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PM मोदी से मिले कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी:निवेश-ट्रेड डील पर बातचीत होगी, खालिस्तानी चरमपंथियों पर लगाम लगाने पर भी चर्चा

PM मोदी से मिले कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी:निवेश-ट्रेड डील पर बातचीत होगी, खालिस्तानी चरमपंथियों पर लगाम लगाने पर भी चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई PM मार्क कार्नी के बीच सोमवार सुबह हैदराबाद हाउस में मुलाकात हुई। कुछ ही देर में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू होगी। इसमें दोनों देशों के रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने, ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने, व्यापार विस्तार और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। PM कार्नी के इस दौरे का सबसे बड़ा मकसद भारत-कनाडा के बीच 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है। बताया जा रहा है कि यह डील करीब 3 अरब डॉलर की हो सकती है। बीबीसी के मुताबिक अगर यह समझौता होता है, तो इसे कार्नी की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जाएगा। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है। भारत और कनाडा के बीच न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट 2013 में लागू हुआ था, जिसके बाद कनाडा ने भारत को यूरेनियम सप्लाई शुरू की थी। भारत अपने तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए और अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। PM कार्नी के भारत दौरे से जुड़ी 4 तस्वीरें… भारत में निवेश को बढ़ावा दे रहा कनाडा भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। कनाडा के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 21 अरब डॉलर से ज्यादा है। भारत में 600 से ज्यादा कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं। भारत से कनाडा को मुख्य निर्यात में दवाइयां, रत्न-आभूषण और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। कनाडा के बड़े पेंशन फंड पहले से ही भारत में रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत में 100 बिलियन डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) का निवेश किया है। अब कनाडा इस निवेश को और बढ़ाना चाहता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का कहना है कि दोनों देशों के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कनाडा भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा। निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते खराब हुए साल 2023 में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। कनाडा ने निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप लगाए गए थे। कनाडा के तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों को सबूत मिले हैं कि भारतीय सरकार के एजेंट इस हत्या में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने इसे कनाडा की संप्रभुता पर हमला बताया था। भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया था। भारत का कहना था कि कनाडा में खालिस्तानी चरमपंथी और आतंकवादी खुलेआम सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाते हैं और कनाडा उन पर कार्रवाई नहीं करता। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया। भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कनाडा ने भी भारत से व्यापार मिशन रद्द कर दिए, और दोनों तरफ से यात्रा सलाह जारी की गई। बातचीत लगभग बंद हो गई और CEPA जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं ठप पड़ गईं। जस्टिन ट्रूडो के पद से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने (मार्च 2025) के बाद दोनों देशों ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की। कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहां प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है। भारतीय विदेश मंत्रायल के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 16 लाख लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।

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