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आलू VS शकरकंद: आलू या फिर शकरकंद…ब्लड शुगर में सबसे ज्यादा खतरनाक कौन है?

आलू VS शकरकंद: आलू या फिर शकरकंद...ब्लड शुगर में सबसे ज्यादा खतरनाक कौन है?

आलू बनाम शकरकंद: रसोई में आलू को ‘सब्जियों का राजा’ कहा जाता है, वहीं शकरकंद को अक्सर व्रत या समुद्र के किनारे के तौर पर देखा जाता है। लेकिन जब बात स्वास्थ्य और खासकर ब्लड शुगर की होती है, तो इन दोनों में स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों से पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सबसे बेहतर कौन है? आइए जानते हैं कि आपके स्वास्थ्य और शुगर लेवल के लिए इन दोनों में से कौन बेहतर है। आलू और शकरकंद में सबसे ज्यादा बेहतर क्या है? अगर बात आलू की करें तो इसमें पोटैशियम और विटामिन सी की अच्छी मात्रा होती है। यह ऊर्जा का एक स्रोत है। हालाँकि, इसमें काफी मात्रा में साबुत पदार्थ पाए जाते हैं और स्ट्राबेरी की मात्रा में चिप्स का पैकेट के बाद कम हो जाता है।वहीं शकरकंद विटामिन ए का भंडार है। इसमें आलू की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन को धीमा कर देता है और पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। गैलेक्टेमिक आणविक से पता ब्लड शुगर के लिए शुगरकंद में मौजूद ब्लड शुगर का सेवन करने से मदद मिलती है। इसके अलावा, इसमें ‘मैग्नीशियम’ और ‘एडिपोनेक्टिन’ नामक हार्मोन को रेग्युलेट करने की क्षमता होती है, जो कि एक्सेल मेटाबोलिज्म में सुधार करता है।अगर आप आलू खाना ही चाहते हैं, तो उन्हें आलूकर ठंडा कर लें। ठंडा होने पर आलू में ‘रेज़िस्टेंट सस्टेरा’ बढ़ता जाता है, जो शुगर लेवल को कम प्रभावित करता है। जो आपकी सेहत के लिए बढ़िया है।

Bangladesh Army Reshuffle | Defense Advisor Promotion, Chief General Staff Change

Bangladesh Army Reshuffle | Defense Advisor Promotion, Chief General Staff Change

