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Florida airport to be renamed after Trump

Florida airport to be renamed after Trump

वॉशिंगटन1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिका के फ्लोरिडा में पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर राष्ट्रपति ट्रम्प के नाम पर रखने का फैसला लिया गया है। फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस ने सोमवार को एक बिल पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ किया जा रहा है। फ्लोरिडा सरकार के फैसले के बाद अब इस नाम को लागू करने के लिए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद फ्लाइट चार्ट, नेविगेशन सिस्टम और एयरपोर्ट साइनेज में बदलाव किया जाएगा। FAA की मंजूरी मिलने पर 1 जुलाई से यह नाम लागू हो सकता है। ऐसा होने पर ट्रम्प पहले ऐसे राष्ट्रपति होंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान ही उनके नाम पर एयरपोर्ट रखा जाएगा। पाम बीच इंटरनेशनल अमेरिका का नौवां ऐसा कमर्शियल एयरपोर्ट बन जाएगा, जिसका नाम किसी राष्ट्रपति पर होगा। यह एयरपोर्ट ट्रम्प के मार-ए-लागो एस्टेट के बेहद करीब है, जो उनका मुख्य निवास है। एयरपोर्ट का नाम ही नहीं कोड भी बदलेगा अमेरिका में किसी एयरपोर्ट का नाम बदलना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं होता, बल्कि इसमें स्थानीय, राज्य और फेडरल तीनों स्तरों पर प्रक्रिया शामिल होती है। अमेरिका के ज्यादातर एयरपोर्ट स्थानीय सरकार या एयरपोर्ट अथॉरिटी के नियंत्रण में होते हैं। सबसे पहले सिटी काउंसिल एयरपोर्ट बोर्ड नाम बदलने का प्रस्ताव पास करती है। अगर एयरपोर्ट राज्य के अधिकार में है, तो गवर्नर या स्टेट लेजिस्लेचर की मंजूरी जरूरी होती है। हालांकि कुछ मामलों में सिर्फ स्थानीय मंजूरी ही काफी होती है, लेकिन बड़े एयरपोर्ट के लिए राज्य का रोल अहम होता है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) अमेरिका में एयरपोर्ट संचालन पर नजर रखने वाली प्रमुख संस्था है। नाम बदलने के बाद FAA को ऑफिशियल अपडेट भेजा जाता है। सभी एयर ट्रैफिक सिस्टम, मैप्स और डेटाबेस में नाम अपडेट होता है। हालांकि एयरपोर्ट का कोड (IATA/ICAO) आमतौर पर नहीं बदला जाता। इसे बदलना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि इससे इंटरनेशनल एविएशन सिस्टम प्रभावित होता है। फ्लोरिडा एयरपोर्ट का कोड भी बदला जा रहा है। अमेरिकी सांसद ब्रायन मस्ट ने एयरपोर्ट का तीन अक्षरों वाला कोड PBI से बदलकर DJT करने का प्रस्ताव भी रखा है, जो ट्रम्प के नाम के शुरुआती अक्षर हैं। ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे संस्थान एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के नाम रखे जा रहे हैं। जैसे कि- नेवी के नए वॉरशिप विदेशी निवेशकों के लिए वीजा प्रोग्राम सरकारी दवा वेबसाइट बच्चों के लिए सेविंग अकाउंट स्कीम जॉन एफ केनेडी सेंटर में नाम जोड़ना यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस बिल्डिंग ट्रम्प के सिग्नेचर वाली नोट भी आएगी इसके अलावा अमेरिकी करेंसी पर भी इस साल से ट्रम्प के सिग्नेचर आने की बात कही गई है। अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार होगा, जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नोटों पर छापे जाएंगे। ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की कि यह कदम देश की आजादी के 250वें वर्ष के उपलक्ष्य में उठाया जा रहा है। नए नोटों के छपने से 1861 से चली आ रही 165 साल पुरानी परंपरा भी टूटे जाएगी। अब तक नोटों पर सिर्फ वित्त मंत्री और अमेरिका के ट्रेजरर के साइन होते थे। इनमें से कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर को हटा दिया जाएगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, ट्रम्प और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर वाले पहले 100 डॉलर के नोट जून में छापे जाएंगे और बाकी नोट आने वाले महीनों में छापे जाएंगे। फ्लोरिडा में ही लाइब्रेरी बनवा रहे ट्रम्प फ्लोरिडा के मियामी में ट्रम्प की प्रेसिडेंशियल लइब्रेरी बनाने की योजना है। डीसैंटिस ने पिछले साल इसके लिए जमीन देने की कोशिश की थी। ट्रम्प ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें एक विशाल कांच की इमारत, गोल्डन स्टैच्यू, प्राइवेट जेट और लग्जरी सुविधाएं दिखाई गईं। इस प्रोजेक्ट के लिए वेबसाइट भी लॉन्च की गई है, जहां कमिंग सून के साथ डोनेशन का विकल्प दिया गया है। ट्रम्प मूल रूप से न्यूयॉर्क के रहने वाले हैं, लेकिन 2019 में वह फ्लोरिडा शिफ्ट हो गए थे। पहले वह ट्रम्प टॉवर में रहते थे, लेकिन अब उनका मुख्य निवास वेस्ट पाम बीच स्थित मार-ए-लागो है। प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी की AI तस्वीर। ट्रम्प के बेटे एरिक ने शेयर की थीं। नाम बदलने के फैसले की विपक्ष ने आलोचना की फ्लोरिडा हाउस की डेमोक्रेटिक नेता फेंट्रिस ड्रिस्केल ने एयरपोर्ट का नाम बदले जाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे टैक्सपेयर्स पर 50 लाख डॉलर का बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फ्लोरिडा में कामकाजी परिवारों और बुजुर्गों के लिए जीवन लगातार महंगा होता जा रहा है। यही वजह है कि डेमोक्रेट्स ने इस विधायी सत्र में खर्च कम करने और लोगों की जेब में ज्यादा पैसा बचाने के एजेंडे पर काम किया। लेकिन हमारे साथ मिलकर इन बिलों को आगे बढ़ाने के बजाय, रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम पर एयरपोर्ट का नाम बदलने के लिए आपके टैक्स के 50 लाख डॉलर खर्च करने को प्राथमिकता दी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

