World News Updates; US Iran Israel Pakistan Breaking NewsFrance Social Media Ban

5 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसके साथ ही फ्रांस ऐसा कानून बनाने वाला EU का पहला देश बन गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बिल का समर्थन किया है और इसे सितंबर से लागू करने की तैयारी है। कानून लागू कराने की जिम्मेदारी डिजिटल रेगुलेटर Arcom की होगी। हालांकि, बच्चों की उम्र की जांच कैसे होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फ्रांस के बाद ब्रिटेन, स्पेन, ग्रीस और डेनमार्क भी सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम उम्र तय करने की तैयारी में हैं। फ्रांस के कई माता-पिता ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ किशोरों को एजुकेशनल कंटेंट और दोस्तों से संपर्क प्रभावित होने की चिंता है। शिक्षा मंत्री और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी कहा है कि सिर्फ बैन काफी नहीं होगा, बच्चों को डिजिटल दुनिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
NCERT Class 8 Social Science Book Revised

Hindi News Career NCERT Class 8 Social Science Book Revised | Judiciary Chapter Updated After SC Directive 7 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8वीं की सोशल साइंस (भाग-2) की संशोधित किताब जारी कर दी है। इस किताब का नाम Exploring Society: India and Beyond है। यह इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थव्यवस्था जैसे सब्जेक्ट को इंटीग्रेटेड रूप में प्रस्तुत करती है। यह वही किताब है जिसे 23 फरवरी को जारी किया गया था। इसे न्यायपालिका से जुड़े विवादित कंटेंट के कारण वापस लिया गया था। अब नए एडिशन में न्यायपालिका पर लिखे गए पूरे चैप्टर को दोबारा तैयार किया गया है। इस किताब की ऑफलाइन बिक्री 24 फरवरी से बंद कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा तैयार हुई किताब इस किताब से संबंधित सुनवाई के दौरान NCERT ने अदालत से माफी मांगी और स्वीकार किया कि किताब में कुछ गलत कंटेंट शामिल हो गए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने किताब के प्रिंट और डिजिटल दोनों एडिशन के डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी थी। साथ ही संबंधित चैप्टर को दोबारा लिखने का निर्देश दिया था। अब उसी आदेश के बाद संशोधित किताब पब्लिश की गई है। किताब से इन हिस्सों को हटाया नई किताब में “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक वाले चैप्टर को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है। पहले जहां न्यायपालिका की चुनौतियों, मामलों के लंबित रहने और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र था, वहीं अब इन सभी हिस्सों को हटा दिया गया है। इसके स्थान पर अब संविधान की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, न्याय तक आम लोगों की पहुंच, जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution) जैसी व्यवस्थाओं को विस्तार से समझाया गया है। उदाहरण से समझाई जनहित याचिका नई किताब में पहली बार जनहित याचिका (Public Interest Litigation) को विस्तार से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत आम जनता के हित में अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। छात्रों को उदाहरण के तौर पर हुसैनारा खातून केस, जिसमें विचाराधीन कैदियों की रिहाई का रास्ता खुला, एम.सी. मेहता के पर्यावरण से जुड़े मामले और विशाखा निर्णय, जिसने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ दिशा-निर्देश तय किए, के बारे में भी जानकारी दी गई है। एक्सपर्ट कमेटी ने दोबारा लिखा पूरा चैप्टर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए शिक्षा मंत्रालय की ओर से एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई। उसमें न्यायपालिका वाले पूरे चैप्टर को दोबारा लिया गया। 3 एक्सपर्ट्स के नाम हटाए गए पुरानी किताब तैयार करने वाली टीम में 51 एक्सपर्ट्स के नाम शामिल थे, लेकिन संशोधित एडिशन में केवल 48 नाम हैं। इसमें मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के नाम हटा दिए गए हैं। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि पाठ्यपुस्तक तैयार करना सामूहिक प्रक्रिया होती है और किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पहले दिए गए अपने आदेश में भी संशोधन किया था। विवाद के बाद सरकार ने किए कई बड़े बदलाव इस पूरे विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह को भी शामिल किया गया। साथ ही नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के प्रमुख को भी न्यायपालिका से जुड़े स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा प्रक्रिया में जोड़ा गया। दूसरी ओर NCERT ने भी अपनी पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली कमेटी का पुनर्गठन किया। साथ ही किताबों के अप्रूवल, पब्लिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन की प्रक्रिया में बदलाव किए। NCERT की पुरानी सोशल साइंस पार्ट – 2 को क्यों हटाया गया : NCERT ने 23 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। जज आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल कोर्ट में उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है, बल्कि कोर्च के बाहर उनके आचरण को भी तय करती है। किताब के एक सेक्शन का टाइटल ‘Justice delayed is justice denied’ है। इसका मतलब है- इंसाफ में देरी इंसाफ न मिलने जैसा है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्स को बदलकर नए टॉपिक्स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। ये खबर भी पढ़ें RRB ग्रुप D रिजल्ट के इंतजार में बने मीम्स:रेलवे भर्ती बोर्ड ने रिजल्ट किया जारी, 1 करोड़ उम्मीदवारों ने दी थी परीक्षा रेलवे भर्ती बोर्ड RRB की ओर से RRB Group D रिजल्ट एग्जाम होने के 5 महीने बाद आज जारी कर दिया गया है। रिजल्ट के साथ जोन वाइज ग्रुप डी कटऑफ भी घोषित किया गया है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाकर रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक NCERT ने गुरुवार को क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया है। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। हालांकि, इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, लेकिन ‘सॉवरेन’ (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी), ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), ‘डेमोक्रेटिक’ (लोकतांत्रिक) और ‘रिपब्लिक’ (गणराज्य) जैसे शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र 25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण। किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। 1976 में संविधान में सेकुलर शब्द जुड़ा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल के समय किए गए 42वें संविधान संशोधन (1976) के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘सेकुलर’ (पंथनिरपेक्ष), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘इंटीग्रिटी’ (अखंडता) जोड़े गए थे। किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई। किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई। लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं। NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है। मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है। किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है। पीएम मोदी ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस कहा NCERT की किताब में चुनाव आयोग की तारीफ कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की बुक में देश के चुनाव आयोग (ECI) की भी तारीफ की गई है। बुक में कहा गया है कि भारत में चुनाव कराना दुनिया के सबसे बड़े कामों में से एक है। इसके बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश करता है। नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 1’ के ‘इलेक्शंस’ चैप्टर में बताया गया है कि 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा वोटर थे। इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराना आसान नहीं है, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं। किताब में कहा गया है कि इतने बड़े देश में चुनाव कराना अपने आप में चुनौती है। इसके अलावा फेक न्यूज, गलत जानकारी फैलाना और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इनसे निपटने के लिए चुनाव आयोग RPA कानून, आदर्श आचार संहिता, EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियानों का इस्तेमाल करता है। किताब में कहा गया है कि सिर्फ चुनाव आयोग के प्रयास काफी नहीं हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिए लोगों की जागरूकता और भागीदारी भी जरूरी है। नागरिक जितने सतर्क रहेंगे, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा। चैप्टर में कहा गया है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। वे अलग-अलग नीतियां और योजनाएं लोगों के सामने रखते हैं, जिससे मतदाता अपनी पसंद का फैसला कर सकते हैं। छात्रों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में जीतने वाले गठबंधनों का अध्ययन करने के लिए भी कहा गया है। …………………… यह खबर भी पढ़ें… मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
NCERT Emergency 1975-77 । Class 9th Social Science Book syllabus NEP 2020

