Friday, 26 Jun 2026 | 03:08 PM

Trending :

वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं वर्ल्ड अपडेट्स:यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं इंपैक्ट फीचर:एलपीयू ने 2.5 करोड़ रुपए के प्लेसमेंट, उद्योग आधारित डिग्री और वैश्विक तकनीकी अनुभव के साथ इंजीनियरिंग शिक्षा को दी नई दिशा मार्केट-कैप में माइक्रोन ने मेटा-टेस्ला को पीछे छोड़ा:AI चिप की डिमांड से शेयरों में 18.4% का उछाल; कंपनी की कुल वैल्यू $1.37 ट्रिलियन पहुंची जैवलिन थ्रो छोड़ रग्बी में चमकीं अमनदीप कौर:ऑक्शन में 11 घंटे नहीं चुनी गईं, फिर बनीं बेस्ट प्लेयर; लक्ष्य भारत को गोल्ड जिताना सुशांत केस से ट्रॉमा से रिकवर नहीं हुईं रिया चक्रवर्ती:कहा- ये ट्रॉमा ऐसी चीज है, जिससे उबर नहीं सकते; 27 दिन जेल में रही थीं एक्ट्रेस
EXCLUSIVE

NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

नई दिल्ली7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

NCERT ने गुरुवार को क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया है। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।

हालांकि, इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, लेकिन ‘सॉवरेन’ (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी), ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), ‘डेमोक्रेटिक’ (लोकतांत्रिक) और ‘रिपब्लिक’ (गणराज्य) जैसे शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है।

जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र

25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण।

25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण।

किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए।

पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।

1976 में संविधान में सेकुलर शब्द जुड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल के समय किए गए 42वें संविधान संशोधन (1976) के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘सेकुलर’ (पंथनिरपेक्ष), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘इंटीग्रिटी’ (अखंडता) जोड़े गए थे।

किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी

किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई।

किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई।

लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल

इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं।

NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है।

लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर

किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है।

मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है।

भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है।

किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है।

पीएम मोदी ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस कहा

NCERT की किताब में चुनाव आयोग की तारीफ

कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की बुक में देश के चुनाव आयोग (ECI) की भी तारीफ की गई है। बुक में कहा गया है कि भारत में चुनाव कराना दुनिया के सबसे बड़े कामों में से एक है। इसके बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश करता है।

नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 1’ के ‘इलेक्शंस’ चैप्टर में बताया गया है कि 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा वोटर थे। इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराना आसान नहीं है, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं।

किताब में कहा गया है कि इतने बड़े देश में चुनाव कराना अपने आप में चुनौती है। इसके अलावा फेक न्यूज, गलत जानकारी फैलाना और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इनसे निपटने के लिए चुनाव आयोग RPA कानून, आदर्श आचार संहिता, EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियानों का इस्तेमाल करता है।

किताब में कहा गया है कि सिर्फ चुनाव आयोग के प्रयास काफी नहीं हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिए लोगों की जागरूकता और भागीदारी भी जरूरी है। नागरिक जितने सतर्क रहेंगे, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा।

चैप्टर में कहा गया है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। वे अलग-अलग नीतियां और योजनाएं लोगों के सामने रखते हैं, जिससे मतदाता अपनी पसंद का फैसला कर सकते हैं। छात्रों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में जीतने वाले गठबंधनों का अध्ययन करने के लिए भी कहा गया है।

……………………

यह खबर भी पढ़ें…

मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी

मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
SRHs Jake Edwards Out of IPL 2026 Due to Foot Injury

March 20, 2026/
10:37 am

33 मिनट पहले कॉपी लिंक जैक एडवर्ड्स 2025 के ऑक्शन में खरीदे गए इकलौते अनकैप्ड (जिन्होंने इंटरनेशनल मैच न खेला...

Indore PWD Officers Bribe Scam

April 30, 2026/
2:23 pm

इंदौर8 मिनट पहले कॉपी लिंक इंदौर में रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन अधिकारियों को...

authorimg

March 11, 2026/
6:12 pm

Hair transplant-Cosmetic surgery Risk: सुंदर और स्मार्ट दिखना कौन नहीं चाहता. खूबसूरत बनने के लिए लोग धुआंधार पैसा उड़ाने से...

पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती

April 11, 2026/
9:47 am

8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के...

जंग के चलते क्रूड दोगुना, 146 डॉलर पहुंचा:पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है; ईरानी हमले से कतर गैस प्लांट बंद, यूरोप में कीमत 30% बढ़ी

March 19, 2026/
5:49 pm

ईरान की ओर से खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर नए हमलों के बाद आज 19 मार्च को ग्लोबल मार्केट...

PBKS Vs DC IPL 2026 Highlights

May 12, 2026/
2:56 am

आखरी अपडेट:12 मई, 2026, 02:56 IST यह कदम सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के महीनों बाद आया...

