Sabarimala Temple Women Entry | SC Hearing on Hindu Faith vs Rights

नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री की इजाजत दी थी। इस फैसले के लिए याचिकाओं पर अब सुनवाई हो रही है। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज 5वें दिन सुनवाई होगी। आज भी मंदिर प्रबंधन और याचिकाकर्ताओं के बीच आस्था बनाम संवैधानिक अधिकारों को लेकर तीखी बहस होने की संभावना है। 9 जजों की बेंच ने 15 अप्रैल को पिछली सुनवाई में कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। साथ ही यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता। वहीं मंदिर प्रशासन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने कहा कि सबरीमाला कोई खिलौने की दुकान या रेस्टोरेंट का मामला नहीं है। यहां के देवता ब्रह्मचारी हैं। भारत में अयप्पा के लगभग 1,000 मंदिर हैं। अगर महिलाओं को दर्शन करना है, तो वहां जाएं। उन्हें इसी खास मंदिर में क्यों आना है। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है। 7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछले 4 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता सबरीमाला केस से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… अपडेट्स 26 मिनट पहले कॉपी लिंक 9 जजों की बेंच कर रही सबरीमाला केस की सुनवाई 26 मिनट पहले कॉपी लिंक सबरीमाला सहित 5 मामले, जिन पर SC फैसला करेगा 1. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में जाने का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि यह फैसला सही था या नहीं। 2. दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: एडवोकेट सुनीता तिवारी ने 2017 में इसके खिलाफ याचिका दायर की और कहा कि यह प्रथा महिलाओं के साथ भेदभाव करती है और यह नाबालिग बच्चियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? 3. मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने 2016 में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट तय करेगा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। 4. पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने हिंदू व्यक्ति से शादी के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या गैर-पारसी से शादी करने पर पारसी महिला को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है। 4. मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या धार्मिक गतिविधियों में जेंडर के आधार पर भेदभाव को क्या मौलिक अधिकार का हनन माना जा सकता है? 27 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई गाइडलाइन बन सकती है 28 मिनट पहले कॉपी लिंक सबरीमाला मंदिर केस की टाइमलाइन, 36 साल से यह मामला अदालतों में दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Kerala Sabarimala Temple Women Entry Ban LIVE Update; Supreme Court TDB

Hindi News National Kerala Sabarimala Temple Women Entry Ban LIVE Update; Supreme Court TDB | Hindu Beliefs नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री की इजाजत दी थी। इस फैसले के लिए याचिकाओं पर अब सुनवाई हो रही है। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 5वें दिन की सुनवाई शुरू हो गई है। 9 जजों की बेंच ने 15 अप्रैल को पिछली सुनवाई में कहा था कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना सबसे मुश्किल कामों में से एक है। साथ ही यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता। वहीं मंदिर प्रशासन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने कहा कि सबरीमाला कोई खिलौने की दुकान या रेस्टोरेंट का मामला नहीं है। यहां के देवता ब्रह्मचारी हैं। भारत में अयप्पा के लगभग 1,000 मंदिर हैं। अगर महिलाओं को दर्शन करना है, तो वहां जाएं। उन्हें इसी खास मंदिर में क्यों आना है। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में बैन हटा दिया। फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गईं, जिसपर अब सुनवाई हो रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है। 