Tuesday, 14 Apr 2026 | 11:40 PM

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Canada PM Visit India | Trade Deal Focus; Crime Statement

Canada PM Visit India | Trade Deal Focus; Crime Statement

नई दिल्ली/ओटावा20 मिनट पहले कॉपी लिंक कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज 4 दिन के दौरे पर भारत पर पहुंच रहे हैं। इस दौरे का मकसद भारत और कनाडा के बीच व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नए साझेदारी को मजबूत करने पर फोकस करना है। प्रधानमंत्री के तौर पर मार्क कार्नी का यह पहला भारत दौरा है। कनाडा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कार्नी मुंबई में बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे। इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में निवेश पर चर्चा होगी। कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा के अधिकारी अब भारत पर लगाए गए कुछ गंभीर आरोपों से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। पहले कनाडा ने आरोप लगाया था कि भारत उसकी जमीन पर हस्तक्षेप कर रहा है और सीमापार दबाव जैसी गतिविधियों में शामिल है। सीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी ने कहा कि अगर कनाडा को लगता कि भारत उसकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल दे रहा है, तो प्रधानमंत्री भारत की यात्रा नहीं करते। दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग में पिछले साल G20 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात हुई थी। 2 मार्च को नई दिल्ली में मोदी से मिलेंगे कार्नी कार्नी 1 मार्च को नई दिल्ली पहुंचेंगे और 2 मार्च को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसका मुख्य एजेंडा में कंप्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) की वार्ताओं को शुरू करना शामिल है, जो लंबे समय से रुकी हुई है। इसके अलावा, सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर चर्चा होगी। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद कार्नी ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा पर रवाना होंगे। पूरा दौरा 27 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक चलेगा। इसका यात्रा का मकसद कनाडा का अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम करना और नए व्यापारिक रास्ते खोलना है। भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। क्लीन एनर्जी और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग की संभावना इस दौरे में एनर्जी सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश यूरेनियम सप्लाई समझौते पर बात कर रहे हैं, जिससे भारत के न्यूक्लिय पावर प्लांट को ईंधन मिल सके। इसके अलावा क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) और एनर्जी ट्रांजिशन (ऊर्जा परिवर्तन ) के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों पर भी सहयोग बढ़ाने की चर्चा है। कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, जबकि भारत को तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए भरोसेमंद और जलवायु-अनुकूल ऊर्जा स्रोतों की जरूरत है। इसलिए यह क्षेत्र दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है। 2024 में कनाडा के कुल ऊर्जा निर्यात में भारत को केवल 761.5 मिलियन डॉलर का हिस्सा मिला। जबकि भारत से आयात 206 मिलियन डॉलर था, लेकिन अब इसे बढ़ाने पर जोर है। यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को रीसेट करेगा भारत के कनाडा में उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने ओटावा में एक इंटरव्यू में बताया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों को पूरी तरह रीसेट करेगी और नए व्यापार के बड़े अवसर खोलेगी। यूरेनियम सप्लाई डील: यात्रा के दौरान लगभग 10-साल के लिए 2.8 अरब कनाडाई डॉलर का यूरेनियम सौदा होने की संभावना है, जो भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा। यह समझौता देश के ऊर्जा और नागरिक न्यूक्लियर कार्यक्रम को समर्थन देगा। ऊर्जा सहयोग: भारत भारी क्रूड ऑयल, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और अन्य ऊर्जा उत्पादों में कनाडा के साथ सहयोग बढ़ाने में रुचि रखता है। कनाडा भी अमेरिका पर अपनी ऊर्जा निर्यात निर्भरता कम करने के लिए भारत जैसे विविध साझेदार ढूँढ रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा: दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने पहले ही उच्च-स्तरीय वार्ता की है, जिसमें कूटनीतिक और कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करने पर सहमति बनी है, ताकि सुरक्षा सहयोग को मजबूती दी जा सके। तकनीकी, शिक्षा और संस्कृति: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, शोध एवं शिक्षा में साझेदारी पर समझौते की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार के अलावा सामाजिक-वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग भी बढ़ेगा। व्यापार और निवेश वार्ता: बातचीत में आर्थिक साझेदारी समझौता(CEPA) को आधिकारिक रूप से शुरू करने की तैयारी है, जो वस्त्र, सेवाएं, निवेश, कृषि और डिजिटल वाणिज्य जैसे क्षेत्रों को कवर करेगा। पिछले साल कार्नी और मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी, जिसमें दोनों ने CEPA को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों का लक्ष्य है कि यह व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता अगले लगभग 12 महीनों के भीतर पूरा हो सके, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक लगभग 50-70 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। खास डील्स की उम्मीद: भारत कनाडा के भारी कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदना चाहता है। साथ ही, पाइपलाइन और टर्मिनल जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की बात चल रही है। कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने कहा कि भारत-कनाडा अपने रिश्तों को सुधारने पर काम कर रहे हैं। भारत-कनाडा के बीच तनाव एक साल पहले संबंध बहुत खराब थे। पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो ने 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने का आरोप लगाया था। 2024 में कनाडा ने छह भारतीय अधिकारियों को निकाला और आरोप लगाया कि भारत सरकार से जुड़े

