‘तुम कभी मां नहीं बन सकती’, 16 की उम्र में सुना था ये दर्दनाक सच, बिना यूटरस के फिर कैसे हुई प्रेगनेंट?

Last Updated:February 24, 2026, 19:31 IST ब्रिटेन में एक ऐसी खुशखबरी सामने आई है जिसे लोग मेडिकल चमत्कार कह रहे हैं. जन्म से गर्भाशय न होने के बावजूद एक महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है. यह संभव हो पाया एक मृत डोनर द्वारा दान किए गए गर्भाशय की मदद से. इस अनोखी सफलता ने न सिर्फ डॉक्टरों को गर्व महसूस कराया है, बल्कि हजारों महिलाओं के दिल में नई उम्मीद भी जगा दी है. ख़बरें फटाफट ब्रिटेन में एक ऐसी घटना हुई है जिसे लोग सच में चमत्कार मान रहे हैं. एक महिला, जिनके पास जन्म से गर्भाशय नहीं था, आज एक स्वस्थ बच्चे की मां बन चुकी हैं. यह संभव हो पाया क्योंकि उन्हें एक मृत महिला द्वारा दान किया गया गर्भाशय सर्जरी के जरिए लगाया गया था. ब्रिटेन में यह पहला मामला है जब इस तरह किसी मृत डोनर की मदद से महिला ने बच्चे को जन्म दिया है. SkyNews की रिपोर्ट के अनुसार, इस बच्चे का नाम ह्यूगो पावेल रखा गया है. उसका जन्म दिसंबर में लंदन के एक अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए हुआ. जन्म के समय उसका वजन करीब 3 किलो था. बच्चे की मां ग्रेस बेल को 16 साल की उम्र में पता चला था कि उन्हें एक दुर्लभ समस्या है, जिसमें गर्भाशय ठीक से बना ही नहीं था. उस समय डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि वह कभी खुद से गर्भधारण नहीं कर पाएंगी. ग्रेस के लिए यह खबर बहुत बड़ा झटका थी. वह बताती हैं कि उस दिन वह अस्पताल के वॉशरूम में जाकर खूब रोई थीं. उन्हें लगा था कि मां बनने का सपना हमेशा के लिए खत्म हो गया है. लेकिन समय के साथ उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. जब उन्होंने विदेश में हुए ऐसे सफल इलाज के बारे में पढ़ा, तो उनके मन में फिर से उम्मीद जगी. बाद में जब उनके देश में भी यह इलाज शुरू हुआ, तो उन्होंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : February 24, 2026, 19:31 IST
इंदौर नगर निगम ने ढोल बजाकर लगाई बकायादारों की सूची:राजवाड़ा पर लगाया पोस्टर, 57 बड़े बकायादारों के नाम किए चस्पा

इंदौर के राजवाड़ा पर नगर निगम ने ढोल बजाकर बकायादारों की सूची चस्पा की है। पोस्टर पर बकायादारों के नाम और कितनी राशि बकाया है यह जानकारी भी पोस्टर में बताई गई है। मंगलवार को नगर निगम की टीम पोस्टर लेकर राजवाड़ा पहुंची। यहां पर पोस्टर लगाने के साथ ही ढोल भी बजाया गया। जोन 3 के एआरओ अनिल निकम ने बताया कि विगत लोक अदालत में भी वार्ड 56, 57, 58 में बड़े बकायादारों की सूची की लिस्ट राजवाड़ा पर लगाई गई थी। उसका भी हमें अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। पिछली लोक अदालत में 100 करोड़ से ज्यादा का राजस्व आया था। लिस्ट में 57 लोगों के नाम, 2 करोड़ बकाया इसी तरह इस बार भी जो बड़े बकायादार है, जिन्हें कई बार उन्हें समझाइश दे चुके हैं, नोटिस जारी किए जा चुके हैं कि बकाया राशि जमा करा दें, लेकिन उन्होंने राशि जमा नहीं कराई है, इसलिए उनके नामों की सूची सार्वजनिक करते हुए राजवाड़ा और जोनल ऑफिस पर लगाई है। 14 मार्च को लोक अदालत है, इसलिए करदाताओं से अपील की है कि बकाया राशि लोक अदालत में जमा करा कर सरचार्ज में छूट का लाभ लें। लिस्ट में 57 लोगों के नाम हैं और 2 करोड़ रुपए की बकाया राशि बाकी है।
277 Luminaries Condemn Shirtless Protest, Call it Calculated Move Against National Dignity

