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Auto industry approves CAFE III; new rules to come into effect on April 1, 2027, will increase car prices

Auto industry approves CAFE III; new rules to come into effect on April 1, 2027, will increase car prices
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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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कड़े मानकों के अनुपालन और नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी। बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी, हाइब्रिड और ईवी टेक्नोलॉजी अपनानी पड़ेगी।

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने आगामी ईंधन दक्षता नियमों, ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (कैफे III), के प्रस्तावों पर आधिकारिक सहमति दे दी है। इससे कारों के दाम बढ़ना लगभग तय है।

ऑटो इंडस्ट्री ने ईंधन दक्षता नियमों, ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (कैफे-III), के प्रस्तावों पर सहमति दे दी है। ये नए मानदंड अगले साल 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे, जिनका उद्देश्य यात्री वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और ईंधन खपत में सुधार करना है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने इन दिशानिर्देशों का समर्थन किया है। हालांकि इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक कैफे-III मानक एंट्री-लेवल कारों की लागत में 17% तक की वृद्धि कर सकते हैं।

कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा, वित्तीय बोझ बढ़ना तय

यदि कंपनियां उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहती हैं, तो उन्हें बीईई (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) से क्रेडिट खरीदना होगा। इसकी कीमत 2,500 रुपए प्रति ग्राम कार्बन (वित्त वर्ष 2028 में) से लेकर 4,500 रुपए (वित्त वर्ष 2032 तक) तक हो सकती है, जो कंपनियों के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ होगा।

लक्ष्य 2032: 19% तक इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड मिक्स का दबाव, इससे दाम बढ़ेंगे

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक कैफे III के कड़े मानक पूरे करने के लिए हैचबैक सेगमेंट में 2032 तक कम से कम 19% बीईवी मिक्स की जरूरत होगी। इस बदलाव से दाम बढ़ेंगे। बजट कारों की अफोर्डेबिलिटी पर सीधा असर पड़ेगा।

इन नए नियमों से 7 से 17% तक बढ़ सकती है लागत एक रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी अपग्रेड से जीएसटी और अन्य खर्चों को जोड़कर कारों की कीमतें करीब ₹25,000 (लगभग 7%) बढ़ जाएंगी। यदि कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल या कार्बन-न्यूट्रल ईंधन का विकल्प चुनती हैं, तो यह बोझ ₹65,000 प्रति वाहन तक जा सकता है, जो एंट्री-लेवल कारों के लिए 17% की भारी वृद्धि होगी। साथ ही, कंपनियां ईवी की तरफ तेजी से शिफ्ट होंगी। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक कैफे-III के कड़े मानक पूरे करने के लिए हैचबैक सेगमेंट में 2032 तक कम से कम 19% बीईवी मिक्स की जरूरत होगी। इस बदलाव से बजट कारों की अफोर्डेबिलिटी पर असर पड़ सकता है।

इलेक्ट्रिफिकेशन की जरूरत अब 10% तक, अभी 5% ही

वित्त वर्ष 2028 तक नियमों के पालन के लिए इंडस्ट्री को 9-10% इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड मिक्स की जरूरत होगी, जो वर्तमान में करीब 5% है। हालांकि, 2031-32 तक यह जरूरत बढ़कर 17-19% तक पहुंच जाएगी। केंद्र ने ईवी के लिए 3.0x का मल्टीप्लायर बरकरार रखा है, लेकिन स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के लिए इसे 2.0x से घटाकर 1.6x कर दिया है।

नए नियमों से किन कंपनियों को फायदा मिल सकता है

नए नियमों से टाटा मोटर्स सबसे मजबूत स्थिति में है क्योंकि उसके पास पहले से 15% इलेक्ट्रिक व्हीकल मिक्स है। मारुति सुजुकी को हल्के बेड़े के कारण लाभ मिलेगा। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा के लिए लक्ष्य थोड़े कड़े हैं, जबकि हुंडई के लिए मौजूदा पाइपलाइन के कारण लक्ष्यों को पाना सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आगे की राह, अंतिम अधिसूचना जल्द जारी कर सकता है केंद्र

सरकार जल्द कैफे III की अंतिम अधिसूचना जारी कर सकती है। नए ड्राफ्ट में एक ‘पासबुक क्रेडिट सिस्टम’ भी पेश किया गया है, जो कंपनियों को घाटे या मुनाफे को अगले ब्लॉक में ले जाने की सुविधा देगा। इसके अलावा, उत्सर्जन मापने के लिए एमआईडीसी के बजाय अधिक सख्त डब्ल्यूएलटीपी परीक्षण पद्धति अपनाई जा सकती है, जिससे आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

विवाद खत्म, छोटी कारों के लिए अलग श्रेणी की जरूरत नहीं

कुछ वाहन कंपनियों ने छोटी कारों के लिए अलग श्रेणी की मांग की थी। लेकिन ड्राफ्ट में किए गए बदलावों के बाद इसकी जरूरत महसूस नहीं की गई। नए नियमों के तहत उत्सर्जन मानकों के कर्व को इस तरह बदला गया है कि हल्की और छोटी कारों को राहत मिली है, जबकि 1,600 किलो से अधिक वजन वाले भारी वाहनों के लिए मानक अधिक कड़े कर दिए गए हैं। 8 अप्रैल के ड्राफ्ट में छोटी कारों को 13 ग्राम CO2/किमी की बड़ी राहत दी गई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, कैफे III नियमों का असर अलग-अलग कंपनियों पर अलग होगा। इन कड़े मानकों के अनुपालन और नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर कारों की कीमतों पर पड़ेगा।

