इम्यूनिटी बढ़ानी है? खीरे के पत्तों का ये आसान तरीका कर सकता है कमाल, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:March 30, 2026, 14:37 IST अक्सर लोग खीरे के पत्तों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये पत्ते भी किसी औषधि से कम नहीं हैं. पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर खीरे के पत्ते शरीर को डिटॉक्स करने से लेकर पाचन सुधारने, इम्यूनिटी बढ़ाने और त्वचा को स्वस्थ रखने तक कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकते हैं. खीरे के पत्ते पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. ये शरीर को डिटॉक्स करने के साथ मूत्रवर्धक के रूप में काम करते हैं और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. गले की खराश और पित्त को शांत करने के लिए इनका उपयोग काढ़े या रस के रूप में किया जा सकता है. एक्सपर्ट डॉ विनीता शर्मा ने बताया कि खीरे के पत्ते और फल पाचन और कब्ज में राहत देते हैं क्योंकि इनमें 95-96% पानी और प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है. ये पेट की गर्मी को कम करते हैं, मल को नरम बनाते हैं और पेट फूलना, एसिडिटी व कब्ज से राहत दिलाते हैं. इसे सलाद या जूस के रूप में सेवन किया जा सकता है. खीरे के पत्ते गले के रोगों के लिए उपयोगी होते हैं. इसके लिए पत्तों का काढ़ा (10-20 मिली) बनाकर उसमें आधा ग्राम जीरा चूर्ण मिलाकर सेवन करने से गले के संक्रमण, सूजन और खराश में लाभ मिलता है. ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं, सूजन कम करते हैं और एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google खीरे के पत्ते में ट्राइटरपेनोइड्स और कुकुरबिटासिन जैसे महत्वपूर्ण यौगिक होते हैं, जो इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में काम कर सकते हैं. ये यौगिक सूजन को कम करने और शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं, जिससे पुरानी बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है. खीरे के पत्ते और फल दोनों ही प्राकृतिक मूत्रवर्धक होते हैं, जो शरीर से अतिरिक्त पानी और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. ये किडनी को यूरिक एसिड निकालने के लिए उत्तेजित करते हैं, मूत्र में जलन या रुकावट को कम करते हैं और किडनी के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं. खीरे के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं, जो त्वचा की सूजन, लालिमा और जलन को कम करने में मदद करते हैं. ये पत्ते कुकुरबिटासिन और फेनोलिक्स से भरपूर होते हैं, जो सूजन पैदा करने वाली कोशिकाओं को रोकते हैं. इन्हें पीसकर पेस्ट बनाकर या अर्क के रूप में त्वचा पर लगाने से शीतलता मिलती है. खीरे के पत्ते और फल पेट की सूजन, एसिडिटी और गैस में राहत के लिए फायदेमंद होते हैं, क्योंकि इनमें सूजन-रोधी गुण और उच्च पानी की मात्रा होती है. ये शरीर को हाइड्रेट कर पेट की जलन कम करते हैं और पाचन में सुधार करते हैं. इन्हें जूस, सलाद या पानी के साथ सेवन किया जा सकता है. First Published : March 30, 2026, 14:37 IST
कानपुर-कौशांबी में हाईवे पर पेट्रोल की लूट मची:ड्रम-बाल्टी लेकर पहुंचे लोग; टैंकरों की हुई थी भिड़ंत

यूपी में पेट्रोल पंपों पर तीन दिन बाद शनिवार को भीड़ कम है। कहीं-कहीं लाइनें दिख रही हैं। कौशांबी में शनिवार सुबह हाईवे पर डीजल टैंकर और डीसीएम की टक्कर हो गई। टैंकर से डीजल सड़क पर फैल गया। इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से लोग पहुंच गए और बाल्टियों में डीजल भरकर ले जाने लगे। इसी तरह की घटना कानपुर में भी सामने आई। यहां शुक्रवार शाम हाईवे पर पेट्रोल टैंकर खराब हो गया। उसी दौरान पीछे से आ रही एक गाड़ी ने उसमें टक्कर मार दी। टक्कर के बाद टैंकर से पेट्रोल रिसने लगा। यह देखते ही लोग ड्रम और बाल्टियों के साथ पेट्रोल भरने में जुट गए। चालक की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा। इसी बीच, तेल कंपनियों के यूपी कोआर्डिनेटर संजय भंडारी ने कहा- प्रदेश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। सभी मांगों को पूरा किया जा रहा है। अफवाहों पर ध्यान न दें। जरूरत के हिसाब से ही ईंधन खरीदें। हमेशा की तरह सात दिन का बैकअप स्टॉक मौजूद है। सरकार के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह के चलते तीन दिनों में पूर्वी यूपी के कई जिलों में पेट्रोल की बिक्री 222% और डीजल की बिक्री 230% तक बढ़ गई थी। इसके चलते पंपों पर लंबी लाइनें लगने लगी थीं। यूपी में पेट्रोल-डीजल को लेकर पंपों पर क्या हालात हैं, जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
