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फल खाना या जूस पीना, कौन सबसे ज्यादा फायदेमंद? डॉक्टर का जवाब पूरी गर्मी रखेगा आपको फिट, ट्राई करें

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Last Updated:March 20, 2026, 21:00 IST Fruit Vs Juice: मौसम के अनुसार शरीर को फिट रखने के लिए लोग खानपान पर खास ध्यान देने लगते हैं. इस दौरान डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि ज्यादा से ज्यादा मौसमी फलों का सेवन किया जाए. लेकिन, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि फल जूस बनाकर पीना ज्यादा सही है या सीधे चबाकर खाना बेहतर होता है. Health Tips: बदलते मौसम के साथ लोग अपने खान-पान में भी बदलाव करते हैं. खासकर गर्मी में विशेष ध्यान दिया जाता है. शरीर को ठंडा रखने और पानी की कमी से बचने के लिए लोग फलों का सेवन अधिक करते हैं. हालांकि, डॉक्टर भी मौसम के अनुसार फलों का सेवन करने की सलाह देते हैं. अभी गर्मी का मौसम चल रहा है और सीजनल तरबूज, खरबूजा, संतरा, मौसंबी, अंगूर, संतरा, ककड़ी, खीरा और केला जैसे फल खूब मिल रहे हैं. डॉक्टरों का मानना है कि ये फल शरीर को ठंडक देने के साथ ही जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं. हालांकि, लोग भी इन फलों का सेवन खूब कर रहे हैं. लेकिन, कुछ लोग इन फलों को काटकर खाना पसंद करते हैं, जबकि कई लोग इनका जूस बनाकर पीते हैं. अब ऐसे में कई बार लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि फल का जूस बनाकर पीना ज्यादा फायदेमंद है या सीधे चबाकर खाना बेहतर होता है. स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है? और यही कारण है कि दोनों तरीकों को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन बना रहता है. जानें असल में क्या है सही तरीका… एक्सपर्ट ने बताया क्या है सही तरीकाइस सवाल का जवाब जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संतोष मौर्य से बात की. उन्होंने बताया कि फल किसी भी रूप में खाए जाएं, शरीर को फायदा जरूर मिलता है. लेकिन, अगर सही तरीके की बात करें तो फलों को चबाकर खाना ज्यादा अच्छा होता जाता है. उनका मानना है कि विशेष रूप से गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है. मौसमी फल इस काम में सबसे ज्यादा मदद करते हैं. ये न सिर्फ पानी की कमी को पूरा करते हैं, बल्कि शरीर को ठंडा भी रखते हैं और लू से बचाव करते हैं. चबाकर खाने से ज्यादा फायदेजब हम फल को अच्छे से चबाकर खाते हैं तो उसमें मौजूद फाइबर शरीर को पूरा मिलता है. फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और पेट साफ रखने में मदद करता है. इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं कम होती हैं. वहीं, चबाने की प्रक्रिया के दौरान मुंह में लार बनती है. यह लार खाने को नरम बनाकर उसे पचाने में मदद करती है. इससे शरीर को फल के पोषक तत्व सही तरीके से मिल पाते हैं. यही कारण है कि डॉक्टर भी हमेशा धीरे-धीरे चबाकर खाने की सलाह देते हैं. जूस पीने में क्या दिक्कत?वहीं, अगर बात करें जूस की तो यह जल्दी तैयार हो जाता है और पीने में भी आसान होता है. लेकिन, सबसे बड़ी कमी ये कि इसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम रह जाती है. क्योंकि जूस बनाते समय गूदा अलग हो जाता है. जूस सीधे पेट में चला जाता है और इसमें चबाने की प्रक्रिया नहीं होती. इससे मुंह में लार नहीं बनती और पाचन सही तरीके से नहीं हो पाता. कई बार लोग जूस में स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी भी मिला देते हैं, जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है. कब पी सकते हैं जूसडॉक्टर बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को फल चबाने में दिक्कत होती है या वह जल्दी में है तो जूस भी पी सकता है. लेकिन कोशिश यही करनी चाहिए कि जूस में अतिरिक्त चीनी न मिलाई जाए और उसे ताजा ही पिया जाए. साथ ही पैकेट वाले जूस से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें प्रिजर्वेटिव और ज्यादा शुगर होती है. ये शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचा सकते हैं, इसलिए हमेशा ताजे फल या घर पर बने जूस को ही प्राथमिकता देनी चाहिए. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Khargone,Madhya Pradesh First Published : March 20, 2026, 21:00 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Lakme Fashion Week 2026 Mumbai Inauguration

Lakme Fashion Week 2026 Mumbai Inauguration

24 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में ‘लैक्मे फैशन वीक 2026’ (LFW) की शुरुआत हो चुका है। 19 मार्च से शुरू हुए इस पांच दिन के फैशन इवेंट के पहले दिन कई बड़े डिजाइनर्स ने अपना लेटेस्ट कलेक्शन पेश किया। इवेंट में शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान, अनन्या पांडे, डेजी शाह, कुब्रा सेठ और राधिका मदन जैसे सेलेब्स शामिल हुए। वहीं एक्टर सिद्धार्थ और हार्दिक पांड्या की गर्लफ्रेंड मॉडल माहिका शर्मा भी फोकस में रहे। पहले दिन ‘द बॉयज क्लब’ से लेकर अनामिका खन्ना के ‘AK|OK’ लेबल तक, रैंप पर ट्रेडिशनल और मॉडर्न स्टाइल का शानदार फ्यूजन देखने को मिला। देखें इवेंट की तस्वीरें एक्ट्रेस डेजी शाह लेकमे फैशन वीक में शामिल हुईं। एक्ट्रेस कुब्रा सेठ व्हाइट आउट्फिट में नजर आईं। सिंगर पपोन अपनी पत्नी के साथ इवेंट में शामिल हुए। अनन्या पांडे ने फैशन वीक में रैंप वॉक की। इवेंट में राधिका मदान ने रैंप वॉक की। फैशन वीक में शाहरुख खान की पत्नी गौरी खान भी शामिल हुईं। अनामिका खन्ना के आउटफिट में पहुंची माहिका शर्मा पहले दिन का समापन मशहूर डिजाइनर अनामिका खन्ना के शो के साथ हुआ। उन्होंने अपने लेबल ‘AK|OK’ के तहत वर्सटाइल और ग्लैमरस आउटफिट्स पेश किए। मॉडल माहिका शर्मा अनामिका खन्ना के खास आउटफिट में रैंप पर उतरीं। इस कलेक्शन में धोती पैंट, रफल्ड टॉप, को-ऑर्ड सेट्स और फ्लोर लेंथ गाउन्स पर फोकस किया गया। अनामिका का यह कलेक्शन ‘ईज ऑफ शेप’ यानी आरामदायक और स्टाइलिश कपड़ों के लिए डिजाइन किया गया था। सिद्धार्थ का ‘देसी’ लुक और मेन्सवियर का जलवा डिजाइनर विवेक करुणाकरण के लिए साउथ और बॉलीवुड एक्टर सिद्धार्थ शोस्टॉपर बने। उन्होंने ब्राउन सिल्क कोट के साथ ड्रेप्ड धोती पैंट पहनी थी। उनके इस ‘अर्थी टोन’ (मिट्टी जैसे रंग) वाले लुक को दर्शकों ने काफी पसंद किया। सिद्धार्थ के अलावा ‘द बॉयज क्लब’ सेगमेंट में कंट्रीमेड, ध्रुव वैश और साहिल अनेजा जैसे डिजाइनर्स ने पुरुषों के लिए नए जमाने के फैशन ट्रेंड्स दिखाए। साड़ी और मॉडर्न डिजाइन का तालमेल डिजाइनर जोड़ी अब्राहम एंड ठाकुर ने फ्रेंच लाइफस्टाइल ब्रांड ‘L’Atelier 1664’ के साथ मिलकर ‘साड़ी-टोरियल’ कलेक्शन लॉन्च किया। इसमें भारतीय साड़ी को मॉडर्न फ्रेंच टच के साथ पेश किया गया। वहीं, ‘चोला’ ब्रांड ने ‘एकोस इन मोनोक्रोम’ प्रेजेंटेशन के जरिए सिर्फ ब्लैक और व्हाइट रंगों में बोल्ड और स्ट्रक्चर्ड डिजाइन दिखाए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

एक्ट्रेस राम्या ‘धुरंधर 2’ पर भड़कीं:रणवीर सिंह के बालों का उड़ाया मजाक; कहा- फिल्म देखने के बजाय पैसे बचाएं, OTT का इंतजार करें

एक्ट्रेस राम्या ‘धुरंधर 2’ पर भड़कीं:रणवीर सिंह के बालों का उड़ाया मजाक; कहा- फिल्म देखने के बजाय पैसे बचाएं, OTT का इंतजार करें

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है, लेकिन पूर्व लोकसभा सांसद और कन्नड़ एक्ट्रेस राम्या ने फिल्म की कड़ी आलोचना की है। 19 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म को देखने के बाद राम्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया। उन्होंने दर्शकों को सलाह दी है कि वे सिनेमाघरों में जाकर अपना समय और पैसा बर्बाद न करें, बल्कि इसके ओटीटी (OTT) पर आने का इंतजार करें। राम्या ने यह भी लिखा की लोग कह रहे हैं कि रणवीर ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाया है, लेकिन मुझे तो सिर्फ उनके बाल दिखाई दिए। डायरेक्शन और डायलॉग्स को बताया बेकार राम्या ने फिल्म के हर विभाग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने फिल्म के डायरेक्शन, डायलॉग्स, एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर को बहुत ही खराब (Subpar) बताया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि ऐसा लगता है जैसे मेकर्स ने डेडलाइन के दबाव में बिना सोचे-समझे फिल्म रिलीज कर दी। राम्या के मुताबिक, फिल्म को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे मेकर्स ने बस यह कह दिया हो कि “हां परफेक्ट है, भेज दो”, जबकि फिल्म में बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया। रणवीर सिंह के बालों पर कसा तंज फिल्म में रणवीर सिंह के परफॉर्मेंस पर कमेंट करते हुए राम्या ने काफी मजाकिया लहजे में निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “लोग कह रहे हैं कि रणवीर ने फिल्म को अपने कंधों पर उठाया है, लेकिन मुझे तो सिर्फ उनके बाल दिखाई दिए। फिल्म के पहले पार्ट में उनके बालों की एक पर्सनैलिटी थी, लेकिन इस पार्ट में वे सिर्फ दृश्यों (Scenes) को ब्लॉक कर रहे हैं। उनके बालों को तो ‘बेस्ट सपोर्टिंग रोल’ के लिए नॉमिनेट कर देना चाहिए।” फिल्म की हिंसा और लॉजिक पर उठाए सवाल राम्या ने फिल्म में दिखाई गई अत्यधिक हिंसा की भी आलोचना की। उन्होंने फिल्म को ‘हथियारों का विजुअल हैंडबुक’ बताया, जिसमें सिरिंज और स्पैनर जैसी साधारण चीजों को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने फिल्म के लॉजिक पर सवाल उठाते हुए कहा, “दोनों पैर कटने और शरीर पर केरोसिन डालने के बाद भी किरदार ऐसे डायलॉग बोल रहा है जैसे वह किसी ‘टेड टॉक’ में हो। इसके लिए ऑस्कर नहीं बल्कि नोबेल प्राइज मिलना चाहिए। मेडिकल साइंस की जय हो।” जिंगोइज्म और प्रोपेगैंडा से बाहर निकलने की सलाह राम्या ने फिल्म को ‘बहुत बड़ी निराशा’ और ‘उबाऊ’ करार दिया। उन्होंने डायरेक्टर आदित्य धर को सलाह दी कि अब जिंगोइज्म (अंधराष्ट्रवाद) और प्रोपेगैंडा का जमाना पुराना हो गया है, इससे बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने रणवीर सिंह से भी कहा कि वे इस तरह की फिल्मों से कहीं बेहतर एक्टर हैं।

natural way to detox body| What Is Hydrotherapy: हाइड्रोथेरेपी क्या होता है? बॉडी डिटॉक्स का नेचुरल तरीका

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Last Updated:March 20, 2026, 20:11 IST What Is Hydrotherapy: हाइड्रोथेरेपी आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी हुई है. इससे बॉडी को डिटॉक्स करने से लेकर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद मिलती है. ख़बरें फटाफट Hydrotherapy Health Benefits: हाइड्रोथेरेपी एक वॉटर थेरेपी है, जो प्राकृतिक उपचार पद्धति का अहम हिस्सा है. इसमें अलग-अलग तापमान के पानी का उपयोग करके शरीर के दर्द को कम किया जाता है, विषैले तत्व बाहर निकाले जाते हैं और सेहत बेहतर बनाई जाती है. भारत में यह पद्धति आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी हुई है. इस थेरेपी का मुख्य उद्देश्य शरीर की “जीवन शक्ति” को मजबूत करना है, ताकि शरीर खुद बीमारियों से लड़ सके. प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार, जब हमारी दिनचर्या जैसे नींद, खानपान, व्यायाम या उपवास संतुलित नहीं रहते, तो शरीर कमजोर होने लगता है और रोग पैदा होते हैं. हाइड्रोथेरेपी पानी के जरिए शरीर को डिटॉक्स करती है, मांसपेशियों को आराम देती है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है और सूजन कम करती है. हाइड्रोथेरेपी कैसे की जाती है?हाइड्रोथेरेपी कई तरीकों से की जाती है, जैसे गर्म पानी में डुबकी लगाना, ठंडे पानी के पैक, स्टीम बाथ, स्विमिंग पूल में एक्सरसाइज या सिर पर बर्फ से मसाज. एक अध्ययन में माइग्रेन के 40 मरीजों को दो समूहों में बांटा गया. एक समूह को दवाओं के साथ हाइड्रोथेरेपी दी गई, जिसमें हाथ-पैर को गर्म पानी में डुबोना और सिर पर बर्फ की मालिश शामिल थी. दूसरे समूह को सिर्फ दवाएं दी गईं. 45 दिन बाद पाया गया कि हाइड्रोथेरेपी लेने वाले मरीजों में सिरदर्द की आवृत्ति और तीव्रता ज्यादा कम हुई. साथ ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार देखा गया, जो नर्वस सिस्टम के बेहतर काम करने का संकेत है. हाइड्रोथेरेपी के फायदेयह थेरेपी सिर्फ माइग्रेन तक सीमित नहीं है. यह पुराने दर्द, जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द, मांसपेशियों की जकड़न, गठिया और फाइब्रोमायल्जिया में भी राहत देती है. साथ ही तनाव और चिंता को कम करती है, क्योंकि गर्म पानी मांसपेशियों को ढीला करता है और तनाव हार्मोन घटाता है. इसके अलावा न्यूरोपैथी, COPD, अस्थमा, मोटापा और सर्जरी के बाद रिकवरी में भी यह उपयोगी है. हाइड्रोथेरेपी शरीर से टॉक्सिन्स निकालने, रक्त वाहिकाओं को सक्रिय करने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करती है. यह दवाओं के बजाय शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता पर भरोसा करती है. यह एक आसान, सुरक्षित और असरदार तरीका है, लेकिन इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, खासकर यदि कोई पुरानी या गंभीर बीमारी हो. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : March 20, 2026, 20:11 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

व्रत में आलू पराठा रेसिपी: व्रत में बोरियत होगी दूर, इस सीक्रेट ट्रिक से सिर्फ 10 मिनट में नरम आलू पराठा

व्रत में आलू पराठा रेसिपी: व्रत में बोरियत होगी दूर, इस सीक्रेट ट्रिक से सिर्फ 10 मिनट में नरम आलू पराठा

20 मार्च 2026 को 20:03 IST पर अपडेट किया गया व्रत वाले आलू पराठा रेसिपी: नवरात्रि व्रत में आप भी क्या साबूदाना खा-खा गए हैं बोर, तो ये रेसिपी आपके लिए है। इस सीक्रेट ट्रिक से सिर्फ दस मिनट में बना सकते हैं मुलायम आलू का पराठा। (टैग्सटूट्रांसलेट) व्रत रेसिपी (टी) नरम आलू पराठा (टी) फास्टिंग फूड हैक्स (टी) 10 मिनट की रेसिपी (टी) भारतीय व्रत नाश्ता (टी) ग्लूटेन फ्री पराठा (टी) नवरात्रि स्पेशल फूड (टी) आसान कुकिंग टिप्स

green vs yellow kiwi benefits | which kiwi is better for health | हरी और पीली कीवी में फर्क | सेहत के लिए कौन सी कीवी ज्यादा फायदेमंद है |

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Last Updated:March 20, 2026, 20:00 IST Green vs Yellow Which Kiwi is Better for Health: कीवी को विटामिन्स का पावरहाउस माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाली हरी और पीली (गोल्डन) कीवी में चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. बाहर से देखने में एक जैसी लगने वाली इन दोनों कीवी के स्वाद, बनावट और पोषण में काफी अंतर होता है. जहां हरी कीवी अपने खास खट्टे-मीठे स्वाद और फाइबर के लिए जानी जाती है, वहीं पीली कीवी अपनी मिठास और भारी मात्रा में विटामिन C के लिए मशहूर है. अगर आप अपनी डाइट में सही कीवी शामिल करना चाहते हैं, तो इनके बीच का यह बारीक फर्क समझना आपके लिए बहुत जरूरी है. हरी और पीली कीवी दोनों ही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं, लेकिन अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर खरीदें कौन सी. बाहर से दिखने में भले ये फल एक जैसे लगें, लेकिन इनके स्वाद, पोषक तत्व और शरीर पर असर में थोड़ा अंतर होता है. अगर आप भी हेल्थ को ध्यान में रखकर सही विकल्प चुनना चाहते हैं, तो दोनों कीवी के बीच का फर्क जानना बेहद जरूरी है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि हरी कीवी का स्वाद हल्का खट्टा और ताजगी भरा होता है, जो इसे गर्मियों में बेहद रिफ्रेशिंग बनाता है. इसमें विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें फाइबर भी अच्छा होता है, जो पाचन को दुरुस्त रखता है. अगर आपको हल्का खट्टा स्वाद पसंद है और पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, तो हरी कीवी आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है. वहीं पीली कीवी, जिसे गोल्डन कीवी भी कहा जाता है, स्वाद में ज्यादा मीठी और जूसी होती है. इसमें विटामिन C की मात्रा हरी कीवी से भी ज्यादा होती है, जो स्किन को ग्लोइंग बनाने और शरीर को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है. इसका टेक्सचर मुलायम होता है, जिससे इसे खाना आसान लगता है. जो लोग खट्टा कम और मीठा ज्यादा पसंद करते हैं, उनके लिए पीली कीवी बेहतर चॉइस हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर पोषण की बात करें तो दोनों ही कीवी में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. हरी कीवी में जहां फाइबर ज्यादा होता है, वहीं पीली कीवी में विटामिन और मिनरल्स की क्वालिटी थोड़ी ज्यादा मानी जाती है. इसलिए अगर आपका फोकस पाचन पर है तो हरी कीवी चुनें, और अगर स्किन और इम्युनिटी पर ध्यान देना है तो पीली कीवी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है. वजन घटाने वालों के लिए भी कीवी एक शानदार फल है. हरी कीवी में फाइबर ज्यादा होने के कारण यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है, जिससे ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. वहीं पीली कीवी मीठी जरूर होती है, लेकिन इसमें कैलोरी ज्यादा नहीं होती, इसलिए यह भी डाइट में शामिल की जा सकती है. बस मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है ताकि बैलेंस बना रहे. स्किन के लिए अगर आप खास तौर पर कुछ ढूंढ रहे हैं, तो पीली कीवी आपको बेहतर रिजल्ट दे सकती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को अंदर से हेल्दी बनाते हैं और टैनिंग कम करने में मदद करते हैं. हालांकि हरी कीवी भी स्किन के लिए फायदेमंद है, लेकिन पीली कीवी का असर थोड़ा जल्दी दिख सकता है. इसलिए ग्लोइंग स्किन के लिए इसे डाइट में शामिल करना अच्छा रहेगा. खरीदते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कीवी हमेशा हल्की सॉफ्ट होनी चाहिए, बहुत ज्यादा सख्त या बहुत ज्यादा गली हुई नहीं होनी चाहिए. हरी कीवी की स्किन पर हल्के बाल होते हैं, जबकि पीली कीवी की स्किन स्मूद होती है. इन छोटे-छोटे अंतर को पहचानकर आप सही और ताजी कीवी खरीद सकते हैं, जिससे आपको पूरा पोषण मिल सके. First Published : March 20, 2026, 20:00 IST

अनूपपुर में अवैध रेत से भरे दो ट्रैक्टर जब्त:दो ड्राइवर्स गिरफ्तार, ये दोनों ही वाहन मालिक; बिना रॉयल्टी ले जा रहे थे

अनूपपुर में अवैध रेत से भरे दो ट्रैक्टर जब्त:दो ड्राइवर्स गिरफ्तार, ये दोनों ही वाहन मालिक; बिना रॉयल्टी ले जा रहे थे

अनूपपुर जिले की फुनगा चौकी पुलिस ने शुक्रवार को दो अलग-अलग जगहों पर दबिश देकर अवैध रेत ले जा रहे दो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त किया। इस कार्रवाई में करीब 12 लाख रुपए से ज्यादा का माल पकड़ा गया है। पहली कार्रवाई गोडारू नदी इलाके में हुई, जहां ग्राम छिल्पा की तरफ आ रहे एक ट्रैक्टर को रोका गया। ड्राइवर कोमल पाव रेत से जुड़े कोई भी कागजात नहीं दिखा सका, जिसके बाद 5 लाख 3 हजार रुपए की संपत्ति जब्त कर ली गई। दोपहर में दूसरी कार्रवाई पहली कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद पुलिस को दूसरी खबर मिली। इस बार कठना नदी क्षेत्र से ग्राम बम्हनी की ओर जा रहे एक और ट्रैक्टर को घेरा गया। इसका ड्राइवर विक्रम सिंह भी बिना किसी रॉयल्टी या दस्तावेज के रेत ले जा रहा था। पुलिस ने इस ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित करीब 7 लाख 3 हजार रुपए का माल जब्त किया। खास बात यह है कि पकड़े गए दोनों ड्राइवर ही इन वाहनों के मालिक निकले। रेत माफियाओं में हड़कंप फुनगा पुलिस की इस सख्ती से इलाके के खनिज माफियाओं में खौफ का माहौल है। दो दिन पहले भी पुलिस ने रेत चोरी के आरोप में तीन ट्रैक्टर जब्त किए थे। केस दर्ज पुलिस ने दोनों मामलों में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), मोटर वाहन अधिनियम और खान एवं खनिज अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। फिलहाल दोनों आरोपियों को गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया है, लेकिन पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Kajal Benefits For Eyes | kajal benefits for eyes in hindi | काजल के फायदे |