Hindi News National 277 Luminaries Condemn Shirtless Protest, Call It Calculated Move Against National Dignity नई दिल्ली31 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली स्थित भारत मंडपम में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने 20 फरवरी को AI समिट 2026 में शर्टलेस प्रदर्शन किया था। भारत AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) कार्यकर्ताओं के “शर्टलेस” (कमीज उतारकर) विरोध प्रदर्शन की देश के 277 प्रमुख लोगों ने निंदा की है। इनमें पूर्व हाई कोर्ट जज, सेवानिवृत्त अफसर, पूर्व राजदूत, सेना और पुलिस के रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इन लोगों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यह प्रदर्शन राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ, सोची-समझी हरकत और बिना सोच-विचार की राजनीति का उदाहरण है। बयान पर 26 पूर्व जज (जिनमें दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बी सी पटेल शामिल हैं), 102 रिटायर्ड अफसर जिनमें 11 पूर्व राजदूत,149 पूर्व सैन्य व पुलिस अधिकारियों ने दस्तखत किए हैं। प्रदर्शन का मकसद दुनिया के निवेशकों और साझेदार देशों को यह दिखाना था कि भारत में अस्थिरता है। उन्होंने ऐसी राजनीतिक संस्कृति को मिलकर अस्वीकार करने की अपील की, जो देश को बदनाम करने में गर्व महसूस करती है। AI समिट में प्रदर्शन की 2 तस्वीरें… यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता हाथ में टी-र्शट लेकर स्टेज पर चढ़ गए थे। इस दौरान कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के हाथ से टी-शर्ट लेकर फेंकते दिखे। प्रदर्शन देश की छवि खराब करने वाला बयान में कहा गया कि जब दुनिया के बड़े टेक्नोलॉजी नेता, उद्योगपति और विदेशी प्रतिनिधि भारत के भविष्य की भूमिका देखने के लिए जमा हुए थे, तब इस तरह का प्रदर्शन देश की छवि खराब करने वाला था। दस्तखत करने वालों ने कहा कि इंटरनेशनल और हाईलेवल कार्यक्रम में इस तरह का विरोध करना दिखाता है कि कुछ लोग देश की प्रतिष्ठा से ज्यादा अपनी राजनीति को महत्व देते हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई अचानक हुआ विरोध नहीं था, बल्कि पहले से सोची-समझी योजना थी। बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह का प्रदर्शन देश के वैज्ञानिकों की मेहनत, इंजीनियरों की उम्मीदों और 140 करोड़ भारतीयों का अपमान है। दुनिया के सामने गलत मैसेज गया बयान में कहा गया कि क्यूआर कोड के जरिए कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर कपड़े उतारकर नारेबाजी करना सुरक्षा और शिष्टाचार दोनों का उल्लंघन है। इसे राष्ट्रविरोधी बताया गया, जिससे दुनिया के सामने गलत मैसेज गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध करना अधिकार है, लेकिन देश को बदनाम करना सही नहीं है। असली राजनीतिक विरोध संसद और तर्क के जरिए होना चाहिए, न कि विदेशी मेहमानों के सामने इस तरह के प्रदर्शन से। बयान में यह भी कहा गया कि इस घटना से भारत के विरोधियों को देश की छवि खराब करने का मौका मिला है। PM ने 16 फरवरी को AI समिट का उद्घाटन किया था 2026 इंडिया AI इंपैक्ट समिट नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फरवरी 2026 से शुरू हुआ। यह 20 फरवरी तक होना था लेकिन भीड़ और आयोजनों के चलते इसे 21 फरवरी 2026 तक बढ़ा दिया गया। PM नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को समिट का उद्घाटन किया था। यहां दुनियाभर की कंपनियों ने अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस को दुनिया के सामने पेश किया। समिट में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल इस समिट की थीम राष्ट्रीय विजन ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’, यानी सभी का कल्याण, सभी का सुख पर आधारित थी। समिट में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। करीब 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष, 60 से ज्यादा मंत्री, और 45 से ऊपर तकनीकी कंपनियों के प्रमुख भी शामिल हुए। इसके अलावा 300+ प्रदर्शक और 30+ देशों की थीम पवेलियन्स भी समिट का हिस्सा रहे, जो वैश्विक साझेदारी और AI के उपयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें: AI समिट हंगामा- उदय भानु 4 दिन हिरासत में:पुलिस बोली- IYC प्रेसिडेंट ही मास्टरमाइंड; कांग्रेस ने कहा- गिरफ्तारी मोदी की सनक का नतीजा दिल्ली पुलिस ने उदय भानु चिब को पटियाला कोर्ट में पेश किया। AI इम्पैक्ट समिट हंगामा मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 4 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा है। उन्हें आज सुबह तिलक मार्ग थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Marjariasana for Back Pain and Spinal Flexibility | Cat Pose Health Benefits | मार्जरी आसन ऑफिस वर्क से होने वाले कमर और गर्दन दर्द का अचूक उपाय

