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Hindi News National Breaking News LIVE Updates: Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai 18 मिनट पहले कॉपी लिंक ओडिशा के ढेंकनाल जिले में एक व्यक्ति पर अपनी ही 21 साल की दिव्यांग (स्पेशली एबल्ड) बेटी से रेप करने का आरोप लगा है। पीड़ित के प्रेग्नेंट होने और अस्पताल में बच्ची को जन्म देने के बाद यह मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार, पीड़ित के शरीर में बदलाव के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। शिकायत में आरोप है कि आरोपी पिता ने उसकी कमजोरी का फायदा उठाते हुए लंबे समय तक उसका शोषण किया। पुलिस ने मामले में आरोपी रहाश सेठी (59) को गिरफ्तार कर लिया है और केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया है और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। आज की अन्य बड़ी खबरें… मुंबई के मलाड में दो गुटों के बीच झड़प, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात मुंबई के मलाड ईस्ट इलाके में रविवार रात दो गुटों के बीच झड़प हो गई। यह घटना संतोष नगर मार्केट क्षेत्र में हुई, जो दिंडोशी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। मुंबई पुलिस के अनुसार, स्थिति को नियंत्रण में किया गया और इलाके में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल झड़प के कारणों की जांच की जा रही है और अधिक जानकारी का इंतजार है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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Hindi News National Breaking News LIVE Updates: Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai 48 मिनट पहले कॉपी लिंक ओडिशा के ढेंकनाल जिले में एक व्यक्ति पर अपनी ही 21 साल की दिव्यांग (स्पेशली एबल्ड) बेटी से रेप करने का आरोप लगा है। पीड़ित के प्रेग्नेंट होने और अस्पताल में बच्ची को जन्म देने के बाद यह मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार, पीड़ित के शरीर में बदलाव के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने एक बच्ची को जन्म दिया। शिकायत में आरोप है कि आरोपी पिता ने उसकी कमजोरी का फायदा उठाते हुए लंबे समय तक उसका शोषण किया। पुलिस ने मामले में आरोपी रहाश सेठी (59) को गिरफ्तार कर लिया है और केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया है और लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। आज की अन्य बड़ी खबरें… मुंबई के मलाड में दो गुटों के बीच झड़प, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात मुंबई के मलाड ईस्ट इलाके में रविवार रात दो गुटों के बीच झड़प हो गई। यह घटना संतोष नगर मार्केट क्षेत्र में हुई, जो दिंडोशी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। मुंबई पुलिस के अनुसार, स्थिति को नियंत्रण में किया गया और इलाके में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल झड़प के कारणों की जांच की जा रही है और अधिक जानकारी का इंतजार है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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Hindi News National Breaking News LIVE Updates: Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai 5 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु के कुन्नूर में एक मिनीबस 100 फीट गहरी खाई में गिर गई, जिससे 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि बस नामक्कल से आ रही थी। इसमें सवार सभी लोग पर्यटक थे। आज की अन्य बड़ी खबरें… दिल्ली के एक फ्लैट में दो भाइयों के शव मिले, शरीर पर चोट या गला घोंटने के कोई निशान नहीं दिल्ली के द्वारका इलाके में शनिवार देर रात एक बिल्डिंग के अंदर दो लोगों के शव मिले। मरने वालों की पहचान देवेंद्र कुमार और अमित के रुप में की गई है। वे दोनों भाई हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दोनों की उम्र 40-45 साल के बीच है। शुरुआती जांच में शवों पर चोट या गला घोंटने के कोई निशान नहीं मिले। मामले की जांच की जा रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
सुबह की चाय से लेकर शाम के नाश्ते तक, अगर आप हर समय खा रहे हैं ब्रेड, तो सावधान! इन बीमारियों का खतरा

