इजराइली राजदूत बोले- मोदी को पता नहीं था हमला होगा:PM का इजराइल दौरा खत्म होने के बाद ईरान पर अटैक को मंजूरी दी

PM मोदी इजराइल दौरे पर 25 और 26 फरवरी को थे, इसके ठीक बाद 28 फरवरी को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर स्ट्राइक्स कर दीं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इजराइल दौर पर होते हुए पीएम मोदी को इसकी जानकारी दी गई थी? क्या हमले के बाद इजराइल ने भारत के विदेश मंत्रालय से इसके बारे में बात की है? कहीं पीएम मोदी के दौरे को इजराइल ने कवर की तरह तो इस्तेमाल नहीं किया? इजराइल ने सबसे पहले ईरान पर प्रिएंपटिव स्ट्राइक का नाम देकर हमले किए। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन हमलों में अमेरिकी भागेदारी की जानकारी की पुष्टि की। लेकिन एक साल में दूसरी बार इजराइल ने क्यों ईरान पर हमला किया? और इजराइल में इस युद्ध को लेकर क्या माहौल है? हमने ये सवाल भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजार से पूछे। सवाल: इजराइल ने साल में दूसरी बार प्रिएंपटिव स्ट्राइक की हैं, ईरान पर हमले का अंतिम लक्ष्य क्या है? जवाब: सबसे पहले हम सामने दिख रहे खतरे ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करना चाहते हैं। ईरान दशकों से मिलिट्री न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा बैलेस्टिक मिसाइल की ताकत बढ़ाने के लिए काम कर रहा है, ताकि इजराइल को खत्म कर सके। ईरान पूरे रीजन में अपने प्रॉक्सी ग्रुप को फंड, हथियार और टेक्नोलॉजी दे रहा है। ईरान 2027 तक इजराइल को खत्म करना की बात करता था। जून में हमने उस पर हमले किए थे। ईरान ने अब सहयोग करने से इनकार किया, तो हमने फिर से ऑपरेशन शुरू किया है। सवाल: अगर आप अपने लक्ष्यों को हासिल कर लेते हैं और रिजीम चेंज होता है तो भविष्य में ईरान में किस तरह की सत्ता होगी? जवाब: हमें नहीं पता कि ईरान में सत्ता बदलेगी या नहीं, लेकिन हम चाहते हैं कि ये जरूर हो। कुछ हफ्ते पहले ही मौजूदा सरकार ने अपने हजारों नागरिकों को मार दिया था। सवाल: ईरान पर हमले PM मोदी के इजराइल दौरे के ठीक बाद हुए हैं, क्या पीएम मोदी को इन हमलों की जानकारी दी गई थी? जवाब: भारत हमारी स्थिति अच्छी तरह जानता है। PM मोदी इजराइल में थे, तब हमें नहीं पता था कि ऑपरेशन होने वाला है। इसकी मंजूरी 28 फरवरी की सुबह दी गई। तब तक PM मोदी दौरा पूरा करके लौट चुके थे। इजराइल के विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर को फोन करके बात की थी। सवाल: विदेश मंत्री जयशंकर का इस मामले पर क्या कहना था, अगर आप बता सकें? जवाब: भारत ने अपनी स्थिति पर खुलकर बात की। भारत बातचीत और स्थिरता चाहता है। हमने कई साल ईरान से डिप्लोमेसी के तहत बातचीत की कोशिश की है। अमेरिका ने महसूस किया कि ईरान डिप्लोमेसी के जरिए वक्त बिता रहा है और शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं है। सवाल: इजराइल में लोग ईरान के नेता खामेनेई की मौत पर जश्न मना रहे हैं, आप बताइए कि इस वक्त इजराइल में कैसा माहौल है? जवाब: इजराइल खुद को सुरक्षित रखना चाहता है। इजराइल पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से लगातार हमले हो रहे हैं। कई लोग खामेनेई की मौत पर खुशी मना रहे हैं, क्योंकि ईरान का सुप्रीम लीडर इजराइल पर हमले के ऑर्डर देता था, इजराइल के लोगों को मारता था, अब वो नहीं है। हमने ईरान में भी जश्न की फोटो देखी हैं। मुझे लगता है कि ईरान के लोग इस मौके के जरिए सत्ता बदलेंगे।
नारियल रसोई स्क्रबर: आप नारियल के छिलके क्या देते हैं? इससे पहले बाजार मूल्य निर्धारण के आधार पर; जानिए बनाने का तरीका