Last Updated:February 24, 2026, 18:27 IST Marjariasana Health Benefits: घंटों डेस्क जॉब के कारण युवाओं को कमर, गर्दन और पीठ के दर्द का सामना करना पड़ता है. अगर आप रोज कुछ मिनट मार्जरी आसन का अभ्यास करें, तो गर्दन और पीठ दर्द से राहत मिल सकती है. आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, तनाव कम करने और पाचन में सुधार करने में सहायक है. यह सर्वाइकल, सायटिका और स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याओं में राहत प्रदान करता है और मानसिक शांति भी देता है. ख़बरें फटाफट मार्जरी आसन सर्वाइकल के दर्द से भी राहत दिला सकता है. Healing Benefits of Cat Pose: दुनियाभर में कॉरपोरेट कल्चर कल्चर तेजी से बढ़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है. देश में करोड़ों की संख्या में लोग घंटों एक जगह बैठकर काम करते हैं. अक्सर इसे डेस्क जॉब कहा जाता है. यह नौकरी दिखने में आसान है, लेकिन एक ही जगह घंटों बैठने से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं. ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठे रहना और लगातार कंप्यूटर स्क्रीन की ओर झुककर काम करना हमारी रीढ़ की हड्डी, गर्दन और कमर के लिए शत्रु के समान है. इस लापरवाही का परिणाम पीठ में अकड़न, कमर दर्द और गर्दन की जकड़न के रूप में सामने आता है. हालांकि योग विज्ञान में इसका एक बहुत ही सरल और प्रभावी समाधान मार्जरी आसन है. इसे कैट काउ पोज भी कहा जाता है. आयुष मंत्रालय और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह आसन डेस्क जॉब करने वालों के लिए एक सुरक्षा कवच है. एक्सपर्ट्स के अनुसार मार्जरी आसन दो शब्दों मार्जरी और आसन के मेल से बना है. मार्जरी का अर्थ बिल्ली और आसन का अर्थ मुद्रा है. इस योगासन के अभ्यास के दौरान शरीर की आकृति एक खिंचाव लेती हुई बिल्ली के समान हो जाती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह आसन रीढ़ की हड्डी (Spine) को लहर की तरह आगे-पीधे गति प्रदान करता है, जिससे वर्टिब्रा के बीच का तनाव कम होता है. यह आसन मुख्य रूप से हमारी रीढ़ की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और वहां रक्त के संचार को बढ़ाता है, जिससे दिन भर की थकान और जकड़न मिनटों में दूर हो जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. ऑफिस में गलत पोस्चर में बैठने के कारण अक्सर सर्वाइकल और स्पॉन्डिलाइटिस जैसी समस्याएं घेर लेती हैं. मार्जरी आसन इन समस्याओं में रामबाण की तरह काम करता है. यह गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को स्ट्रेच कर उनकी जकड़न को खत्म करता है. नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी इतनी लचीली हो जाती है कि सायटिका और कमर के निचले हिस्से का दर्द में भी काफी सुधार देखने को मिलता है. यह शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित करता है, जिससे बैठने का तरीका सुधरता है. अगर आपका पोश्चर सुधर जाएगा, तो कई समस्याओं से राहत मिल जाएगी. मार्जरी आसन का लाभ केवल हड्डियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे आंतरिक अंगों की कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाता है. इस आसन के दौरान जब पेट की मांसपेशियों में खिंचाव और संकुचन होता है, तो इससे पाचन तंत्र की मालिश होती है, जिससे कब्ज और गैस जैसी समस्याओं से राहत मिलती है. आयुर्वेद के अनुसार यह थायराइड ग्रंथि को सक्रिय करने और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने में भी सहायक है. यह फेफड़ों को पूरी तरह खुलने का अवसर देता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और आप अधिक एक्टिव महसूस करते हैं. मार्जरी आसन मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है. गहरी सांसों के साथ इस आसन का अभ्यास करने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है, जिससे तनाव, चिंता और चिड़चिड़ापन कम होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग रात को सोने से पहले या दिन के अंत में इसका अभ्यास करते हैं, उन्हें नींद की गुणवत्ता में सुधार महसूस होता है. यह मस्तिष्क तक जाने वाली नसों को आराम पहुंचाता है, जिससे मानसिक थकान कम होती है और एकाग्रता बढ़ती है. अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो इस आसन को करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 24, 2026, 18:27 IST