ढाका9 मिनट पहले कॉपी लिंक तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिन बाद बांग्लादेशी सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। रविवार को जारी आदेशों में ऑपरेशनल और इंटेलिजेंस पदों पर नई नियुक्तियां की गईं, जबकि भारत में रक्षा सलाहकार को भी नई जिम्मेदारी दी गई है। भारत में बांग्लादेश के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल पद पर प्रमोट किया गया है। उन्हें वापस बुलाकर 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) बनाया गया है। वे इससे पहले आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड के प्रमुख थे। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम की जगह ली है, जिन्हें रिटायरमेंट लीव पर भेज दिया गया था। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सोमवार को आर्म्ड फोर्स डिवीजन में पदभार ग्रहण किया। आर्म्ड फोर्सेस डिवीजन और फील्ड कमांड में बदलाव मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। वे आर्मी मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने मेजर जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम की जगह ली है, जिन्हें फिलहाल विदेश मंत्रालय में राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिविजन का प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO) बनाया गया है। वे इससे पहले चटगांव स्थित 24वीं इन्फैंट्री डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग(GOC) थे। मौजूदा PSO लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन को विदेश मंत्रालय में राजदूत के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया है। मेजर जनरल जेएम एमदादुल इस्लाम को ईस्ट बंगाल रेजिमेंटल सेंटर का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। वहीं मेजर जनरल फिरदोस हसन सलीम को 24वीं इन्फैंट्री डिविजन का GOC बनाया गया है। बांग्लादेश सेना में फेरबदल क्यों हुआ? ये बड़ा फेरबदल तारिक रहमान की नई BNP सरकार के लिए सेना पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। फरवरी 2024 में छात्र आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी थी, जिसने सेना के कई शीर्ष पदों पर अपने करीबी या पुरानी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को तैनात किया था। अब 12 फरवरी 2026 के चुनाव में BNP की भारी जीत के बाद तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री बने, तो नई सरकार ने जल्दी से इन पदों पर बदलाव किए। इसके पीछे मुख्य वजह यह माना जा रहा है कि पुराने अधिकारियों (जो यूनुस सरकार या हसीना काल से जुड़े थे) को हटाकर BNP के करीबी या नई सरकार के प्रति वफादार अधिकारियों को महत्वपूर्ण कमांड और खुफिया पद दे रही है, ताकि सेना नई सरकार के खिलाफ कोई असंतुलन पैदा न करे और सेना मजबूत हो सके। प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने नए चीफ स्टाफ अधिकारी मीर मुशफिकुर रहमान को लेफ्टिनेंट जनरल का बैज देते हुए। इस फेरबदल से क्या फायदा नई सरकार की स्थिरता मजबूत होगी- सेना के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, खुफिया विभाग और अन्य प्रमुख पदों पर नए चेहरे आने से तारिक रहमान की सरकार को सेना का पूरा समर्थन मिलेगा। इससे कोई विद्रोह या अस्थिरता का खतरा कम हो जाएगा, खासकर जब देश में हाल ही में राजनीतिक उथल-पुथल हुई है। पुरानी व्यवस्था के प्रभाव कम होंगे- यूनुस सरकार या हसीना काल के वफादार अधिकारियों को हटाया या राजदूत जैसे पदों पर भेजा जा रहा है, जिससे BNP विरोधी तत्वों की ताकत कम होगी। भारत से संबंधों पर असर- भारत में तैनात रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल हाफिजुर रहमान (जिन्हें कुछ रिपोर्ट्स में भारत-समर्थक माना जाता है) को वापस बुलाकर प्रमोशन देकर डिवीजन कमांड दिया गया है। इससे दिल्ली में बांग्लादेश की सैन्य प्रतिनिधि बदल जाएगी, जो भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया संतुलन ला सकता है। सेना का फोकस बदलेगा- नए प्रमुखों के आने से सेना का ध्यान कोर डिफेंस रोल्स (राष्ट्रीय सुरक्षा) पर ज्यादा होगा, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप या आंतरिक निगरानी कम हो सकती है। इससे सरकार को आर्थिक सुधार, कानून-व्यवस्था और जनता की उम्मीदों पर फोकस करने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, ये फेरबदल नई सरकार की ‘पावर कंसोलिडेशन’ का हिस्सा है। यानी सत्ता को मजबूत करना और पुरानी व्यवस्था से जुड़े जोखिमों को खत्म करना। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तारिक रहमान की सरकार को अगले कुछ महीनों में ज्यादा स्थिरता मिलेगी। तारिक रहमान पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप चुनाव में जीत के बाद विक्ट्री सिंबल बनाते तारिक रहमान। सेना में फेरबदल के बीच बांग्लादेश में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तारिक रहमान चुनाव नतीजों में हेरफेर करने वाले इंजीनियर हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में ‘इंजीनियरिंग’ यानी हेरफेर की गई और इसी वजह से BNP को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं। बांग्लादेश में करीब 20 साल बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आम चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन और उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने आरोप लगाया है कि कई सीटों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- मुनीर मेरे बॉस नहीं: सेना अब सरकार नहीं चलाती, इतिहास में दखल था, अब सिस्टम अलग है पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनके बॉस नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि उनके बॉस प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Army Reshuffle | Defense Advisor Promotion, Chief General Staff Change

Bangladesh Army Reshuffle | Defense Advisor Promotion, Chief General Staff Change

