Thursday, 17 Sep 2026 | 03:59 AM

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Ludhiana Nihang Protest Social Media Video Controversy

Ludhiana Nihang Protest Social Media Video Controversy

रंजीत कौर ने दिलजीत दोसांझ के साथ उनकी फिल्म जट एंड जूलियट 3 में काम किया है। पंजाबी सिंगर एवं एक्टर दिलजीत दोसांझ के साथ फिल्म जट एंड जूलियट-3 में काम कर चुकीं रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली सोशल मीडिया पर अपनी रील्स को लेकर विवाद में हैं। . हर रील के अंत में आंख मारते हुए वह किसी न किसी का नाम लेकर आई लव यू बोलती हैं और फ्लाइंग किस करते हुए कहती हैं, ‘वीरवार है या जुम्मां ले, चक्क भाभी दा चुम्मा’। रंजीत कौर भाभी की यही तुकबंदी अब उनके लिए परेशानी का सबब बन रही है। रंजीत कौर की इस तुकबंदी पर निहंगों ने आपत्ति जताते हुए उनके घर पर धावा बोल दिया। बठिंडा से लुधियाना आए निहंग जत्थे ने उन्हें सख्त चेतावनी दी कि इस तरह की तुकबंदी और अश्लीलता वाली रील सोशल मीडिया पर डाली तो इसके परिणाम खतरनाक होंगे। भाभी चुम्मेवाली निहंगों के सामने गिड़गिड़ाती रही और कहती रही कि इसमें कहां अश्लीलता है, लेकिन निहंग नहीं माने। आखिर में भाभी चुम्मेवाली ने निहंगों को लिखकर दिया और माफी मांगी कि वह भविष्य में ऐसा नहीं बोलेंगी। रंजीत कौर के घर निहंग सिंह पहुंचे। उन्होंने वहां रंजीत कौर को काफी डांट लगाई। निहंग जत्थे और भाभी चुम्मेवाली के बीच हुई बहस… सोशल मीडिया पर गंद परोस रहे: बठिंडा से आए निहंग जत्थे के मुखी मनप्रीत सिंह खालसा का कहना है कि रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली के नाम से सोशल मीडिया पर अश्लील वीडियो डाल रही हैं। उन्हें कई बार समझाया, लेकिन वह नहीं मानीं। मजबूर होकर हमें बठिंडा से लुधियाना आना पड़ा। घर के बाहर चला 15 मिनट ड्रामा: निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा और उनका जत्था रंजीत कौर के घर पहुंचा। जत्थे ने घर के बाहर और अंदर जाकर भाभी चुम्मेवाली को उसकी हरकतों का आईना दिखाया। करीब 15 मिनट तक दोनों पक्षों के बीच तीखी और गंभीर बातचीत हुई। पाखंड पर निहंग सिंह का कड़ा रुख: निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा ने घर के अंदर बने मंदिर को देखकर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि एक तरफ तो घर में धार्मिक आस्था के प्रतीक मौजूद हैं और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर सरेआम गंदगी और अश्लीलता परोसी जा रही है। उन्होंने रंजीत कौर को फटकार लगाते हुए कहा कि धर्म के नाम पर ऐसा पाखंड और समाज में ऐसी फूहड़ता सिख कौम और समाज बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा। अश्लीलता क्या है, इससे अपना पेट पाल रही: रंजीत कौर ने निहंग सिंहों को कहा कि सोशल मीडिया पर लोग अश्लील कपड़े पहनकर व अश्लील बातें बोलकर रील्स डाल रहे हैं। वो तो सिर्फ तुकबंदी करती है और लोग उसे पसंद करते हैं। तुकबंदी में अश्लीलता नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह की रील बनाकर वह अपना पेट पाल रही हैं। अगर यह अश्लील होता तो वह अपनी बेटी के साथ ऐसी वीडियो नहीं बनाती। रंजीत कौर ने निहंगों से हाथ जोड़कर माफी