रिपोर्ट:अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी:ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना चाहते हैं

रिपोर्ट:अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी:ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना चाहते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। ईरान के पास करीब 400 किलो समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि ईरान को यह यूरेनियम छोड़ना ही होगा। अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो इसे जबरदस्ती भी लिया जा सकता है। इस बीच, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इनमें से 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही वहां पहुंच चुके हैं। परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब ईरान यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है। प्राकृतिक यूरेनियम में काम का हिस्सा बहुत कम होता है, इसलिए उसे मशीनों (सेंट्रीफ्यूज) के जरिए धीरे-धीरे शुद्ध किया जाता है। इसी प्रक्रिया को ‘यूरेनियम एनरिचमेंट’ कहते हैं। हमलों के बाद भी यूरेनियम पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ माना जा रहा है कि ईरान का बड़ा परमाणु भंडार उन पहाड़ी ठिकानों के मलबे के नीचे दबा है, जिन्हें अमेरिका ने बमबारी में निशाना बनाया था। IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी के मुताबिक, यह यूरेनियम इस्फहान की अंडरग्राउंड टनल और नतांज जैसे ठिकानों पर हो सकता है। ट्रम्प ने पहले दावा किया था कि हमलों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह हो गया, लेकिन अब माना जा रहा है कि काफी यूरेनियम नष्ट नहीं हुआ, बल्कि मलबे के नीचे दब गया है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि ज्यादातर यूरेनियम मलबे के नीचे दबा है और अभी उसे निकालने का कोई प्लान नहीं है। साथ ही, ईरान के पास अभी भी ऐसी मशीनें हैं, जिनसे वह यूरेनियम को और शुद्ध बना सकता है और नए गुप्त ठिकाने भी बना सकता है। लंबी जंग से बचना चाहते हैं ट्रम्प ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा था कि लगभग सारा 60% समृद्ध यूरेनियम मलबे के नीचे दबा हुआ है और अभी उसे निकालने की कोई योजना नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अभी भी यूरेनियम को और समृद्ध करने के लिए सेंट्रीफ्यूज मशीनें हैं और वह नए अंडरग्राउंड ठिकाने भी बना सकता है। ट्रम्प और उनके कुछ सहयोगियों का मानना है कि एक सीमित और टारगेटेड ऑपरेशन के जरिए इस परमाणु सामग्री को कब्जे में लिया जा सकता है, जिससे युद्ध लंबा नहीं खिंचेगा और अप्रैल के मध्य तक इसे खत्म किया जा सकता है। ट्रम्प खुद भी लंबे युद्ध से बचना चाहते हैं, क्योंकि उनके कुछ सहयोगी चाहते हैं कि वे ध्यान घरेलू मुद्दों और आने वाले चुनावों पर दें, जहां रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान का खतरा बताया जा रहा है। एक्सपर्ट बोले- ईरान में सैनिक भेजना खतरनाक एक्सपर्ट ट्रम्प के यूरेनियम हासिल करने के लिए जमीनी ऑपरेशन शुरू करने की योजना को मुश्किल और खतरनाक मानते हैं। उनका कहना है कि इसके लिए बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों को ईरान के अंदर भेजना पड़ेगा। इससे खून-खराबा बढ़ेगा और कई अमेरिकी सैनिकों की जान जाएगी। सैनिकों को पहले इलाके को सुरक्षित करना होगा, जहां उन्हें ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद इंजीनियर मलबे को हटाकर बारूदी सुरंगों और जालों को साफ करेंगे। यूरेनियम को खोजने के बाद स्पेशल फोर्स की टीम उसे बाहर निकालेगी। बताया गया है कि यह सामग्री 40 से 50 खास सिलेंडरों में रखी हो सकती है, जो देखने में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे होते हैं। इन सिलेंडरों को सुरक्षित कंटेनरों में डालकर ट्रकों में ले जाया जाएगा। इसके लिए काफी जगह लगेगी और कई ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद इसे बाहर निकालने के लिए एयरफील्ड की जरूरत होगी। अगर वहां एयरफील्ड नहीं हुआ, तो अस्थायी रनवे बनाना पड़ेगा। पूरा ऑपरेशन कई दिन या एक हफ्ते तक चल सकता है। अगर अमेरिका जबरन यूरेनियम कब्जे में लेने की कोशिश करता है, तो ईरान की तरफ से जोरदार जवाबी हमला हो सकता है और युद्ध कई हफ्तों से आगे बढ़कर लंबा खिंच सकता है।

