Major Blow to Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win for Trump

Hindi News Business UAE Quits OPEC & OPEC+ Effective May 1: Major Blow To Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win For Trump नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से ओपेक का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ओपेक देशों के बीच तालमेल की कमी और नाराजगी UAE का यह फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने सोमवार को एक फोरम में कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है। गरगाश के मुताबिक, गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल (GCC) के देशों ने एक-दूसरे की लॉजिस्टिक मदद तो की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उनकी भूमिका सबसे कमजोर रही है। उन्होंने कहा कि अरब लीग से तो उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन GCC के रुख ने उन्हें हैरान कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत UAE के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प लंबे समय से ओपेक की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि यह संगठन तेल की कीमतों को जानबूझकर बढ़ाकर पूरी दुनिया को लूट रहा है। ट्रम्प ने कई बार खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका कहना है कि अमेरिका इन देशों की रक्षा करता है, जबकि ये देश तेल के दाम बढ़ाकर अमेरिका का शोषण करते हैं। अब UAE के बाहर होने से ओपेक की ताकत कम होगी, जिससे बाजार पर अमेरिका का कंट्रोल बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज रूट में तनाव का असर ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों के लिए तेल का निर्यात करना पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच UAE का ओपेक से अलग होना तेल बाजार में और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्या है ओपेक और ओपेक प्लस? ओपेक (OPEC): इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। इनका मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें। ओपेक प्लस (OPEC+): 2016 में जब तेल की कीमतें बहुत गिर गई थीं, तब ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर यह नया गठबंधन बनाया था। बाजार पर कब्जा: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा इन्ही देशों के पास है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर ओपेक के सदस्य देश एकजुट नहीं रहते हैं, तो तेल के उत्पादन पर उनका कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में उतार सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में कमी या स्थिरता भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। हालांकि, ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Major Blow to Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win for Trump

Hindi News Business UAE Quits OPEC & OPEC+ Effective May 1: Major Blow To Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win For Trump नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से ओपेक का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ओपेक देशों के बीच तालमेल की कमी और नाराजगी UAE का यह फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने सोमवार को एक फोरम में कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है। गरगाश के मुताबिक, गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल (GCC) के देशों ने एक-दूसरे की लॉजिस्टिक मदद तो की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उनकी भूमिका सबसे कमजोर रही है। उन्होंने कहा कि अरब लीग से तो उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन GCC के रुख ने उन्हें हैरान कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत UAE के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प लंबे समय से ओपेक की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि यह संगठन तेल की कीमतों को जानबूझकर बढ़ाकर पूरी दुनिया को लूट रहा है। ट्रम्प ने कई बार खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका कहना है कि अमेरिका इन देशों की रक्षा करता है, जबकि ये देश तेल के दाम बढ़ाकर अमेरिका का शोषण करते हैं। अब UAE के बाहर होने से ओपेक की ताकत कम होगी, जिससे बाजार पर अमेरिका का कंट्रोल बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज रूट में तनाव का असर ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों के लिए तेल का निर्यात करना पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच UAE का ओपेक से अलग होना तेल बाजार में और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्या है ओपेक और ओपेक प्लस? ओपेक (OPEC): इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। इनका मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें। ओपेक प्लस (OPEC+): 2016 में जब तेल की कीमतें बहुत गिर गई थीं, तब ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर यह नया गठबंधन बनाया था। बाजार पर कब्जा: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा इन्ही देशों के पास है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर ओपेक के सदस्य देश एकजुट नहीं रहते हैं, तो तेल के उत्पादन पर उनका कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में उतार सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में कमी या स्थिरता भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। हालांकि, ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। ये खबर भी पढ़ें… इंडिगो-एअर इंडिया ने कहा- फ्लाइट्स बंद होने की कगार पर:फ्यूल महंगा होने से ऑपरेशन मुश्किल, एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाए सरकार मिडिल ईस्ट जंग के चलते देश की एयरलाइंस मुश्किल में हैं। एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी बड़ी एयरलाइन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने कहा- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से उनका ऑपरेशन कॉस्ट 20% तक बढ़ गया है। FIA ने इस बारे में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है। इसके मुताबिक घरेलू एयरलाइंस का कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि कंपनियां ऑपरेशंस रोकने या अपने विमानों को खड़ा करने की कगार पर पहुंच गई हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats

Hindi News International World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats | Hormuz Crisis, Russia China Breaking News 9 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े रूस के प्रमुख वैज्ञानिक अलेक्जेंडर लियोनोव का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे रूस के प्रमुख मिसाइल डिजाइनरों में शामिल थे। लियोनोव NPO माशिनोस्ट्रोएनिया (NPOMASH) के CEO और चीफ डिजाइनर थे, जो भारत-रूस की ब्रह्मोस एयरोस्पेस का प्रमुख साझेदार है। उन्हें उन्नत मिसाइल तकनीक के विकास के लिए जाना जाता था। उन्होंने जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत कई अहम प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने ग्रेनिट, वल्कन और बास्टियन जैसे मिसाइल और कोस्टल डिफेंस सिस्टम्स के विकास में भी भूमिका निभाई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats

Hindi News International World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats | Hormuz Crisis, Russia China Breaking News 11 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े रूस के प्रमुख वैज्ञानिक अलेक्जेंडर लियोनोव का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे रूस के प्रमुख मिसाइल डिजाइनरों में शामिल थे। लियोनोव NPO माशिनोस्ट्रोएनिया (NPOMASH) के CEO और चीफ डिजाइनर थे, जो भारत-रूस की ब्रह्मोस एयरोस्पेस का प्रमुख साझेदार है। उन्हें उन्नत मिसाइल तकनीक के विकास के लिए जाना जाता था। उन्होंने जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत कई अहम प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने ग्रेनिट, वल्कन और बास्टियन जैसे मिसाइल और कोस्टल डिफेंस सिस्टम्स के विकास में भी भूमिका निभाई थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने संघर्ष रोकने के लिए तालिबान के सामने 3 मांगें रखी, चीन की मध्यस्थता में बातचीत शुरू पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया संघर्ष के बाद अब दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। चीन की मध्यस्थता में हो रही इस वार्ता में पाकिस्तान ने तालिबान के सामने तीन मांगें रखी हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को आतंकी संगठन घोषित करने, उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करने और कार्रवाई के ठोस सबूत देने की मांग की है। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उसकी सबसे बड़ी चिंता अफगानिस्तान की जमीन से संचालित आतंकी गतिविधियां हैं। इसी वजह से बातचीत को फिलहाल आतंकवाद और सीमा सुरक्षा तक सीमित रखा गया है। इस वार्ता में चीन अहम भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों को एक साझा फ्रेमवर्क पर लाने की कोशिश कर रहा है। चीन ने पांच पॉइंट का फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसमें सीजफायर, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, आतंकी ठिकानों का खात्मा, सुरक्षित व्यापार मार्ग और औपचारिक बातचीत की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India Buys 60 Million Barrels Russian Crude for April Amid Israel-Iran War & Hormuz Crisis

Hindi News Business India Buys 60 Million Barrels Russian Crude For April Amid Israel Iran War & Hormuz Crisis नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक फोटो क्रेडिट- AI मिडिल ईस्ट में जारी इजराइल-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस संकट से निपटने के लिए भारतीय रिफाइनर्स ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने का फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, अप्रैल महीने की डिलीवरी के लिए भारत ने रूस से लगभग 60 मिलियन यानी 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने के बाद भारत को सऊदी अरब और इराक से होने वाली सप्लाई में दिक्कत आ रही थी। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत अब फिर से रूसी तेल पर भरोसा जता रहा है। फरवरी के मुकाबले दोगुनी हुई रूसी तेल की खरीद डेटा इंटेलिजेंस फर्म केपलर के मुताबिक, अप्रैल के लिए रूस से की गई यह खरीदारी फरवरी के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। हालांकि, यह मात्रा मार्च के लगभग बराबर ही है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई रुकने से भारतीय कंपनियां अब उन रास्तों को तलाश रही हैं, जहां से तेल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के हो सके। इसी वजह से पिछले कुछ हफ्तों में रूसी तेल की मांग में अचानक तेजी आई है। क्रूड से 15 डॉलर तक महंगा मिल रहा रूसी तेल हैरानी की बात यह है कि जो रूसी तेल कभी भारत को भारी डिस्काउंट पर मिलता था, अब उसके लिए प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सौदे ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम (अतिरिक्त कीमत) पर बुक किए गए हैं। सप्लाई की कमी और मांग ज्यादा होने की वजह से कीमतों में यह उछाल देखा जा रहा है। अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी भारत की इस खरीदारी के पीछे अमेरिका द्वारा दी गई एक विशेष छूट का बड़ा हाथ है। अमेरिका ने भारत को उन रूसी तेल कार्गो को लेने की अनुमति दी है, जो 5 मार्च से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। बाद में इस छूट का दायरा बढ़ाकर 12 मार्च कर दिया गया। यह छूट विशेष रूप से इसलिए दी गई ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से पैदा हुई तेल की किल्लत को दूर किया जा सके। सऊदी और इराक का तेल खाड़ी देशों में फंसा पिछले साल के अंत में अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी थी और सऊदी अरब व इराक जैसे देशों की ओर रुख किया था। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद इन देशों का अधिकांश तेल ‘पर्शियन गल्फ’ के अंदर ही फंस गया है। नई दिल्ली के अधिकारियों को उम्मीद है कि जब तक होर्मुज में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक अमेरिका अपनी छूट की समय सीमा को आगे बढ़ाता रहेगा। MRPL-हिंदुस्तान मित्तल एनर्जी की बाजार में वापसी दिसंबर से रूसी तेल से दूरी बनाने वाली भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां अब फिर से एक्टिव हो गई हैं। मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) और हिंदुस्तान मित्तल एनर्जी लिमिटेड जैसी कंपनियों ने रूसी बाजार में वापसी की है। इन कंपनियों का फोकस अब घरेलू मांग को पूरा करने के लिए स्टॉक जमा करने पर है। वेनेजुएला से भी आयात बढ़ा, 4 साल का रिकॉर्ड टूटा सिर्फ रूस ही नहीं, भारत अपनी तेल की जरूरतों के लिए वेनेजुएला पर भी निर्भरता बढ़ा रहा है। केपलर के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में वेनेजुएला से भारत का कच्चा तेल आयात 8 मिलियन बैरल तक पहुंच सकता है। यह अक्टूबर 2020 के बाद का उच्चतम स्तर है। भारत अपनी सप्लाई को डाइवर्सिफाई करने के लिए दक्षिण अमेरिकी देशों से भी संपर्क बढ़ा रहा है। डिमांड के कारण रूस को अच्छा मुनाफा हो रहा भारत और चीन जैसे देशों की बढ़ती मांग और ऊंची कीमतों के कारण रूस को अच्छा मुनाफा हो रहा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट रेवेन्यू रूस इसी समय कमा रहा है। मार्च 2022 के बाद रूसी तेल की मांग और कमाई अपने हाई पर है। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि भारत के पास अभी रूस के अलावा कोई बेहतर विकल्प नहीं है, क्योंकि वेनेजुएला की क्वालिटी रूसी तेल जैसी नहीं है और मिडिल ईस्ट का रास्ता असुरक्षित है। ये खबर भी पढ़ें… घर के पास PNG पाइपलाइन, तो कनेक्शन लेना ही होगा: कंपनी 3 महीने का नोटिस देगी, कनेक्शन नहीं लिया तो LPG सप्लाई बंद होगी अगर आपके घर के पास गैस पाइपलाइन आ गई है और आपने PNG कनेक्शन नहीं लिया है, तो अगले 3 महीने में आपके घर आने वाला LPG सिलेंडर बंद कर दिया जाएगा। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और गैस की किल्लत को देखते हुए केंद्र सरकार ने ‘नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ लागू किया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Israel US Iran war live updates ninth day Trump Netanyahu

तेल अवीव/तेहरान1 दिन पहले कॉपी लिंक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए उकसाया गया। उनका दावा है कि अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मिलकर साजिश की। अराघची के मुताबिक ग्राहम हाल के हफ्तों में कई बार इजराइल गए और वहां की खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में ईरान से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। अराघची का कहना है कि ग्राहम ने कहा था कि उन्हें इजराइल से ऐसी खुफिया जानकारी मिलती है जो कभी-कभी अमेरिकी सरकार भी शेयर नहीं करती। इसी जानकारी के आधार पर ट्रम्प को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजी किया गया। अराघची ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राहम ने इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू को सलाह दी कि वे ट्रम्प को ईरान के खिलाफ सैन्य कदम उठाने के लिए कैसे मना सकते हैं। अराघची ने कहा कि किसी भी देश में ऐसा करना देशद्रोह जैसा माना जाएगा। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने 16 फरवरी 2026 को इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। सऊदी पर मिसाइल हमले में भारतीय की मौत सऊदी अरब के अल-खार्ज इलाके में रिहायशी परिसर पर मिसाइल गिरने से एक भारतीय और एक बांग्लादेशी नागरिक की मौत हो गई। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में 12 अन्य बांग्लादेशी घायल हुए हैं। सऊदी सिविल डिफेंस एजेंसी के मुताबिक आवासीय परिसर पर मिसाइल गिरने से इससे इमारत को नुकसान पहुंचा और आसपास अफरा-तफरी मच गई। इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा था कि उसने अल-खार्ज समेत कई स्थानों पर रडार सिस्टम को निशाना बनाया है। मिसाइल गिरने की घटना इसी इलाके में सामने आई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार पहले ही सऊदी अरब में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर चुकी है और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… ट्रम्प कुवैत में मारे गए 6 अमेरिकियों सैनिक के शव वापसी समारोह में शामिल हुए। उनके साथ मेलानिया ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे। ईरान के इस्फहान शाहिद बेहेश्टी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 7 मार्च को धमाके के बाद की फुटेज। दुबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार को ईरानी ड्रोन हमले का फुटेज। तेहरान में अमेरिकी-इजराइली हमले में मारी गई 2 साल की जैनब साहेबी का शनिवार को अंतिम संस्कार हुआ। ब्रिटेन में ईरान जंग खत्म करने के लिए शनिवार को मार्च निकाला गया। इस दौरान महिलाओं ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की तस्वीर लेकर प्रदर्शन किया। ब्रिटेन में इंटरनेशनल विमेंस डे मार्च के दौरान कुछ ईरानी महिलाओं ने अमेरिका के समर्थन में रैली निकाली। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… अपडेट्स 12:16 AM9 मार्च 2026 कॉपी लिंक व्हाइट हाउस के ‘वॉर मोंटाज’ वीडियो पर अमेरिकी कैथोलिक धर्मगुरु ने की आलोचना अमेरिका के एक वरिष्ठ कैथोलिक धर्मगुरु कार्डिनल ब्लेज़ क्यूपिच ने व्हाइट हाउस द्वारा जारी एक वीडियो मोंटाज को “भयावह” और “घिनौना” बताया है। यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर “Justice the American way” कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था। लगभग 42 सेकंड के इस वीडियो में हॉलीवुड फिल्मों के दृश्यों को ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों के वास्तविक फुटेज के साथ मिलाकर दिखाया गया था। जो पोप लियो XIV के करीबी कार्डिनल क्यूपिच ने अपने बयान में कहा- एक असली युद्ध, जिसमें असली मौत और असली पीड़ा है, उसे वीडियो गेम की तरह पेश करना बेहद घिनौना है। 11:58 PM8 मार्च 2026 कॉपी लिंक कतर के प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व में तनाव कम करने की अपील की कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच सभी पक्षों से तनाव कम करने (डी-एस्केलेशन) की अपील की है। Sky News को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हम ईरानियों से बातचीत जारी रखेंगे और तनाव कम करने की कोशिश करते रहेंगे।” शेख मोहम्मद ने कहा कि हालिया घटनाओं ने ईरान के साथ संबंधों में मौजूद भरोसे को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। 11:39 PM8 मार्च 2026 कॉपी लिंक श्रीलंका ईरानी नाविकों को मुफ्त वीजा जारी करेगा श्रीलंका ने अपनी समुद्री सीमा के बाहर से निकाले गए ईरानी नाविकों को एक महीने का मुफ्त वीजा देने की योजना बनाई है। ये नाविक उस घटना के बाद बचाए गए थे जिसमें अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में एक अन्य जहाज डूब गया था, जिसमें 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई थी। श्रीलंका के लोक सुरक्षा मंत्री आनंदा विजेपाला ने मीडिया से कहा कि सरकार ईरानी नाविकों को “फ्री वीजा” जारी करेगी। उन्होंने कहा कि “उन्हें इस देश से जाने में कुछ समय लग सकता है।” शनिवार को 204 नाविकों को उनके जहाज IRIS Bushehr से श्रीलंकाई नौसेना के एक बेस पर स्थानांतरित किया गया, जिसके बाद जहाज को श्रीलंका की हिरासत में ले लिया गया। 10:40 PM8 मार्च 2026 कॉपी लिंक बेरूत में IRGC कुद्स फोर्स के 5 कमांडर ढेर: इजरायल इजरायली सेना (IDF) ने दावा किया है कि उसने बेरूत में सटीक हवाई हमले में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के लेबनान कॉर्प्स के पांच सीनियर कमांडरों को मार गिराया। IDF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि यह कार्रवाई “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” के तहत की गई। 10:09 PM8 मार्च 2026 कॉपी लिंक अयातोल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा नए सुप्रीम लीडर हो सकते हैं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का अगला सुप्रीम लीडर चुने जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह जानकारी एक वरिष्ठ ईरानी धर्मगुरु अयातोल्ला हुसैनअली एश्केवारी ने दी, जो नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया में शामिल थे। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के 88 सदस्यों में से एक एश्केवारी ने ईरानी मीडिया में जारी एक वीडियो संदेश में कहा- खामेनेई का नाम जारी रहेगा। ईरान में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स वह संस्था है, जो देश









