Tuesday, 14 Apr 2026 | 04:40 PM

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Noida Factory Workers Protest Salary Hike; Violence Erupts

Noida Factory Workers Protest Salary Hike; Violence Erupts

यूपी में नोएडा और ग्रेटर नोएडा का इंडस्ट्रियल इलाका सोमवार को अचानक उबल उठा। 9 अप्रैल से जारी फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। . गुस्साए कर्मचारियों ने 13 इलाकों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। पुलिस के कई वाहनों में आग लगा दी और पत्थरबाजी की। बवाल की वजह से नेशनल हाईवे-9 पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे दफ्तर जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे। सीएम योगी तक को शांति की अपील करनी पड़ी। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर हिंसा क्यों भड़की, हरियाणा कनेक्शन क्या है और कहां चूक हुई? पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले नोएडा में हिंसा भड़कने की वजह समझिए… नोएडा के फैक्ट्री कर्मचारियों में गुस्से की मुख्य वजह पड़ोसी राज्य हरियाणा का एक फैसला है। 9 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैक्ट्री कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी में 35% बढ़ोतरी करने का फैसला लिया। 10 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी किया। जैसे ही ये खबर नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में फैली, यहां के कर्मचारी भी सैलरी बढ़ाने की मांग करने लगे। हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाए जाने की सूचना दी थी। हरियाणा और यूपी में कर्मचारियों की सैलरी में कितना अंतर? हरियाणा- अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,275 से बढ़ाकर 15,220 रुपए, अर्द्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,430 से बढ़ कर 16,780 रुपए और कुशल श्रमिकों का वेतन 13,704 से बढ़ कर 18,500 रुपए किया गया। उच्च कुशल का वेतन 14,389 से 19,425 रुपए किया । यह बढ़ोतरी लगभग 35 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश (नोएडा)- यहां अनस्किल्ड वर्करों को लगभग 11,313 रुपए की सैलरी ही मिल रही है। दैनिक मजदूरी- हरियाणा में रोजाना मजदूरी 580 से 750 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि नोएडा में केवल 435 से 535 रुपए के बीच है। वर्करों की 5 मांगें जिससे कंपनियां बच रहीं फैक्ट्री कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और एलपीजी सिलेंडर के बढ़ते दामों के बीच मौजूदा सैलरी में गुजारा करना नामुमकिन है। ऐसे में वर्करों ने 5 मांगें उठाई हैं। 1. सैलरी बढ़ोतरी- हरियाणा की तरह पर यूपी में भी न्यूनतम सैलरी में कम से कम 35% बढ़ाई जाए। 2. ओवरटाइम का डबल पैसा- नए श्रम नियमों के हिसाब से अगर कर्मचारी एक्स्ट्रा काम करता है, तो उसे दोगुनी दर से पेमेंट हो। 3. सैलरी स्लिप और टाइम पर भुगतान- हर महीने की 10 तारीख तक सैलरी बैंक खाते में आए। सैलरी स्लिप अनिवार्य रूप से दी जाए। 4. साप्ताहिक छुट्टी- सप्ताह में एक दिन का छुट्टी मिले। अगर छुट्टी के दिन काम लिया जाए, तो उसका भी डबल पैसा मिले। 