7 सवाल, जिनपर सुप्रीम कोर्ट में बहस हो रही सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई है। पहले 3 दिन, 9 अप्रैल तक सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। पिछले 4 दिन की सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए… 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा 15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता सबरीमाला केस से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… लाइव अपडेट्स 14 मिनट पहले कॉपी लिंक सबरीमाला में एक ही संप्रदाय भगवान अयप्पा का एडवोकेट वेंकटेश: मैं नियमित रूप से सबरीमाला जाता हूं। पारंपरिक हिंदू धर्म में, किसी भी तीर्थयात्रा के दौरान, सभी जातियों और समुदायों के बीच के भेद मिट जाते हैं। सभी लोग एक समान ‘वर्ग’ का हिस्सा बन जाते हैं। जब हम सबरीमाला जाते हैं, तो वहां कोई जाति/वर्ग नहीं होता; वहां केवल एक ही चीज होती है जो सबको एक साथ रखती है,वह है भगवान अयप्पा का संप्रदाय, जिसमें सभी तरह के भक्त शामिल होते हैं। ‘संप्रदाय’ शब्द हिंदुओं के सभी वर्गों के आपसी मेल-जोल के लिए इस्तेमाल होता है। यह व्यवस्था स्थिर-जड़ नहीं होनी चाहिए। इसका मतलब है कि हिंदुओं के किसी भी वर्ग को मंदिर में जाने की परमिशन है; लेकिन जब आर्टिकल 26(b) की बात आती है, तो यह अधिकार केवल अपने इंटरनल मैनेजमेंट तक ही सीमित होता है। इसे ऐसे समझते हैं कि कई लोग सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही देखने आते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मामलों का प्रशासनिक प्रबंधन और संचालन असल में रजिस्ट्रार ही करता है। जो कोई भी वहां जाता है, वह आर्टिकल 26(b) के आधार पर यह दावा नहीं कर सकता कि वह सुप्रीम कोर्ट के मामलों को मैनेज करेगा। 19 मिनट पहले कॉपी लिंक ऐसी नीति बनाई जाए जिससे दान को भी आर्टिक 25(2)(a) का संरक्षण मिले एड. वेंकटेश: एक और उदाहरण लेते हैं, दान। दान अपने आप में एक धर्मनिरपेक्ष कार्य हो सकता है। लेकिन धार्मिक दान धर्म के दायरे में आता है और उसमें किसी तरह का दखल नहीं दिया जाना चाहिए। अब यह हो रहा है कि हमने धार्मिक दान के दायरे को बढ़ाकर उसे दान के दायरे में ला दिया है। फिर हम कहते हैं कि यह एक धर्मनिरपेक्ष कार्य है और उसमें दखलअंदाजी शुरू कर देते हैं। इसलिए एक ऐसी न्यायिक नीति बनाई जानी चाहिए कि एक बार जब कोई मामला धर्म के क्षेत्र में आ जाए तो दान-पुण्य को भी उसके मूल स्वरूप में, आर्टिकल 25(2)(a) के तहत संरक्षण मिले। 45 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार का धर्म की बाहरी चीजों पर कंट्रोल, मान्यताएं-प्रथाएं तय नहीं कर सकती एडवोकेट वेंकटेश: मुझे आर्टिकल 25(1) से कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि यह हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक आस्था मानने की आजादी देता है। लेकिन अनुच्छेद 25(2)(a) का मतलब सिर्फ इतना है कि सरकार उन चीजों को नियंत्रित कर सकती है जो धर्म से जुड़ी तो हैं, लेकिन असल में आर्थिक, सामाजिक या प्रशासनिक (यानी गैर-धार्मिक) गतिविधियां हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार धर्म के मूल हिस्से (कोर प्रैक्टिस) में दखल दे सकती है। अगर कोई कानून यह कहकर दखल देता है कि वह व्यवस्था सुधार रहा है, लेकिन असल में यह तय करने लगता है कि कौन-सी धार्मिक प्रथा “जरूरी” है और कौन-सी नहीं, और इससे लोगों की धार्मिक आजादी कम होती है, तो यह अनुच्छेद 13(2) का उल्लंघन माना जाएगा, यानी ऐसा कानून गलत होगा। लेकिन हमने जो किया, उससे पूरा सिद्धांत ही उलट गया है। हमने धार्मिक कानून को धर्मनिरपेक्ष प्रथाओं के साथ जोड़कर पढ़ना शुरू कर दिया, फिर धार्मिक प्रथाओं को एक दायरे में सीमित कर दिया है और धर्मनिरपेक्ष प्रथाओं में दखल देने का रास्ता खोल दिया है। 54 मिनट पहले कॉपी लिंक धर्म और राज्य का एक-दूसरे के काम में दखल होता है, यही टकराव स्पष्ट हो एडवोकेट वेंकटेश: एक ओर तो हम यह दावा करते हैं कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं, क्योंकि हम धार्मिक मामलों में कोई दखल नहीं देते। वहीं दूसरी ओर, हम यह भी अपेक्षा करते हैं कि राज्य के ‘धर्मनिरपेक्ष पहलुओं’ के दायरे में धर्म का कोई, दखल नहीं होना चाहिए। इन दोनों के बीच कुछ न कुछ ‘टकराव’ और ‘अतिव्याप्ति’ (इंटरनसेक्शन) तो जरूर है। इस दुनिया में कोई भी चीज पूरी तरह ‘निरपेक्ष’ नहीं होती। लेकिन फिर भी यह टकराव और अतिव्याप्ति बहुत कम होनी चाहिए। बेहद छोटी और