ढाका13 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिन बाद ही तारिक रहमान ने सेना में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। रविवार को जारी आदेशों में ऑपरेशनल और इंटेलिजेंस पदों पर नई नियुक्तियां की गईं। भारत में तैनात रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल पद पर प्रमोट किया गया है। उन्हें वापस बुलाकर 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) बनाया गया है। वे इससे पहले आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड के प्रमुख थे। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम की जगह ली है, जिन्हें रिटायरमेंट लीव पर भेज दिया गया था। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सोमवार को आर्म्ड फोर्स डिवीजन में पदभार ग्रहण किया। आर्म्ड फोर्सेस डिवीजन और फील्ड कमांड में बदलाव मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस (DGFI) का डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। वे आर्मी मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने मेजर जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम की जगह ली है, जिन्हें फिलहाल विदेश मंत्रालय में राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिविजन का प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO) बनाया गया है। वे इससे पहले चटगांव स्थित 24वीं इन्फैंट्री डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) थे। मौजूदा PSO लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन को विदेश मंत्रालय में राजदूत के पद पर ट्रांसफर कर दिया गया है। मेजर जनरल जेएम एमदादुल इस्लाम को ईस्ट बंगाल रेजिमेंटल सेंटर का कमांडेंट नियुक्त किया गया है। वहीं मेजर जनरल फिरदोस हसन सलीम को 24वीं इन्फैंट्री डिविजन का GOC बनाया गया है। बांग्लादेश सेना में फेरबदल क्यों हुआ? ये बड़ा फेरबदल तारिक रहमान की नई BNP सरकार के लिए सेना पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। फरवरी 2024 में छात्र आंदोलन से शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी थी, जिसने सेना के कई शीर्ष पदों पर अपने करीबी या पुरानी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को तैनात किया था। अब 12 फरवरी 2026 के चुनाव में BNP की भारी जीत के बाद तारिक रहमान 17 फरवरी को प्रधानमंत्री बने, तो नई सरकार ने जल्दी से इन पदों पर बदलाव किए। इसके पीछे मुख्य वजह यह माना जा रहा है कि पुराने अधिकारियों (जो यूनुस सरकार या हसीना काल से जुड़े थे) को हटाकर BNP के करीबी या नई सरकार के प्रति वफादार अधिकारियों को महत्वपूर्ण कमांड और खुफिया पद दे रही है, ताकि सेना नई सरकार के खिलाफ कोई असंतुलन पैदा न करे और सेना मजबूत हो सके। प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने नए चीफ स्टाफ अधिकारी मीर मुशफिकुर रहमान को लेफ्टिनेंट जनरल का बैज देते हुए। इस फेरबदल से क्या फायदा सरकार मजबूत होगी- सेना के बड़े पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति से नई सरकार को सेना का साफ समर्थन मिलेगा। इससे सरकार के खिलाफ बगावत या अस्थिरता की संभावना कम हो सकती है, खासकर जब हाल में देश में राजनीतिक तनाव रहा है। पुरानी व्यवस्था के प्रभाव कम होंगे- जो अधिकारी पिछली सरकारों जैसे मोहम्मद यूनुस या शेख हसीना के करीब माने जाते थे, उन्हें हटाया या दूसरे पदों पर भेजा जा रहा है। इससे नई सरकार के विरोधी माने जाने वाले लोगों का प्रभाव कम होगा। भारत से संबंधों पर असर- भारत में तैनात रक्षा सलाहकार को वापस बुलाकर नई जिम्मेदारी दी गई है। इससे दिल्ली में बांग्लादेश की मिलिट्री लीडरशिप बदलेगी। आगे चलकर भारत-बांग्लादेश रिश्तों में थोड़ा नया संतुलन देखने को मिल सकता है। सेना का फोकस बदलेगा- नए अधिकारियों के आने से सेना का फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा पर ज्यादा हो सकता है। इससे सरकार को अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों पर काम करने का ज्यादा मौका मिलेगा। कुल मिलाकर, ये फेरबदल नई सरकार की ‘पावर कंसोलिडेशन’ का हिस्सा है। यानी सत्ता को मजबूत करना और पुरानी व्यवस्था से जुड़े जोखिमों को खत्म करना। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे तारिक रहमान की सरकार को अगले कुछ महीनों में ज्यादा स्थिरता मिलेगी। तारिक रहमान पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप चुनाव में जीत के बाद विक्ट्री सिंबल बनाते तारिक रहमान। सेना में फेरबदल के बीच बांग्लादेश में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तारिक रहमान चुनाव नतीजों में हेरफेर करने वाले इंजीनियर हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में ‘इंजीनियरिंग’ यानी हेरफेर की गई और इसी वजह से BNP को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं। बांग्लादेश में करीब 20 साल बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आम चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन और उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने आरोप लगाया है कि कई सीटों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- मुनीर मेरे बॉस नहीं: सेना अब सरकार नहीं चलाती, इतिहास में दखल था, अब सिस्टम अलग है पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनके बॉस नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि उनके बॉस प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

