Wednesday, 08 Jul 2026 | 02:08 AM

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रणवीर सिंह का अक्षय खन्ना के एंट्री सॉन्ग पर डांस:मुंबई में हुई धुरंधर 2 की सक्सेस पार्टी; फिल्म की स्टार कास्ट शामिल हुई

रणवीर सिंह का अक्षय खन्ना के एंट्री सॉन्ग पर डांस:मुंबई में हुई धुरंधर 2 की सक्सेस पार्टी; फिल्म की स्टार कास्ट शामिल हुई

रणवीर सिंह और संजय दत्त स्टारर ‘धुरंधर 2’ ने रिलीज के पहले दिन ही 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है। इस कामयाबी के बाद डायरेक्टर आदित्य धर ने मुंबई में एक शानदार आफ्टर-पार्टी दी है। इसमें यामी गौतम, अर्जुन रामपाल और रणवीर सिंह सहित पूरी स्टारकास्ट शामिल हुई। सोशल मीडिया पर पार्टी के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें रणवीर सिंह रहमान डकैत के एंट्री सॉन्ग पर डांस करते नजर आ रहे हैं। आफ्टर पार्टी में रणवीर के डांस की तस्वीरें रणवीर ने रिक्रिएट किए अक्षय खन्ना के डांस स्टेप्स सक्सेस पार्टी के एक वीडियो में रणवीर सिंह वायरल गाने ‘FA9LA’ (शेर-ए-बलूच) पर थिरकते नजर आए। यह गाना मूल रूप से रैपर फ्लिपरैची का है, जो अक्षय खन्ना के हुक स्टेप्स की वजह से इंटरनेट पर सनसनी बन गया था। रणवीर ने उसी नोस्टाल्जिया को ताजा करते हुए हुक स्टेप्स को रिक्रिएट किया। इसके अलावा, उन्होंने ‘नैना लड़ावा’ और जैस्मीन सैंडलास के गाने ‘शरारत’ पर सारा अर्जुन, क्रिस्टल डिसूजा और आयशा खान के साथ भी परफॉर्म किया। सौम्या टंडन ने रणवीर को याद दिलाया पुराना सीन पार्टी में फिल्म में ‘उल्फत’ का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस सौम्या टंडन भी नजर आईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर रणवीर सिंह, यामी गौतम और आदित्य धर के साथ कई इनसाइड फोटोज शेयर कीं। एक मजेदार वीडियो में सौम्या, रणवीर को मजाक में थप्पड़ मारने की एक्टिंग करती दिखीं। उन्होंने बताया कि यह फिल्म के पहले पार्ट में उनके और रणवीर के बीच फिल्माए गए पहले सीन की यादें ताजा करने के लिए था। पहले दिन की कमाई 100 करोड़ के पार ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ ने ओपनिंग डे पर 21,728 शोज के जरिए 102.55 करोड़ रुपए की कमाई की है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जो क्रेज था, वह आंकड़ों में साफ दिख रहा है। पॉजिटिव रिव्यूज और वर्ड ऑफ माउथ की वजह से आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई और बढ़ने की उम्मीद है।

