43.6 Lakh Students Appear, New Rules, Digital Answer Sheets

Hindi News Career CBSE Board Exams 2026 Begin: 43.6 Lakh Students Appear, New Rules, Digital Answer Sheets 3 दिन पहले कॉपी लिंक CBSE की क्लास 10 और क्लास 12 की बोर्ड परीक्षाएं आज 17 फरवरी 2026 से शुरू हो गई हैं। परीक्षा की पहली शिफ्ट सुबह 10:30 बजे से शुरू हुई और दोपहर 1:30 बजे तक चली। इस साल लगभग 43.6 लाख छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। क्लास 10 में इस साल 25,08,319 छात्र परीक्षा दे रहे हैं। इनमें 14,08,546 मेल और 10,99,773 फीमेल स्टूडेंट्स हैं। परीक्षा 83 विषयों में 8,075 केंद्रों पर हो रही है। वहीं क्लास 12 में 18,59,551 छात्र परीक्षा दे रहे हैं। इनमें 10,27,552 मेल और 8,31,999 फीमेल स्टूडेंट्स हैं। यह परीक्षा 120 विषयों में 7,574 केंद्रों पर हो रही है। CISCE और MP बोर्ड की परीक्षाएं भी शुरू CBSE के अलावा CISCE, मध्य प्रदेश बोर्ड यानी MPBSE और अन्य बोर्डस ने भी अपनी बोर्ड परीक्षाएं शुरू कर दी हैं। एग्जाम सेंटर पर 25 मिनट पहले पहुंचना जरूरी CBSE ने स्टूडेंट्स के लिए कई स्ट्रिक्ट रूल्स और रेगुलेशंस लागू किए हैं, जिन्हें परीक्षा देने से पहले जानना जरूरी है। एडमिट कार्ड की हार्ड कॉपी लाना जरूरी है। स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर आना होगा। स्कूल आईडी कार्ड साथ रखना जरूरी है। अपनी पेन और बाकी सामान खुद लाना होगा। पानी लाना है तो पारदर्शी बोतल में ही लाएं। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान लाना मना है। सुबह 10 बजे के बाद एंट्री नहीं मिलेगी। कम से कम 25–30 मिनट पहले पहुंचने की सलाह दी गई है। प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा। उत्तर नीले या काले पेन से ही लिखना होगा। मैप शीट वाले विषयों में मैप कॉपी के अंत में लगानी होगी। उत्तर प्रश्न नंबर के अनुसार ही लिखना होगा। दिल्ली पुलिस ने स्टूडेंट्स के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की दिल्ली में भारत मंडपम के पास AI इम्पैक्ट समिट और वीवीआईपी मूवमेंट के कारण ट्रैफिक में बदलाव किया गया है। तिलक मार्ग, विनय मार्ग और पंडारा रोड के आसपास खास व्यवस्था की गई है। अगर छात्र अपना CBSE एडमिट कार्ड या डेट शीट दिखाते हैं, तो ट्रैफिक जांच में उन्हें पहले जाने दिया जाएगा। छात्रों को सलाह है कि वे घर से थोड़ा जल्दी निकलें। CBSE ने कहा पहला बोर्ड एग्जाम देना जरूरी क्लास 10th के बोर्ड स्टूडेंट्स के लिए 2026 सत्र से ‘डुअल एग्जाम सिस्टम’ लागू करने का निर्णय किया गया है। इस नए सिस्टम में छात्रों को एक ही साल में दो बार परीक्षा देने का मौका मिलेगा, ताकि अगर पहली बार नंबर कम आएं तो वे दोबारा बेहतर प्रदर्शन कर सकें। हालांकि, इसके लिए कुछ रुल्स रखे गए है। पहली बोर्ड परीक्षा में शामिल होना सभी छात्रों के लिए जरूरी है। जो छात्र पास होंगे, वे साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस और भाषा में से किसी तीन विषय में सुधार परीक्षा दे सकते हैं। अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे ज्यादा विषयों में शामिल नहीं होता, तो वह दूसरी परीक्षा में नहीं बैठ सकेगा। ऐसे छात्रों को “Essential Repeat” श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे छात्र अगले साल फरवरी में होने वाली मुख्य परीक्षा में ही दोबारा बैठ सकेंगे। क्लास 12 की कॉपियां डिजिटल तरीके से जांची जाएंगी इस बार CBSE ने कक्षा 12 की कॉपियों की जांच पूरी तरह डिजिटल तरीके से करने का फैसला किया है। इसे On-Screen Marking (OSM) कहा जाता है। कॉपियों को पहले स्कैन किया जाएगा। परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही नंबर देंगे। 