती है। इसलिए आज हम ‘आपका पैसा‘ कॉलम में इमरजेंसी लोन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- इमरजेंसी लोन लेने का सही तरीका क्या है? इसके लिए कौन से डॉक्यूमेंट्स जरूरी होते हैं? सवाल- इमरजेंसी लोन क्या है और यह सामान्य लोन से कैसे अलग है? जवाब- ये एक ‘अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन’ है, जिसे विशेष रूप से इमरजेंसी के लिए डिजाइन किया गया है। सामान्य होम लोन या कार लोन में लंबे कागजी काम और संपत्ति के मूल्यांकन की जरूरत होती है, जिसमें हफ्तों लग सकते हैं। इसके विपरीत इमरजेंसी लोन पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस प्रक्रिया है। आजकल फिनटेक कंपनियां और बैंक ‘प्री-अप्रूव्ड’ लोन का विकल्प देते हैं। इनके पास पहले से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री होती है, जिससे आवेदन के 5 से 15 मिनट के भीतर पैसा बैंक खाते में पहुंच जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको कोई गारंटी देने या कुछ भी गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती है। सवाल- इमरजेंसी लोन मिलने में कितना समय लग सकता है? जवाब- यह कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे लेंडर (उधार देने वाला बैंक या वित्तीय संस्था) कौन है, लोन किस प्रकार का है और उस लेंडर की डिस्बर्सल (अकाउंट में लोन अमाउंट क्रेडिट होने की प्रोसेस) प्रक्रिया कितनी तेज है। जल्दी लोन पाने के लिए पूरी प्रक्रिया ग्राफिक्स में देखिए- अगर आपके पास आधार से लिंक मोबाइल नंबर और पैन कार्ड है, तो ‘लोन वेरिफिकेशन’ में बहुत कम समय लगेगा। सवाल- इमरजेंसी लोन को कहां खर्च किया जा सकता है? जवाब- इसकी कोई ‘एंड-यूज’’ पाबंदी नहीं होती, यानी बैंक उधारकर्ता से यह नहीं पूछता कि वह पैसा कहां खर्च करेगा। हालांकि, इसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से केवल अनिवार्य स्थितियों में ही करना चाहिए। आमतौर पर इसका इस्तेमाल इन कामों के लिए होता है- मेडिकल इमरजेंसी वाहन की मरम्मत घर की मरम्मत एजुकेशन फीस कोई अनहोनी अचानक यात्रा फैमिली इमरजेंसी सवाल- इमरजेंसी लोन कितने प्रकार के होते हैं? जवाब- इमरजेंसी के लिए कई तरह के लोन विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड कैश एडवांस, सैलरी एडवांस और डिजिटल इंस्टेंट लोन प्रमुख हैं। पर्सनल लोन- यह पॉपुलर और आसान तरीका है। इसमें ब्याज दर 10.50% से 24% तक हो सकती है। क्रेडिट कार्ड लोन- क्रेडिट कार्ड की लिमिट पर मिलने वाले लोन की प्रक्रिया तेज होती है, क्योंकि इसमें कोई नया डॉक्यूमेंट नहीं देना होता है। गोल्ड लोन- अगर आपका सिबिल स्कोर खराब है, तो घर में रखे सोने पर 30 मिनट में लोन मिल सकता है। सैलरी एडवांस लोन- कई कंपनियां और एप्स सैलरी के आधार पर छोटा लोन (शॉर्ट टर्म) देते हैं। डिजिटल इंस्टेंट लोन- मोबाइल एप में आधार-पैन से डिजिटल KYC होती है और मिनटों में अप्रूवल मिल जाता है। इसमें आमतौर पर 5,000 से 2 लाख रुपए तक का छोटा लोन मिल सकता है। सवाल- सही इमरजेंसी लोन का चुनाव कैसे करें? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है। डिटेल ग्राफिक्स में देखिए- सवाल- अगर CIBIL स्कोर कम है, क्या तब भी इमरजेंसी लोन मिल सकता है? जवाब- CIBIL स्कोर कम (600 से नीचे) होने पर बड़े बैंक लोन देने से कतराते हैं। ऐसे में ‘पियर-टू-पियर’ (P2P) लेंडिंग प्लेटफॉर्म या NBFC एप्स का रुख कर सकते हैं। ये केवल CIBIL स्कोर नहीं देखते, बल्कि उधारकर्ता के यूटिलिटी बिल भुगतान और बैंकिंग ट्रांजैक्शन के आधार पर लोन देते हैं। हालांकि, CIBIL स्कोर कम होने पर ब्याज दर थोड़ी ज्यादा चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा गोल्ड लोन एक बेहतरीन विकल्प है, जहां CIBIL स्कोर की अहमियत न के बराबर होती है। सवाल- लोन लेते समय ‘प्रोसेसिंग फीस’ और ‘फोरक्लोजर चार्ज’ पता करना क्यों जरूरी है? जवाब- आमतौर पर कर्ज लेते