Kharg Island Plan, Tracking Location

Kharg Island Plan, Tracking Location

वॉशिंगटन डीसी31 मिनट पहले कॉपी लिंक मिडिल ईस्ट में अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। CNN के मुताबिक सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि 3 अमेरिकी वॉरशिप के साथ मरीन सैनिक मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं। इनमें USS त्रिपोली, USS सैन डिएगो, USS न्यू ऑरलियंस शामिल हैं। इन पर करीब 2200 सैनिक तैनात हैं। ये सभी सैनिक 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) का हिस्सा हैं, जिसे तुरंत एक्शन के लिए तैयार रखा जाता है। इनमें से USS त्रिपोली एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, यानी ऐसा युद्धपोत जो मरीन सैनिकों, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों (जैसे F-35B) को लेकर चलता है। ये तीनों वॉरशिप जापान के पास थे। अभी यह भारत के पास दक्षिणी हिंद महासागर में है। अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प सरकार ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसे घेरने (ब्लॉकेड) की योजना पर विचार कर रही है। USS ट्रिपोली (LHA-7) वॉरशिप 17 मार्च को सिंगापुर स्ट्रेट्स में एंट्री करते हुए देखा गया था। अगले सप्ताह नए स्टेज में पहुंच सकता है ईरान जंग अमेरिका की तैयारियों से लग रहा है कि ईरान जंग अगले हफ्ते नए स्टेज में पहुंच सकता है। इससे पहले कई बार ट्रम्प यह कह चुके हैं कि वे मिडिल ईस्ट में सैनिक नहीं भेज रहे हैं। ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं। अगर भेजता भी, तो आपको नहीं बताता।” ट्रम्प अपने अचानक फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनके बयान से पता नहीं चल रहा कि वे क्या करने वाले हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ट्रम्प ईरान में कार्रवाई तेज करने के लिए हजारों सैनिक भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं पहली वजह- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पिछले कुछ दिनों में ट्रम्प ने अपने सहयोगी देशों से भी होर्मुज में युद्धपोत भेजने को कहा, लेकिन किसी भी देश ने उनका समर्थन नहीं किया। ऐसे में USS ट्रिपोली और बाकी वॉरशिप पर मौजूद अमेरिकी मरीन उनके लिए सबसे अहम विकल्प बन सकते हैं। अगर अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित करना चाहता है, तो उसे ईरान के तटीय इलाकों में सैनिक उतारने पड़ सकते हैं। ईरान की नौसेना को काफी नुकसान हो चुका है, इसलिए यह विकल्प अमेरिका के लिए संभव और कम जोखिम वाला माना जा रहा है। कुछ अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि USS ट्रिपोली पर मौजूद मरीन सैनिकों का इस्तेमाल ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित द्वीपों पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है। इन द्वीपों को आगे रणनीतिक ठिकाने या दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को रोका जा सके। ईरान के लिए बहुत अहम है खार्ग आइलैंड खार्ग द्वीप ईरान के तट से करीब 15 मील दूर है और यहीं से उसके करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। इसलिए अगर अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेता है या वहां नाकाबंदी करता है, तो वह ईरान पर होर्मुज को खोलने का दबाव बना सकता है। हालांकि इस योजना में बड़ा जोखिम भी है। अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जा करता है, तो उसके सैनिक सीधे हमलों के दायरे में आ जाएंगे और यह जरूरी नहीं कि ईरान इससे झुक जाए। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को सीधे ईरान की जमीन या खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय वह अपने युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात कर सकता है, ताकि तेल ले जाने वाले जहाजों को रास्ते में सुरक्षा दी जा सके। दूसरी वजह- ईरान के यूरेनियम पर कब्जा दूसरा बड़ा कारण है ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम। ईरान के पास करीब 950 पाउंड यूरेनियम ऐसा है जिसे परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि यह यूरेनियम उन ठिकानों के मलबे में दबा है, जिन पर अमेरिका और इजराइल ने हमला किया था। इसे सुरक्षित करने के लिए जमीन पर सैनिक भेजने की जरूरत पड़ेगी। 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद ट्रम्प के बयान बदलते रहे हैं, लेकिन एक बात साफ है। वे चाहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके। USS ट्रिपोली की अहमियत यहीं सामने आती है। इस जहाज पर 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 2200 सैनिक सवार हैं, जो जापान के ओकिनावा में तैनात रहते हैं। ये सैनिक जमीन और हवा दोनों तरह की लड़ाई, छापेमारी और समुद्र से जमीन पर उतरने वाले ऑपरेशन में माहिर होते हैं। USS ट्रिपोली एक ऐसा वॉरशिप है जो समुद्र से ही हवाई और जमीनी ऑपरेशन चला सकता है। इसमें F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, MV-22 ऑस्प्रे हेलीकॉप्टर और सैनिकों को किनारे तक पहुंचाने वाले विशेष जहाज मौजूद हैं। अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंचेगा USS ट्रिपोली उम्मीद है कि USS ट्रिपोली अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंच जाएगा। अगर ट्रम्प जमीन पर सैनिक भेजने का फैसला लेते हैं, तो यह पिछले दो दशकों में पहली बार होगा जब अमेरिकी सैनिक सीधे युद्ध में उतारे जाएंगे इस वॉरशिप का नाम 1805 में त्रिपोली के खिलाफ अमेरिका की जीत की याद में रखा गया था। यह पहली बार था जब अमेरिका ने विदेशी जमीन पर जीत हासिल कर अपना झंडा फहराया था। ——————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध का खतरा अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना

Air India Delhi-Canada Flight Diverted After 9 Hours; Wrong Boeing Sent

Air India Delhi-Canada Flight Diverted After 9 Hours; Wrong Boeing Sent

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया है। तस्वीर- फाइल फोटो। भारतीय एयरलाइंस कंपनी एअर इंडिया की एक बार फिर बड़ी चूक सामने आई है, जिसके कारण दिल्ली से कनाडा के वैंकूवर जा रही फ्लाइट AI-185 को उड़ान भरने के करीब 7 घंटे बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा। दरअसल, एअर इंडिया ने यात्रियों को गलती से बोइंग 777-200 LR फ्लाइट में भेज दिया था, जबकि कनाडा में उसे केवल बोइंग 777-300 ER भेजने की इजाजत है। एविएशन नियमों के तहत अलग-अलग देशों में अलग-अलग विमान मॉडल के लिए इजाजत होती है। कनाडा ने एअर इंडिया को सिर्फ B777-300 ER के लिए मंजूरी दी है, न कि LR वर्जन के लिए। गलती का पता तब चला जब विमान करीब 4 घंटे उड़ान भरकर चीन के कुनमिंग एयरस्पेस में पहुंच चुका था। इसके बाद तुरंत विमान को वापस बुला लिया गया। फ्लाइट ने गुरुवार सुबह 11:34 बजे दिल्ली से उड़ान भरी थी और शाम 7:19 बजे वापस दिल्ली लैंड किया। विमान में दिल्ली से कनाडा जाने वाले 300 से ज्यादा यात्री मौजूद थे। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24.com के अनुसार, विमान ने चीन के एयरस्पेस से दिल्ली के लिए यू-टर्न लिया। हर घंटे 9 टन फ्यूल खर्च, करीब ₹60 लाख नुकसान का अनुमान एअर इंडिया ने इस घटना को ऑपरेशनल इश्यू बताया और कहा कि सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं। यात्रियों को होटल की सुविधा दी गई और उन्हें अगली सुबह यानी 20 मार्च को दूसरी फ्लाइट से वैंकूवर के लिए रवाना किया गया। सूत्रों के मुताबिक, इस गलती को गंभीरता से लिया गया है और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। जानकारी के अनुसार, एक बोइंग 777 विमान हर घंटे करीब 8-9 टन फ्यूल खर्च करता है, ऐसे में यह गलती एयरलाइन के लिए काफी महंगी साबित हुई है। बोइंग 777 जैसे बड़े विमान के लिए, 8 टन (8,000 किलोग्राम) जेट ईंधन की कीमत मौजूदा दरों के आधार पर लगभग ₹7 लाख से ₹9 लाख के बीच हो सकती है। ऐसे में 7 घंटे हवा में रहने के दौरान एअर इंडिया फ्लाइट में करीब 60 लाख रुपए का फ्यूल खर्च हुआ। फायर अलर्ट के बाद एअर इंडिया की न्यूयॉर्क-मुंबई फ्लाइट मदीना डायवर्ट इधर एअर इंडिया की न्यूयॉर्क से मुंबई आ रही फ्लाइट AI-116 को गुरुवार दोपहर सऊदी अरब के मदीना में डायवर्ट करना पड़ा। कॉकपिट में कार्गो सेक्शन में आग लगने का अलर्ट मिलने के बाद एहतियातन यह फैसला लिया गया। एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग 777 विमान ने मदीना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। हालांकि, लैंडिंग के बाद की जांच में यह अलर्ट गलत निकला और किसी तरह की आग नहीं पाई गई। जांच पूरी होने के बाद विमान को दोबारा ऑपरेशन के लिए क्लियर कर दिया गया। यह फ्लाइट मुंबई के लिए रवाना हो गई। एअर इंडिया ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। 13 फरवरी- DGCA ने एअर इंडिया पर ₹1 करोड़ जुर्माना लगाया भारत के नागरिक उड्डयन नियामक (DGCA) ने 13 फरवरी को बताया था कि उसने एअर इंडिया पर 1.10 लाख डॉलर (करीब 1 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई एक एयरबस विमान को बिना ‘एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट’ (विमानल उड़ाए जाने योग्य है या फिटनेस सर्टिफिकेट) के 8 बार उड़ाए जाने के कारण की गई। DGCA ने एक गोपनीय आदेश में कहा कि इस चूक से देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन पर जनता का भरोसा और कम हुआ है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार मामला 26 नवंबर 2025 का है, जब एअर इंडिया ने खुद DGCA को इस चूक की जानकारी दी थी। कंपनी ने बताया था कि उनके एक एयरबस A320 नियो विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका था। फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर को 8 रेवेन्यू सेक्टर्स (व्यावसायिक उड़ानों) में इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 2 दिसंबर को DGCA ने मामले की जांच शुरू की थी। ———————————— एयरलाइंस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… एअर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट का लैंडिंग के दौरान पहिया निकला:नोज गियर टूटा; थाइलैंड में हार्ड लैंडिंग, 133 लोग सवार थे थाईलैंड में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट 18 मार्च की दोपहर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। विमान के रनवे पर उतरते ही उसका नोज गियर टूट गया और आगे का पहिया अलग हो गया। फ्लाइट हैदराबाद से फुकेट जा रही थी। थाई अखबार द नेशन के मुताबिक घटना के बाद कुछ समय के लिए रनवे बंद करना पड़ा, हालांकि विमान में सवार सभी 133 यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए। पूरी खबर पढ़ें… एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा की भी टिकटें महंगी: घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर ₹1300 तक फ्यूल सरचार्ज लगेगा एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा एयर की फ्लाइट्स टिकट भी महंगी हो गई हैं। एयरलाइन कंपनी ने 15 मार्च से सभी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है। अकासा एयर ने कहा कि 15 मार्च को रात 12:01 बजे के बाद बुक किए जाने वाले टिकटों पर 199 रुपए से लेकर 1,300 रुपए तक का एडिशनल सरचार्ज वसूला जाएगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

लीजिए, आज से मोटापे की दवा का पेटेंट खत्म, अब 500 रुपए तक भी मिल जाएगी, इस गेम चेंजिंग के क्या मायने

