Monday, 25 May 2026 | 09:18 PM

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President Droupadi Murmu Ayodhya Mathura Vrindavan Visit; Ram Janmabhoomi Temple

President Droupadi Murmu Ayodhya Mathura Vrindavan Visit; Ram Janmabhoomi Temple

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वृंदावन में संत प्रेमानंदजी महाराज से मिलने आ रही हैं। वह 19 से 21 मार्च तक तीन दिन यूपी में रहेंगी। . राष्ट्रपति मुर्मू अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी। श्रीरामयंत्र स्थापित करेंगी। मथुरा- वृंदावन में इस्कॉन और प्रेम मंदिर सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाएंगी। 20 मार्च को राष्ट्रपति संत उड़िया बाबा के निर्वाण दिवस पर उनके आश्रम पहुंचकर समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगी। संत उड़िया बाबा की जन्मस्थली ओडिशा है। राष्ट्रपति मुर्मू भी वहीं की रहने वाली हैं।धर्मनगरी में करीब 50 घंटे का राष्ट्रपति का दौरा कितना खास, कहां-कहां जाएंगी, जिन जगहों पर जाएंगी उनका महत्व क्या? सबकुछ जानिए… राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या-मथुरा में करीब 50 घंटे रहेंगी। पहले बात राष्ट्रपति के अयोध्या दौरे की… राष्ट्रपति का दौरा इसलिए भी खास है, क्योंकि 19 मार्च को हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहा है, उसी दिन द्रौपदी मुर्मू रामनगरी पहुंचेंगी। इस मौके पर वे राम मंदिर परिसर में आयोजित विशेष धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर श्री राम यंत्र का विधि-विधान से पूजन करेंगी। राम मंदिर के दूसरे फ्लोर पर स्थापित होगा यंत्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में स्थापित किए जाने वाले दिव्य श्रीराम यंत्र को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस यंत्र की स्थापना मंदिर के दूसरे तल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों कराई जाएगी। प्राण-प्रतिष्ठित इस यंत्र का पूजन रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ ही नियमित रूप से राम मंदिर में किया जा रहा है। अब इसे औपचारिक रूप से मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया जाएगा। यंत्र 150 किलो वजनी, सोने की परत चढ़ी है करीब 150 किलोग्राम वजन वाले इस श्रीराम यंत्र पर सोने की परत चढ़ाई गई है। इसे कांचीपुरम मठ के मुख्यालय में स्थापित प्राचीन यंत्र के आधार पर तैयार किया गया है। यंत्र पर भगवान श्रीराम समेत अन्य देवी-देवताओं के विभिन्न वैदिक मंत्र अंकित हैं, जिन्हें अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह यंत्र पहले कांचीपुरम से तिरुपति लाया गया था। इसके बाद एक भव्य रथयात्रा के माध्यम से करीब दो हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर अयोध्या पहुंचाया गया। इस यात्रा के दौरान कई राज्यों में श्रद्धालुओं ने यंत्र के दर्शन कर पूजा-अर्चना की थी। अब मथुरा में राष्ट्रपति का कार्यक्रम जानिए… राष्ट्रपति सबसे पहले इस्कॉन मंदिर जाएंगी अयोध्या से 19 मार्च को ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सेना के हेलीपैड से नेशनल हाईवे होते हुए शाम करीब 5:35 पर वृंदावन स्थित रेडिसन होटल आएंगी। यहां से वह शाम 6:30 बजे इस्कॉन मंदिर जाएंगी। जहां वह एक घंटे तक रहेंगी। यहां वह भगवान कृष्ण- बलराम, राधा-कृष्ण और निताई गौर के दर्शन करेंगी। मुर्मू वृंदावन दो बार आने वाली तीसरी राष्ट्रपति हैं। वृंदावन इस्कॉन की स्थापना राम नवमी के दिन 1975 में की गई थी। प्रेम मंदिर जाएंगी राष्ट्रपति राष्ट्रपति मुर्मू इस्कॉन मंदिर के बाद 19 मार्च की देर शाम प्रेम मंदिर जाएंगी। जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा बनाए गए प्रेम मंदिर में वह भगवान कृष्ण के दर्शन करेंगी। प्रेम मंदिर का उद्घाटन 17 फरवरी, 2012 को हुआ था। प्रेम मंदिर जनवरी, 2001 में बनना शुरू हुआ था। 