10 करोड़ से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाएं जांची जानी हैं। इससे गलती कम होगी और रिजल्ट जल्दी आएगा। खाली पन्ने भी स्कैन किए जाएंगे, ताकि सब कुछ साफ रहे। OSM सिस्टम में लिखते समय ध्यान रखें इस बार कक्षा 12 की कॉपियों की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी डिजिटल सिस्टम से होगी। इसलिए CBSE ने छात्रों को खास तौर पर साफ और सही तरीके से उत्तर लिखने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा है कि परीक्षा का पैटर्न पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन लिखने के तरीके में सावधानी बहुत जरूरी है। हिस्ट्री और जियोग्राफी जैसे विषयों की मैप शीट आंसर शीट के अंत में ही लगानी होगी। हर उत्तर प्रश्न नंबर के अनुसार और दिए गए सेक्शन के अंदर ही लिखा जाए। तय जगह से बाहर या मार्जिन के बाहर लिखने पर स्कैनिंग के दौरान दिक्कत आ सकती है और मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है। CBSE ने कहा है कि इस डिजिटल सिस्टम से कॉपी जांचने में साफ-सफाई और सही जांच होगी। छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है, बस नियमों का पालन करें और ध्यान से लिखें। स्टोरी – सृष्टि सिंह —————————————————————— यह खबर भी पढ़ें- JEE मेन सेशन 1 रिजल्ट घोषित:12 कैंडिडेट्स को मिला 100 पर्सेंटाइल, 3 राजस्थान से; यहां देखें स्कोरकार्ड नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE मेन्स 2026 सेशन – 1 का रिजल्ट जारी कर दिया है। स्टूडेंट्स ऑफिशियल वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं। परीक्षा में भाग लेने वाले छात्र एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड दर्ज करके स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…….… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
CBSE Board Exam 2026 Copy Checking Rules; Digital Evaluation

Hindi News National CBSE Board Exam 2026 Copy Checking Rules; Digital Evaluation | On Screen Marking नई दिल्ली10 दिन पहलेलेखक: अनिरुद्ध शर्मा कॉपी लिंक डिजिटल चेकिंग से टोटलिंग में गलतियां कम होंगी। वैल्यूएशन तेज होगा। (AI इमेज) इस बार सीबीएसई 12वीं के 17 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स की कॉपियां ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जांची जाएंगी। मतलब ये कि इन्हें डिजिटल तरीके से जांचा जाएगा। सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक होनी है। इसके लिए हर छात्र की सभी आंसर शीट्स (उत्तरपुस्तिका) के हर पन्ने को परीक्षा केंद्र में ही स्कैन करके कंप्यूटर सिस्टम में अपलोड किया जाएगा। करीब 1 करोड़ कॉपियों के लगभग 32 करोड़ पन्ने स्कैन करके अपलोड होंगे। परीक्षक इन डिजिटल कॉपियों की जांच करके ही नंबर देंगे। 10वीं बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की चेकिंग पहले की तरह कागज पर ही होगी। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के मुताबिक इस नई व्यवस्था से उत्तर पुस्तिकाओं के ट्रांसपोर्ट में लगने वाला समय और खर्च बचेगा। शिक्षक अपने स्कूल में रहते हुए ही मूल्यांकन कर सकेंगे, बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, तेज और गलतीरहित बनाने के मकसद से बोर्ड ने यह प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है। 7 चरण में जानें, कैसे होगी ऑनस्क्रीन मार्किंग पहला चरण: छात्र परीक्षा केंद्र पर पहले की तरह कॉपी में उत्तर लिखेंगे। परीक्षा ऑफलाइन ही होगी। बोर्ड परीक्षा में विषय के हिसाब से 40 पेज, 32 पेज और 20 पेज की कॉपी का इस्तेमाल होता है। दूसरा चरण: सभी उत्तर पुस्तिकाएं हाई सिक्योरिटी स्कैनिंग सेंटर में स्कैन होंगी। यह स्कूल के कंप्यूटर लैब में ही होगा। हर पेज की डिजिटल इमेज बनेगी। हर कॉपी को यूनिक कोड मिलेगा। कॉपी जांचते समय छात्र का नाम व रोल नंबर नहीं दिखेगा। इससे पक्षपात की संभावना खत्म होगी। तीसरा चरण: सीबीएसई के स्कूल के टीचर कंप्यूटर लैब में ओएसिस आईडी से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) पोर्टल पर लॉगइन करेंगे। तब उन्हें पता चलेगा कि आज उन्हें कितनी कॉपियां जांचनी हैं। चौथा चरण: छात्र की कॉपी के स्कैन किए हुए पेज शिक्षक के सामने आएंगे। हर प्रश्न के लिए एक अलग मार्क्स कॉलम होगा, जिसमें उस प्रश्न के पूर्णांक (कुल मार्क्स) लिखे होंगे। शिक्षक उसमें छात्र के जवाब के हिसाब से जो भी मार्क डालेंगे, वह सिस्टम में अपने आप ‘सेव’ हो जाएगा। पांचवां चरण: जब कॉपी पूरी चेक हो जाएगी तो शिक्षक को अंकों का जोड़-घटाव नहीं करना है। टोटलिंग खुद होगी। छठा चरण: कुछ कॉपियों को री-चेक या मॉडरेशन के लिए दूसरे वरिष्ठ परीक्षक को भी दिखाया जा सकता है। पूरा ट्रैक रिकॉर्ड सिस्टम में रहेगा कि किस शिक्षक ने कब कितनी देर में कैसे मूल्यांकन किया। सातवां चरण: यहां से अंक सीधे सीबीएसई के रिजल्ट डेटाबेस में पहुंच जाएंगे यानी कोई मार्क ट्रांसफर, मैनुअल एंट्री और दोबारा सत्यापन की जरूरत नहीं होगी। रिजल्ट तय तारीख पर कम विवाद और ज्यादा भरोसे के साथ घोषित हो सकेंगे। कंप्यूटर लैब अनिवार्य, शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी डिजिटल चेकिंग के लिए स्कूल में कंप्यूटर लैब अनिवार्य है। लेटेस्ट इंटरनेट ब्राउजर, एडोब रीडर, कम से कम 2 एमबीपीएस की स्थिर इंटरनेट स्पीड, निर्बाध बिजली सुनिश्चित करनी होगी। वहीं, सभी ओएसिस आईडी वाले शिक्षकों को प्रशिक्षण मिलेगा। कई बार ड्राई रन होंगे। समस्या समाधान के लिए कॉल सेंटर बनाए जा रहे हैं। बोर्ड निर्देशात्मक वीडियो भी जारी कर रहा है। —————– CBSE से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… CBSE 10वी-12वीं एग्जाम के मॉडल पेपर: परीक्षा की तैयारी के लिए Arihant Publications के पेपर डाउनलोड और प्रैक्टिस करें CBSE बोर्ड 12वीं और 10वीं की सेशन 1 परीक्षा 17 फरवरी से शुरू हो रही है। एग्जाम की सबसे सटीक तैयारी के लिए सभी मेजर सब्जेक्ट्स के मॉडल पेपर्स नीचे दिए गए हैं। सभी मॉडल पेपर्स Arihant Publications के एक्सपर्ट्स ने तैयार किए हैं। इन्हें बोर्ड एग्जाम के पैटर्न पर ही तैयार किया गया है। आप इन्हें डाउनलोड कर सकते हैं, शेयर कर सकते हैं और अटेम्प्ट कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