Hindi News National NCERT Emergency 1975 77 । Class 9th Social Science Book Syllabus NEP 2020 नई दिल्ली1 मिनट पहले कॉपी लिंक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 मई 1975 को देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी। NCERT यानी नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में 1975-77 की इमरजेंसी को शामिल किया है। नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इमरजेंसी को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि कक्षा 9 की किताब में पहली बार इमरजेंसी पर अलग सेक्शन जोड़ा गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब देश ने हाल ही में इमरजेंसी लागू होने के 50 साल पूरे होने को याद किया है। किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई। किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई। जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र 25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण। किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए। पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है। लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं। NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है। लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है। मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है। भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है। किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है। …………………… यह खबर भी पढ़ें… मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Ludhiana Nihang Protest Social Media Video Controversy

रंजीत कौर ने दिलजीत दोसांझ के साथ उनकी फिल्म जट एंड जूलियट 3 में काम किया है। पंजाबी सिंगर एवं एक्टर दिलजीत दोसांझ के साथ फिल्म जट एंड जूलियट-3 में काम कर चुकीं रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली सोशल मीडिया पर अपनी रील्स को लेकर विवाद में हैं। . हर रील के अंत में आंख मारते हुए वह किसी न किसी का नाम लेकर आई लव यू बोलती हैं और फ्लाइंग किस करते हुए कहती हैं, ‘वीरवार है या जुम्मां ले, चक्क भाभी दा चुम्मा’। रंजीत कौर भाभी की यही तुकबंदी अब उनके लिए परेशानी का सबब बन रही है। रंजीत कौर की इस तुकबंदी पर निहंगों ने आपत्ति जताते हुए उनके घर पर धावा बोल दिया। बठिंडा से लुधियाना आए निहंग जत्थे ने उन्हें सख्त चेतावनी दी कि इस तरह की तुकबंदी और अश्लीलता वाली रील सोशल मीडिया पर डाली तो इसके परिणाम खतरनाक होंगे। भाभी चुम्मेवाली निहंगों के सामने गिड़गिड़ाती रही और कहती रही कि इसमें कहां अश्लीलता है, लेकिन निहंग नहीं माने। आखिर में भाभी चुम्मेवाली ने निहंगों को लिखकर दिया और माफी मांगी कि वह भविष्य में ऐसा नहीं बोलेंगी। रंजीत कौर के घर निहंग सिंह पहुंचे। उन्होंने वहां रंजीत कौर को काफी डांट लगाई। निहंग जत्थे और भाभी चुम्मेवाली के बीच हुई बहस… सोशल मीडिया पर गंद परोस रहे: बठिंडा से आए निहंग जत्थे के मुखी मनप्रीत सिंह खालसा का कहना है कि रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली के नाम से सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो डाल रही हैं। उन्हें कई बार समझाया, लेकिन वह नहीं मानीं। मजबूर होकर हमें बठिंडा से लुधियाना आना पड़ा। घर के बाहर चला 15 मिनट ड्रामा: निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा और उनका जत्था रंजीत कौर के घर पहुंचा। जत्थे ने घर के बाहर और अंदर जाकर भाभी चुम्मेवाली को उसकी हरकतों का आईना दिखाया। करीब 15 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच तीखी और गंभीर बातचीत हुई। पाखंड पर निहंग सिंह का कड़ा रुख: निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा ने घर के अंदर बने मंदिर को देखकर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि एक तरफ तो घर में धार्मिक आस्था के प्रतीक मौजूद हैं और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर सरेआम गंदगी और अश्लीलता परोसी जा रही है। उन्होंने रंजीत कौर को फटकार लगाते हुए कहा कि धर्म के नाम पर ऐसा पाखंड और समाज में ऐसी फूहड़ता सिख कौम और समाज बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। अश्लीलता क्या है, इससे अपना पेट पाल रही: रंजीत कौर ने निहंग सिंहों को कहा कि सोशल मीडिया पर लोग अश्लील कपड़े पहनकर व अश्लील बातें बोलकर रील्स डाल रहे हैं। वो तो सिर्फ तुकबंदी करती है और लोग उसे पसंद करते हैं। तुकबंदी में अश्लीलता नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह की रील बनाकर वह अपना पेट पाल रही हैं। अगर यह अश्लील होता तो वह अपनी बेटी के साथ ऐसी वीडियो नहीं बनाती। रंजीत कौर ने निहंगों से हाथ जोड़कर माफी मांगी। रंजीत कौर के तर्क पर भड़के निहंग: निहंगों ने जब रंजीत कौर के तर्क सुने तो वह भड़क गए और उन्होंने उन्हें दो टूक कह दिया कि अगर अब ऐसे तुकबंदी की तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उनका कहना है कि ऐसी गंदी रील्स से सोसाइटी पर गलत असर पड़ रहा है। मनप्रीत सिंह खालसा ने साफ शब्दों में हिदायत दी कि पैसों के लिए समाज की