मांगी। रंजीत कौर के तर्क पर भड़के निहंग: निहंगों ने जब रंजीत कौर के तर्क सुने तो वह भड़क गए और उन्होंने उन्हें दो टूक कह दिया कि अगर अब ऐसे तुकबंदी की तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उनका कहना है कि ऐसी गंदी रील्स से सोसाइटी पर गलत असर पड़ रहा है। मनप्रीत सिंह खालसा ने साफ शब्दों में हिदायत दी कि पैसों के लिए समाज की इज्जत और युवा पीढ़ी का भविष्य नीलाम नहीं किया जा सकता। उन्होंने रंजीत कौर को अल्टीमेटम दिया कि वह इंटरनेट से अपने सभी विवादित और अश्लील वीडियो तुरंत प्रभाव से डिलीट कर दे। अगर भविष्य में दोबारा ऐसी कोई हरकत की गई या वैसी कोई रील सामने आई, तो उसे इसके बेहद गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। सिखों को एक लिखित माफीनामा सौंप दिया: निहंगों ने रंजीत कौर से माफीनामा लिखवाया। इस माफीनामे में उसने स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह भविष्य में कभी भी सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी फूहड़ या अश्लील गतिविधि नहीं करेगी और न ही कोई ऐसा वीडियो अपलोड करेंगी, जिससे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचे। लिखित में गारंटी मिलने और इंटरनेट से विवादित सामग्री हटाने के वादे के बाद निहंग सिंह मनप्रीत सिंह खालसा का जत्था वहां से लौटा। रंजीत कौर ने निहंगों को लिखित में दिया कि वह अब अश्लील कंटेंट नहीं बनाएंगी। रंजीत कौर से भाभी चुम्मे वाली तक का सफर, जानिए… सोशल मीडिया पर रील्स बनाने लगी: कोरोना काल में लुधियाना की रंजीत कौर ने सोशल मीडिया पर रील्स बनानी शुरू की। वह कॉमेडी रील्स बना रही थीं, लेकिन उसे कोई पसंद नहीं कर रहा था। वह काफी रील्स बना चुकी थीं, लेकिन रील वायरल नहीं हुई। रील में एक फॉलोअर को फ्लाइंग किश किया: रंजीत कौर का कहना है कि वह रील्स बना रही थीं, तो एक फॉलोअर को रील में उसका नाम लेकर फ्लाइंग किश किया तो कॉमेंट में लोगों ने भाभी चुम्मेवाली लिखना शुरू कर दिया। उसके बाद माइंड में आया कि इसी को अपना टैग बना देती हूं। उसके बाद शुरू की तुकबंदी: रंजीत कौर ने फिर अपने नाम के साथ भाभी चुम्मेवाली का टैग लगा दिया और फिर उसने रील्स बनाते हुए फॉलोअर्स के नाम लेकर तुकबंदी करनी शुरू कर दी। उसके बाद लोगों ने उसे बहुत पसंद किया। शूटिंग के दौरान दिलजीत दोसांझ के साथ खड़ी रंजीत कौर। दिलजीत दोसांझ की फिल्म में मिला काम: रंजीत कौर भाभी चुम्मेवाली का कहना है कि जब लोगों ने उसकी रील्स को पसंद किया तो फिर दिलजीत दोसांझ ने उन्हें अपनी फिल्म जट एंड जूलियट-3 में एक छोटा सा रोल दिया। उसके बाद वह बहुत फेमस हो गईं। दिलजीत पर भी तुकबंदी की थी: रंजीत कौर का कहना है कि जो तुकबंदी वह अपने फॉलोअर्स का नाम लेकर करती हैं, वही तुकबंदी उन्होंने दिलजीत दोसांझ के लिए भी की थी। जब उन्होंने दिलजीत दोसांझ को आई लव यू बोला तो उन्होंने भी रिप्लाई में आई लव यू बोलकर गले लगाया। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… निहंग की हत्या, फिर सुसाइड की कोशिश, गुरदासपुर में 2 पक्षों में 15 राउंड फायरिंग गुरदासपुर के बटाला में गाड़ी क्रॉस करने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। बहसबाजी के दौरान दोनों ओर से