12 साल में बनकर तैयार हुए इस मंदिर में सफेद इटैलियन पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। यहां आने वाले लोग भगवान के दर्शन करने के साथ-साथ शाम के समय होने वाली लाइटिंग देखने के लिए आते हैं। राष्ट्रपति यहां भगवान की आरती में भी शामिल होंगी। केली कुंज आश्रम में करेंगी संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात राष्ट्रपति दौरे के दूसरे दिन यानी 20 मार्च की शुरुआत संत प्रेमानंद महाराज के साथ आध्यात्मिक चर्चा से होगी। संभावित समय के अनुसार वह सुबह 7:25 पर रमण रेती स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचेंगी। जहां वह 8 बजे तक रहकर संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर उनसे आध्यात्मिक चर्चा करेंगी। राधारानी की भक्ति में लीन प्रेमानंद महाराज। क्रिकेटर विराट कोहली और एक्ट्रेस अनुष्का ने संत प्रेमानंद से दीक्षा ली थी। संत प्रेमानंद महाराज राधा रानी के अनन्य भक्त हैं। उनके भक्त मानते हैं कि किडनी न होने के बाबजूद वह राधारानी की कृपा से सकुशल हैं। पिछले कुछ वर्षों से उनका सोशल मीडिया पर तेजी से प्रचार बढ़ा तो उनके अनुयायियों की संख्या लाखों में पहुंच गई। विराट-अनुष्का जैसे सेलेब्रिटी संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य संत प्रेमानंद महाराज वर्तमान में प्रतिष्ठा के शिखर पर हैं। उनके शिष्यों में प्रसिद्ध क्रिकेटर विराट कोहली, उनकी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा, WWE चैंपियन रिंकू सिंह के अलावा अन्य नामचीन हस्तियों के नाम हैं। उनसे मिलने संघ प्रमुख मोहन भागवत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अलावा राजनीतिक, फिल्मी जगत, खेल जगत, आध्यात्मिक जगत, सांस्कृतिक जगत की हस्तियां आ चुकी हैं। बाबा नीब करौरी की समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करने के बाद होटल जाएंगी। जहां से सुबह 11:10 बजे हनुमानजी के अनन्य भक्त और उनका कलयुग में स्वरूप माने जाने वाले बाबा नीब करौरी के परिक्रमा मार्ग स्थित आश्रम जाएंगी। जहां वह बाबा नीब करौरी की समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगी। इस दौरान वह हनुमान जी के दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति के आश्रम पहुंचने पर उनका प्रबंधन बाबा का प्रसादी कंबल और लड्डू प्रसाद देकर स्वागत करेगा। 1973 में बाबा ने त्यागा था शरीर बाबा नीब करौरी ने 11 सितंबर 1973 में वृंदावन के इसी आश्रम में अपना शरीर छोड़ा था। बाबा कैंची धाम जा रहे थे, लेकिन अचानक उन्होंने वृंदावन जाने का प्रोग्राम बनाया। बाबा जैसे ही वृंदावन में प्रवेश किए, उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। बाबा आश्रम पहुंचे और अपना शरीर त्याग दिया। बाबा के गोलोक गमन के बाद उनका यहां समाधि स्थल बना हुआ है। इसके साथ ही ध्यान कक्ष है, जहां बाबा ध्यान लगाते थे। राष्ट्रपति यहां आधे घंटे तक रहेंगी। उड़िया बाबा की समाधि के करेंगी दर्शन बाबा नीब करौरी के समाधि स्थल से राष्ट्रपति का काफिला दावानल कुंड स्थित उड़िया बाबा आश्रम पहुंचेगा। जहां वह जगन्नाथ पूरी के राजगुरु के परिवार के सदस्य आर्थ प्राण मिश्रा उर्फ स्वामी पूर्णानंद तीर्थ उर्फ उड़िया बाबा की समाधि के दर्शन करेंगी। 1875 में जन्मे आर्थ प्राण मिश्रा ने जब पूरी शंकराचार्य से दंड संन्यास लिया तो उनका नाम स्वामी पूर्णानंद तीर्थ हो गया। बाबा 1913 में जब वृंदावन आए तो उनको ब्रजवासी उड़ीसा से आने

Rinku Singh Mathura Visit | Bagulamukhi Devi Temple Blessings; Nation Wishes

Rinku Singh Mathura Visit | Bagulamukhi Devi Temple Blessings; Nation Wishes