समय लोग सिर्फ ब्याज दर देखते हैं, लेकिन इमरजेंसी लोन में हिडेन चार्ज भी आपकी जेब ढीली कर सकते हैं। प्रोसेसिंग फीस आमतौर पर लोन राशि का 1-5% तक होती है, जो लोन डिस्बर्स (अकाउंट में रुपए ट्रांसफर होने की प्रक्रिया) होते समय ही काट ली जाती है। वहीं, ‘फोरक्लोजर चार्ज’ वह चार्ज है, जो बैंक तब वसूलते हैं, जब आप समय से पहले लोन बंद करना चाहते हैं। इमरजेंसी लोन लेते समय हमेशा ऐसे लेंडर चुनें, जिनकी प्रोसेसिंग फीस कम हो और जो 6 महीने बाद ‘जीरो फोरक्लोजर’ की सुविधा देते हों। इससे आप भविष्य में ब्याज का बोझ कम कर सकेंगे। सवाल- डिजिटल लोन एप्स से लोन लेते समय फ्रॉड से कैसे बचें? जवाब- प्ले स्टोर पर हजारों लोन एप्स मौजूद हैं, जिनमें से कई फ्रॉड और असुरक्षित हैं। सुरक्षा के लिए हमेशा इन बातों का ध्यान रखें- चेक करें कि एप ‘RBI रजिस्टर्ड NBFC’ के साथ पार्टनरशिप में है या नहीं। लोन डिस्बर्स होने से पहले कोई ‘फाइल चार्ज’ या ‘एडवांस मनी’ न दें। वैध कंपनियां अपना शुल्क लोन राशि से ही काटती हैं, अलग से पैसे नहीं मांगती हैं। एप को अपने कॉन्टैक्ट लिस्ट या गैलरी का एक्सेस देने से बचें। हमेशा एप की रेटिंग देखें और यूजर रिव्यू पढ़ें। अगर कोई एप 7 दिन का लोन दे रहा है, तो सावधान हो जाएं। ये अक्सर रिकवरी के लिए प्रताड़ित करते हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए आपका पैसा- क्या होम लोन का प्रीपेमेंट करना सही है: ब्याज के पैसे बचेंगे, लेकिन कैश क्रंच का डर भी, एक्सपर्ट से जानें फायदे-नुकसान हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका एक अपना घर हो। इस सपने को साकार करने के लिए ज्यादातर लोग ‘होम लोन’ लेते हैं और सालों तक EMI चुकाते रहते हैं। इस तरह
Is Personal Space Demand a Crime? Expert Relationship Advice for Mother Wife

Hindi News Lifestyle Is Personal Space Demand A Crime? Expert Relationship Advice For Mother Wife 2 दिन पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं। 2 साल का बच्चा है। बीते कुछ दिनों से मेरे भीतर अजीब सा अलगाव पैदा हो रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे मैंने पिछले कुछ सालों में अपने लिए कुछ किया ही नहीं है। अब मुझे अकेले रहना ज्यादा अच्छा लगता है। जब मैं ये बात हसबैंड से शेयर करती हूं तो उन्हें लगता है कि मैं उनसे दूर जाना चाहती हूं। वो मुझे समझ ही नहीं पा रहे हैं। मुझे डर है कि कहीं हमारी केमिस्ट्री न खराब हो जाए। क्या रिश्ते में स्पेस मांगना गलत है? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- मैं अपने जवाब की शुुरुआत एक फिल्म से करना चाहूंगी। एक जॉर्जियन फिल्म है, “माय हैप्पी फैमिली।” इसमें एक शादीशुदा, भरे–पूरे परिवार वाली महिला आपकी ही तरह पर्सनल स्पेस चाहती है। थोड़ा अकेले रहना, थोड़ा अपने साथ वक्त बिताना, थोड़ा खुद से बातें करना। सोचिए, हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। भारतीय समाज की मुश्किलें मुश्किल ये है कि हमारे समाज ने खुद के बारे में सोचने को स्वार्थ से जोड़ दिया है। महिलाओं के लिए तो ये और भी मुश्किल है। अगर कोई महिला कहती है कि उसे अकेले रहना अच्छा लगता है या उसे थोड़ा स्पेस चाहिए तो उस पर तुरंत सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। क्या रिश्ता ठीक नहीं है? क्या शादी में प्यार कम हो गया है? क्या पति से दूर जाना चाहती हो? जबकि सच्चाई यह है कि खुद के लिए समय मांगना, खुद को समझना, खुद के साथ रहना, ये सब रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं, उसे बचाने के लिए की गई कोशिशें हैं। शादी का मतलब ‘सेल्फ’ का मर जाना नहीं हमारे समाज और संस्कृति में शादी की बुनियादी परिभाषा ही गलत है। हमें लगता है कि शादी होने का मतलब है, अब महिला की अपनी कोई निजता नहीं रह गई है। उसकी पहचान ही यही है कि वो पत्नी है, मां है, बहू है। लेकिन वो एक इंसान नहीं है, जो