5. बोनस का सीधा पेमेंट- बोनस सीधे बैंक खाते में जमा हो, न कि बिचौलियों या ठेकेदारों के जरिए वर्कर को मिले। गुस्साए फैक्ट्री वर्करों ने इलाके में आम लोगों की गाड़ियो को भी निशाना बनाया है। अब जानिए क्या कहते हैं लेबर लॉ… वर्कस्पेस पर सिक्योरिटी- वर्कर को काम करने के लिए सुरक्षित और साफ माहौल मिले। काम के तय घंटे- एक निश्चित समय से ज्यादा काम कराने पर ‘ओवरटाइम’ देना जरूरी है। PF और ESI- सैलरी से कटने वाले प्रॉविडेंट फंड (PF) और बीमा (ESI) का लाभ सही समय पर मिले। मनमानी कटौती पर रोक- बिना किसी ठोस वजह से सैलरी काटना गैर-कानूनी है। हिंसा काबू करने के लिए नोएडा के कई इलाकों में रैफिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है। प्रशासन ने सहमति दी, इंडस्ट्री मालिक तैयार नहीं थे हरियाणा में 7 अप्रैल को फैक्ट्री कर्मचारियों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। नोएडा में भी फैक्ट्री कर्मचारी 9 अप्रैल से प्रदर्शन करने लगे। प्रशासन की ओर से समझौता और मांगों सहमति बनने की बात कही गई थी, लेकिन इसमें इंडस्ट्री के मालिकों की सहमति नहीं थी। जब तक इडस्ट्री के मालिक न्यूनतम मजदूरी देने, आठ घंटे तक काम कराने, ओवरटाइम देने, नाइट ड्यूटी अलाउंस नियमानुसार देने जैसी मांगों पर सहमत नहीं होंगे, तब तक प्रशासन, श्रम और इंडस्ट्री डिपार्टमेंट से समझौते का कोई औचित्य नहीं था। स्थानीय श्रमिकों ने करीब तीन चार महीने पहले स्थानीय श्रम उपायुक्त से भी इस मुद्दे पर बात की थी, श्रम उपायुक्त ने भी मांगों को पूरी कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन बात नहीं बनी। श्रम उपायुक्त की ओर से इस संबंध में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया था। प्रदर्शन में अभी तक कोई बड़ा संगठन सामने नहीं आया। लेकिन शासन को सूचना है कि सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस के कुछ पदाधिकारी इसे आंदोलन को पर्दे के पीछे से समर्थन कर रहे हैं। आंदोलन का अभी तक कोई राजनीतिक कनेक्शन सामने नहीं आया है। अब पिछले 3 दिन का पूरा घटनाक्रम समझिए… 10 और 11 अप्रैल- होजरी कॉम्प्लेक्स और सूरजपुर-दादरी रोड पर करीब एक हजार फैक्ट्री वर्करों ने प्रदर्शन शुरू किया। पुलिस के लाठीचार्ज से तनाव बढ़ गया। मामला लखनऊ तक पहुंचा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने 24 घंटे में मामला सुलझाने के निर्देश दिए। 12 अप्रैल- नोएडा की DM मेधा रूपम और श्रम विभाग के अधिकारियों ने इंडस्ट्री मालिकों के साथ बैठक की। प्रशासन ने कंपनियों को सख्त निर्देश दिए कि वे श्रम कानूनों का पालन करें और समय पर सैलरी दें। कंट्रोल रूम भी बनाया गया। 13 अप्रैल- आश्वासनों से फैक्ट्री वर्कर संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि मुख्य मांग यानी सैलरी बढ़ाने को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ। सोमवार सुबह हजारों वर्कर सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन हिंसक हो गया। ————————————- घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… नोएडा पुलिस ने भास्कर रिपोर्टर से मारपीट की:कर्मचारियों का प्रदर्शन कवर कर रहे थे, वर्कर्स को घसीटकर बस में बैठाया नोएडा में सोमवार सुबह सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस ने लाठियां चला दीं। भास्कर रिपोर्टर साकेत आनंद से भी पुलिस ने मारपीट की है। पूरी खबर पढ़ें…