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Last Updated:March 20, 2026, 17:36 IST Weight Loss Drug under 500 : वजन कम करने वाली दवा के नाम से मशहूर ओजेंपिक और वीगोवी का पेटेंट आज खत्म हो गया. इसका सीधा सा मतलब है कि महीने के 10 हजार रुपये वाली दवा अब 500 से हजार रुपये में मिलेगी. भारत में हर 4 वयस्क में से एक मोटापे का शिकार है.मोटापा कई बीमारियों की जड़ है. इसलिए यह कदम भारत के लिए गेम चेंजिंग साबित हो सकता है और इसके दूरगामी असर होने की संभावना है. वेट लॉस दवा का पेंटेट खत्म होने से कीमत में भारी गिरावट. वर्तमान में वेट लॉस यानी मोटापे को खत्म करने वाली दवा ओजेंपिक और वीगोभी की कीमत महीने का 10 हजार के करीब है. इस इंजेक्शन को सप्ताह में एक दिन लगाना होता है. इस दवा के कारण शरीर के अंदर संतुष्टि वाला हार्मोन जागृत हो जाता है और लोगों को भूख कम लगती है. इस कारण वजन कम होना शुरू हो जाता है. वर्तमान में भारत में 10 हजार रुपये की दवा अधिकांश लोगों की क्षमता से बाहर है. लेकिन जिस विदेशी कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने यह दवा बनाई थी, उसका पेटेंट भारत, चीन, कनाडा, ब्राजील सहित कई देशों में खत्म हो गया है. इसलिए अब यह दवा 500 रुपये के आसपास मिलने लगेगी. मोटापे की दवा की कीमत कम होने के दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे क्योंकि भारत में डायबिटीज और मोटापे से पीड़ित लोगों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है. आम लोगों को बड़ी राहत मारेन्गो एशिया अस्पताल गुरुग्राम में डायबिटीज, ओबेसिटी एंड मेटोबोलिज्म डिसॉर्डर के क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल कहते हैं कि वेट लॉस की दवा का सस्ता होना भारत जैसे देशों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. भारत में मोटापा तेजी से बढ़ता जा रहा है और मोटापा कई बीमारियों का गेटवे है. इतना ही नहीं हम डायबिटीज कैपिटल ऑफ वर्ल्ड कहलाते हैं. करीब 10 करोड़ लोगों को डायबिटीज है. अच्छी बात यह है कि यह दवा दोनों बीमारियों के लिए जादुई असर वाली है. इसलिए मैं सरकार को तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उसने इस दवा के पेटेंट अधिकार को इतनी जल्दी खत्म करा दिया. इससे बहुत बड़ी राहत मिली है. अब आम लोगों के लिए मोटापे को कंट्रोल करना बहुत आसान हो जाएगा. कैसे गेमचेंजर होगाडॉ. पारस अग्रवाल ने कहा कि भारत में महीने का 10 हजार रुपये दवा पर खर्च करना बहुत बड़ी बात है. उसमें भी लोग अब तक यह नहीं समझते हैं कि मोटापा एक बीमारी है. ऐसे में अधिकांश लोग मोटापा घटाने के लिए दवा नहीं कराते हैं. अब जब इस दवा की कीमत घट जाएगी तो आम लोगों में जागरुकता आएगी. वे लोग भी इस दवा को लेने के लिए डॉक्टर के पास आएंगे. अभी हमारे पास जो मोटापे का इलाज कराने आते हैं, उनमें से कुछ के मन में तो दवा की कीमत को लेकर सवाल रहता ही है. कुछ लोग एक-दो महीना तो इलाज करा लेते हैं लेकिन उसके बाद छोड़ देते हैं. ऐसे में सस्ती दवा हमारे लिए गेमचेंजर साबित होगा. भारत में करीब 40 प्रतिशत वयस्क मोटापे से ग्रस्त हैं. इसलिए यह समझा जा सकता है कि दवा की कीमत कम होने से इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. अब कितनी होगी कीमत वर्तमान में ओजेंपिक या वीगोभी का इंजेक्शन लगाने का खर्च एक महीने में 5 से 20 हजार रुपये तक है. महीने का खर्च दवा की डोज पर निर्भर है. अगर किसी व्यक्ति को हाई डोज वाला इंजेक्शन लग रहा है तो उसके लिए ज्यादा पैसा खर्च करना होता है. कुछ लोगों को लो डोज की जरूरत होती है. इसलिए 2 से 5 हजार महीने में भी काम चल जाता है. इस इंजेक्शन को सप्ताह में एक दिन लगाना होता है. लेकिन यह डॉक्टर तय करते हैं कि कितने दिनों तक इलाज चलेगा. यह कम से कम 6 महीने तक चलता है. इस तरह देखें तो पेटेंट हटने के बाद मार्केट में दवा कंपनियों में कंपटीशन बढेगा और सब सस्ती दवा बनाने में आगे निकलने की कोशिश करेंगे. अब तक 40 कंपनियां इस दवा को बनाने में आगे आ चुकी है. पेटेंट हटने के लिए 80 से 90 प्रतिशत तक दवा के दाम कम हो जाएंगे. ऐसी स्थिति में एक महीना का खर्च 500 रुपये भी हो सकता है. जेनरिक दवा बनाने में भारत को महारथभारत को जेनरिक दवा बनाने में महारथ हासिल है. भारत पहले से ही 60 हजार ब्रांड के नाम से जेनरिक दवाइयां बनाता है. जेनरिक दवा बनाने में दुनिया के बाजारों में भारत की धाक है. हम 200 से अधिक देशों में जेनरिक दवाइयों की सप्लाई करते हैं. भारत विश्व का 20 प्रतिशत जेनरिक दवा बनाता है. इसलिए भारत को फार्मेसी ऑफ वर्ल्ड भी कहा जाता है. दो दशक पहले भारत की दवा कंपनियों ने एचआईवी एड्स के लिए जेनरिक दवा बनाई थी. इस दवा ने पूरे अफ्रीका में एड्स को मिटाने में क्रांति लाई थी. भारत 30.46 अरब डॉलर का जेनरिक दवा निर्यात करता है. भारत में बनी वेट लॉस की जेनरिक दवा भी दुनिया के बाजारों में जाएगी. इसलिए दवा का पेटेंट हटने का फायदा सिर्फ भारत के लोगों को ही नहीं मिलेगा बल्कि पूरी दुनिया को इसका पायदा होगा. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें First Published : March 20, 2026, 17:36 IST