नारियल रसोई स्क्रबर: क्या आप भी नारियल का पानी पीते हैं या पूजा के बाद नारियल के चिप्स को कूड़े में फेंक देते हैं? तो आप जांच में एक बहुत ही काम की चीज़ को बर्बाद कर रहे हैं। जिस नारियल के किचन को आप सस्ते में समझकर फेंक देते हैं, वह वास्तव में आपके लिए सबसे बेहतरीन, टिकाऊ और प्राकृतिक रचना बन सकता है। इन बाज़ारों में मिलने वाले प्लास्टिक के प्लास्टिक वॉश वाले केवल महँगे ही होते हैं, बल्कि वे पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाते हैं। साथ ही, उनमें से सभी का खतरा भी रहता है। ऐसे में, नारियल का छिलका एक अच्छा पद है। यह सख्त होता है, पॉश्चर को अच्छी तरह से साफ किया जाता है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल होता है। kahaniwalshivani ने अपने सांख्यिकी वीडियो में नारियल के रेशों से बेहतरीन और आसान किचन मशीन बनाने का तरीका बताया है। आइए जानते हैं। नारियल के केक से जड़ी बूटी कैसे तैयार करें? इस परामर्श के फायदे क्या हैं? (टैग्सटूट्रांसलेट)बचे हुए नारियल की भूसी का उपयोग(टी)प्राकृतिक रसोई उपकरण(टी)घर पर पर्यावरण के अनुकूल नारियल स्क्रबर कैसे बनाएं(टी)DIY नारियल स्क्रबर(टी)पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली(टी)नारियल की भूसी का उपयोग(टी)घर पर स्क्रबर कैसे बनाएं(टी)रसोई हैक हिंदी(टी)शून्य अपशिष्ट भारत(टी)हस्तनिर्मित स्क्रबर
गुजिया तलते वक्ता ये 2 सबसे बड़ी गलतियां करते हैं लोग, जानें प्रभाव तारिक; ना कोयला रहेगा, ना ही फटेगी; फूली-फूली गे

गुझिया तलने के टिप्स: होली का त्योहार आते ही घर में गुजिया बननी शुरू हो जाती है, घर पर बनी गुजिया होली की सबसे खट्टी मिठाई है, लेकिन समय के साथ छोटी-छोटी गलतियां पूरी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। कई बार गुझिया बाहर से जल्दी ब्राउन हो जाती है और अंदर प्लाव रह जाती है, या फिर मोटी हो जाती है और ब्राउन बाहर निकल जाती है। अगर आप इस बार घर पर ही हलवाई जैसी कुरकुरी, फूली हुई और परफेक्ट गुझिया बनाना चाहते हैं, तो तलने के दौरान सिर्फ इन 2 गलतियों से बचें। गुजिया तलते ना करें ये 2 गलतियाँ पहली गलती ये होती है कि ज्यादातर लोग जल्दी गैस जल्दी से जल्दी तैयार कर लेते हैं ताकि जल्दी तैयार हो जाएं। लेकिन इसका बुरा नतीजा यह निकलता है कि गुजिया बाहर से जल्दी सुनहरी हो जाती है, लेकिन अंदर का मावा कच्चा ही रह जाता है। गुजिया के किनारे मोटे होते हैं, इसलिए उनके मसाले में थोड़ा समय लगता है। इसलिए सही तरीका ये है कि गुजिया को हमेशा मध्यम से मध्यम आंच पर ही तलें। इससे गुजिया अंदर तक अच्छे से पकती है, खस्तापन बरकरार रहता है और स्वाद भी शानदार आता है। दूसरी ग़लती यह है कि गुजिया ने समय प्रदर्शन को एक जैसा बनाए रखा, कई लोगों ने शुरू से अंत तक आचमन पूरा नहीं किया। इससे गुजिया अच्छे से फूलती नहीं और कई बार साभार भी मिलता है। वास्तविक तलने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका ध्यान रखने वाली बात ये भी है कि तेल का तापमान चेक करने के लिए एक छोटी सी गुजिया या फिर आटे का टुकड़ा देखें। अगर वो धीरे-धीरे ऊपर आए और फूले, तो तेल सही है। अगर तुरंत तेजी से फूलकर जल जाए, तो तेल ज्यादा गर्म है ऐसे में जल्दी कम कर दीजिए। होली पर इन आसान टिप्स को अपनाएं और परिवार को घर की बनी मार्केट में स्वादिष्ट गुझिया खिलाएं। सही इच्छा और थोड़ी सी धैर्यता, तो मेहनत बेकार नहीं होगी। ऐसी है गुजिया मिर्च तो आपकी होली की मिठास और खुशियां हो चाहत।
विभाजन की पृष्ठभूमि पर है फिल्म ‘जय हिंद जय सिंध’:प्रोड्यूसर सैमी ननवानी ने पीएम मोदी को फिल्म दिखाने की जताई इच्छा

सैमीज एंटरटेनमेंट की नई बॉलीवुड फिल्म जय हिंद जय सिंध – ए लव स्टोरी भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल कहानी है। फिल्म का निर्देशन इंद्रजीत लंकेश ने किया है और इसके प्रोड्यूसर सैमी ननवानी हैं। फिल्म को लेकर प्रोड्यूसर सैमी ननवानी और एक्टर विक्रम कोचर ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। प्रोड्यूसर सैमी ननवानी ने पीएम मोदी को फिल्म दिखाने की इच्छा जाहिर की। बातचीत में प्रोड्यूसर सैमी ननवानी से पूछा गया कि क्या फिल्म में सिंध से आए लोगों के पलायन और उनके योगदान को भी दिखाया जाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि सिंध इस फिल्म का एक हिस्सा है, लेकिन पूरी कहानी उससे कहीं बड़ी है। उनके मुताबिक फिल्म भारत की विविधता और एकता को दिखाती है। उन्होंने कहा कि हम अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग तरह का खाना खाते हैं और अलग दिखते हैं, फिर भी दिल से एक हैं और साथ रहते हैं। फिल्म भारत की छवि को आगे बढ़ाने का काम करेगी: सैमी सैमी ने कहा कि जैसे हॉलीवुड फिल्मों ने अमेरिका को दुनिया में पहचान दिलाई, वैसे ही यह फिल्म भारत की छवि को आगे बढ़ाने का काम करेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि आज दुनिया में भारत की पहचान पहले से ज्यादा मजबूत हुई है और इसमें प्रधानमंत्री की बड़ी भूमिका है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे यह फिल्म प्रधानमंत्री मोदी को दिखाना चाहेंगे, तो सैमी ने कहा कि यह उनका पहला कदम होगा। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर अपनी गर्व की भावना जरूर व्यक्त करना चाहेंगे। विक्रम का इमोशनल किरदार फिल्म में अपने किरदार को लेकर विक्रम कोचर ने कहा कि उनका रोल अलग तरह का है। वह गोवा में बसे पंजाबी शख्स का किरदार निभा रहे हैं, जो एक विदेशी महिला से शादी करता है। उनका किरदार इमोशनल है और प्यार की भाषा समझता है। फिल्म भी प्यार का संदेश देती है। फिल्म में महेश मांजरेकर, जया प्रदा, जरीना वहाब, विक्रम कोचर, राहुल देव, छाया कदम, उपासना सिंह, अमित बहल, अजीत शिधाये, राजवीर सिंह, अकैशा वात्स और एहसान खान नजर आएंगे। साथ ही गौरव डिंगरा और झानवी इस फिल्म से बॉलीवुड में कदम रख रहे हैं। फिल्म इस समय पोस्ट-प्रोडक्शन में है और इसे 2026 के मध्य में देशभर में रिलीज किया जाएगा।
PM मोदी से मिले कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी:निवेश-ट्रेड डील पर बातचीत होगी, खालिस्तानी चरमपंथियों पर लगाम लगाने पर भी चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई PM मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। कुछ ही देर में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू होगी। इसमें दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने, ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने, व्यापार विस्तार और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। PM कार्नी के इस दौरे का सबसे बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है। बताया जा रहा है कि यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है। बीबीसी के मुताबिक अगर यह समझौता होता है, तो इसे कार्नी की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जाएगा। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 में लागू हुआ था, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम सप्लाई शुरू की थी। भारत अपने तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए और अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। PM कार्नी के भारत दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें… भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते खराब हुए साल 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। कनाडा ने निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए गए थे। कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया था। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था। भारत का कहना था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उन पर कार्रवाई नहीं करता। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कनाडा ने भी भारत से व्यापार मिशन रद्द कर दिए, और दोनों तरफ से यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और CEPA जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं ठप पड़ गईं। जस्टिन ट्रूडो के पद से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की। कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहां प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है। भारतीय विदेश मंत्रायल के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।
