Sunday, 08 Nov 2026 | 02:43 PM

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Online Gaming Rules 2026 Live

Online Gaming Rules 2026 Live

Hindi News Business Online Gaming Rules 2026 Live | Commercial Cylinder Price Hike May Changes नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक कॉमर्शियल सिलेंडर आज यानी 1 मई से 993 रुपए महंगा हो गया है। दिल्ली में ये 3071.50 रुपए में मिल रहा है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। इसके अलावा ‘ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ प्रभावी हो गए हैं। मई में होने वाले 4 बड़े बदलाव 1. कॉमर्शियल सिलेंडर 993 रुपए तक महंगा बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा कर दिया है। दिल्ली में इसकी कीमत ₹3071.50 हो गई है। पहले ये ₹2078.50 में मिल रहा था। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ते और थाली महंगी कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है। घरेलू सिलेंडर के दामों में बदलाव नहीं 2. ऑनलाइन गेमिंग के लिए नए नियम आज से लागू बदलाव: देश में आज ‘ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ प्रभावी हो गए हैं। इसके तहत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (OGAI) का गठन किया जाएगा। यह संस्था ऑनलाइन गेम्स को रेगुलेट करने, उन्हें अलग-अलग कैटेगरी में बांटने और उनकी मॉनिटरिंग का काम करेगी। इसके तहत गेम्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। ऑनलाइन मनी गेम्स, ऑनलाइन सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स। मनी गेम्स बैन है जबकि अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। अब विदेशी गेमिंग कंपनियां भी भारतीय कानूनों से बच नहीं पाएंगी। अगर कोई कंपनी भारत में सर्विस दे रही है, तो उसका मुख्यालय कहीं भी हो, उसे भारतीय नियमों का पालन करना ही होगा। यूजर्स की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन गेम्स में उम्र की सीमा, पेरेंटल कंट्रोल और टाइम लिमिट जैसे फीचर्स होंगे। गेमिंग के दौरान होने वाले फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर भी नजर रखी जाएगी। असर: सख्त नियमों और उम्र सीमा/पेरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स से गेमिंग की लत और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे यूजर्स के लिए सुरक्षित माहौल बनेगा। वहीं विदेशी कंपनियों पर नकेल कसने से सट्टेबाजी रुकने की उम्मीद है। इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और ई-स्पोर्ट्स को एक वैध खेल के रूप में ज्यादा पहचान मिलेगी। 3. डीजल और हवाई ईंधन का निर्यात सस्ता होगा बदलाव: केंद्र सरकार ने 1 मई से अगले 15 दिनों के लिए डीजल एक्सपोर्ट पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाकर ₹23 प्रति लीटर कर दी है। अप्रैल में यह ₹55.5 थी। वहीं ATF यानी, हवाई ईंधन पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाकर ₹33 प्रति लीटर कर दी गई है। अप्रैल में यह ₹42 थी। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन की परिभाषा बदलते हुए अब ATF में सिंथेटिक फ्यूल की ब्लेंडिंग की अनुमति दे दी है। असर: ड्यूटी कम होने से भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों जैसे रिलायंस और नायरा को विदेशी बाजारों में ईंधन बेचना सस्ता पड़ेगा, जिससे उनके मुनाफे में सुधार हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए आम जनता के लिए ईंधन की कीमतें स्थिर रहेंगी। ATF में सिंथेटिक मिश्रण की अनुमति मिलने से एविएशन सेक्टर में पर्यावरण के अनुकूल और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इंडस्ट्री मानकों में स्पष्टता आएगी। 4. UAE आज से ओपेक और ओपेक प्लस से अलग हुआ बदलाव: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 1 मई से OPEC और OPEC+ से अलग हो गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक संगठन है, जो ग्लोबल मार्केट में करीब 40-50% तेल सप्लाई को कंट्रोल करता है और प्रोडक्शन कोटा तय कर कीमतें तय करता है। असर: ओपेक की पाबंदियों से बाहर होने के बाद यूएई तेल उत्पादन बढ़ा सकेगा। इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। भारत जैसे तेल आयातक देशों को अपनी तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का मौका मिलेगा। पेट्रोल डीजल के दामों में बदलाव नहीं… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Business Online Gaming Rules 2026 Live | Commercial Cylinder Price Hike May Changes नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक कॉमर्शियल सिलेंडर आज यानी 1 मई से 993 रुपए महंगा हो गया है। दिल्ली में ये 3071.50 रुपए में मिल रहा है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। इसके अलावा ‘ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ प्रभावी हो गए हैं। मई में होने वाले 4 बड़े बदलाव 1. कॉमर्शियल सिलेंडर 993 रुपए तक महंगा बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा कर दिया है। दिल्ली में इसकी कीमत ₹3071.50 हो गई है। पहले ये ₹2078.50 में मिल रहा था। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ते और थाली महंगी कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है। घरेलू सिलेंडर के दामों में बदलाव नहीं 2. ऑनलाइन गेमिंग के लिए नए नियम आज से लागू बदलाव: देश में आज ‘ऑनलाइन गेमिंग रूल्स 2026’ प्रभावी हो गए हैं। इसके तहत ‘ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (OGAI) का गठन किया जाएगा। यह संस्था ऑनलाइन गेम्स को रेगुलेट करने, उन्हें अलग-अलग कैटेगरी में बांटने और उनकी मॉनिटरिंग का काम करेगी। इसके तहत गेम्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। ऑनलाइन मनी गेम्स, ऑनलाइन सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स। मनी गेम्स बैन है जबकि अन्य गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। अब विदेशी गेमिंग कंपनियां भी भारतीय कानूनों से बच नहीं पाएंगी। अगर कोई कंपनी भारत में सर्विस दे रही है, तो उसका मुख्यालय कहीं भी हो, उसे भारतीय नियमों का पालन करना ही होगा। यूजर्स की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन गेम्स में उम्र की सीमा, पेरेंटल कंट्रोल और टाइम लिमिट जैसे फीचर्स होंगे। गेमिंग के दौरान होने वाले फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर भी नजर रखी जाएगी। असर: सख्त नियमों और उम्र सीमा/पेरेंटल कंट्रोल जैसे फीचर्स से गेमिंग की लत और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है, जिससे यूजर्स के लिए सुरक्षित माहौल बनेगा। वहीं विदेशी कंपनियों पर नकेल कसने से सट्टेबाजी रुकने की उम्मीद है। इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और ई-स्पोर्ट्स को एक वैध खेल के रूप में ज्यादा पहचान मिलेगी। 3. डीजल और हवाई ईंधन का निर्यात सस्ता होगा बदलाव: केंद्र सरकार ने 1 मई से अगले 15 दिनों के लिए डीजल एक्सपोर्ट पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाकर ₹23 प्रति लीटर कर दी है। अप्रैल में यह ₹55.5 थी। वहीं ATF यानी, हवाई ईंधन पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाकर ₹33 प्रति लीटर कर दी गई है। अप्रैल में यह ₹42 थी। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन की परिभाषा बदलते हुए अब ATF में सिंथेटिक फ्यूल की ब्लेंडिंग की अनुमति दे दी है। असर: ड्यूटी कम होने से भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों जैसे रिलायंस और नायरा को विदेशी बाजारों में ईंधन बेचना सस्ता पड़ेगा, जिससे उनके मुनाफे में सुधार हो सकता है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए आम जनता के लिए ईंधन की कीमतें स्थिर रहेंगी। ATF में सिंथेटिक मिश्रण की अनुमति मिलने से एविएशन सेक्टर में पर्यावरण के अनुकूल और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इंडस्ट्री मानकों में स्पष्टता आएगी। 4. UAE आज से ओपेक और ओपेक प्लस से अलग हुआ बदलाव: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 1 मई से OPEC और OPEC+ से अलग हो गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक संगठन है, जो ग्लोबल मार्केट में करीब 40-50% तेल सप्लाई को कंट्रोल करता है और प्रोडक्शन कोटा तय कर कीमतें तय करता है। असर: ओपेक की पाबंदियों से बाहर होने के बाद यूएई तेल उत्पादन बढ़ा सकेगा। इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। भारत जैसे तेल आयातक देशों को अपनी तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का मौका मिलेगा। पेट्रोल डीजल के दामों में बदलाव नहीं… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Canada Immigration Rules Change: Doctors, Nurses Prioritized

