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Trump Warning Sparks Market Fear

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  • Trump Warning Sparks Market Fear | 5 Factors Dictate Indias Stock Market

नई दिल्ली56 मिनट पहले

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23 मार्च से शुरू होने वाले हफ्ते में निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें, विदेशी निवेशकों की एक्टिविटी और ग्लोबल मार्केट की चाल बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारण होंगे।

पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को शेयर बाजार में बढ़त देखने को मिली थी। सेंसेक्स 300 अंकों की तेजी के साथ बंद हुआ, वहीं निफ्टी ने भी 23,100 के पार क्लोजिंग दी। शुक्रवार की तेजी के बाद क्या बाजार इस बढ़त को बरकरार रख पाएगा। चलिए समझते हैं…

सपोर्ट और रेजिस्टेंस

सपोर्ट जोन: 22,868 | 22,637 | 22,556 | 22,506 | 22,408 | 22,258

सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है।

रेजिस्टेंस जोन: 24,331 | 24,142 | 23,875 | 23,814 | 23,320

रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है।

नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है।

अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं…

1. मिडिल ईस्ट में तनाव: निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होनें कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा।

वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट को निशाना बनाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़ेऊर्जा ढांचे पर हमला करेगा। अगर यह संघर्ष और खिंचता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इससे बाजार में गिरावट आ सकती है।

2. कच्चा तेल: जंग के कारण कीमतें 110 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का सबसे सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3.26% की उछाल के साथ 112.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे भारत में महंगाई बढ़ेगी जो बाजार के लिए अच्छा नहीं है।

3. विदेशी निवेशक: भारतीय बाजार में FIIs की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने 20 मार्च को ₹5,518 करोड़ की नेट बिकवाली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान ₹5,706 करोड़ की खरीदारी की। अब तक मार्च में FIIs ₹86,780 करोड़ निकाल चुके हैं। वहीं DIIs ने ₹101,168 करोड़ की खरीदारी की है।

4. भारतीय रुपया: 93.73 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार 20 मार्च को 110 पैसे टूटकर 93.73 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 2022 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया 2.5% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर इकोनॉमी और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर पड़ता है।

5. टेक्निकल सेटअप: 23,000 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट

निफ्टी 23,000 के पास संभलने की कोशिश कर रहा है। अगर निफ्टी इससे नीचे फिसलता है, तो यह 22,500 या 22,000 तक भी जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,400 को पार करना जरूरी है। इंडिकेटर्स से बाजार में बड़ी रिकवरी की गुंजाइश सीमित लग रही है।

चॉइस ब्रोकिंग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुमीत बगड़िया का मानना है कि बाजार का मौजूदा रुख ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग का है। निफ्टी के लिए 23,000 से 22,950 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट है। अगर बाजार इस सपोर्ट को तोड़ता है, तो और भी कमजोरी दिख सकती है।

सुमीत बगड़िया ने कहा कि डेली RSI 31.84 पर है, जो ‘ओवरसोल्ड’ यानी जरूरत से ज्यादा बिकवाली वाली स्थिति के करीब है। इससे संकेत मिलता है कि थोड़े समय के लिए बाजार में उछाल आ सकता है, लेकिन यह अभी भी बाजार की अंदरूनी कमजोरी को ही दिखाता है।

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पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को शेयर बाजार में बढ़त देखने को मिली थी। सेंसेक्स 300 अंकों की तेजी के साथ बंद हुआ, वहीं निफ्टी ने भी 23,100 के पार क्लोजिंग दी। शुक्रवार की तेजी के बाद क्या बाजार इस बढ़त को बरकरार रख पाएगा। चलिए समझते हैं…

सपोर्ट और रेजिस्टेंस

सपोर्ट जोन: 22,868 | 22,637 | 22,556 | 22,506 | 22,408 | 22,258

सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है।

रेजिस्टेंस जोन: 24,331 | 24,142 | 23,875 | 23,814 | 23,320

रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है।

नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है।

अब 5 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं…

1. मिडिल ईस्ट में तनाव: निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होनें कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा।

वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके पावर प्लांट को निशाना बनाया गया, तो वह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़ेऊर्जा ढांचे पर हमला करेगा। अगर यह संघर्ष और खिंचता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इससे बाजार में गिरावट आ सकती है।

2. कच्चा तेल: जंग के कारण कीमतें 110 डॉलर के पार

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का सबसे सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3.26% की उछाल के साथ 112.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो इससे भारत में महंगाई बढ़ेगी जो बाजार के लिए अच्छा नहीं है।

3. विदेशी निवेशक: भारतीय बाजार में FIIs की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ने 20 मार्च को ₹5,518 करोड़ की नेट बिकवाली की। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस दौरान ₹5,706 करोड़ की खरीदारी की। अब तक मार्च में FIIs ₹86,780 करोड़ निकाल चुके हैं। वहीं DIIs ने ₹101,168 करोड़ की खरीदारी की है।

4. भारतीय रुपया: 93.73 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार 20 मार्च को 110 पैसे टूटकर 93.73 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह 2022 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है।

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया 2.5% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर इकोनॉमी और कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर पड़ता है।

5. टेक्निकल सेटअप: 23,000 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट

निफ्टी 23,000 के पास संभलने की कोशिश कर रहा है। अगर निफ्टी इससे नीचे फिसलता है, तो यह 22,500 या 22,000 तक भी जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,400 को पार करना जरूरी है। इंडिकेटर्स से बाजार में बड़ी रिकवरी की गुंजाइश सीमित लग रही है।

चॉइस ब्रोकिंग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुमीत बगड़िया का मानना है कि बाजार का मौजूदा रुख ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग का है। निफ्टी के लिए 23,000 से 22,950 का लेवल एक मजबूत सपोर्ट है। अगर बाजार इस सपोर्ट को तोड़ता है, तो और भी कमजोरी दिख सकती है।

सुमीत बगड़िया ने कहा कि डेली RSI 31.84 पर है, जो ‘ओवरसोल्ड’ यानी जरूरत से ज्यादा बिकवाली वाली स्थिति के करीब है। इससे संकेत मिलता है कि थोड़े समय के लिए बाजार में उछाल आ सकता है, लेकिन यह अभी भी बाजार की अंदरूनी कमजोरी को ही दिखाता है।

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