भाजपा का आरोप है कि कर्नाटक सरकार ने शिवकुमार खेमे की रात्रिभोज बैठक के बाद विधायकों की ‘जासूसी’ के लिए इंटेल विभाग का इस्तेमाल किया राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 02, 2026, 10:40 IST आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्य कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और तर्क दिया है कि खुफिया निगरानी के दावे निराधार और अतिरंजित हैं। रात्रिभोज बैठक, जिसे व्यापक रूप से शिवकुमार के प्रति वफादार विधायकों और मंत्रियों की सभा के रूप में रिपोर्ट किया गया था, बेंगलुरु के एक होटल में हुई और कहा गया कि यह एक विधायक के जन्मदिन के अवसर पर एक सामाजिक कार्यक्रम था। (न्यूज़18) कर्नाटक में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ जुड़े विधायकों की हालिया रात्रिभोज सभा के बाद राज्य खुफिया तंत्र के कथित दुरुपयोग पर सिद्धारमैया सरकार की आलोचना की है। भाजपा ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाले प्रशासन पर शिवकुमार के वफादारों द्वारा आयोजित रात्रिभोज बैठक में उपस्थिति की निगरानी के लिए खुफिया विभाग को तैनात करने का आरोप लगाया है – सत्तारूढ़ पार्टी ने इस आरोप को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। विपक्ष के नेता आर अशोक सहित विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार के कार्यों की आलोचना करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। एक्स पर एक पोस्ट में, अशोक ने लिखा: “तो अब स्टेट इंटेलिजेंस के पास एक नया पूर्णकालिक काम है – उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के गुट की रात्रिभोज उपस्थिति पर नज़र रखना? यह सीएम सिद्धारमैया के तहत प्रशासन का पूर्ण राजनीतिकरण है। कर्नाटक शासन का हकदार है। निगरानी की राजनीति नहीं।” रात्रिभोज बैठक, जिसे व्यापक रूप से शिवकुमार के प्रति वफादार विधायकों और मंत्रियों की सभा के रूप में रिपोर्ट किया गया था, बेंगलुरु के एक होटल में हुई और कहा गया कि यह एक विधायक के जन्मदिन के अवसर पर एक सामाजिक कार्यक्रम था। हालाँकि, राजनीतिक पर्यवेक्षकों और विपक्षी नेताओं ने इसे सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चल रही नेतृत्व चर्चा के बीच शिवकुमार के खेमे द्वारा शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री के करीबी कई विधायकों और मंत्रियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे राज्य कांग्रेस इकाई के भीतर आंतरिक पैंतरेबाज़ी की अटकलें तेज हो गईं। यह सभा ऐसे समय में हुई है जब सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच संभावित नेतृत्व गतिशीलता को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार के खिलाफ भाजपा का आरोप “निगरानी राजनीति” पर केंद्रित है, जिसमें कहा गया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की आंतरिक गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए सार्वजनिक प्रशासन और खुफिया संसाधनों को शासन से हटा दिया जा रहा है। विपक्ष ने कहा है कि यह अभूतपूर्व है और इस बात का संकेत है कि सरकार का ध्यान विकास और सार्वजनिक सेवाएं देने के बजाय राजनीतिक लड़ाइयों पर अधिक केंद्रित है। आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्य कांग्रेस के नेताओं ने उन्हें राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है और तर्क दिया है कि खुफिया निगरानी के दावे निराधार और अतिरंजित हैं। बढ़ते झगड़े ने कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर व्यापक अंतर-पार्टी गतिशीलता की ओर ध्यान आकर्षित किया है, कई मीडिया आउटलेट्स ने शिवकुमार के गुट की बढ़ती प्रमुखता और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ इसकी बातचीत पर रिपोर्टिंग की है। जैसे ही राजनीतिक बहस शुरू होती है, भाजपा ने अपनी मांग दोहराई है कि सिद्धारमैया सरकार शासन के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे और “गुटीय राजनीति के लिए राज्य मशीनरी का उपयोग करना” बंद करे। पहले प्रकाशित: मार्च 02, 2026, 10:40 IST समाचार राजनीति बीजेपी का आरोप है कि कर्नाटक सरकार ने शिवकुमार कैंप की डिनर मीटिंग के बाद विधायकों की ‘जासूसी’ के लिए इंटेल विभाग का इस्तेमाल किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीतिक विवाद(टी)कर्नाटक की राजनीति(टी)बीजेपी बनाम कांग्रेस कर्नाटक(टी)सिद्धारमैया सरकार(टी)डीके शिवकुमार गुट(टी)राज्य खुफिया दुरुपयोग कर्नाटक(टी)निगरानी राजनीति कर्नाटक(टी)अंतर-पार्टी कांग्रेस कर्नाटक