Last Updated:April 04, 2026, 16:12 IST Health News: अक्सर आपने देखा होगा कि बच्चों को सुबह चाय के साथ या फिर लंच बॉक्स में ब्रेड दिया जाता है, जो अब उनकी दिनचर्या बन गई है. लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार, ब्रेड सेहत को काफी नुकसान पहुंचाता है. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ब्रेड से सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है. चंदौली: आज के आधुनिक जीवन में लोगों की खानपान की आदतों में तेजी से बदलाव आया है. व्यस्त दिनचर्या और समय की कमी के कारण लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिन्हें बनाने में कम समय लगे. इसी वजह से ब्रेड का उपयोग बेहद आम हो गया है. सुबह की चाय के साथ ब्रेड-बटर, बच्चों के टिफिन में ब्रेड, जिम के बाद स्नैक के रूप में ब्रेड हर उम्र के लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बना चुके हैं. हालांकि, हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ब्रेड के अत्यधिक सेवन को लेकर चिंता जताई है. डॉक्टर रिद्धि पांडे ने इस विषय पर बातचीत करते हुए लोकल 18 से बताया कि ब्रेड मूलरूप से सुविधा के लिए बनाया गया खाद्य पदार्थ है, न कि स्वास्थ्य के लिए है. उन्होंने कहा कि लोग रोटी बनाने में लगने वाले समय और मेहनत से बचने के लिए ब्रेड का विकल्प चुनते हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकती है. बीमारियों का बन सकता है कारण डॉक्टर पांडे ने बताया कि ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. यदि इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए, तो यह शरीर में अतिरिक्त कैलोरी के रूप में जमा होने लगता है. खासकर जब लोग ब्रेड को बटर, घी या पीनट बटर के साथ खाते हैं, तो शरीर में फैट का स्तर तेजी से बढ़ता है. यह जमा हुआ फैट आगे चलकर मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकता है. शरीर में बढ़ाता है कोलेस्ट्रॉल कई लोग यह सोचकर ब्राउन ब्रेड का सेवन करने लगते हैं कि यह ज्यादा हेल्दी है. हालांकि डॉक्टर पांडे ने बताया कि ब्राउन ब्रेड में सफेद ब्रेड की तुलना में थोड़ा कम कार्बोहाइड्रेट हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे रोजाना बिना सोचे-समझे खाया जाए. यदि ब्राउन ब्रेड का सेवन भी नियमित रूप से बटर या अन्य फैट के साथ किया जाए, तो यह भी शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का काम करता है. पौष्टिक विकल्पों को दें प्राथमिकता इसके अलावा, ब्रेड को फ्राई करके खाना या बार-बार सेवन करना पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है. लंबे समय तक ऐसी आदतें अपनाने से शरीर में ऊर्जा असंतुलन और वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है. डॉक्टर ने बताया कि लोग अक्सर सुविधा के लिए ब्रेड को अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बना लेते हैं, जो सही नहीं है. उन्होंने सलाह दी कि ब्रेड का सेवन पूरी तरह से बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में और कभी-कभार ही खाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके बजाय, पारंपरिक और ताजा बने खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, दलिया या अन्य पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए. बता दें कि यह समझना जरूरी है कि हर आसान विकल्प स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है. ब्रेड भले ही समय बचाने में मदद करे, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत बना लेना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है. संतुलित आहार और सही जीवनशैली ही अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : April 04, 2026, 14:41 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Health Tips: अगर खाते हैं बैंगन की सब्जी तो हो जाएं सावधान, हो सकता है नुकसान

Last Updated:April 03, 2026, 16:48 IST Health Tips: कई बार होता है कि हम अनजाने में ऐसा खाना खा रहे होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है. हमें लगता है कि ये हेल्दी सब्जी है, पर असलियत कुछ और ही होती है. अब डॉक्टर की माने तो बैंगन भी ऐसी सब्जी है, जिसे खाने से आपकी सेहत पर गलत असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं कैसे… सुल्तानपुर: वैसे तो ज्यादातर सब्जियां सेहत के लिए फायदेमंद बताई जाती हैं. मगर, इन्हीं सब्जियों में कुछ ऐसी सब्जियां भी होती हैं जिनको खाने का नुकसान भी होता है. डॉक्टर भी उनसे परहेज करने के लिए कहते हैं. उन्हीं सब्जियों में से एक है बैंगन. आज हम जानेंगे कि बैगन की सब्जी खाने के क्या नुकसान है और किन लोगों को बैंगन की सब्जी खाने से परहेज करना चाहिए. गर्भावस्था में हो सकता है नुकसान सुल्तानपुर के नगर पालिका स्थित अब्दुल हमीद चिकित्सालय में कार्यरत जनरल फिजिशियन डॉक्टर एसबी सिंह ने लोकल 18 से बात की. उन्होंने कहा कि