rajpal yadav sentence cheque bounce case: rajpal yadav pay 9 crore rupees after jail | Cheque Bounce rules act punishment liability | क्या सजा काटने के बाद राजपाल यादव को नहीं देने पड़ेंगे 9 करोड़? जानिए चेक बाउंस का मायाजाल

Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: क्या होता है चेक बाउंस केस, जिस मामले में देश के चर्चित कॉमेडियन राजपाल यादव को जाना पड़ा है जेल? क्या कोई शख्स चेक बाउंस की सजा जेल में रहकर काट लेता है तो उसे बकाया रकम चुकाने से आजादी मिल जाती है? या फिर जेल की सजा अदालत की अवेहलना और चेक बाउंस के लिए सुनाई जाती है? चेक बाउंस केस में किसी शख्स को कितने साल की सजा होती है? क्या है राजपाल यादव वाला केस और क्या अब जेल जाने के बाद भी उन्हें रकम वापस करनी पड़ेगी? दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर राजपाल यादव ने बीते गुरुवार को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था. वर्षों पुराने चेक बाउंस केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ सख्त रुख दिखाया. राजपाल यादव अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं. जेल जाने से पहले उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने बेबसी में कहा, ‘मेरे पास पैसे नहीं हैं, न ही कोई दोस्त… मैं अकेला पड़ गया हूं. करोड़ों कमाने वाला यह सितारा जेल की कोठरी तक कैसे पहुंचा और कानून के नजरिए से अब उनके पास क्या-क्या विकल्प बचे हैं? यह सारा बवाल शुरू हुआ साल 2010 में. राजपाल यादव अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ निर्देशित करना चाहते थे. फिल्म बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली के एक व्यापारी मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हुई और राजपाल कर्ज में डूब गए. कर्ज चुकाने के लिए राजपाल ने जो चेक दिए, वे बैंक में बाउंस हो गए. यहीं से उन पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हुआ. जो 5 करोड़ का लोन था, वह ब्याज और जुर्माने के साथ बढ़कर अब लगभग 9 करोड़ रुपये हो चुका है. राजपाल यादव के साथ अब आगे क्या होगा? राजपाल यादव को निचली अदालत ने 6 महीने की कैद की सजा सुनाई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें कई बार मोहलत दी कि वे पैसे चुका दें, लेकिन हर बार वे नाकाम रहे. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार राजपाल के पास अब ये विकल्प हैं: पूरी सजा काटना: अगर वे बकाया 9 करोड़ रुपये नहीं चुका पाते, तो उन्हें कोर्ट के आदेशानुसार पूरी 6 महीने की सजा जेल में काटनी होगी. सेटलमेंट (Out of Court Settlement): अगर इस दौरान वे शिकायतकर्ता (मुरली प्रोजेक्ट्स) को एक निश्चित राशि देकर समझौता कर लेते हैं, तो वे अपनी सजा को कम करने या खत्म करने के लिए हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं. अच्छे आचरण का लाभ: जेल में बेहतर आचरण (Good Conduct) होने पर जेल प्रशासन 15-20 दिन की रियायत दे सकता है, लेकिन यह जेल के नियमों पर निर्भर करता है. क्या होता है चेक बाउंस केस और कितनी होती है सजा? जब आप किसी को भुगतान के लिए चेक देते हैं और बैंक उसे ‘अपर्याप्त फंड’ (Insufficient Funds) या किसी अन्य तकनीकी कारण से रिजेक्ट कर देता है, तो इसे चेक बाउंस कहा जाता है. कानूनी नोटिस: चेक बाउंस होने के बाद, पैसा पाने वाले को 30 दिनों के भीतर आपको एक कानूनी नोटिस भेजना होता है. 