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

10 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

UK to Ban Social Media for Children Under 16, New Rules Expected by 2027

30 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी। बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है। ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है। अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ। 25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Social media ban may soon be imposed in Britain

Social media ban may soon be imposed in Britain

लंदन2 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑस्ट्रेलिया ‎पहले ही इस तरह का कानून लागू कर चुका है, ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎जबकि कनाडा और यूरोपीय संघ भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। – प्रतीकात्मक फोटो ब्रिटेन की कीर स्टार्मर सरकार 16 वर्ष से कम‎ आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर ‎‎प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही‎ है। माना जा रहा है कि 18 जून को मेकरफील्ड ‎‎उपचुनाव से पहले इस संबंध में घोषणा की जा ‎‎सकती है। यह कदम ऐसे समय पर चर्चा में है‎, ‎जब सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर स्टार्मर के ‎नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें हैं और ग्रेटर ‎‎मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को पार्टी का‎ संभावित भविष्य का नेता माना जा रहा है। इसके ‎तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ‎वेबसाइटों पर 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की‎ पहुंच सीमित की जा सकती है। हालांकि वॉट्सएप जैसी मैसेजिंग सेवाओं और यूट्यूब ‎किड्स जैसे शैक्षणिक प्लेटफॉर्म को छूट मिल ‎सकती है। सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर‎ वैश्विक स्तर पर भी बहस तेज है। ऑस्ट्रेलिया ‎पहले ही इस तरह का कानून लागू कर चुका है, ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎जबकि कनाडा और यूरोपीय संघ भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मार्च में यूगॉव के सर्वे में 76% ब्रिटिश नागरिकों ने ऐसे प्रतिबंध का समर्थन किया था, जो प्रमुख यूरोपीय देशों में सबसे अधिक‎ समर्थन माना गया। लेबर नेता एंडी बर्नहैम का ‎कहना है कि सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल ‎इंटेलिजेंस और बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित‎ करने का समय आ गया है।‎ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

social media reels likes addiction spoiling youth mental health dr sanjeev bagai tips

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Last Updated:May 21, 2026, 19:31 IST Social Media Mental Health Impact: डिजिटल दुनिया की चकाचौंध भारतीय युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही है. मशहूर डॉक्टर संजीव बगई ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया की लत के चलते युवाओं में डिप्रेशन, एंग्जायटी और अनिद्रा जैसी गंभीर समस्याएं पैर पसार रही हैं. साथ ही आपसी रिश्तों में भी कड़वाहट आ रही है. इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने सरकार से सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा तय करने और सख्त गाइडलाइंस बनाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को इस चक्रव्यूह से निकालने में माता-पिता और स्कूलों को आगे आना होगा. दिल्ली: भारत में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. डिप्रेशन, एंग्जायटी और क्रॉनिक स्ट्रेस जैसी परेशानियां अब केवल उदासी या मूड स्विंग्स तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं की सेहत, पढ़ाई, रिश्तों और भविष्य पर गहरा असर डाल रही हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह क्या है. इसी सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की डॉ.संजीव बगई से. उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बताया. सोशल मीडिया की लत बन रही बड़ी समस्याडॉ. संजीव बगई के मुताबिक, किशोर, युवा और खासकर युवा महिलाएं सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिता रही हैं. उन्होंने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय स्टडीज में सामने आया है कि 80% से ज्यादा किशोर सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में भी स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी इस लत का शिकार बनती जा रही है. डॉक्टर के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) का तेज उछाल पैदा करता है. जिसे हैप्पी हार्मोन कहा जाता है. यही वजह है कि बार-बार फोन चेक करने और रील्स देखने की आदत बन जाती है. दिमाग और दिल दोनों पर पड़ रहा असरडॉ. बगई ने बताया कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से दिमाग और शरीर दोनों प्रभावित होते हैं. खासकर रात में सोने से पहले घंटों तक मोबाइल चलाना सबसे ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है.उनके मुताबिक, इससे एंग्जायटी और पैनिक अटैक बढ़ सकते हैं याददाश्त कमजोर हो सकती है पढ़ाई और ध्यान लगाने की क्षमता कम हो सकती है नींद का पैटर्न बिगड़ सकता है लोगों से बातचीत और रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है लगातार खराब नींद से शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को नुकसान पहुंचाता है. रील्स की दुनिया में बच्चे खो रहे असली दुनियाडॉ. संजीव बगई का मानना है कि कम उम्र में बच्चे सोशल मीडिया के जरिए एक अवास्तविक दुनिया Unreal World में जीने लगते हैं. लाइक्स, फॉलोअर्स और वायरल होने की दौड़ बच्चों पर मानसिक दबाव बनाती है. इससे वे अपने असली लक्ष्य, करियर और सामाजिक जिम्मेदारियों से भटक सकते हैं.उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि जिंदगी सिर्फ रील्स, पोस्ट और लाइक्स तक सीमित नहीं है. भारत में उम्र सीमा तय करने की वकालतडॉ. बगई ने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ देशों में किशोरों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र सीमा तय की गई है. उनका मानना है कि भारत में भी 15–16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कुछ प्रतिबंध या सख्त नियम होने चाहिए, ताकि बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर कम हो. माता-पिता और स्कूल की अहम भूमिकाडॉ. बगई ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि माता-पिता और स्कूलों की भी बड़ी जिम्मेदारी है. अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए और सही मूल्य सिखाने चाहिए. वहीं स्कूलों में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर अलग अध्याय पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शुरुआत से ही इसके फायदे और नुकसान समझ सकें. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : East Delhi,Delhi