‘पहले भारतीयों को बचाएं’: कर्नाटक के शीर्ष अधिकारियों ने मध्य पूर्व में हमलों की आलोचना की, हजारों लोग वापसी का इंतजार कर रहे हैं | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 02, 2026, 10:34 IST डिप्टी सीएम शिवकुमार ने विदेशों में कन्नड़ संगठनों से “फंसे हुए लोगों को विश्वास” प्रदान करने का आग्रह किया, क्योंकि प्रमुख पारगमन केंद्रों के बंद होने से यात्रा और वाणिज्य बाधित हो रहा है। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने कर्नाटक के शीर्ष नेतृत्व की ओर से तीखी कूटनीतिक और मानवीय प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, क्योंकि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच हजारों कन्नडिगा फंसे हुए हैं। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ईरानी शैक्षणिक सुविधा पर हाल ही में हुए सैन्य हमलों पर कड़ी फटकार लगाई, जिसमें कथित तौर पर 70 से अधिक बच्चों की जान चली गई थी। सदाशिवनगर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा, “मध्य पूर्व में युद्ध सही नहीं है। उन स्कूली बच्चों पर हमला क्यों जिनकी कोई गलती नहीं है? यह निंदनीय है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान अब तुरंत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर केंद्रित होना चाहिए, यह देखते हुए कि “यह दुबई और मध्य पूर्व के अन्य हिस्सों में फंसे भारतीयों को बचाने का समय है”, और पुष्टि की कि एमएलसी भोजे गौड़ा सहित कई राज्य विधायक उन लोगों में से हैं जो वर्तमान में लौटने में असमर्थ हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पश्चिमी हस्तक्षेप के भूराजनीतिक विरोधाभासों की तीखी आलोचना करते हुए तात्कालिकता की इस भावना को दोहराया। शिवमोग्गा हवाई अड्डे पर एक प्रेस वार्ता के दौरान, मुख्यमंत्री ने हमलों में संयुक्त राज्य अमेरिका की भागीदारी पर निशाना साधा और उनकी विदेश नीति को स्वाभाविक रूप से विरोधाभासी करार दिया। सिद्धारमैया ने ईरान पर हमले को “अनावश्यक” बताते हुए कहा, “अमेरिका का रुख विपरीत है; एक तरफ तो वह केवल शांति का राग अलापता है और दूसरी तरफ युद्ध छेड़ता है।” मुख्यमंत्री ने ईरानी नेतृत्व के संबंध में भी अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “राष्ट्रपति अयातुल्ला खामेनेई की हत्या कर दी गई है, और मैं प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शाश्वत शांति मिले।” चूंकि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय करती है, प्रवासी भारतीयों का कल्याण बेंगलुरु में प्रशासन के लिए प्राथमिक चिंता बनी हुई है। शिवकुमार ने कर्नाटक और खाड़ी के बीच गहरे आर्थिक और व्यक्तिगत संबंधों पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि “सऊदी अरब भारतीयों पर चलता है” और “मंगलुरु या केरल का हर दूसरा परिवार मध्य पूर्व में काम करता है”। उन्होंने केंद्र सरकार से निकासी प्रयासों का नेतृत्व करने का आह्वान करते हुए कहा है कि “राज्य और केंद्र के पास अलग-अलग हेल्पलाइन नहीं हो सकती हैं; विदेश मंत्रालय को हेल्पलाइन खोलनी चाहिए”। शिवकुमार ने विदेशों में कन्नड़ संगठनों से “वहां फंसे लोगों को विश्वास” प्रदान करने का भी आग्रह किया, क्योंकि दुबई जैसे प्रमुख पारगमन केंद्रों के बंद होने से यात्रा और वाणिज्य बाधित हो रहा है। सिद्धारमैया ने जनता को आश्वस्त किया कि राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है कि कोई भी नागरिक छूट न जाए। उन्होंने पुष्टि की कि वह अधिकारियों और फंसे हुए व्यक्तियों के सीधे संपर्क में हैं, जिनमें एमएलसी भोजे गौड़ा भी शामिल हैं, जिन्होंने एक होटल में सुरक्षित होने की सूचना दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम यह सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में हैं कि अरब देशों में फंसे कन्नड़ लोगों को बिना किसी परेशानी के वापस लाया जाए।” उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि वर्तमान में क्षेत्र में फंसे बल्लारी के 30 