Iran US Israel War LIVE Situation Photos Update; Donald Trump Hormuz Strait

Iran US Israel War LIVE Situation Photos Update; Donald Trump Hormuz Strait

Hindi News International Iran US Israel War LIVE Situation Photos Update; Donald Trump Hormuz Strait | Benjamin Netanyahu तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी31 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 29वां दिन है। पीएम मोदी ने शनिवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर ईरान जंग को लेकर बात की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे समुद्री रास्ते खुले और सुरक्षित रहने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों की निंदा की। वहीं, ईरान जंग के बीच तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्री 30 मार्च को पाकिस्तान पहुंचेंगे। यहां वे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात करेंगे। इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक में मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा होगी। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, जिसमें कई देशों के विदेश मंत्री एक साथ शामिल होंगे। पाकिस्तान में क्यों हो रही मीटिंग… पाकिस्तान के ईरान और सऊदी अरब दोनों से बेहतर रिश्ते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसलिए पाकिस्तान को विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए बेहतर जगह माना जा रहा है। यह मीटिंग पहले तुर्किये में होनी थी, लेकिन बाद में इसे पाकिस्तान शिफ्ट कर दिया गया। पाकिस्तान इस समय किसी एक पक्ष में सीधे शामिल नहीं है, इसलिए उसे न्यूट्रल जगह माना जा रहा है। उसके ईरान और सऊदी अरब दोनों से अच्छे रिश्ते हैं, इसलिए बातचीत आसान है। तुर्किये और मिस्र जैसे देशों के साथ भी पाकिस्तान के संबंध ठीक हैं। ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें… ईरान ने शुक्रवार को इजराइल में ड्रोन हमले किए। ईरानी सेना के मुताबिक, तेल अवीव में अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। इजराइल ने ईरान के खोंडाब (अराक) हेवी वाटर न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स पर शुक्रवार रात हमला किया। ईरान ने शुक्रवार को इजराइल पर दागी गई मिसाइलों पर थैंक यू इंडिया लिखकर आभार जताया। ईरानी सेना के मुताबिक यह संदेश उन देशों के लिए बताया गया जिन्होंने ईरान के प्रति समर्थन दिखाया है। लेबनान में शुक्रवार को इजराइल ने लोगों से गांव खाली करने को कहा, जिसके बाद सड़कों पर रात गुजारते लोग। गाड़ी को धक्का देकर खेलते बच्चे। ईरान-इजराइल जंग से जुड़ी पल पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 31 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के विदेश मंत्री का दावा- होर्मुज से रोज गुजरेंगे 2 पाकिस्तानी जहाज पाकिस्तान के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और विदेश मंत्री इशाक डार ने दावा किया है कि ईरान सरकार ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 और जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति देने पर सहमति जताई है। इस स्ट्रेट से रोजाना दो जहाज गुजरेंगे। 07:18 PM28 मार्च 2026 कॉपी लिंक तुर्किये और इजिप्ट के विदेश मंत्री पाकिस्तान पहुंचे ईरान-USA के बीच बढ़ते तनाव के बीच हाई-लेवल बातचीत के लिए तुर्किये के विदेश मंत्री हकन फिदान पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। उनसे पहले इजिप्ट के विदेश मंत्री के भी पाकिस्तान पहुंचने की खबर सामने आई है। यह एक बड़ा डिप्लोमैटिक कदम है क्योंकि क्षेत्रीय ताकतें संकट का रास्ता तय करने के लिए आगे आ रही हैं। 06:15 PM28 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरानी मीडिया की अमेरिका को चेतावनी, लिखा- नरक में स्वागत है ईरानी अखबार तेहरान टाइम्स ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। अखबार ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका की सेना ईरान की जमीन पर आई, तो वह ‘ताबूत में ही वापस जाएगी’। इस खबर को अखबार ने अपने फ्रंट पेज पर ‘नरक में स्वागत है’ हेडलाइन के साथ छापा। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब खबरें हैं कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प जमीनी कार्रवाई (ग्राउंड ऑपरेशन) करने का ऑप्शन देख रहे हैं, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि अगर अमेरिका ईरान के पास मौजूद खास परमाणु सामग्री को हासिल करना चाहता है, तो उसे बड़ी संख्या में सैनिक भेजने पड़ सकते हैं, क्योंकि यह सामग्री जमीन के काफी अंदर छिपाई गई है। ईरान पहले भी कह चुका है कि अगर उस पर जमीनी हमला हुआ, तो वह जोरदार जवाब देगा। अखबार में सैनिकों की तस्वीर भी दिखाई गई है, जिससे यह मैसेज दिया गया है कि ईरान किसी भी हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। 06:09 PM28 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान और आर्मेनिया के विदेशमंत्री ने फोन पर बात की ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरारत मिर्जोयान ने ईरान जंग को लेकर फोन पर बात की। बातचीत के दौरान अरारत मिर्जोयान ने अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि आर्मेनिया की सरकार और जनता इस दुख की घड़ी में ईरान के साथ खड़ी है। इसके अलावा मिर्जोयान ने आम नागरिकों पर हो रहे हमलों को लेकर भी चिंता जताई। 06:02 PM28 मार्च 2026 कॉपी लिंक दक्षिणी लेबनान पर हुए हमले में 9 हेल्थ वर्कर्स की मौत विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि दक्षिणी लेबनान में स्वास्थ्यकर्मियों पर हुए पांच अलग-अलग हमलों में 9 पैरामेडिक्स (हेल्थ वर्कर्स) की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य घायल हुए हैं। WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने कहा कि ये हमले उस समय हुए जब मेडिकल टीमें अलग-अलग गांवों में अपनी ड्यूटी निभा रही थीं। हालांकि WHO ने इन हमलों के लिए किसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है। WHO के मुताबिक, बार-बार हो रहे इन हमलों का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिख रहा है। दक्षिणी लेबनान में अब तक 4 अस्पताल और 51 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद हो चुके। 05:27 PM28 मार्च 2026 कॉपी लिंक इजराइल में मिसाइल का मलबा गिरने से 11 लोग घायल सेंट्रल इजराइल में एक मिसाइल को हवा में ही रोकने के दौरान उसका मलबा गिरने से 11 लोग घायल हो गए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। यह घटना एश्ताओल इलाके में हुई, जहां 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ट्रम्प बोले-ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर 10 दिन हमला नहीं करेंगे:ईरान के कहने पर 6 अप्रैल तक डेडलाइन बढ़ाई; दूसरी बार हमला टाला