15 दिन की मोहलत: नोटिस मिलने के बाद आपके पास पैसे चुकाने के लिए 15 दिन का समय होता है. सजा का प्रावधान: अगर 15 दिन में पैसे नहीं चुकाए गए, तो आप पर केस दर्ज हो सकता है. दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल या चेक की राशि का दोगुना जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. क्या जेल जाने के बाद पैसा नहीं देना पड़ेगा? यहीं पर सबसे बड़ी गलतफहमी पैदा होती है. कानूनी विशेषज्ञों और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों (जैसे कुमारन बनाम केरल राज्य) के अनुसार: सजा दंड है, सेटलमेंट नहीं: जेल की सजा आपको ‘अपराध’ के लिए दी जाती है, न कि आपके ‘कर्ज’ के बदले. कर्ज बना रहता है: जेल से बाहर आने के बाद भी लेनदार (पैसे मांगने वाला) आपसे अपनी रकम वसूलने का हकदार रहता है. संपत्ति की कुर्की: अगर आरोपी जेल काट लेता है और फिर भी पैसे नहीं देता, तो कोर्ट उसकी संपत्ति कुर्क (Seize) करने का आदेश दे सकती है ताकि लेनदार का पैसा लौटाया जा सके. क्या राजपाल यादव को 9 करोड़ देने होंगे? राजपाल यादव को 6 महीने की सजा सुनाई गई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि:राजपाल यादव ने अपनी देनदारी (Liability) खुद स्वीकार की है. भले ही वे 6 महीने तिहाड़ जेल में रहें, लेकिन M/s Murali Projects का बकाया पैसा (जो अब करीब 9 करोड़ हो चुका है) उन्हें चुकाना ही होगा. जेल की सजा सिर्फ उनके द्वारा बार-बार कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने और चेक बाउंस करने के ‘जुर्म’ की सजा है. बाहर आने के बाद भी उनकी संपत्ति या भविष्य की कमाई से वह पैसा वसूला जा सकता है.
passport rules if you live in ghaziabad and have a passport issued with a delhi address right wrong punishment jail | रहते हैं गाजियाबाद में और दिल्ली के पते पर बना है पासपोर्ट, तो अब जाएंगे जेल! शुरू होने जा रहा बड़ा अभियान

गाजियाबाद. हाल ही में गाजियाबाद में एक ही एड्रेस पर 22 पासपोर्ट बनने की खबर ने विदेश मंत्रालय को हैरान और परेशान कर दिया है. पिछले दिनों गाजियाबाद में एक बहुत बड़े पासपोर्ट फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर और फर्जी कागजों के दम पर 22 पासपोर्ट बनवा लिए गए. इस खेल में पोस्ट ऑफिस का पोस्टमैन भी शामिल था. दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस की चिट्ठी के बाद जब गाजियाबाद पुलिस ने जांच शुरू की, परत दर परत राज खुलते चले गए. ऐसे में अब पासपोर्ट विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू की है, जिसमें पासपोर्ट उसी एड्रेस पर बनेगा, जिस एड्रेस पर आवेदक का कम से कम एक स्थाई पता हो. अगर आप गाजियाबाद में रहते हैं दिल्ली में नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में पहले कभी रह रहे थे, तो अब आप दिल्ली के एड्रेस पर पासपोर्ट नहीं बना सकते. बीते कुछ सालों से आपको अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए गांव या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. विदेश मंत्रालय की Apply Anywhere in India योजना के तहत आप भारत के किसी भी कोने से पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन, इस सुविधा के साथ कुछ सख्त नियम भी जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको अपराधी बना सकता है. क्या गाजियाबाद का व्यक्ति दिल्ली में पासपोर्ट बनवा सकता है?जी हां, बिल्कुल! 