इज्जत और युवा पीढ़ी का भविष्य नीलाम नहीं किया जा सकता। उन्होंने रंजीत कौर को अल्टीमेटम दिया कि वह इंटरनेट से अपने सभी विवादित और अश्लील वीडियो तुरंत प्रभाव से डिलीट कर दे। अगर भविष्य में दोबारा ऐसी कोई हरकत की गई या वैसी कोई रील सामने आई, तो उसे इसके बेहद गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। सिखों को एक लिखित माफीनामा सौंप दिया: निहंगों ने रंजीत कौर से माफीनामा लिखवाया। इस माफीनामे में उसने स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह भविष्य में कभी भी सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी फूहड़ या अश्लील गतिविधि नहीं करेगी और न ही कोई ऐसा वीडियो अपलोड करेंगी, जिससे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचे। लिखित में गारंटी मिलने और इंटरनेट से विवादित सामग्री हटाने के वादे के बाद निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा का जत्था वहां से लौटा। रंजीत कौर ने निहंगों को लिखित में दिया कि वह अब अश्लील कंटेंट नहीं बनाएंगी। रंजीत कौर से भाभी चुम्मे वाली तक का सफर, जानिए… सोशल मीडिया पर रील्स बनाने लगी: कोरोना काल में लुधियाना की रंजीत कौर ने सोशल मीडिया पर रील्स बनानी शुरू की। वह कॉमेडी रील्स बना रही थीं, लेकिन उसे कोई पसंद नहीं कर रहा था। वह काफी रील्स बना चुकी थीं, लेकिन रील वायरल नहीं हुई। रील में एक फॉलोअर को फ्लाइंग किश किया: रंजीत कौर का कहना है कि वह रील्स बना रही थीं, तो एक फॉलोअर को रील में उसका नाम लेकर फ्लाइंग किश किया तो कॉमेंट में लोगों ने भाभी चुम्मेवाली लिखना शुरू कर दिया। उसके बाद माइंड में आया कि इसी को अपना टैग बना देती हूं। उसके बाद शुरू की तुकबंदी: रंजीत कौर ने फिर अपने नाम के साथ भाभी चुम्मेवाली का टैग लगा दिया और फिर उसने रील्स बनाते हुए फॉलोअर्स के नाम लेकर तुकबंदी करनी शुरू कर दी। उसके बाद लोगों ने उसे बहुत पसंद किया। शूटिंग के दौरान दिलजीत दोसांझ के साथ खड़ी रंजीत कौर। दिलजीत दोसांझ की फिल्म में मिला काम: रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली का कहना है कि जब लोगों ने उसकी रील्स को पसंद किया तो फिर दिलजीत दोसांझ ने उन्हें अपनी फिल्म जट एंड जूलियट-3 में एक छोटा सा रोल दिया। उसके बाद वह बहुत फेमस हो गईं। दिलजीत पर भी तुकबंदी की थी: रंजीत कौर का कहना है कि जो तुकबंदी वह अपने फॉलोअर्स का नाम लेकर करती हैं, वही तुकबंदी उन्होंने दिलजीत दोसांझ के लिए भी की थी। जब उन्होंने दिलजीत दोसांझ को आई लव यू बोला तो उन्होंने भी रिप्लाई में आई लव यू बोलकर गले लगाया। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… निहंग की हत्या, फिर सुसाइड की कोशिश, गुरदासपुर में 2 पक्षों में 15 राउंड फायरिंग गुरदासपुर के बटाला में गाड़ी क्रॉस करने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। बहसबाजी के दौरान दोनों ओर से
UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027
10 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027
30 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Social media ban may soon be imposed in Britain

लंदन2 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑस्ट्रेलिया पहले ही इस तरह का कानून लागू कर चुका है, जबकि कनाडा और यूरोपीय संघ भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। – प्रतीकात्मक फोटो ब्रिटेन की कीर स्टार्मर सरकार 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि 18 जून को मेकरफील्ड उपचुनाव से पहले इस संबंध में घोषणा की जा सकती है। यह कदम ऐसे समय पर चर्चा में है, जब सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें हैं और ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को पार्टी का संभावित भविष्य का नेता माना जा रहा है। इसके तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की पहुंच सीमित की जा सकती है। हालांकि वॉट्सएप जैसी मैसेजिंग सेवाओं और यूट्यूब किड्स जैसे शैक्षणिक प्लेटफॉर्म को छूट मिल सकती है। सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर वैश्विक स्तर पर भी बहस तेज है। ऑस्ट्रेलिया पहले ही इस तरह का कानून लागू कर चुका है, जबकि कनाडा और यूरोपीय संघ भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मार्च में यूगॉव के सर्वे में 76% ब्रिटिश नागरिकों ने ऐसे प्रतिबंध का समर्थन किया था, जो प्रमुख यूरोपीय देशों में सबसे अधिक समर्थन माना गया। लेबर नेता एंडी बर्नहैम का कहना है कि सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने का समय आ गया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
social media reels likes addiction spoiling youth mental health dr sanjeev bagai tips