सड़क किनारे खड़ा यह पेड़ क्यों है इतना खास? महिलाओं और पाचन के लिए रामबाण, जानिए इसके पत्तों के फायदे

Last Updated:March 24, 2026, 15:25 IST अशोक का पेड़ सिर्फ धार्मिक और वास्तु महत्व ही नहीं रखता, बल्कि इसके पत्ते आयुर्वेद में औषधि के रूप में भी उपयोग किए जाते हैं. महिलाओं के स्वास्थ्य से लेकर पाचन, त्वचा और मधुमेह तक कई समस्याओं में इसके फायदे बताए जाते हैं, हालांकि इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. अशोक के वृक्ष के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं, जो मुख्य रूप से महिलाओं में मासिक धर्म की समस्याओं, स्त्री रोगों, रक्तस्राव को रोकने, सूजन कम करने और पेट के कीड़ों के इलाज में फायदेमंद हैं. इनके एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण त्वचा संबंधी विकारों, किडनी की पथरी, मधुमेह और तनाव को दूर करने में भी मदद करते हैं. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि अशोक के पेड़ के पत्ते और छाल पेट के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. यह पाचन क्रिया को सुधारने, कब्ज, पेट फूलने और पेट में मरोड़ या दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इसके अलावा, इसके पत्ते पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी सहायक होते हैं. अशोक के पेड़ (सरका असोका) के पत्ते एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं. ये त्वचा की समस्याओं जैसे पिंपल्स, मुंहासे, संक्रमण और खुजली को ठीक करने में फायदेमंद हैं. इनके उपयोग से त्वचा में निखार आता है और दाग-धब्बों को कम करने के साथ सूजन को शांत करने में भी सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अशोक के वृक्ष के पत्ते दर्द, सूजन और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद होते हैं. इनमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक गुण शरीर के दर्द, जोड़ों के दर्द, फोड़े-फुंसी और घावों को ठीक करने में मदद करते हैं. इसका उपयोग काढ़े या लेप के रूप में किया जाता है. अशोक के पत्तों में हाइपोग्लाइसेमिक गुण होते हैं, जो रक्त शर्करा को कम करने में मदद कर सकते हैं. आप अशोक की पत्तियों का काढ़ा या पाउडर का सेवन कर सकते हैं. इसके अलावा, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ इसका उपयोग मधुमेह प्रबंधन में सहायक हो सकता है. डॉक्टर से परामर्श जरूर लें. अशोक के वृक्ष के पत्ते औषधीय और वास्तु दोनों दृष्टियों से फायदेमंद माने जाते हैं. ये स्त्री रोगों (अनियमित पीरियड्स, ल्यूकोरिया), पेट की समस्याओं (कब्ज, सूजन), बवासीर, मधुमेह, त्वचा संक्रमण और बुखार के इलाज में उपयोगी हैं. साथ ही, इसके पत्तों का इस्तेमाल घर में नकारात्मकता दूर करने और धन वृद्धि के लिए भी किया जाता है. अशोक के वृक्ष के पत्ते औषधीय रूप से सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं, लेकिन इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. बिना चिकित्सक की सलाह के इनका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि गलत उपयोग से यह सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकते हैं. First Published : March 24, 2026, 15:25 IST
बदलता दौर या कुछ और.. सुनामी की तरह देश में क्यों फैल रही हैं ये 2 खतरनाक बीमारी? डॉक्टर ने बताए कारण