मथुरा2 दिन पहले कॉपी लिंक टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह सोमवार को मथुरा पहुंचे। उन्होंने बगलामुखी देवी मंदिर में दर्शन किए। यहां पूजा-अर्चना कर मां भगवती का आशीर्वाद लिया। रिंकू सिंह ने कहा- मैंने टीम के विश्वकप जीतने की मां से कामना की थी। मां बगलामुखी के आशीर्वाद से हम टी-20 वर्ल्ड कप जीत गए। रिंकू करीब 45 मिनट तक मंदिर में रहे। इस दौरान उनके साथ भाजपा नेता योगेश द्विवेदी भी थे। भारत ने 8 मार्च को गुजरात के अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से शिकस्त दी थी। वर्ल्ड कप के बीच ही रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया था। जिसके बाद रिंकू पिता के अंतिम संस्कार में अलीगढ़ आए थे। 2 तस्वीरें देखिए… रिंकू सिंह ने टी-20 विश्वकप जीत के लिए मां बगलामुखी से कामना की थी। रिंकू सिंह के साथ UP रणजी टीम के सदस्य अंश द्विवेदी भी दर्शन करने पहुंचे। बीजेपी नेता ने रिंकू का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया रिंकू सिंह सबसे पहले छटीकरा स्थित पूर्व पालिका अध्यक्ष पुष्पा शर्मा के फार्म हाउस पहुंचे। यहां पुष्पा शर्मा और भाजपा नेता पंडित योगेश द्विवेदी ने शॉल ओढ़ाकर रिंकू का सम्मान किया। दोनों ने रिंकू सिंह और भारतीय टीम को विश्वकप जीत की बधाई दी। इसके बाद रिंकू योगेश द्विवेदी के साथ दोपहर करीब 12 बजे पुराने बस स्टैंड के पास स्थित मां बगलामुखी मंदिर पहुंचे। यहां पर सेवायत नीरज चतुर्वेदी उन्हें पूजा के लिए मंदिर के अंदर ले गए। रिंकू ने मां को पहले पुष्प अर्पित किए, फिर भोग लगाने के बाद दीपक जलाया। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रिंकू सिंह को विशेष पूजा-अर्चना कराई। इस दौरान रिंकू ने परिवार की सुख-समृद्धि के साथ-साथ देशवासियों की खुशहाली की कामना की। रिंकू सिंह बोले- वर्ल्ड कप जीतने के बाद अब मां के दर्शन करने आया हूं। रिंकू ने फैंस के साथ फोटो खिंचाईं रिंकू सिंह की एक झलक पाने के लिए मंदिर के बाहर भीड़ लग गई। वह जैसे ही दर्शन करके बाहर निकले, फैंस के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। रिंकू ने कहा कि देशवासियों और ब्रजवासियों से हम लोगों को बहुत प्रेम मिला है। हम इसे कभी नहीं भूल पाएंगे। रिंकू के साथ उत्तर प्रदेश की रणजी टीम के सदस्य अंश द्विवेदी भी थे। मंदिर में पूजा करने के बाद रिंकू सिंह ईंधन स्टेशन पहुंचे। यहां इंडियन ऑयल के क्षेत्रीय अधिकारी लक्की गौतम ने उन्हें बुके भेंट किया। ​वर्ल्ड कप के 5 मैचों में मौका मिला रिंकू सिंह को 2024 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के स्क्वॉड में जगह नहीं मिली थी। वे ट्रैवलिंग रिजर्व थे। लेकिन, इस टी-20 वर्ल्ड कप में उन्हें मौका मिला। उन्होंने भारत के लिए अपना पहला वर्ल्ड कप खेला। टूर्नामेंट में उन्होंने 5 मैच खेले, जिसमें कुल 24 रन बनाए। पिता के अंतिम संस्कार के बाद रिंकू सिंह श्मशान घाट से घर लौट रहे थे। उस वक्त उनकी आंखों में आंसू थे। 27 फरवरी को रिंकू के पिता खानचंद नहीं रहे रिंकू के पिता खानचंद सिंह का 27 फरवरी की सुबह 4.36 बजे अलीगढ़ में निधन हो गया था। उनके पिता फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। वह 60 साल के थे। रिंकू पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने अलीगढ़ पहुंचे। पिता के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद रिंकू ने टीम इंडिया को जॉइन किया। विश्वकप जीतने के बाद रिंकू सिंह ने अपने दिवंगत पिता के लिए इमोशनल पोस्ट किया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा था- पापा आज ट्रॉफी हाथ में है। बस आप साथ नहीं हो। आपका सपना पूरा हो गया। रिंकू सिंह ने आगे लिखा- ‘आपसे बात किए बिना इतने दिन कभी नहीं निकले। मुझे नहीं पता आगे की जिंदगी आपके बिना कैसे चलेगी। पर मुझे हर कदम पर आपकी जरूरत पड़ेगी। आपने सिखाया था कि फर्ज सबसे आगे है। तो फील्ड पर बस आपका सपना पूरा करने की कोशिश कर रहा था। अब आपका सपना पूरा हो गया है, तो बस यही लगता है कि काश आप मेरे पास होते। हर छोटी-बड़ी खुशी में आपकी कमी खलेगी। बहुत मिस करूंगा आपको पापा। बहुत ज्यादा।’ रिंकू-प्रिया सरोज की 2025 में सगाई हुई, IPL के बाद शादी होनी है रिंकू और सपा सांसद प्रिया सरोज की सगाई हो चुकी है। दोनों इसी साल जून, 2026 में 7 फेरे लेने वाले हैं। पिछले साल लखनऊ में रिंकू और प्रिया की रिंग सेरेमनी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि पिता के निधन के बाद रिंकू की शादी की तारीख पर परिवार फिर से विचार कर सकता है। यह तस्वीर 6 अगस्त 2025 की है। इस दिन रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की सगाई हुई थी। रिंकू के माता-पिता के साथ सपा चीफ अखिलेश यादव भी मौजूद थे। मई में हो सकती है रिंकू-प्रिया की शादी इससे पहले दो बार रिंकू-प्रिया की शादी की तारीख आगे बढ़ी थी। 18 नवंबर, 2025 को पहली तारीख तय हुई, लेकिन क्रिकेट सीरीज के कारण टल गई। ​फरवरी, 2026 को दूसरी तारीख निकली, लेकिन वर्ल्ड कप के चलते कैंसिल करनी पड़ी। रिंकू के बड़े भाई सोनू सिंह ने बताया था कि IPL, 26 मार्च से 31 मई के बीच प्रस्तावित है। जब रिंकू IPL से फ्री होंगे, तभी शहनाई बजेगी। शादी काशी में होगी। रिसेप्शन अलीगढ़ में रखा जाएगा। ………… ये खबर भी पढ़िए- BCCI टीम इंडिया को ₹131 करोड़ देगा:यह पैसा खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ मे बंटेगा; भारत तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने पर टीम इंडिया के लिए 131 करोड़ रुपए के इनाम का ऐलान किया है। यह पैसा खिलाड़ियो और सपोर्ट स्टाफ में बंटेगा। भारत ने रविवार को टी-20 वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया था। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया और ट्रॉफी जीती थी। इसके साथ ही टीम इंडिया ने अपना खिताब बरकरार रखा और टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में लगातार दो बार ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन गई। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Puri Jagannath Temple Ratna Bhandar Counting Begins March 25

Puri Jagannath Temple Ratna Bhandar Counting Begins March 25

Hindi News National Puri Jagannath Temple Ratna Bhandar Counting Begins March 25 | 48 Saal Baad पुरी13 घंटे पहलेलेखक: प्रियंका साहू कॉपी लिंक तस्वीर 14 जुलाई 2024 की है। हाईकोर्ट के आदेश पर रत्न भंडार खोलने से पहले लकड़ी के 6 बड़े-बड़े संदूक लाए गए। बाहरी रत्न भंडार से निकले आभूषण इन्हीं में रखे गए हैं। पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की बहुप्रतीक्षित गिनती और लिस्ट बनाने की प्र​क्रिया आखिर शुरू होने जा रही है। ओडिशा सरकार ने 25 मार्च को दोपहर 12.12 बजे से 1.45 बजे का शुभ मुहूर्त तय किया है। ‘रत्न भंडार’ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषणों का खजाना है। 1978 की गिनती के अनुसार, यहां 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी के आभूषण हैं। ये गिनती 72 दिन चली थी। रत्न भंडार काउंटिंग की पूरी प्र​क्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त करने पर सहमति जताई है, जबकि राष्ट्रीयकृत बैंक पंजीकृत सुनार उपलब्ध कराएंगे। मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस बार गि​नती कितने दिन चलेगी, यह कहना जल्दबाजी होगा। राज्य सरकार दो रत्नविज्ञानी भी उपलब्ध कराएगी, जो आभूषणों में लगे बेशकीमती रत्नों की पहचान करेंगे। बाहरी रत्न भंडार में भगवान के दैनिक उपयोग के आभूषण रखे जाते हैं। खजाने से रोज चाबी लाएंगे मजिस्ट्रेट, उसी दिन जमा भी करनी होगी गहनों की गिनती के लिए राज्य सरकार ने एसओपी जारी की है। तीन सदस्यीय पैनल प्र​क्रिया की निगरानी करेगा। सोने, चांदी और अन्य कीमती आभूषणों के लिए अलग-अलग बॉक्स होंगे। 