गेंदा के फूल के फायदे: त्वचा, पाचन और सूजन में प्राकृतिक औषधीय लाभ

Last Updated:March 29, 2026, 16:11 IST गेंदा का फूल केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक उपचार भी है. त्वचा की समस्याओं से लेकर पाचन सुधारने, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक, गेंदा का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना गया है. गेंदा का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा-पाठ और सजावट के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गेंदा एक असरदार औषधि भी है. आयुर्वेद में गेंदा के फूल, पत्तियां और यहां तक कि इसके रस का भी उपयोग कई तरह की समस्याओं के इलाज में किया जाता है. त्वचा से जुड़ी समस्याओं में गेंदा बहुत फायदेमंद है. अगर किसी को खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या जलन की समस्या हो, तो गेंदा के फूल का लेप लगाने से आराम मिलता है. यह त्वचा को ठंडक देता है और जलन को कम करता है. इसके अलावा, गेंदा से बना तेल भी त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है. गेंदा का फूल आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, अगर आंखों में जलन, लालिमा या सूजन हो, तो गेंदा के फूल को पानी में उबालकर ठंडा करके उससे आंख धोने से राहत मिलती है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google मालती वर्मा बताती है कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी गेंदा का उपयोग किया जाता है. गेंदा के फूल से बनी चाय या काढ़ा पेट की गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर के अंदर की सफाई करने में भी मदद करता है और पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है. गेंदा का उपयोग सूजन और दर्द कम करने में भी किया जाता है. इसके फूल में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की सूजन को कम करते हैं. अगर किसी को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो गेंदा के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है. गेंदा का फूल महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका उपयोग मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. गेंदा का फूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. नियमित रूप से इसका सीमित उपयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. गांवों और छोटे कस्बों में गेंदा का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में काफी समय से किया जा रहा है. यह आसानी से मिलने वाला और सस्ता पौधा है, जिसे लोग अपने घरों में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि यह आम लोगों के लिए एक सुलभ औषधि बन चुका है. मालती वर्मा बताती है गेंदा का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या गर्भवती महिला को उसका प्रयोग करने से पहले किसी किसी डॉक्टर या और आयुर्वेदाचार्य के सलाह बिना किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग केवल 7 दिन तक ही करना चाहिए. First Published : March 29, 2026, 16:11 IST
अनुराग डोभाल और रितिका चौहान बने पेरेंट्स:राम नवमी के शुभ अवसर पर कपल ने अपने पहले बच्चे की पहली झलक सोशल मीडिया पर साझा की

यूट्यूबर अनुराग डोभाल उर्फ UK07 राइडर और उनकी पत्नी रितिका चौहान के घर खुशियों ने दस्तक दी है। राम नवमी के पावन मौके पर कपल ने अपने पहले बच्चे का स्वागत किया। रितिका ने सोशल मीडिया पर बच्चे की पहली झलक शेयर कर यह खुशखबरी दी। यूट्यूबर और ‘बिग बॉस’ फेम अनुराग डोभाल पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी रितिका चौहान ने 27 मार्च 2026 को राम नवमी के शुभ अवसर पर अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। इस खास मौके की जानकारी रितिका ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए दी, जहां उन्होंने बच्चे के नन्हे पैरों की तस्वीर शेयर की। रितिका ने पोस्ट में लिखा कि “राम नवमी के पावन दिन भगवान ने हमें हमारे सबसे अनमोल तोहफे से नवाजा है।” इस पोस्ट के सामने आते ही फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स कपल को लगातार बधाइयां दे रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह खुलासा नहीं किया गया है कि उनके घर बेटा हुआ है या बेटी। बता दें कि अनुराग डोभाल ने अभी तक पिता बनने को लेकर कोई आधिकारिक पोस्ट शेयर नहीं किया है, लेकिन रितिका की इस पोस्ट ने फैंस के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। शादी के करीब एक साल के भीतर ही दोनों पेरेंट्स बन गए हैं। अनुराग और रितिका ने अप्रैल 2025 में शादी की थी। हाल के दिनों में अनुराग डोभाल अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने परिवार पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और एक लाइव वीडियो के दौरान गंभीर कदम उठाने की कोशिश भी की थी, जिसके बाद उनका एक्सीडेंट हो गया था। फिलहाल वे ठीक हैं। इसी बीच इस खुशखबरी ने उनके जीवन में एक नया मोड़ ला दिया है। रितिका पहले भी सोशल मीडिया पर अपने रिश्ते और हालात को लेकर खुलकर बात कर चुकी हैं। अब बच्चे के जन्म के साथ कपल की जिंदगी में एक नई शुरुआत मानी जा रही है। फिलहाल, फैंस को बच्चे के नाम और जेंडर का इंतजार है, लेकिन कपल ने इस खास पल को निजी रखते हुए सिर्फ एक झलक ही साझा की है।
हाईकोर्ट ने पूछा- मस्जिद सील करने का कानूनी अधिकार है:यूपी सरकार से मांगा जवाब, सुनवाई का अवसर दिए बिना कैसे सील किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूजा स्थल, मस्जिद के मामले पर एक बार फिर यूपी सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या वह बिना किसी पूर्व सूचना या संपत्ति मालिकों को सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी पूजा स्थल और मस्जिद को सील कर सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 मार्च सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी पूजा स्थल को सील कर सकती है। कोर्ट ने कहा सील करने का कोई कानूनी अधिकार है?” न्यायालय ने राज्य से पूछा, “क्या बिना पूर्व सूचना जारी किए या याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्माणाधीन पूजा स्थल को सील करने का कोई कानूनी अधिकार है?” साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या पूजा स्थल परिसर के भीतर निर्माण आदि करने के मामले में मालिकों से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है। अहसान अली की याचिका पर आदेश मामला मुजफ्फरनगर से जुड़ा है। जिले में एक मस्जिद को सील किए जाने के खिलाफ अहसान अली ने इलाहबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसी मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि वह मुजफ्फरनगर के एक गांव में स्थित एक भूखंड के वैध स्वामी हैं। उन्होंने यह भूमि प्रवीण कुमार जैन से 2019 में विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्यम से खरीदी थी। हाल ही में अधिकारियों ने भूमि पर निर्मित मस्जिद को सील कर दिया, क्योंकि मालिकों ने उसके चारों ओर सीमा बनाना शुरू कर दिया था। यह कार्रवाई इस आधार पर की गई कि निर्माण अवैध है और सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं की गई थी। वकील बोले सुनवाई का अवसर नहीं दिया याचिकाकर्ता के वकील अधिवक्ता जगदीश प्रसाद मिश्रा ने कहा कि परिसर को सील करने से पहले उन्हें कोई नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था। न्यायालय ने राज्य से इस याचिका पर जवाब देने और उस कानून के बारे में बताने को कहा जिसके तहत कार्रवाई की गई थी। न्यायालय ने आदेश दिया, “राज्य द्वारा हलफनामे सहित विशिष्ट निर्देश प्राप्त किए जाएं और अगली सुनवाई की तारीख पर इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।” हाल ही में उच्च न्यायालय में हुए रोस्टर परिवर्तन के बाद, यह मामला 24 मार्च को न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। हालांकि, उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।
कानपुर-कौशांबी में हाईवे पर पेट्रोल की लूट मची:ड्रम-बाल्टी लेकर पहुंचे लोग; टैंकरों की हुई थी भिड़ंत