Canada Immigration Rules Change: Doctors, Nurses Prioritized

कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। कनाडा सरकार ने 2026 में अपनी इमीग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकार का फोकस ज्यादा लोगों को बुलाने के बजाय ऐसे लोगों पर है, जो देश की अर्थव्यवस्था में तुरंत योगदान दे सकें। . नई नीति के मुताबिक, कनाडा में पहले से रहकर करीब 70 लाख रुपए सालाना कमाने वाले लोग अगर PR (परमानेंट रेजिडेंसी) के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें सिर्फ 1 हफ्ते के भीतर PR मिल सकती है। जबकि अवैध तरीके से आए लोगों तुरंत डिपोर्ट कर दिया जाएगा। सरकार ने 2025 से 2027 के बीच दिए जाने वाले PR के कुल कोटे में भी कटौती की है। अब प्राथमिकता उन लोगों को दी जा रही है, जो पहले से कनाडा में वर्क परमिट या स्टडी परमिट पर रह रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे करीब 40% लोगों को वहीं से PR देकर स्थायी किया जाए। इसका मतलब है कि अगर आप पहले से कनाडा में काम या पढ़ाई कर रहे हैं, तो आपके लिए PR पाना अब पहले से आसान हो सकता है। वहीं, बाहर से नए लोगों को बुलाने की रफ्तार कम की गई है। यह नियम 26 मार्च से लागू हैं। अब प्रशासनिक ढांचे में फेरबदल किया जा रहा है। साथ ही, जिन लोगों के पास हाई-स्किल और अच्छी सैलरी वाली नौकरी का ऑफर है, उन्हें वीजा में प्राथमिकता मिल रही है। खासतौर पर हेल्थकेयर (डॉक्टर, नर्स), इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर (प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन) से जुड़े पेशों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। कनाड़ा में पहले से काम करने वालों को जल्दी PR मिलेगी (फाइल फोटो) जानिए नए बिल में क्या है खास? कनाडा को बढ़ते हाउसिंग संकट से उबरने का प्रेशर: कनाडा के नए इमीग्रेशन बिल सी-12 और नागरिकता कानून सी-3 में बड़े बदलाव किए गए हैं। कनाडा सरकार अब संख्या के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान दे रही है। नए कानून के तहत अगले 3 सालों के लिए पक्की पीआर (PR) के लक्ष्यों में भारी कटौती की गई है। सरकार का मकसद देश में बढ़ते हाउसिंग संकट और बुनियादी ढांचे पर पड़ रहे दबाव को कम करना है। अब कनाडा में जाते ही 1 साल के अंदर मांगनी होगी शरण: नए बिल सी-12 के अनुसार, अब शरण मांगने के नियम बहुत सख्त हो गए हैं। अगर कोई व्यक्ति कनाडा में घुसने के बाद एक साल के भीतर या सीमा पार करने के 14 दिन के अंदर क्लेम नहीं करता तो उसे डिपोर्ट किया जा सकता है। यह फर्जीवाड़े को रोकने के लिए है। 40 फीसदी अस्थायी लोग किए जाएंगे पक्के: पीआर (PR) के लिए अब उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी जो पहले से कनाडा में रहकर काम कर रहे हैं। सरकार ने साफ किया है कि वह बाहर से नए लोगों को बुलाने के बजाय, वहां पहले से मौजूद 40 फीसदी अस्थायी निवासियों को ही पक्का (स्थायी निवासी) करने पर जोर देगी। वीजा और वर्क परमिट के लिए अब हाई-स्किल की जरूरत: वीजा और वर्क परमिट के लिए अब हाई-स्किल और अच्छी सैलरी वाले कोर्सेज को तवज्जो दी जा रही है। हर कॉलेज या साधारण कोर्स के बाद अब वर्क परमिट मिलना आसान नहीं होगा। केवल वे कोर्सेज प्राथमिकता में रहेंगे, जो स्वास्थ्य या कंस्ट्रक्शन जैसे जरूरी क्षेत्रों से जुड़े हैं। कनाडाई माता-पिता अपने बच्चों को नागरिकता दे सकेंगे: नागरिकता कानून सी-3 में बड़ा बदलाव हुआ है। अब विदेश में पैदा हुए कनाडाई माता-पिता अपने बच्चों को नागरिकता दे सकेंगे, बशर्ते उन्होंने खुद कनाडा में कम से कम 3 साल बिताए हों। यह बदलाव उन खोए हुए कनाडाई परिवारों को राहत देने के लिए लाया गया है। डॉक्टर, नर्स पर सरकार का ज्यादा फोकस। ज्यादा सैलरी वाले वर्कर्स के लिए PR आसान जानकारी के अनुसार, ज्यादा सैलरी वाले वर्कर्स के लिए पीआर पाने का सबसे सीधा रास्ता एक्सप्रेस एंट्री और प्रोविंशियल नॉमिनी प्रोग्राम (PNP) है। सरकार अब ऐसे ड्रॉ निकाल रही है, जो केवल उन लोगों के लिए हैं, जिनके पास जॉब ऑफर हैं। जो लोग पहले से कनाडा में हाई-वेज पर काम कर रहे हैं, उन्हें कैनेडियन एक्सपीरियंस क्लास के तहत आवेदन करते समय अतिरिक्त अंक मिलेंगे। आपकी सैलरी जितनी ज्यादा होगी, आपके आर्थिक योगदान को उतना ही बेहतर माना जाएगा और पीआर की संभावना बढ़ जाएगी। इमीग्रेशन विभाग उन प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता देगा, जिनकी सालाना इनकम करीब 70 लाख रुपए या उससे अधिक है। स्टूडेंट वीजा के लिए सख्य किए नियम पंजाब से कनाडा जाने वाले स्टूडेंट्स के लिए कनाडा ने नए इमीग्रेशन बिल में नियम अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिए हैं। अब हर कॉलेज या हर कोर्स करने के बाद वर्क परमिट मिलना पक्का नहीं है। सरकार ने कोर्सेज की लिस्ट तैयार की है। केवल उन्हीं क्षेत्रों में पढ़ाई करने वालों को आगे काम करने की परमिशन मिलेगी, जिनकी मार्केट में डिमांड होगी। अवैध तरीके से आने वालों पर रोक के लिए सी-12 बिल नए कानून बिल C-12 की बात करें, तो यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जो गलत तरीके से कनाडा में घुसने की कोशिश करते हैं। अब शरण मांगने के नियमों को बहुत सख्त कर दिया गया है। अगर कोई व्यक्ति वैध तरीके के बजाय शॉर्टकट अपनाता है, तो उसे तुरंत डिपोर्ट करने के अधिकार सरकार ने अपने पास ले लिए हैं। पहले ये रिफ्यूजी बोर्ड के पास होते थे। पीआर के लिए भी उन लोगों को राहत दी गई है, जिनके माता-पिता कनाडाई हैं, लेकिन वे खुद बाहर पैदा हुए हैं। अब वे अपने बच्चों को भी कनाडाई नागरिकता दे सकेंगे, बशर्ते उन्होंने खुद कनाडा में कम से कम 3 साल बिताए हों।