ट्रम्प बोले-ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर 10 दिन हमला नहीं करेंगे:ईरान के कहने पर 6 अप्रैल तक डेडलाइन बढ़ाई; दूसरी बार हमला टाला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वह ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर 10 दिन तक हमला नहीं करेंगे। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर बताया कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और नई डेडलाइन 6 अप्रैल तय की गई है। ट्रम्प ने एक हफ्ते में इन हमलों को दूसरी बार टाल दिया है। इससे पहले भी वह हमले की डेडलाइन बढ़ा चुके हैं, जो शुक्रवार को खत्म होने वाली थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है। ट्रम्प के मुताबिक, अब 6 अप्रैल शाम 8 बजे (अमेरिकी समयानुसार) तक ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर कोई हमला नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। मौजूदा हालात में इसे कूटनीतिक समाधान की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ट्रम्प बोले- ईरान ने हमें 10 तेल टैंकर गिफ्ट किए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान ने 10 तेल टैंकरों को गुजरने देकर गिफ्ट दिया। उन्होंने कहा कि इन टैंकरों पर पाकिस्तान का झंडा था और ईरान इससे भरोसा जीतना चाहता था। उन्होंने कहा कि ईरान ने भरोसा दिखाने के लिए 8 बड़े तेल टैंकरों को गुजरने दिया और बाद में 2 और भेजे। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक में ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने खुद प्रस्ताव दिया था कि वह 8 बड़े ऑयल टैंकर जाने देगा, ताकि बातचीत को लेकर गंभीरता दिखा सके। उन्होंने दावा किया कि बाद में ईरान ने माफी जताते हुए 2 और टैंकर भेजे। इस दौरान ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मजाक में कहा कि उम्मीद है इस खुलासे से बातचीत पर असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, इस कदम से अमेरिका को भरोसा हुआ कि बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें…

Trump China Visit May 14-15

Trump China Visit May 14-15

18 मिनट पहले कॉपी लिंक म्यांमार में बुधवार देर रात 4.5 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र 120 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 120 किमी गहराई में आए भूकंप को इंटरमीडिएट कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे भूकंप का असर सतह पर कम होता है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, मंगलवार को भी म्यांमार में 3.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसकी गहराई 90 किलोमीटर थी। म्यांमार भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। यहां भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट्स के बीच लगातार हलचल होती रहती है। देश में सागाइंग फॉल्ट नाम की बड़ी फॉल्ट लाइन गुजरती है, जिससे मंडाले, यांगून और आसपास के इलाकों में भूकंप का खतरा बना रहता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें.. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प 14-15 मई को चीन जाएंगे, ईरान युद्ध की वजह से दौरा टला था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 और 15 मई को चीन दौरे पर रहेंगे। यह दौरा पहले मार्च के अंत में तय था, लेकिन ईरान में चल रहे युद्ध के कारण इसे टाल दिया गया था। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रम्प चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। बैठक टालने को लेकर दोनों देशों के बीच कोई शर्त नहीं रखी गई थी। चीन ने तारीख बदलने पर सहमति जताई है। इसके बाद इसी साल शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के अमेरिका दौरे का कार्यक्रम भी तय किया जाएगा। ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प वॉशिंगटन में उनकी मेजबानी करेंगे। ट्रम्प और शी जिनपिंग की पिछली मुलाकात अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में हुई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Trump China Visit May 14-15