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) की सीमाएं खत्म हो गई हैं. आप कैसे पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) को चुन सकते हैं, कैसे होता है वेरिफिकेशन? जी आप बिल्कुल अपने पसंद का पोसपोर्ट सेवा केंद्र चुन सकते हैं. पुलिस वेरिफिकेशन आपके ‘वर्तमान पते’ (Current Address) पर ही होगा, जहां आप अभी रह रहे हैं. लेकिन बहुत लोग ये करते हैं कि वह रहते हैं गाजियाबाद में लेकिन दिल्ली के अपने पुराने पते पर पासपोर्ट बना लेते हैं. पुलिस वेरिफेकशन में अड़ोसी-पड़ोसी को बोले रखते हैं कि आए तो बता दीजिएगा कि मैं यही रहता हूं. बाद में पुलिस की मदद से पासपोर्ट तो बना लेते हैं, लेकिन जो गैरकानूनी है. पासपोर्ट बनाने के लिए क्या-क्या जरूरी दस्तावेज चाहिए? आपको दिल्ली में रहने का सबूत जैसे रेंट एग्रीमेंट, बिजली का बिल, बैंक पासबुक या कंपनी का लेटर देना होगा. भले ही आपके स्थायी पते के दस्तावेज बिहार के हों, लेकिन वर्तमान पता साबित करना अनिवार्य है. क्या पुराने पते पर पासपोर्ट बन सकता है?अक्सर लोग उस पते पर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करते हैं जहां वे पहले रहते थे लेकिन अब नहीं रहते. यह पूरी तरह गैर-कानूनी है. पासपोर्ट के नियमों के मुताबिक, आपको केवल उसी पते का जिक्र करना चाहिए जहां आप आवेदन के समय पिछले एक साल से रह रहे हैं. यदि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आप उस पते पर नहीं पाए जाते हैं, तो आपकी रिपोर्ट ‘Adverse’ लग जाएगी. इससे न केवल आपका पासपोर्ट आवेदन रद्द होगा, बल्कि आपको ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. फर्जी एड्रेस पर पासपोर्ट बनाना कितना बड़ा जुर्मपासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज है. फर्जी पते या गलत जानकारी देना राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाता है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यदि कोई गैर-भारतीय जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या फर्जी पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता है, तो सजा 1 साल से 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 2026 के नए नियम: डिजिटल और सख्त वेरिफिकेशनसाल 2026 में पासपोर्ट नियमों को और भी ‘हाई-टेक’ बनाया गया है. अब पुलिस वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल टैब का इस्तेमाल होता है, जो सीधे जीपीएस (GPS) लोकेशन से जुड़ा होता है. इसका मतलब है कि पुलिसकर्मी को आपके घर आना ही होगा और वह आपकी लोकेशन को सिस्टम में अपडेट करेगा. अगर आप उस एड्रेस पर नहीं रहते हैं, तो सिस्टम तुरंत उसे रिजेक्ट कर देगा. जरूरी सलाह सच्चाई ही रास्ता है: हमेशा अपने वर्तमान पते की जानकारी दें. अगर आप किराए पर हैं, तो रेंट एग्रीमेंट को ही आधार बनाएं. पुराना पासपोर्ट अपडेट: अगर आपके पास पहले से पासपोर्ट है और आपका पता बदल गया है, तो उसे ‘Re-issue’ करवाकर नया पता दर्ज कराएं. पुलिस से न डरें: पुलिस वेरिफिकेशन अब पहले से बहुत आसान और पारदर्शी हो गया है. बस आपके पास सही दस्तावेज होने चाहिए. पासपोर्ट बनवाना अब आपका अधिकार है और सरकार ने इसे सुगम बनाया है, लेकिन ईमानदारी ही इसकी पहली शर्त है. फर्जीवाड़े की छोटी सी कोशिश आपकी विदेश यात्रा के सपने को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है.