यूपी में पेट्रोल पंपों पर तीन दिन बाद शनिवार को भीड़ कम है। कहीं-कहीं लाइनें दिख रही हैं। कौशांबी में शनिवार सुबह हाईवे पर डीजल टैंकर और डीसीएम की टक्कर हो गई। टैंकर से डीजल सड़क पर फैल गया। इसकी जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से लोग पहुंच गए और बाल्टियों में डीजल भरकर ले जाने लगे। इसी तरह की घटना कानपुर में भी सामने आई। यहां शुक्रवार शाम हाईवे पर पेट्रोल टैंकर खराब हो गया। उसी दौरान पीछे से आ रही एक गाड़ी ने उसमें टक्कर मार दी। टक्कर के बाद टैंकर से पेट्रोल रिसने लगा। यह देखते ही लोग ड्रम और बाल्टियों के साथ पेट्रोल भरने में जुट गए। चालक की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को खदेड़ा। इसी बीच, तेल कंपनियों के यूपी कोआर्डिनेटर संजय भंडारी ने कहा- प्रदेश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। सभी मांगों को पूरा किया जा रहा है। अफवाहों पर ध्यान न दें। जरूरत के हिसाब से ही ईंधन खरीदें। हमेशा की तरह सात दिन का बैकअप स्टॉक मौजूद है। सरकार के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह के चलते तीन दिनों में पूर्वी यूपी के कई जिलों में पेट्रोल की बिक्री 222% और डीजल की बिक्री 230% तक बढ़ गई थी। इसके चलते पंपों पर लंबी लाइनें लगने लगी थीं। यूपी में पेट्रोल-डीजल को लेकर पंपों पर क्या हालात हैं, जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
गन्ने के रस का देसी सिरका: पेट दर्द और बदहजमी का पारंपरिक इलाज

Last Updated:March 26, 2026, 20:59 IST गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर गांव की 75 वर्षीय इंदिरा सनी आज भी गन्ने के रस से देसी सिरका बनाने की पारंपरिक विधि को जीवित रखे हुए हैं. दो से तीन महीने तक धूप में प्राकृतिक किण्वन से तैयार यह सिरका पाचन संबंधी समस्याओं में असरदार माना जाता है. बिना केमिकल के बनने वाला यह देसी नुस्खा पुराने समय में बदहजमी, पेट दर्द और उल्टी जैसी परेशानियों के लिए घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल होता था. गाजीपुर. आज के दौर में जहां सिरदर्द से लेकर पेट दर्द तक के लिए हम तुरंत अंग्रेजी दवाइयों और एंटीबायोटिक्स की ओर भागते हैं, वहीं हमारे गांवों में आज भी सेहत का खजाना रसोई और परंपराओं में छिपा है. गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर गांव की रहने वाली 75 वर्षीय इंदिरा सनी एक ऐसी ही विलुप्त होती परंपरा को बचाती है. गन्ने के रस से बना देसी सिरका, यह सिरका केवल शरबत नहीं, बल्कि पुराने समय की एक अचूक औषधि भी है.इंदिरासनी बताती हैं कि असली और शुद्ध सिरका बनाना कोई जल्दबाजी का काम नहीं, बल्कि धैर्य की प्रक्रिया है. वह कहती हैं, पहले गन्ने के ताजे रस को मिट्टी के बर्तनों में भरकर 2 से 3 महीने तक कड़ी धूप में रखा जाता था. इस लंबी अवधि के दौरान रस प्राकृतिक रूप से फर्मेंट (किण्वन) होता है. अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे समय-समय पर महीन कपड़े से छाना जाता था, जिससे रस धीरे-धीरे गाढ़ा और तीखा होने लगता था. कढ़ाई का छौंक और औषधीय गुणसिरका तैयार होने का अंतिम चरण सबसे महत्वपूर्ण है, जब रस पूरी तरह फर्मेंट हो जाता है, तब इसे लोहे की कढ़ाई में हल्का गर्म किया जाता है. इंदिरासनी के अनुसार, इसे एक खास तरीके से तड़का दिया जाता है, जिससे न केवल इसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी कई गुना बढ़ जाते हैं. यही वह प्रक्रिया है जो इसे बाज़ार में मिलने वाले सिंथेटिक सिरके से कोसों दूर और गुणकारी बनाती है. पेट की समस्याओं का रामबाण इलाजयह देसी सिरका पुराने समय में हर घर की फर्स्ट एड किट हुआ करता था, इंदिरासनी साझा करती हैं कि बदहजमी, असहनीय पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याओं में यह किसी चमत्कार की तरह काम करता था. अगर किसी का पेट खराब होता या खाना नहीं पचता, तो बस थोड़ी मात्रा में यह सिरका पिला दिया जाता था और एक-दो दिन में मरीज भला-चंगा हो जाता था. आज के आधुनिक जीवन में हम इन पारंपरिक तरीकों से दूर हो गए हैं, लेकिन किशुनीपुर जैसे गांवों में यह ज्ञान आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh First Published : March 26, 2026, 20:59 IST
सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज | symptoms of heart attack

Last Updated:March 24, 2026, 14:58 IST सीने में अचानक होने वाला दर्द एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है और समय पर इलाज न मिलने पर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है. मऊ. अक्सर देखा जाता है छोटी-छोटी समस्याओं को लोग नजर अंदाज करते हैं, लेकिन उन्हें या नहीं पता कि छोटी सी लापरवाही उनकी जान ले सकती है. वर्तमान में देखा जा रहा है लोगों के सीने में दर्द अधिक हो रहा है और इस दर्द को नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ जा रहा है. इस बीमारी को लेकर एक्सपर्ट क्या सलाह दे रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर अरमान अली बताते हैं कि सीने में दर्द कई कारणों से अचानक शुरू हो रही हैं, जिसमें ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं. यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है और यह बड़ी बीमारी बनती चली जा रही है और छोटी सी लापरवाही इस बीमारी में जान तक ले रह रही है, क्योंकि इस बीमारी में सीने में तीव्र गति से अचानक दर्द शुरू हो रहा है. इसमें लोगों को पसीना अधिक आना शुरू हो जा रहा है और उनकी सांस फूलने लगा रही हैं. यदि आप के सीने में अचानक दर्द शुरू हो रहा है तो किसी नजदीकी योग्य चिकित्सक को दिखाकर अपना इलाज शुरू कर दें नहीं आपकी समस्या बढ़ सकती है. छोटी सी लापरवाही में जा सकती है जानयदि इस बीमारी में आप लापरवाही बढ़ाते हैं तो अचानक सीने का दर्द हार्ट अटैक हो सकता है और दिल की गड़बड़ी की वजह से अचानक हृदय गति रुक सकती है और मौत भी हो सकती है. सीने के दर्द को हल्के में ना ले किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें, नहीं तो छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है. यदि आप बीपी, थायराइड या शुगर जैसी बीमारी से ग्रसित हो तो इस बीमारी में आप सावधानी बरतना जरूरी हैं क्योंकि इन बीमारियों में यह समस्या तेजी से आती है और लोगों के सीने में अचानक दर्द होने लगता है जो हृदय गति को रोक देता है. सीने में दर्द से बचने के लिए शुगर बीपी को करें मेंटेनइस समस्या से बचने के लिए यदि आप शुगर के पेशेंट हैं तो शुगर के अनुसार अपना खान-पान रखें, शुगर को मेंटेन रखें. यदि बीपी के मरीज है तो नमक कम खाएं यदि कोलेस्ट्रॉल ज्यादा रहता है तो नियमित व्यायाम करें. हाई-फाई डाइट को अवॉइड करें और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें. सीने का दर्द अचानक शुरू होता है और बहुत तीव्र गति से पहुंचता है यह दर्द अधिकतर कुछ सेकंड या मिनट का होता है, लेकिन कुछ लोगों का दर्द घंटे चला जाता है. जिसमें मरीज की हालत गंभीर बन जाती है और कभी-कभी जान चली जाती है. यदि छाती में दर्द के साथ पसीने आए तो यह हार्ट अटैक के कारण बन सकते हैं. ऐसे में सावधान रहें यदि सेने में दर्द शुरू हो तो किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:58 IST
राजनाथ बोले- पहाड़ का पानी-जवानी यहीं के काम आनी चाहिए:उत्तराखंड के CM साधारण नहीं धुरंधर; धामी ने रक्षा मंत्री को बताया अजातशत्रु

हल्द्वानी में धामी सरकार के 4 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने नहीं सोचा था कि उत्तराखंड इतनी तेजी से विकसित होगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ का पानी और जवानी अब यहीं के काम आनी चाहिए। रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करते हुए कहा कि वह साधारण नहीं, बल्कि धुरंधर हैं। उन्होंने कहा कि धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने विकास की नई रफ्तार पकड़ी है और लगातार आगे बढ़ रहा है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में रक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें अजातशत्रु बताया। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव और मार्गदर्शन प्रदेश के लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है और उनकी मौजूदगी से कार्यक्रम में नई ऊर्जा आई है। कार्यक्रम में राजनाथ सिंह को सुनने के लिए करीब 15 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे थे, जिन्हें संबोधित करने के बाद रक्षा मंत्री अब पंतनगर एयरपोर्ट की ओर रवाना हो गए और फिर यहीं से वह दिल्ली के लिए निकल गए। कार्यक्रम से जुड़ी PHOTOS… रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान की 5 बड़ी बातें… अब पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
Benefits of moringa I इम्यूनिटी, हड्डियां और ब्लड शुगर के लिए सुपरफूड

Last Updated:March 19, 2026, 20:43 IST सहजन, जिसे मोरिंगा या शीगरू भी कहते हैं, एक देसी सुपरफूड है. इसके पत्ते, फली और छाल में भरपूर पोषण और औषधीय गुण हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. सही मात्रा में सेवन से यह कई बीमारियों से बचाव में भी लाभकारी है. बलिया. सहजन या मोरिंगा, जिसे शीगरू के नाम से भी जाना जाता हैं, एक ऐसा देसी सुपरफूड है, जो किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसके पत्ते, फल (ड्रमस्टिक) और छाल तीनों रूप में ही पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अगर इम्युनिटी मजबूत करना आप चाह रहे हैं, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना चाहते हैं या फिर हड्डियों को ताकत देना चाहते हैं, तो सहजन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह अनेकों बीमारियों को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. काया चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. स्नेहामई मिश्रा ने कहा कि, वह उड़ीसा की रहने वाली है, जो अभी फिलहाल शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत मझौली बलिया में एक साल से कार्यरत हैं. चीज एक, लेकिन फायदे अनेक सबसे पहले बात करते हैं सहजन के पत्ते की, ये आयरन, कैल्शियम, विटामिन A, C और E का अच्छा स्रोत हैं. ये न केवल एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाने में मददगार हैं. जिन लोगों को हाई ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए ये पत्ते रामबाण है. यहीं नहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन कम कर जोड़ों के दर्द में राहत देते हैं. यह दिमाग के लिए भी किसी टॉनिक से कम नहीं है. यह याददाश्त बेहतर बनाने में सहायक होता है. अगर बात सहजन की फली की करे, तो इसे हम ड्रमस्टिक के नाम से जानते हैं. यह फली फाइबर से भरपूर होती हैं, जो पाचन को दुरुस्त कर कब्ज जैसी परेशानियों से छुटकारा दिलाती है. इसमें कैल्शियम और फास्फोरस पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करते हैं. इसके एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को संक्रमण से भी बचाते हैं. सहजन की छाल और तना भी अद्भुत फायदे देते हैं. इसका काढ़ा गठिया, साइटिका और सूजन जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह पाचन सुधारने और ब्लड शुगर कम करने में भी मददगार है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं को इसकी जड़ या छाल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह नुकसानदायक हो सकता है. पत्तों का साग या काढ़ा, फली की सब्जी या सांभर और छाल का काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता हैं. लेकिन उपयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह बहुत जरूरी है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ballia,Uttar Pradesh First Published : March 19, 2026, 20:43 IST
राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचीं, योगी ने स्वागत किया:रामलला के दर्शन करेंगी; श्रीराम यंत्र के पूजन में शामिल होंगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंच गई हैं। वह थोड़ी देर में राम मंदिर पहुंचेंगी। उनका काफिला एयरपोर्ट से रवाना हो चुका है। एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति नवरात्रि के पहले दिन रामलला का दर्शन-पूजन करेंगी। इसके बाद दूसरे फ्लोर पर बने राम परिवार दरबार के भी दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति श्रीराम यंत्र की स्थापना के पूजन कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। अयोध्या में करीब 5 घंटे रुकने के बाद वह दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना होंगी। मथुरा में राष्ट्रपति इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन करेंगी। शुक्रवार यानी 20 मार्च को वह प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति का यह दूसरा अयोध्या दौरा है। इससे पहले वह 1 मई 2024 को अयोध्या आई थीं, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। राम यंत्र के बारे में जानिए राम यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया। इसके बाद इसे कांचीपुरम से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया। फिर रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य रघुनाथ दास शास्त्री ने बताया- राम यंत्र एक विशेष वैदिक ज्यामितीय संरचना है। इसमें भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं की दिव्य ऊर्जा को मंत्रों और आकृतियों के माध्यम से स्थापित किया गया है। इसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रपति के अयोध्या दौरे से जुड़ी अपडेट्स जानने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए—
आगरा में बढ़ती हड्डियों की कमजोरी I युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण

Last Updated:March 18, 2026, 22:06 IST आगरा में हड्डियों की कमजोरी यानी ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बढ़ रहे हैं, अब युवाओं में भी इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं. हल्की चोट में फ्रैक्चर, पीठ में दर्द और कद घटना इसके मुख्य संकेत हैं. डॉक्टर आशीष मित्तल के अनुसार, समय पर इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इस बीमारी से बचा जा सकता है. आगरा. शहर में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ी है, आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि बदलती लाइफस्टाइल और खान पान से कई तरह की बीमारियां शिकार बना लेती है. उन्होंने कहा कि हड्डियों से संबंधित मरीज बढ़े है जिसमें युवाओं कि संख्या भी देखी जा रही है. चिकित्सक ने बताया कि मरीजों में ऑस्टियोपोरोसिस कि शिकायत देखी जा रही है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी में मरीज कि हड्डियां कमजोर व छिद्रयुक्त होने लगती है. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों का घनत्व जिसे डेंसिटी भी कहते है यह कम हो जाता है, जिससे वे पतली, नाजुक और ट्रटने यानि कि फ्रेक्चर के प्रति अत्यधिक संभावना बढ़ जाती है. डॉ. ने कहा कि इसका समय रहने उपचार कराना बेहद जरूरी है. दर्द और बार बार फ्रेक्चर होने पर चिकित्सक से करें सम्पर्कआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षणों को पहचाना जा सकता है, हालांकि शुरुआत में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है. उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिसे अक्सर ‘साइलेंट डिजीज कहते है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसका कोई खास लक्षण दिखते नहीं देता है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में हल्की चोट से फ्रैक्चर होना (विशेषकर कल्हे, कलाई, रीढ) पीठ में तेज दर्द रहना, समय के साथ कद कम होना और झुककर चलना आदि होते है. डॉ. आशीष ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ऐसे अवस्था में मरीज को तत्काल नज़दीकी हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपना इलाज शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय रहने इलाज से बीमारी से छुटकारा भी पाया जा सकता है. ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए हेल्दी फ़ूड खाएंआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचना है तो अपनी जीवन शैली में सुधार करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अनहेल्दी फ़ूड का त्याग कर हेल्दी फ़ूड का इस्तेमाल करना चाहिए. डॉ. आशीष ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कैल्शियम औरविटामिन डी से भरपूर आहार लें, नियमित रूप से वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे चलना, दौड़ना, योगासन आदि करें. डॉ. ने कहा कि युवाओं को धुम्रपान और शराब से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये उपाय हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मदद करते है. डॉ. आशीष ने कहा कि यदि हड्डियों में कहीं भी लगातार दर्द बना रहता है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : March 18, 2026, 22:06 IST