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39 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल में नई संसद की शुरुआत हो गई है। काठमांडू के सिंह दरबार स्थित अस्थायी संसद भवन में गुरुवार को नवनिर्वाचित सांसदों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसके साथ ही देश में नई विधायी अवधि की औपचारिक शुरुआत हो गई। सबसे सीनियर सांसद अर्जुन नरसिंह केसी ने सभी सदस्यों को शपथ दिलाई। संसद सचिवालय के अनुसार, 63 सांसदों ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली। इस दौरान सांसद पारंपरिक और क्षेत्रीय वेशभूषा में नजर आए। इधर, राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने बालेन शाह को संसदीय दल का नेता चुना है। यह फैसला पार्टी की केंद्रीय समिति और संसदीय दल की संयुक्त बैठक में लिया गया। बालेन शाह के संसदीय दल का नेता चुने जाने के बाद उनके शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है। इससे नेपाल में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… अमेरिका की वजह से दुनिया को 10 ट्रिलियन डॉलर का जलवायु नुकसान; गरीब देशों पर सबसे बुरा असर पड़ा अमेरिका के कार्बन उत्सर्जन के कारण 1990 के बाद से दुनिया को करीब 10 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। इस नुकसान का सबसे बड़ा बोझ गरीब और विकासशील देशों पर पड़ा है। नेचर जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च के मुताबिक, ग्लोबल वॉर्मिंग से जुड़े आर्थिक असर में अमेरिका सबसे बड़ा भागीदार रहा है। स्टडी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन का असर खास तौर पर उन देशों पर ज्यादा पड़ा है, जो पहले से आर्थिक रूप से कमजोर हैं। भारत को करीब 500 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जबकि ब्राजील को करीब 330 अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा। वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ते तापमान ने उत्पादकता, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास को प्रभावित किया है, जिससे कई देशों की ग्रोथ धीमी पड़ गई। हालांकि, इस नुकसान का कुछ हिस्सा खुद अमेरिका ने भी झेला है, लेकिन कुल प्रभाव के मुकाबले यह कम है। ईरान तनाव के बीच बदला ट्रम्प का शेड्यूल, मई में चीन दौरा तय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 और 15 मई को चीन का दौरा करेंगे। व्हाइट हाउस ने बुधवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह यात्रा पहले इसी महीने के अंत में प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण इसे टाल दिया गया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बताया कि यह ट्रम्प की बहुप्रतीक्षित चीन यात्रा है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प और प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प इस साल के अंत में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन की वाशिंगटन डीसी में वापसी यात्रा की मेजबानी भी करेंगे। जब लीविट से पूछा गया कि क्या इस बैठक को फिर से तय करने से पहले युद्ध खत्म करने को लेकर कोई शर्त रखी गई थी, तो उन्होंने साफ किया कि ऐसी कोई शर्त या चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी ने स्थिति को समझा और यह माना कि इस समय ट्रम्प का क्षेत्र में सक्रिय रहना जरूरी है। इसी वजह से यात्रा को स्थगित करने के फैसले को चीन की तरफ से स्वीकार किया गया। बांग्लादेश में बस नदी में गिरने से 16 लोगों की मौत, कई लापता बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में बुधवार शाम एक बस पद्मा नदी में गिर गई। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। बस में करीब 40 यात्री सवार थे। रेस्क्यू टीम ने ‘हमजा’ नाम के जहाज की मदद से करीब 6 घंटे बाद बस को बाहर निकाला। बस के अंदर से 14 शव मिले, जबकि गोताखोरों ने पहले ही दो महिलाओं के शव बरामद कर लिए थे। फायर सर्विस, कोस्टगार्ड, पुलिस और सेना की टीमों की मदद से गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। पुलिस के मुताबिक, करीब 11 यात्री तैरकर बाहर निकल गए या उन्हें बचा लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बस ढाका जा रही थी। इसमें सवार अधिकतर यात्री ईद की छुट्टियां बिताकर लौट रहे थे, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने हादसे की जानकारी ली और अधिकारियों को बचाव कार्य तेज करने के साथ जांच के निर्देश दिए हैं। म्यांमार में 4.5 तीव्रता का भूकंप आया, एक दिन पहले भी झटके महसूस हुए थे म्यांमार में बुधवार देर रात 4.5 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र 120 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 120 किमी गहराई में आए भूकंप को इंटरमीडिएट कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे भूकंप का असर सतह पर कम होता है। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, मंगलवार को भी म्यांमार में 3.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसकी गहराई 90 किलोमीटर थी। म्यांमार भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। यहां भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट्स के बीच लगातार हलचल होती रहती है। देश में सागाइंग फॉल्ट नाम की बड़ी फॉल्ट लाइन गुजरती है, जिससे मंडाले, यांगून और आसपास के इलाकों में भूकंप का खतरा बना रहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प 14-15 मई को चीन जाएंगे, ईरान युद्ध की वजह से दौरा टला था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 और 15 मई को चीन दौरे पर रहेंगे। यह दौरा पहले मार्च के अंत में तय था, लेकिन ईरान में चल रहे युद्ध के कारण इसे टाल दिया गया था। व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रम्प चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। बैठक टालने को लेकर दोनों देशों के बीच कोई शर्त नहीं रखी गई थी। चीन ने तारीख बदलने पर सहमति जताई है। इसके बाद इसी साल शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के अमेरिका दौरे का कार्यक्रम भी तय किया जाएगा। ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प वॉशिंगटन में उनकी मेजबानी करेंगे। ट्रम्प और शी जिनपिंग की पिछली मुलाकात अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में हुई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Iran Prefers J.D. Vance Over Trump for Talks