खबर हटके- सैनिक पी गए 36 लाख लीटर कॉफी:सांप ने काटा तो बच्चे को नदी में बांधा; शटर-दीवार के बीच 6 घंटे फंसा रहा चोर

खबर हटके- सैनिक पी गए 36 लाख लीटर कॉफी:सांप ने काटा तो बच्चे को नदी में बांधा; शटर-दीवार के बीच 6 घंटे फंसा रहा चोर

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग के दौरान अमेरिकी सैनिक करीब 36 लाख लीटर कॉफी पी गए। वहीं, उत्तर प्रदेश के अमरोहा में बच्चे को सांप के काटने पर 12 घंटे तक गंगा नदी में बांधकर रखा गया। उधर, यूपी के ही गाजियाबाद में एक चोर 6 घंटे तक शटर और दीवार के बीच फंसा रहा। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर

चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई। इसके पूरा होने के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कम हुए हैं। पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 51 करोड़ थी। फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद यह संख्या 44.92 करोड़ रह गई है। SIR के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा समेत पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की गई है। यूपी में शुक्रवार को जारी हुई SIR की फाइनल लिस्ट में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई है। यानी लिस्ट में 2.04 करोड़ नाम कटे हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से बाहर हुए हैं। अब तक 60 करोड़ वोटर कवर, 39 करोड़ बाकी चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के पहले फेज में बिहार में SIR कराया गया था। वहीं असम में SIR के बजाय 10 फरवरी को स्पेशल रिवीजन पूरा किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में शेड्यूल में बार-बार बदलाव हुए। बिहार की तरह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। देश के करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ को इस अभियान में शामिल किया जा चुका है। अब बाकी 39 करोड़ मतदाताओं को SIR के तीसरे फेज 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किया जाएगा। इन 22 राज्यों-UT में SIR प्रक्रिया इस महीने पांच विधानसभा चुनावों के बाद शुरू की जाएगी। चुनावी राज्य बंगाल में SIR के बाद 90.83 लाख नाम हटे पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई नवंबर से चल रही प्रक्रिया के तहत की गई है, आयोग के 28 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, SIR शुरू होने के बाद 63.66 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। बाद में जांच और प्रक्रिया पूरी होने के साथ कुल हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर करीब 90.83 लाख हो गई है। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य? पेंशनर पहचान पत्र किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र जन्म प्रमाणपत्र पासपोर्ट 10वीं की मार्कशीट स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम परिवार रजिस्टर में नाम जमीन या मकान आवंटन पत्र आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर

12 राज्यों-UT में SIR, 6.08 करोड़ लोगों के नाम कटे:UP में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़, बंगाल में 91 लाख वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर

चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे फेज के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में फाइनल वोटर लिस्ट जारी की गई। इसके पूरा होने के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में कुल 6.08 करोड़ नाम कम हुए हैं। पिछले साल 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 51 करोड़ थी। फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद यह संख्या 44.92 करोड़ रह गई है। SIR के दूसरे फेज में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश, गोवा समेत पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की गई है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को जारी हुई SIR की फाइनल लिस्ट में वोटर्स की संख्या 13% घटकर 13.39 करोड़ हो गई है। यानी लिस्ट में से 2.04 करोड़ लोगों के नाम कटे हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से बाहर हुए हैं। अब तक 60 करोड़ वोटर कवर, 39 करोड़ बाकी चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। SIR के पहले फेज में बिहार, दूसरे फेज में 9 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराया गया था। वहीं असम में SIR के बजाय 10 फरवरी को स्पेशल रिवीजन पूरा किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कई राज्यों में शेड्यूल में बार-बार बदलाव हुए। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। देश के करीब 99 करोड़ मतदाताओं में से 60 करोड़ को इस अभियान में शामिल किया जा चुका है। अब बाकी 39 करोड़ मतदाताओं को SIR के तीसरे फेज 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में कवर किया जाएगा। इन 22 राज्यों-UT में SIR प्रक्रिया इस महीने पांच विधानसभा चुनावों के बाद शुरू की जाएगी। चुनावी राज्य बंगाल में SIR के बाद 90.83 लाख नाम हटे पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान करीब 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई नवंबर से चल रही प्रक्रिया के तहत की गई है, आयोग के 28 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, SIR शुरू होने के बाद 63.66 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ रह गई। बाद में जांच और प्रक्रिया पूरी होने के साथ कुल हटाए गए नामों की संख्या बढ़कर करीब 90.83 लाख हो गई है। SIR की प्रोसेस को 6 सवाल-जवाब में जानें 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य? पेंशनर पहचान पत्र किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र जन्म प्रमाणपत्र पासपोर्ट 10वीं की मार्कशीट स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम परिवार रजिस्टर में नाम जमीन या मकान आवंटन पत्र आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai

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Hindi News National Breaking News LIVE Updates: Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai 6 घंटे पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र में बारामती विधानसभा उपचुनाव में NCP कैंडिडेट और डिप्टी CM सुनेत्रा पवार का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। आज नाम वापसी की आखिरी तारीख पर कांग्रेस के आकाश मोरे ने नाम वापस ले लिया। यह सीट अजित पवार के निधन से खाली हुई है। इसके पहले महाराष्ट्र के प्रभारी एआईसीसी महासचिव चेन्निथला ने कहा था कि उन्होंने कांग्रेस की राज्य इकाई से चुनाव से अपना उम्मीदवार वापस लेने को कहा है। बारामती में 23 अप्रैल को उपचुनाव होना है। आज की अन्य बड़ी खबरें… 50 से ज़्यादा शिक्षाविदों ने राष्ट्रपति मुर्मू से NCERT की किताब पर लगे बैन के मामले में दखल देने की अपील की 50 से ज्यादा शिक्षाविदों और विद्वानों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब पर सुप्रीम कोर्ट का बैन न्यायिक दखलंदाजी (judicial overreach) है और उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में दखल देने की अपील की है। इस चिट्ठी में, दस्तखत करने वालों ने कहा कि ‘Exploring Society: India and Beyond’ नाम की किताब पर लगा बैन—खास तौर पर उस चैप्टर पर, जिसमें न्यायपालिका के बारे में चर्चा की गई है – देश की शिक्षा व्यवस्था पर दूरगामी असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से शिक्षाविदों, शिक्षकों और संबंधित लोगों की किताब के कंटेंट की निष्पक्ष रूप से जांच करने की क्षमता सीमित हो गई है और न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक बहस भी दब गई है। NIA ने बंगाल में मालदा हिंसा केस में 12 FIR दर्ज कीं; SIR रिव्यू करने गए अधिकारियों को बंधक बनाया था नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने बुधवार को उन न्यायिक अधिकारियों के घेराव की जांच के लिए 12 मामले दर्ज किए, जिन्हें पश्चिम बंगाल के मालदा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़े काम के लिए तैनात किया गया था। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया। देर रात जारी एक बयान में, NIA ने कहा कि उसने 6 अप्रैल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में, “पश्चिम बंगाल के मालदा में मतदाता सूचियों के SIR से जुड़े काम के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और संबंधित कानून-व्यवस्था की घटनाओं” से जुड़े मामलों की जांच के लिए, “मालदा जिले के मोथाबाड़ी पुलिस स्टेशन की 7 और कालियाचक पुलिस स्टेशन की 5 FIR को फिर से दर्ज किया है”। भागवत बोले- RSS इतिहास की किताबों में अपना नाम नहीं चाहती, इसका काम स्वयंसेवकों की मेहनत पर आधारित, किसी की कृपा से नहीं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत बुधवार को कहा कि RSS अपना नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखवाना नहीं चाहती, बल्कि पिछले 100 सालों के अपने काम का पूरा श्रेय समाज को देना चाहती है। उन्होंने कहा कि RSS का पूरा काम स्वयंसेवकों की मेहनत पर आधारित है, किसी की कृपा से नहीं। किसी की कृपा न होने के बावजूद संगठन के काम में कोई बाधा नहीं आई। भागवत नागपुर में ‘राष्ट्र स्वराधना’ नाम की किताब के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। यह किताब RSS के घोष पथक (बैंड दल) के इतिहास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सभी स्वयंसेवकों ने संघ की विचारधारा के अनुसार राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी पूरी ताकत लगाई है। पुणे में 75 साल के डॉक्टर से 12.31 करोड़ की ठगी, फर्जी शेयर ऐप, व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाया पुणे में एक 75 साल के डॉक्टर ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 12.31 करोड़ रुपए की ठगी का शिकार हो गया। पुलिस के अनुसार, डॉक्टर को जनवरी में एक मैसेज मिला, जिसमें शेयरों की लिस्ट और एक लिंक था। इस लिंक के जरिए उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां खुद को बड़ी फाइनेंशियल कंपनी के अधिकारी बताने वाले लोग सक्रिय थे। इसके बाद डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप पर रजिस्टर कराया गया और निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए। 7 मार्च से 18 मार्च के बीच डॉक्टर ने कुल 8 बार में 12.31 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए। ऐप में उन्हें 54 करोड़ रुपए तक का नकली मुनाफा भी दिखाया गया। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान व पैसे के ट्रेल का पता लगाया जा रहा है। भारत ने जलवायु सम्मेलन की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी वापस ली, मोदी ने दुबई में समिट होस्ट करने का प्रस्ताव दिया था भारत ने 2028 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन COP33 की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी वापस ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में दुबई में आयोजित COP28 सम्मेलन के दौरान भारत को COP33 का मेजबान बनाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि अब सूत्रों के मुताबिक, भारत ने इस सप्ताह आधिकारिक रूप से अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है। इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पर्यावरण मंत्रालय और COP मुख्यालय दोनों की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पूर्व नीति आयोग CEO अमिताभ कांत ने इस फैसले को सही कदम बताते हुए कहा कि विकसित देश पेरिस समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा नहीं कर पाए हैं और COP प्रक्रिया पर फॉसिल फ्यूल लॉबी का प्रभाव बढ़ गया है। केंद्र ने एयरपोर्ट पार्किंग व लैंडिंग चार्ज 25% घटाए केंद्र सरकार ने बड़े एयरपोर्ट पर लैंडिंग और पार्किंग चार्ज 25% घटा दिए हैं। नई व्यवस्था तत्काल लागू हो गई है और घरेलू उड़ानों के लिए अगले 3 महीनों तक मिलेगी। ईरान युद्ध और पाक रूट बंद होने से एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। इंडिगो और एअर इंडिया की मांग पर रेगुलेटर एईआरए ने यह निर्णय लिया। इससे कंपनियों का परिचालन खर्च कम होगा। इस फैसले के बाद इंडिगो के शेयर 10% तक उछल गए। बिना डेटा वाला वॉयस और एसएमएस प्लान भी दें: ट्राई टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने प्रस्ताव दिया है कि टेलीकॉम कंपनियां हर वैलिडिटी अवधि में केवल वॉयस और एसएमएस वाले प्लान भी उपलब्ध कराएं। अभी अधिकतर