इंदौर एयरपोर्ट पर लगेज के लिए परेशान नहीं होंगे यात्री:अब यात्रियों को कन्वेयर बेल्ट पर ही मिलेगी ट्रॉली, ये सुविधा शुरू करने वाला देश का पहला हवाईअड्‌डा

इंदौर एयरपोर्ट पर लगेज के लिए परेशान नहीं होंगे यात्री:अब यात्रियों को कन्वेयर बेल्ट पर ही मिलेगी ट्रॉली, ये सुविधा शुरू करने वाला देश का पहला हवाईअड्‌डा

इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल ने यात्रियों के लिए नई सुविधा शुरू की है। अब बाहर से आने वाले यात्रियों को सामान के लिए ट्रॉली ढूंढने की झंझट नहीं होगी, ट्रॉली सीधे कन्वेयर बेल्ट के पास ही उपलब्ध होगी। यह व्यवस्था रविवार से लागू कर दी गई है। इसके तहत एयरपोर्ट प्रबंधन ने ट्रॉली मैनेजमेंट कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कन्वेयर बेल्ट के आसपास हर तरफ ट्रॉलियां रखे। अब जैसे ही कोई यात्री सामान उठाता है, स्टाफ तुरंत नई ट्रॉली लगा देता है ताकि कोई कमी न रहे। एयरपोर्ट डायरेक्टर सुनील मग्गीरवार ने बताया कि यात्रियों को यह सुविधा देने वाला इंदौर देश का पहला एयरपोर्ट है। इस व्यवस्था के दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है कि ट्रॉली अवस्थित ना हो और किसी भी यात्री को ट्राली के लिए परेशान ना होना पड़े। इसके लिए पूरे समय कंपनी का स्टाफ अराइवल हाल में तैनात किया गया है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि यह सुविधा यात्रियों, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए बहुत राहत भरी है। पहले अराइवल हाल में ट्रॉली ढूंढकर उसे बेल्ट तक लाना पड़ता था, जिससे काफी परेशानी होती थी। अब यात्री सीधे बेल्ट से सामान उठाकर ट्रॉली पर रखकर बाहर निकल सकते हैं। पूरी व्यवस्था में स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की गई है ताकि ट्रॉली कभी खाली न रहे और किसी यात्री को इंतजार न करना पड़े। छोटा लेकिन बहुत उपयोगी बदलाव ट्रेवल एजेंट्स और यात्रियों ने इस पहल की खूब सराहना की है। कई यात्रियों ने इसे “छोटा लेकिन बहुत उपयोगी बदलाव” बताया, जो यात्रा को और आरामदायक बनाता है। इंदौर एयरपोर्ट लगातार यात्री सुविधाओं में सुधार कर रहा है और यह कदम यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देने का एक शानदार उदाहरण है।

Lashkar Terror Module in india | Bangladeshi Terrorists arrest in India | LeT Sleeper Cells active in West Bengal and tamil nadu | क्या लश्कर-ए-तैयबा का गढ़ बनता जा रहा है पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु? हैरान कर देंगे यह आंकड़े