डायबिटीज मरीज भी रख सकते हैं रोजा? किन बातों का रखें ध्यान, वरना दिन में दिखेंगे तारे, डॉक्टर से जानें

Last Updated:February 24, 2026, 18:17 IST रोजे में खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. रोजे के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में अलीगढ़ के डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. हामिद अशरफ से बात की. वे बताते हैं कि अगर रमजान में डायबिटीज मरीज रोजे रख रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें. ऐसा करना क्यों जरूरी है, आइये जानते हैं. अलीगढ़. रमजान का पवित्र महीना 19 फरवरी से शुरू हो चुका है, जिसमे पूरे 30 रोजे रखे जाएंगे. इन 30 दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है. इस्लाम को मानने वाले सभी लोग इस दौरान उपवास रखते हैं, जिसे रोजा कहा जाता है. पवित्र कुरान के अनुसार, बीमार लोगों को उपवास करना जरूरी नहीं है, लेकिन कई लोग डायबिटीज होने पर भी पूरे महीने रोजा रखते हैं. वैसे तो शुगर की समस्या होने पर खाने-पीने के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर डायबिटीज के मरीज भी रोजा रख सकते हैं. सबसे पहले ये काम रमजान में रोजा कितने घंटे का होगा यह सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है. रोजे में सुबह की पहली किरण से लेकर सूरज डूबने तक कुछ भी नहीं खाया जाता है. खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. ऐसी समस्या से बचने के लिए डायबिटीज मरीज डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हामिद अशरफ बताते हैं कि शुगर रोगी भी रोजे रख सकते हैं, मगर इसके लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है ताकि स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े. डॉ. हामिद बताते हैं कि उपवास के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. इसका मतलब होता है कि खून में शुगर का अचानक बढ़ जाना जिससे कमजोरी, प्यास, सिर दर्द और नजर में धुंधलापन आ सकता है. इस समस्या को इंसुलिन की उचित मॉनिटरिंग करके स्थिति को संभाल जा सकता है. रमजान के दौरान डायबिटीज के मरीज अगर रोजे रखे जा रहे हैं तो शुरुआत से पहले ब्लड शुगर की जांच जरूर करें. उपवास में डिहाइड्रेशन एक सामान्य और गंभीर जोखिम है, जिसका सामना विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों को करना पड़ता है. ऐसे में नींबू पानी, छाछ, नारियल का पानी, खरबूजे, कम चीनी वाले ताजे फलों का रस, गुलाब के शरबत का पर्याप्त सेवन करें. टाइप वन व टाइप टू मधुमेह रोगी अथवा जिन्हें निरंतर इंसुलिन लेने की जरूरत होती है, उनके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद अपने रक्त में ग्लूकोज की निगरानी करना जरूरी है. अगर मरीज का शुगर 70 से कम हो या 300 से अधिक पहुंच जाए तो उसे तुरंत रोजा खोल लेना चाहिए. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Aligarh,Uttar Pradesh First Published : February 24, 2026, 18:17 IST
Kerala High Court on The Kerala Story 2: State Image at Risk