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में डायबिटीज और ब्लड प्रेसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. चिकित्सक ने बताया कि यह एक चिंता का विषय है कि दोनों ही बीमारी भारत में तेजी से फैल रही है. डायबिटीज और बीपी अब कम उम्र और बच्चों में भी देखने को मिल रही है. चिकित्सक ने बताया कि बदलते समय के साथ बदलती जीवनशैली और अनहेल्दी फूड इन सब बीमारियों का मुख्य कारण है. चिकित्सक ने कहा कि पहले लोग पैदल और शारीरिक मेहनत करते थे, लेकिन अब हर किसी के पास बाइक, कार और अन्य वाहन है, कोई भी पैदल नहीं चलना चाहता है. मेहनत की जगह अब कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक आइटम आ गए हैं, जिससे लोग आलसी होते जा रहे हैं. बाजार का खाना, जंग फूड, पैकट फूड लोगों को बीमार कर रहा है. जंक फूड से बनाएं दूरीउन्होंने कहा कि यही सभी कारण है कि लोग ब्लड प्रेसर, डायबिटीज और मोटापे के शिकार हो रहे हैं. चिकित्सक ने कहा कि इससे बचने के लिए सबसे अच्छा और बेहतर उपाय शारीरिक मेहनत, सुबह के समय वॉक, हेल्दी फूड और जंग फूड से दूरी बनाना है. उन्होंने कहा कि घर का बना शुद्ध खाना ही खाना चाहिए. मोमोज, चाउमीन, बर्गर और अन्य सभी इस तरह के फूड से बचना चाहिए. सुनामी की तरह फैल रही है ये बीमारीआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि डायबिटीज और बीपी की बीमारी सुनामी की तरह फैलती जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य ने अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदली, तो यह बीमारी आम हो जाएगी और हर व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है. इससे बचना बेहद जरूरी है और उसके लिए सही खान-पान और शारीरिक मेहनत करना जरूरी है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि डायबिटीज (शुगर) और हार्ड ब्लड प्रेशर से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 30 मिनट का व्यायाम, कम नमक और चीनी वाला संतुलित आहार, पर्याप्त नींद (कम से कम 7 से 8 घंटे) लेनी चाहिए. डॉ. ने कहा कि स्वस्थ्य रहने के लिए धुम्रपान, शराब और पान मसाले से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने वजन को नियंत्रण में रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि साल में कम से कम 6-6 महीने के अंतराल में अपना शारीरिक जांच कराते रहना चाहिए. अनहेल्दी फूड से करें बचावआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए अनहेल्दी फ़ूड से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि जंक फूड, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड में चीनी, नमक, खराब फैट और कैलोरी बहुत ज्यादा होती है, जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाने का कार्य करती है. अनहेल्दी फ़ूड से पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा उन्होंने कहा कि इस अनहेल्दी फ़ूड के कारण मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि हेल्दी फ़ूड हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है. हेल्दी प्रोटीन युक्त भोजन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. इसके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है. डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि हेल्दी फ़ूड खाने से यह त्वचा, बाल और नाखूनों के स्वास्थ्य को सुधारने के साथ-साथ हड्डियों को मजबूत और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का भी कार्य करता है, जिससे आसानी से व्यक्ति बीमार नहीं पड़ता है. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
पाचन से लेकर जोड़ों तक… हल्दी के पत्तों का असर जानकर आप दंग रह जाएंगे! आप भी जरूर ट्राई करें

Last Updated:March 20, 2026, 11:36 IST हल्दी के पत्ते सिर्फ मसाले के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान हैं. ये पाचन, जोड़ों, त्वचा और इम्यूनिटी को मजबूत करने के साथ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने में मदद करते हैं. आइए जानते है इसके फायदे… हल्दी के पत्ते सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. इनमें सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं. ये पाचन सुधारने, जोड़ों के दर्द कम करने, त्वचा संबंधी समस्याओं को ठीक करने और प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करते हैं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन शरीर को डिटॉक्स करने और गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी सहायक होता है. एक्सपर्ट डॉ. विनीता शर्मा के अनुसार, हल्दी के पत्ते पाचन सुधारने के लिए एक उत्कृष्ट प्राकृतिक उपाय हैं. इनके सूजनरोधी गुण पेट की गैस, एसिडिटी और कब्ज को कम करने में मदद करते हैं. हल्दी में मौजूद करक्यूमिन पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है और पित्त के