Iran Prefers J.D. Vance Over Trump for Talks

नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक ईरान ने ट्रम्प सरकार को संकेत दिया है कि वह राष्ट्रपति की चुनी हुई टीम के बजाए जेडी वेंस के साथ बातचीत करना ज्यादा पसंद करेगा। CNN के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि ईरान वेंस को युद्ध विरोधी मानता है। ईरान ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत नहीं करना चाहता। ईरान का कहना है उनके साथ बातचीत चल रही थी तभी अमेरिका-ईजराइल ने हमला कर दिया था। एक राजनयिक सूत्र ने CNN के हवाले से कहा- पुरानी टीम के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। ईरान को लगता है कि बातचीत का प्रस्ताव सिर्फ अमेरिका-इजराइल के लिए एक और चाल है, ताकि वे फिर से हमले के लिए कुछ और समय ले सकें। ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर (बाएं) और स्टीव विटकॉफ। (फाइल फोटो) व्हाइट हाउस बोला- कौन बातचीत करेगा यह ट्रम्प तय करेंगे इससे पहले ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने भी मंगलवार को रिपोर्ट दी थी कि ईरान के अधिकारी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से बात नहीं करना चाहते। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया और इसे विदेशी प्रचार बताया। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अमेरिका की तरफ से बातचीत कौन करेगा, इसका फैसला सिर्फ राष्ट्रपति ट्रम्प ही करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने साफ कहा कि केवल राष्ट्रपति ट्रम्प ही तय करेंगे कि उनकी ओर से बातचीत कौन करेगा। ट्रम्प ने भी कहा कि इस प्रक्रिया में वेंस के साथ-साथ मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। ईरान को ट्रम्प के दामाद पर भरोसा नहीं ट्रम्प के करीबी लोगों के मुकाबले, वेंस को तेहरान में ऐसा नेता माना जा रहा है जो पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है। CNN के एक सूत्र के मुताबिक, “ऐसा माना जा रहा है कि वेंस इस संघर्ष को खत्म करने की कोशिश करेंगे।” एक और सूत्र ने CNN से कहा कि अगर बातचीत का कोई नतीजा निकालना है, तो जेडी वेंस को शामिल होना चाहिए। विटकॉफ और कुशनर के साथ कुछ नहीं होगा। यह पहले भी हो चुका है। ईरान के लिए यह पसंद का नहीं, बल्कि नुकसान कम करने का मामला है। वह ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहता है जिसका इस युद्ध से कम जुड़ाव हो। ट्रम्प प्रशासन में बढ़ रहा वेंस का कद जानकारी से यह संकेत मिलता है कि वेंस, जो पहले विदेशों में सैन्य दखल के खिलाफ रहे हैं, अब मुख्य वार्ताकार बन सकते हैं। इससे यह भी दिखता है कि सरकार में उनका प्रभाव बढ़ रहा है और ईरान उन्हें अमेरिका के अलग तरह के प्रतिनिधि के रूप में देख रहा है। वेंस पहले भी मिडिल ईस्ट में अमेरिकी दखल के खिलाफ रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ट्रम्प का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि ट्रम्प सही फैसला लेंगे और पिछली गलतियों को नहीं दोहराया जाएगा। वेंस में बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि वह अब अमेरिकी विदेश नीति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अगर ट्रम्प उन्हें आगे करते हैं, तो यह उनके लिए खुद को एक सफल सौदेबाज साबित करने का बड़ा मौका होगा। ईरान की तरफ से गालिबाफ कर सकते हैं बातचीत इससे पहले ट्रम्प ने सोमवार को दावा किया था कि वह ईरान में सबसे सम्मानित शख्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। तब माना गया था कि वे शख्स गालिबाफ हो सकते हैं। हालांकि गालीबाफ ने कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। ऐसी खबरें वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। हालांकि ऐसा अभी भी माना जा रहा है कि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ बातचीत में शामिल हो सकते हैं। लेकिन जैसे अमेरिका को यह पसंद नहीं कि ईरान उसके वार्ताकार चुने, वैसे ही ईरान भी अपने प्रतिनिधि को लेकर सतर्क है। किसी भी बातचीत के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता की मंजूरी जरूरी होगी। ईरान बिना शर्त युद्धविराम या आत्मसमर्पण नहीं चाहता। वह खुद को मजबूत स्थिति में मानते हुए बातचीत करना चाहता है। उनका मानना है कि क्षेत्र में दबाव बनाने में वह आगे हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड के पायलट रह चुके हैं और सख्त रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं। खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से दूरी बनाई फिलहाल स्थिति यह है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही यह तय करना मुश्किल हो गया है कि टेबल पर कौन बैठेगा। इस बीच खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से दूरी बना ली है। कतर ने कहा कि अगर ईरान खाड़ी देशों पर हमले बंद नहीं करता, तो वह बातचीत में मदद नहीं करेगा। ईरान ने यह शर्त नहीं मानी, जिसके बाद ये देश पीछे हट गए। उधर सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया से दूरी बनाते दिख रहे हैं। वॉशिंगटन में इस बात पर चर्चा हो रही है कि अगर बातचीत नाकाम होती है तो क्या ये देश सैन्य कार्रवाई में साथ देंगे। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सरकार स्तर पर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष 15 प्वाइंट्स की एक योजना पर अपने-अपने मांग और रियायतों की समीक्षा कर रहे हैं। बातचीत के लिए तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के नाम सामने आए हैं, लेकिन अभी कोई औपचारिक बैठक तय नहीं हुई है। ईरान ने UAE के फुजैरा में एक तेल ठिकाने पर हमला किया, जिससे वहां बहुत नुकसान पहुंचा। जंग से पहले ईरान-अमेरिका में हुई थी बातचीत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच कई दौर की शांति वार्ता हुई थी। यह बातचीत बातचीत सीधे नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष तरीके से हुई थी। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि एक मिडिएटर के जरिए अपनी बात पहुंचा रहे थे। ओमान ने इस दौरान मिडिएटर की भूमिका निभाई थी। ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचा रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध से पहले कम से कम 2 से 3 राउंड की बातचीत हुई: पहला दौर- 6