36 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘केरल स्टोरी 2’ का ट्रेलर जारी होते ही फिल्म विवादों में घिर गई है। फिल्म के सर्टिफिकेशन और केरल राज्य को कथित तौर पर गलत तरीके से दिखाए जाने को लेकर केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल एक शांत और सौहार्दपूर्ण राज्य है, लेकिन फिल्म में उसे गलत ढंग से दिखाया गया है, जिससे उसकी छवि प्रभावित हो सकती है। दोपहर बाद जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई तो अदालत को बताया गया कि फिल्म के मेकर्स टीजर वापस लेने के लिए तैयार हैं। इसके बाद अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। उस दिन यह तय किया जाएगा कि कोर्ट 27 फरवरी रिलीज से पहले फिल्म देखेगी या नहीं। हालांकि, दोपहर की सुनवाई से पहले अदालत ने कहा था कि वह कोई भी आदेश देने से पहले फिल्म देखना चाहती है। साथ ही, अदालत ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से यह भी पूछा कि क्या फिल्म सभी आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन करती है। बता दें, याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में फिल्म के कुछ हिस्सों में बदलाव की मांग की है, जिसमें फिल्म का टाइटल बदलने की मांग भी शामिल है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित किया गया है, जबकि कथित रूप से यह सिनेमैटोग्राफी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का पालन नहीं करती। शिकायत के अनुसार, विवाद फिल्म के टीजर और ट्रेलर से शुरू हुआ है। इनमें अलग-अलदग राज्यों की महिलाओं की कहानियां दिखाई गई हैं, लेकिन फिल्म का टाइटल ‘केरल स्टोरी’ होने के कारण कथित आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय साजिश जैसे मुद्दों को विशेष रूप से केरल से जोड़कर दिखाए गए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Why is Stress High in the Morning | Main Causes and Ways to Lower Cortisol After Waking Up | सुबह उठते ही क्यों बढ़ जाता है तनाव हार्मोन | जानिए स्ट्रेस हार्मोन कम करने के तरीके

Ways to Lower Cortisol Hormone: सुबह उठने के बाद अक्सर लोगों को बिना किसी कारण के घबराहट, बेचैनी या काम का भारी दबाव महसूस होने लगता है. कई लोग इसे मंडे ब्लूज या काम का तनाव मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल की भाषा में इसे कोर्टिसोल अवेकनिंग रिस्पॉन्स कहा जाता है. सुबह के समय हमारे शरीर में तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर अपने पीक पर होता है. यह एक प्राकृतिक बायोलॉजिकल प्रोसेस है. हालांकि जब यह हार्मोन लगातार बढ़ा हुआ रहता है, तो यह हमारी मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है. अब सवाल उठता है कि सुबह-सुबह स्ट्रेस हार्मोन क्यों बढ़ता है? यूएस के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्टिसोल हमारे शरीर का मुख्य स्ट्रेस हार्मोन है, जिसे एड्रिनल ग्रंथियां रिलीज करती हैं. सुबह के समय इसका बढ़ना वास्तव में शरीर की एक रक्षात्मक प्रणाली है. जागने के पहले 30 से 45 मिनट के भीतर शरीर में कोर्टिसोल का स्तर लगभग 38% से 75% तक बढ़ जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य शरीर को नींद की अवस्था से बाहर निकालना, ब्लड शुगर बढ़ाना और आपको दिन भर की चुनौतियों के लिए अलर्ट करना है. समस्या तब होती है, जब यह स्तर सामान्य से अधिक बना रहता है, जिससे सुबह-सुबह घबराहट महसूस होने लगती है. सुबह स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ा कारण है अधूरी नींद या नींद की खराब क्वालिटी. जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह थकान से लड़ने के लिए अधिक कोर्टिसोल पैदा करता है. इसके अलावा रात के समय भारी भोजन करना या सोने से ठीक पहले मोबाइल स्क्रीन का उपयोग करना भी शरीर की सर्केडियन रिदम को बिगाड़ देता है. मनोवैज्ञानिक रूप से अगर आप रात को ही अगले दिन के कार्यों को लेकर चिंतित होकर सोते हैं, तो ब्रेन सुबह होते ही फाइट या फ्लाइट मोड एक्टिव कर देता है. इससे आपकी बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आजकल अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वे आंख खुलते ही सबसे पहले अपना स्मार्टफोन चेक करते हैं. सोशल मीडिया, ईमेल और नोटिफिकेशंस ब्रेन को तुरंत हाइपर-अलर्ट मोड में डाल देते हैं. यह आदत कॉर्टिसोल के स्तर को अचानक स्पाइक कर देती है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे जागने का समय नहीं मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह के पहले एक घंटे में डिजिटल