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।

कंप्यूटर लैब में सिस्टम बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल:RDVV के छात्र बोले- सालों से ऐसा हो रहा; कांग्रेस विधायक ने विधासभा में उठाया मुद्दा

कंप्यूटर लैब में सिस्टम बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल:RDVV के छात्र बोले- सालों से ऐसा हो रहा; कांग्रेस विधायक ने विधासभा में उठाया मुद्दा

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग में गुरुवार को डिजिटल फॉरेंसिक थर्ड सेमेस्टर का फाइनल वाइवा और प्रैक्टिकल आयोजित हुआ, जिसके लिए कंप्यूटर आवश्यक थे। लेकिन छात्रों का आरोप है कि एक घंटे की लिखित परीक्षा के बाद जब उन्होंने प्रैक्टिकल के लिए कंप्यूटर मांगे तो शिक्षकों ने कह दिया कि उनका प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है। इस पर छात्र कक्षा से बाहर निकल आए और नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तीन सेमेस्टर में एक बार भी कंप्यूटर ठीक से चालू नहीं हुए, जबकि हर साल हजारों रुपये फीस ली जाती है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। बिना लैब के तकनीकी पढ़ाई पर सवाल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन (UICSA), जहां BCA और MCA जैसे अहम तकनीकी कोर्स संचालित होते हैं, वहां की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। AICTE से मान्यता प्राप्त इन पाठ्यक्रमों में करीब 150 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उन्हें बुनियादी लैब सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और वास्तविक प्रयोगशाला अभ्यास के बिना ही उन्हें डिग्री लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप दैनिक भास्कर की टीम को सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर देखा गया कि 23 छात्र-छात्राएं कक्षा में वाइवा परीक्षा दे रहे थे। करीब एक घंटे बाद उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है और अंक परिणाम में जोड़ दिए जाएंगे। एमसीए थर्ड सेमेस्टर की छात्रा रिषिका नामदेव ने बताया कि डिजिटल फॉरेंसिक का फाइनल एग्जाम था, जिसमें वाइवा और प्रैक्टिकल दोनों होना था, लेकिन किसी भी छात्र को कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध नहीं कराया गया। कक्षा में लैब मौजूद है और लगभग 30 सिस्टम रखे हैं, पर छात्रों का कहना है कि एक भी कंप्यूटर चालू हालत में नहीं है। रिषिका के मुताबिक प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए कंप्यूटर संचालन का ज्ञान जरूरी होता है, लेकिन तीन सेमेस्टर गुजरने के बाद भी छात्रों को लैब में काम करने का मौका नहीं मिला। उनका कहना है कि एचओडी से लेकर वीसी और रजिस्ट्रार तक से कई बार सिस्टम उपलब्ध कराने की मांग की गई, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि शिक्षकों ने अपनी ओर से कुछ मदद करते हुए लैपटॉप पर सीमित जानकारी दी, लेकिन छात्रों के अनुसार वह पर्याप्त नहीं थी। 17 हजार फीस, पर पढ़ाई शून्य अखिलेश मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि हर छात्र से प्रति सेमेस्टर करीब 17 हजार रुपए फीस ली जाती है और तीन साल में लगभग 54 हजार रुपए जमा कर चुके हैं, लेकिन पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब है। उनका कहना है कि छात्र हर साल पास तो हो जाते हैं, मगर वास्तविक ज्ञान नहीं मिल रहा, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। छात्रों के अनुसार फाइनल परीक्षा के दिन भी किसी को लैब में नहीं ले जाया गया। उनका दावा है कि विभाग शुरू होने के बाद से ही सिस्टम बंद पड़े हैं और इसी तरह औपचारिक रूप से प्रैक्टिकल कराकर छात्रों को पास कर दिया जाता है, जबकि कंप्यूटर का व्यावहारिक अनुभव उन्हें नहीं मिल पाता। नियामक मानकों पर उठे सवाल AICTE के नियमों के मुताबिक तकनीकी पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों में पर्याप्त आधुनिक कंप्यूटर, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ होना अनिवार्य है। निर्धारित मानक के अनुसार स्नातक स्तर पर 10 छात्रों पर एक कंप्यूटर और स्नातकोत्तर स्तर पर 4 छात्रों पर एक कंप्यूटर उपलब्ध होना चाहिए। डिजिटल युग में विडंबना एक ओर देश डिजिटल इंडिया और आईटी क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं विश्वविद्यालय में डिजिटल फॉरेंसिक जैसे विषय का प्रैक्टिकल बिना कंप्यूटर सम्पन्न होना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विडंबना को उजागर करता है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के नियमानुसार लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। NAAC की पीयर टीम द्वारा बार-बार आधुनिक लैब्स और अपडेटेड कंप्यूटरों की जरूरत जताने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया! क्या यह प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से धोखाधड़ी नहीं है ?। टैंडर जारी कर दिया है बिना सिस्टम के छात्रों ने वाइवा के साथ प्रैक्टिकल दे दिया। मामले पर कुलसचिव डा सुरेंद्र सिंह का कहा कि सिस्टम को और अधिक बेहतर करने के लिए पीएम उषा योजना के तहत 200 से अधिक कंप्यूटर खरीदे जा रहे है, जिसका टैंडर भी जारी कर दिया है। अब किसी भी छात्र को सिस्टम के चलते परेशानी नहीं होगी। विधानसभा में उठा मुद्दा पूरे मामले की गूंज विधानसभा तक पहुंच चुकी है। जबलपुर पूर्व के कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सदन में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के UICSA विभाग में उपलब्ध कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों की स्थिति को लेकर प्रश्न उठाया था। उन्होंने सरकार से विभाग में संचालित बीसीए और एमसीए पाठ्यक्रमों के लिए उपलब्ध लैब, कंप्यूटर एवं अन्य तकनीकी सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने BCA MCA के लिए 25 कंप्यूटर एवं संसाधनों की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया जारी होने की बात कही, लेकिन जमीनी हकीकत और छात्रों के आरोपों ने इस जवाब पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुल टूटने पर जागे अफसर…:अब 15 साल पुराने आरओबी और ओबी की होगी जांच