लोगों के लिए व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, उन्होंने वादा किया कि जैसे ही दुबई हवाई अड्डे का परिचालन फिर से शुरू होगा, “उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की व्यवस्था की जाएगी”। पहले प्रकाशित: मार्च 02, 2026, 10:34 IST समाचार राजनीति ‘पहले भारतीयों को बचाएं’: कर्नाटक के शीर्ष अधिकारियों ने मध्य पूर्व में हमलों की निंदा की, हजारों लोग वापसी का इंतजार कर रहे हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)मध्य पूर्व संघर्ष(टी)कर्नाटक प्रतिक्रिया(टी)कन्नड़ फंसे हुए(टी)डीके शिवकुमार का बयान(टी)सिद्धारमैया आलोचना(टी)भारतीय निकासी मध्य पूर्व(टी)ईरानी स्कूल हमला(टी)दुबई हवाई अड्डा बंद
अमेरिका-ईरान जंग से आज सोने में ₹5,000 की तेजी:ये ₹1.67 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा, चांदी ₹8500 बढ़कर ₹2.91 लाख पर कारोबार कर रही

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते गोल्ड और सिल्वर मार्केट में तेजी है। वायदा बाजार (MCX) में सोने का दाम करीब 5 हजार रुपए चढ़कर 1.67 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं, चांदी के भाव में 8,500 रुपए का इजाफा हुआ है और वह 2.91 लाख रुपए/किलो पर कारोबार कर रही है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना 1.90 लाख रुपए तक जा सकता है। चांदी 3.50 लाख तक पहुंच सकती है। इधर, सर्राफा बाजार में 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 1.70 लाख रुपए पर पहुंच गई है। युद्ध जैसे अनिश्चित माहौल में निवेशक सोने को सुरक्षित मानते हैं और इसमें पैसा लगाने लगते हैं। इससे इसकी डिमांड बढ़ती है और ये महंगे होने लगते हैं। सोने-चांदी के दाम बढ़ने के 3 मुख्य कारण सोना इस साल ₹34,000 और चांदी ₹36,000 महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.67 लाख रुपए पर पहुंच गया है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 34 हजार बढ़ चुकी है। वहीं चांदी भी इस दौरान 61 हजार रुपए महंगी हो चुकी है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
‘निगरानी राजनीति’: भाजपा ने सिद्धारमैया पर डीकेएस गुट की जासूसी करने के लिए राज्य खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 02, 2026, 10:15 IST इसे “प्रशासन का पूर्ण राजनीतिकरण” कहते हुए, अशोक ने कहा कि राज्य मशीनरी कर्नाटक के लोगों की रक्षा के लिए मौजूद है, “आपकी कुर्सी की रक्षा के लिए नहीं।” कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया. (छवि: न्यूज18) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर उन खबरों के सामने आने के बाद तीखी आलोचना की कि वह कथित तौर पर उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से जुड़े विधायकों पर नजर रखने के लिए राज्य खुफिया विभाग का इस्तेमाल कर रहे हैं। कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि कांग्रेस सरकार अब शिवकुमार के सहयोगी विधायकों की रात्रिभोज उपस्थिति पर नज़र रख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था और बढ़ते सांप्रदायिक तनाव जैसे मुद्दों को संबोधित करने के बजाय “विधायकों की गिनती करना और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को बचाना” है। “तो अब स्टेट इंटेलिजेंस के पास एक नया पूर्णकालिक काम है – डिप्टीसीएम @डीकेशिवकुमार के गुट की रात्रिभोज उपस्थिति पर नज़र रखना? दवा कारखाने अनियंत्रित चल रहे हैं, सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है, कानून व्यवस्था कमजोर हो गई है। लेकिन इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता? विधायकों की गिनती और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की छाया, “उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा। तो अब स्टेट इंटेलिजेंस के पास एक नया पूर्णकालिक काम है – डिप्टीसीएम की रात्रिभोज उपस्थिति पर नज़र रखना @डीकेशिवकुमारका गुट?दवा कारखाने अनियंत्रित चलते हैं।साम्प्रदायिक तनाव बढ़ता है।