खांसी से लेकर पेट की समस्याओं तक, ये चीज़ है आपका नेचुरल इलाज, जानिए कब और कितना लेना फायदेमंद

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Last Updated:March 20, 2026, 17:36 IST शहद सिर्फ मिठास बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुधार के लिए भी उपयोगी है. यह पेट, मेटाबॉलिज्म, रोग प्रतिरोधक क्षमता और खांसी जैसी छोटी-बड़ी समस्याओं में असरदार घरेलू उपाय है. सही मात्रा और शुद्ध शहद के सेवन से आप अपने शरीर को अंदर से मजबूत बना सकते हैं. शहद एक ऐसी प्राकृतिक चीज है, जिसे हम सिर्फ मिठास के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी इस्तेमाल करते हैं. यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में भी मदद करता है. आज के समय में भले ही कई तरह की आधुनिक दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन शहद का महत्व आज भी उतना ही बना हुआ है जितना पहले हुआ करता था. पहले के समय में जब दवाइयों की सुविधा नहीं थी, तब लोग अपने इलाज के लिए पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर रहते थे. शहद उन प्रमुख चीजों में से एक था, जिसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता था. गांव के बुजुर्ग राम सिंह बताते है कि हमारे गांवों और पहाड़ी इलाकों में आज भी बुजुर्ग शहद को एक प्राकृतिक दवाई मानते हैं और छोटी-छोटी समस्याओं के लिए इसका उपयोग करते हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं. गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी समस्याएं अक्सर देखने को मिलती हैं. ऐसे में शहद एक आसान और असरदार घरेलू उपाय हो सकता है. अगर आप एक गिलास हल्के गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीते हैं, तो इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और पेट को आराम मिलता है. यह धीरे-धीरे गैस की समस्या को कम करने में मदद करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है. Add News18 as Preferred Source on Google आज के समय में बहुत से लोग वजन बढ़ने की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में शहद को अपनी दिनचर्या में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है. जब मेटाबॉलिज्म सही तरीके से काम करता है, तो शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसके साथ ही यह शरीर को ऊर्जा भी देता है, जिससे आप दिनभर एक्टिव महसूस करते हैं. शहद में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स. ये सभी तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं. अगर आप नियमित रूप से शहद का सेवन करते हैं, तो आपका शरीर बीमारियों से लड़ने में ज्यादा सक्षम हो जाता है. खासकर मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं से बचाव में यह बहुत मददगार होता है. शहद का उपयोग लंबे समय से खांसी और गले की समस्याओं में किया जाता रहा है. अगर गले में खराश हो या लगातार खांसी आ रही हो, तो शहद एक बेहतरीन घरेलू उपाय है.एक चम्मच शहद में थोड़ा सा अदरक का रस मिलाकर लेने से गले को आराम मिलता है और खांसी में राहत मिलती है. यह गले की सूजन को कम करता है और गले को मुलायम बनाता है. शहद के फायदे तभी मिलते हैं, जब वह पूरी तरह से शुद्ध हो. आजकल बाजार में मिलावटी शहद भी बहुत आसानी से मिल जाता है, जिसमें चीनी या अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं.ऐसा शहद न सिर्फ बेअसर होता है, बल्कि शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. इसलिए हमेशा कोशिश करें कि आप भरोसेमंद जगह से ही शहद खरीदें या फिर प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त शहद का ही उपयोग करें. हालांकि शहद बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसका अधिक सेवन करना सही नहीं है. इसमें प्राकृतिक शुगर होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर में शुगर का स्तर बढ़ सकता है.इसलिए रोजाना एक से दो चम्मच शहद का सेवन पर्याप्त माना जाता है. संतुलन बनाए रखना ही सबसे जरूरी है. First Published : March 20, 2026, 17:36 IST

नरसिंहपुर में कांग्रेस के कार्यक्रम में झड़प:नकुल नाथ की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं में विवाद, पुलिस ने संभाला मोर्चा

नरसिंहपुर में कांग्रेस के कार्यक्रम में झड़प:नकुल नाथ की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं में विवाद, पुलिस ने संभाला मोर्चा

नरसिंहपुर में शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने स्वतंत्रता सेनानी रानी अवंतीबाई लोधी का 168वां बलिदान दिवस मनाया। इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुल नाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान नकुल नाथ के मंच से उतरते ही स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच किसी बात को लेकर झड़प हो गई। विवाद बढ़ने पर मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों गुटों को अलग कर स्थिति को नियंत्रण में लिया। प्रदेश सरकार पर साधा निशाना नकुल नाथ ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में किसान, नौजवान और महिलाएं परेशान हैं। नकुलनाथ ने महिला अत्याचार और बेरोजगारी के बढ़ते मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने किसानों को समर्थन मूल्य न मिलने और हाल ही में ओलावृष्टि व अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया। नकुल नाथ ने सरकार से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की। नहीं हुई किसी भी पक्ष से शिकायत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संदीप भूरिया ने बताया कि कार्यकर्ताओं के बीच छींटाकशी के कारण विवाद हुआ था, जिसे पुलिस ने समय रहते शांत करा दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी पक्ष द्वारा कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये, किसानों को पॉकेट मनी…बंगाल में ममता बनर्जी ने जारी किया घोषणा पत्र

सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये, किसानों को पॉकेट मनी...बंगाल में ममता बनर्जी ने जारी किया घोषणा पत्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी कांग्रेस (टीएमसी) का मेनिफेस्टो जारी किया। रियल एस्टेट ने ‘लक्ष्मी भंडार’ स्कीम के तहत जनरल क्लास की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये और एससी/एसटी को हर महीने 1,700 रुपये देने की घोषणा की है। सीएम ममता बनर्जी ने कहा, जो युवा कहते हैं वे हर महीने 1,500 रुपये पैसे के लिए आम तौर पर पैसे देते हैं। बंगाल इंडस्ट्रीज़ के लिए एक गंतव्य है। हम एमएसएमई में नंबर वन हैं. एमएसएमई के तहत 1.5 करोड़ कर्मचारी काम करते हैं। ‘बंगाल में आर्किटेक्ट इंडस्ट्री सबसे बड़ी है।’ बंगाल में नई बिल्डिंगें बनवाएंगी ममता कंपनी की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा, ‘हम ‘दुआरे चिकित्सा’ (घर-घर स्वास्थ्य सेवा) शुरू करेंगे। हम इसे हर बूथ पर शुरू करेंगे, हम ‘दुआरे चिकित्सा’ कैंप लगाएंगे। हज़ारों की संख्या में ई-लर्निंग सुविधाओं के साथ इलेक्ट्रानिक्स द्वारा निर्मित। आने वाले दिनों में हम 7-8 नए जिले, ब्लॉक, यहां तक ​​कि नए नगर पालिकाएं भी ठंडा करेंगे।’ कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ”मैं बंगाल के लोगों से अपील करती हूं कि बंगाल को बचाने के लिए एकजुट होकर बीजेपी के खिलाफ लड़ें। pic.twitter.com/JgwRXgBUDl – ANI_हिन्दीन्यूज़ (@Aहिन्दीन्यूज़) 20 मार्च 2026 कृषि बजट बढ़ो सरकार अंदेशा ने फिर से सरकार में आने के बाद कृषि क्षेत्र में बजट में वृद्धि की घोषणा की है। ममता बनर्जी ने कहा, ‘खेती पर आश्रित परिवारों की सहायता करने के लिए, भूमिहीन किसानों को समर्थन देने और कृषि क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए 30,000 करोड़ रुपये का कृषि बजट भी तैयार किया गया है। इसके अलावा हर ब्लॉक और शहर में घर-घर मेडिकल कर्मियों के लिए मेडिकल कैंप का आयोजन किया जाएगा।’ मैं विनम्रतापूर्वक बंगाल के लिए अपनी 10 प्रतिज्ञाएं प्रस्तुत करता हूं, ताकि मेरी सरकार के चौथे कार्यकाल में विकास का पहिया आगे बढ़ता रहे। लक्ष्मीर भंडार के तहत, ₹500 की वृद्धि के साथ, महिलाओं को सामान्य वर्ग के लिए ₹1,500 की मासिक वित्तीय सहायता मिलती रहेगी… pic.twitter.com/qt3TUInByi – ममता बनर्जी (@MamataOfficial) 20 मार्च 2026 बीजेपी पर भड़कीं ममता बनर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, ‘मैं बंगाल के लोगों से अपील करती हूं कि बंगाल को बचाने के लिए बीजेपी के खिलाफ एकजुट हों. अगर सेंट्रल कॉलेज आपको डराने की कोशिश कर रही हैं, तो डरें नहीं. अगर वे आपको पैसे देने की कोशिश कर रहे हैं, तो न लें। वे समुद्र तट से पैसा और हथियार, माफिया की तलाश कर रहे हैं, यहां अशांति और तबाही की कोशिशें कर रहे हैं। मैं बिजली वाली राजनीति नहीं कर रहा हूं। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सब एक जैसे हैं।’ बीजेपी पर कोई बढ़त नहीं और सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘टीएमसी के अलावा पार्टी बंगाल को बचाया नहीं जा सकता। मोदी के भाषण पर ध्यान मत दीजिए. उन्होंने सबका विकास की जगह सबका विनाश किया है। वे (बीजेपी) बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नाम पर बेटी, महिला, किसान हटाओ और बीजेपी गुंडा बचाओ कर रहे हैं।’ ये भी पढ़ें: विधानसभा चुनाव 2026 लाइव: आरजी कर रिकॉर्ड की मां हो सकती हैं चुनाव, पिता को उम्मीद बीजेपी मैदान में उतर सकती है (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी घोषणापत्र(टी)(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)टीएमसी घोषणा पत्र(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026

26 मार्च से इंडिमून्स आर्ट फेस्टिवल शुरू:4 दिनों तक होगा नाटकों का मंचन; नितीश, संजय मिश्रा, राकेश बेदी और शेखर सुमन देंगे प्रस्तुतियां

26 मार्च से इंडिमून्स आर्ट फेस्टिवल शुरू:4 दिनों तक होगा नाटकों का मंचन; नितीश, संजय मिश्रा, राकेश बेदी और शेखर सुमन देंगे प्रस्तुतियां

भोपाल में 26 से 29 मार्च तक इंडिमून्स आर्ट फेस्टिवल होगा। रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में रोज शाम 7:30 बजे नाटक मंचित होंगे। चार दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में संजय मिश्रा, राकेश बेदी और शेखर सुमन जैसे कलाकार नाटक करेंगे। फेस्टिवल के टिकट की कीमत 299 रुपए से 2999 रुपए तक रखी गई है। फेस्टिवल से पहले शुक्रवार को भोपाल हाट में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें संयोजक बिजॉन मंडल ने बताया कि रंग थिएटर, कल्चरल और सोशल वेलफेयर सोसायटी यह आयोजन कर रही है। पिछले साल दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया था, इसलिए इस बार भी नए अंदाज में फेस्टिवल लाया गया है। युवाओं को जोड़ने पर है फोसक बिजॉन मंडल ने बताया कि फेस्टिवल का मुख्य फोकस युवाओं को थिएटर से जोड़ना है। इसके जरिए उन्हें भोपाल की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि भोपाल की रंगमंच परंपरा बहुत समृद्ध रही है, यहां से हबीब तनवीर और आलोक चटर्जी जैसे बड़े नाम जुड़े रहे हैं। ओपन स्टेज पर दिखेगी युवाओं की प्रतिभा नाटक शुरू होने से पहले युवाओं के लिए ओपन स्टेज होगा, जहां वे अपनी कला दिखा सकेंगे। इसमें भाग लेने के लिए पहले रजिस्ट्रेशन जरूरी है। अब तक 5 रैपर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके लिए कोई फीस नहीं रखी गई है। फेस्टिवल में भाग लेने वाले युवाओं को आगे ओटीटी और फिल्मों में काम के मौके भी मिल सकते हैं। फिल्म ‘पीकू’ में काम कर चुके बलेंद्र सिंह ने भी युवाओं को थिएटर से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा दिन में रंगमंच, सिनेमा और कला से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इन सत्रों का संचालन सीमा रायजादा करेंगी, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों के जानकार शामिल होंगे। फेस्टिवल में इन नाटको का मंचन होगा

द ग्रेट असम माइग्रेशन: कैसे हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस को खोखला कर रहे हैं | चुनाव समाचार