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बीते दिनों भोपाल-जबलपुर हाइवे पर टूट पुल के बाद अब अफसरों की नींद टूटी है। मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) और लोक निर्माण विभाग के सभी रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) और ओवर ब्रिज (ओबी) की जांच कराई जा रही है। इस जांच में 15 साल पहले बने ये सभी पुल शामिल किए गए हैं और उनका कंडीशनल सर्वे होगा। इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मेंटेनेंस एवं निर्माण की लिस्ट फाइनल होगी। साथ ही ये तय किया जाएगा कि कौन से पुल मेंटेनेंस से सुधर जाएंगे और किन पुलों पर सिर्फ मेंटेनेंस से काम नहीं बन सकेगा। ग्वालियर चंबल संभाग के 8 जिलों में भी इन विभागों के आरओबी एवं ओबी का सर्वे हो रहा है। ज्ञात रहे बीते दिनों भोपाल-जबलपुर हाइवे पर 400 करोड़ रुपए की लागत का पुल गिर गया था। जो कि कुछ महीने पहले भी क्षतिग्रस्त हुआ था। ग्वालियर के आठ पुलों की भी जांच होगी ग्वालियर के 8 पुलों की भी जांच होगी। जिसमें सिंध नदी पर करैरा-भितरवार, चाचूड नदी पर डबरा-जंगीपुरा, पार्वती नदी पर करैरा-भितरवार, बिरला नगर रेल ओवर ब्रिज, नोन नदी पर देवरा-छिरेनता, नोन नदी पर चिनौर-करहिया, सिंध नदी पर करियावटी-बडगोर और मेघरा नाला पर डबरा-चिनोर रोड पर बना पुल शामिल है। इनके अलावा भिंड, मुरैना, दतिया, गुना, अशोकनगर, श्योपुर और शिवपुरी के 24 पुल की भी जांच हो रही है। डबरा आरओबी जर्जर, भारी वाहन रोके, बाकी निकाले डबरा में एमपीआरडीसी का आरओबी काफी जर्जर हालत में है। जिसकी हालत देखते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने 7 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर भारी वाहनों (डंपर, ट्रक, ट्रैक्टर-टॉली) के आवागमन पर रोक लगा दी। लेकिन कार व छोटे लोडिंग वाहन यहां से आ-जा रहे हैं। वहीं यहां फिर से पुल निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो गई है। मगर इसका एलाइमेंट फाइनल नहीं हो पा रहा।

