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Sunny Deol Controversy | Actor Statement Pakistan Mausi Social Media Trolling

Sunny Deol Controversy | Actor Statement Pakistan Mausi Social Media Trolling

13 मिनट पहले कॉपी लिंक सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को रिलीज होगी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की रिलीज से पहले सनी देओल अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए। पटना में फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने पिता धर्मेंद्र के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को मौसी बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। दरअसल सनी से सवाल किया गया कि यह मूवी, जो पाकिस्तान में शूट की गई है, तो आप पाकिस्तान को एक देश या माहौल के तौर पर कैसे देखते हैं? क्या आप कुछ बताना चाहेंगे? इस पर सनी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग पाकिस्तान में नहीं हुई, बल्कि फिल्म हिंदुस्तान में ही शूट हुई है। उन्होंने आगे कहा, “हम कोई ऐसी बातें नहीं करते, क्योंकि पूरा देश एक ही था। जैसे पापा ने कहा था कि मेरी मां (भारत) तो वो मेरी मौसी (पाकिस्तान) है, जो आप लोग अच्छी तरह से समझते हैं। हम सब एक तरह से हैं, तो कहीं न कहीं से जुड़े हुए हैं।” सनी देओल के इस बयान पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, “सनी देओल हर नए वीडियो से अपनी छवि को और नुकसान पहुंचा रहे हैं।” दूसरे ने कहा, “मुझे यह व्यक्ति बिल्कुल पसंद नहीं है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “पूरे परिवार को बर्बाद करने वाली मौसी वाली बात सही है।” फिल्म के ट्रेलर में सनी देओल दमदार एक्शन करते नजर आ रहे हैं। ‘बंटवारा 1947’ विभाजन की कहानी पर आधारित है बता दें कि सनी देओल की अपकमिंग फिल्म ‘बंटवारा 1947’ भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की कहानी हिंसा, विस्थापन और पारिवारिक संघर्ष से जूझ रहे एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में सनी देओल के साथ शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, अली फजल और अभिमन्यु सिंह भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की रिलीज से पहले सनी देओल रविवार देर शाम पटना में स्थित तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब पहुंचे। यहां उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मस्थान पर मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों ने सनी देओल का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया और गुरु घर की परंपराओं से अवगत कराया गया। इसके बाद उन्होंने फिल्म के प्रमोशन में हिस्सा लिया। देखें तस्वीरें… पटना साहिब गुरुद्वारे में बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल। हाथ जोड़कर लिया आशीर्वाद। पटना साहिब गुरुद्वारे में सनी देओल को सम्मानित किया गया। गुरु इतिहास की जानकारी के साथ पूरा गुरुद्वारा घूमा सनी देओल लगभग 20 मिनट तक गुरुद्वारा परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने तख्त श्री हरमंदिर साहिब के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया, गुरु इतिहास की जानकारी ली और श्रद्धालुओं के साथ समय बिताया। उन्होंने गुरु का पावन प्रसाद भी ग्रहण किया। दर्शन के बाद सनी देओल ने कहा कि गुरु के दरबार में आकर उन्हें अद्भुत शांति और आत्मिक सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने बताया, “मेरा हमेशा से मन था कि जब भी बिहार आऊं, सबसे पहले तख्त श्री हरिमंदिर साहिब में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद जरूर लूं। आज मेरा यह सपना पूरा हो गया।” सनी देओल को सम्मानित किया गया। …………………. सनी देओल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पिता धर्मेन्द्र को याद कर रो पड़े सनी देओल:’बंटवारा 1947′ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में छलके आंसू; करण देओल, शबाना आजमी-जावेद अख्तर भी नजर आए फिल्म ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सनी देओल रो पड़े। इवेंट के दौरान डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने दिवंगत अभिनेता धर्मेन्द्र पर बात की जिसे सुनकर सनी देओल की आंखों में आंसू आ गए। संतोषी ने कहा की धर्मेन्द्र जी ने आखिरी फिल्म भी बटवारा देखी थी। उन्होंने कहा था ये फिल्म हिट होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Kangana Ranaut Slams Hrithik Roshan Over Social Media Controversy