दवा नहीं, ये पत्ते हैं सेहत का खजाना! डायबिटीज से दिल तक फायदेमंद, जानें इसके चमत्कारी फायदे

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Last Updated:April 08, 2026, 13:21 IST आयुर्वेद में शहतूत के पत्तों को बेहद गुणकारी माना गया है. ये न सिर्फ डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, बल्कि हृदय स्वास्थ्य, इम्यूनिटी और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होते हैं. नियमित रूप से इनका सेवन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं. शहतूत के पत्ते मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं. इनमें विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. साथ ही ये पाचन को बेहतर करते हैं और सूजन कम करने में भी लाभकारी होते हैं. इनका सेवन चाय या काढ़े के रूप में किया जा सकता है. एक्सपर्ट डॉ. विनीता शर्मा के अनुसार, शहतूत के पत्ते मधुमेह को नियंत्रित करने में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. ये प्राकृतिक रूप से ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं और टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर बनाते हैं. शहतूत के पत्ते हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं, क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनोइड्स भरपूर मात्रा में होते हैं. ये कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने, उच्च रक्तचाप को कम करने, धमनियों की सूजन घटाने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इससे हृदय रोगों, जैसे एथेरोस्क्लेरोसिस, के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google शहतूत के पत्ते वजन प्रबंधन के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माने जाते हैं. इनमें मौजूद पॉलीफेनोल और फाइबर शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करते हैं, फैट के संचय को कम करने में मदद करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देते हैं. शहतूत के पत्ते विटामिन C, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इनमें सूजनरोधी और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं. शहतूत के पत्ते त्वचा और मुंह के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, C, E और एंटी-बैक्टीरियल गुण दाग-धब्बों को कम करने, त्वचा को चमकदार बनाने, सूजन घटाने और मुंह के छालों व संक्रमण से राहत देने में सहायक होते हैं. शहतूत के पत्ते त्वचा और मुंह के स्वास्थ्य के लिए वरदान माने जाते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, C, E और एंटी-बैक्टीरियल गुण दाग-धब्बों को कम करने, त्वचा को निखारने, सूजन घटाने और मुंह के छालों व संक्रमण को ठीक करने में मदद करते हैं. First Published : April 08, 2026, 13:21 IST

भास्कर अपडेट्स: कोलकाता एयरपोर्ट पर एक कार इंडिगो विमान से टकराया, एयरक्राफ्ट को नुकसान

भास्कर अपडेट्स: कोलकाता एयरपोर्ट पर एक कार इंडिगो विमान से टकराया, एयरक्राफ्ट को नुकसान

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक कार इंडिगो के विमान से टकरा गया। यह घटना एयरपोर्ट के पार्किंग बे नंबर-51 में हुई, जहां विमान खड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैटरिंग की गाड़ी अचानक आगे बढ़ी और विमान के इंजन से टकरा गई, जिससे विमान को मामूली नुकसान हुआ। घटना के बाद विमान को जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया है। उसका मेंटेनेंस किया जा रहा है। यह फ्लाइट कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाली थी। यात्रियों को दूसरी फ्लाइट से भेजा गया है। इंडिगो ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है। एयरलाइन जांच में पूरी तरह सहयोग कर रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

भास्कर अपडेट्स: कोलकाता एयरपोर्ट पर एक कार इंडिगो विमान से टकराया, एयरक्राफ्ट को नुकसान

भास्कर अपडेट्स: कोलकाता एयरपोर्ट पर एक कार इंडिगो विमान से टकराया, एयरक्राफ्ट को नुकसान

नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक कार इंडिगो के विमान से टकरा गया। यह घटना एयरपोर्ट के पार्किंग बे नंबर-51 में हुई, जहां विमान खड़ा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैटरिंग की गाड़ी अचानक आगे बढ़ी और विमान के इंजन से टकरा गई, जिससे विमान को मामूली नुकसान हुआ। घटना के बाद विमान को जांच के लिए ग्राउंड कर दिया गया है। उसका मेंटेनेंस किया जा रहा है। यह फ्लाइट कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाली थी। यात्रियों को दूसरी फ्लाइट से भेजा गया है। इंडिगो ने कहा कि संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है। एयरलाइन जांच में पूरी तरह सहयोग कर रही है। आज की अन्य बड़ी खबरें… सुप्रीम कोर्ट बोला- दिव्यांगों की जनरल सीट सभी वर्गों के लिए खुली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिव्यांगों के लिए जो जनरल सीट होती है, वह किसी एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए खुली होती है। इन सीटों पर चयन सिर्फ मेरिट यानी ज्यादा अंक के आधार पर होगा, न कि सामाजिक श्रेणी के आधार पर। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग का दिव्यांग उम्मीदवार ज्यादा अंक लाता है, तो उसे सिर्फ इसलिए रोका नहीं जा सकता कि वह जनरल कैटेगरी का नहीं है। मामला प.बंगाल की एक सरकारी कंपनी की भर्ती से जुड़ा था, जहां ज्यादा अंक पाने वाले ओबीसी उम्मीदवार की जगह कम अंक वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि जनरल सीट एक खुला मौका है, जहां सभी योग्य उम्मीदवार बराबरी से प्रतिस्पर्धा करते हैं। एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) सिर्फ नौकरी छोड़ने की प्रक्रिया नहीं है, यह कर्मचारी का अधिकार है। यदि कर्मचारी तय नियमों के अनुसार नोटिस देता है और समय सीमा पूरी हो जाती है, तो वीआरएस अपने आप लागू मानी जाएगी। जस्टिस जेके महेश्वरी और विजय बिश्नोई की बेंच ने बैंककर्मी के मामले में यह फैसला दिया। अब टोल प्लाजा पर कैश बंद, यूपीआई भी 1.25 गुना महंगा सड़क परिवहन मंत्रालय ने 10 अप्रैल से राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है। अब फास्टैग ही टोल भुगतान का मुख्य माध्यम रहेगा। बिना वैध फास्टैग वाले वाहन चालक यूपीआई से भुगतान कर सकेंगे, लेकिन उन्हें निर्धारित टोल का 1.25 गुना शुल्क देना होगा। इस कदम का उद्देश्य टोल प्लाजा पर लंबी कतारें कम करना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Poplar Leaves Benefits: मुंहासे से लेकर जोड़ों के दर्द तक…. पॉपुलर के पत्तों के चौंकाने वाले फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