Funny Memes Flood Social Media

Funny Memes Flood Social Media

6 मिनट पहले कॉपी लिंक NEET UG 2026 रीएग्‍जाम अब 21 जून को आयोजित किया जाएगा। शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जानकारी दी है कि एग्‍जाम के एडमिट कार्ड 14 जून तक जारी होंगे। किसी भी कैंडिडेट को इसके लिए वापस से रजिस्टर या एग्जाम फीस नहीं देना होगा। दोबारा से सभी के लिए एडमिट कार्ड जारी होगा। कैंडिडेट्स को पिछले सेंटर ही एलॉट होंगे। शिक्षामंत्री के ऐलान के साथ ही सोशल मीडिया पर मीम्‍स की बाढ़ आ गई है। NEET के एग्जाम कैंसिलेशन पर ये मीम खूब शेयर हो रहे ————————— ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक- ‘गेस पेपर’ बनाकर 10 राज्यों में बेचा:120+ सवाल हूबहू मिले, परीक्षा से 3 सप्ताह पहले माफियाओं के पास पहुंचा पेपर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-2026) के रद्द होने के पीछे की असली कहानी सामने आ गई है। भास्कर को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Social Anxiety Reasons; Childhood Influences Vs Self-Esteem

Social Anxiety Reasons; Childhood Influences Vs Self-Esteem

Hindi News Lifestyle Social Anxiety Reasons; Childhood Influences Vs Self Esteem How To Improve It 6 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी उम्र 37 साल है। मैं एक गवर्नमेंट स्कूल में टीचर हूं। मेरी प्रॉब्लम थोड़ी अजीब है। मुझे हर वक्त ये डर लगता रहता है कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। अपने कपड़ों, लुक, बातचीत को लेकर हमेशा एक डर और शर्मिंदगी महसूस होती है। मैं लोगों के बीच इसलिए बहुत बात भी नहीं कर पाती। मुझे डर लगता रहता है कि वे मुझे जज करेंगे या मुझे मूर्ख समझेंगे। स्कूल में स्टाफ रूम में भी मैं इस डर से हमेशा चुप ही रहती हूं। मेरा बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां थोड़ी भी गलती करने पर बहुत डांट पड़ती थी और उससे भी ज्यादा शर्मिंदा किया जाता था। शादी के बाद ससुराल में भी मुझे हर वक्त ये डर लगा रहता था कि लोग मुझे जज कर रहे हैं। हालांकि यहां मुझे कभी किसी ने शर्मिंदा नहीं किया, लेकिन ये जजमेंट का डर, शर्म का एहसास मेरे मन से जाता नहीं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। हर इंसान चाहता है कि लोग उसे पसंद करें, लेकिन अगर यह चिंता हर वक्त मन में बनी रहे कि “लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे,” तो यह आत्मविश्वास और रिश्तों, दोनों को प्रभावित करने लगती है। बचपन की आलोचना मन में असुरक्षा पैदा कर सकती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि यह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सीखा हुआ डर है, जिसे सही समझ, छोटे-छोटे अभ्यास और सपोर्ट से बदला जा सकता है। आपके बचपन में ऐसा माहौल रहा, जहां गलती करने पर सिर्फ डांट ही नहीं पड़ती, बल्कि शर्मिंदा भी किया जाता था। ऐसे अनुभव धीरे-धीरे दिमाग में एक गहरा विश्वास बना देते हैं कि— “मैं अच्छी नहीं हूं” या “मुझसे गलती हुई तो लोग मुझे खराब समझेंगे।” यही वजह है कि अब बड़े होने के बाद भी, भले ही लोग आपको कुछ न कहें, लेकिन भीतर हमेशा ये एक डर बना रहता है कि लोग मुझे जज करेंगे। यह समस्या कैसे पैदा होती है? यह समस्या कैसे बनती और बनी रहती है, इसे समझने के लिए नीचे के पॉइंट्स देखें: 1. चाइल्डहुड बार-बार आलोचना होना और शर्मिंदा किया जाना। इससे अंदर यह सोच बैठ गई– “मुझे परफेक्ट होना पड़ेगा, नहीं तो मैं गलत हूं।” 