ट्रम्प बोले- अमेरिका ने युद्ध जीता:ईरान पूरी तरह कमजोर, डील करना चाहता है, हमारे विमान तेहरान के ऊपर घूम रहे

ट्रम्प बोले- अमेरिका ने युद्ध जीता:ईरान पूरी तरह कमजोर, डील करना चाहता है, हमारे विमान तेहरान के ऊपर घूम रहे

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 26वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को दावा किया है कि अमेरिका ने युद्ध जीत लिया है। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत हो गया है और अब समझौता करने के लिए तैयार है। अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर घूम रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि लगातार हमलों के बाद ईरान पूरी तरह कमजोर हो चुका है और उसके पास डील करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और इसमें अमेरिका के टॉप अधिकारी भी शामिल हैं। ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब बातचीत में समझदारी दिखा रहा है और जल्द समझौता हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे खासकर पावर प्लांट्स पर दोबारा हमला कर सकता है। ईरान में हमलों का असर… ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Now the Trump family will bet on betting, Donald Trump, Taj Mahal casino, Truth Predict, Trump Media Group’s New Platform

Now the Trump family will bet on betting, Donald Trump, Taj Mahal casino, Truth Predict, Trump Media Group's New Platform

Hindi News International Now The Trump Family Will Bet On Betting, Donald Trump, Taj Mahal Casino, Truth Predict, Trump Media Group’s New Platform वॉशिंगटन30 मिनट पहले कॉपी लिंक अप्रैल 1990 में डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘ताजमहल’ कैसिनो खोला था। हालांकि अब ट्रम्प परिवार सट्टे से कमाई का नया रास्ता प्रेडिक्शन मार्केट में देख रहा है। वॉशिंगटन में इन दिनों ‘प्रेडिक्शन मार्केट’ (भविष्यवाणी बाजार) को लेकर सियासी और कानूनी पारा चढ़ा हुआ है। विवाद की जड़ में है ट्रम्प मीडिया ग्रुप का नया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ प्रेडिक्ट’ और डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर का ‘काल्शी’ व ‘पॉलीमार्केट’ जैसी दिग्गज कंपनियों से जुड़ना। इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लोग चुनाव से लेकर खेल तक, भविष्य की घटनाओं पर पैसा लगाते हैं। आलोचकों का मानना है कि सरकारी रेगुलेशन वाले इस सेक्टर में राजनीतिक परिवार की मौजूदगी पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करती है। पारंपरिक कैसिनो बनाम डिजिटल मार्केट के इस बढ़ते बाजार ने पुराने खिलाड़ियों की नींद उड़ा दी है। दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 1990 में डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘ताजमहल’ कैसिनो खोला था, जिसे उन्होंने ‘दुनिया का आठवां अजूबा’ करार दिया था। तीन दशक बाद ट्रम्प परिवार कैसिनो कारोबार से बाहर है और अब खेल सट्टे से कमाई का नया रास्ता प्रेडिक्शन मार्केट में देख रहा है। कैसिनो और स्पोर्ट्सबुक ऑपरेटरों का आरोप है कि ये प्रेडिक्शन कंपनियां बिना लाइसेंस के ‘ऑनलाइन सट्टेबाजी’ चला रही हैं। विवाद तब और गहरा गया जब कमोडिटी फ्यूचर ट्रेडिंग कमीशन (सीएफटीसी) ने इन प्लेटफॉर्म्स को राज्यों के कड़े जुआ कानूनों से छूट देने की दिशा में कदम बढ़ाए। इससे नेवादा और न्यूजर्सी जैसे राज्यों में कानूनी जंग छिड़ गई है, जहां स्पोर्ट्स बेटिंग पर सख्त पाबंदियां हैं। ‘आर्टेमिस एनालिटिक्स’ के मुताबिक, दुनियाभर में इन प्लेटफॉर्म्स पर हर हफ्ते लगभग 41,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का दांव लग रहा है। इस साल फरवरी में ‘सुपर बाउल’ के दिन जहां ‘काल्शी’ ने 1 अरब डॉलर की ट्रेडिंग का दावा किया, वहीं नेवादा के पारंपरिक कैसिनो में सट्टेबाजी 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। साफ है कि डिजिटल बाजार अब पारंपरिक गेमिंग उद्योग को निगल रहा है। विवादों के बीच ट्रम्प जूनियर के प्रवक्ता ने सफाई दी है कि वे न तो खुद ट्रेडिंग करते हैं और न ही सरकार में किसी कंपनी की पैरवी। वहीं, व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन के सभी फैसले केवल जनहित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। फिलहाल, यह मामला अदालतों और रेगुलेटरी फाइलों के बीच उलझा हुआ है। इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगेगी लगाम, इस साल 6 बिल पेश हुए इस बीच अमेरिकी कांग्रेस में सख्ती के संकेत हैं। इस साल कम से कम छह बिल पेश हुए हैं, जिनमें इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक, चुनावी बाजारों पर नियंत्रण और सीएफटीसी की शक्तियां बढ़ाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। एक द्विदलीय प्रस्ताव में स्पोर्ट्स, युद्ध, आतंकवाद और हत्या से जुड़े दांव पर प्रतिबंध की मांग की गई है। कुल मिलाकर, प्रेडिक्शन मार्केट का तेजी से बढ़ता दायरा अब नियमन, पारदर्शिता और राजनीतिक हितों के टकराव के बड़े सवाल खड़े कर रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Trump Warning Sparks Market Fear