आजादी और एजेंसी चाह सकती है। शादी और उसमें भी खासतौर पर छोटे बच्चों की जिम्मेदारी बहुत डिमांडिंग जॉब है। अमूमन औरतों को उतनी मदद नहीं मिलती, जिसकी उन्हें जरूरत है। इन और ऐसे ही तमाम कारणों से अक्सर शादी में दूरियां आ जाती हैं। खुद को जानना है जरूरी इस दुनिया में हर इंसान का अपना अस्तित्व होता है। यहां पर अस्तित्व यानी “मैं कौन हूं, मुझे क्या अच्छा लगता है, मुझे किस चीज से खुशी मिलती है।” यह जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया का हर रिश्ता इसके बाद ही आता है। भले ही वह रिश्ता पति-पत्नी का हो, माता-पिता का हो या मां-बच्चे का। अगर कोई इंसान अंदर से खुश नहीं है, संतुष्ट नहीं है, तो वह रिश्तों में भी खुशी नहीं बांट सकता है। स्पेस मांगने में गिल्ट क्यों? अपने लिए स्पेस मांगते हुए बिल्कुल भी संकोच या गिल्ट नहीं फील करना चाहिए। यह अकेलेपन की मांग नहीं, खुद के लिए स्पेस की चाहत है। रिश्ते में स्पेस मांगने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने पति से दूर जाना चाहती हैं। इसका मतलब यह है कि आप खुद के करीब आना चाहती हैं। यह फर्क समझना बहुत जरूरी है। पर्सनल स्पेस में इंसान अपने इमोशंस को बेहतर ढंग से प्रोसेस करना सीखता है। वह खुशी और दुख को पहचानकर उनसे डील करना सीखता है। नकारात्मकता और एंग्जाइटी से निपटना सीखता है। इसका सकारात्मक असर उसके सभी रिश्तों पर पड़ता है। पर्सनल स्पेस के फायदे ग्राफिक में देखिए- कंपैशन और जिम्मेदारी से कहें अपनी बात बहुत मुमकिन है कि जब आप अपने हसबैंड से ये बात शेयर करेंगी तो उन्हें लगे कि आप उनसे दूर जाना चाहती हैं। यह उनकी गलतफहमी हो सकती है, लेकिन उनकी अपनी भावनाएं भी जायज हैं। इसलिए ऐसे मामले में बातचीत बहुत सोच-समझकर करनी चाहिए। ऐसी बातें भावनाओं में बहकर नहीं, समझदारी और थोड़ी डिप्लोमेसी के साथ करनी चाहिए। डिप्लोमेसी का मतलब चालाकी से नहीं, बल्कि सही भाषा से है। हसबैंड से पूछें ये सवाल क्या आपने कभी खुद के लिए समय निकाला है? क्या आप दोस्तों के साथ बाहर जाते हैं? क्या आप क्रिकेट देखते हैं, अपने शौक पूरे करते हैं? क्या आप यह सब करते हुए खुद को कम पति या कम पिता (पति या पिता का कम दायित्वबोध) महसूस करते हैं? जब वह इन सवालों का जवाब देंगे तो उन्हें धीरे-धीरे समझ आएगा कि जैसे उन्हें अपने तरीके से रिचार्ज होने का हक है, वैसे ही आपको भी हक है। यह तुलना नहीं, जरूरी उदाहरण है। असली समस्या न भूलें बात करते हुए यह न भूलें कि असल समस्या क्या है। उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि अगर आप खुद को नहीं संभालेंगी तो आगे चलकर इसका असर रिश्ते पर पड़ सकता है। बताएं कि आपको इसी बात का डर है। यहां ये समझना भी जरूरी है कि जब आप स्पेस मांगेंगी तो सामने वाला इंसान असहज हो सकता है। कुछ लोग इसे समझते हैं, जबकि कुछ लोग इसे अपने इगो पर ले लेते हैं। यह भी संभव है कि आपके पति साइलेंट ट्रीटमेंट देने लगें, आपसे बात करना कम कर दें, इंटिमेसी से दूरी बनाने लगें। आपको यह जताने लगें कि जैसे उन्हें आपकी जरूरत ही नहीं है। मानसिक रूप से तैयार रहें पति के इस तरह के रिएक्शंस उनकी अपनी असुरक्षा के कारण हो सकते हैं। उन्हें यह डर हो सकता है कि उनका आप पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। इसलिए जरूरी है कि आप मानसिक रूप से तैयार रहें कि शुरुआत में सब कुछ स्मूद नहीं होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं। यहां आपको इमोशनल नहीं, लॉजिकल रहना पड़ेगा। अगर वो आपसे कहें कि तुम ऐसा करोगी
‘पेड प्रमोशन के तहत फैलाई गई बच्चों के गायब होने की कहानी’, दिल्ली पुलिस बोली- पैनिक फैलाना है इरादा – children missing case updates delhi police claim this story circulated for paid promotion create panic personal interest