Kangana Ranaut Slams Hrithik Roshan Over Social Media Controversy

15 मिनट पहले कॉपी लिंक कंगना रनोट ने ऋतिक रोशन से उनके नाम का इस्तेमाल कर उन्हें ट्रोल करने वालों की आलोचना करने की अपील की और कहा कि आग में घी डालने और अपनी पार्टनर को शर्मिंदा करने से बचना चाहिए। हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘द वर्ल्ड ओज एन अपोलॉजी टू ऋतिक रोशन’ ट्रेंड सामने आया। यह ट्रेंड उस बयान के बाद चर्चा में आया, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास ने बरखा दत्त के साथ बातचीत में कहा था, “मेरे दोस्त भी मुझे मैसेज कर रहे थे कि अब वो तुम्हारे पीछे क्यों पड़ी है? उनमें से एक ने कहा कि मैं थोड़ा-बहुत यंग ऋतिक रोशन जैसा दिखता हूं।” पूरी खबर यहां पढ़ें… इस ट्रेंड के बीच कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कंगना रनोट को ट्रोल करते हुए यही हैशटैग इस्तेमाल किया। इस पर ऋतिक रोशन ने प्रतिक्रिया देते हुए टिप्पणी कहा था मेरे दोस्त, सिर्फ इसलिए किसी ‘A’ का पक्ष लेना क्योंकि अब आप ‘B’ को पसंद नहीं करते, हमारे समाज को नुकसान पहुंचाने वाली एक बड़ी प्रणालीगत समस्या का एक छोटा सा हिस्सा है। मैं तब तक इंतजार करूंगा, जब तक इसके पीछे का संदर्भ सही न हो और वह तथ्यों से प्रेरित न हो। वह सही होगा, लेकिन फिर से, अब किसे परवाह है, है ना? ऋतिक के इस रिएक्शन के बाद कंगना रनोट ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “प्रिय ऋतिक, मुझे खुशी है कि आपको अपना परफेक्ट पार्टनर मिल गया है। सबा आजाद के साथ आपकी जोड़ी बहुत अच्छी लगती है और आप दोनों एक गंभीर रिश्ते में हैं।” कंगना ने आगे कहा कि ऐसे में किसी महिला को इस तरह चिढ़ाना या उसका मजाक उड़ाना आपको शोभा नहीं देता। इसके बजाय, आपको उन लोगों की निंदा करनी चाहिए, जो आपके नाम का इस्तेमाल करके मुझे परेशान कर रहे हैं और बुली कर रहे हैं। अपनी पोस्ट के अंत में कंगना ने लिखा, “कृपया आग में घी डालने जैसा व्यवहार बंद करें और अपने पार्टनर को भी इस तरह शर्मिंदा न करें। उम्मीद है कि आप समझदारी से काम लेंगे और इस तरह की अनुचित टिप्पणियां करना बंद करेंगे।” गौरतलब है कि कंगना और ऋतिक के बीच विवाद कई वर्षों से चर्चा में रहा है। कंगना ने ऋतिक को पिंकविला को दिए इंटरव्यू में अपना सिली एक्स कहा था। वहीं, ऋतिक ने सार्वजनिक रूप से किसी भी रिलेशनशिप से इनकार किया और अभिनेत्री को लीगल नोटिस भेजा था। कंगना और ऋतिक ने दो बॉलीवुड फिल्मों काइट्स (2010) और कृष 3 (2013) में एक साथ काम किया है। एक्टर का दावा था कि उनके नाम से एक फर्जी ईमेल आईडी बनाकर कंगना से बातचीत की गई थी, जबकि कंगना का कहना था कि वह ईमेल आईडी स्वयं ऋतिक ने उन्हें उपलब्ध कराई थी। कंगना से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ‘फिल्मों के किरदार से मुझे जज मत करो’:Gen Z विवाद पर कंगना रनोट का पलटवार, बोलीं- रील और रियल लाइफ में फर्क समझिए Gen Z को लेकर दिए गए बयान पर घिरीं कंगना रनोट ने अब ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के किरदारों की क्लिप्स शेयर कर उन्हें निशाने पर लेने वालों पर कंगना ने पलटवार करते हुए कहा कि फिल्मों में निभाए गए किरदार और असल जिंदगी के विचारों की तुलना करना गलत है। उन्होंने लोगों से रील और रियल लाइफ का फर्क समझने की अपील की। पूरी खबर यहां पढ़ें… ‘अभी तो उसको एक थप्पड़ पड़ा है’:संजय सिंह ने कंगना रनोट पर साधा निशाना, बोले- जेपी नड्डा जी अपनी सांसद को समझाइए संसद में गुरुवार को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भाजपा सांसद कंगना रनोट का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। संजय सिंह ने सदन में कहा, “इनकी एक सांसद हैं। उन्होंने किसान आंदोलन में किसानों को गालियां दीं। नौजवानों के आंदोलन में नौजवानों के लिए इतनी भद्दी टिप्पणी की, मान्यवर, इस सदन के अंदर मैं कह नहीं सकता।” पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