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ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने आगामी ईंधन दक्षता नियमों, ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (कैफे III), के प्रस्तावों पर आधिकारिक सहमति दे दी है। इससे कारों के दाम बढ़ना लगभग तय है।

ऑटो इंडस्ट्री ने ईंधन दक्षता नियमों, ‘कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी’ (कैफे-III), के प्रस्तावों पर सहमति दे दी है। ये नए मानदंड अगले साल 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे, जिनका उद्देश्य यात्री वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और ईंधन खपत में सुधार करना है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने इन दिशानिर्देशों का समर्थन किया है। हालांकि इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक कैफे-III मानक एंट्री-लेवल कारों की लागत में 17% तक की वृद्धि कर सकते हैं।

कंपनियों को क्रेडिट खरीदना होगा, वित्तीय बोझ बढ़ना तय

यदि कंपनियां उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहती हैं, तो उन्हें बीईई (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) से क्रेडिट खरीदना होगा। इसकी कीमत 2,500 रुपए प्रति ग्राम कार्बन (वित्त वर्ष 2028 में) से लेकर 4,500 रुपए (वित्त वर्ष 2032 तक) तक हो सकती है, जो कंपनियों के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ होगा।

लक्ष्य 2032: 19% तक इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड मिक्स का दबाव, इससे दाम बढ़ेंगे

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक कैफे III के कड़े मानक पूरे करने के लिए हैचबैक सेगमेंट में 2032 तक कम से कम 19% बीईवी मिक्स की जरूरत होगी। इस बदलाव से दाम बढ़ेंगे। बजट कारों की अफोर्डेबिलिटी पर सीधा असर पड़ेगा।

इन नए नियमों से 7 से 17% तक बढ़ सकती है लागत एक रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी अपग्रेड से जीएसटी और अन्य खर्चों को जोड़कर कारों की कीमतें करीब ₹25,000 (लगभग 7%) बढ़ जाएंगी। यदि कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल या कार्बन-न्यूट्रल ईंधन का विकल्प चुनती हैं, तो यह बोझ ₹65,000 प्रति वाहन तक जा सकता है, जो एंट्री-लेवल कारों के लिए 17% की भारी वृद्धि होगी। साथ ही, कंपनियां ईवी की तरफ तेजी से शिफ्ट होंगी। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक कैफे-III के कड़े मानक पूरे करने के लिए हैचबैक सेगमेंट में 2032 तक कम से कम 19% बीईवी मिक्स की जरूरत होगी। इस बदलाव से बजट कारों की अफोर्डेबिलिटी पर असर पड़ सकता है।

इलेक्ट्रिफिकेशन की जरूरत अब 10% तक, अभी 5% ही

वित्त वर्ष 2028 तक नियमों के पालन के लिए इंडस्ट्री को 9-10% इलेक्ट्रिक/हाइब्रिड मिक्स की जरूरत होगी, जो वर्तमान में करीब 5% है। हालांकि, 2031-32 तक यह जरूरत बढ़कर 17-19% तक पहुंच जाएगी। केंद्र ने ईवी के लिए 3.0x का मल्टीप्लायर बरकरार रखा है, लेकिन स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के लिए इसे 2.0x से घटाकर 1.6x कर दिया है।

नए नियमों से किन कंपनियों को फायदा मिल सकता है

नए नियमों से टाटा मोटर्स सबसे मजबूत स्थिति में है क्योंकि उसके पास पहले से 15% इलेक्ट्रिक व्हीकल मिक्स है। मारुति सुजुकी को हल्के बेड़े के कारण लाभ मिलेगा। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा के लिए लक्ष्य थोड़े कड़े हैं, जबकि हुंडई के लिए मौजूदा पाइपलाइन के कारण लक्ष्यों को पाना सबसे चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आगे की राह, अंतिम अधिसूचना जल्द जारी कर सकता है केंद्र

सरकार जल्द कैफे III की अंतिम अधिसूचना जारी कर सकती है। नए ड्राफ्ट में एक ‘पासबुक क्रेडिट सिस्टम’ भी पेश किया गया है, जो कंपनियों को घाटे या मुनाफे को अगले ब्लॉक में ले जाने की सुविधा देगा। इसके अलावा, उत्सर्जन मापने के लिए एमआईडीसी के बजाय अधिक सख्त डब्ल्यूएलटीपी परीक्षण पद्धति अपनाई जा सकती है, जिससे आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

विवाद खत्म, छोटी कारों के लिए अलग श्रेणी की जरूरत नहीं

कुछ वाहन कंपनियों ने छोटी कारों के लिए अलग श्रेणी की मांग की थी। लेकिन ड्राफ्ट में किए गए बदलावों के बाद इसकी जरूरत महसूस नहीं की गई। नए नियमों के तहत उत्सर्जन मानकों के कर्व को इस तरह बदला गया है कि हल्की और छोटी कारों को राहत मिली है, जबकि 1,600 किलो से अधिक वजन वाले भारी वाहनों के लिए मानक अधिक कड़े कर दिए गए हैं। 8 अप्रैल के ड्राफ्ट में छोटी कारों को 13 ग्राम CO2/किमी की बड़ी राहत दी गई है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, कैफे III नियमों का असर अलग-अलग कंपनियों पर अलग होगा। इन कड़े मानकों के अनुपालन और नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर कारों की कीमतों पर पड़ेगा।

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