सबसे पहले बात करें बैंगन की तो वो तासीर में गरम और गैस पैदा करने वाला होता है. यही वजह है कि यह पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. जिन लोगों को एसिडिटी, गैस और पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए बैंगन का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. खासकर गर्भवती महिलाओं को बैंगन खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. बैंगन में मौजूद फाइटोहॉर्मोन गर्भाशय को उत्तेजित कर सकता है, जिससे गर्भपात और अन्य समस्याएं हो सकती हैं. खासकर शुरुआती महीनों में बैंगन खाने से बचना चाहिए. जोड़ों के दर्द में नुकसानदायक जिन लोगों को आर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए भी बैंगन सही नहीं माना जाता है. क्योंकि इसमें सोलानेन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो जोड़ों में सूजन और दर्द को बढ़ा सकता है. इसी वजह से गठिया के मरीजों को बैंगन खाने से परहेज करना चाहिए. बढ़ाता है स्टोनइसके साथ ही बैंगन में ऑक्सलेट्स पाए जाते हैं, जो किडनी स्टोन की समस्या बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों को पहले से पथरी की शिकायत है, उन्हें बैंगन का सेवन कम या बिल्कुल नहीं करना चाहिए. ऐसे में जो लोग ज्यादा मात्रा में बैगन कहते हैं उन्हें सावधान होने की जरूरत है क्योंकि उनको किडनी की समस्या हो सकती है और इससे किडनी में बढ़ते हुए स्टोन से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 03, 2026, 16:48 IST
घर के पास का ये पेड़ है औषधि का खजाना, इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर घाव भरने तक, जानिए पीपल और गूलर के फायदे

Last Updated:April 03, 2026, 15:13 IST भारत में पीपल और गूलर के पेड़ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि औषधीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. आयुर्वेद में इनके फल, छाल, पत्ते और दूध का उपयोग कई बीमारियों के उपचार में किया जाता है. ये पाचन सुधारने, मधुमेह नियंत्रित करने, त्वचा रोगों में राहत देने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार होते हैं. पीपल और गुड़हल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. गुड़हल के फूल और पत्ते एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो बालों को मजबूत बनाने, त्वचा को चमकदार रखने, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं. वहीं, पीपल के कोमल पत्ते पेट की समस्याओं जैसे गैस और मरोड़ में राहत देने के लिए फायदेमंद हैं. एक्सपर्ट डॉ. विनीता शर्मा के अनुसार, पीपल के पेड़ पर अक्सर गूलर पाया जाता है, जो आयुर्वेद में एक शक्तिशाली औषधि माना जाता है. इसके फल, छाल और दूध में फाइबर, विटामिन A, C, एंटीऑक्सीडेंट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह मधुमेह को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने, कब्ज से राहत दिलाने, सूजन कम करने और घाव भरने में फायदेमंद माना जाता है. पीपल का पेड़, विशेषकर इसकी कोपलें, छाल और फल, पाचन सुधारने और कब्ज से राहत पाने का पारंपरिक आयुर्वेदिक उपाय है. इसमें मौजूद फाइबर और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पेट की सूजन, एसिडिटी, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google गूलर और पीपल के औषधीय गुण, विशेषकर गूलर के फल और छाल, मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं. इसमें मौजूद फाइबर और एंटी-डायबिटिक गुण ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं. पीपल के गूलर, छाल, पत्ते और दूध सूजन और घाव के उपचार में प्रभावी माने जाते हैं. इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह घाव को जल्दी भरने, दर्द कम करने और संक्रमण को रोकने में मदद करता है. पीपल के पेड़ पर पाए जाने वाले गूलर के फल, छाल और दूध आयुर्वेद में उच्च औषधीय गुणों और इम्यूनिटी बढ़ाने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और सूजनरोधी गुण होते हैं, जो पाचन, बवासीर, त्वचा रोगों और मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हैं. पीपल और गूलर दोनों ही त्वचा रोगों के लिए अत्यंत औषधीय माने जाते हैं. पीपल की कोपलें और छाल दाद, खुजली और एलर्जी में लाभकारी हैं, जबकि गूलर का दूध, छाल और फल फोड़े-फुंसी, नासूर, चर्म रोग और घाव भरने में प्रभावी माने जाते हैं. First Published : April 03, 2026, 15:13 IST
सेम के पत्तों का कमाल! त्वचा रोग, पाचन और इम्यूनिटी के लिए हैं जबरदस्त, जानिए इसके फायदे