राजनीति

NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

NCERT Removes Constitution Preamble From Social Science Book

नई दिल्ली7 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

NCERT ने गुरुवार को क्लास 9 की सोशल साइंस की किताब में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया है। किताब के ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।

हालांकि, इसमें संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के माध्यम से की गई है, लेकिन ‘सॉवरेन’ (संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी), ‘सेक्युलर’ (पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष), ‘डेमोक्रेटिक’ (लोकतांत्रिक) और ‘रिपब्लिक’ (गणराज्य) जैसे शब्दों के बारे में नहीं बताया गया है।

जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी जिक्र

25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण।

25 जून 1975 को नई दिल्ली में रामलीला मैदान में लोगों को संबोधित करते जयप्रकाश नारायण।

किताब में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को भी विस्तार से बताया गया है। इसमें कहा गया है कि उन्होंने छात्रों और आम लोगों को संगठित किया और बिहार तथा गुजरात में बड़े जन आंदोलन खड़े हुए।

पुस्तक के मुताबिक, 1977 में इमरजेंसी खत्म होने के बाद आम चुनाव कराए गए। जनता ने मतदान के जरिए अपनी राय दी और सत्तारूढ़ सरकार चुनाव हार गई। किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताया गया है।

1976 में संविधान में सेकुलर शब्द जुड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल के समय किए गए 42वें संविधान संशोधन (1976) के जरिए भारतीय संविधान की प्रस्तावना में ‘सेकुलर’ (पंथनिरपेक्ष), ‘सोशलिस्ट’ (समाजवादी) और ‘इंटीग्रिटी’ (अखंडता) जोड़े गए थे।

किताब में लिखा- इंदिरा सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ी

किताब में लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की गई।

किताब के अनुसार, इस दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। पुस्तक में कहा गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ा और लोगों की स्वतंत्रता सीमित हो गई।

लोकतंत्र के सामने दूसरी चुनौतियां भी शामिल

इमरजेंसी के अलावा किताब में लोकतंत्र के सामने मौजूद दूसरी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है। इनमें फेक न्यूज, गलत सूचनाएं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता शामिल हैं।

NCERT ने पहली बार ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ नाम का नया सेक्शन भी जोड़ा है। इसका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भूमिका समझाना है।

लोकतांत्रिक परंपराओं और मीडिया पर जोर

किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी खास फोकस किया गया है। इसमें बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और भागीदारी की परंपरा काफी पुरानी है।

मीडिया की भूमिका पर भी एक अलग सेक्शन दिया गया है। किताब में मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताया गया है और कहा गया है कि यह जनता की आवाज उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है।

भारतीय लोकतंत्र के आकार को समझाने के लिए किताब में चुनावी आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार, 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटर्स थे। साथ ही देशभर में फैले मतदान केंद्रों के नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है।

किताब में स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र के उदाहरण भी शामिल किए गए हैं। इसमें गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत का जिक्र है। महिलाओं के मतदान अधिकार और स्थानीय निकायों में आरक्षण पर भी अलग सेक्शन दिया गया है।

पीएम मोदी ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस कहा

NCERT की किताब में चुनाव आयोग की तारीफ

कक्षा 9वीं की सोशल साइंस की बुक में देश के चुनाव आयोग (ECI) की भी तारीफ की गई है। बुक में कहा गया है कि भारत में चुनाव कराना दुनिया के सबसे बड़े कामों में से एक है। इसके बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने की कोशिश करता है।

नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 1’ के ‘इलेक्शंस’ चैप्टर में बताया गया है कि 2024 में देश में 96.8 करोड़ से ज्यादा वोटर थे। इतने बड़े स्तर पर चुनाव कराना आसान नहीं है, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं।

किताब में कहा गया है कि इतने बड़े देश में चुनाव कराना अपने आप में चुनौती है। इसके अलावा फेक न्यूज, गलत जानकारी फैलाना और मतदाताओं को डराने-धमकाने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इनसे निपटने के लिए चुनाव आयोग RPA कानून, आदर्श आचार संहिता, EVM, VVPAT और मतदाता जागरूकता अभियानों का इस्तेमाल करता है।

किताब में कहा गया है कि सिर्फ चुनाव आयोग के प्रयास काफी नहीं हैं। निष्पक्ष चुनाव के लिए लोगों की जागरूकता और भागीदारी भी जरूरी है। नागरिक जितने सतर्क रहेंगे, लोकतंत्र उतना मजबूत होगा।

चैप्टर में कहा गया है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। वे अलग-अलग नीतियां और योजनाएं लोगों के सामने रखते हैं, जिससे मतदाता अपनी पसंद का फैसला कर सकते हैं। छात्रों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में जीतने वाले गठबंधनों का अध्ययन करने के लिए भी कहा गया है।

……………………

यह खबर भी पढ़ें…

मूर्ति नग्न थी, NCERT ने ढंककर छापी: विवाद के बाद बदलने का फैसला; कांसे की प्रतिमा 1926 में मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली थी

मोहनजोदड़ो की खुदाई में मिली कांसे की नर्तकी की मूर्ति की फोटो बदले हुए रूप में छापी गई है। NCERT की किताब में मूर्ति के ढंके धड़ वाली फोटो है। मूर्ति का रंग भी बदल दिया गया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नर्तकी की तस्वीर 9वीं की किताब ‘मधुरिमा’ के पहले चैप्टर ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में दी गई है। तस्वीर में कंधे से नीचे का हिस्सा ढंक दिया गया है, जबकि मूल मूर्ति में यह हिस्सा खुला दिखाई देता है। 25 साल से छप रही इस कांस्य मूर्ति के मूल स्वरूप में पहले कभी बदलाव नहीं किया गया था। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.