सूरज बड़जात्या बोले- अच्छी कहानी अपनी जगह बना लेती है:एक्शन के शोर के बीच ‘संगमरमर’ में पारिवारिक मूल्यों और लंबे प्रेम सफर की कहानी

सूरज बड़जात्या बोले- अच्छी कहानी अपनी जगह बना लेती है:एक्शन के शोर के बीच ‘संगमरमर’ में पारिवारिक मूल्यों और लंबे प्रेम सफर की कहानी

सूरज बड़जात्या एक बार फिर प्रेम और पारिवारिक मूल्यों की अपनी विशिष्ट दुनिया के साथ दर्शकों के सामने हैं। अपने नए शो ‘संगमरमर’ के जरिए वह बदलते समय में रिश्तों की गहराई और भावनाओं की निरंतरता को नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं। 25 वर्षों में फैली यह प्रेम यात्रा सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं, बल्कि उन संवेदनाओं का विस्तार है जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं। जियो स्टूडियोज के सहयोग से बनी यह श्रृंखला टेलीविजन और ओटीटी के बीच एक सेतु बनाने की कोशिश भी है, जहां पारिवारिक दर्शक और नई पीढ़ी एक साथ जुड़ सकें। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में सूरज बड़जात्या ने प्रेम की बदलती परिभाषाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका मानना है कि दौर चाहे कोई भी हो, हर इंसान के भीतर सच्चे प्रेम और सम्मान की चाह समान रहती है। एक्शन और शोर-शराबे के बीच भी भावनात्मक कहानियों की अपनी जगह होती है,बशर्ते उनमें सच्चाई और विश्वास हो। बड़जात्या का विश्वास है कि अच्छी कहानी अंततः अपना रास्ता खुद बना लेती है और परिवार संग देखे जाने वाली फिल्मों की मांग आज भी कायम है। पेश है सूरज बड़जात्या से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: ‘संगमरमर’ आपके लिए कितनी खास है? इसमें आपका क्या जुड़ाव है? जवाब: ‘संगमरमर’ मेरे बहुत करीब है, क्योंकि यह मेरे पिता की पसंदीदा कहानियों में से एक रही है। मैं जियो स्टूडियोज का आभारी हूं कि वे हमारे पास आए और उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा प्रोजेक्ट बनाना है जो टेलीविजन और ओटीटी के बीच सेतु का काम करे। ऐसा कंटेंट जो दोनों माध्यमों पर समान रूप से चले और लोगों को जोड़ सके। इसके बाद हम सब बैठे, लेखिका रजनीता शर्मा जी जुड़ीं और करीब आठ-नौ महीनों तक इस कहानी को गढ़ते रहे। यह अमृता और आदित्य की 25 वर्षों की प्रेम-यात्रा है, जो 1998 में आगरा की गलियों से शुरू होती है। अंताक्षरी के बहाने मुलाकात, फिर परिस्थितियों के कारण शादी न हो पाना, और उसके बाद भी साथ निभाते हुए 25 सालों का सफर। इस यात्रा में जन्म है, मृत्यु है, खुशियां हैं, रक्तचाप की परेशानियां हैं, चिंता के दौरे हैं, सब कुछ है। यह एक परतदार प्रेम कहानी है। ‘संगमरमर’ उस रिश्ते की पवित्रता का प्रतीक है, जो समय के साथ फीका नहीं पड़ता। सवाल : आज के दौर में प्रेम की परिभाषा बदल रही है। ऐसे समय में ‘संगमरमर’ कितनी प्रासंगिक है? जवाब: मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर यह इच्छा होती है कि कोई उसे सच्चा प्रेम करे, सम्मान दे और जिसके साथ वह अपने मन की बातें बांट सके। यह आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती। हम सब सपने देखते हैं। अगर प्रेम के सपने खत्म हो जाएं, तो न ‘सैयारा’ चलेगी, न ‘मैंने प्यार किया’, न ‘हम आपके हैं कौन’। लोग बार-बार इन फिल्मों को इसलिए देखते हैं क्योंकि वे प्रेम का सपना दिखाती