उत्पादन को बढ़ाकर भोजन के पाचन को आसान बनाता है. हल्दी के पत्तों और हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नामक सक्रिय तत्व में शक्तिशाली सूजनरोधी और दर्द निवारक गुण होते हैं. ये जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इनके नियमित सेवन या लेप के उपयोग से प्राकृतिक रूप से राहत मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google हल्दी के पत्ते एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती से बढ़ाते हैं. इनमें मौजूद करक्यूमिन और अन्य यौगिक संक्रमण, सर्दी-खांसी और मौसमी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं और बाहरी संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं. हल्दी के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो मुंहासे कम करने, त्वचा की सूजन और लालिमा को शांत करने और प्राकृतिक चमक बढ़ाने में मदद करते हैं. ये त्वचा को नमी प्रदान कर दाग-धब्बे और झुर्रियां कम करने में भी कारगर हैं. हल्दी के पत्तों में मौजूद सक्रिय घटक करक्यूमिन अपने सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. यह इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाकर शुगर स्तर को संतुलित करता है और सीरम लिपिड स्तर सुधारकर कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक होता है. हल्दी के पत्ते श्वसन संबंधी समस्याओं, जैसे सर्दी-जुकाम, खांसी, अस्थमा और श्वसन नली की सूजन में अत्यंत फायदेमंद होते हैं. इनमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण फेफड़ों की कार्यक्षमता को सुधारने में मदद करते हैं. First Published : March 20, 2026, 11:36 IST
Aligarh Chief Mufti Fatwa Against Nora Fatehi Over KD: The Devil

अलीगढ़ के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इफराहीन हुसैन ने नोरा फतेही के खिलाफ फतवा जारी किया। कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के विवादित गाने “सरके चुनर तेरी सरके” को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। गाने पर डांस करने वाली एक्ट्रेस नोरा फतेही के खिलाफ यूपी के अलीगढ़ से फतवा जारी हुआ है। . मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने गाने और दृश्यों को अश्लील बताया है। उन्होंने कहा- समाज में बेहयाई फैलाना न केवल अनैतिक है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी दंडनीय है। नोरा फतेही ने मुस्लिम होने के बावजूद ऐसे अश्लील गाने में हिस्सा लिया। उन्होंने गुनाह-ए-कबीरा यानी बड़ा पाप किया है। उन्हें दर्दनाक दंड मिलेगा। इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक्ट्रेस नोरा फतेही और एक्टर संजय दत्त को नोटिस भेजा है। साथ ही गाने के गीतकार रकीब आलम, वेंकट के. नारायण (प्रोड्यूसर, KVN ग्रुप) और किरण कुमार (डायरेक्टर) समेत अन्य संबंधित लोगों को भी नोटिस जारी किया गया है। सभी को 24 मार्च को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। आयोग ने चेतावनी दी है कि तय तारीख पर उपस्थित न होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आयोग ने इस गाने के कथित अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर खुद संज्ञान लिया है। आयोग के मुताबिक, गाने के बोल पहली नजर में आपत्तिजनक और यौन संकेतों वाले लगते हैं, जो कानून का उल्लंघन कर सकते हैं। वहीं, गाने को लेकर मंगलवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शिकायत मिलने पर सेंसर बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गूगल इंडिया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। बता दें कि गाने को मंगलवार को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। एक्ट्रेस नोरा फतेही ने विवादित गाने पर अपनी सफाई दी थी। फिल्म में संजय दत्त मुख्य भूमिका में हैं। अब बात फतवे की… मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता से सवाल पूछा गया था आजकल फिल्म The Devil के एक गाने में आपत्तिजनक व अश्लील दृश्य होने की खबरें सामने आई हैं, जिस पर आम जनता में विरोध हो रहा है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी नोटिस जारी किया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि इस तरह के गानों, डांस और अश्लील कंटेंट के बारे