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Last Updated:April 07, 2026, 16:36 IST पॉपुलर के पत्ते न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके औषधीय गुण भी अद्भुत हैं. इसमें पाए जाने वाले एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण मुंहासे, खुजली, घाव और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं, जिससे यह एक प्राकृतिक और रामबाण घरेलू उपचार बन जाता है. पॉपुलर के पत्ते मुख्य रूप से अपनी लकड़ी (प्लाईवुड, माचिस) के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन इसके औषधीय गुण भी कम नहीं हैं. पत्तों और छाल में सूजनरोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से त्वचा रोगों या दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह पेड़ मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य से उगाया जाता है और 5-7 साल में उपयोग के लिए तैयार हो जाता है. डॉक्टर विनीत शर्मा के अनुसार पॉपुलर (चिनार) के पत्ते और विशेषकर उसकी चिपचिपी कलियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं. ये श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे खांसी और ब्रोंकाइटिस, दर्द निवारण, सूजन कम करने और त्वचा के घाव ठीक करने में सहायक हैं. इनमें सैलिसिन जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत देते हैं. इसके अर्क का उपयोग त्वचा की जलन और बवासीर के उपचार में भी किया जाता है. पॉपुलर के पत्ते और कलियाँ त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं. ये मुख्य रूप से सूजन, खुजली, मुंहासे और घावों को ठीक करने में मदद करती हैं. इनमें सैलिसिन, फ्लेवोनोइड्स और फिनोलिक एसिड जैसे सूजन-रोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की बीमारियों और सनबर्न में राहत प्रदान करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पॉपुलर के पत्ते और पेड़ मुख्य रूप से कृषि-वानिकी के लिए फायदेमंद हैं, न कि सीधे तौर पर घरेलू उपचार के लिए. यह एक तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है, जो 5-7 साल में अच्छी कमाई देता है. हालांकि, इसके पत्तों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने (खाद के रूप में) और अन्य कृषि संबंधी लाभों के लिए किया जा सकता है. पॉपुलर के पेड़ के पत्ते और छाल का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में खांसी, जुकाम और श्वसन नली की समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. यह पेट में सूजन, घाव और कुछ मामलों में जोड़ों के दर्द में भी राहत देने में सहायक माना जाता है. इसके अर्क में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो सांस लेने में आसानी प्रदान करते हैं. पॉपुलर के पेड़ के पत्ते, छाल और कलियों में दर्द और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से सैलिसिन के कारण होते हैं. यह प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में काम करता है और गठिया, मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों की सूजन में राहत प्रदान करने के लिए उपयोग किया जा सकता है. पॉपुलर के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो मुंहासे, खुजली और घाव जैसी त्वचा समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके पत्तों का पेस्ट या रस दाग-धब्बे कम करने, त्वचा को गहराई से साफ करने और प्राकृतिक निखार लाने में मदद करता है. यह त्वचा के रोगों में एक रामबाण घरेलू उपचार माना जाता है. First Published : April 07, 2026, 15:13 IST

किचन में रखी इस दाल में छुपा है हेल्थ सीक्रेट! दिल से पाचन तक करेगी कमाल, ऐसे करें इस्तेमाल

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Last Updated:April 06, 2026, 14:02 IST भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली उड़द की दाल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन, फाइबर और कई जरूरी खनिज शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन सुधारने से लेकर दिल को स्वस्थ रखने और त्वचा-बालों को निखारने तक कई तरह से फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल (ब्लैक ग्राम) के पत्ते और दाल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अन्य खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन सुधारने, हड्डियों को मजबूत बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं. यह पेट के लिए भी काफी पौष्टिक मानी जाती है. डॉक्टर विनीत शर्मा ने बताया कि उड़द की दाल का सेवन, विशेषकर इसके पत्ते (पौधे का भाग) और दाल, फाइबर और खनिजों से भरपूर होने के कारण पाचन में सुधार, कब्ज से राहत और पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में बेहद फायदेमंद है. यह वात दोष को भी कम करती है. हालांकि, पचने में भारी (गुरु) होने के कारण इसे अदरक या लहसुन के साथ पकाना बेहतर माना जाता है. उड़द की दाल में पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करती है. इससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है. यह दाल रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और धमनियों में प्लाक जमने से रोककर दिल को मजबूत बनाए रखने में सहायक होती है. Add News18 as Preferred Source on Google उड़द की दाल आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पोटैशियम का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर एनीमिया की समस्या को कम करने में मदद करती है और ऊर्जा स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है. यह थकान कम करने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और पाचन तंत्र को सुधारने में भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह आयरन, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. यह रूखी त्वचा को नमी प्रदान करती है, मुंहासों को कम करने में मदद करती है और स्कैल्प को पोषण देकर बालों को घना व मजबूत बनाती है, जिससे झड़ने की समस्या भी कम होती है. उड़द की दाल का पेस्ट त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे, दाग-धब्बे और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से त्वचा को साफ कर डेड स्किन हटाता है, जिससे चेहरा चमकदार और मुलायम बनता है. इसे रातभर भिगोकर पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है. उड़द की दाल और इसके पौधे के विभिन्न हिस्से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और आंतों की सफाई में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाता है. First Published : April 06, 2026, 14:02 IST