Last Updated:April 02, 2026, 16:12 IST सेम के पत्ते सिर्फ एक सामान्य सब्जी नहीं, बल्कि औषधीय गुणों का खजाना हैं. ये पाचन सुधारने, त्वचा को स्वस्थ रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. आइए जानते हैं सेम के पत्तों के ऐसे फायदे, जो आपको हैरान कर देंगे. सेम के पत्ते पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, जो पाचन, त्वचा रोगों और सूजन को कम करने में बेहद फायदेमंद हैं. इनमें प्रोटीन, विटामिन A, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कब्ज जैसी पेट की समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि सेम के पत्ते चेहरे की चमक और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसके पत्तों में मौजूद औषधीय गुण चेहरे के काले धब्बे, दाद (रिंगवर्म) और ललौसी जैसे त्वचा रोगों को ठीक करने में मदद कर सकते हैं. इसका रस त्वचा को साफ़ और स्वस्थ बनाने में सहायक माना जाता है. सेम के पत्ते पाचन सुधारने के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज, पेट की सूजन, अपच और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को कम कर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. इसके सेवन से पेट दर्द, दस्त और त्वचा की समस्याओं में भी राहत मिलती है. यह सूजन कम करने और पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में कारगर हैं. Add News18 as Preferred Source on Google सेम के पत्ते पेट दर्द, मरोड़, उल्टी और दस्त में राहत देने के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इनके औषधीय गुण पाचन में सुधार, सूजन कम करने और पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को संतुलित करने में मदद करते हैं. इनका उपयोग सब्जी, काढ़ा या पत्तियों के रस के रूप में किया जा सकता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर सेम के पत्ते दाद-खाज-खुजली (त्वचा रोग), पाचन सुधार, पेट दर्द, सूजन कम करने और ब्लड शुगर नियंत्रित करने में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके सेवन या लेप से शरीर में जमा विषैले पदार्थ (टॉक्सिन्स) बाहर निकलने में मदद मिलती है और यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं. सेम के पत्ते गले की खराश और दर्द के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें सूजन-रोधी और औषधीय गुण होते हैं, जो गले में खराश, सर्दी और खांसी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं. सेम के पत्ते त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं, खासकर दाद, खाज, खुजली और सूजन जैसी समस्याओं में. इनके पत्तों का रस या पेस्ट लगाने से ललौसी, चेहरे के काले धब्बे और फंगल इन्फेक्शन कम होने में मदद मिलती है. इनमें मौजूद प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और औषधीय गुण त्वचा को स्वस्थ और साफ बनाए रखने में सहायक होते हैं. First Published : April 02, 2026, 16:12 IST
क्या AC बना रहा आपको कमजोर? सेहत पर कैसे डाल रहा असर, जानें एक्सपर्ट्स से

Last Updated:April 01, 2026, 14:51 IST Side effects of AC: गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल आम बात है, लेकिन घंटों एसी की हवा में रहने से आंखों की सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है. ड्राईनेस, जलन और इन्फेक्शन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. अलीगढ़: जैसे-जैसे गर्मियां अपने चरम की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे घरों में एसी का उपयोग तेजी से बढ़ता जा रहा है. लोग अपने आराम और ठंडक के लिए एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं, लेकिन इसके लगातार इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्वास्थ्य पर भी कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं. आइए जानते हैं एसी के नुकसान. एएमयू के जोग्राफी विभाग की प्रोफेसर सालेहा जमाल ने बताया कि एसी का आपके शरीर पर कैसा असर पड़ता है इसके बारे में बात करें तो एसी बंद कमरे की हवा को बार-बार सर्कुलेट करता है. इस प्रक्रिया में हवा में मौजूद धूल के कण (डस्ट पार्टिकल्स) और परागकण (पोलन) भी लगातार घूमते रहते हैं. ऐसे में जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्याएं हैं, जैसे अस्थमा या अन्य क्रॉनिक पल्मोनरी डिजीज, उनके लिए यह स्थिति परेशानी बढ़ाने वाली हो सकती है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा एसी हवा को ठंडा करने के साथ-साथ कमरे की नमी (मॉइस्चर) भी कम कर देता है. नमी की कमी के कारण आंखों में सूखापन, गले में खराश और सांस की नलियों में ड्रायनेस की समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए कमरे में पानी से भरा खुला बर्तन रखने से नमी को कुछ हद तक बनाए रखा जा सकता है. एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लगातार ठंडे वातावरण में रहने से शरीर उस तापमान का आदी हो जाता है. ऐसे में जब व्यक्ति अचानक तेज गर्मी में बाहर निकलता है, तो शरीर पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसलिए एसी का तापमान बहुत कम 16-18 डिग्री रखने के बजाय 24-26 डिग्री के बीच रखना अधिक उचित माना जाता है. उन्होंने बताया कि एसी की नियमित सफाई और सर्विसिंग भी बेहद जरूरी है. यदि समय-समय पर इसकी देखभाल नहीं की जाए, तो इसमें बैक्टीरिया और फंगस पनप सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं. अगर पर्यावरण पर इसके प्रभाव की बात करें, तो एसी से निकलने वाली गैसें जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती हैं. इसके अलावा एसी की बाहरी यूनिट गर्म हवा छोड़ती है, जिससे आसपास का तापमान और अधिक बढ़ जाता है. हालांकि, अब नई तकनीकों के माध्यम से इन प्रभावों को कम करने की कोशिश की जा रही है. इन्वर्टर एसी और इको-फ्रेंडली रेफ्रिजरेंट्स वाले एसी का उपयोग करके ऊर्जा की खपत और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है. इस प्रकार, एसी का उपयोग जहां एक ओर आराम देता है, वहीं इसके सही इस्तेमाल और रखरखाव पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को सुरक्षित रखा जा सके. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Aligarh,Uttar Pradesh First Published : April 01, 2026, 14:51 IST
ये मिर्च के पत्ते हैं सेहत के लिए वरदान, कई बीमारियों का करें काल, जोड़ों का दर्द और त्वचा की समस्याओं में राहत

Last Updated:April 01, 2026, 12:55 IST मिर्च के पत्ते और फल सिर्फ खाने में स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. ये पत्ते जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने, त्वचा को स्वस्थ रखने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. जानिए मिर्च के पत्तों के अद्भुत लाभ और इसे अपने आहार में शामिल करने के आसान तरीके. मिर्च के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें विटामिन A, C, एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द, गठिया, सूजन और त्वचा की समस्याओं में राहत दिला सकते हैं. इसके अलावा, ये पाचन सुधारने, प्रतिरक्षा बढ़ाने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी मददगार हैं. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि मिर्च के पत्ते पाचन और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और विटामिन A पाए जाते हैं. ये पत्ते पेट की सूजन कम करने, भूख बढ़ाने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में मददगार होते हैं और पारंपरिक चिकित्सा में भी इन्हें उपयोग में लाया जाता है. मिर्च के पत्ते पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, विशेषकर विटामिन A, C और एंटीऑक्सीडेंट. ये पत्ते प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने, कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और सूजन कम करने में बेहद फायदेमंद हैं. वास्तव में, मिर्च के पत्ते स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट का पावरहाउस हैं, जो शरीर की तंत्रिकाओं, रक्त वाहिकाओं और कोशिकाओं को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google मिर्च के पत्ते इम्यूनिटी और त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन A, C, E से भरपूर होते हैं, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. मिर्च के पत्ते त्वचा में कसाव लाने, कील-मुंहासे कम करने और सूजन घटाने में मदद करते हैं, साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाते हैं. मिर्च के पत्ते और फल, खासकर लाल मिर्च, अपने एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुणों के कारण दर्द और चोट में राहत देने में बेहद फायदेमंद होते हैं. इनमें मौजूद कैप्साइसिन नामक तत्व नसों को शांत कर दर्द को कम करता है, जिससे गठिया, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की ऐंठन में आराम मिलता है. मिर्च के पत्ते पोषण का पावरहाउस हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन C, विटामिन A, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं. मिर्च के पत्ते रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सूजन कम करने, आंखों की रोशनी सुधारने और पाचन में मदद करने में कारगर हैं. इन्हें सलाद, सूप या सब्जी में पकाकर खाया जा सकता है. मिर्च के पत्ते और फल, खासकर हरी मिर्च, में मौजूद कैप्साइसिन नामक यौगिक त्वचा और नसों को आराम देने में फायदेमंद है. इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण नसों के दर्द के संकेतों को कम करते हैं और सूजन घटाते हैं. वहीं, पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं. इसका उपयोग दर्द निवारक मलहम में भी किया जाता है. First Published : April 01, 2026, 12:55 IST