2. थिंकिंग पैटर्न छोटी-सी गलती को बहुत बड़ा मान लेना। जैसे– “अगर मैं कुछ गलत बोल दूंगी, तो लोग मुझे मूर्ख समझेंगे।” यानी एक घटना से पूरे व्यक्तित्व के बारे में नतीजा निकाल लेना। 3. बिहेवियर लोगों के सामने कम बोलना। खुद को रोक लेना। बार-बार यह सोचना कि मैं कैसी दिख रही हूं। दूसरों से कन्फर्मेशन लेना। 4. इमोशंस हर समय हल्का डर बने रहना। खुद को लेकर असहज रहना। बिना वजह शर्म या झिझक महसूस होना। 5. समस्या का चक्र यह समस्या एक चक्र की तरह चलती है– आपको डर लगता है। इसलिए आप लोगों से बचते हैं। → इसलिए आपको पॉजिटिव एक्सपीरियंस नहीं मिलते। इस तरह आपका डर और मजबूत होता जाता है। आपकी मुख्य समस्या क्या है? सोशल एंग्जायटी लोगों के सामने जज किए जाने या गलत दिखने का डर। लो सेल्फ-इस्टीम खुद को कम समझना या खुद पर भरोसा कम होना। शर्मिंदगी की सोच अंदर से यह महसूस करना कि “मुझमें ही कुछ कमी है।” आसान शब्दों में पूरी बात समस्या यह नहीं है कि आप कमजोर हैं। असल में आपका दिमाग पुराने अनुभवों के हिसाब से आज भी प्रतिक्रिया दे रहा है। यानी आज की सिचुएशन सेफ है, लेकिन आपका दिमाग उसे पुराने खतरे जैसा ही मान रहा है। आप खुद को कितना पसंद करते हैं? करें सेल्फ एस्टीम एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 10 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 4 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब ‘पूर्ण असहमति’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘पूर्ण सहमति’ है तो 4 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। जिन सवालों के आगे R लिखा है, उनकी रिवर्स स्कोरिंग करें। सेल्फ इस्टीम कैसे बढ़ाएं चार हफ्तों का सेल्फ हेल्प प्लान सप्ताह 1 खुद को समझना और ध्यान से देखना लक्ष्य: अपने अंदर चलने वाली आलोचनात्मक आवाज को पहचानना और यह समझना कि शर्म/डर कहां से आ रहा है। एक्सरसाइज: सेल्फ–टॉक डायरी हर दिन 3 ऐसे मौके लिखें, जब आपको घबराहट या जज किए जाने का डर लगा– क्या वजह थी? उस समय आपने खुद से क्या कहा? वह सोच कितनी सच थी? सीख: धीरे-धीरे समझ में आएगा कि अंदर की “जज करने वाली आवाज” अक्सर माता-पिता या टीचर्स जैसी लगती है। प्रैक्टिस: रोज 10 मिनट धीरे-धीरे सांस लें या मेडिटेशन करें। खुद से कहें: “यह भावना मेरे अतीत की है, वर्तमान की नहीं।” सप्ताह 2 सोच बदलना और खुद का ख्याल रखना लक्ष्य: आलोचना की जगह एक सपोर्ट वाली आवाज बनाना। एक्सरसाइज 1: मिरर टॉक हर सुबह आईने में देखकर अपने बारे में एक अच्छी बात कहें। (जैसे: आपकी मेहनत, आपकी अच्छाई, या आपकी लुक्स) एक्सरसाइज 2: डर की सच्चाई जांचें जब मन में ये डर आए कि “लोग मुझे जज करेंगे” तो खुद से पूछें: मेरे पास इसका क्या सबूत है? क्या कोई दूसरा कारण भी हो सकता है? अगर कोई स्टूडेंट ऐसा महसूस करे तो मैं उसे क्या कहूंगी? सप्ताह 3 खुद पर भरोसा बनाना लक्ष्य: दूसरों की राय की बजाय अपनी सोच पर भरोसा करना। एक्सरसाइज 1: डेली सक्सेस लॉग हर दिन की 3 छोटी-छोटी सफलताएं लिखें। (जैसे: समय पर पहुंचना, अच्छा पढ़ाना, दोस्त से बात करना) एक्सरसाइज 2: ‘आय डिसाइड’ (मेरा फैसला) हर छोटी-छोटी चीज में खुद को याद दिलाएं कि– “मैं वही चुनती हूं, जो मुझे सही लगता है।” प्रैक्टिस: धीरे-धीरे एक्सपोजर बढ़ाएं। रोज स्टाफ रूम में एक छोटी लाइन बोलें। सप्ताह 4 काम करके आत्मविश्वास बढ़ाना लक्ष्य: छोटे-छोटे काम करके खुद को साबित करना कि आप सक्षम हैं। याद रखें: कॉन्फिडेंस सोचने से नहीं, करने से आता है। स्टेप 1: धीरे-धीरे बोलना सीखें रोज

Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

नई दिल्ली/कोलकाता4 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ED की रेड के बीच CM ममता बनर्जी के दखल को गलत बताया था। कोर्ट ने कहा- यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। किसी भी राज्य का सीएम ऐसा करता है तो यह लोकतंत्र को खतरे में डालना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

Bengal Govt Accuses BJP Social Media Weapon

नई दिल्ली/कोलकाता14 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर ED रेड के दौरान ममता पहुंच गई थीं। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन I-PAC रेड मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कल कहा था कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता। दरअसल 8 जनवरी को ED ने कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा था। इस दौरान ममता वहां पहुंचीं और कुछ फाइलें लेकर चली गईं। इसके बाद ED जांच में बाधा डालने के आरोप में ममता और बंगाल पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। ममता की 4 दलीलें ममता की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील रखी। उन्होंने कहा- ED को जांच करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ उनका काम है, अधिकार नहीं। ED का अधिकारी जब काम कर रहा है, तो वह सिर्फ ‘सरकारी कर्मचारी’ है। वह अपने विभाग से अलग किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकता। ED ने कहा कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ। ऐसा नहीं है, क्योंकि अधिकारी सिर्फ ड्यूटी निभा रहा है, मौलिक अधिकार का सवाल ही नहीं उठता। ईडी खुद एक ताकतवर एजेंसी है वह खुद को ‘जनता का रक्षक’ बताकर कोर्ट में नहीं आ सकती। सुप्रीम कोर्ट के 4 कमेंट यह असल में किसी एक व्यक्ति का काम है। इसे पूरे सिस्टम या लोकतंत्र का विवाद बताना सही नहीं। संविधान बनाते समय किसी ने नहीं सोचा होगा कि एक मुख्यमंत्री किसी जांच एजेंसी के दफ्तर में पहुंच जाएगा। सिर्फ कानूनी सिद्धांत से काम नहीं चलेगा। हमें जमीन की हकीकत भी देखनी होगी। संविधान की व्याख्या समय के साथ बदलती रहती है। हर नए हालात में कोर्ट को नए सिरे से सोचना पड़ता है। ऐसे समझें… तृणमूल के लिए I-PAC इतनी जरूरी क्यों 2021 के चुनाव में: ममता के लिए I-PAC ने रणनीति बनाई। उन्होंने फर्म को संगठन का काम दिया। प्रत्याशी चयन, बूथ लेवल मैनेजमेंट, भाषण, सोशल पोस्ट, पोस्टर, नारे सब कुछ I-PAC ही कर रही थी। इस चुनाव में: टीएमसी डेटा पर फोकस कर रही है। 2021 विस और 2024 लोकसभा चुनाव के बूथ स्तरीय आंकड़ों का विश्लेषण I-PAC ने ही किया। हर सीट को 3 कैटेगरी में बांटा: मजबूत, कमजोर और लो वोट मार्जिन। 15 हजार तक मार्जिन की सीटें चुनीं। टीम एसआईआर को भी ट्रैक कर रही है: पार्टी का मानना है कि वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटने से गणित बिगड़ सकता है, इसलिए शैडो एजेंट्स लाए गए। ये एजेंट्स नाम कटने वाले वोटरों तक पहुंचे: उनसे फार्म भरवाए, री-एंट्री करवाई। बीएलओ को ट्रैक करना, वोटर लिस्ट की गड़बड़ी पकड़ना, फील्ड से रियल टाइम इनपुट देना, ये काम शैडो एजेंट्स ही कर रहे थे। हर सीट पर अलग वॉर रूम है: जहां 20 सदस्यीय टीम काम करती है। छोटी बैठकें अरेंज करती है। I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Punjab Land Registry Bribe | Ex-Cricketer Claims 28 People Took Bribe; Social Media Account Suspende