Trump Warning Sparks Market Fear

Hindi News Business Trump Warning Sparks Market Fear | 5 Factors Dictate Indias Stock Market नई दिल्ली56 मिनट पहले कॉपी लिंक 23 मार्च से शुरू होने वाले हफ्ते में निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें, विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी और ग्लोबल मार्केट की चाल बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे। पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को शेयर बाजार में बढ़त देखने को मिली थी। सेंसेक्स 300 अंकों की तेजी के साथ बंद हुआ, वहीं निफ्टी ने भी 23,100 के पार क्लोजिंग दी। शुक्रवार की तेजी के बाद क्या बाजार इस बढ़त को बरकरार रख पाएगा। चलिए समझते हैं… सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 22,868 | 22,637 | 22,556 | 22,506 | 22,408 | 22,258 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,331 | 24,142 | 23,875 | 23,814 | 23,320 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं… 1. मिडिल ईस्ट में तनाव: निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होनें कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट को निशाना बनाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़ेऊर्जा ढांचे पर हमला करेगा। अगर यह संघर्ष और खिंचता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इससे बाजार में गिरावट आ सकती है। 2. कच्चा तेल: जंग के कारण कीमतें 110 डॉलर के पार मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का सबसे सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3.26% की उछाल के साथ 112.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे भारत में महंगाई बढ़ेगी जो बाजार के लिए अच्छा नहीं है। 3. विदेशी निवेशक: भारतीय बाजार में FIIs की बिकवाली विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने 20 मार्च को ₹5,518 करोड़ की नेट बिकवाली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान ₹5,706 करोड़ की खरीदारी की। अब तक मार्च में FIIs ₹86,780 करोड़ निकाल चुके हैं। वहीं DIIs ने ₹101,168 करोड़ की खरीदारी की है। 4. भारतीय रुपया: 93.73 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार 20 मार्च को 110 पैसे टूटकर 93.73 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 2022 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया 2.5% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर इकोनॉमी और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर पड़ता है। 5. टेक्निकल सेटअप: 23,000 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट निफ्टी 23,000 के पास संभलने की कोशिश कर रहा है। अगर निफ्टी इससे नीचे फिसलता है, तो यह 22,500 या 22,000 तक भी जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,400 को पार करना जरूरी है। इंडिकेटर्स से बाजार में बड़ी रिकवरी की गुंजाइश सीमित लग रही है। चॉइस ब्रोकिंग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुमीत बगड़िया का मानना है कि बाजार का मौजूदा रुख ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग का है। निफ्टी के लिए 23,000 से 22,950 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट है। अगर बाजार इस सपोर्ट को तोड़ता है, तो और भी कमजोरी दिख सकती है। सुमीत बगड़िया ने कहा कि डेली RSI 31.84 पर है, जो ‘ओवरसोल्ड’ यानी जरूरत से ज्यादा बिकवाली वाली स्थिति के करीब है। इससे संकेत मिलता है कि थोड़े समय के लिए बाजार में उछाल आ सकता है, लेकिन यह अभी भी बाजार की अंदरूनी कमजोरी को ही दिखाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…