चार राज्यों के चुनाव के बीच मायावती का बड़ा बयान, यूपी चुनाव में होगी वापसी? 14 अप्रैल को प्रथम शंखनाद

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। समाजवादी यादव के बाद अब समाजवादी सुप्रीमो ने भी मोर्चा संभाल लिया है। बसपा के ताजा बयान में साफ कर दिया गया है कि आने वाले चुनाव से पहले स्कॉटलैंड जंग और घोषित होने वाली है। अब बिजनेसमैन नजर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जवाब पर तंज कसा है. समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 14 अप्रैल के बाद बहुजन समाज पार्टी में गिरावट के स्पष्ट संकेत दिए हैं। गठबंधन में सरकार को घेरा, उन्हें साफ है कि बीएसपी अब आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरने जा रही है। बैठक में आशुतोष ने कहा कि जब भी बहुजन समाज की सरकार सत्ता में होगी, तब तक बैस्ट, बैस्ट और बैचलर्स के लिए नीट का सही लाभ मिल सकता है। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा, “बहुजन समाज की सरकार के शून्य शून्य को सही नियत और नीति के साथ लागू करना असंभव है।” उन्होंने केंद्र और राज्य साजो-सामान पर आरोप लगाया कि वे अशांत व्यवस्था को “कमज़ोर और निष्क्रिय” बना रहे हैं। उन्होंने रोजगार और गरीबी के मुद्दे पर भी सरकार की घेराबंदी की. उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लोगों की रोजी-रोटी की स्थिति लगातार खराब हो रही है। उन्होंने कहा, “इसकी विशेषता यह है कि वैज्ञानिक भूख, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को हल करने की कोशिशें की जा रही हैं।” लखनऊ में 14 को बीएसपी का शक्ति प्रदर्शनसुप्रीमो बैस्ट ने साफ किया है कि आने वाले के चयन के लिए सभी कलाकारों के प्रतिनिधियों को ध्यान में रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जयंती पर बड़ी संख्या में नासिक पहुंचे और स्मारक स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बसपा का शक्ति प्रदर्शन इसी तरह से देखा जा रहा है। बीएसपी के कौन से टिकट वैध हैं? ब्राह्मण विद्रोहगी के बीच, बौद्ध धर्म का बड़ा हस्ताक्षर, रेस्तरां का आगमन पूरी तरह से बंदउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले टिकट लेने वाली मोटरसाइकिल तेज हो गई है। ईसाई समुदाय के प्रमुखों ने साफ कर दिया है कि इस बार समूह के चयन में विज्ञापन नहीं दिया जाएगा। बसपा ने कहा, “उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पार्टी ने कई विधानसभा सीटों पर चयन की घोषणा कर दी है और बाकी सीटों पर चयन जारी है, जिसमें राष्ट्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद घोषणा की जाएगी।” उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि लालची के नाम से पहले उनकी पूरी जांच की जाए। “बसपा विधान सभा चुनाव में आपराधिक गुटों को टिकटें से लेकर हस्ताक्षर तक।” यानी साफ है—इस बार टिकट्स जीरो को प्रोफाइल इमेज साफ है। प्रदेश में ब्राह्मण वर्ग की नाराज़गी की चर्चा के बीच समाजवादी ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ लाइन को फिर से आगे बढ़ाया है। बसपा ने कहा, “बीएसपी अन्य राजनीतिक सिद्धांतों से अलग है, इसके शब्द और कार्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से संचालित होते हैं और विचारधारा के चयन में समाज के सभी सिद्धांतों को और समान प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।” इसका मतलब यह है कि दलित, ओबीसी, ब्राह्मण और मुस्लिम सभी को आरक्षण देने की रणनीति पर काम हो रहा है। पिछले कुछ चुनावों में बसपा का प्रदर्शन कमजोर हो रहा है, लेकिन बसपा का यह आक्रामक रुख संकेत देता है कि अपनी पार्टी खोई जमीन पाने की कोशिश में है। पूर्वोत्तर, सामाजिक न्याय, स्थिरता और बेरोज़गारी जैसे मुद्दे सीधे तौर पर बड़े वोट बैंक को प्रभावित करते हैं। ऐसे में बीएसपी इन मैनेजमेंट को केंद्र में स्टॉक एक्सचेंज रणनीति तैयार करने का काम जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीएसपी जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत बनाता है, तो वह आने वाले चुनाव में फिर से अहम भूमिका निभा सकता है।