बीजेपी ने असम में बड़े बदलाव की योजना बनाई, विधानसभा चुनाव से पहले 30 विधायकों को बदला जा सकता है | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 16:45 IST चुनावों से पहले व्यक्तिगत दलबदल से परे, सरमा असम में भाजपा की पहचान-आधारित अपील को तेज करने के लिए ‘कांग्रेस आयात’ का उपयोग कर रहे हैं सरमा की रणनीति कांग्रेस की क्षेत्रीय ताकत के मूल स्तंभों को लक्षित करती है। (फाइल फोटो) 2026 के असम विधानसभा चुनावों के उच्च-दांव वाले क्षेत्र में, पर्यवेक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक राजनीतिक रणनीति लागू की है जो जितनी साहसी है उतनी ही प्रभावी भी है: कांग्रेस पार्टी को उसके सबसे प्रभावशाली डीएनए को अवशोषित करके खत्म करना। 19 मार्च को, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 88 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची का अनावरण किया, जिसमें कांग्रेस के पूर्व दिग्गजों की भारी आबादी वाले रोस्टर का खुलासा किया गया। भाजपा सूत्रों का कहना है कि यह “कांग्रेस-मुक्त” मिशन न केवल चुनावों में विपक्ष को हराकर हासिल किया जा रहा है, बल्कि इसे व्यवस्थित रूप से अंदर से खोखला करके भी हासिल किया जा रहा है। महान प्रवासन: नागांव से दिसपुर तक कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका उम्मीदवार की घोषणा से कुछ दिन पहले प्रद्युत बोरदोलोई के हाई-प्रोफाइल दलबदल से लगा। नगांव से मौजूदा सांसद और 1975 से कांग्रेस में जड़ें जमा चुके अनुभवी बोरदोलोई को तुरंत प्रतिष्ठित दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा के टिकट से पुरस्कृत किया गया। उनका बाहर निकलना कोई अलग घटना नहीं थी; यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के फरवरी में दलबदल के बाद हुआ। बोरा को सुरक्षित करके, भाजपा ने स्वदेशी खिलंजिया समुदाय के बीच कांग्रेस के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक को प्रभावी ढंग से बेअसर कर दिया है। बोरा को बिहपुरिया सीट से मैदान में उतारा गया है, रणनीतिकारों का मानना ​​है कि यह कदम ऊपरी और उत्तरी असम के लगभग 45 विधानसभा क्षेत्रों में स्थिति को बदल सकता है, जहां उनका प्रभाव प्रबल बना हुआ है। क्षेत्रीय नेतृत्व को ख़त्म करना सरमा की रणनीति कांग्रेस की क्षेत्रीय ताकत के मूल स्तंभों को लक्षित करती है। भाजपा की 2026 की सूची में कई अन्य पूर्व कांग्रेस विधायक शामिल हैं, जिनमें कमलाख्या डे पुरकायस्थ, शशि कांता दास और सुशांत बोरगोहेन शामिल हैं। बराक घाटी की एक प्रमुख आवाज पुरकायस्थ को कटिगोराह से मैदान में उतारा गया है, जबकि शशिकांत दास भगवा बैनर के तहत राहा सीट बरकरार रखना चाहते हैं। यह व्यवस्थित अवशोषण दोहरे उद्देश्य को पूरा करता है। सबसे पहले, यह भाजपा को तैयार विजेता प्रदान करता है जिनके पास गहरी जड़ें वाले स्थानीय नेटवर्क हैं। दूसरे, यह एपीसीसी अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व वाले शेष कांग्रेस नेतृत्व को लगातार रक्षात्मक स्थिति में छोड़ देता है। अनुभवी नेताओं द्वारा अपने बाहर निकलने के कारणों के रूप में “अपमान” और “घुटन” का हवाला देते हुए, सरमा ने सफलतापूर्वक कांग्रेस को एक डूबते जहाज के रूप में ब्रांड किया है, जहां “स्वाभिमानी” नेता अब जीवित नहीं रह सकते हैं। ‘खिलंजिया’ और जाति-आधारित एकीकरण व्यक्तिगत दलबदल से परे, सरमा भाजपा की पहचान-आधारित अपील को तेज करने के लिए इन “कांग्रेस आयातों” का उपयोग कर रहे हैं। भूपेन बोरा जैसे नेताओं को लाकर, भाजपा हिंदू असमिया वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कांग्रेस का ऐतिहासिक रूप से प्रभाव रहा है। यह नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर मुख्यमंत्री की आक्रामक बयानबाजी और “अवैध घुसपैठ” की कहानी से पूरक है, जो कांग्रेस को अपने स्वयं के अल्पसंख्यक मतदाता आधार के संबंध में एक कोने में रहने के लिए मजबूर करता है। सरमा का दृष्टिकोण सर्जिकल है. हाल के सार्वजनिक संबोधनों के दौरान, उन्होंने खुले तौर पर “सभी अच्छे कांग्रेस नेताओं” को भाजपा के पाले में लाने के अपने इरादे की घोषणा की, जिससे प्रभावी ढंग से भाजपा को एक छत्र संगठन में बदल दिया गया, जिसमें राज्य के राजनीतिक अभिजात वर्ग का निवास है। बूथ स्तर पर मनोवैज्ञानिक युद्ध इन दलबदलों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता। जब एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और एक निवर्तमान सांसद चुनाव की पूर्व संध्या पर पाला बदलते हैं, तो इससे भाजपा की जीत की अनिवार्यता की भावना पैदा होती है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ता के लिए, दोनों पार्टियों के बीच की रेखा धुंधली हो गई है, जिससे भाजपा के लिए उस स्थानीय मशीनरी को अपने साथ लेना आसान हो गया है जो कभी कांग्रेस की थी। जैसा कि असम 9 अप्रैल को मतदान के लिए तैयार है, विश्लेषकों का कहना है कि लड़ाई अब केवल दो विचारधाराओं के बीच नहीं है। यह एक पुनर्जीवित भाजपा के बीच है, जिसे उन्हीं लोगों का समर्थन प्राप्त है जिन्होंने कभी इसका विरोध किया था, और एक खंडित कांग्रेस अपने स्वयं के रैंकों को भरने के लिए पर्याप्त “संदिग्धों” को खोजने के लिए संघर्ष कर रही है। हिमंत बिस्वा सरमा ने सिर्फ खिलाड़ियों को नहीं बदला है; उन्होंने खेल के नियमों को फिर से लिखा है। पहले प्रकाशित: मार्च 20, 2026, 16:45 IST समाचार चुनाव द ग्रेट असम माइग्रेशन: कैसे हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस को खोखला कर रहे हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)असम चुनाव(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम चुनाव(टी)गौरव गोगोई(टी)घुसपैठ

श्योपुर में आंधी-बारिश से बदला मौसम:पकी फसलों को होगा नुकसान, किसानों की चिंता बढ़ी

श्योपुर में आंधी-बारिश से बदला मौसम:पकी फसलों को होगा नुकसान, किसानों की चिंता बढ़ी

श्योपुर जिले में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली। दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। इससे एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर किसानों की चिंता बढ़ गई है। सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बनी हुई थी, जो मौसम बदलने का संकेत दे रही थी। दोपहर होते-होते बादल और घने हो गए, जिसके बाद अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और फिर बारिश शुरू हो गई। आंधी इतनी तेज थी कि कई स्थानों पर धूल का गुबार भी उड़ता देखा गया। आमजन ने मौसम में आई ठंडक से राहत महसूस की, लेकिन किसानों के लिए यह बारिश चिंता का विषय बन गई है। इस समय खेतों में गेहूं और चने की फसलें पूरी तरह पककर तैयार खड़ी हैं। तेज हवा और बारिश के कारण फसलों के गिरने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर गेहूं की फसलें खेतों में बिछी हुई नजर आईं। जिले के आसपास के गांव सोईंकला में भी तेज बारिश होने की सूचना मिली है, जिससे किसानों की चिंता और गहरी हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह खराब रहा तो उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है। फसल कटाई का समय नजदीक है और इस तरह की बारिश उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। बारिश जारी रहने से होगा नुकसान जिले में रबी की फसलें इस समय अंतिम चरण में हैं। ऐसे में मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए नुकसान दायक माना जा रहा है। यदि बारिश जारी रहती है या आंधी का असर बढ़ता है, तो फसलों को और अधिक नुकसान होने की आशंका है। फिलहाल किसान मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि वे जल्द से जल्द फसल की कटाई कर संभावित नुकसान से बच सकें। प्रशासन और मौसम विभाग भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।