RPSC Warning: Legal Action Against Misleading Social Media Posts

RPSC Warning: Legal Action Against Misleading Social Media Posts

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने परीक्षाओं और परिणामों को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। . आयोग के सचिव रामनिवास मेहता ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन जारी आदेश में चेतावनी दी है कि फर्जी या भ्रामक पोस्ट करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने अभ्यर्थियों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील भी की है। दरअसल, शुक्रवार को आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि कुछ अभ्यर्थी और अन्य व्यक्ति अधिकृत सूचना के बिना परीक्षा परिणामों का विश्लेषण कर भ्रामक तथ्य और आंकड़े सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे अभ्यर्थियों और आमजन में भ्रम की स्थिति बन रही है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ आयोग कड़ा रुख अपनाएगा। आयोग सचिव रामनिवास मेहता ने कहा कि आयोग के संज्ञान में आया है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले ही कई तरह के दावे और विश्लेषण साझा किए जा रहे हैं। इससे न केवल अभ्यर्थियों में भ्रम फैल रहा है, बल्कि आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करने का प्रयास किया जा रहा है। आयोग की अधिकृत सूचना पर ही भरोसा करें अभ्यर्थी आयोग ने सभी अभ्यर्थियों और आमजन से अपील की है कि वे केवल आयोग की अधिकृत सूचना पर ही भरोसा करें। आज सचिव रामनिवास मेहता का आखिरी दिन राजस्थान लोक सेवा आयोग के सचिव रामनिवास मेहता का शुक्रवार को कार्यकाल का आखिरी दिन रहा। रिटायर होने से पहले उन्होंने यह महत्वपूर्ण प्रेस नोट जारी कर अभ्यर्थियों को आगाह किया। इसके साथ ही आयोग के सदस्य डॉ. अशोक कलवार का कार्यकाल भी शुक्रवार को पूरा हो गया। आयोग में तीन सदस्य पद होंगे रिक्त डॉ. अशोक कलवार के कार्यकाल समाप्त होने और पहले से रिक्त एक सदस्य पद को मिलाकर अब आयोग में तीन सदस्य पद खाली हो जाएंगे। इन पदों पर नई नियुक्तियों का इंतजार रहेगा।