हैं। आज समाज में अविश्वास और तनाव अधिक है, इसलिए लोग अपने चारों ओर एक सुरक्षा-घेरा बना लेते हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन मूल भावना वही है,प्रेम और भरोसा। ऐसी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि भरोसा करना जरूरी है और प्रेम अब भी प्रासंगिक है। सवाल : आपकी सादगी और मासूमियत आज भी बरकरार है। आप बाहरी शोर से खुद को कैसे अलग रखते हैं? जवाब: यह उम्र के साथ अपने आप होता है। समय सिखा देता है कि अंत में वही चीजें मायने रखती हैं जो सच्ची हैं, बाकी सब अहंकार है। मैं चाहता हूं कि जितना समय है, उसमें और कहानियां बनाऊं, ताकि लोग समझ सकें कि जीवन में रिश्ते ही सबसे महत्वपूर्ण हैं। पति-पत्नी महीनों बात नहीं करते, लेकिन कोई परामर्शदाता आकर समस्या हल नहीं करेगा। उन्हें स्वयं ही पहल करनी होगी। अगर आपने इस दुनिया में एक बच्चे को जन्म दिया है, तो आपको लड़ने का अधिकार नहीं है। जिम्मेदारी और समझदारी जरूरी है। सवाल: आज जब एक्शन और बड़े पैमाने की फिल्में चल रही हैं, तब ‘संगमरमर’ जैसी भावनात्मक कहानी लाना क्या जोखिम नहीं है? जवाब: अच्छी कहानी अपनी जगह खुद बना लेती है। हर एक्शन फिल्म सफल नहीं होती और हर दक्षिण भारतीय फिल्म भी नहीं चलती। जो अच्छी होती है, वही दर्शकों तक पहुंचती है। मुझे एक प्रसंग याद है. अभिनेता डैनी साहब को बी. आर. चोपड़ा जी ने एक फिल्म में छोटा-सा दृश्य दिया था। उन्होंने कहा था कि एक दृश्य काफी है। वही दृश्य उन्हें पहचान दिलाने वाला बना। इसलिए अपनी छाप छोड़ने के लिए एक सशक्त क्षण ही पर्याप्त होता है। मेरी फिल्मों ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘हम साथ-साथ हैं’, ‘विवाह’ को शुरुआत में व्यापारिक दृष्टि से संदेह मिला, लेकिन समय के साथ वे दर्शकों के दिलों में बस गईं। यदि आज भी लोग रविवार को परिवार के साथ तीन-तीन घंटे की फिल्म देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि ऐसी कहानियों की मांग अब भी है। सवाल : ओटीटी मंच पर पारिवारिक और महिला-केन्द्रित विषय लाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा? जवाब:यह एक संघर्ष है, क्योंकि अक्सर माना जाता है कि पुरुष-केन्द्रित विषय ही अधिक चलते हैं। लेकिन जियो और जियो हॉटस्टार ने पूरा विश्वास दिखाया। उन्होंने कहा कि आप वही बनाइए जो बनाना चाहते हैं। हमने कभी यह सोचकर काम नहीं किया कि कितने दर्शक मिलेंगे या कितनी संख्या आएगी। जब संख्या का विचार हावी हो जाता है, तो ईमान डगमगा जाता है। ‘संगमरमर’ पूरी तरह विश्वास और निष्ठा से बनाई गई है। सवाल : आपकी कहानी कहने में संगीत का विशेष स्थान रहा है। ‘संगमरमर’ का संगीत कितना अलग होगा? जवाब: इस बार हमें पूरी स्वतंत्रता मिली। यह सोचकर कोई बंधन नहीं था कि किस क्षेत्र को पसंद आएगा या कौन-सी आवाज युवाओं को आकर्षित करेगी। हमने सीधे जड़ों से जुड़कर काम किया है। एक ओढ़नी का गीत है, जिसे हर्षदीप ने गाया है, वह पूरी तरह लोक-सुगंध से भरा है। होली का गीत है, जिसमें उत्तर भारत की असली होली का रंग और भाषा है। इसमें ‘नदिया के पार’ जैसी सादगी और मिट्टी की खुशबू है। यह प्रेम, रंग और संस्कृति का संपूर्ण मिश्रण है,एक विशुद्ध राजश्री की प्रस्तुति। सवाल: आपके जो चाहने वाले हैं आपकी फिल्मों का वो बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं,