Kedarnath Temple Opening 2026 | Kapat Opening, Rules, Bhairav Temple Update

Kedarnath Temple Opening 2026 | Kapat Opening, Rules, Bhairav Temple Update

बद्रीनाथ और केदारनाथ के लिए इस बार बीकेटीसी ने नए नियम तय किए हैं। चारधाम यात्रा के चौथे दिन बुधवार सुबह 8 बजे केदारनाथ के कपाट विधिवत खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार सबसे पहले मंदिर के पूर्व द्वार को खोला गया, मुख्य पुजारी के साथ रावल और हक-हकूकधारियों ने मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना शुरू करदी है। . इस प्रक्रिया के तहत कपाट बंद होने से पहले ज्योतिर्लिंग पर सर्दियों में लगाई गई भस्म को हटाया जाता है। यही पवित्र भस्म श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दी जाती है। कपाट खुलने के मौके पर मंदिर को करीब 51 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। पहले दिन 8 से 10 हजार भक्तों के दर्शन करने का अनुमान जताया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मौके पर धाम में मौजूद हैं। वह यहां पर पीएम के नाम की पहली पूजा करेंगे। इस बार यात्रा में नियमों को लेकर ज्यादा सख्ती देखने को मिल रही है। मंदिर समिति ने साफ किया है कि मंदिर परिसर से 50 से 60 मीटर के एरिया में किसी भी व्यक्ति को मोबाइल फोन ले जाने की परमिशन नहीं है। इसके अलावा फोटोग्राफी के लिए धाम में अलग से तय स्थान बनाए गए हैं, मोबाइल वहीं इस्तेमाल किया जा सकेगा। मुख्य मंदिर परिसर में रील बनाना, फोटो खींचना और वीडियो बनाना पूरी तरह बैन है। केदारनाथ धाम की PHOTOS देखिए… पूर्व दिशा में स्थित इसी द्वार को अभी खोला गया है। अभी आम लोगों को मंदिर परिसर में एंट्री नहीं दी जा रही है। पूरे मंदिर की सजावट के लिए टीम गुजरात से बुलाई गई है। पूर्व द्वार से शुरू होगी पूजा, प्रसाद में मिलेगा भस्म सुबह 8 बजे सबसे पहले मंदिर के पूर्व दिशा के द्वार को खोला जाएगा। इसके बाद मुख्य पुजारी टी गंगाधर लिंग, हक-हकूकधारी, वेदपाठी और प्रशासनिक अधिकारी मंदिर में प्रवेश करेंगे, फिर भगवान केदारनाथ की विशेष पूजा-अर्चना और वेद पाठ करेंगे। इसके बाद कपाट बंद करते समय केदारनाथ के ज्योतिर्लिंग पर लगाई गई भस्म को हटाया जाएगा और यही भस्म श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दी जाएगी। पूजा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मुख्य द्वार खोला जाएगा, जिससे आम श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। दैनिक भास्कर चारधाम यात्रा गाइड, केदारनाथ-बद्रीनाथ जाने का प्लान कर रहे हैं तो ये गाइड आपके सबसे काम की है, इसे बिना पढ़े न जाएं धाम से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

NSE IPO Rules Impact Investors, Unlisted Shares Drop; IPO Expected June 2026

NSE IPO Rules Impact Investors, Unlisted Shares Drop; IPO Expected June 2026

Hindi News Business NSE IPO Rules Impact Investors, Unlisted Shares Drop; IPO Expected June 2026 31 मिनट पहले कॉपी लिंक NSE के आईपीओ की खबरों के बीच इसके अनलिस्टेड शेयर ₹2,075 के हाई से गिरकर ₹1,885 पर आ गए हैं। इसकी वजह SEBI का वह नियम है जिसके तहत केवल वही निवेशक IPO में शेयर बेच सकते हैं जिन्होंने कम से कम एक साल पहले से शेयर होल्ड किए हों। ₹20,000 करोड़ से ज्यादा का IPO, पूरा OFS होगा NSE अपने IPO के जरिए ₹20,000 करोड़ से ज्यादा जुटाना चाहती है। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा यानी NSE खुद कोई नया पैसा नहीं जुटाएगी। सारी रकम मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी जो अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। NSE करीब 4 से 4.5% इक्विटी इस रास्ते से बेचेगी। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जून तक दाखिल होने की उम्मीद है। NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP फाइल किया था, लेकिन रेगुलेटरी और लीगल मुद्दों की वजह से वापस लेना पड़ा था। उसके बाद से को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे मामलों में जांच चल रही थी, जिसने IPO को रोक रखा था। नए निवेशक OFS में शामिल नहीं हो पाएंगे SEBI के मुताबिक OFS में शेयर बेचने के लिए निवेशक को ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने से कम से कम एक साल पहले से शेयर होल्ड करने होंगे। यानी जून 2025 से पहले के खरीदार ही हिस्सा ले सकते हैं। जो निवेशक आज अनलिस्टेड मार्केट से शेयर खरीदेंगे, वे IPO में शेयर नहीं बेच पाएंगे। शेयरधारकों को OFS में शामिल होने के लिए 27 अप्रैल तक अपनी सहमति भी देनी होगी। 3 वजहों से गिर रहे अनलिस्टेड शेयर पहली वजह: OFS की पात्रता शर्त ने लास्ट-मिनट निवेशकों को बाहर कर दिया है। पहले लोग देर से शेयर खरीदकर IPO का फायदा उठाते थे, अब यह संभव नहीं। दूसरी वजह: वैल्युएशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अनलिस्टेड कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी है। अब जैसे-जैसे IPO स्ट्रक्चर स्पष्ट हो रहा है, बाजार कीमतों को फिर से आंक रहा है। तीसरी वजह: प्राइमरी मार्केट में अब निवेशक केवल हाइप के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि लिस्टिंग के बाद के प्रदर्शन पर ध्यान दे रहे हैं। 1.8 लाख शेयरधारकों ने जटिलता बढ़ाई NSE का शेयर होल्डर बेस एक साल में तेजी से बढ़ा है। 2025 की शुरुआत में जहां 39,000 निवेशक थे, वहीं साल के अंत तक यह बढ़कर 1.8 लाख के पार पहुंच गए। इतने बड़े और बिखरे हुए बेस के कारण OFS की प्रक्रिया जटिल हो गई है। एक्सचेंज ने इस पूरी प्रक्रिया को संभालने के लिए बैंकर्स और कानूनी सलाहकारों की एक बड़ी टीम नियुक्त की है। निवेशकों के लिए क्या है रिस्क? शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ी अनिश्चितता कीमत को लेकर है, क्योंकि फाइनल प्राइस बुक-बिल्डिंग प्रोसेस से ही तय होगा। इसके अलावा, यदि ऑफर किए गए शेयर पूरी तरह नहीं बिकते हैं, तो बचे हुए शेयरों पर लिस्टिंग के बाद 6 महीने का लॉक-इन पीरियड लागू हो सकता है। नॉलेज पार्ट: OFS: कंपनी के प्रमोटर या पुराने निवेशक अपनी हिस्सेदारी आम जनता को बेचते हैं। इससे मिलने वाला पैसा कंपनी के पास नहीं बल्कि शेयर बेचने वाले निवेशकों के पास जाता है। अनलिस्टेड मार्केट: यहां उन कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री होती है जो NSE या BSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं हैं। इसमें निवेशक कंपनी के IPO आने से पहले ही उसके शेयर खरीद सकते हैं, लेकिन यहां जोखिम और उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Auto industry approves CAFE III; new rules to come into effect on April 1, 2027, will increase car prices