Punjab Land Registry Bribe | Ex-Cricketer Claims 28 People Took Bribe; Social Media Account Suspende

पूर्व क्रिकेटर पुलकित ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रिश्वत मांगे जाने का खुलासा किया। पंजाब में जमीनों के रजिस्ट्रेशन अब ऑनलाइन होते हैं। सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री ऑनलाइन अपलोड की जाती है और वेरिफिकेशन के बाद खरीदार किसी सब रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर फोटो करवा सकता है। . सरकार के इस दावे की पोल पुलकित नाम के एक पूर्व क्रिकेटर ने खोली है। पुलकित ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट (X) पर लिखा कि पंजाब में एक जमीन खरीदी और उसकी रजिस्ट्री करवाई। रजिस्ट्री करवाने के लिए तहसीलदार समेत 28 लोगों को रिश्वत देनी पड़ी। पोस्ट के आखिर में उसने शेमफुल लिखा। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि पंजाब में उन्होंने कहां और कब जमीन खरीदी। पुलकित शर्मा ने पोस्ट में सुखबीर बादल, हरसिमरत बादल, आम आदमी पार्टी (AAP) और सीएम भगवंत मान को टैग किया। अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर बादल ने पुलकित शर्मा की पोस्ट को रीट्वीट भी किया और सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए। पुलकित की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने शेयर किया है। जब पोस्ट वायरल होने लगी तो 18 अप्रैल को पुलकित शर्मा का X अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया। पुलकित ने जिस अकाउंट से पोस्ट की थी, वह ब्लूटिक अकाउंट था। हालांकि, अभी इस पर सरकार की ओर से कोई रिएक्शन नहीं दिया गया है। उधर, AAP के सोशल मीडिया जालंधर के इंचार्ज प्रिंस शर्मा ने X हैंडल पर लिखा- यह नैरेटिव ज़ोर-शोर से फैलाया जा रहा है, लेकिन तथ्य इसका समर्थन नहीं करते। क्रिकेटर पुलकित शर्मा ने अपना X (ट्विटर) अकाउंट खुद डिलीट किया था- इसे सरकार ने ‘सस्पेंड’ नहीं किया था। पुलकित के एकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया है। उनकी यूजर आईडी सर्च करने पर अब यह दिखाई दे रहा है। वकील ने कहा चूक हुई तो फाइल अटक जाएगी पुलकित शर्मा ने पंजाब के सब रजिस्ट्रार दफ्तरों में चले नेक्सेस का पर्दाफाश किया है। उनका कहना है कि वकील ने रजिस्ट्री करवाने से पहले ही कह दिया था कि यहां अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग रेट हैं। सभी को देना पड़ेगा। अगर न दें तो वे फाइल अटका देंगे और आपकी रजिस्ट्री लेट होती जाएगी। फिर उन्हें सभी के हिस्से की रिश्वत तय फीस के साथ देनी पड़ी। पुलकित शर्मा ने खुद को बताया फॉर्मर नेशनल क्रिकेटर पुलकित शर्मा का X पर @Pulkits77 के नाम से एकाउंट था। एकाउंट की प्रोफाइल में उन्होंने खुद को फॉर्मर नेशनल क्रिक्रेटर लिखा। इनलाइन हॉकी के स्टेट गोल्ड मेडलिस्ट के अलावा खुद को विदेशी यूनिवर्सिटी से पोस्टग्रेजुएट बताया था। इसके अलावा उन्होंने खुद को फिटनेस, आईआर एंड टेक एक्सपर्ट लिखा है। पुलकित शर्मा कहां से क्रिकेट खेलते रहे, इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है। पुलकित शर्मा ने अपने X एकाउंट पर क्रिकेट में जीते मेडल और सर्टिफिकेट का यह फोटो पोस्ट कर रखा था। पुलकित ने ये 2 बातें लिखीं… हर किसी का अपना तय रेट: पुलकित शर्मा ने X पर लिखा- मैंने हाल ही में पंजाब में एक जमीन की रजिस्ट्री पूरी की है। तहसीलदार और 