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Last Updated:February 23, 2026, 13:51 IST दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के एक बड़े स्लीपर सेल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है. बांग्लादेश से संचालित इस मॉड्यूल के 8 सदस्यों को दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है. दिल्ली पुलिस द्वारा पकड़े गए लश्कर मॉड्यूल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से हुई इन गिरफ्तारियों ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ये दोनों राज्य आतंकियों के नए ठिकाने बन रहे हैं? जानिए पिछले एक साल का पूरा डेटा और सक्रिय आतंकी संगठनों की इनसाइड स्टोरी. क्या पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु आतंकियों का छिपने का नया ठिकाना बन रहा है? नई दिल्ली. क्या पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु आतंकियों का नया ठिकाना बन रहा है? क्यों इन दोनों राज्यों से लगातार बांग्लादेशी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो रहा है. देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ महीनों में जो रिपोर्ट्स और गिरफ्तारियां सामने आई हैं, उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा ‘लश्कर-ए-तैयबा’ के एक अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया, जिसके तार कोलकाता और तमिलनाडु के तिरुपुर से जुड़े थे. यह पहली बार नहीं है जब इन राज्यों से हाई-प्रोफाइल आतंकियों की गिरफ्तारी हुई हो. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भौगोलिक स्थिति और जनसांख्यिकीय कारकों के साथ-साथ राजनीतिक हालात भी इन राज्यों में स्लीपर सेल्स के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभार रहा है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2025-26 के दौरान एनआईए ने देशभर में जो छापेमारी की, उनमें से लगभग 30% कार्रवाई पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में केंद्रित थी. अकेले बंगाल से 4 बड़े मॉड्यूल ध्वस्त किए गए, जबकि तमिलनाडु में आईएसआईएस के तीन स्लीपर सेल्स को निष्क्रिय किया गया. रविवार को ही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े काउंटर-टेरर ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा के एक खतरनाक बांग्लादेशी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में एक साथ छापेमारी कर कुल 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी आतंकी बांग्लादेशी मूल के हैं और भारत में अवैध रूप से घुसपैठ कर फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के सहारे रह रहे थे. क्या तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल आतंकियों का नया ठिकाना? पश्चिम बंगाल की लंबी और छिद्रपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है, जो इसे घुसपैठ के लिए आसान रास्ता बनाती है. पिछले एक साल में एनआईए और एसटीएफ ने बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना से कम से कम 15-18 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. वहीं, तमिलनाडु कभी अपनी शांति के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन गया है. कोयंबटूर कार ब्लास्ट के बाद से तमिलनाडु में सक्रियता बढ़ी है. पिछले 12 महीनों में तमिलनाडु के कोयंबटूर, तिरुपुर और चेन्नई से लगभग 10-12 आतंकियों और उनके समर्थकों को हिरासत में लिया गया है. #WATCH | Delhi | Six suspects who were arrested from Tamil Nadu for planning a major terrorist plot with the support of Pakistan’s intelligence agency, ISI, and Bangladeshi terrorist organisations brought to Delhi by the Delhi Police pic.twitter.com/QshJeFtlyY

The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.

The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.

Hindi News Career The High Cost Of Digital Education In The US Has Had The Opposite Effect. वॉशिंगटन4 मिनट पहले कॉपी लिंक डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। – सिम्बॉलिक इमेज अमेरिका ने स्कूलों में किताबों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर 2024 में 2.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर उल्टा पड़ा। न्यूरोसाइंटिस्ट जेरेड कूनी होर्वाथ के मुताबिक, तकनीक तक अभूतपूर्व पहुंच के बावजूद जेन जी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले संज्ञानात्मक रूप से कम सक्षम दिख रहे हैं और कॉमन टेस्ट में भी स्कोर गिरे हैं। होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि पिछले दस सालों में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता कम हुई है। दुनियाभर के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में कंप्यूटर और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर खराब रहे हैं। उनके मुताबिक, पढ़ाई के दौरान तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल और 2007 में आईफोन आने के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बच्चों की मानसिक एकाग्रता और सीखने की शक्ति पर बुरा असर पड़ा है। होर्वाथ ने कहा, यह बहस तकनीक को खारिज करने की नहीं है, बल्कि यह देखने की है कि शैक्षिक टूल्स को इंसानी सीखने के तरीके के साथ कैसे जोड़ा जाए। सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बच्चों में अवसाद सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जीन ट्वेंगे के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता खत्म कर रहा है, जो सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक बांधे रखें। नवंबर 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, टिकटॉक अपने सहज इस्तेमाल के कारण सबसे ज्यादा लत साबित हुआ है। इस डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेटा और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 1,600 से अधिक परिवारों और स्कूलों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं। जेनरेटिव एआई का जेन-जी पर नकारात्मक प्रभाव जेन-जी पर जेनरेटिव एआई और गिरती मानसिक क्षमता का दोहरा दबाव है। स्टैनफोर्ड के अध्ययन के अनुसार, एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों (एंट्री-लेवल) पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ा है। न्यूरोसाइंटिस्ट होर्वाथ ने चेतावनी दी है कि सीखने-समझने की क्षमता में कमी केवल करियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भविष्य की जटिल वैश्विक समस्याओं को सुलझाने की मानवीय शक्ति को भी कमजोर कर देगी। संकट का समाधान होर्वाथ ने सुझाव दिया है कि सरकार को क्लासरूम में केवल उन्हीं डिजिटल टूल्स की अनुमति देनी चाहिए जो वास्तव में प्रभावी साबित हों। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक अमेरिका के 17 राज्यों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर सख्ती की है। होर्वाथ इसे बच्चों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नीतिगत विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि पूरी शिक्षा कंप्यूटर के भरोसे छोड़ना एक गलत प्रयोग था, और अब छात्रों को इस पर सवाल उठाने चाहिए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ग्लोबल टूरिज्म 2026, दुनिया को मिलेंगे 4 सबसे भव्य म्यूजियम:लॉस एंजिलिस में 'स्पेसशिप', अबू धाबी में कांच के पुल पर गैलरी के साथ बेल्जियम में दिखेगा कार फैक्ट्री म्यूजियम