बनभूलपुरा में 'घर खाली कराने’ की खबरों से डर:वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट का ये अंतिम आदेश नहीं; 150 सालों से बसे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित

बनभूलपुरा में 'घर खाली कराने’ की खबरों से डर:वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट का ये अंतिम आदेश नहीं; 150 सालों से बसे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित

“मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे और अब मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी बनभूलपुरा में रह रही है… लेकिन अब बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।” हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रह रहे मोहम्मद जावेद की यह बात उस बेचैनी को बयां करती है जो सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई के बाद पूरे इलाके में महसूस की जा रही है। दशकों से बसे हजारों परिवार अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। सुनवाई के बाद क्षेत्र में यह खबर तेजी से फैल गई कि लोगों को जमीन खाली करनी होगी, जबकि अदालत ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पात्रता की जांच करने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन व्यवस्था करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होनी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 5 हजार परिवारों और लगभग 27000 लोगों की जिंदगी से जुड़े इस मुद्दे ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक ढांचे के टूटने की आशंका के बीच लोग अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात तो करते हैं, लेकिन पुनर्वास यदि दूर हुआ तो जीवन व्यवस्था प्रभावित होने का डर भी साफ दिखाई देता है। 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद बनभूलपुर के लोगों का हाल जानने के लिए पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट… वकील बोले- अंतिम फैसला नहीं, आदेश से भ्रम फैला रहे मामले से जुड़े अधिवक्ता सनप्रीत सिंह आजमानी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और न ही तत्काल बेदखली के निर्देश दिए हैं। लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, रेलवे और याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न नीतियों का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि पात्र लोग पुनर्वास योजनाओं के तहत आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट ने 19 मार्च के बाद आवेदन प्रक्रिया संचालित करने, पात्रता की जांच करने और 31 मार्च तक स्थिति स्पष्ट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। हम कोर्ट का सम्मान करेंगे, लेकिन पुनर्वास यहीं हो “सुप्रीम कोर्ट ने जो ऑर्डर दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, हम उसे मानेंगे। कोर्ट के साथ-साथ हम उत्तराखंड सरकार से भी अपील करते हैं कि मानवता के आधार पर लोगों को सुविधाएं दी जाएं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को आवास दिया जाए। हमारा रोजगार, कारोबार, बच्चों की पढ़ाई सब यहीं से जुड़ा है। हम चिंता में हैं, लेकिन निगाहें कोर्ट पर टिकी हैं। जो फैसला होगा, उसे मानेंगे।” ‘मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी यहां रह रही है’ स्थानीय निवासी मोहम्मद जावेद कहते हैं, ‘मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे। इस जमीन पर मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी रह रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम सम्मान करेंगे, लेकिन बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। कई बच्चे यहां से पढ़कर डॉक्टर और वकील बने हैं। उनके भविष्य का क्या होगा? ‘रोजगार और बच्चों की पढ़ाई यहीं से जुड़ी है’ स्थानीय निवासी फरीद खान ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करना ही पड़ेगा, हम उससे ऊपर नहीं जा सकते। लेकिन यहां लोग लंबे समय से रह रहे हैं। यहीं रोजगार है, बच्चों की पढ़ाई है। अगर कहीं और बसाया जाएगा तो पता नहीं कितनी दूर ले जाया जाएगा। जहां भी बसाया जाए, आसपास ही बसाया जाए। 50-50 साल से लोग यहां रह रहे हैं। ‘गरीबों का मन टूट गया है’ स्थानीय जनप्रतिनिधि इशरत अली कहते हैं- “सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला बताया जा रहा है, उसे सुनकर गरीब लोगों का मन टूट गया है। रमजान का महीना चल रहा है, लेकिन लोग ईद की खुशियां भूल चुके हैं। घर-घर मातम जैसा माहौल है। हमारे बनभूलपुरा में हमेशा खुशियां रहती थीं, लेकिन अब माहौल बोझिल है।” वह आगे कहते हैं- यह क्षेत्र हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है। मुझे लगता है कि राजनीति के तहत बनभूलपुरा को निशाना बनाया गया है और मुस्लिम समाज के वोट खत्म करने की साजिश की जा रही है। यहां ज्यादातर मकान मुस्लिम समाज के हैं। अब समझिए इस पूरे मामले में कब कब क्या हुआ… ————- ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड में 4 दिन में तैयार हुआ फर्जी स्थायी निवास:बरेली के युवक को हल्द्वानी का बनाया; रिश्तेदार ने खोली CSC संचालक की पोल उत्तराखंड में एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक ने उत्तरप्रदेश के रईस अहमद को हल्द्वानी का दिखाकर 4 दिनों में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिया। मामला तब सामने आया जब 13 नवंबर की शाम एक व्यक्ति की शिकायत पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने इस फर्जी CSC सेंटर पर छापा मारा। (पढ़ें पूरी खबर)