10 लोग आभूषणों को बॉक्स में रखेंगे। मजिस्ट्रेट खजाने से रोज रत्न भंडार की चाभी लेकर आएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी दिन वापस जमा करेंगे। अप्रैल 2024: चाबियां गुमीं, नहीं खुल सका रत्न भंडार ओडिशा हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे। हालांकि, 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर जब 16 लोगों की टीम रत्न भंडार के चेंबर तक पहुंची तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि ये दावा किया गया कि रत्न भंडार की चाबी खो गई है। चाबी नहीं मिली तो हंगामा हुआ जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच कमेटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया और चाबी का कुछ पता नहीं चल सका। 2018 में तत्कालीन कानून मंत्री प्रताप जेना ने विधानसभा में बताया था कि रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं। इनमें कीमती पत्थर लगे हैं। साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान हैं। पिछले साल अगस्त में जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि रत्न भंडार 2024 की वार्षिक रथ यात्रा के दौरान खोला जाए। जुलाई 2024: जगन्नाथ मंदिर में 46 साल बाद खजाना निकला 18 जुलाई को ओडिशा के पुरी में महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर के भीतरी रत्न भंडार में रखा खजाना निकाला गया था। इस काम के लिए राज्य सरकार की तरफ से गठित हाई कमेटी के 11 सदस्य गुरुवार सुबह 9:15 बजे भीतरी भंडार के अंदर गए थे। उन्हें यहां मोटे कांच की तीन और लोहे की एक (6.50 फुट ऊंची, 4 फुट चौड़ी) अलमारियां मिलीं थीं। इसके अलावा 3 फीट ऊंचे और 4 फीट चौड़े लकड़ी के दो संदूक और एक लोहे का संदूक था। सभी के अंदर कई सारे बॉक्स रखे हुए थे, जिनमें सोना था। टीम के एक सदस्य ने एक बॉक्स को खोलकर देखा गया था। इसके बाद अलमारी और संदूकों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो इतने भारी थे कि जगह से हिले तक नहीं। फिर तय हुआ कि सभी बॉक्स से खजाने को निकालकर महाप्रभु के शयन कक्ष में शिफ्ट किया जाए। टीम को इस काम को करने में 7 घंटे लग गए थे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Kejriwal Delhi Liquor Policy Acquitted; Hanuman Temple Visit

Kejriwal Delhi Liquor Policy Acquitted; Hanuman Temple Visit

नई दिल्ली13 मिनट पहले कॉपी लिंक 27 फरवरी को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट के बाहर बयान देते समय अरविंद केजरीवाल रोने लगे थे। मनीष सिसोदिया ने उन्हें ढाढस बंधाया था। दिल्ली के पूर्व सीएम और AAP नेता अरविंद केजरीवाल आज दोपहर करीब 12 बजे कनॉट प्लेस पहुंचेंगे। वे यहां हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे। उनके साथ मनीष सिसोदिया, AAP सांसद संजय सिंह समेत अन्य नेता भी होंगे। एक दिन पहले ही दिल्ली शराब नीति से जुड़े सीबीआई मामले में केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 लोगों को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में बरी किया। कल शाम केजरीवाल ने AAP दफ्तर में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी और अमित शाह ने हमारे खिलाफ षड्यंत्र रचा। वे AAP को हरा नहीं पाए तो खत्म करने जुट गए। उन्होंने कहा कि मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई, कोर्ट में ये साबित हो गया। दरअसल, दिल्ली शराब नीति केस 2021-22 की आबकारी नीति में घोटाले का नाम है। आरोप है कि केजरीवाल की सरकार के दौरान नई शराब नीति में लाइसेंस देने और मार्जिन तय करने में अनियमितताएं हुईं। इससे कुछ निजी कारोबारियों को