Auto industry approves CAFE III; new rules to come into effect on April 1, 2027, will increase car prices

Hindi News Business Auto Industry Approves CAFE III; New Rules To Come Into Effect On April 1, 2027, Will Increase Car Prices नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक कड़े मानकों के अनुपालन और नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी। बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी, हाइब्रिड और ईवी टेक्नोलॉजी अपनानी पड़ेगी। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने आगामी ईंधन दक्षता नियमों, ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (कैफे III), के प्रस्तावों पर आधिकारिक सहमति दे दी है। इससे कारों के दाम बढ़ना लगभग तय है। ऑटो इंडस्ट्री ने ईंधन दक्षता नियमों, ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (कैफे-III), के प्रस्तावों पर सहमति दे दी है। ये नए मानदंड अगले साल 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे, जिनका उद्देश्य यात्री वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और ईंधन खपत में सुधार करना है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने इन दिशानिर्देशों का समर्थन किया है। हालांकि इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक कैफे-III मानक एंट्री-लेवल कारों की लागत में 17% तक की वृद्धि कर सकते हैं। कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा, वित्तीय बोझ बढ़ना तय यदि कंपनियां उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहती हैं, तो उन्हें बीईई (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) से क्रेडिट खरीदना होगा। इसकी कीमत 2,500 रुपए प्रति ग्राम कार्बन (वित्त वर्ष 2028 में) से लेकर 4,500 रुपए (वित्त वर्ष 2032 तक) तक हो सकती है, जो कंपनियों के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ होगा। लक्ष्य 2032: 19% तक इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड मिक्स का दबाव, इससे दाम बढ़ेंगे कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक कैफे III के कड़े मानक पूरे करने के लिए हैचबैक सेगमेंट में 2032 तक कम से कम 19% बीईवी मिक्स की जरूरत होगी। इस बदलाव से दाम बढ़ेंगे। बजट कारों की अफोर्डेबिलिटी पर सीधा असर पड़ेगा। इन नए नियमों से 7 से 17% तक बढ़ सकती है लागत एक रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी अपग्रेड से जीएसटी और अन्य खर्चों को जोड़कर कारों की कीमतें करीब ₹25,000 (लगभग 7%) बढ़ जाएंगी। यदि कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल या कार्बन-न्यूट्रल ईंधन का विकल्प चुनती हैं, तो यह बोझ ₹65,000 प्रति वाहन तक जा सकता है, जो एंट्री-लेवल कारों के लिए 17% की भारी वृद्धि होगी। साथ ही, कंपनियां ईवी की तरफ तेजी से शिफ्ट होंगी। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक कैफे-III के कड़े मानक पूरे करने के लिए हैचबैक सेगमेंट में 2032 तक कम से कम 19% बीईवी मिक्स की जरूरत होगी। इस बदलाव से बजट कारों की अफोर्डेबिलिटी पर असर पड़ सकता है। इलेक्ट्रिफिकेशन की जरूरत अब 10% तक, अभी 5% ही वित्त वर्ष 2028 तक नियमों के पालन के लिए इंडस्ट्री को 9-10% इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड मिक्स की जरूरत होगी, जो वर्तमान में करीब 5% है। हालांकि, 2031-32 तक यह जरूरत बढ़कर 17-19% तक पहुंच जाएगी। केंद्र ने ईवी के लिए 3.0x का मल्टीप्लायर बरकरार रखा है, लेकिन स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के लिए इसे 2.0x से घटाकर 1.6x कर दिया है। नए नियमों से किन कंपनियों को फायदा मिल सकता है नए नियमों से टाटा मोटर्स सबसे मजबूत स्थिति में है क्योंकि उसके पास पहले से 15% इलेक्ट्रिक व्हीकल मिक्स है। मारुति सुजुकी को हल्के बेड़े के कारण लाभ मिलेगा। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा के लिए लक्ष्य थोड़े कड़े हैं, जबकि हुंडई के लिए मौजूदा पाइपलाइन के कारण लक्ष्यों को पाना सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आगे की राह, अंतिम अधिसूचना जल्द जारी कर सकता है केंद्र सरकार जल्द कैफे III की अंतिम अधिसूचना जारी कर सकती है। नए ड्राफ्ट में एक ‘पासबुक क्रेडिट सिस्टम’ भी पेश किया गया है, जो कंपनियों को घाटे या मुनाफे को अगले ब्लॉक में ले जाने की सुविधा देगा। इसके अलावा, उत्सर्जन मापने के लिए एमआईडीसी के बजाय अधिक सख्त डब्ल्यूएलटीपी परीक्षण पद्धति अपनाई जा सकती है, जिससे आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं। विवाद खत्म, छोटी कारों के लिए अलग श्रेणी की जरूरत नहीं कुछ वाहन कंपनियों ने छोटी कारों के लिए अलग श्रेणी की मांग की थी। लेकिन ड्राफ्ट में किए गए बदलावों के बाद इसकी जरूरत महसूस नहीं की गई। नए नियमों के तहत उत्सर्जन मानकों के कर्व को इस तरह बदला गया है कि हल्की और छोटी कारों को राहत मिली है, जबकि 1,600 किलो से अधिक वजन वाले भारी वाहनों के लिए मानक अधिक कड़े कर दिए गए हैं। 8 अप्रैल के ड्राफ्ट में छोटी कारों को 13 ग्राम CO2/किमी की बड़ी राहत दी गई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, कैफे III नियमों का असर अलग-अलग कंपनियों पर अलग होगा। इन कड़े मानकों के अनुपालन और नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर कारों की कीमतों पर पड़ेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Exam Language Rules & Full Marks for Wrong Questions

Exam Language Rules & Full Marks for Wrong Questions

Hindi News Career SSC Objection System 2026: Exam Language Rules & Full Marks For Wrong Questions 54 मिनट पहले कॉपी लिंक SSC एग्जाम में इसी साल से अगर कोई सवाल गलत या क्लियर नहीं होगा, तो सभी कैंडिडेट्स को उसके पूरे मार्क्स दिए जाएंगे। साथ ही, फॉर्म भरते वक्त कैंडिडेट्स जो लैंग्वेज चुनेंगे, वे सिर्फ उसी लैंग्वेज में एग्जाम दे सकेंगे। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन यानी SSC ने शुक्रवार, 10 अप्रैल को एक नोटिस के जरिए इसकी जानकारी दी। आयोग ने आंसर-की चैलेंज करने को लेकर चैलेंज/ऑब्जेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम 2026 तैयार किया है। इसके तहत आयोग ने नई गाइडलाइंस जारी की है। ये ऑब्जेक्शन सिस्टम आयोग के हर कंप्यूटर बेस्ड एग्जामिनेशन पर लागू होगा। इससे इवैल्युएशन प्रोसेस ज्यादा ट्रांसपरेंट, फेयर और कैंडिडेट फ्रेंडली होगी। नई गाइडलाइन्स के तहत 6 जरूरी बातें : नए नियमों के तहत अगर कोई सवाल गलत या अस्पष्ट है तो सभी कैंडिडेट्स को उस सवाल के पूरे नंबर मिलेंगे। अगर किसी सवाल के ऑप्शंस में से एक से ज्यादा सही जवाब हैं तो सही जवाब चुनने के नंबर मिलेंगे। गलत जवाब देने पर निगेटिव मार्किंग होगी और जवाब नहीं देने पर कोई नंबर नहीं मिलेगा। अगर सवाल सिलेबस से बाहर का है तो सवाल को हटाकर उसके पूरे नंबर दिए जाएंगे। अगर किसी लैंग्वेज में ट्रांसलेशन एरर की वजह से सवाल गलत होता है तो सिर्फ उसी लैंग्वेज के कैंडिडेट्स को उसके नंबर मिलेंगे। SSC ने नई गाइडलाइन में आंसर-की चैलेंज की फीस का जिक्र नहीं किया है। हालांकि, पिछले साल आंसर-की चैलेंज फीस को 100 रुपए से घटाकर 50 रुपए किया गया था। अगर आपका जवाब सही निकलता है तो आपकी आंसर-की चैलेंज फीस नियमों के अनुसार वापस कर दी जाएगी। इसके साथ ही आयोग ने ये साफ किया है कि सिर्फ वैलिड ऑब्जेक्शंस ही कंसिडर किए जाएंगे। साथ ही कैंडिडेट्स से आग्रह किया है कि वे गैर-जरूरी ऑब्जेक्शन दर्ज न कराएं। हर एग्जाम के बाद आयोग एक प्रोविजनल आंसर-की जारी करता है। इसमें गलत सवालों पर दर्ज किए गए ऑब्जेक्शन पर आयोग के सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट्स (SMEs) रिव्यू करते हैं। फिर फाइनल आसंर-की तैयार कर रिलीज की जाती है। इसी के आधार पर रिजल्ट तैयार होता है। आयोग को अब तक आसंर-की में गलत सवाल से जुड़ी कई शिकायतें मिली थीं, यहां तक कि आयोग पर RTI और कोर्ट केसेस भी हुए हैं। इसके बाद आयोग ने आंसर-की चैलेंज को लेकर सभी नियमों को क्लियर करते हुए ये गाइडलाइन तैयार की है। ऐसे करें SSC आंसर-की को चैलेंज: आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट ssc.gov.in पर जाएं। रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड डालकर रजिस्टर्ड अकाउंट से लॉग इन करें। एग्जाम के नाम के नीचे दी गई आंसर-की चैलेंज लिंक पर क्लिक करें। अपना SSC एग्जाम रिस्पॉन्स शीट देखें। वो क्वेश्चन आईडी सिलेक्ट करें, जिसे चैलेंज करना है। क्वेश्चन का सही आंसर वैलिड प्रूफ के साथ अपलोड करें। हर सवाल के लिए 50 रुपए आंसर-की चैलेंज फी पे करें। रिस्पॉन्स सब्मिट करें और रसीद सेव करके रखें। SSC ऑफिशियल वेबसाइट लिंक —————— ये खबर भी पढ़ें… JEE मेन्स 2026 सेशन-2 की आंसर की आज होगी रिलीज:20 अप्रैल को मिलेगा रिजल्ट; 11.23 लाख कैंडिडेट्स ने दी थी परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आज 11 अप्रैल को JEE मेन्स 2026 सेशन 2 की प्रोविजनल आंसर की और कैंडिडेट्स की मेन आंसर शीट अपने ऑफिशियल वेबसाइट पर रिलीज करेगा। इससे पहले NTA ने 9 अप्रैल को क्वेश्चन पेपर रिलीज किया था। ऑफिशियल नोटिफिकेशन के मुताबिक NTA 20 अप्रैल को रिजल्ट जारी कर सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Summer Food Storage Basic Rules; Poisoning Prevention