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Hindi News National IMD Weather Update Today MP Rain Rajasthan UP Uttarakhand Himachal Jammu Kashmir Snowfall नई दिल्ली/भोपाल/जयपुर/लखनऊ6 मिनट पहले कॉपी लिंक राजस्थान के जयपुर में सुबह से धूप तेज होने लगी है। इससे गर्मी का एहसास होने लगा है। देश के कई राज्यों में गर्मी लगातार बढ़ रही है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई शहरों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है। गुरुवार को हरियाणा के भिवानी, नूंह सहित 5 शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में तेज धूप और शुष्क मौसम का असर है। 26 फरवरी 2026 को कई इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 36°C से ऊपर चला गया है। बाड़मेर में सबसे ज्यादा तापमान 36.3°C दर्ज किया गया, जबकि जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर में भी सामान्य से ज्यादा गर्मी महसूस हुई। मध्य प्रदेश में सुहावना और धूप वाला मौसम है, जहां दिन का तापमान आमतौर पर 27 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हो रहा है। कल भोपाल और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों में तापमान 29 से 30 डिग्री के आसपास रहा, जबकि बुरहानपुर जैसे दक्षिणी क्षेत्रों में पारा 32 डिग्री तक पहुंच गया। इधर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है। उत्तराखंड के 6 शहरों में बुधवार को तापमान -10°C से नीचे रहा। राज्य के उत्तरकाशी, चमोली, और पिथौरागढ़ में आज से बारिश और बर्फबारी का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में आज से अगले 4 दिनों तक बर्फबारी की संभावना है। अगले 2 दिन मौसम का हाल 28 फरवरी- पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ जगहों पर बिजली और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) के साथ गरज-चमक की संभावना है। केरल और माहे में बिजली के साथ गरज-चमक का अलर्ट है। पंजाब के कुछ इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छा सकता है। 1 मार्च- कोई अलर्ट नहीं। 2 से 4 मार्च के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश या बर्फबारी की संभावना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News National IMD Weather Update Today MP Rain Rajasthan UP Uttarakhand Himachal Jammu Kashmir Snowfall नई दिल्ली/भोपाल/जयपुर/लखनऊ2 घंटे पहले कॉपी लिंक राजस्थान के जयपुर में सुबह से धूप तेज होने लगी है। इससे गर्मी का एहसास होने लगा है। देश के कई राज्यों में गर्मी लगातार बढ़ रही है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के कई शहरों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है। गुरुवार को हरियाणा के भिवानी, नूंह सहित 5 शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में तेज धूप और शुष्क मौसम का असर है। 26 फरवरी 2026 को कई इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 36°C से ऊपर चला गया है। बाड़मेर में सबसे ज्यादा तापमान 36.3°C दर्ज किया गया, जबकि जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर में भी सामान्य से ज्यादा गर्मी महसूस हुई। मध्य प्रदेश में सुहावना और धूप वाला मौसम है, जहां दिन का तापमान आमतौर पर 27 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज हो रहा है। कल भोपाल और इंदौर जैसे प्रमुख शहरों में तापमान 29 से 30 डिग्री के आसपास रहा, जबकि बुरहानपुर जैसे दक्षिणी क्षेत्रों में पारा 32 डिग्री तक पहुंच गया। इधर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में शीतलहर की स्थिति है। उत्तराखंड के 6 शहरों में बुधवार को तापमान -10°C से नीचे रहा। राज्य के उत्तरकाशी, चमोली, और पिथौरागढ़ में आज से बारिश और बर्फबारी का अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में आज से अगले 4 दिनों तक बर्फबारी की संभावना है। अगले 2 दिन मौसम का हाल 28 फरवरी- पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कुछ जगहों पर बिजली और तेज हवाओं (30-40 किमी प्रति घंटा) के साथ गरज-चमक की संभावना है। केरल और माहे में बिजली के साथ गरज-चमक का अलर्ट है। पंजाब के कुछ इलाकों में सुबह के समय घना कोहरा छा सकता है। 1 मार्च- कोई अलर्ट नहीं। 2 से 4 मार्च के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश या बर्फबारी की संभावना है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