फायदा पहुंचा। बाद में यह नीति वापस ले ली गई। CBI केस में आरोपियों को बरी किया गया है। ED मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है। ED मामले में भी बरी हो सकते हैं केजरीवाल अगस्त 2022 में CBI की चार्जशीट के आधार पर ED ने भी इस मामले में केस दर्ज किया था। ED के मामले भी अभी सुनवाई जारी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि CBI मामले में केजरीवाल समेत अन्य लोगों के बरी होने के कारण ये सभी ED मामले में भी बरी हो सकते हैं। क्योंकि ED का मामला अब कमजोर पड़ गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट की 4 बड़ी बातें कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को बरी किया। कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। चार्जशीट में विरोधाभास हैं, जो कथित साजिश (आरोपों) की पूरी थ्योरी को कमजोर करते हैं। अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी (आईओ) के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। आबकारी नीति पर: आबकारी नीति के निर्माण में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी। अभियोजन पक्ष (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच पर खरा नहीं उतरता। CBI ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसका सिद्धांत ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित था। केजरीवाल पर: केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। मुख्य आरोपी कुलदीप पर: मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को बरी करते हुए कहा कि हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी। मनीष सिसोदिया पर: सिसोदिया पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन अदालत ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई। केजरीवाल बोले- मैंने जिंदगी में सिर्फ इज्जत और ईमानदारी कमाई शुक्रवार को केजरीवाल ने कहा था कि मैंने जिंदगी में इज्जत और ईमानदारी कमाई है। एक पैसा नहीं कमाया, ये लोग उसी पर चोट करना चाहते थे। इसलिए षड्यंत्र रचा। कोर्ट में आज साफ हुआ केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदारी हैं। इस षडयंत्र के कारण मेरे परिवार को बहुत परेशानी हुई। मेरी मां अस्पताल गईं, वो बहुत रोईं। सिसोदिया की पत्नी को गंभीर बीमारी है। मोदी और शाह के षड़यंत्र के कारण दिल्ली के 3 करोड़ लोग खामियाजा भुगत रहे हैं। मेरा चैलेंज है। दिल्ली में आज चुनाव करा दो अगर बीजेपी की 10 से ज्यादा सीटें आ जाएं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। पूर्व CM ने कहा कि कई लोग कहते हैं कि जेल से आने के बाद केजरीवाल क्यों चुप हो गया। नेताओं को फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी चमड़ी मोटी है। लेकिन मैं कोई नेता नहीं हूं। मुझे फर्क पड़ता है। मेरे परिवार पर पत्थर उछाले गए, मुझे फर्क पड़ता है। केजरीवाल ने कहा-आज मेरे दिल से बड़ा बोझ उतर गया है। एक समय AAP के टॉप 5 नेता जेलमें थे, लेकिन कुछ नहीं बिगाड़ सके। अब तो केवल कत्ल कराकर ही केजरीवाल को कंट्रोल कर सकते हैं। बिना कत्ल कराए ये लोग केजरीवाल को संभाल नहीं सकते हैं। BJP का पोस्टर- AAP के पाप अभी पाप धुले नहीं हैं केजरीवाल-सिसोदिया के बरी होने के फैसले पर भाजपा ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी किया है। यह एक तकनीकी पहलू है और CBI आगे की कार्रवाई करेगी। अगर घोटाले के आरोप निराधार थे तो आरोप तय कैसे हुए? भाजपा आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने कहा कि फैसला निचली अदालत का है और उच्च अदालतों में इसकी जांच हो सकती है। कानूनी प्रक्रिया अभी बहुत दूर तक बाकी है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ईमानदार थे तो अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद नीति वापस क्यों ली गई? फोन और सिम कार्ड नष्ट करने तथा वेंडरों की संख्या घटाकर कमीशन 6% से 12% करने जैसे फैसलों क्यों लिए गए। दिल्ली भाजपा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी किया, जिसमें लिखा है- AAP के पाप अभी पाप धुले नहीं हैं। ………………….. दिल्ली शराब नीति पर CAG रिपोर्ट- 2026 करोड़ का नुकसान: केजरीवाल सरकार ने फैसलों पर LG की मंजूरी नहीं ली, लाइसेंस में गड़बड़ी; नेताओं को घूस पिछले साल दिल्ली में शराब नीति को लेकर CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट लीक हुई। इसमें सरकार को 2026 करोड़ रुपए का रेवेन्यू लॉस होने की बात कही थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि शराब नीति में काफी गड़बड़ियां थीं, जिनमें लाइसेंस देने में खामी भी शामिल है। इसके साथ ही आप लीडर्स को कथित तौर पर घूस के जरिए फायदा पहुंचाया गया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

Honey Singh’s Faith Connection: Neeleshwar Mahadev Temple Haridwar

नीलेश्वर महादेव के मंदिर में शिवलिंग पर दूध और दही अर्पित करते हनी सिंह। उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित प्राचीन नीलेश्वर महादेव मंदिर पंजाबी और बॉलीवुड सिंगर हनी सिंह का फेवरेट है। मंदिर के महंत हरिदास का दावा है कि सिंगर के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव और उनके म्यूजिक कमबैक में इस मंदिर की अहम भूमिका रही है। उनके अनुसार, . महंत बताते हैं कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह ने यहां साधना और अभिषेक किया, तो उनके भीतर गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन देखने को मिला। उनका कहना है कि महादेव की कृपा से सिंगर को मानसिक संतुलन, नई ऊर्जा और जीवन की नई दिशा मिली। महंत हरिदास के अनुसार, नीलेश्वर महादेव मंदिर में उन्हें जो आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिली, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ और यही जुड़ाव उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता लेकर आया। हरिद्वार के नीलेश्वर महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग। पहले 3 पॉइंट्स में नीलेश्वर मंदिर के बारे में जानिए नील पर्वत पर स्थित प्राचीन शिव धाम: हरिद्वार-नजीबाबाद रोड पर चंडी घाट के पास नील पर्वत क्षेत्र में स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन शिव धामों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां स्थित स्वयंभू शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सुबह-शाम आरती होती है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पौराणिक कथाओं और शिव परंपरा से जुड़ा स्थल: मंदिर के पुजारी राघव भारती के अनुसार, यह स्थान सतयुग काल से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि यहीं से भगवान शिव ने अपनी जटा से वीरभद्र को उत्पन्न कर दक्ष यज्ञ का विध्वंस कराया था। यह भी कहा जाता है कि समुद्र मंथन से निकला विष पीने के बाद भगवान शिव इसी क्षेत्र से नीलकंठ की ओर विश्राम के लिए गए, जिसके कारण पर्वत और गंगा का जल नीला पड़ गया और यह क्षेत्र नील पर्वत व नील गंगा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। विशेष पूजा परंपराएं और मनोकामना पूर्ति की मान्यता: नीलेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल और दूध से अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि एक लोटा गंगाजल चढ़ाने से तीर्थफल की प्राप्ति होती है, सोमवार को पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और पूर्णिमा पर अभिषेक करने से विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रद्धालु यहां तन-मन के कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं। हनी