में इस्लाम का क्या हुक्म है? जवाब दिया- कुरान में ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अज़ाब शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा, इस्लाम एक पाक दीन है, जो हया (लज्जा), इफ्फत (पवित्रता) और अच्छे अखलाक की तालीम देता है। अश्लील गाने, नृत्य और आपत्तिजनक दृश्यों में भाग लेना या उन्हें बढ़ावा देना इस्लाम में हराम और गुनाह-ए-कबीरा (बड़ा पाप) है। मुफ्ती ने कुरान शरीफ की सूरह नूर (24:19) का जिक्र करते हुए कहा, जो लोग समाज में बेहयाई फैलाते हैं, उनके लिए दुनिया और आखिरत में दर्दनाक अजाब (कठोर दंड) की चेतावनी दी गई है। इसलिए समाज में अश्लीलता परोसने से बचना चाहिए। मुफ्ती ने कहा, नोरा फतेही एक मुस्लिम पृष्ठभूमि से आती हैं, ऐसे में उनका इस तरह के कंटेंट का हिस्सा बनना इस्लामी शिक्षाओं के पूरी तरह खिलाफ है। मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने एक सवाल के जवाब में फतवा जारी किया है। वूमेंस डे के संदेश का अपमान मौलाना इफराहीम हुसैन ने कहा, एक तरफ देश ने अभी महिला दिवस मनाया, जहां महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और हया (मर्यादा) की बात की गई। वहीं दूसरी ओर ऐसी फिल्में समाज के सामने परोसी जा रही हैं। अगर यही स्थिति रही, तो आने वाली नस्लें और नौजवानों की सामाजिक मर्यादा ही खत्म हो जाएगा। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… सरकार उठाए सख्त कदम मुफ्ती ने कहा, कलाकार केवल वही कंटेंट पेश करें जो मर्यादित और समाजहित में हो। उन्होंने 3 अपील की- अश्लीलता पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन और सरकार सख्त कदम उठाने चाहिए। फिल्म इंडस्ट्री और कलाकारों को चाहिए कि वे मर्यादित, सभ्य और समाजहित में कटेंट प्रस्तुत करें। आम जनता ऐसे कंटेंट का बहिष्कार करें और अपने परिवार व नई पीढ़ी को इससे सुरक्षित रखें। शाही चीफ मुफ्ती ने नोरा फतेही के खिलाफ यह फतवा जारी किया है। संसद में भी उठा गाने का मुद्दा संसद में भी समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने बुधवार को गाने के अश्लील लिरिक्स का मुद्दा उठाया था। इस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, ‘अध्यक्ष जी, जिस गाने के बारे में सांसद जी ने कहा है, उस गाने पर पहले ही बैन लग चुका है। मैं साफ तौर पर आपके माध्यम से पूरे सदन को कहना चाहूंगा कि हमें फ्रीडम ऑफ स्पीच पर भारत के संविधान निर्माताओं ने जो रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन लगाए हैं, उसी के हिसाब से चलना चाहिए।’ आगे उन्होंने कहा था, ‘आने वाले समय में डिजिटल के माध्यम से जिस तरह से तेजी से चीजें फैलती हैं, उसमें हमें समाज के प्रोटेक्शन खासकर बच्चों के प्रोटेक्शन, महिलाओं के प्रोटेक्शन और पिछड़े वर्ग के प्रोटेक्शन के लिए जो भी कड़े एक्शन लेने पड़ें, वो लेने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।’ आनंद भदौरिया लखीमपुर खीरी के धौरहरा से सांसद हैं। गाने पर नोरा ने दी सफाई गाने को लेकर विवादों में आईं नोरा फतेही ने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि उन्हें कन्नड़ में गलत ट्रांसलेशन बताकर पूरा गाना शूट करवाया गया और फिर बिना उनकी अनुमति गाने को हिंदी में बना दिया गया। नोरा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा था, मैं इस गाने से जुड़ी कंट्रोवर्सी पर डिस्कस करना चाहती हूं। इस वक्त में अपने करीबी की मौत के सदमे में हूं। मैं नेटवर्क में नहीं थी, जिससे मुझे पता नहीं चला कि क्या चल रहा है। आज मैं नेटवर्क में आई तो मुझे इसकी जानकारी मिली। मैं कुछ चीजें साफ करना चाहती हूं। उन्होंने कहा, मैंने ये गाना तीन साल पहले कन्नड़ में शूट किया था। जो एक अलग इंडस्ट्री का हिस्सा है, जिसे सैंडलवुड कहा जाता है। जब मैंने 3 साल पहले ये गाना शूट किया तो मैंने इसके लिए हां इसलिए कहा क्योंकि ये बड़ी फिल्म का हिस्सा था, जिसमें बड़े आइकन संजय दत्त थे। कौन उनके साथ काम
Barabanki-Bahraich 4-Lane Highway Worth ₹6969 Cr Approved