Summer Food Storage Basic Rules; Poisoning Prevention

Hindi News Lifestyle Summer Food Storage Basic Rules; Poisoning Prevention | Kitchen Hygiene Tips 8 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक गर्मियों में खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब होती हैं। फूड स्टोरेज की छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करने से फूड पॉइजनिंग, डायरिया और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में सही फूड स्टोरेज बीमारियों से बचाव का अहम हिस्सा है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- गर्मियों में फूड स्टोरेज के बेसिक रूल्स क्या हैं? किन गलतियों से बचना चाहिए? अलग-अलग फूड आइटम्स को कैसे स्टोर करें? एक्सपर्ट- डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ सवाल- गर्मियों में खाने-पीने की चीजों का सही स्टोरेज क्यों जरूरी है? जवाब- गर्मियों में ज्यादा तापमान होने पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। इससे खाने में टॉक्सिन्स बन सकते हैं। सही स्टोरेज (फ्रीजिंग, एयरटाइट कंटेनर) बैक्टीरिया की ग्रोथ को धीमा कर सकते हैं या रोक सकते हैं, जिससे खाना सेफ रहता है। सवाल- गर्मियों में खाना जल्दी खराब क्यों होता है? जवाब- इसके लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार हैं- ज्यादा तापमान बैक्टीरिया की ग्रोथ तेज करता है। गर्मी में खाने में मौजूद फैट्स तेजी से ऑक्सिडाइज्ड होने लगते हैं, जिससे ऑयली फूड्स में बदबू आने लगती है। हाई टेम्परेचर प्रोटीन ब्रेकडाउन को तेज कर देता है। खासकर दूध, दाल, मीट जैसे प्रोटीन-रिच फूड में ये प्रक्रिया जल्दी होती है, जिससे स्मेल बदलने लगती है। गर्मियों में ह्यूमिडिटी (नमी) ज्यादा होती है, जिससे पके भोजन, ब्रेड और फल जैसी चीजों में फंगस और यीस्ट तेजी से पनपते हैं। बार-बार तापमान बदलने (जैसे बाहर रखना, फिर फ्रिज में रखना) से खाना जल्दी खराब होता है। सवाल- गर्मियों में फूड स्टोरेज के बेसिक रूल्स क्या हैं? जवाब- गर्मियों में कुछ बेसिक स्टोरेज रूल्स अपनाना जरूरी है, ताकि खाना सुरक्षित, ताजा और हेल्दी बना रहे। ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में फूड स्टोर करते समय क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- अनजाने में हुई छोटी-छोटी गलतियों से गर्मियों में खाना जल्दी खराब हो जाता है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- गर्मियों में सही तरीके से फूड स्टोर न करने पर क्या हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं? जवाब- छोटी-सी लापरवाही भी फूड पॉइजनिंग से लेकर पेट के इंफेक्शन तक की वजह बन सकती है। ग्राफिक में देखिए- सवाल– कैसे पता चलेगा कि कोई फूड खराब हो गया है? जवाब– ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है। अमूमन खाने की महक, टेक्सचर से पता चल जाता है कि ये खराब हो चुका है। लेकिन- गर्मी के मौसम में सिर्फ स्मेल, रंग, टेक्सचर पर भरोसा न करें। अगर तापमान 40 डिग्री से ऊपर है और खाना तीन घंटे से ज्यादा बाहर रखा है तो उसे न खाएं। खाने का स्वाद थोड़ा भी अजीब लगे तो उसे न खाएं। सवाल– गर्मियों में अलग–अलग फूड को स्टोर करने का सही तरीका क्या है? जवाब- नीचे हर तरह के फूड आइटम के स्टोरेज का तरीका डिटेल में पढ़ें। सब्जियां हरी पत्तेदार सब्जियों को पहले अच्छे से धोकर सुखाएं। फिर पेपर टॉवल में लपेटकर फ्रिज में रखें। कटी हुई सब्जियों को एयरटाइट कंटेनर में करके फ्रिज में रखें। 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल करें। वहीं आलू, प्याज, लहसुन जैसी जड़ वाली सब्जियां फ्रिज में न रखें। उसे ठंडी, सूखी जगह पर रखें। फल कटे हुए फल तुरंत खा लें या फ्रिज में एयरटाइट बॉक्स में रखें। अंगूर और बेरीज जैसे फल धोकर और अच्छी तरह सुखाकर ही फ्रिज में रखें। पका हुआ खाना पका हुआ खाना 2 घंटे के अंदर फ्रिज में रख दें। सामान्य टेंपरेचर पर आने के बाद ही फ्रिज में रखें। इसे 1–2 दिन के भीतर खा लेना ही बेहतर होता है। दूध दूध को उबालकर ठंडा करें। ठंडे दूध को फ्रिज के अंदर वाले शेल्फ में रखें। दही दही को हमेशा ढककर फ्रिज में रखें। दही निकालते समय साफ चम्मच का इस्तेमाल करें। नॉन-वेज फूड गर्मियों में नॉन-वेज फूड फ्रिज में 1–2 दिन से ज्यादा न रखें। अगर लंबे समय के लिए स्टोर करना हो तो इन्हें फ्रीजर में रखें। हमेशा अलग एयरटाइट कंटेनर में रखें, ताकि दूसरे खाने के साथ क्रॉस-कंटैमिनेशन न हो। ब्रेड और बेकरी आइटम ब्रेड और बेकरी आइटम को सूखी जगह पर रखें। अगर ज्यादा दिनों तक स्टोर करना हो तो फ्रीज करें। ड्राई फूड ड्राई फूड्स को एयरटाइट कंटेनर में रखें। नमकीन और बिस्कुट जैसे स्नैक्स अच्छी तरह सील करके और नमी से दूर रखें। ड्रिंक्स फ्रेश जूस को तुरंत पी लें। अगर स्टोर करना हो तो 24 घंटे के अंदर यूज कर लें। पानी को हमेशा ढककर रखें। पानी को प्लास्टिक की बोतलों में लंबे समय तक स्टोर न करें। अचार और सॉस अचार को सूखे चम्मच से निकालें। इसे समय-समय पर धूप में रखें। सॉस को फ्रिज में रखना बेहतर है। चॉकलेट और मिठाइयां चॉकलेट को ठंडी और सूखी जगह पर रखें। मिठाइयों को फ्रिज में स्टोर करें। मिठाइयों को 2–3 दिन के भीतर खत्म कर दें। सवाल– गर्मियों में फूड स्टोरेज से जुड़े मिथ और फैक्ट क्या हैं? जवाब– गर्मियों में फूड स्टोरेज को लेकर कई कॉमन प्रैक्टिस हैं, जिन्हें लोग बिना जांचे-परखे सच मान लेते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सही और गलत के फर्क को समझा जाए। मिथ 1: सभी फल और सब्जियां फ्रिज में रखने से ताजी रहती हैं। फैक्ट: ऐसा नहीं है। आलू, प्याज, लहसुन और एवाकाडो वगैरह फ्रिज में रखने से जल्दी खराब हो सकते हैं। इन्हें ठंडी और सूखी जगह पर रखें। मिथ 2: बचा हुआ खाना फ्रिज में कई दिनों तक सुरक्षित रहता है। फैक्ट: गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है। पका भोजन 24 से 48 घंटों के भीतर खा लेना चाहिए। दोबारा अच्छी तरह गरम करके ही खाना चाहिए। मिथ 3: फ्रिज में हर जगह तापमान बराबर होता है। फैक्ट: फ्रिज के ऊपरी शेल्फ का तापमान सबसे कम होता है, जबकि दरवाजे का हिस्सा सबसे कम ठंडा होता है। मिथ 4: बोतल बंद चीजें खराब नहीं होतीं। फैक्ट: डिब्बाबंद फूड खोलने के बाद फ्रिज में रखना जरूरी है। बाहर खुला रखने से ये जल्दी खराब हो सकता है। गर्मियों में फूड स्टोरेज से जुड़े कुछ कॉमन सवाल और जवाब सवाल- गर्मियों में फ्रिज को किस टेंपरेचर पर सेट करना चाहिए? जवाब- फ्रिज का तापमान 1–4°C

Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices

Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices

Hindi News Business April 1 Changes: Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक आज 1 अप्रैल है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने से हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए है। इसके अलावा अब रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल कर पाएंगे। आज से फास्टैग, टोल टैक्स के साथ इनकम टैक्स से जुड़े नियम मिलाकर कुल 15 बदलाव हो रहे हैं। कैटेगरी 1: रसोई और सफर 1. कॉमर्शियल सिलेंडर ₹218 महंगा बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹218 तक महंगा कर दिया है। चेन्नई में ये सबसे महंगा 2246.50 रुपए में मिलेगा। दिल्ली में इसकी कीमत ₹2078.50 हो गई है। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में वें चाय, नाश्ते और थाली महंगी कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है। घरेलू सिलेंडर के दामों में बदलाव नहीं 2. रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल होगी बदलाव: ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर ही रिफंड मिलेगा। पहले यह समय 4 घंटे था। यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन भी बदल पाएंगे। असर: समय पर टिकिट कैंसिल नहीं कर पाने पर पैसों का नुकसान होगा। रिफंड के नियमों को सख्त करने से आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। 3. फास्टैग एनुअल पास बदलाव: आज से फास्टैग का एनुअल पास रिन्यू कराने पर आपके वॉलेट से ज्यादा पैसे कटेंगे। NHAI ने एनुअल पास की कीमतों में 2.5% की बढ़ोतरी कर दी है। असर: सालाना पास के लिए 3 हजार रुपए की जगह 3,075 रुपए चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके सफर करने की सुविधा देता है। 4. टोल पर नो-कैश बदलाव: आज से सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। टोल टैक्स का पेमेंट केवल फास्टैग या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। असर: अगर आपके पास फास्टैग नहीं है या उसमें बैलेंस कम है, तो यूपीआई से ही टोल का ऑप्शन बचेगा। कैश का विकल्प नहीं होने से परेशानी में पड़ सकते हैं। 5. गाड़ियों की नई कीमतें बदलाव: 31 मार्च तक पुरानी स्टॉक और पुरानी कीमतों पर गाड़ियां मिल रही थीं। आज 1 अप्रैल से कॉमर्शियल और पैसेंजर गाड़ियों के दाम 2% से 3% तक बढ़ गए हैं। असर: यदि आपने कार बुक की है लेकिन बिल 31 मार्च तक नहीं कटा, तो अब बढ़ी हुई कीमत देनी होगी। शोरूम प्राइस के साथ-साथ रजिस्ट्रेशन चार्जेस भी बढ़े हुए दामों पर लगेंगे। कैटेगरी 2: टैक्स, बैंकिंग और बाजार 6. ‘असेसमेंट ईयर’ खत्म, अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ बदलाव: आज से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू हो गया है। अब फाइनेंशियल और असेसमेंट ईयर के बजाय सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा। असर: इससे टैक्सपेयर्स के बीच की उलझन खत्म होगी। आपने 2024-25 में पैसा कमाया तो जुलाई 2025 में उसका टैक्स भरते थे। इसे AY 2025-26 कहा जाता था। एक ही कमाई के लिए दो अलग-अलग सालों के नाम सुनकर कंफ्यूजन होता था। 7. रिवाइज्ड रिजीम के तहत फाइलिंग बदलाव: साल 2025 में सरकार ने नई रिजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। ये 1 अप्रैल 2025 से लाग हो गया। इस साल इस बदलाव के साथ रिटर्न फाइल कर पाएंगे। असर: सैलरीड पर्सन की सेक्शन 87A के तहत 12.75 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है। अन्य लोग 12 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं। 8. फॉर्म 16 की जगह अब नया फॉर्म 130 और 131 बदलाव: TDS कटौती के सबूत के लिए फॉर्म 16 और अन्य आय के लिए 16A दिया जाता था। अब इन फॉर्म्स का फॉर्मेट बदलकर फॉर्म 130 और फॉर्म 131 कर दिया गया है। असर: जब जून-जुलाई में रिटर्न भरेंगे तो इन फॉर्म्स में टैक्स कैलकुलेशन और छूट का ब्यौरा पहले से ज्यादा डिटेल में होगा। इससे ITR भरने में गलती की गुंजाइश कम होगी। 9. HRA टैक्स छूट लेने के नियम बदले बदलाव: HRA पर टैक्स छूट लेने वाले कर्मचारियों को अब रेंट रसीद जमा करनी होगी। अगर सालाना किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है, तो मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य होगा। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50% टैक्स छूट वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। असर: इन 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से पर टैक्स छूट ले सकेंगे, जिससे उनकी इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी। वहीं अब टैक्स विभाग रसीद और मकान मालिक के टैक्स रिकॉर्ड का मिलान करेगा। पकड़े जाने पर जुर्माना लग सकता है। 10. PNB ATM कैश लिमिट बदलाव: पंजाब नेशनल बैंक के क्लासिक डेबिट कार्ड से एक दिन में अधिकतम ₹25 हजार निकाल सकेंगे। प्लैटिनम कार्ड के लिए यह लिमिट ₹50 हजार होगी। असर: यदि आपकी जरूरत इससे ज्यादा है, तो आपको बैंक जाना होगा। चेकबुक या विड्रॉल फॉर्म का सहारा लेना होगा। यह फैसला फ्रॉड को रोकने के लिए लिया है। 11. F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ा बदलाव: सरकार ने बजट में F&O मार्केट में सट्टेबाजी कम करने के लिए टैक्स की दरें बढ़ाने का ऐलान किया था। फ्यूचर्स की बिक्री पर अब 0.02% की जगह 0.05% टैक्स लगेगा। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर यह टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% हो गया है। असर: इंट्राडे और फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए अब हर ट्रेड की लागत बढ़ जाएगी। ज्यादा टैक्स देने से उनकी नेट कमाई कम हो जाएगी। ट्रेड में ब्रेक ईवन पर आने में भी समय लगेगा। 12. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर नया टैक्स नियम बदलाव: अब गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी पर टैक्स छूट केवल उन्हें मिलेगी, जिन्होंने इसे सीधे RBI से खरीदा है। अगर आपने शेयर बाजार से किसी दूसरे निवेशक से ये बॉन्ड खरीदे हैं, तो अब आपको मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा। असर: इससे उन लोगों का नेट मुनाफा घट जाएगा जो बाजार से बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाते थे। अब मैच्योरिटी पर मिलने वाले प्रॉफिट को ‘कैपिटल गेन’ माना

Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices

Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices

Hindi News Business April 1 Changes: Rail Ticket Refund, Toll Rules, Salary & Cylinder Prices नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक आज 1 अप्रैल है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगे होने से हुई है। सरकारी तेल कंपनियों ने इसके दाम 218 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। इसके अलावा अब रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल कर पाएंगे। आज से फास्टैग, टोल टैक्स के साथ इनकम टैक्स से जुड़े नियम मिलाकर कुल 15 बदलाव हो रहे हैं। कैटेगरी 1: रसोई और सफर 1. कॉमर्शियल सिलेंडर ₹218 महंगा बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ₹218 तक महंगा कर दिया है। चेन्नई में ये सबसे महंगा 2246.50 रुपए में मिलेगा। दिल्ली में इसकी कीमत ₹2078.50 हो गई है। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में वें चाय, नाश्ते और थाली महंगी कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है। घरेलू सिलेंडर के दामों में बदलाव नहीं 2. रेल टिकट 8 घंटे पहले तक ही कैंसिल होगी बदलाव: ट्रेन छूटने से 8 घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर ही रिफंड मिलेगा। पहले यह समय 4 घंटे था। यात्री ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक बोर्डिंग स्टेशन भी बदल पाएंगे। असर: समय पर टिकिट कैंसिल नहीं कर पाने पर पैसों का नुकसान होगा। रिफंड के नियमों को सख्त करने से आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। 3. फास्टैग एनुअल पास बदलाव: आज से फास्टैग का एनुअल पास रिन्यू कराने पर आपके वॉलेट से ज्यादा पैसे कटेंगे। NHAI ने एनुअल पास की कीमतों में 2.5% की बढ़ोतरी कर दी है। असर: सालाना पास के लिए 3 हजार रुपए की जगह 3,075 रुपए चुकाने होंगे। यह पास कार यूजर्स को देशभर के 200 टोल प्लाजा पर बिना रुके सफर करने की सुविधा देता है। 4. टोल पर नो-कैश बदलाव: आज से सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। टोल टैक्स का पेमेंट केवल फास्टैग या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। असर: अगर आपके पास फास्टैग नहीं है या उसमें बैलेंस कम है, तो यूपीआई से ही टोल का ऑप्शन बचेगा। कैश का विकल्प नहीं होने से परेशानी में पड़ सकते हैं। 5. गाड़ियों की नई कीमतें बदलाव: 31 मार्च तक पुरानी स्टॉक और पुरानी कीमतों पर गाड़ियां मिल रही थीं। आज 1 अप्रैल से कॉमर्शियल और पैसेंजर गाड़ियों के दाम 2% से 3% तक बढ़ गए हैं। असर: यदि आपने कार बुक की है लेकिन बिल 31 मार्च तक नहीं कटा, तो अब बढ़ी हुई कीमत देनी होगी। शोरूम प्राइस के साथ-साथ रजिस्ट्रेशन चार्जेस भी बढ़े हुए दामों पर लगेंगे। कैटेगरी 2: टैक्स, बैंकिंग और बाजार 6. ‘असेसमेंट ईयर’ खत्म, अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ बदलाव: आज से नया ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ लागू हो गया है। अब फाइनेंशियल और असेसमेंट ईयर के बजाय सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल होगा। असर: इससे टैक्सपेयर्स के बीच की उलझन खत्म होगी। आपने 2024-25 में पैसा कमाया तो जुलाई 2025 में उसका टैक्स भरते थे। इसे AY 2025-26 कहा जाता था। एक ही कमाई के लिए दो अलग-अलग सालों के नाम सुनकर कंफ्यूजन होता था। 7. रिवाइज्ड रिजीम के तहत फाइलिंग बदलाव: साल 2025 में सरकार ने नई रिजीम के टैक्स स्लैब में बदलाव किया था। ये 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गया। इस साल इस बदलाव के साथ रिटर्न फाइल कर पाएंगे। असर: सैलरीड पर्सन की सेक्शन 87A के तहत 12.75 लाख रुपए तक की इनकम टैक्स फ्री है। अन्य लोग 12 लाख तक की इनकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं। 8. फॉर्म 16 की जगह अब नया फॉर्म 130 और 131 बदलाव: TDS कटौती के सबूत के लिए फॉर्म 16 और अन्य आय के लिए 16A दिया जाता था। अब इन फॉर्म्स का फॉर्मेट बदलकर फॉर्म 130 और फॉर्म 131 कर दिया गया है। असर: जब जून-जुलाई में रिटर्न भरेंगे तो इन फॉर्म्स में टैक्स कैलकुलेशन और छूट का ब्यौरा पहले से ज्यादा डिटेल में होगा। इससे ITR भरने में गलती की गुंजाइश कम होगी। 9. HRA टैक्स छूट लेने के नियम बदले बदलाव: HRA पर टैक्स छूट लेने वाले कर्मचारियों को अब रेंट रसीद जमा करनी होगी। अगर सालाना किराया 1 लाख रुपए से ज्यादा है, तो मकान मालिक का पैन देना अनिवार्य होगा। अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी 50% टैक्स छूट वाली कैटेगरी में शामिल कर लिया गया है। असर: इन 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारी अब अपनी बेसिक सैलरी के 50% हिस्से पर टैक्स छूट ले सकेंगे। वहीं अब टैक्स विभाग रसीद और मकान मालिक के टैक्स रिकॉर्ड का मिलान करेगा। पकड़े जाने पर जुर्माना लग सकता है। 10. PNB ATM कैश लिमिट बदलाव: पंजाब नेशनल बैंक के क्लासिक डेबिट कार्ड से एक दिन में अधिकतम ₹25 हजार निकाल सकेंगे। प्लैटिनम कार्ड के लिए यह लिमिट ₹50 हजार होगी। असर: यदि आपकी जरूरत इससे ज्यादा है, तो आपको बैंक जाना होगा। चेकबुक या विड्रॉल फॉर्म का सहारा लेना होगा। यह फैसला फ्रॉड को रोकने के लिए लिया है। 11. F&O ट्रेडिंग पर STT बढ़ा बदलाव: सरकार ने बजट में F&O मार्केट में सट्टेबाजी कम करने के लिए टैक्स की दरें बढ़ाने का ऐलान किया था। फ्यूचर्स की बिक्री पर अब 0.02% की जगह 0.05% टैक्स लगेगा। वहीं, ऑप्शंस के प्रीमियम पर यह टैक्स 0.1% से बढ़ाकर 0.15% हो गया है। असर: इंट्राडे और फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स के लिए अब हर ट्रेड की लागत बढ़ जाएगी। ज्यादा टैक्स देने से उनकी नेट कमाई कम हो जाएगी। ट्रेड में ब्रेक ईवन पर आने में भी समय लगेगा। 12. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर नया टैक्स नियम बदलाव: अब गोल्ड बॉन्ड की मैच्योरिटी पर टैक्स छूट केवल उन्हें मिलेगी, जिन्होंने इसे सीधे RBI से खरीदा है। अगर आपने शेयर बाजार से किसी दूसरे निवेशक से ये बॉन्ड खरीदे हैं, तो अब आपको मैच्योरिटी पर मिलने वाले मुनाफे पर टैक्स देना होगा। असर: इससे उन लोगों का नेट मुनाफा घट जाएगा जो बाजार से बॉन्ड खरीदकर टैक्स बचाते थे। अब मैच्योरिटी पर मिलने वाले प्रॉफिट को ‘कैपिटल गेन’ माना जाएगा, जिस पर टैक्स कटने