कानून-व्यवस्था कमजोर होती है। लेकिन इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता? विधायकों की गिनती और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की छाया… pic.twitter.com/9gU735wmCB – आर. अशोक (@RAshokaभाजपा) 2 मार्च 2026 इसे “प्रशासन का पूर्ण राजनीतिकरण” कहते हुए, अशोक ने कहा कि राज्य मशीनरी कर्नाटक के लोगों की रक्षा के लिए मौजूद है, “आपकी कुर्सी की रक्षा के लिए नहीं।” उन्होंने संस्थानों के दुरुपयोग के दावों पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “सिद्धारमैया जानते हैं, राज्य मशीनरी कर्नाटक के लोगों की रक्षा के लिए मौजूद है, न कि आपकी कुर्सी की रक्षा के लिए। और @RahulGandhi अब कहां हैं? वही राहुल गांधी जो संस्थानों के “दुरुपयोग” और “हथियारीकरण” के बारे में व्याख्यान देते हैं? कर्नाटक शासन का हकदार है। निगरानी की राजनीति का नहीं। सीएम सिद्धारमैया को व्यक्तिगत राजनीतिक अस्तित्व के लिए राज्य खुफिया का दुरुपयोग करना बंद करना चाहिए।” उनकी यह टिप्पणी उस खबर के बाद आई है कि मुख्यमंत्री कथित तौर पर अपने डिप्टी गुट पर नजर रखने के लिए राज्य की खुफिया मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह विवाद मगदी विधायक एचसी बालकृष्ण के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर शिवकुमार खेमे द्वारा आयोजित रात्रिभोज बैठक के बाद शुरू हुआ। जबकि डीकेएस गुट ने दावा किया कि लगभग 40 विधायकों ने सभा में भाग लिया, सूत्रों ने कहा कि 69 आमंत्रित विधायकों में से 32 उपस्थित थे, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया। यह दावा किया गया था कि शिवकुमार खेमे द्वारा पार्टी के भीतर बढ़ते समर्थन को लेकर आशंकित सिद्धारमैया ने नियमित खुफिया ब्रीफिंग से परे विधायकों की गतिविधियों पर विस्तृत अपडेट मांगा था। सूत्रों ने कहा कि शिवकुमार गुट ने बजट सत्र के बाद दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मिलने की योजना का संकेत दिया है। कुछ तटस्थ विधायकों ने कथित तौर पर नेतृत्व परिवर्तन के लिए समर्थन व्यक्त किया, लेकिन कहा कि किसी भी निर्णय को 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की छवि की रक्षा करनी चाहिए। पहले प्रकाशित: मार्च 02, 2026, 10:15 IST समाचार राजनीति ‘निगरानी राजनीति’: भाजपा ने सिद्धारमैया पर डीकेएस गुट की जासूसी करने के लिए राज्य खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक(टी)बीजेपी(टी)सिद्धारमैया(टी)डीके शिवकुमार(टी)आर अशोक
Sharjah-Indore Flight Cancelled Again Amidst UAE-Iran Tensions; Kailash Vijayvargiya Engaged

Hindi News Local Mp Indore Sharjah Indore Flight Cancelled Again Amidst UAE Iran Tensions; Kailash Vijayvargiya Engaged इंदौर28 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान और इजराइल में युद्ध के बीच ईरान ने यूएई सहित आठ देशों में मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। इसमें यूएई भी शामिल है। इसके कारण यूएई के सभी एयरपोर्ट (दुबई, शारजाह और अबूधाबी) कल से बंद हैं। 28 फरवरी से कैंसिल शारजाह से इंदौर आने और जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आज भी निरस्त कर दी गई हैं। इसके कारण इंदौर सहित प्रदेश के सैकड़ों यात्री यूएई में फंस गए हैं। दो पूर्व विधायकों सहित इंदौर के एक बड़े कारोबारी और उनके साथी दुबई की जिस होटल में ठहरे थे, उसके पास की ही पार्क जुमेरा होटल में मिसाइल गिरी और धमाका हुआ। घटना के बाद इंदौर के सभी लोगों ने उस इलाके को छोड़कर दूसरी होटल में शरण ली। कारोबारी पिंटू छाबड़ा ने बताया कि उनके परिजन और सभी साथी सुरक्षित हैं। इंदौर से गया एक अन्य परिवार अबूधाबी में फंसा है। हालांकि वहां हालात सामान्य हैं, लेकिन फ्लाइटों के बंद होने के कारण वापसी मुश्किल हो रही है। पूर्व विधायक संजय शुक्ला और पिंटू छाबड़ा के साथ दुबई में फंसे अन्य इंदौरी। इधर, इंदौरियों के दुबई सहित यूएई के विभिन्न शहरों में फंसने की खबर के बाद मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने ताजा हालातों की जानकारी लेते हुए दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों से संपर्क कर दुबई में फंसे इंदौर के लोगों की वापसी के उपायों के बारे में चर्चा की। उन्होंने दुबई में फंसे पूर्व विधायकों सहित कारोबारी पिंटू छाबड़ा से चर्चा कर कहा कि वे ओमान से लौटने का प्रयास करें, फिलहाल भारत-ओमान के बीच हवाई संपर्क जारी है। मंत्री ने यूएई में फंसे लोगों को भारतीय दूतावास से संपर्क रखने और उनकी हिदायतें मानने की भी सलाह दी। इंदौर से शारजाह के बीच नियमित उड़ान एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा इंदौर से शारजाह के बीच नियमित उड़ानों का संचालन किया जाता है। 