28 अन्य लोगों को जो रिश्वत हमें देनी पड़ी, उसकी रकम बहुत ज्यादा थी। वकील ने कहा कि हर किसी का अपना तय रेट है। अगर एक भी कदम चूक जाएं, तो आपकी फाइल अटक जाएगी। कानूनी चीज के लिए भी रिश्वत देनी पड़ी: पुलकित ने लिखा- मैंने जो जमीन खरीदी, वह पूरी तरह व्हाइट (कानूनी और पारदर्शी) है। इतनी पारदर्शी चीज के लिए भी मुझे पंजाब प्रशासन के भ्रष्ट लोगों को रिश्वत देनी पड़ी। पंजाब में निवेश करना जैसे अपराध बन गया है। शर्मनाक… 17 अप्रैल को पुलकित ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट लिखा था। सुखबीर बादल ने रीट्वीट किया अकाली दल के नेता वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया पर पुलकित का पोस्ट रीट्वीट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा- मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनके भ्रष्ट सहयोगियों पर लानत है। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पुलकित शर्मा को भी पंजाब में एक साफ-सुथरी जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए तहसीलदार और 28 अन्य लोगों को रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा- AAP के मंच पर किए जाने वाले ऑन-द-स्पॉट कार्रवाई के ड्रामे अब पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं। तय रेट, जानबूझकर देरी, फाइलों को जानबूझकर अटकाना, यही AAP का असली काम करने का तरीका है। यह गहराई तक फैली लूट निवेशकों को दूर भगा रही है और पंजाब के भविष्य को बर्बाद कर रही है। इसे तुरंत ठीक करें, वरना अपनी विफलता स्वीकार करें और इस्तीफा दें। सुखबीर बादल ने पुलकित के पोस्ट को रीट्वीट किया। पंजाब में रजिस्ट्री करवाने की यह प्रकिया पंजाब में जमीन खरीदने वाले को रेवेन्यू डिपार्टमेंट के पोर्टल पर पुरानी रजिस्ट्री, फर्द, बेचने वाले का आधार कार्ड, खरीदने वाले का आधार कार्ड, दो गवाहों के आधार कार्ड अपलोड करने होते हैं। इसके साथ एनआरसी भी अपलोड करनी होती है। दस्तावेज अपलोड होने के बाद सब-रजिस्ट्रार यानी तहसीलदार या नायब तहसीलदार के पास जाते हैं। वे दस्तावेजों की जांच करते हैं। अगर दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो वह अप्रूवल दे देते हैं। उसके बाद रजिस्ट्री करवाने वाले को मैसेज जाता है। रजिस्ट्री करवाने वाला फिर अपॉइंटमेंट लेकर किसी भी सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में जाकर फोटो करवाकर रजिस्ट्री करवा सकता है। अगर तहसीलदार या नायब तहसीलदार दस्तावेजों पर ऑब्जेक्शन लगाता है तो उस ऑब्जेक्शन को दूर कर पूरी प्रक्रिया दोबारा अपनानी पड़ती है। AAP बोली- खुद अकाउंट डिलीट किया AAP के सोशल मीडिया जालंधर के इंचार्ज प्रिंस शर्मा ने X हैंडल पर लिखा- यह नैरेटिव ज़ोर-शोर से फैलाया जा रहा है, लेकिन तथ्य इसका समर्थन नहीं करते। क्रिकेटर पुलकित शर्मा ने अपना X (ट्विटर) अकाउंट खुद डिलीट किया था- इसे सरकार ने ‘सस्पेंड’ नहीं किया था। अगर उनके आरोपों में कोई सच्चाई होती, तो वह पोस्ट करने के बाद गायब होने के बजाय सबूत पेश करते। बिना सबूत के भ्रष्टाचार के आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन पर कायम रहना ही असली बात होती है। बिना किसी आधार के ऐसे आरोप लगाना केवल अनावश्यक डर और भ्रम पैदा करता है। भगवंत मान और AAP सरकार को निशाना बनाने से पहले ज़मीनी हकीकत देखना ज़रूरी है- भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई