सांस फूलने का तुरंत कराएं इलाज, ये सब हो सकते हैं दिल की बीमारी शुरूआती लक्षण, एक्सपर्ट ने बचाव के बताए टिप्स

Last Updated:March 10, 2026, 13:31 IST दिल के दौरे आने के कई वजह हो गए हैं. जिसका सबसे मुख्य वजह है कि इंडिया का सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल से बीपी शुगर बहुत कॉमन हो गया है. बीपी शुगर धीरे-धीरे लोगों के नसों को गड़बड़ कर दे रहा है पूरे दिल की मांसपेशियों में घुस जाता है. और सारी ब्लड नसों को ब्लॉक कर देता है जिसकी वजह खून का प्रवाह बंद हो जाता है. जिसकी वजह से खून का दौरा दिल में बंद हो जाता है. ख़बरें फटाफट मऊः वर्तमान में देखा जा रहा है लोग दिल के दौरे के मरीज होते जा रहे हैं. छोटी-छोटी लापरवाही बड़ी समस्याओं का कारण बन रही है. ऐसे में दिल के दौरे के मरीज क्यों तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और इसे कैसे बच सकते हैं आईए जानते हैं दिल रोग विशेषज्ञ के द्वारा कि वह क्या कुछ इसके बचाव के टिप्स देते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के दिल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अम्मान अली बताते हैं कि दिल के दौरे आने के कई वजह हो गए हैं. जिसका सबसे मुख्य वजह है कि इंडिया का सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल से बीपी शुगर बहुत कॉमन हो गया है. बीपी शुगर धीरे-धीरे लोगों के नसों को गड़बड़ कर दे रहा है पूरे दिल की मांसपेशियों में घुस जाता है. और सारी ब्लड नसों को ब्लॉक कर देता है जिसकी वजह खून का प्रवाह बंद हो जाता है. जिसकी वजह से खून का दौरा दिल में बंद हो जाता है. जिसके कारण अचानक ही दिल में तीव्रता से दर्द उठने लगता है जो लोगों की परेशानियां बढ़ा देता है. सांस फूलने पर तुरंत कराए इलाज इस बीमारी के मुख्य लक्षण सांस फूलना, छाती में दर्द होना, ऐसा दर्द जो कभी न हुआ हो, पसीने आना व बेहोश हो जाना, यह ब्लड प्रेशर नीचे गिर जाना यह दिल के दौरे पड़ने के प्रमुख लक्षण हैं। यदि इस प्रकार की कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर उसके परामर्श से दवा लेना शुरू कर दें। अन्यथा कहीं दिल का दौरा पड़ गया तो कहीं ऐसा ना हो की छोटी सी लापरवाही में आपकी जान चली जाए। शुगर बीपी रखें कंट्रोल यदि इस बीमारी से बचाव चाहते हैं तो स्वस्थ जीवन अपने प्रत्येक दिन व्यायाम करें, शुगर या ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी से ग्रसित है तो उसे कंट्रोल रखें. अच्छी क्वालिटी का तेल इस्तेमाल करें, उल्टी सीधी चीजों का परहेज करें, ज्यादा मीठा व ड्राई फ्रूट खाना ना खाएं, जंक फूड का सेवन ज्यादा ना करें क्योंकि यह आपकी समस्या को बढ़ा सकता है. छोटी सी लापरवाही आपकी जान तक ले सकता है. क्योंकि दिल के दौरे पड़ने से अधिकतर लोगों की जान चली जाती है ऐसे में आप छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें जिससे दिल के डर आपको ना पड़े और इसे गंभीर बीमारी से बचे रहें. छोटी सी लापरवाही से जा सकती है दिल के दौरे से जान पहले यह देखा जाता था कि बड़े लोगों में यह बीमारी होती थी लेकिन खान-पीन पर विशेष ना ध्यान देना और लाइफस्टाइल बदलकर जीने से यह कम उम्र के लोगों में भी बीमारी देखी जा रही है. क्योंकि अस्पतालों में अब 20% ऐसे आ रहे हैं जो जवानों में भी यह बीमारी देखी जा रही है ऐसे में अपने सेहत का विशेष ध्यान रखते हुए कुछ चीजों का परहेज करें और समय-समय पर व्यायाम करते रहें जिससे दिल के दौरे जैसी बीमारी से दूर रहे क्योंकि दिल के दौरे जैसी बीमारी से आपकी जान जा सकती है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 10, 2026, 13:31 IST
हर वक्त ईयरफोन यूज करने से खराब हो जाएंगे कान ! बहरा होने से बचाएगा 60/60 रूल, तुरंत करें फॉलो

Last Updated:March 10, 2026, 13:08 IST Earphone-Induced Hearing Loss: घंटों ईयरफोन का इस्तेमाल करने से युवाओं में बहरापन बढ़ रहा है. कानों की नाजुक कोशिकाएं तेज आवाज से स्थायी रूप से डैमेज हो सकती हैं. इस जोखिम को कम करने के लिए 60/60 नियम फॉलो करना फायदेमंद है. इस नियम के तहत 60% वॉल्यूम पर 60 मिनट से ज्यादा म्यूजिक नहीं सुनना चाहिए. इससे कान सुरक्षित रहेंगे. ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक होता है. Doctor Tips To Prevent Hearing Loss: आजकल ईयरफोन, एयरपॉड्स और हेडफोन का ट्रेंड बेहताशा बढ़ गया है. हर जगह लोग कान में इस तरह की डिवाइस लगाए नजर आते हैं. म्यूजिक सुनना सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन हर वक्त इन डिवाइस का इस्तेमाल कानों के लिए खतरनाक हो सकता है. सुकून और मनोरंजन के चक्कर में अधिकतर लोग कई घंटे तक ईयरफोन, हेडफोन या एयरपॉड्स लगाए रहते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ईयरफोन का हद से ज्यादा इस्तेमाल करने से लोगों के कान खराब हो रहे हैं और उनके सुनने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही है. अब तक कई रिसर्च में भी यह बात साबित हो चुकी है. ऐसे में सवाल है कि कानों को बचाने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कैसे किया जाए? दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में ENT विभाग की लीड कंसल्टेंट डॉ. दीप्ति सिन्हा ने HT को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि ईयरफोन का अत्यधिक उपयोग कानों को परमानेंट डैमेज पहुंचा सकता है. आजकल इस वजह से युवाओं में बहरेपन की समस्या बढ़ रही है. एक जमाने में बुजुर्गों में यह परेशानी होती थी, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. ईयरफोन से होने वाले नुकसान के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते हैं. शोर के कारण होने वाला बहरापन (Noise-induced hearing loss) बहुत धीमी गति से और बिना किसी दर्द के होता है. जब तक व्यक्ति को यह एहसास होता है कि उसे कम सुनाई दे रहा है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है और नुकसान स्थायी हो चुका होता है. आज के युवा घंटों तेज आवाज में गाने सुनते हैं, जो उनके आंतरिक कान की नाजुक कोशिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे भविष्य में गंभीर सुनने की समस्याएं पैदा हो रही हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर्स की मानें तो हमारे कान के अंदर बेहद सेंसिटिव हेयर सेल्स होते हैं, जो साउंड वेव्स को ब्रेन तक पहुंचाते हैं. जब हम 85 डेसिबल से अधिक की आवाज पर म्यूजिक सुनते हैं, तो ये कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं. ये कोशिकाएं शरीर के अन्य अंगों की तरह दोबारा रीजेनरेट नहीं होती हैं. एक बार अगर ये कोशिकाएं डैमेज हो गईं, तो आपकी सुनने की क्षमता हमेशा के लिए चली जाती है. तेज आवाज इन कोशिकाओं के लिए किसी शारीरिक चोट की तरह होती है, जो धीरे-धीरे उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देती है. ऐसे में लोगों को बहरेपन से बचने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कम करना चाहिए. डॉक्टर ने बताया कि ईयरफोन का इस्तेमाल करते वक्त 60/60 रूल फॉलो करना चाहिए. इस नियम के अनुसार आपको अपने ईयरफोन का वॉल्यूम 60% से ऊपर नहीं ले रखना चाहिए और एक बार में 60 मिनट से ज्यादा समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. भले ही आप धीमी आवाज में सुन रहे हों, फिर भी कान के पर्दे और ऑडिटरी सिस्टम को आराम की जरूरत होती है. इसलिए हर एक घंटे के उपयोग के बाद कम से कम 5-10 मिनट का ब्रेक जरूर लें, ताकि आपके कान रिकवर कर सकें. अगर आप लगातार ईयरफोन यूज करेंगे, तो कानों को ज्यादा नुकसान होगा. अक्सर लोग बस, ट्रेन या भीड़भाड़ वाली जगहों पर बाहर का शोर कम करने के लिए ईयरफोन की आवाज बहुत तेज कर देते हैं, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है. इसके विकल्प के रूप में नॉयस-कैंसलिंग ईयरफोन इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. ये ईयरफोन बाहर के शोर को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे आपको आवाज तेज करने की जरूरत नहीं पड़ती और आप धीमी आवाज में भी स्पष्ट सुन पाते हैं. यह एक छोटा सा कदम आपके कानों को बहरेपन से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अगर आपको कानों में लगातार घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देती है, आवाजें दबी-दबी लगती हैं या भीड़ में लोगों की बातें समझने में कठिनाई होती है, तो इन्हें नजरअंदाज न करें. ये शुरुआती संकेत हैं कि आपके कान खतरे में हैं. इसके अलावा जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, उन्हें साल में एक बार ईएनटी विशेषज्ञ से चेकअप जरूर कराना चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 13:04 IST
देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने सुबह मंदिर पहुंचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और ठंडे भोजन का भोग अर्पित किया। शहर के गोया स्थित शीतला माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और आरती उतारी। इस पर्व पर एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता को अर्पित करने की परंपरा होती है। एक रात पहले बनाकर रखती हैं खाना, अगले दिन खाती हैं पूजा करने पहुंची श्वेता चौधरी ने बताया कि शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं एक रात पहले ही भोजन बनाकर रखती हैं और अगले दिन ठंडा होने पर माता शीतला को भोग लगाती हैं। इसके बाद परिवार के लोग वही प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि शीतला सप्तमी का व्रत रखने और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग, इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने; 2018 में 1.08 लाख, 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने अपना देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’
राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’
बेहरुजबेक टूचिव की जटिल स्पाइन सर्जरी मैक्स हॉस्पिटल में सफल.

Last Updated:March 10, 2026, 12:51 IST उज्बेकिस्तान के 16 वर्षीय बेहरुजबेक टूचिव रीढ़ की हड्डी की सफल सर्जरी की गई है. इस लड़के को परिवारी बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल लेकर आया था. जहां डॉ. जितेश मंगवानी की टीम ने सफल सर्जरी कर राहत दी. दिल्ली मैक्स में उज्बेकिस्तान से आए मरीज की सफल सर्जरी की गई. कुछ दिन पहले उज्बेकिस्तान से 16 साल का लड़का बेहरुजबेक टूचिव भारत आया. वह अपने परिवार के साथ यहां घूमने नहीं आया था बल्कि एक बेहद जटिल बीमारी को लेकर आया, जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी मुड़ गई थी और उसकी पीठ पर एक कूबड़ उभर आया था. उसकी हालत इतनी खराब थी कि न तो वह चल सकता था और न ही सीधा खड़ा हो सकता था. यहां तक कि दर्द के चलते वह बिस्तर पर पीठ के बल सो भी नहीं सकता था. भारत के अस्पतालों और डॉक्टरों के बारे में जानकारी करने के बाद यहां दिल्ली आया परिवार शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचा, जहां मरीज को देखकर एकबारगी डॉक्टरों को भी अचंभा हुआ क्योंकि इस मरीज की कमर पिछले पांच साल से ज्यादा समय से मुड़ी हुई थी और दो बार उज्बेकिस्तान में र्की गई सर्जरी फेल हो गई थीं. दूसरी सर्जरी के बाद भी हड्डी का मुड़ना बंद नहीं हो रहा था.ऐसे में यह बड़ी चुनौती थी कि पहले से दो बार ऑपरेट हो चुकी स्पाइन को पूरी तरह ठीक किया जाए. हालांकि मरीज को देखने के बाद ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. जितेश मंगवानी और डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि उसकी रीढ़ की हड्डी बहुत सख्त और मुड़ी हुई (काइफोस्कोलिओसिस) थी, जिसके कारण कूबड़ निकल गया था और शारीरिक संतुलन बिगड़ गया था. रीढ़ की हड्डी को सीधा करने के लिए प्लान्ड रिवीजन डीफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी कराने की सलाह दी गई. इस बार चुनौती इसलिए भी ज्यादा बड़ी थी, क्योंकि उनकी रीढ़ की हड्डी पर पहले ही दो बार ऑपरेशन हो चुका था. इन ऑपरेशंस के कारण हड्डी बहुत सख्त हो गई थी और चारों ओर स्कार टिश्यू बन गए थे. सर्जरी के दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधा और स्थिर करने के लिए विशेष स्क्रू एवं रॉड का प्रयोग किया गया. साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग की गई. इसके बाद उसकी रीढ़ (स्पाइन) की बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. अस्पताल में हुई सफल सर्जरी से अब वह किशोर फिर से सीधे खड़े होने और चलने में सक्षम हो गया. इतना ही नहीं उसे लगातार दर्द से राहत मिली और उसके लिए सामान्य जीवन में लौटना और आत्मविश्वास के साथ चलना भी संभव हुआ. इस मामले को लेकर डॉ. जितेश मंगवानी ने कहा , ‘स्पाइन सर्जरी के मामले में पहले हो चुकी सर्जरी के बाद रिवीजन स्पाइन डीफॉर्मिटी करेक्शन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे मामलों में पहले की सर्जरी के कारण रीढ़ की हड्डी सख्त हो जाती है और महत्वपूर्ण जगहों पर स्कार टिश्यू बन जाते हैं. इससे खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. इस मामले में सावधानी के साथ योजना बनाते हुए, सटीक तकनीक की मदद से और लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग करते हुए हम रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित तरीके से सीधा करने में सक्षम रहे. सर्जरी के अगले ही दिन मरीज सीधा खड़ा होने और चलने में सक्षम हो गया. इससे उसे आराम, संतुलन और आत्मविश्वास वापस मिला.’ सर्जरी के बाद, एक्स-रे से पता चला कि मरीज के शोल्डर एवं पेल्विस का अलाइनमेंट सही हो गया है. अगले ही दिन वह बिना किसी सहारे के चलने लगा. सर्जरी के तुरंत बाद फिजियोथेरेपी, सांस से संबंधित कुछ व्यायाम और पोश्चर ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी गई और स्थिति स्थिर होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. किशोर को पोश्चर का ध्यान रखने और फॉलो-अप को लेकर स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं. रीढ़ की हड्डी से संबंधित ऐसे जटिल उपचारों (कॉम्प्लेक्स स्पाइन करेक्शन) के साथ मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने स्पाइन डीफॉर्मिटी के चुनौतीपूर्ण मामलों के मैनेजमेंट में अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ाया है. इससे मरीजों को अधिक आरामदायक एवं सक्रिय जीवन देना संभव हुआ है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीनियर हेल्थ रिपोर्टर काम कर रही हैं. इन्हें पिछले 14 साल से फील्ड में रिर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है. इससे पहले ये हिंदुस्तान दिल्ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 12:51 IST
नहर में डूबे नाबालिग का 45 घंटे बाद शव मिला:दूसरे बच्चे की तलाश जारी, बहते हुए 10 किमी दूर पहुंचा

सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र अंतर्गत चोरमारी गांव से निकली बाणसागर परियोजना की पुरवा नहर में रविवार दोपहर डूबे दो नाबालिग बच्चों में से एक का शव लगभग 45 घंटे बाद मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने यह शव रामपुर बाघेलान के नेमुआ गांव के पास नहर में तलाशी अभियान के दौरान पाया, जो घटना स्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर है। जानकारी के अनुसार, चोरमारी गांव निवासी दो नाबालिग बच्चे रविवार को पुरवा नहर में नहाने के लिए गए थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे तेज बहाव में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचित किया। एक बच्चे का शव मिला दूसरे की तलाश जारी इसके बाद प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से खोजबीन शुरू की गई। लगातार करीब दो दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद मंगलवार को एक बच्चे का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान 13 वर्षीय आयुष विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, दूसरे बच्चे 15 वर्षीय आर्यन मिश्रा की तलाश अभी भी जारी है। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम नहर के विभिन्न हिस्सों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। प्रशासन ने आसपास के ग्रामीणों से भी अपील की है कि यदि नहर में किसी प्रकार की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। इस मामले से जुड़ी यह खबर पढ़ें… सतना की पुरवा नहर में दो नाबालिग डूबे सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के ग्राम चोरमारी स्थित पुरवा नहर में रविवार दोपहर करीब 2 बजे नहाते समय दो नाबालिग डूब गए। 15 वर्षीय आर्यन और 13 वर्षीय आयुष क्रिकेट खेलने के बाद नहाने उतरे थे और गहरे पानी में चले गए। पूरी खबर पढ़ें…
मटर समोसा: सिर्फ 2 कप हरे मटर से खरीदा हुआ खस्ता मिनी समोसा, आलू की कोई जरूरत नहीं

मिनी मटर समोसा: सर्डियां अब जा चुकी हैं, इसके साथ ही ताजी हरी मटर का सीजन भी खत्म होने वाला है। ऐसे में घर पर कुछ नया और स्वादिष्ट बनाने का यह आखिरी मौका है। एक आसान और अनोखी रेसिपी के बारे में हम आपको बता रहे हैं। इसका नाम है- मिनी मटर समोसा रेसिपी। इसमें आलू की बिल्कुल जरूरत नहीं है और सिर्फ 2 कप ताजी हरी मटर से बनी सारी खस्ता-खस्ता-क्रिस्पी छोटे समोसे तैयार हो जाते हैं. यह रेसिपी खास इसलिए है क्योंकि स्टफिंग में मटर को मुख्य हीरो बनाया गया है। समोसे अंदर से नमकीन नहीं होते और बाहर से एकदम खस्ता रहते हैं। ये रेसिपी तलाकशुदा है। समोसे का कुरकुरापन आहार पर प्रतिबंध है। 2 कप मैदा लें, थोड़ी कलौंजी, अजेय और नमक। अब इसमें ऑटोमोबाइल मशीनरी मैदे को महान से राँचें, जब तक ढोल नगाड़े लग गए। फिर थोड़ा-थोड़ा पानी सख्ती से आटा गूंथ लें और 10 मिनट बढ़ाकर रख दें। 2 कप ताजी हरी मटर को लहसुन की कलियों में पीस लीजिये और हरी मिर्च के साथ दरदरा पीस लीजिये. ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक नहीं, इसलिए क्रंच बना रहे। एक पैन में तेल गर्म करके जीरा चटकाएं, फिर 4 बेसन असेंबली पर स्टॉक जब तक सोंधी संगत आ जाए। बेसन एलबम सोख लेट जाता है और समोसे को सूखा रहता है। अब मटर का पेस्ट डालें, 5 मिनट। नमक, अन्य जीरा पाउडर, हल्दी और चाट मसाला समग्र स्टफिंग आवश्यक होने के उपाय। एसोसिएट्स की छोटी लो रिले लें, ओवल बेलें, बीच से फ़्लोरिडा। सेमी-सरकल पानी से किनारे चिपकाएँ, फिर से कोन निर्धारित करें। अब स्टफिंग भरें, फिर ऊपर सील करें। ये बन गई आपकी समोसे की झलक, अब बस इसे गर्म तेल में मध्यम आंच पर सुनहरा होने तक तलें। यह रेसिपी घरेलू रसोई में आसानी से बन जाती है और चाय के साथ प्रभावकारी है। मटर सीज़न ख़त्म होने से पहले इसे अवश्य देखें। खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लगता।
कर्नाटक सत्ता संघर्ष: शिवकुमार की दिल्ली यात्रा, सिद्धारमैया की टिप्पणियों से फिर से नेतृत्व की चर्चा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 12:37 IST भाजपा ने नियमित दौरे के शिवकुमार के दावों को खारिज कर दिया है और कहा है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए आंतरिक संघर्ष निर्णायक चरण में पहुंच गया है। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (दाएं) और सीएम सिद्धारमैया (बाएं) (छवि: एक्स) राज्य के बजट सत्र के समापन के बाद कर्नाटक में राजनीतिक माहौल चरम पर पहुंच गया है, क्योंकि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की नई दिल्ली की रणनीतिक यात्रा ने लंबे समय से अफवाह वाले नेतृत्व परिवर्तन के बारे में नई अटकलों को हवा दे दी है। जबकि शिवकुमार आधिकारिक तौर पर कहते हैं कि उनकी यात्रा नेताओं को शामिल करने और एक पारिवारिक शादी में भाग लेने सहित पार्टी के संगठनात्मक कार्यों पर केंद्रित है, राष्ट्रीय राजधानी में उनकी उपस्थिति को कई लोगों ने सत्ता-साझाकरण समझौते के कार्यान्वयन के लिए एक धक्का के रूप में व्याख्या की है। कर्नाटक भवन में पत्रकारों से बात करते हुए, शिवकुमार अपनी विशिष्ट बैठकों के बारे में विशेष रूप से अज्ञात रहे, उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वह सार्वजनिक रूप से अपने यात्रा कार्यक्रम का खुलासा नहीं कर सकते। उन्होंने टिप्पणी की, ”जब मैं दिल्ली आता हूं तो हर किसी से मिलता हूं।” उन्होंने कहा कि अक्सर उनके बारे में कहा जाता है कि वे वरिष्ठ नेताओं का ”इंतजार” कर रहे हैं और इसलिए वे ऐसा कर रहे होंगे। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि उनका ध्यान केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में अपने कर्तव्यों पर केंद्रित है, यह देखते हुए कि वह इस भूमिका में अपनी छह साल की सालगिरह मनाने के लिए कल विधायकों के लिए एक प्रमुख रात्रिभोज पार्टी की मेजबानी कर रहे हैं। हालांकि, विपक्षी भाजपा ने उपमुख्यमंत्री के नियमित दौरे के दावों को खारिज कर दिया है और कहा है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए आंतरिक संघर्ष निर्णायक चरण में पहुंच गया है। वरिष्ठ भाजपा नेता सुरेश कुमार ने आरोप लगाया कि शिवकुमार अपना समय बर्बाद कर रहे हैं, विशेष रूप से शीर्ष पद पर अपना दावा सुरक्षित करने से पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के रिकॉर्ड सत्रहवें बजट की प्रस्तुति का इंतजार कर रहे हैं। गहराते विभाजन की इस कहानी को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के हालिया उद्दंड बयानों से बल मिला है, जिन्होंने हाल ही में पूर्ण कार्यकाल की अपनी इच्छा का संकेत दिया था। एक सार्वजनिक बातचीत के दौरान, सिद्धारमैया ने अपना कार्यकाल जारी रखने की तैयारी पर जोर देते हुए कहा, “अगर आलाकमान मुझे अनुमति देता है तो मैं दो और बजट पेश करूंगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर निर्भर है, लेकिन उन्हें उनके समर्थन पर पूरा भरोसा है। जैसे ही दोनों नेताओं ने अपने-अपने रुख का संकेत दिया, अब सभी की निगाहें आलाकमान के अगले कदम और बेंगलुरु में कल के विधायक रात्रिभोज के महत्व पर टिक गई हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 10, 2026, 12:37 IST समाचार राजनीति कर्नाटक सत्ता संघर्ष: शिवकुमार की दिल्ली यात्रा, सिद्धारमैया की टिप्पणियों से नेतृत्व की चर्चा फिर से शुरू अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीति(टी)कर्नाटक बजट सत्र(टी)डीके शिवकुमार(टी)नेतृत्व परिवर्तन(टी)सत्ता-साझाकरण समझौता(टी)केपीसीसी अध्यक्ष(टी)मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(टी)भाजपा विपक्ष
निमाड़ में गणगौर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में:14 मार्च से जवारे बोए जाएंगे, 22 को माता की होगी विदाई

बड़वानी जिले के अंजड़ नगर सहित समूचे निमाड़ अंचल में प्रमुख आस्था पर्व गणगौर को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। पर्व के आगमन से पहले ही श्रद्धालु माता के स्वागत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार करने का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। अंजड़ के कारीगर हिमांशु चौहान पिछले दो-तीन वर्षों से गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार कर रहे हैं। वे पीओपी और लकड़ी की सहायता से आकर्षक रथ बनाते हैं और उन्हें पारंपरिक ढंग से सजाते हैं। उनके द्वारा बनाए गए रथों की मांग निमाड़ के कई कस्बों और शहरों में रहती है। बड़वानी और खरगोन जिले के ठीकरी, खरगोन, सनावद सहित अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु रथ लेने पहुंचते हैं। हिमांशु चौहान ने बताया कि एक रथ की कीमत करीब 7 हजार रुपये रखी गई है। यदि कोई श्रद्धालु गणगौर माता और ईश्वर राजा के दोनों रथ एक साथ लेता है, तो उन्हें 13 हजार रुपये में उपलब्ध कराए जाते हैं। पर्व के नजदीक आते ही रथों की मांग बढ़ जाती है और कारीगर इन्हें समय पर तैयार करने में जुटे रहते हैं। गणगौर पर्व निमाड़ क्षेत्र की आस्था और परंपरा से जुड़ा एक प्रमुख त्योहार है। पूरे निमाड़ अंचल में सैकड़ों स्थानों पर गणगौर माता की मूठ स्थापित की जाती है, जहां श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष पर्व की परंपराओं के अनुसार 14 मार्च को जवारे बोए जाएंगे। इसके बाद सात दिनों तक पंडितों द्वारा माता की सेवा की जाएगी और जवारों को सींचा जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन सुबह और शाम श्रद्धालु सामूहिक रूप से माता की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 21 मार्च को बाड़ी के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस दिन भक्त रथ लेकर माता के दर्शन करने पहुंचेंगे और विधि-विधान से पूजा कर माता को अपने घर ले जाएंगे। इसी दिन रथ बौड़ाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर माता की पूजा कर जोड़े जिमाने की परंपरा का पालन करेंगे। पर्व का समापन 22 मार्च को गणगौर घाट पर माता के विसर्जन के साथ होगा।