Kerala Sabarimala Temple Women Entry Case; Supreme Court

Hindi News National Kerala Sabarimala Temple Women Entry Case; Supreme Court | Hindu Beliefs नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री और धर्मस्थलों पर भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को चौथे दिन सुनवाई होगी। 14 अप्रैल से 16 अप्रैल के दौरान सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री के समर्थन में दलीलें रखी जाएंगी। इससे पहले 7 से 9 अप्रैल तक सुनवाई के दौरान महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखी गईं। केंद्र सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की बेंच ने कहा था कि मंदिरों और मठों में एंट्री का अधिकार सभी लोगों को होना चाहिए। किसी एक संप्रदाय को बाहर रखना हिंदू धर्म पर नकारात्मक असर डालेगा। इससे समाज बंटेगा। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में सबरीमाला में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए बैन हटा दिया। इसके बाद दायर पुनर्विचार याचिकाओं के आधार पर 7 महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न तय किए गए हैं, जिन पर अब बहस हो रही है। सुप्रीम कोर्ट में 3 सुनवाई में अब तक क्या हुआ 7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता: महिलाओं की मंदिर में एंट्री पर 2018 का फैसला गलत तरीके से लिया गया। उन्हें मंदिर में न जाने देना उनका अपमान करना नहीं है। भारत में उन्हें पूजा जाता है। हमें इस बात पर ऐतराज है कि मंदिर की इस परंपरा को ‘अस्पृश्यता’ (छुआछूत या अनुच्छेद 17) कहा गया। छुआछूत जाति के आधार पर होती थी, यह मामला उससे अलग है। जैसे हम मस्जिद, मजार या गुरुद्वारे में जाते समय सिर ढंकते हैं, वैसे ही सबरीमाला की भी एक अनोखी परंपरा है, जिसका सम्मान होना चाहिए। ये धार्मिक आस्था और संप्रदाय की स्वायत्तता का मुद्दा है, जो न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है। पूरी खबर पढ़ें… 8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को कैसे चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर 7 सवाल तय किए हैं। इनमें से एक सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से संबंधित नहीं है, उस ‘धार्मिक संप्रदाय या समूह’ की किसी प्रथा को जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से चुनौती दे सकता है। पूरी खबर पढ़ें… 9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला केस की सुनवाई के दौरान मंदिरों के रीति-रिवाजों का जिक्र हुआ। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि मंदिरों में सिर्फ खास समुदाय की एंट्री और बाहरी लोगों की मनाही से समाज बंटेगा। यह हिंदु धर्म के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मान लीजिए (सबरीमाला केस को छोड़कर), अगर यह कहा जाए कि सिर्फ गौड़ सारस्वत लोग ही एक मंदिर में आएं या कांची मठ के लोग सिर्फ कांची ही जाएं, दूसरे मठ (जैसे शृंगेरी) न जाएं तो यह ठीक नहीं होगा। बल्कि जितने ज्यादा लोग अलग-अलग मंदिरों और मठों में जाएंगे, उतना ही धर्म मजबूत बनेगा। पूरी खबर पढ़ें… सबरीमाला मामले पर सुनवाई करने वाले 9 जजों के नाम सबरीमाला सहित 5 मामले, जिन पर SC फैसला करेगा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में जाने का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि यह फैसला सही था या नहीं। दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: एडवोकेट सुनीता तिवारी ने 2017 में इसके खिलाफ याचिका दायर की और कहा कि यह प्रथा महिलाओं के साथ भेदभाव करती है और यह नाबालिग बच्चियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने 2016 में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट तय करेगा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने हिंदू व्यक्ति से शादी के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या गैर-पारसी से शादी करने पर पारसी महिला को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या धार्मिक गतिविधियों में जेंडर के आधार पर भेदभाव को क्या मौलिक अधिकार का हनन माना जा सकता है? दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Mahakal Temple Bhasma Aarti Booking Changes: Online Permission Now