Last Updated:May 21, 2026, 19:31 IST Social Media Mental Health Impact: डिजिटल दुनिया की चकाचौंध भारतीय युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. मशहूर डॉक्टर संजीव बगई ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की लत के चलते युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और अनिद्रा जैसी गंभीर समस्याएं पैर पसार रही हैं. साथ ही आपसी रिश्तों में भी कड़वाहट आ रही है. इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने सरकार से सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा तय करने और सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को इस चक्रव्यूह से निकालने में माता-पिता और स्कूलों को आगे आना होगा. दिल्ली: भारत में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. डिप्रेशन, एंग्जायटी और क्रॉनिक स्ट्रेस जैसी परेशानियां अब केवल उदासी या मूड स्विंग्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं की सेहत, पढ़ाई, रिश्तों और भविष्य पर गहरा असर डाल रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह क्या है. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की डॉ.संजीव बगई से. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बताया. सोशल मीडिया की लत बन रही बड़ी समस्याडॉ. संजीव बगई के मुताबिक, किशोर, युवा और खासकर युवा महिलाएं सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिता रही हैं. उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज में सामने आया है कि 80% से ज्यादा किशोर सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी इस लत का शिकार बनती जा रही है. डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) का तेज उछाल पैदा करता है. जिसे हैप्पी हार्मोन कहा जाता है. यही वजह है कि बार-बार फोन चेक करने और रील्स देखने की आदत बन जाती है. दिमाग और दिल दोनों पर पड़ रहा असरडॉ. बगई ने बताया कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से दिमाग और शरीर दोनों प्रभावित होते हैं. खासकर रात में सोने से पहले घंटों तक मोबाइल चलाना सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है.उनके मुताबिक, इससे एंग्जायटी और पैनिक अटैक बढ़ सकते हैं याददाश्त कमजोर हो सकती है पढ़ाई और ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है लोगों से बातचीत और रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है लगातार खराब नींद से शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाता है. रील्स की दुनिया में बच्चे खो रहे असली दुनियाडॉ. संजीव बगई का मानना है कि कम उम्र में बच्चे सोशल मीडिया के जरिए एक अवास्तविक दुनिया Unreal World में जीने लगते हैं. लाइक्स, फॉलोअर्स और वायरल होने की दौड़ बच्चों पर मानसिक दबाव बनाती है. इससे वे अपने असली लक्ष्य, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियों से भटक सकते हैं.उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि जिंदगी सिर्फ रील्स, पोस्ट और लाइक्स तक सीमित नहीं है. भारत में उम्र सीमा तय करने की वकालतडॉ. बगई ने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ देशों में किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र सीमा तय की गई है. उनका मानना है कि भारत में भी 15–16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कुछ प्रतिबंध या सख्त नियम होने चाहिए, ताकि बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर कम हो. माता-पिता और स्कूल की अहम भूमिकाडॉ. बगई ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माता-पिता और स्कूलों की भी बड़ी जिम्मेदारी है. अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और सही मूल्य सिखाने चाहिए. वहीं स्कूलों में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर अलग अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शुरुआत से ही इसके फायदे और नुकसान समझ सकें. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi
Funny Memes Flood Social Media

6 मिनट पहले कॉपी लिंक NEET UG 2026 रीएग्जाम अब 21 जून को आयोजित किया जाएगा। शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी है कि एग्जाम के एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी होंगे। किसी भी कैंडिडेट को इसके लिए वापस से रजिस्टर या एग्जाम फीस नहीं देना होगा। दोबारा से सभी के लिए एडमिट कार्ड जारी होगा। कैंडिडेट्स को पिछले सेंटर ही एलॉट होंगे। शिक्षामंत्री के ऐलान के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। NEET के एग्जाम कैंसिलेशन पर ये मीम खूब शेयर हो रहे ————————— ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक- ‘गेस पेपर’ बनाकर 10 राज्यों में बेचा:120+ सवाल हूबहू मिले, परीक्षा से 3 सप्ताह पहले माफियाओं के पास पहुंचा पेपर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) के रद्द होने के पीछे की असली कहानी सामने आ गई है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