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सहारनपुर: आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. दादी-नानी के नुस्खों से लेकर आधुनिक मेकअप किट तक, काजल हर किसी की पसंद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि काजल सिर्फ एक श्रृंगार की वस्तु नहीं, बल्कि आंखों के लिए एक औषधि भी है? आयुर्वेद के अनुसार, सही तरीके से बना काजल न केवल आपकी आंखों को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि यह कई गंभीर संक्रमणों से भी बचाता है. सहारनपुर के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. हर्ष ने बताया है कि कैसे घर पर तैयार किया गया काजल आपकी और आपके बच्चों की आंखों की रोशनी को नई शक्ति दे सकता है. आंखों के लिए काजल: सिर्फ सुंदरता नहीं, सेहत का राजअक्सर हम देखते हैं कि महिलाएं अपने छोटे बच्चों की आंखों में प्रतिदिन काजल लगाती हैं. बड़े व्यक्ति भी अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाना काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि यह काजल आंखों को किस तरह का फायदा पहुंचाता है? आयुर्वेद के अनुसार, आंखों में घर का बना या अच्छी गुणवत्ता वाला काजल लगाना न केवल सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि यह आंखों को प्राकृतिक ठंडक और पोषण भी प्रदान करता है. आज के प्रदूषण भरे माहौल में आंखों की थकान, सूजन और संक्रमण एक आम समस्या बन गई है. ऐसे में प्राकृतिक काजल इन समस्याओं से लड़ने में रामबाण सिद्ध होता है. काजल लगाने के आयुर्वेदिक लाभप्राकृतिक या घर के बने काजल (जैसे कपूर, घी और अरंडी के तेल से निर्मित) आंखों में ताजगी और शीतलता लाते हैं. इससे जलन और थकान से तुरंत राहत मिलती है. काजल में मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण कीटाणुओं को मारकर आंखों को खतरनाक इन्फेक्शन से बचाते हैं. यह आंखों के रूखेपन को कम करता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही, यह आंखों में धूल और बाहरी प्रदूषण को जाने से रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. क्या कहते हैं आयुर्वेद विशेषज्ञ?आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से विशेष बातचीत में बताया कि आंखों में काजल लगाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. उन्होंने कहा, ‘काजल आंखों की रोशनी को बढ़ाता है और आंखों में कफ इकट्ठा नहीं होने देता.’ डॉ. हर्ष ने आयुर्वेदिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि ‘अष्टांग हृदयम’ में अंजन (काजल) के प्रयोग का स्पष्ट वर्णन है. जब आंखों में खुजली हो, चिपचिपापन महसूस हो, या धूल के कण जैसा अहसास हो, तो अंजन का प्रयोग करना चाहिए. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति वातज, कफज या पित्तज दोषों से संबंधित नेत्र रोगों से पीड़ित है, तो उसे भी औषधीय काजल का प्रयोग कराया जा सकता है. बच्चों के लिए क्यों जरूरी है काजल?भारतीय परंपरा में बच्चों को काजल लगाना अनिवार्य माना जाता है. इसके पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों कारण हैं. डॉ. हर्ष के अनुसार, बच्चों को काजल लगाने से उनकी आंखों की रोशनी अच्छी होती है और आंखें बड़ी व सुंदर दिखाई देती हैं. पारंपरिक रूप से इसे बच्चों को ‘बुरी नजर’ से बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जो समाज में गहरी आस्था का विषय है. घर पर काजल तैयार करने की सरल विधिबाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त काजल के बजाय घर पर शुद्ध काजल बनाना बेहद आसान है. डॉ. हर्ष ने इसकी विधि साझा करते हुए बताया:1. सबसे पहले शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं.2. इस जलते हुए दीपक के ऊपर थोड़ी दूरी पर एक दूसरा खाली दीपक या प्लेट रख दें.3. जलते हुए दीपक की कालिख (कालस) धीरे-धीरे ऊपर रखे बर्तन पर इकट्ठा होने लगेगी.4. इस एकत्रित कालिख को ही काजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें आवश्यकतानुसार एक बूंद बादाम का तेल या शुद्ध घी मिलाया जा सकता है.

किचन में छुपा है सेहत का खजाना! रिसर्च में खुलासा, जानें काली मिर्च, अश्वगंधा और गिलोय के चौंकाने वाले फायदे

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Last Updated:March 20, 2026, 19:45 IST Health Tips: डॉ. अभय बताते है कि आयुर्वेद केवल इलाज ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है. किचन में मौजूद ये साधारण चीजें अगर सही तरीके से इस्तेमाल की जाएं, तो यह शरीर को बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. वर्तमान समय में जहां ज्यादातर लोग छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए एलोपैथिक दवाओं का उपयोग करते है. वहीं एक बड़ा वर्ग आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर स्वस्थ रहने का प्रयास कर रहा है. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभय की रिसर्च में यह सामने आया है कि किचन में मौजूद कई साधारण चीजें गंभीर बीमारियों से बचाव और इलाज में कारगर साबित हो सकती है. डॉ. अभय के अनुसार, काली मिर्च गले से जुड़ी समस्याओं में अत्यधिक फायदेमंद है. इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश, खांसी और संक्रमण को कम करने में मदद करते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन गले को साफ और मजबूत बनाए रखता है. अश्वगंधा से पैरालाइज मरीजों को राहतरिसर्च में यह भी पाया गया है कि अश्वगंधा का सेवन पैरालाइज (लकवा) के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकता है. यह जड़ी-बूटी नसों को मजबूत करने और शरीर की रिकवरी प्रक्रिया को तेज करने में मदद करती है. आयुर्वेद में इसे एक शक्तिवर्धक औषधि के रूप में जाना जाता है. गिलोय को आयुर्वेद में ‘अमृता’ कहा जाता है. जिसका अर्थ है अमरता देने वाली. डॉ. अभय बताते है कि गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाने में अत्यधिक असरदार है. बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है. दालचीनी भी कई बीमारियों में कारगर साबित होती है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, पाचन सुधारने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है. रोजाना सीमित मात्रा में इसका उपयोग शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाता है. डॉ. अभय की रिसर्च के मुताबिक आयुर्वेदिक चीजों का सही और संतुलित उपयोग कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है. हालांकि, विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी भी चीज का अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है. डॉ. अभय बताते है कि आयुर्वेद केवल इलाज ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है. किचन में मौजूद ये साधारण चीजें अगर सही तरीके से इस्तेमाल की जाएं, तो यह शरीर को बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. Location : Gorakhpur,Gorakhpur,Uttar Pradesh First Published : March 20, 2026, 19:45 IST

लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-चीन ट्रेड फिर शुरू:जून-सितंबर में खुलेगा ट्रेड सेशन, केंद्र सरकार से मंजूरी; 2019 में बंद हुआ था

लिपुलेख दर्रे से 6 साल बाद भारत-चीन ट्रेड फिर शुरू:जून-सितंबर में खुलेगा ट्रेड सेशन, केंद्र सरकार से मंजूरी; 2019 में बंद हुआ था

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच बॉर्डर ट्रेड छह साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेड सेशन आमतौर पर जून से सितंबर तक चलता है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी होने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी है। लिपुलेख दर्रे के जरिए तिब्बत के साथ बॉर्डर ट्रेड लंबे अंतराल के बाद 1992 में फिर शुरू हुआ था। हालांकि, 2019 में COVID-19 महामारी के कारण इसे बंद कर दिया गया था। स्थानीय स्तर पर तैयारियां तेज विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को लेटर लिखकर हिमालयी दर्रे के जरिए व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। लेटर में बताया गया है कि गृह मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि संबंधित विभाग 2026 के ट्रेड सत्र के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। भारत और चीन के स्थानीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए संपर्क विवरण साझा किए जाएंगे। प्रशासन ने ट्रेड पास जारी करने, करेंसी एक्सचेंज के लिए बैंकों की व्यवस्था, कस्टम विभाग की तैनाती और धारचूला प्रशासन को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें व्यापारियों के लिए ट्रांजिट कैंप, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं शामिल होंगी। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को लेटर लिखकर हिमालयी दर्रे के जरिए व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। लेटर में बताया गया है कि गृह मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है। व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया पिथौरागढ़ सीमांत व्यापार संगठन के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकाली ने इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापारियों को 2019 से तकलाकोट (तिब्बत) के वेयरहाउस में रखे सामान को वापस लाने का अवसर मिलेगा।