महाकालेश्वर मंदिर की भस्मारती की परमिशन को लेकर मंदिर समिति ने बड़ा बदलाव किया है। एक दिन पहले मिलने वाली नि:शुल्क ऑफलाइन परमिशन को बंद कर अब उसे भी ऑनलाइन कर दिया गया है। साथ ही तीन माह पहले होने वाली भस्मारती की बुकिंग का समय बदलकर उसे एक माह कर दिय . महाकालेश्वर मंदिर समिति ने भस्मारती परमिशन के नियमों को लेकर दो बड़े बदलाव किए हैं। श्रद्धालुओं को जहां सुविधा दी है, तो वहीं नि:शुल्क मिलने वाली भस्मारती परमिशन के लिए भी श्रद्धालुओं को 200 रुपए चुकाने होंगे। भस्मारती के दौरान श्रृद्धालु। परमिशन के लिए घंटों खड़ा नहीं होना पड़ेगा महाकाल मंदिर में करीब 1700 भस्म आरती की परमिशन रोजाना ऑनलाइन और ऑफलाइन के माध्यम से होती थी। जिसमें 300 परमिशन ऑफलाइन होती थी जिसमें श्रद्धालुओं को एक दिन पहले महाकाल मंदिर के काउंटर पर करीब 5 से 6 घंटे लाइन में लगकर आरती की परमिशन के लिए खड़े होना पड़ता था। अब परिमशन के लिए श्रद्धालुओं घंटों तक खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। महाकाल मंदिर समिति ने 9 अप्रैल से ऑफलाइन परमिशन को पूरी तरह से बंद कर दिया है। श्रद्धालु एक दिन पहले होने वाली बुकिंग को तत्काल कोटे का नाम देकर 300 परमिशन एक दिन पहले ऑनलाइन बुक कर सकेंगे। इसके लिए महाकाल मंदिर की वेबसाइट https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/ के माध्यम से 200 रुपए प्रति श्रद्धालु को ऑनलाइन मंदिर समिति को देना होगा। भस्मारती के दौरान श्रृद्धालु। ऐसे की जा सकेगी बुकिंग तत्काल भस्मारती बुकिंग के लिए चयनित तिथि से 1 दिन पहले सुबह 8:00 बजे पोर्टल खुलेगा। (जैसे- यदि आपको 15 अप्रैल के लिए बुकिंग करनी है, तो पोर्टल 14 अप्रैल सुबह 8:00 बजे खुलेगा)। भस्मारती बुकिंग ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सुनिश्चित की जाएगी। बुकिंग सिर्फ 300 दर्शनर्थियों के लिए होगी। नियमित परमिशन की एक माह पहले खुलेगी विंडो महाकाल मंदिर की भस्मारती की सामान्य ऑनलाइन बुकिंग में बदलाव किया गया है। पहले विंडो तीन माह पहले खुलती थी, लेकिन नए नियम के तहत एक माह पहले खुलेगी। मई माह के लिए नियमित बुकिंग विंडो 21 अप्रैल 2026 को सुबह 8:00 बजे खुलेगी। जून माह एवं आगामी महीनों हेतु बुकिंग एक महीने पहले, हर माह की 1 तारीख को सुबह 8:00 बजे खुलेगी। जून की बुकिंग 1 मई से और जुलाई की बुकिंग 1 जून से प्रारंभ होगी। इस तरह तत्काल बुकिंग की जा सकेगी। संध्या आरती और शयन आरती में कर चुके हैं बदलाव महाकालेश्वर मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा और सुगम दर्शन व्यवस्था हेतु मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भगवान की नित्य होने वाली त्रिकाल आरती बुकिंग प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और ऑनलाइन कर दिया गया है। संध्या आरती और रात में होने वाली शयन आरती में भक्तों की उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने 19 फरवरी से श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्मारती की तरह संध्या आरती और शयन आरती में दर्शन के लिए भी ऑनलाइन बुकिंग शुरू की थी। इन दोनों आरती में भी भक्तों को प्रवेश के लिए 250-250 रुपए प्रति व्यक्ति चुकाने पड़ रहे है। शुल्क नहीं देने वाले भक्तों को चलित दर्शन की व्यवस्था की गई थी। संध्या आरती: इसके लिए बुकिंग पोर्टल प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे खुलेगा। बुकिंग होने के पश्चात आरती दर्शन हेतु अंतिम प्रवेश समय सायं 6 बजे तक। शयन आरती: इसके लिए बुकिंग पोर्टल प्रतिदिन शाम 4:00 बजे खुलेगा। बुकिंग होने के पश्चात आरती दर्शन हेतु अंतिम प्रवेश समय रात्रि 10 बजे तक। ये खबर भी पढ़ें… भस्म आरती में शामिल हुए मिलिंद सोमन और नितीश राणा विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भस्म आरती के दौरान फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन और क्रिकेटर नितीश राणा ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। दोनों सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में शामिल हुए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। नितीश राणा अपनी पत्नी साँची मारवाह के साथ, जबकि मिलिंद सोमन पत्नी अंकिता कोंवर के साथ रात करीब 2 बजे मंदिर पहुंचे।पूरी खबर पढ़ें
Priyanka Chopras Humble Seva at Golden Temple, Amritsar