दुनिया से दूरी बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है. तनाव हार्मोन को संतुलित करने का सबसे प्रभावी तरीका एक हेल्दी मॉर्निंग रूटीन है. जागने के बाद कम से कम 10 से 15 मिनट के लिए गहरी सांस लें या मेडिटेशन करें. यह पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जो कोर्टिसोल के प्रभाव को कम कर शरीर को शांति का अनुभव कराता है. सुबह की हल्की धूप के संपर्क में आने से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और प्राकृतिक रूप से कोर्टिसोल को संतुलित करता है. रात भर की नींद के बाद हमारा शरीर डिहाइड्रेटेड होता है, जो तनाव हार्मोन को बढ़ा सकता है. सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीना मेटाबॉलिज्म को सुचारू करता है और स्ट्रेस लेवल को कम करने में मदद करता है. सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से करने के बजाय प्रोटीन युक्त नाश्ते से करें. खाली पेट कैफीन का सेवन कोर्टिसोल को और अधिक बढ़ा सकता है, इसलिए कॉफी का सेवन जागने के कम से कम 90 मिनट बाद करना सबसे बेहतर माना जाता है. हल्की एक्सरसाइज या योगासन सुबह के तनाव को कम करने में जादुई भूमिका निभाते हैं. शारीरिक गतिविधि से शरीर में एंडोर्फिन निकलते हैं, जिन्हें फील-गुड हार्मोन कहा जाता है. साथ ही अगले दिन के तनाव को कम करने के लिए रात को ही अपनी टू-डू लिस्ट तैयार कर लें और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें. जब आप मानसिक रूप से व्यवस्थित होते हैं और आपका शरीर पूरी तरह आराम कर चुका होता है. इससे सुबह का कॉर्टिसोल स्तर आपको परेशान करने के बजाय दिन भर एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद करता है.
लोकसभा अध्यक्ष ने 64 पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स बनाए:हर ग्रुप में एक लीडर समेत 11 सांसद; फ्रांस में थरूर, जापान में अखिलेश यादव नेतृत्व करेंगे

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को 64 देशों के साथ पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स (PFG) का गठन किया है। इन ग्रुप्स का मकसद दूसरे देशों के साथ संसदीय कूटनीति को मजबूत करना और वैश्विक मंच पर भारत की संसद की एकजुट लोकतांत्रिक आवाज पेश करना है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद PM मोदी ने भारत और अन्य देशों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए PFG बनाने का प्रस्ताव दिया था। अब लोकसभा अध्यक्ष ने इसका गठन किया है। 64 ग्रुप्स में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 704 सांसद हैं। हर ग्रुप में एक लीडर और 10 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के सबसे ज्यादा 30 ग्रुप लीडर हैं। कांग्रेस के 10, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 3-3 सांसद ग्रुप लीडर बनाए गए हैं। भाजपा की तरफ से ग्रुप लीडर्स में हेमा मालिनी, मनोज तिवारी, निशिकांत दूबे जैसे बड़े नाम शामिल हैं। कांग्रेस से शशि थरूर, TMC से अभिषेक बनर्जी और AIMIM चीफ असदुद्दीन औवेसी भी ग्रुप लीडर बनाए गए हैं। हालांकि, PFG के सदस्य कैसे काम करेंगे, अभी इसकी औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है। ऑपरेशन सिंदूर : 59 सदस्यों का डेलिगेशन 33 देशों में गया था केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनियाभर में भारत का पक्ष रखने के लिए 17 मई 2025 को 59 सदस्यों वाले डेलिगेशन की घोषणा की थी। इसमें 51 नेता और 8 राजदूत थे। NDA के 31 और 20 दूसरे दलों के नेता थे, जिसमें 3 कांग्रेस नेता भी थे। ये डेलिगेशन दुनिया के 33 देशों, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य देशों में गया और वहां ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का पक्ष रखा। इस डेलिगेशन को 7 ग्रुप में बांटा गया था। हर ग्रुप में एक सांसद को लीडर बनाया गया। प्रत्येक ग्रुप 8 से 9 सदस्य थे। इनमें 6-7 सांसद, सीनियर लीडर (पूर्व मंत्री) और राजदूत शामिल थे। 7 डेलिगेशन ने दुनिया को 5 संदेश दिए आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस : इसमें बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकी गुटों और उनके ढांचों के खिलाफ था। आतंकी अड्डों को नपी-तुली कार्रवाई में निशाना बनाया गया। पाक सेना ने इसे खुद के खिलाफ हमला माना और पलटवार किया। पाक आतंक का समर्थक : सांसद कुछ सबूत लेकर गए, जिनमें उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले में पाक समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका थी। इससे पहले हुए हमलों का भी पूरा चिट्ठा सांसद लेकर गए थे। भारत जिम्मेदार और संयमित : भारत ने सैन्य कार्रवाई में भी जिम्मेदारी और संयम का परिचय दिया। यह सुनिश्चित किया कि पाक के किसी निर्दोष नागरिक की जान न जाए। पाक ने कार्रवाई रोकने का जब आग्रह किया तो भारत ने उसे तत्परता से स्वीकारा। आतंक के खिलाफ विश्व एकजुट हो : सांसद ने इन देशों से आतंकवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने और इससे निपटने के लिए सहयोग व समर्थन की मांग की। अपील की कि भारत-पाक के विवाद को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखें। पाक को लेकर हमारी नीति : यह बताया कि पाक के खिलाफ भारत ने अपना बदला हुआ दृष्टिकोण उजागर किया है। भारत सीमा पार से पैदा होने वाले खतरे को लेकर उदासीन रहने के बजाए प्रो-एक्टिव रवैया अपनाएगा और आतंकी हमलावरों को पहले ही निष्क्रय करेगा। ——————— ये खबर भी पढ़ें… केरल का नाम अब केरलम, कैबिनेट की मंजूरी: सेवातीर्थ में पहली मीटिंग; रेल-मेट्रो और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए ₹12,236 करोड़ मंजूर पीएम नरेंद्र मोदी के नए ऑफिस सेवा तीर्थ में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। इसमें कुल 12,236 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तीन रेल प्रोजेक्ट समेत कुल 8 फैसले लिए हैं। बैठक में पावर सेक्टर में सुधारों पर पॉलिसी से जुड़े फैसले हुए और केरल सरकार के राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पूरी खबर पढ़ें…
स्टीव बकनर ने माना- तेंदुलकर को LBW देना गलती थी:22 साल बाद कहा- आज भी लोग पूछते हैं आउट क्यों दिया; गाबा टेस्ट में आउट दिया था

दिग्गज अंपायर स्टीव बकनर ने सचिन तेंदुलकर को गाबा टेस्ट में आउट होने पर मना है कि उनसे गलती हो गई थी। वेस्टइंडीज के पूर्व अंपायर ने मैच के 22 साल बाद कहा कि आज भी लोग उनसे इसके बारे में सवाल करते हैं। दरअसल, 2003-04 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर स्टीव बकनर ने सचिन तेंदुलकर को LBW कर दिया। इस पर विवाद हो गया था। वह मैच ड्रॉ हो गया था। 4 मैचों की सीरीज भी 1-1 से बराबरी पर रही थी। 3 रन पर आउट हुए थे तेंदुलकर पहले टेस्ट में सचिन तेंदुलकर 3 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी की गेंद को उन्होंने छोड़ने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके पैड पर लगी। जोरदार अपील के बाद स्टीव बकनर ने उन्हें LBW आउट दे दिया। बाद में टीवी रीप्ले में स्पष्ट हुआ कि गेंद स्टंप के ऊपर से जा रही थी। इंटरव्यू में बोले- ‘गलती थी, स्वीकार कर लिया’ वेस्ट इंडीज क्रिकेट अंपायर्स एसोसिएशन को दिए इंटरव्यू में बकनर ने कहा- ‘सचिन तेंदुलकर को LBW देना मेरी गलती थी। आज तक लोग पूछते हैं कि मैंने उन्हें आउट क्यों दिया। जिंदगी में गलतियां होती हैं, मैंने इसे स्वीकार कर लिया है।’ कमेंट्री बॉक्स में भी हुई थी आलोचना उस समय कमेंट्री कर रहे टोनी ग्रेग ने इस फैसले को ‘भयानक’ करार दिया था। क्रिकेट जगत में भी इस निर्णय की काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, मैच ड्रॉ रहा था और भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने 144 रन की पारी खेली थी। 2005 में भी विवादित फैसला यह पहला मौका नहीं था जब बकनर ने तेंदुलकर के खिलाफ विवादित फैसला दिया। 2005 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उन्होंने सचिन को अब्दुल रज्जाक की गेंद पर कैच आउट दे दिया था। रीप्ले में बैट और बॉल के बीच साफ गैप दिखा था, जबकि अपील भी जोरदार नहीं थी। तेंदुलकर ने 2024 में किया था हल्का मजाक 2024 में एक फैन इंटरेक्शन के दौरान जब तेंदुलकर से बकनर के साथ रिश्ते पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने हल्के अंदाज में कहा था- ‘जब मैं बल्लेबाजी करूं तो उन्हें बॉक्सिंग ग्लव्स पहना दो, ताकि वह उंगली न उठा सकें।’ ————————————— क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————————————————- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… टी-20 वर्ल्डकप मैच में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड बना, पॉवेल ने सिकंदर रजा का माथा चूमा टी-20 वर्ल्ड कप के चौथे सुपर-8 मैच में वेस्टइंडीज ने सोमवार को जिम्बाब्वे पर 107 रन की जीत दर्ज की। मुंबई के वनखड़े स्टेडियम में जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। वेस्टइंडीज ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 254 रन बनाए। 255 रन का टारगेट चेज कर रही जिम्बाब्वे 17.4 ओवर में 147 रन पर ऑलआउट हो गई। 19 बॉल पर फिफ्टी लगाने वाले शिमरोन हेटमायर प्लेयर ऑफ द मैच रहे। पढ़ें पूरी खबर
स्टीव बकनर ने माना- तेंदुलकर को LBW देना गलती थी:22 साल बाद कहा- आज भी लोग पूछते हैं आउट क्यों दिया; गाबा टेस्ट में आउट दिया था

अंपायर स्टीव बकनर ने सचिन तेंदुलकर को गाबा टेस्ट में आउट होने पर माना है कि उनसे गलती हो गई थी। वेस्टइंडीज के पूर्व अंपायर ने मैच के 22 साल बाद कहा कि आज भी लोग उनसे इसके बारे में सवाल करते हैं। दरअसल, 2003-04 में भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर स्टीव बकनर ने सचिन तेंदुलकर को LBW आउट दिया था। यह मैच ड्रॉ हो गया था। 4 मैचों की सीरीज भी 1-1 से बराबरी पर रही थी। 3 रन पर आउट हुए थे तेंदुलकर पहले टेस्ट में सचिन तेंदुलकर 3 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज जेसन गिलेस्पी की गेंद को उन्होंने छोड़ने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके पैड पर लगी। जोरदार अपील के बाद स्टीव बकनर ने उन्हें LBW आउट दे दिया। बाद में टीवी रीप्ले में स्पष्ट हुआ कि गेंद स्टंप के ऊपर से जा रही थी। इंटरव्यू में बोले- ‘गलती थी, स्वीकार कर लिया’ वेस्ट इंडीज क्रिकेट अंपायर्स एसोसिएशन को दिए इंटरव्यू में बकनर ने कहा- ‘सचिन तेंदुलकर को LBW देना मेरी गलती थी। आज तक लोग पूछते हैं कि मैंने उन्हें आउट क्यों दिया। जिंदगी में गलतियां होती हैं, मैंने इसे स्वीकार कर लिया है।’ उस समय कमेंट्री कर रहे टोनी ग्रेग ने इस फैसले को ‘भयानक’ करार दिया था। क्रिकेट जगत में भी इस निर्णय की काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, मैच ड्रॉ रहा था और भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने 144 रन की पारी खेली थी। 2005 में भी विवादित फैसला यह पहला मौका नहीं था जब बकनर ने तेंदुलकर के खिलाफ विवादित फैसला दिया। 2005 में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उन्होंने सचिन को अब्दुल रज्जाक की गेंद पर कैच आउट दे दिया था। रीप्ले में बैट और बॉल के बीच साफ गैप दिखा था, जबकि अपील भी जोरदार नहीं थी। 2024 में एक फैन इंटरेक्शन के दौरान जब तेंदुलकर से बकनर के साथ रिश्ते पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने हल्के अंदाज में कहा था- ‘जब मैं बल्लेबाजी करूं तो उन्हें बॉक्सिंग ग्लव्स पहना दो, ताकि वह उंगली न उठा सकें।’ ————————————— क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ———————————————————- क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… टी-20 वर्ल्डकप मैच में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड बना, पॉवेल ने सिकंदर रजा का माथा चूमा टी-20 वर्ल्ड कप के चौथे सुपर-8 मैच में वेस्टइंडीज ने सोमवार को जिम्बाब्वे पर 107 रन की जीत दर्ज की। मुंबई के वनखड़े स्टेडियम में जिम्बाब्वे ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। वेस्टइंडीज ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 254 रन बनाए। 255 रन का टारगेट चेज कर रही जिम्बाब्वे 17.4 ओवर में 147 रन पर ऑलआउट हो गई। 19 बॉल पर फिफ्टी लगाने वाले शिमरोन हेटमायर प्लेयर ऑफ द मैच रहे। पढ़ें पूरी खबर