ग्लोबल टूरिज्म 2026, दुनिया को मिलेंगे 4 सबसे भव्य म्यूजियम:लॉस एंजिलिस में 'स्पेसशिप', अबू धाबी में कांच के पुल पर गैलरी के साथ बेल्जियम में दिखेगा कार फैक्ट्री म्यूजियम

वर्ष 2026 वैश्विक संस्कृति और पर्यटन के लिए बेहद खास होने वाला है। अमेरिका के लॉस एंजिलिस से लेकर मध्य एशिया तक दुनिया के चार सबसे प्रतीक्षित म्यूजियम खुलने जा रहे हैं। ये प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र न केवल शहरों की स्काईलाइन बदलेंगे, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इनमें हॉलीवुड निर्देशक जॉर्ज लुकास का लगभग 9 हजार करोड़ रु. का नैरेटिव आर्ट म्यूजियम और मशहूर आर्किटेक्ट फ्रैंक गेहरी द्वारा डिजाइन किया गया अबू धाबी का गुगेनहाइम प्रमुख है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम में भी कला केंद्र तैयार हो रहे हैं। 1- अमेरिका- यूएफओ जैसा म्यूजियम लॉस एंजिलिस (अमेरिका) के एक्स पोजिशन पार्क में बन रहा यह म्यूजियम सितंबर तक खुलेगा। 11 एकड़ में फैले परिसर की लागत लगभग 9 हजार करोड़ रु. है। इसका आकार उड़न तश्तरी (यूएफओ-स्पेसशिप) जैसा है। इसमें हॉलीवुड फिल्म ‘स्टार वॉर्स’ के असली प्रॉप्स सहित 40 हजार कलाकृतियां होंगी। 2 – अबू धाबी – धातु की चादरों से बना है यह गुगेनहाइम अबू धाबी म्यूजियम यूएई के सादियात द्वीप पर बन रहा है। यहां कांच के पुलों पर गैलरियां बनाई गई हैं। इसकी लागत लगभग 9 हजार करोड़ रु. है। इसे आर्किटेक्ट फ्रैंक गेहरी ने धातु की चादरों और पाल जैसा डिजाइन किया। यहां जैक्सन पोलक जैसे कलाकारों की कलाकृतियां दिखाई जाएंगी। 3 – शिकागो में ओबामा का वाइट हाउस अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ओबामा का यह ड्रीम प्रोजेक्ट शिकागो के साउथ साइड में बन रहा है, जो जून 2026 में खुलेगा। 6350 करोड़ रु. की लागत है। इसकी बड़ी खासियत वाइट हाउस के ‘ओवल ऑफिस’ (राष्ट्रपति का मुख्य दफ्तर) की हूबहू प्रतिकृति होगी। ये 8 मंजिला इमारत ग्रेनाइट पत्थर से बनी है। 4 – बेल्जियम – कार फैक्ट्री म्यूजियम बनी बेल्जियम के ब्रसल्स में बन रहा यह कनाल-पॉम्पिडू म्यूजियम नवंबर तक खुलेगा। इसे 40 हजार वर्ग मीटर में फैली 1930 के दशक की कार फैक्ट्री को आधुनिक रूप देकर बनाया गया है। यहां पाब्लो पिकासो और हेनरी माटिस जैसे महान चित्रकारों की 350 से ज्यादा कलाकृतियां रखी जाएंगी। यह पुराने औद्योगिक भवनों को नया रूप देगा।

हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर:11वीं सदी के मठों में इस बार बर्फ का सूखा, 47% कम हुई बर्फबारी

हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर:11वीं सदी के मठों में इस बार बर्फ का सूखा, 47% कम हुई बर्फबारी

इस बार कई पहाड़ी इलाकों में देर से ही सही, पर भारी बर्फबारी के बावजूद हिमाचल में जलवायु परिवर्तन का असर साफ दिख रहा है। 11वीं शताब्दी से अडिग खड़े ऐतिहासिक बौद्ध मठ हों या 13,596 फीट की ऊंचाई पर बना एशिया का सबसे ऊंचा चिचम ब्रिज-ये सभी आज कम बर्फबारी के कारण अपनी पहचान खो रहे हैं। कभी सर्दियों में 7 फीट तक बर्फ की मोटी चादर में लिपटे रहने वाले देश के पहले मतदाता श्याम शरण नेगी के कल्पा जैसे गांव अब ‘स्नो ड्राउट’ (बर्फ के सूखे) की चपेट में हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1991-2000 के दशक की तुलना में दिसंबर की बर्फबारी में 86% और जनवरी में 47% तक की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। विरासत जो संकट में हैं बौद्ध मठ: 1008-1064 ई. का मठ (गोम्पा) स्पीति घाटी में 13,668 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां सैकड़ों लामा रहते हैं। चिचम ब्रिज: चिचम ब्रिज 13,596 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसे एशिया में सबसे ऊंचाई पर बने पुल का दर्जा ​है।

फरहान अख्तर की ‘बूंग' ने BAFTA में रचा इतिहास:चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में जीता अवॉर्ड, 2024 में रिलीज हुई थी फिल्म

फरहान अख्तर की ‘बूंग' ने BAFTA में रचा इतिहास:चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में जीता अवॉर्ड, 2024 में रिलीज हुई थी फिल्म

ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (BAFTA) 2026 में भारतीय फिल्म ‘बूंग’ ने इतिहास रच दिया है। फरहान अख्तर की मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने 79वें बाफ्टा अवॉर्ड्स में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म कैटेगरी में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड जीता है। इस मौके पर फिल्म के मेकर्स रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, लक्ष्मीप्रिया देवी और एलन मैकएलेक्स मौजूद रहे। इस फिल्म ने ‘जूटोपिया 2’, ‘लिलो एंड स्टिच’ और ‘आर्को’ जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को पछाड़ते हुए यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड अपने नाम किया। जानिए ‘बूंग’ फिल्म के बारे में ‘बूंग’ साल 2024 में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है, जबकि इसे प्रोड्यूसर फरहान अख्तर ने किया है। फिल्म की कहानी एक छोटे लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मां को एक खास तोहफा देकर सरप्राइज करना चाहता है। उसे लगता है कि उसके पिता, जो उनके साथ नहीं रहते, उन्हें घर वापस लाना ही सबसे कीमती तोहफा होगा। पिता की तलाश में निकले इस सफर में उसकी दुनिया बदल जाती है, लेकिन अंत में उसे ऐसा तोहफा मिलता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इस फिल्म का प्रदर्शन टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024 और वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल समेत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किया गया था। ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (BAFTA) 2026 में भारतीय फिल्म ‘बूंग’ ने इतिहास रच दिया है। फरहान अख्तर की मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने 79वें बाफ्टा अवॉर्ड्स में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म कैटेगरी में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड जीता है। इस मौके पर फिल्म के मेकर्स रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर, लक्ष्मीप्रिया देवी और एलन मैकएलेक्स मौजूद रहे। फिल्म की कहानी एक छोटे लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मां को एक खास तोहफा देकर सरप्राइज करना चाहता है। उसे लगता है कि उसके पिता, जो उनके साथ नहीं रहते, उन्हें घर वापस लाना ही सबसे कीमती तोहफा होगा। पिता की तलाश में निकले इस सफर में उसकी दुनिया बदल जाती है, लेकिन अंत में उसे ऐसा तोहफा मिलता है जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