World News Updates; US Iran Israel Pakistan Breaking NewsFrance Social Media Ban

World News Updates; US Iran Israel Pakistan Breaking NewsFrance Social Media Ban

5 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

NCERT Class 8 Social Science Book Revised

NCERT Class 8 Social Science Book Revised

Hindi News Career NCERT Class 8 Social Science Book Revised | Judiciary Chapter Updated After SC Directive 7 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8वीं की सोशल साइंस (भाग-2) की संशोधित किताब जारी कर दी है। इस किताब का नाम Exploring Society: India and Beyond है। यह इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थव्यवस्था जैसे सब्जेक्ट को इंटीग्रेटेड रूप में प्रस्तुत करती है। यह वही किताब है जिसे 23 फरवरी को जारी किया गया था। इसे न्यायपालिका से जुड़े विवादित कंटेंट के कारण वापस लिया गया था। अब नए एडिशन में न्यायपालिका पर लिखे गए पूरे चैप्टर को दोबारा तैयार किया गया है। इस किताब की ऑफलाइन बिक्री 24 फरवरी से बंद कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा तैयार हुई किताब इस किताब से संबंधित सुनवाई के दौरान NCERT ने अदालत से माफी मांगी और स्वीकार किया कि किताब में कुछ गलत कंटेंट शामिल हो गए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने किताब के प्रिंट और डिजिटल दोनों एडिशन के डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी थी। साथ ही संबंधित चैप्टर को दोबारा लिखने का निर्देश दिया था। अब उसी आदेश के बाद संशोधित किताब पब्लिश की गई है। किताब से इन हिस्सों को हटाया नई किताब में “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक वाले चैप्टर को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है। पहले जहां न्यायपालिका की चुनौतियों, मामलों के लंबित रहने और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र था, वहीं अब इन सभी हिस्सों को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर अब संविधान की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, न्याय तक आम लोगों की पहुंच, जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution) जैसी व्यवस्थाओं को विस्तार से समझाया गया है। उदाहरण से समझाई जनहित याचिका नई किताब में पहली बार जनहित याचिका (Public Interest Litigation) को विस्तार से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत आम जनता के हित में अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। छात्रों को उदाहरण के तौर पर हुसैनारा खातून केस, जिसमें विचाराधीन कैदियों की रिहाई का रास्ता खुला, एम.सी. मेहता के पर्यावरण से जुड़े मामले और विशाखा निर्णय, जिसने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ दिशा-निर्देश तय किए, के बारे में भी जानकारी दी गई है। एक्सपर्ट कमेटी ने दोबारा लिखा पूरा चैप्टर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए शिक्षा मंत्रालय की ओर से एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई। उसमें न्यायपालिका वाले पूरे चैप्टर को दोबारा लिया गया। 3 एक्सपर्ट्स के नाम हटाए गए पुरानी किताब तैयार करने वाली टीम में 51 एक्सपर्ट्स के नाम शामिल थे, लेकिन संशोधित एडिशन में केवल 48 नाम हैं। इसमें मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के नाम हटा दिए गए हैं। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि पाठ्यपुस्तक तैयार करना सामूहिक प्रक्रिया होती है और किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पहले दिए गए अपने आदेश में भी संशोधन किया था। विवाद के बाद सरकार ने किए कई बड़े बदलाव इस पूरे विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह को भी शामिल किया गया। साथ ही नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के प्रमुख को भी न्यायपालिका से जुड़े स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा प्रक्रिया में जोड़ा गया। दूसरी ओर NCERT ने भी अपनी पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली कमेटी का पुनर्गठन किया। साथ ही किताबों के अप्रूवल, पब्लिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन की प्रक्रिया में बदलाव किए। NCERT की पुरानी सोशल साइंस पार्ट – 2 को क्यों हटाया गया : NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्‍यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्च के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘Justice delayed is justice denied’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। ये खबर भी पढ़ें RRB ग्रुप D रिजल्ट के इंतजार में बने मीम्स:रेलवे भर्ती बोर्ड ने रिजल्ट किया जारी, 1 करोड़ उम्मीदवारों ने दी थी परीक्षा रेलवे भर्ती बोर्ड RRB की ओर से RRB Group D रिजल्ट एग्जाम होने के 5 महीने बाद आज जारी कर दिया गया है। रिजल्ट के साथ जोन वाइज ग्रुप डी कटऑफ भी घोषित किया गया है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाकर रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक NCERT ने गुरुवार को क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया है। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। हालांकि, इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, लेकिन ‘सॉवरेन’ (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी), ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), ‘डेमोक्रेटिक’ (लोकतांत्रिक) और ‘रिपब्लिक’ (गणराज्य) जैसे शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र 25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण। किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। 1976 में संविधान में सेकुलर शब्द जुड़ा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल के समय किए गए 42वें संविधान संशोधन (1976) के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘सेकुलर’ (पंथनिरपेक्ष), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘इंटीग्रिटी’ (अखंडता) जोड़े गए थे। किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई। किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई। लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं। NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है। मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है। किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है। पीएम मोदी ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस कहा NCERT की किताब में चुनाव आयोग की तारीफ कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की बुक में देश के चुनाव आयोग (ECI) की भी तारीफ की गई है। बुक में कहा गया है कि भारत में चुनाव कराना दुनिया के सबसे बड़े कामों में से एक है। इसके बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश करता है। नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 1’ के ‘इलेक्शंस’ चैप्टर में बताया गया है कि 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा वोटर थे। इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराना आसान नहीं है, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं। किताब में कहा गया है कि इतने बड़े देश में चुनाव कराना अपने आप में चुनौती है। इसके अलावा फेक न्यूज, गलत जानकारी फैलाना और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इनसे निपटने के लिए चुनाव आयोग RPA कानून, आदर्श आचार संहिता, EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियानों का इस्तेमाल करता है। किताब में कहा गया है कि सिर्फ चुनाव आयोग के प्रयास काफी नहीं हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिए लोगों की जागरूकता और भागीदारी भी जरूरी है। नागरिक जितने सतर्क रहेंगे, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। चैप्टर में कहा गया है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। वे अलग-अलग नीतियां और योजनाएं लोगों के सामने रखते हैं, जिससे मतदाता अपनी पसंद का फैसला कर सकते हैं। छात्रों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में जीतने वाले गठबंधनों का अध्ययन करने के लिए भी कहा गया है। …………………… यह खबर भी पढ़ें… मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