Hindi News National UP Highway Project: Barabanki Bahraich 4 Lane Highway Worth ₹6969 Cr Approved नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। केंद्र सरकार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए। सरकार ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘BHAVYA’ (भारत औद्योगिक विकास योजना) को मंजूरी दी है। 33,660 करोड़ रुपए लागत वाली इस योजना के तहत देशभर में 100 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि योजना के तहत बनने वाले इंडस्ट्रियल पार्क में उद्योगों के लिए जमीन, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि इस योजना से देश में निवेश बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से बहराइच के बीच 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 6,969 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाराबंकी से बहराइच के बीच बनने वाले NH का रूट दिखाया। ₹2,585 करोड़ की स्मॉल हाइड्रो पावर स्कीम को मंजूरी केंद्र सरकार ने देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 2,585 करोड़ रुपए की स्मॉल हाइड्रो पावर डेवलपमेंट स्कीम को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना के तहत 1,500 मेगावाट क्षमता की छोटी जल विद्युत परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। यह योजना अगले पांच सालों में 2030-31 तक लागू की जाएगी। इसके तहत परियोजनाएं रन-ऑफ-द-रिवर मॉडल पर विकसित होंगी, जिससे बड़े बांध बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और लोगों के विस्थापन से बचा जा सकेगा। सरकार के अनुसार देश में 7,133 स्थानों पर छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स की संभावना है, जिनकी कुल क्षमता करीब 21,000 मेगावाट है। फिलहाल 1,196 स्थानों पर 5,100 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट संचालित हो रहे हैं। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से करीब 15,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कपास किसानों को राहत, सरकार खरीदेगी पूरी उपज केंद्र सरकार ने कपास किसानों को राहत देने के लिए कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) को 1,718.56 करोड़ रुपए की फंडिंग मंजूर की है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने लिया। यह राशि कपास की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के लिए दी जाएगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा। CCI को कपास खरीद के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। जब बाजार में कीमत MSP से नीचे जाती है, तब CCI किसानों से फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) कपास बिना किसी मात्रा सीमा के खरीदती है। सरकार के अनुसार कपास देश की प्रमुख नकदी फसल है, जिससे करीब 60 लाख किसान जुड़े हैं। इसके अलावा प्रोसेसिंग, व्यापार और टेक्सटाइल सेक्टर में 4 से 5 करोड़ लोगों की आजीविका इससे जुड़ी है। ————————– केंद्र के फैसलों से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… राज्यों को 10% एक्स्ट्रा LPG कोटा मिलेगा:सरकार ने माना- LPG किल्लत जारी; मोदी और पेट्रोलियम मंत्री के बीच 2 घंटे चली बैठक ईरान-इजराइल जंग के बीच भारत में LPG सिलेंडर की किल्लत बनी हुई है। इसी बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि राज्यों को 10% ज्यादा LPG कोटा देने का ऑफर दिया गया है। साथ ही राज्यों से धीरे-धीरे LPG की जगह PNG अपनाने में मदद करने को कहा गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Khabar Hatke | UP: Presidents Spectacles Saved by Langur Cutout; Farmer Farms as Bear

उत्तर प्रदेश में एक महिला गैस सिलेंडर की कमी से ससुराल छोड़ मायके चली गई। वहीं UP के ही संभल में किसान भालू बनकर खेती कर रहे हैं। उधर मथुरा-वृंदावन में राष्ट्रपति के चश्मे को बचाने के लिए लंगूर के कटआउट लगाए जा रहे हैं। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
UP Egg Expiry Date Rule From April 2026

यूपी सरकार ने लोगों की सेहत से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल, 2026 से प्रदेश में अंडे पर एक्सपायरी डेट लिखना होगा। इस नियम के लागू होने के बाद दुकानदार अब ताजा अंडा कहकर पुराने या खराब अंडे बेच नहीं पाएंगे। ग्राहक खुद तारीख देखकर फैसला ले पाएंग . क्यों लाया गया यह नियम? पशुपालन विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच में सामने आया कि कई जगहों पर पुराने या खराब अंडे ‘फ्रेश’ बताकर बेचे जा रहे थे, जिससे लोगों की सेहत को खतरा हो सकता था। नियमों का पालन नहीं हो रहा था। FSDA के जॉइंट कमिश्नर हरिशंकर सिंह ने बताया, दो साल से इसकी कवायद चल रही थी। पहले बैच नंबर लिखने का निर्णय हुआ, लेकिन ये प्रैक्टिकली संभव नहीं था। क्योंकि अंडे अलग-अलग जगह आते हैं, ऐसे में बैच नंबर लिखना संभव नहीं था। इसलिए ये निर्णय लिया गया है कि अंडे पर डेट लिखा जाए। इसके लिए अंडों पर लेइंग और एक्सपायरी डेट को मुहर से अंकित किया जाएगा। भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं… पशुपालन और डेयरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा, सरकार ने उपभोक्ताओं की सेहत की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाया है। यह कदम खाद्य पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 18 मार्च को अंडा वितरकों की बैठक हरिशंकर सिंह ने बताया, 18 मार्च को प्रदेश के प्रमुख अंडा डिस्ट्रीब्यूटर्स की एक बैठक बुलाई है। इसमें शासनादेश को समझने और लागू करने के लिए उनसे चर्चा होगी। 1 अप्रैल से ये लागू होना है, हम समझना चाहते हैं कि इसे कैसे लागू किया जाए और कैसे इसकी निगरानी की जाएगी। अगर अंडे को लगभग 30 डिग्री सेल्सियस के सामान्य तापमान पर रखा जाए, तो वह लेइंग डेट से दो हफ्तों के अंदर खाने के लिए सुरक्षित रहता है। अंडे पर क्या-क्या छपा होगा? लेइंग डेट: मुर्गी ने अंडा कब दिया यानी उत्पादन तारीख। एक्सपायरी डेट: अंडा कब तक सुरक्षित रहेगा यानी खराब होने की तारीख। अभी क्या था नियम: अंडे की ट्रे पर उत्पादन तिथि लिखी जाती है, लेकिन हर अंडे पर व्यक्तिगत स्टैंपिंग नहीं। नियम तोड़ने पर सजा क्या? अगर कोई उत्पादक, किसान, पोल्ट्री फार्म या दुकानदार इस नियम का पालन नहीं करता, तो सख्त कार्रवाई होगी। उनके अंडों को जब्त कर नष्ट किया जाएगा या उन पर ‘मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त’ की मुहर लगा दी जाएगी। ऐसे अंडे बाजार में नहीं बिक सकेंगे। नियम मानने के लिए सभी को मजबूर किया जाएगा। अंडे कितने दिन तक सुरक्षित रहते हैं? हरिशंकर सिंह के मुताबिक– सामान्य कमरे के तापमान (लगभग 25 से 35 डिग्री सेल्सियस) पर अंडा 2 हफ्ते तक सुरक्षित रहता है। अगर 8-12 डिग्री सेल्सियस के कंट्रोल्ड तापमान पर रखा जाए, तो लगभग 5 हफ्ते तक सुरक्षित रहेगा। बाजार में बिकने वाले खराब अंडे से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ता है। पेट में सूजन, डिहाइड्रेशन हो सकता है। अलग स्टोरेज क्यों जरूरी? फूड सेफ्टी नियमों के मुताबिक, अंडों को सब्जियों या अन्य खाद्य पदार्थों के साथ एक ही कोल्ड स्टोरेज में नहीं रखा जा सकता। दोनों को अलग-अलग तापमान और परिस्थितियों की जरूरत होती है। सही स्टोरेज से अंडों की ताजगी लंबे समय तक बनी रहती है। यूपी में कोल्ड स्टोरेज की हालत फिलहाल, राज्य में अंडों के लिए सिर्फ दो विशेष कोल्ड स्टोरेज हैं। एक आगरा में और दूसरा झांसी में। पूरे राज्य के लिए यह संख्या बहुत कम है। स्टोरेज की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार को भविष्य में और कोल्ड स्टोरेज बनाने की जरूरत होगी ताकि नए नियम आसानी से लागू हो सकें। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों और मुर्गी पालन करने वालों को अनिवार्य तौर पर इस नियम का पालन करना होगा। यूपी में प्रतिदिन 2.5 करोड़ अंडे की खपत प्रदेश में प्रतिदिन 2.50 करोड़ अंडों की खपत होती है। अभी प्रदेश में अंडा उत्पादन करीब 1.60 करोड़ है। 90 लाख से अधिक अंडे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों से मंगाए जाते हैं। इंड में अंडे की खपत 20 से 25 प्रतिशत बढ़ जाती है। देश में प्रति व्यक्ति अंडे की सालाना खपत 106 है। हालांकि यूपी में प्रति व्यक्ति सालाना खपत 30 अंडे की है। यदि राष्ट्रीय औसत 106 अंडे प्रतिवर्ष की तरह यूपी में भी खपत बढ़ जाए तो यहां प्रतिदिन 7 करोड़ अंडे चाहिए होगा। खराब अंडे खाने से किस तरह का नुकसान FSDA के मुताबिक, खराब अंडे खाने से सबसे बड़ा खतरा फूड पॉइजनिंग का होता है। खासकर अंडे में पनपने वाले साल्मोनेला बैक्टीरिया के संक्रमण से ये होता है। खराब अंडे में अन्य बैक्टीरिया जैसे ई–कोलाई भी बढ़ सकते हैं, जो गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। इसकी वजह से पेट में तेज दर्द, ऐंठन, उल्टी, मतली, बुखार, सिर दर्द, थकान, पेट में सूजन, डिहाइड्रेशन हो सकता है। कई बार तो खून वाले दस्त भी हो सकते हैं। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज या कैंसर पेशेंट के लिए यह जानलेवा भी हो सकता है। अब अंडे के हेल्थ बेनिफिट्स जानिए… —————— यह खबर भी पढ़िए:- काशी में गंगा में नाव पर इफ्तार पार्टी, VIDEO:चिकन बिरयानी परोसी, हिंदू संगठन बोले- हडि्डयां नदी में फेंकीं; 14 गिरफ्तार काशी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी की गई। सोमवार को हुई इस पार्टी में आयोजकों ने रोजेदारों को फल और मेवे के साथ चिकन बिरयानी भी परोसी। साथ ही इफ्तार पार्टी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। जल्द ही वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा। पढ़ें पूरी खबर…
हर दिन मखाना खाते हैं? ज्यादा सेवन से पेट और किडनी को हो सकता है नुकसान, जानिए जरूरी बातें

Last Updated:March 14, 2026, 13:47 IST मखाना या फॉक्स नट्स एक पौष्टिक और हेल्दी स्नैक है, जो प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम से भरपूर होता है. यह सामान्यत: गर्भावस्था में भी सुरक्षित माना जाता है. हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन समस्याएं, एलर्जी और किडनी स्टोन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, इसलिए सेवन करते समय सावधानी बरतना जरूरी है. मखाने हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ कुछ हद तक नुकसानदायक भी हो सकते हैं. इनके अधिक सेवन से पेट में कब्ज, ब्लोटिंग और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कैल्शियम और फाइबर की अधिकता के कारण यह किडनी स्टोन वाले लोगों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इसके अलावा, अत्यधिक पोटैशियम किडनी रोगियों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, और बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. मखाने वैसे तो एक बहुत हेल्दी स्नैक हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में (30–60 ग्राम से अधिक) खाने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और बदहजमी जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखानों में उच्च फाइबर होता है और पानी की मात्रा कम होती है, जो अधिक सेवन करने पर पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, मखाने में उच्च फाइबर और प्रोटीन पाए जाते हैं. इनका अत्यधिक सेवन करने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और अपच जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखाने पचने में समय लेते हैं और अधिक मात्रा में खाने से दस्त भी बढ़ सकते हैं. साथ ही, खाली पेट मखाने खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट दर्द हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मखानों में ज्यादा नमक, मसाले या घी का इस्तेमाल हाई बीपी और हार्ट संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए मखानों का सेवन सीमित मात्रा में करें और कम नमक वाले विकल्प चुनें. अपने आहार में संतुलन बनाए रखें और हार्ट हेल्थ का ध्यान रखें. साथ ही, डॉक्टर की सलाह लेना भी उचित रहेगा. मखाना कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें नट्स या बीजों से एलर्जी होती है. इसमें मौजूद उच्च स्टार्च और प्रोटीन की वजह से उन्हें खुजली, सूजन, सांस लेने में तकलीफ या पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं. मखानों में पोटैशियम और फास्फोरस पाया जाता है, जो किडनी की बीमारी वाले मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए किडनी की समस्या वाले लोगों को मखानों का सेवन सीमित करना चाहिए या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सही आहार चुनें. मखाने आमतौर पर गर्भावस्था में सुरक्षित और पौष्टिक माने जाते हैं. यह कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं. लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर ये नुकसानदायक हो सकते हैं, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग (पेट फूलना), किडनी स्टोन में वृद्धि और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. First Published : March 14, 2026, 13:47 IST