WhatsApp No SIM March 1 | E20 Petrol April 1

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नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर E20 पेट्रोल से जुड़ी रही। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियों को 20% एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। वहीं, केंद्र सरकार ने गुरुवार को साफ कर दिया है कि ‘सिम बाइंडिंग’ के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… आज शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. 1 अप्रैल से 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल अनिवार्य: तेल कंपनियों को E20 पेट्रोल बेचना होगा, पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर संभव केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से देशभर में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेल कंपनियों को 20% एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। हालांकि, देश के कई हिस्सों में E20 (20% इथेनॉल मिक्स) पेट्रोल की शुरुआत 2023 से ही हो चुकी है, लेकिन ये ऑप्शनल था। सरकार ने हाल ही में एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया था, जिसे अब पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. वॉट्सएप 1 मार्च से सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा: सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से मना किया; कंप्यूटर पर हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा केंद्र सरकार ने गुरुवार को साफ कर दिया है कि ‘सिम बाइंडिंग’ के नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन नहीं बढ़ाई जाएगी। नए नियमों के तहत मोबाइल में सिम कार्ड न होने पर वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे। कंप्यूटर पर लॉगिन वॉट्सएप भी 6 घंटे में लॉगआउट हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे साइबर धोखेबाजों का पता लगाने में मदद मिलेगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड: फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गुरुवार को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। यह फैसला यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और हाल ही में इंडिगो की उड़ानों में हुई दिक्कतों के बाद लिया गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अनिल अंबानी पर ₹2,220 करोड़ की धोखाधड़ी का नया केस: बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर FIR दर्ज, घर-ऑफिस पर CBI का छापा CBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लोन लिया, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय काम के लिए करने के बजाय अपनी ही दूसरी कंपनियों (रिलेटेड पार्टीज) में फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर डायवर्ट कर दिया। जांच में सामने आया है कि इस हेरफेर की वजह से बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हुआ है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के प्रेसिडेंट बोर्गे ब्रेंडे का इस्तीफा: यौन अपराधी एपस्टीन के साथ नाम जुड़ने के बाद छोड़ा पद, एलोइस ज्विंगी नए CEO वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के प्रेसिडेंट और CEO बोर्गे ब्रेंडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका यह फैसला उस वक्त आया है, जब कुछ हफ्ते पहले ही जिनेवा की इस संस्था ने यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ उनके रिश्तों की जांच शुरू की थी। ब्रेंडे 2017 से WEF का नेतृत्व कर रहे थे। फिलहाल स्विट्जरलैंड स्थित इस संस्था ने उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए एलोइस ज्विंगी को अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 6. सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज के 3 नए फोन लॉन्च: कीमत ₹88 हजार से शुरू; प्राइवेसी फीचर से स्क्रीन साइड वाले को नहीं दिखेगी सैमसंग ने अपनी सबसे पावरफुल ‘गैलेक्सी S26’ सीरीज लॉन्च कर दी है। 25 फरवरी को कैलिफोर्निया में हुए इवेंट में कंपनी ने तीन फोन और नई गैलेक्सी बड्स 4 सीरीज पेश की। ये फोन दिखने में काफी हद तक पुरानी S25 सीरीज जैसे ही हैं, लेकिन इनके सॉफ्टवेयर और प्रोसेसर में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसके टॉप वैरिएंट में दुनिया का पहला ऐसा प्राइवेसी फीचर दिया गया है जिसमें फोन में क्या देख रहे हैं उसका साइड वाले को पता नहीं चलेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जानिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जानिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…