होमताजा खबरदेश पेड प्रमोशन के तहत फैलाई गई बच्चों के गायब होने की कहानी – दिल्ली पुलिस Last Updated:February 06, 2026, 11:48 IST Delhi Children Missing Case: नेशनल कैपिटल दिल्ली में सैकड़ों की तादाद में गुमशुदा हुए बच्चे का मामला गर्मा गया है. जिनके बच्चे लापता हुए हैं, वे सामने आकर अपना दुख बता रहे हैं. वहीं, इस मसले पर अब दिल्ली पुलिस का बयान सामने आया है. पुलिस ने 800 से ज्यादा बच्चों के गायब होने की खबर के पीछे बड़ी साजिश का इशारा किया है. दिल्ली में 800 से भी ज्यादा बच्चों के गुमशुदा होने के मसले पर अहम बयान दिया है. (फाइल फोटो/PTI) Delhi Children Missing Case: देश की राजधानी दिल्ली में 800 से ज्यादा बच्चों के गायब होने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस का कहना है कि पेड प्रमोशन के तहत बच्चों के गायब होने की बात फैलाई गई. पुलिस ने एक्शन लेने की बात भी कही है. दिल्ली में कथित तौर पर बढ़ते लापता बच्चों के मामलों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है. दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी और संयुक्त आयुक्त संजय त्यागी ने स्पष्ट किया कि राजधानी में लापता व्यक्तियों की संख्या में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 में तो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लापता मामलों की रिपोर्टिंग में कमी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें तथ्यहीन हैं. ज्वाइंट सीपी संजय त्यागी ने कहा कि दिल्ली पुलिस अपराध की निष्पक्ष और पारदर्शी रिपोर्टिंग नीति का पालन करती है. लापता व्यक्तियों की सूचना न केवल स्थानीय पुलिस थानों में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से या ERSS-112 नंबर पर कॉल करके भी दी जा सकती है. उन्होंने बताया कि मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पुलिस लापता लोगों की तलाश के लिए तुरंत कार्रवाई करती है और विशेष रूप से बच्चों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है. दिल्ली पुलिस के अनुसार, सभी जिलों में समर्पित लापता व्यक्ति दस्ते सक्रिय हैं, जबकि अपराध शाखा में मानव तस्करी विरोधी इकाई भी कार्यरत है, ताकि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी मामले में लापता बच्चों या अपहरण के पीछे किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है. साजिश की ओर इशारा दिल्ली पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि कुछ तथाकथित रिपोर्टें और सोशल मीडिया पोस्ट पेड प्रमोशन के जरिए जानबूझकर फैलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता में डर और घबराहट पैदा करना है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों की जांच में यह सामने आया है कि कुछ लोग निजी लाभ के लिए गलत सूचनाएं फैलाकर माहौल खराब कर रहे हैं. संजय त्यागी ने दो टूक कहा कि इस तरह की अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर राजधानी में शांति व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा. इस बीच, दिल्ली से सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने भी इन खबरों को निराधार बताते हुए कहा कि राजधानी में लोगों के गायब होने की बात पूरी तरह गलत है और इससे जनता में बेवजह भय का माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध जानकारी की पुष्टि संबंधित अधिकारियों से करें. लोगों से खास अपील दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और अफवाहों से बचें. पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और लापता व्यक्तियों को जल्द से जल्द सुरक्षित ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. बता दें कि बड़ी तादाद में बच्चों के लापता होने की सूचना से लोगों में पैनिक का आलम है. अब दिल्ली पुलिस ने हकीकत सामने लाकर इसे शांत करने की कोशिश की है. साथ ही दोषियों पर एक्शन की बात भी कही है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : February 06, 2026, 11:24 IST








