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The high cost of digital education in the US has had the opposite effect.

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वॉशिंगटन4 मिनट पहले

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डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। – सिम्बॉलिक इमेज

अमेरिका ने स्कूलों में किताबों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर 2024 में 2.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर उल्टा पड़ा। न्यूरोसाइंटिस्ट जेरेड कूनी होर्वाथ के मुताबिक, तकनीक तक अभूतपूर्व पहुंच के बावजूद जेन जी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले संज्ञानात्मक रूप से कम सक्षम दिख रहे हैं और कॉमन टेस्ट में भी स्कोर गिरे हैं।

होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि पिछले दस सालों में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता कम हुई है। दुनियाभर के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में कंप्यूटर और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर खराब रहे हैं।

उनके मुताबिक, पढ़ाई के दौरान तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल और 2007 में आईफोन आने के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बच्चों की मानसिक एकाग्रता और सीखने की शक्ति पर बुरा असर पड़ा है। होर्वाथ ने कहा, यह बहस तकनीक को खारिज करने की नहीं है, बल्कि यह देखने की है कि शैक्षिक टूल्स को इंसानी सीखने के तरीके के साथ कैसे जोड़ा जाए।

सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बच्चों में अवसाद

सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जीन ट्वेंगे के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता खत्म कर रहा है, जो सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक बांधे रखें।

नवंबर 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, टिकटॉक अपने सहज इस्तेमाल के कारण सबसे ज्यादा लत साबित हुआ है। इस डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेटा और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 1,600 से अधिक परिवारों और स्कूलों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं।

जेनरेटिव एआई का जेन-जी पर नकारात्मक प्रभाव

जेन-जी पर जेनरेटिव एआई और गिरती मानसिक क्षमता का दोहरा दबाव है। स्टैनफोर्ड के अध्ययन के अनुसार, एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों (एंट्री-लेवल) पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ा है। न्यूरोसाइंटिस्ट होर्वाथ ने चेतावनी दी है कि सीखने-समझने की क्षमता में कमी केवल करियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भविष्य की जटिल वैश्विक समस्याओं को सुलझाने की मानवीय शक्ति को भी कमजोर कर देगी।

संकट का समाधान

होर्वाथ ने सुझाव दिया है कि सरकार को क्लासरूम में केवल उन्हीं डिजिटल टूल्स की अनुमति देनी चाहिए जो वास्तव में प्रभावी साबित हों। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक अमेरिका के 17 राज्यों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर सख्ती की है। होर्वाथ इसे बच्चों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नीतिगत विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि पूरी शिक्षा कंप्यूटर के भरोसे छोड़ना एक गलत प्रयोग था, और अब छात्रों को इस पर सवाल उठाने चाहिए।

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डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। – सिम्बॉलिक इमेज

अमेरिका ने स्कूलों में किताबों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर 2024 में 2.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर उल्टा पड़ा। न्यूरोसाइंटिस्ट जेरेड कूनी होर्वाथ के मुताबिक, तकनीक तक अभूतपूर्व पहुंच के बावजूद जेन जी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले संज्ञानात्मक रूप से कम सक्षम दिख रहे हैं और कॉमन टेस्ट में भी स्कोर गिरे हैं।

होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि पिछले दस सालों में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता कम हुई है। दुनियाभर के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में कंप्यूटर और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर खराब रहे हैं।

उनके मुताबिक, पढ़ाई के दौरान तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल और 2007 में आईफोन आने के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बच्चों की मानसिक एकाग्रता और सीखने की शक्ति पर बुरा असर पड़ा है। होर्वाथ ने कहा, यह बहस तकनीक को खारिज करने की नहीं है, बल्कि यह देखने की है कि शैक्षिक टूल्स को इंसानी सीखने के तरीके के साथ कैसे जोड़ा जाए।

सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बच्चों में अवसाद

सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जीन ट्वेंगे के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता खत्म कर रहा है, जो सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक बांधे रखें।

नवंबर 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, टिकटॉक अपने सहज इस्तेमाल के कारण सबसे ज्यादा लत साबित हुआ है। इस डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेटा और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 1,600 से अधिक परिवारों और स्कूलों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं।

जेनरेटिव एआई का जेन-जी पर नकारात्मक प्रभाव

जेन-जी पर जेनरेटिव एआई और गिरती मानसिक क्षमता का दोहरा दबाव है। स्टैनफोर्ड के अध्ययन के अनुसार, एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों (एंट्री-लेवल) पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ा है। न्यूरोसाइंटिस्ट होर्वाथ ने चेतावनी दी है कि सीखने-समझने की क्षमता में कमी केवल करियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भविष्य की जटिल वैश्विक समस्याओं को सुलझाने की मानवीय शक्ति को भी कमजोर कर देगी।

संकट का समाधान

होर्वाथ ने सुझाव दिया है कि सरकार को क्लासरूम में केवल उन्हीं डिजिटल टूल्स की अनुमति देनी चाहिए जो वास्तव में प्रभावी साबित हों। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक अमेरिका के 17 राज्यों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर सख्ती की है। होर्वाथ इसे बच्चों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नीतिगत विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि पूरी शिक्षा कंप्यूटर के भरोसे छोड़ना एक गलत प्रयोग था, और अब छात्रों को इस पर सवाल उठाने चाहिए।

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