‘शोनार बांग्ला को टीएमसी ने धोखा दिया’: चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के लोगों को पीएम मोदी का पत्र | भारत समाचार

A vehicle sits charred after being set on fire, on a road in Guadalajara, Jalisco state, Mexico, Sunday, Feb. 22, 2026, after the death of the leader of the Jalisco New Generation Cartel, Nemesio Rubén Oseguera Cervantes, known as"El Mencho." (AP)

आखरी अपडेट:23 फ़रवरी 2026, 12:46 IST पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल बेहतर शासन और नए सिरे से विकास का हकदार है। उन्होंने “विकसित बंगाल” के निर्माण की दिशा में काम करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो/पीटीआई) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के लोगों को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा कि वह पश्चिम बंगाल की वर्तमान स्थिति को लेकर ”हतप्रभ” हैं। पत्र की शुरुआत ‘जॉय मां काली’ से करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी कल्पना वाले ”शोनार बांग्ला” के लोगों को मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार के शासन में धोखे का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि बंगाल बेहतर शासन और नए सिरे से विकास का हकदार है और भारतीय जनता पार्टी ऐसा कर सकती है। प्रधान मंत्री ने “विकसित बंगाल” के निर्माण की दिशा में काम करने का संकल्प लिया और राज्य के भविष्य को बदलने के लिए बंगालियों से समर्थन मांगा। आगामी चुनाव में लोगों से भाजपा को वोट देने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि शोनार बंगाल का भविष्य उसके अपने लोगों के हाथों में है। पीएम ने कहा, “हमारे शोनार बांग्ला (स्वर्णिम बंगाल) का भविष्य आपके दृढ़ निर्णय पर निर्भर करता है। मैं आपसे पश्चिम बंगाल के विकास के हित में भाजपा को वोट देने का आग्रह करता हूं।” पत्र में कल्याण और विकास उपायों का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया कि केंद्र की जन-धन योजना के माध्यम से पश्चिम बंगाल में करोड़ों लोगों को बैंकिंग सेवाओं के तहत लाया गया है। इसमें छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को दी गई 2.83 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का उल्लेख किया गया है। पत्र में कहा गया है कि बंगाल में 1.5 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन मिले और हजारों को विधवा और विकलांगता पेंशन से लाभ हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पश्चिम बंगाल एक समय भारत के अग्रणी औद्योगिक राज्यों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक अनिश्चितता और अदूरदर्शी नीतियों के कारण राज्य की 65 साल पुरानी औद्योगिक विरासत नष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि कई उद्योग बंद हो गए हैं, बेरोजगारी बढ़ गई है और कई युवा काम के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। “राज्य सरकार की तीन प्रमुख लोक कल्याणकारी पहलों के माध्यम से, जन-धन योजना के तहत करोड़ों लोगों को बैंकिंग सेवाओं में लाया गया है। जब सत्तारूढ़ दल ने आम लोगों से नौकरियां छीन लीं तो वित्तीय सहायता प्रदान की गई। छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को 2.83 लाख करोड़ रुपये दिए गए। उज्ज्वला योजना के तहत, 1.5 करोड़ परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन मिले हैं। सुशासन, भ्रष्टाचार से मुक्त और विकास की निरंतरता हमारी प्रतिबद्धता बनी हुई है। मैं आपसे इस यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील करता हूं।” प्रधानमंत्री का पत्र. पीएम ने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीएमसी ने बंगाल में प्रगति के इस रास्ते में बाधा डालने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि शासन में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद समाप्त होना चाहिए और पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन स्थापित होना चाहिए। उन्होंने लोगों से विकसित, समृद्ध और शांतिपूर्ण पश्चिम बंगाल के निर्माण के लिए आगे आने का आह्वान किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 23 फ़रवरी 2026, 11:39 IST न्यूज़ इंडिया ‘टीएमसी के तहत शोनार बांग्ला को धोखा दिया गया’: चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल के लोगों को पीएम मोदी का पत्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पीएम मोदी(टी)बंगाल चुनाव(टी)बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)ममता बनर्जी(टी)बंगाल चुनाव कब है(टी)बंगाल चुनाव की तारीख(टी)बंगाल चुनाव(टी)चुनाव आयोग(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी