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Why is Stress High in the Morning | Main Causes and Ways to Lower Cortisol After Waking Up | सुबह उठते ही क्यों बढ़ जाता है तनाव हार्मोन | जानिए स्ट्रेस हार्मोन कम करने के तरीके

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Ways to Lower Cortisol Hormone: सुबह उठने के बाद अक्सर लोगों को बिना किसी कारण के घबराहट, बेचैनी या काम का भारी दबाव महसूस होने लगता है. कई लोग इसे मंडे ब्लूज या काम का तनाव मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल की भाषा में इसे कोर्टिसोल अवेकनिंग रिस्पॉन्स कहा जाता है. सुबह के समय हमारे शरीर में तनाव पैदा करने वाला हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर अपने पीक पर होता है. यह एक प्राकृतिक बायोलॉजिकल प्रोसेस है. हालांकि जब यह हार्मोन लगातार बढ़ा हुआ रहता है, तो यह हमारी मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है. अब सवाल उठता है कि सुबह-सुबह स्ट्रेस हार्मोन क्यों बढ़ता है?

यूएस के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्टिसोल हमारे शरीर का मुख्य स्ट्रेस हार्मोन है, जिसे एड्रिनल ग्रंथियां रिलीज करती हैं. सुबह के समय इसका बढ़ना वास्तव में शरीर की एक रक्षात्मक प्रणाली है. जागने के पहले 30 से 45 मिनट के भीतर शरीर में कोर्टिसोल का स्तर लगभग 38% से 75% तक बढ़ जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य शरीर को नींद की अवस्था से बाहर निकालना, ब्लड शुगर बढ़ाना और आपको दिन भर की चुनौतियों के लिए अलर्ट करना है. समस्या तब होती है, जब यह स्तर सामान्य से अधिक बना रहता है, जिससे सुबह-सुबह घबराहट महसूस होने लगती है.

सुबह स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ा कारण है अधूरी नींद या नींद की खराब क्वालिटी. जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह थकान से लड़ने के लिए अधिक कोर्टिसोल पैदा करता है. इसके अलावा रात के समय भारी भोजन करना या सोने से ठीक पहले मोबाइल स्क्रीन का उपयोग करना भी शरीर की सर्केडियन रिदम को बिगाड़ देता है. मनोवैज्ञानिक रूप से अगर आप रात को ही अगले दिन के कार्यों को लेकर चिंतित होकर सोते हैं, तो ब्रेन सुबह होते ही फाइट या फ्लाइट मोड एक्टिव कर देता है. इससे आपकी बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

आजकल अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वे आंख खुलते ही सबसे पहले अपना स्मार्टफोन चेक करते हैं. सोशल मीडिया, ईमेल और नोटिफिकेशंस ब्रेन को तुरंत हाइपर-अलर्ट मोड में डाल देते हैं. यह आदत कॉर्टिसोल के स्तर को अचानक स्पाइक कर देती है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे जागने का समय नहीं मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह के पहले एक घंटे में डिजिटल दुनिया से दूरी बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है.

तनाव हार्मोन को संतुलित करने का सबसे प्रभावी तरीका एक हेल्दी मॉर्निंग रूटीन है. जागने के बाद कम से कम 10 से 15 मिनट के लिए गहरी सांस लें या मेडिटेशन करें. यह पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जो कोर्टिसोल के प्रभाव को कम कर शरीर को शांति का अनुभव कराता है. सुबह की हल्की धूप के संपर्क में आने से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और प्राकृतिक रूप से कोर्टिसोल को संतुलित करता है.

रात भर की नींद के बाद हमारा शरीर डिहाइड्रेटेड होता है, जो तनाव हार्मोन को बढ़ा सकता है. सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीना मेटाबॉलिज्म को सुचारू करता है और स्ट्रेस लेवल को कम करने में मदद करता है. सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से करने के बजाय प्रोटीन युक्त नाश्ते से करें. खाली पेट कैफीन का सेवन कोर्टिसोल को और अधिक बढ़ा सकता है, इसलिए कॉफी का सेवन जागने के कम से कम 90 मिनट बाद करना सबसे बेहतर माना जाता है.

हल्की एक्सरसाइज या योगासन सुबह के तनाव को कम करने में जादुई भूमिका निभाते हैं. शारीरिक गतिविधि से शरीर में एंडोर्फिन निकलते हैं, जिन्हें फील-गुड हार्मोन कहा जाता है. साथ ही अगले दिन के तनाव को कम करने के लिए रात को ही अपनी टू-डू लिस्ट तैयार कर लें और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें. जब आप मानसिक रूप से व्यवस्थित होते हैं और आपका शरीर पूरी तरह आराम कर चुका होता है. इससे सुबह का कॉर्टिसोल स्तर आपको परेशान करने के बजाय दिन भर एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद करता है.

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यूएस के नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्टिसोल हमारे शरीर का मुख्य स्ट्रेस हार्मोन है, जिसे एड्रिनल ग्रंथियां रिलीज करती हैं. सुबह के समय इसका बढ़ना वास्तव में शरीर की एक रक्षात्मक प्रणाली है. जागने के पहले 30 से 45 मिनट के भीतर शरीर में कोर्टिसोल का स्तर लगभग 38% से 75% तक बढ़ जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य शरीर को नींद की अवस्था से बाहर निकालना, ब्लड शुगर बढ़ाना और आपको दिन भर की चुनौतियों के लिए अलर्ट करना है. समस्या तब होती है, जब यह स्तर सामान्य से अधिक बना रहता है, जिससे सुबह-सुबह घबराहट महसूस होने लगती है.

सुबह स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ा कारण है अधूरी नींद या नींद की खराब क्वालिटी. जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह थकान से लड़ने के लिए अधिक कोर्टिसोल पैदा करता है. इसके अलावा रात के समय भारी भोजन करना या सोने से ठीक पहले मोबाइल स्क्रीन का उपयोग करना भी शरीर की सर्केडियन रिदम को बिगाड़ देता है. मनोवैज्ञानिक रूप से अगर आप रात को ही अगले दिन के कार्यों को लेकर चिंतित होकर सोते हैं, तो ब्रेन सुबह होते ही फाइट या फ्लाइट मोड एक्टिव कर देता है. इससे आपकी बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

आजकल अधिकांश लोगों की आदत होती है कि वे आंख खुलते ही सबसे पहले अपना स्मार्टफोन चेक करते हैं. सोशल मीडिया, ईमेल और नोटिफिकेशंस ब्रेन को तुरंत हाइपर-अलर्ट मोड में डाल देते हैं. यह आदत कॉर्टिसोल के स्तर को अचानक स्पाइक कर देती है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे जागने का समय नहीं मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह के पहले एक घंटे में डिजिटल दुनिया से दूरी बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है.

तनाव हार्मोन को संतुलित करने का सबसे प्रभावी तरीका एक हेल्दी मॉर्निंग रूटीन है. जागने के बाद कम से कम 10 से 15 मिनट के लिए गहरी सांस लें या मेडिटेशन करें. यह पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जो कोर्टिसोल के प्रभाव को कम कर शरीर को शांति का अनुभव कराता है. सुबह की हल्की धूप के संपर्क में आने से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन बढ़ता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और प्राकृतिक रूप से कोर्टिसोल को संतुलित करता है.

रात भर की नींद के बाद हमारा शरीर डिहाइड्रेटेड होता है, जो तनाव हार्मोन को बढ़ा सकता है. सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीना मेटाबॉलिज्म को सुचारू करता है और स्ट्रेस लेवल को कम करने में मदद करता है. सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से करने के बजाय प्रोटीन युक्त नाश्ते से करें. खाली पेट कैफीन का सेवन कोर्टिसोल को और अधिक बढ़ा सकता है, इसलिए कॉफी का सेवन जागने के कम से कम 90 मिनट बाद करना सबसे बेहतर माना जाता है.

हल्की एक्सरसाइज या योगासन सुबह के तनाव को कम करने में जादुई भूमिका निभाते हैं. शारीरिक गतिविधि से शरीर में एंडोर्फिन निकलते हैं, जिन्हें फील-गुड हार्मोन कहा जाता है. साथ ही अगले दिन के तनाव को कम करने के लिए रात को ही अपनी टू-डू लिस्ट तैयार कर लें और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें. जब आप मानसिक रूप से व्यवस्थित होते हैं और आपका शरीर पूरी तरह आराम कर चुका होता है. इससे सुबह का कॉर्टिसोल स्तर आपको परेशान करने के बजाय दिन भर एनर्जेटिक बनाए रखने में मदद करता है.

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