NCERT Emergency 1975-77 । Class 9th Social Science Book syllabus NEP 2020

NCERT Emergency 1975-77 । Class 9th Social Science Book syllabus NEP 2020

Hindi News National NCERT Emergency 1975 77 । Class 9th Social Science Book Syllabus NEP 2020 नई दिल्ली1 मिनट पहले कॉपी लिंक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 मई 1975 को देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी। NCERT यानी नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 की इमरजेंसी को शामिल किया है। नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि कक्षा 9 की किताब में पहली बार इमरजेंसी पर अलग सेक्शन जोड़ा गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब देश ने हाल ही में इमरजेंसी लागू होने के 50 साल पूरे होने को याद किया है। किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई। किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र 25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण। किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं। NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है। मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है। किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है। …………………… यह खबर भी पढ़ें… मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Ludhiana Nihang Protest Social Media Video Controversy

Ludhiana Nihang Protest Social Media Video Controversy

रंजीत कौर ने दिलजीत दोसांझ के साथ उनकी फिल्म जट एंड जूलियट 3 में काम किया है। पंजाबी सिंगर एवं एक्टर दिलजीत दोसांझ के साथ फिल्म जट एंड जूलियट-3 में काम कर चुकीं रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली सोशल मीडिया पर अपनी रील्स को लेकर विवाद में हैं। . हर रील के अंत में आंख मारते हुए वह किसी न किसी का नाम लेकर आई लव यू बोलती हैं और फ्लाइंग किस करते हुए कहती हैं, ‘वीरवार है या जुम्मां ले, चक्क भाभी दा चुम्मा’। रंजीत कौर भाभी की यही तुकबंदी अब उनके लिए परेशानी का सबब बन रही है। रंजीत कौर की इस तुकबंदी पर निहंगों ने आपत्ति जताते हुए उनके घर पर धावा बोल दिया। बठिंडा से लुधियाना आए निहंग जत्थे ने उन्हें सख्त चेतावनी दी कि इस तरह की तुकबंदी और अश्लीलता वाली रील सोशल मीडिया पर डाली तो इसके परिणाम खतरनाक होंगे। भाभी चुम्मेवाली निहंगों के सामने गिड़गिड़ाती रही और कहती रही कि इसमें कहां अश्लीलता है, लेकिन निहंग नहीं माने। आखिर में भाभी चुम्मेवाली ने निहंगों को लिखकर दिया और माफी मांगी कि वह भविष्य में ऐसा नहीं बोलेंगी। रंजीत कौर के घर निहंग सिंह पहुंचे। उन्होंने वहां रंजीत कौर को काफी डांट लगाई। निहंग जत्थे और भाभी चुम्मेवाली के बीच हुई बहस… सोशल मीडिया पर गंद परोस रहे: बठिंडा से आए निहंग जत्थे के मुखी मनप्रीत सिंह खालसा का कहना है कि रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली के नाम से सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो डाल रही हैं। उन्हें कई बार समझाया, लेकिन वह नहीं मानीं। मजबूर होकर हमें बठिंडा से लुधियाना आना पड़ा। घर के बाहर चला 15 मिनट ड्रामा: निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा और उनका जत्था रंजीत कौर के घर पहुंचा। जत्थे ने घर के बाहर और अंदर जाकर भाभी चुम्मेवाली को उसकी हरकतों का आईना दिखाया। करीब 15 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच तीखी और गंभीर बातचीत हुई। पाखंड पर निहंग सिंह का कड़ा रुख: निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा ने घर के अंदर बने मंदिर को देखकर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि एक तरफ तो घर में धार्मिक आस्था के प्रतीक मौजूद हैं और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर सरेआम गंदगी और अश्लीलता परोसी जा रही है। उन्होंने रंजीत कौर को फटकार लगाते हुए कहा कि धर्म के नाम पर ऐसा पाखंड और समाज में ऐसी फूहड़ता सिख कौम और समाज बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। अश्लीलता क्या है, इससे अपना पेट पाल रही: रंजीत कौर ने निहंग सिंहों को कहा कि सोशल मीडिया पर लोग अश्लील कपड़े पहनकर व अश्लील बातें बोलकर रील्स डाल रहे हैं। वो तो सिर्फ तुकबंदी करती है और लोग उसे पसंद करते हैं। तुकबंदी में अश्लीलता नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह की रील बनाकर वह अपना पेट पाल रही हैं। अगर यह अश्लील होता तो वह अपनी बेटी के साथ ऐसी वीडियो नहीं बनाती। रंजीत कौर ने निहंगों से हाथ जोड़कर माफी मांगी। रंजीत कौर के तर्क पर भड़के निहंग: निहंगों ने जब रंजीत कौर के तर्क सुने तो वह भड़क गए और उन्होंने उन्हें दो टूक कह दिया कि अगर अब ऐसे तुकबंदी की तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उनका कहना है कि ऐसी गंदी रील्स से सोसाइटी पर गलत असर पड़ रहा है। मनप्रीत सिंह खालसा ने साफ शब्दों में हिदायत दी कि पैसों के लिए समाज की इज्जत और युवा पीढ़ी का भविष्य नीलाम नहीं किया जा सकता। उन्होंने रंजीत कौर को अल्टीमेटम दिया कि वह इंटरनेट से अपने सभी विवादित और अश्लील वीडियो तुरंत प्रभाव से डिलीट कर दे। अगर भविष्य में दोबारा ऐसी कोई हरकत की गई या वैसी कोई रील सामने आई, तो उसे इसके बेहद गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। सिखों को एक लिखित माफीनामा सौंप दिया: निहंगों ने रंजीत कौर से माफीनामा लिखवाया। इस माफीनामे में उसने स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह भविष्य में कभी भी सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी फूहड़ या अश्लील गतिविधि नहीं करेगी और न ही कोई ऐसा वीडियो अपलोड करेंगी, जिससे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचे। लिखित में गारंटी मिलने और इंटरनेट से विवादित सामग्री हटाने के वादे के बाद निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा का जत्था वहां से लौटा। रंजीत कौर ने निहंगों को लिखित में दिया कि वह अब अश्लील कंटेंट नहीं बनाएंगी। रंजीत कौर से भाभी चुम्मे वाली तक का सफर, जानिए… सोशल मीडिया पर रील्स बनाने लगी: कोरोना काल में लुधियाना की रंजीत कौर ने सोशल मीडिया पर रील्स बनानी शुरू की। वह कॉमेडी रील्स बना रही थीं, लेकिन उसे कोई पसंद नहीं कर रहा था। वह काफी रील्स बना चुकी थीं, लेकिन रील वायरल नहीं हुई। रील में एक फॉलोअर को फ्लाइंग किश किया: रंजीत कौर का कहना है कि वह रील्स बना रही थीं, तो एक फॉलोअर को रील में उसका नाम लेकर फ्लाइंग किश किया तो कॉमेंट में लोगों ने भाभी चुम्मेवाली लिखना शुरू कर दिया। उसके बाद माइंड में आया कि इसी को अपना टैग बना देती हूं। उसके बाद शुरू की तुकबंदी: रंजीत कौर ने फिर अपने नाम के साथ भाभी चुम्मेवाली का टैग लगा दिया और फिर उसने रील्स बनाते हुए फॉलोअर्स के नाम लेकर तुकबंदी करनी शुरू कर दी। उसके बाद लोगों ने उसे बहुत पसंद किया। शूटिंग के दौरान दिलजीत दोसांझ के साथ खड़ी रंजीत कौर। दिलजीत दोसांझ की फिल्म में मिला काम: रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली का कहना है कि जब लोगों ने उसकी रील्स को पसंद किया तो फिर दिलजीत दोसांझ ने उन्हें अपनी फिल्म जट एंड जूलियट-3 में एक छोटा सा रोल दिया। उसके बाद वह बहुत फेमस हो गईं। दिलजीत पर भी तुकबंदी की थी: रंजीत कौर का कहना है कि जो तुकबंदी वह अपने फॉलोअर्स का नाम लेकर करती हैं, वही तुकबंदी उन्होंने दिलजीत दोसांझ के लिए भी की थी। जब उन्होंने दिलजीत दोसांझ को आई लव यू बोला तो उन्होंने भी रिप्लाई में आई लव यू बोलकर गले लगाया। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… निहंग की हत्या, फिर सुसाइड की कोशिश, गुरदासपुर में 2 पक्षों में 15 राउंड फायरिंग गुरदासपुर के बटाला में गाड़ी क्रॉस करने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। बहसबाजी के दौरान दोनों ओर से

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

10 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

30 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…