12 दिन के भीतर दूसरी बार गोल्डन टेंपल पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा। बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल पहुंचीं। यहां उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद वह लंगर हॉल में गईं, जहां उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक बर्तन धोने की सेवा की। साथ ही लंगर के अन्य कामों में भी सहयोग किया। . प्रियंका चोपड़ा पिछले कुछ दिनों से अमृतसर में अपनी आने वाली फिल्म ‘अमरी’ की शूटिंग कर रही थीं। बीती रात उनकी शूटिंग पूरी हुई और काम खत्म होते ही वह सीधे गोल्डन टेंपल पहुंच गईं। इस दौरान प्रिंयका चोपड़ा ने गोल्डन टेंपल की मर्यादा का खास ख्याल रखा। वह व्हाइट कलर का शूट पहने नजर आईं। उनका सिर दुपट्टे से ढंका हुआ रहा। प्रिंयका चोपड़ा आम श्रद्धालु की तरह यहां रही। यह 12 दिन के भीतर उनकी दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 31 मार्च को भी यहां आई थीं और उस समय भी उन्होंने लंगर हॉल में सेवा की थी। फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद गोल्डन टेंपल पहुंची प्रियंका चोपड़ा। 18 साल की उम्र में 90 देशों की कंटेस्टेंट्स को पछाड़ मिस वर्ल्ड बनीं उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मीं प्रियंका चोपड़ा ने बचपन में कभी रंगभेद का सामना किया, तो कभी तानों से बचने के लिए बाथरूम में छिपकर खाना खाया। इन सबके बावजूद उन्होंने महज 18 साल की उम्र में 90 देशों की खूबसूरत कंटेस्टेंट्स को पीछे कर 2000 में मिस वर्ल्ड का खिताब अपने नाम किया। मिस वर्ल्ड जीतने के बाद प्रियंका ने पहले तमिल सिनेमा में एंट्री ली और फिर बॉलीवुड में। प्रियंका ने लगातार ऐतराज, कृष, फैशन, डॉन 2, अग्निपथ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम करते हुए खुद को बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस के बीच ला खड़ा किया, लेकिन फिर 2015 के बाद उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ दी। सालों बाद प्रियंका ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्होंने अपनी मर्जी से बॉलीवुड इंडस्ट्री से दूरी नहीं बनाई थी, बल्कि उन्हें कॉर्नर किया गया था। उन्हें मनमुताबिक काम नहीं दिया जा रहा था और वो लगातार होती पॉलिटिक्स से थक चुकी थीं। फिल्में मिलनी बंद हुईं तो प्रियंका की मां ने उनसे कहा था- तुम्हें कमाई का कोई दूसरा जरिया ढूंढना चाहिए। फिर क्या था, प्रियंका ने बतौर सिंगर करियर की दूसरी पारी शुरू की। इंग्लिश गानों से हॉलीवुड में जगह बनाने वालीं प्रियंका के लिए ये बदलाव अहम साबित हुआ। जहां भारत में जेंडर पे गेप एक अहम बहस का मुद्दा है, वहीं प्रियंका ने हॉलीवुड एक्टर्स के बराबर फीस लेकर इतिहास रचा। वो हॉलीवुड में सबसे ज्यादा काम करने वाली इंडियन एक्ट्रेस हैं। ***************** ये खबर भी पढ़ें: प्रियंका चोपड़ा ने गोल्डन टेंपल में माथा टेका: दुपट्टे से सिर ढंककर आईं; लंगर हॉल में जूठे बर्तन मांजने की सेवा की, गुरबाणी सुनी बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा मंगलवार को अमृतसर में गोल्डन टेंपल पहुंची। इस दौरान उन्होंने दरबार साहिब में माथा टेका। इसके बाद उन्होंने लंगर हॉल में जाकर जूठे बर्तन धोने की सेवा की। इसके अलावा लंगर हॉल के बाकी कामों में भी सहयोग किया। इस दौरान उन्होंने कुछ देर बैठकर गुरबाणी भी सुनी। (पढ़ें पूरी खबर)
Khabar Hatke- Parrot Sea Visit & Ghost Temple in School; Egg Fetches ₹25K

लद्दाख में मुर्गी के एक अंडे को एक शख्स ने ₹25 हजार में खरीदा। वहीं, नॉर्थ अमेरिका में एक तोते ने समुद्र में पानी के अंदर सैर की। उधर, उत्तराखंड के एक सरकारी स्कूल में भूत का मंदिर बनवाया गया। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Khabar Hatke Rajasthan Temple Tractor Climb; UP Farmer ₹14 Cr Notice; China Septic Tanker Baraat

राजस्थान में मंदिर तक पहुंचने वाली 800 सीढ़ियों पर उल्टा ट्रैक्टर चढ़ाया गया। वहीं, यूपी के एक गरीब किसान को ₹14 करोड़ का टैक्स नोटिस भेज दिया गया। उधर, चीन में सेप्टिक टैंकरों में दूल्हे की बारात निकाली गई। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
Bearded Ram in Odisha, Sri Raghunath Jew Temple, Ram Temple in Odisha, Rama Navami, Nayagarh district.

Hindi News National Bearded Ram In Odisha, Sri Raghunath Jew Temple, Ram Temple In Odisha, Rama Navami, Nayagarh District. प्रियंका साहू. नयागढ़ (ओडिशा)1 घंटे पहले कॉपी लिंक प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं। ओडिशा के नयागढ़ जिले में प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर है। यहां भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं। दोनों के सिर पर जटा भी है। माता सीता का चेहरा सीधा न होकर थोड़ा सा टेढ़ा है क्योंकि वे किसी और को न देखकर अपने स्वामी श्रीराम के चरणों को देख रही हैं। करीब 263 साल पहले मंदिर निर्माण के समय भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता तीनों की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनाकर स्थापित की गई थीं। तब से आज तक ये मूर्तियां वैसी की वैसी ही हैं। ये अनूठी मूर्तियां न पानी से खराब होती है, न ही किसी शृंगार से। देश में ऐसा अदभुत और अनोखा मंदिर संभवत: और कहीं नहीं है। वरिष्ठ पुजारी रंजन महापात्र करीब 40 साल से यहां पूजा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के 9 दिन तक भगवान अलग-अलग भेष धारण करते हैं। इनमें वनवासी, चित्रकूट, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और धनुर्धारी भेष आदि प्रमुख हैं। नौंवे दिन रामनवमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन प्रभु सोने के आभूषणों से सज्जित होते हैं। भगवान को रामनवमी समेत साल में 5 बार स्वर्ण शृंगार कराया जाता है। पूजक परिषद के अध्यक्ष प्रफुल्ल महापात्र ने बताया कि यहां पहले अत्रि मुनि का आश्रम था। जब राम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास के दौरान यहां रुके थे, तब उनकी वेशभूषा से अत्रि मुनि प्रभावित हुए थे। वे भगवान राम से बोले, “आपका ये वनवासी रूप चकित कर दे रहा है। कृपा कर यहां से न जाएं।’ तब भगवान राम बोले, “ऋषिवर आप 3 शालिग्राम रखिए। जब भी मेरा ये रूप आपको याद आए, तब आप ये शालिग्राम को देख लेना। नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर। शिखर पर 15-15 किलो के तीन सुनहरे कलश यह मंदिर कलिंग वास्तुकला शैली में बना है और तीन हिस्सों में बंटा है: भद्र मंडप, नाट मंडप और दर्शन मंडप। तीनों मंडप के शिखर पर 15-15 किलो के सोने के कलश स्थापित हैं। इसीलिए ये स्वर्ण कलश क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के ऊपर पहले सोने के कलश रखे गए हैं। इनके ऊपर चक्र स्थापित है। ऐसा अन्य किसी मंदिर में नहीं है। यह भुवनेश्वर से 112 किमी दूर स्थित है। मंदिर में सुबह से शाम तक विभिन्न तरह की पूजा होती है। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कई तरह के प्रसाद का भी भगवान को भोग लगाया जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Chhattisgarh Temple Ropeway Accident | Khallari Temple

महासमुंद जिले में स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में रोप-पे केबल टूटने से ट्रॉली नीचे गिर गई। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन सुबह करीब 10:30 बजे मंदिर पहुंचने के लिए बने रोपवे का केबल अचानक टूट गया। ट्रॉली में सवार 5 श्रद्धालु 20 फीट की ऊंचाई से नीचे गिर ग . हादसे में एक युवती की मौत हो गई है। 4 गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। सभी को तुरंत बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पलात रेफर किया गया है। जानकारी के मुताबिक श्रद्धालु देवी के दर्शन कर रोपवे से लौट रहे थे। पहले देखिए ये तस्वीरें- केबल टूटने से ट्रॉली झटके के साथ नीचे आ गई। नीचे गिरकर ट्रॉली के पार्ट टूट कर अलग हो गए। घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया गया है। दर्शन करके लौटते समय हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्रद्धालु दर्शन करके रोपवे से लौट रहे थे। केबल टूटने के बाद ट्रॉली अनियंत्रित हो गई। लगभग 20 फीट नीचे पहाड़ी की चट्टान से जा टकराई। इस जोरदार झटके के कारण ट्रॉली में बैठे लोगों को गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरातफरी मच गई और बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु दहशत में आ गए। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को निजी वाहनों की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। नवरात्र के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ चैत्र नवरात्र के कारण खल्लारी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। स्थानीय लोगों ने रोपवे के नियमित रखरखाव और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर इसका मेंटेनेंस किया जाता तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है। खल्लारी माता मंदिर के बारे में जानिए महासमुंद से 25 किमी. दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर खल्लारी माता का मंदिर स्थित है। प्रतिवर्ष क्वांर और चैत्र नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ इस दुर्गम पहाड़ी में दर्शन के लिए आती है। हर साल चैत्र मास की पूर्णिमा के अवसर पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर तक पहुंचने के लिए करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी होती है। ऐसा माना जाता है कि महाभारत युग में पांडव अपनी यात्रा के दौरान इस पहाड़ी की चोटी पर आए थे। ………………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… डोंगरगढ़ में रोप-वे ट्रॉली टूटकर गिरी: बाल-बाल बचे पूर्व गृहमंत्री पैकरा; प्रदेश महामंत्री भारत वर्मा को गंभीर चोट, रायपुर रेफर डोंगरगढ़ मां बमलेश्वरी मंदिर की रोपवे ट्राली गिरी। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी धाम में शुक्रवार को हादसा हो गया। श्रद्धालुओं से भरी रोपवे की एक ट्रॉली अचानक टूटकर जमीन पर गिर गई। इस हादसे में भाजपा प्रदेश महामंत्री भरत वर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें रायपुर ले जाया गया है। वहीं पूर्व मंत्री रामसेवक पैकरा इस हादसे में बाल-बाल बच गए। पढ़ें पूरी खबर…
Golden Temple AI Controversy: Yuvraj, Hardik Bareheaded | SGPC Outrage| Virat kohli| Ranveer singh

गोल्डन टेंपल, अमृतसर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से वीडियो-फोटो बनाकर बेअदबी का नया मामला सामने आया है। एक क्रिकेट फैन फेज ने गोल्डन टेंपल में क्रिकेटर्स और बॉलीवुड स्टार्स की फोटो फेसबुक पर शेयर की है। पहली फोटो में उन्होंने क्रिकेटर युवराज सिंह . इससे कुछ दिन पहले ही एक कंकाल की गोल्डन टेंपल की परिक्रमा और लंगर हॉल में जूते पहने AI वीडियो शेयर की गई थी। इसके अलावा एक व्यक्ति को जीप लेकर परिक्रमा में दिखाया गया था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) इसे लेकर सख्त एतराज जता चुकी है लेकिन बेअदबी का सिलसिला थम नहीं रहा है। अब नई फोटो पर भी SGPC ने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि इस मामले में अब केंद्र व राज्य सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए ताकि ऐसे आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में कोई इस तरह की बेअदबी न कर सके। जानिए, बेअदबी की नई फोटो में क्या.. पहली फोटो: इसमें क्रिकेटर युवराज सिंह, अर्शदीप सिंह, अभिषेक शर्मा और उनकी मां को दिखाया गया है। इसमें अर्शदीप ने पगड़ी पहनी है जबकि अभिषेक का सिर भी कपड़े से ढका है। उनकी मां का सिर भी चुन्नी से ढका गया है लेकिन युवराज सिंह को नंगे सिर दिखाया गया है। पीछे गोल्डन टेंपल नजर आ रहा है। यह फोटो 19 मार्च को शाम 7.09 बजे अपलोड की गई थी। दूसरी फोटो: इसी फेसबुक अकाउंट से जारी दूसरी फोटो में क्रिकेटर हार्दिक पांड्या, विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी और बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह को दिखाया गया है। इसमें भी पहली फोटो की तरह ही बेअदबी की गई है। फोटो में विराट, धोली और रणवीर का सिर तो ढका हुआ है लेकिन हार्दिक पांड्या को नंगे सिर दिखाया गया है। पीछे गोल्डन टेंपल भी नजर आ रहा है। यह फोटो 20 मार्च को करीब 7.10 बजे अपलोड की गई। जिस पेज पर फोटो, उस पर 2.38 लाख फालोअर्स यह फोटो क्रिक इंटरटेनमेंट पेज से वायरल की जा रही हैं। इस पेज पर 2.38 लाख फालोअर्स हैं। हालांकि फोटो डालते समय लिखा जरूर है कि यह AI जेनरेटेड इमेज हैं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या जानबूझकर ऐसा किया गया। वह इसलिए क्योंकि इन फोटो में सिर्फ एक-एक क्रिकेटर को ही नंगे सिर दिखाया गया है। बाकी के सिर ढके हुए हैं। हालांकि कमेंट में लोगों ने फोटो जेनरेट करने वालों को खूब लताड़ भी लगाई है लेकिन उन्होंने फोटो नहीं हटाई है। इस फेसबुक पेज पर ये बेअदबी वाली फोटो अपलोड की जा रही हैं। SGPC के एडवोकेट बोले- सख्त कार्रवाई जरूरी इस बारे में SGPC के एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली ने कहा कि लगातार वायरल हो रही इन तस्वीरों को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस बारे में संबंधित अधिकारियों को शिकायतें भी सौंपी जा रही हैं। इससे पहले 3 बेअदबी की घटनाओं के बारे में जानिए… 1. कंकाल को पगड़ी पहनाई, जूते पहने परिक्रमा-लंगर हॉल में दिखाया 3 दिन पहले अमृतसर के गोल्डन टेंपल से जुड़ा बेअदबी का AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वीडियो सामने आया था। इसमें एक कंकाल को पगड़ी पहनाकर गोल्डन टेंपल की परिक्रमा में दिखाया गया। जिसमें उसने जूते पहने हुए थे। यही नहीं, वह लंगर हॉल में भी जूते समेत ही लंगर खा रहा था। ये वीडियो इंस्टाग्राम पर एनाटॉमी क्राउन नाम के अकाउंट से अपलोड किया गया है। इस अकाउंट पर करीब 10 हजार ही फॉलोअर्स हैं। ज्यादातर पोस्ट AI से जनरेट हुई हैं। 2. गाड़ी समेत युवक को जूते पहने परिक्रमा में दिखाया गोल्डन टेंपल की पवित्र परिक्रमा से जुड़े AI जनरेटेड 3 विवादित वीडियो सामने आए थे। पहले वीडियो में एक लड़का जूते पहनकर गोल्डन टेंपल की पवित्र परिक्रमा में खड़ा दिखाई देता है और फिर कार में बैठकर परिसर से बाहर जाता नजर आता है। वहीं, दूसरे वीडियो में श्री दरबार साहिब का परिवर्तित दृश्य दिखाया गया है, जो सिख धर्म की मर्यादा के खिलाफ है। तीसरे वीडियो में कपल को गोल्डन टेंपल के सामने आपत्तिजनक हरकत करते हुए दिखाया गया है। वीडियो सामने के आने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन अमृतसर में 29 जनवरी को केस दर्ज किया गया था। पवित्र सरोवर में कुल्ला करते हुए रील बनाई गोल्डन टेंपल में 13 जनवरी को युवक ने पवित्र सरोवर में कुल्ला करते हुए रील बनाई। वीडियो को ‘मुस्लिम शेर’ लिखकर सोशल मीडिया पर डाला गया था। इस पर SGPC ने कड़ी आपत्ति जताई थी। 24 जनवरी को यूपी के गाजियाबाद में निहंगों ने उसे पकड़ लिया था और जमकर पिटाई करने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया था। युवक की पहचान सुब्हान रंगरीज के रूप में हुई थी, जो दिल्ली का रहने वाला है। इसके बाद उस पर बेअदबी का केस दर्ज हुआ। उसे गिरफ्तार कर अमृतसर लाया गया। हालांकि अब वह जमानत पर है।