28 फरवरी से ईरान और इजराइल के बीच शुरू हुए युद्ध के चलते कंपनी ने अपनी आने और जाने वाली उड़ानों को निरस्त कर दिया था और आज भी उड़ानें निरस्त करने की घोषणा की है। ऐसे में शारजाह, अबूधाबी और दुबई से इंदौर आने वाले यात्री वहीं फंस गए हैं। इंदौर से दुबई गए दो पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल के साथ ही कारोबारी पिंटू छाबड़ा, उनका बेटा करण छाबड़ा और बहू के साथ ही प्रवीण कक्कड़, संजय अग्रवाल एवं अन्य साथी दुबई गए हुए हैं। दुबई में बिगड़े हुए हैं हालात। होटल के पास धमाका दुबई में फंसे पूर्व विधायक सहित अन्य यात्री शनिवार को ही लौटने वाले थे, लेकिन वे जिस होटल में ठहरे थे, उसके पास ही स्थित पार्क जुमेरा होटल में धमाके के बाद उन्होंने भारतीय दूतावास की सलाह पर उक्त इलाका छोड़कर अन्य इलाके में स्थित होटल हयात में शरण ली। दुबई में फंसे यात्रियों ने बताया कि यहां लगातार धमाकों की आवाज आ रही हैं और सायरन बज रहे हैं। वहां घूमने गए भारतीयों में जहां डर का माहौल है, वहीं इंदौर सहित देश के कई लोग दुबई में ही रह रहे हैं और ताजा हमलों से उनमें भी चिंता बनी हुई है। अबुधाबी में भी फंसे यात्री इंदौर से अपने परिवार के साथ 6 लोगों के साथ 26 फरवरी को शारजाह गए सुमित टोंग्या ने बताया कि वे अभी अबूधाबी में हैं। शनिवार को उन्होंने अपनी होटल के पास धमाकों की आवाजें भी सुनीं। आसमान में उड़ती मिसाइलें भी देखीं। इससे यहां लोगों में घबराहट की स्थिति है। हालांकि रविवार सुबह से हमले शांत हैं। उन्होंने बताया कि काफी लोग फ्लाइट्स बंद होने से यहां फंस गए हैं। उनकी भी वापसी की फ्लाइट 3 मार्च को है और इसे लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। मोबाइल पर आया अलर्ट मैसेज अमोल कटारिया ने बताया कि उनके मोबाइल पर शनिवार को यूएई प्रशासन की ओर से एक चेतावनी मैसेज भी आया, जिसमें लिखा था कि वर्तमान स्थिति के कारण संभावित मिसाइल खतरे की आशंका है। कृपया तुरंत नजदीकी सुरक्षित इमारत में शरण लें और खिड़कियों, दरवाजों तथा खुले क्षेत्रों से दूर रहें। आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा करें। जाने वाले यात्रियों के टूर भी हुए निरस्त ट्रेवल्स एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया ने बताया कि युद्ध के कारण उड़ानें निरस्त हो जाने से इंदौर सहित प्रदेश के यूएई सहित अन्य देशों में जाने वाली कई उड़ानें निरस्त हुई हैं। इसके कारण यात्रियों के पहले से बुक टूर पैकेज कैंसल हो रहे हैं। युद्ध के हालातों को देखते हुए कई पर्यटक खुद ही अपने टूर कैंसल करवा रहे हैं। जो यात्री वहां पहुंच चुके हैं, वे लगातार कैसे भी भारत तक लौटने की कोशिश कर रहे हैं। दुबई में इंदौर और मप्र के 30 लोग फंसे हैं। मप्र बास्केटबॉल टीम के खिलाड़ी भी फंसे भारतीय सीनियर पुरुष बास्केटबॉल टीम 25 फरवरी को एशियाई क्वालिफायर में भाग लेने के लिए दोहा गई थी। टीम में मध्यप्रदेश के तुशाल सिंह भी शामिल हैं। 27 को टीम को लेबनान जाना था, लेकिन कतर में चल रहे राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा बंद है। ऐसे में टीम के खिलाड़ी और अधिकारी दोहा में फंसे हुए हैं। बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के महासचिव कुलविंदर सिंह गिल ने बताया भारतीय टीम ने 27 फरवरी को कतर के खिलाफ अपना निर्धारित मैच खत्म किया। मौजूदा स्थिति और यात्रा संबंधी अनिश्चितताओं के कारण टीम व अधिकारी दोहा एंबेसी में 5 घंटे के लिए रुके थे। इसके बाद पूरी टीम को होटल में पहुंचाया गया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