सिंह कोरोना काल के बाद से लगातार इस मंदिर में आकर अभिषेक करते हैं। अब महंत के अनुसार समझिए हनी सिंह के लिए क्यों खास है मंदिर पहली बार अभिषेक में भावुक हुए हनी सिंह मंदिर के महंत हरिदास के अनुसार, जब हनी सिंह पहली बार नीलेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक करने पहुंचे तो वे बेहद भावुक हो गए थे। महंत बताते हैं कि उन्होंने पंजाबी रैपर से कहा था कि जो श्रद्धालु इस शिवलिंग को अपने हाथों में भर लेते हैं, उनके अवगुण दूर हो जाते हैं। महंत के अनुसार, जैसे ही सिंगर ने शिवलिंग को अपनी भुजाओं में भरा, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे गहरे आध्यात्मिक भाव में डूब गए। चार घंटे तक तल्लीन होकर किया अभिषेक महंत बताते हैं कि पहली पूजा के दौरान हनी सिंह लगभग चार से साढ़े चार घंटे तक एक ही आसन पर बैठकर अभिषेक करते रहे। उनके अनुसार, वह दृश्य ऐसा था मानो कोई भक्त लंबे समय बाद अपने आराध्य से मिला हो। महंत का कहना है कि उस साधना के बाद उनके भीतर आध्यात्मिक परिवर्तन स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। महंत कहते हैं कि अभिषेक के दौरान हनी सिंह के अंदर दिव्य भक्ति भाव दिखता है। हर 90 दिन में अभिषेक, ऊर्जा का स्रोत मानते हैं महंत हरिदास के अनुसार, हनी सिंह अब हर तीन महीने में मंदिर आकर अभिषेक कराते हैं। उनका कहना है कि सिंगर स्वयं बताते हैं कि यदि यह अभिषेक समय पर न हो तो उनकी ऊर्जा कम होने लगती है, जबकि पूजा के बाद वे स्वयं को अत्यंत ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करते हैं। महादेव भक्ति से आया जीवन में परिवर्तन महंत का दावा है कि कठिन दौर के बाद जब हनी सिंह महादेव की शरण में आए, तो उनके जीवन में स्थिरता और सकारात्मकता आई। उनके अनुसार, आज सिंगर के चेहरे की मुस्कान, उनकी ओजस्वी वाणी और व्यक्तित्व में दिखाई देने वाला संतुलन महादेव की कृपा और जागृत भक्ति का परिणाम है। दुनिया देखी, पर ऐसी शांति कहीं नहीं मिली महंत हरिदास के मुताबिक, हनी सिंह ने उनसे कहा कि उन्होंने दुनिया देखी है, लेकिन नीलेश्वर महादेव मंदिर में बैठकर जो शांति, प्रेम और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है, वैसा अनुभव उन्हें कहीं और नहीं हुआ। महंत का कहना है कि यही जुड़ाव उन्हें बार-बार इस धाम की ओर खींच लाता है। 2014 में गायब हुए, इंटरव्यू में बताई बाइपोलर डिसऑर्डर की जंग यो यो हनी सिंह 2014 के आसपास अचानक म्यूजिक इंडस्ट्री और सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। उस समय वे करियर के शिखर पर थे, लेकिन इसके बाद न नए गाने आए, न लाइव शो और न ही मीडिया में उनकी मौजूदगी दिखाई दी। उनकी अनुपस्थिति को लेकर लंबे समय तक तरह-तरह की अटकलें लगती रहीं। बाद में एक इंटरव्यू में हनी सिंह ने खुलासा किया कि वे बाइपोलर डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। उन्होंने बताया कि यह दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन था, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक इलाज और एकांत में रहना पड़ा। इसी चुनौतीपूर्ण दौर के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और वर्षों बाद नए दृष्टिकोण के साथ संगीत जगत में वापसी की। 2021 में किया कमबैक, छवि पूरी तरह बदली 2021 के आसपास हनी सिंह ने फिर से म्यूजिक इंडस्ट्री में सक्रिय होना शुरू किया। नए गानों, लाइव परफॉर्मेंस और सार्वजनिक उपस्थितियों के जरिए उन्होंने वापसी की। यह वापसी केवल पेशेवर नहीं बल्कि एक बदले हुए व्यक्तित्व के साथ देखी गई। पहले जहां वे विवादों और पार्टी कल्चर से जुड़े नजर आते थे, वहीं अब वे अधिक शांत, संतुलित और आध्यात्मिक झुकाव वाले व्यक्तित्व के रूप में दिखाई देते हैं। महंत भी इस बदलाव को महादेव की भक्ति से जोड़ते हैं। नीलेश्वर