Swimming Pool Water Vs Eye Infection; Side Effects

5 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक गर्मियों में लोग स्विमिंग पूल और वाटर पार्क में एंजॉय करना बहुत पसंद करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ये मजा हमारी आंखों के लिए खतरा भी बन सकता है। दरअसल, कई बार पूल के पानी में मौजूद क्लोरीन, केमिकल्स और बैक्टीरिया आंखों की सेंसिटिव लेयर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे जलन, लालिमा, खुजली और धुंधलापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर भीड़भाड़ वाले पूल में संक्रमण का जोखिम और बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि स्विमिंग का मजा लेते समय आंखों की सेफ्टी को नजरअंदाज न किया जाए। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में स्विमिंग पूल से होने वाले आई-इन्फेक्शन रिस्क की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है? कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है? एक्सपर्ट: डॉ. श्रेया गुप्ता, कंसल्टेंट, ऑप्थेल्मोलॉजी, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- गर्मियों में लोग स्विमिंग पूल और वाटर पार्क ज्यादा जाते हैं। क्या स्विमिंग पूल से आई-इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है? जवाब- हां, गर्मियों में ज्यादा पसीना, धूल और भीड़ के कारण आंखों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। स्विमिंग पूल का पानी अगर ठीक से साफ न किया जाए तो इसमें बैक्टीरिया और वायरस बढ़ सकते हैं। ये बैक्टीरिया आंख की बाहरी परत (कंजक्टाइवा) में सूजन पैदा कर सकते हैं। इससे जलन, रेडनेस, खुजली और आंखों से पानी आने जैसे लक्षण दिख सकते हैं। गंदे या ओवरक्राउडेड पूल में संक्रमण फैलने की आशंका ज्यादा होती है। कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर तैरने से ये रिस्क और बढ़ जाता है। सवाल- स्विमिंग पूल का पानी आंखों को नुकसान क्यों पहुंचाता है? जवाब- इसमें मौजूद केमिकल्स और बैक्टीरिया आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। विस्तार से समझिए- क्लोरीन- पानी को डिसइन्फेक्ट करने के लिए स्विमिंग पूल में क्लोरीन डाली जाती है, लेकिन यह आंखों की नेचुरल प्रोटेक्शन लेयर को ब्रेक कर सकती है। इससे आंखों में ड्राईनेस, जलन और अस्थायी धुंधलापन हो सकता है। अन्य केमिकल्स- पानी का pH (ताकि पानी एसिडिक या बेसिक न हो) बैलेंस बनाए रखने वाले केमिकल्स कॉर्निया को इरिटेट कर सकते हैं। इस तरह के केमिकल के ज्यादा एक्सपोजर से आंखों में जलन महसूस होती है। बैक्टीरिया- जिन स्विमिंग पूल का मेंटेनेंस खराब है, उनमें बैक्टीरिया, फंगस या प्रोटोजोआ हो सकते हैं। ये आंखों को संक्रमित कर सूजन पैदा करते हैं। लंबे समय तक एक्सपोजर से इन्फेक्शन या एलर्जिक रिएक्शन का खतरा बढ़ सकता है। सवाल- वाटर पार्क में नहाने पर संक्रमण का रिस्क ज्यादा क्यों होता है? जवाब- वाटर पार्क में एक साथ कई लोग नहाते हैं, जिससे बैक्टीरिया-वायरस तेजी से फैलते हैं। अगर पानी सही तरीके से फिल्टर नहीं होता, तो गंदगी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। पानी को डिसइन्फेक्ट न करने पर संक्रमण का खतरा बढ़ता है। खुले घाव, आंख-कान या स्किन के जरिए ये शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। सवाल- कैसे पहचानें कि स्विमिंग पूल एक्सपोजर के कारण आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। किन संकेतों को इग्नोर न करें? जवाब- स्विमिंग पूल के पानी में मौजूद क्लोरीन, केमिकल्स और बैक्टीरिया आंखों की बाहरी परत (कंजक्टाइवा व कॉर्निया) को इरिटेट कर सकते हैं। इसलिए ग्राफिक में दिए संकेतों को इग्नोर न करें- सवाल- कुछ लोगों की आंखें ज्यादा संवेदनशील होती हैं। किन लोगों को स्विमिंग पूल में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए? जवाब- वैसे तो स्विमिंग पूल में देर तक नहाना हर किसी के लिए नुकसानदायक है। लेकिन जिनकी आंखें ज्यादा सेंसिटिव होती हैं, उन्हें ये रिस्क ज्यादा होता है। नीचे ग्राफिक में देखिए किन लोगाें को रिस्क ज्यादा होता है- सवाल- क्या कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर स्विमिंग करने से इन्फेक्शन का खतरा और बढ़ सकता है? जवाब- कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर स्विमिंग करने से आंखों में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। पूल के पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस या अमीबा लेंस पर चिपक सकते हैं। लेंस आंख और पानी के बीच माइक्रोब्स को फंसा देता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है। क्लोरीन और अन्य केमिकल्स लेंस की सतह को नुकसान पहुंचाकर आंखों में इरिटेशन बढ़ाते हैं। इससे कंजक्टिवाइटिस या कॉर्नियल इंफेक्शन का जोखिम हो सकता है। इसलिए स्विमिंग से पहले लेंस निकालना या वॉटर-टाइट स्विमिंग गॉगल्स पहनना सुरक्षित विकल्प है। सवाल- स्विमिंग के दौरान कौन-सी कॉमन गलतियां आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं? जवाब- स्विमिंग के दौरान लोग मौज-मस्ती के चक्कर में कुछ गलतियां करते हैं, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं- बिना प्रोटेक्टिव गॉगल्स के तैरने से आंखों का पानी से सीधा संपर्क बढ़ जाता है। बार-बार आंखें रगड़ने से कॉर्निया पर माइक्रो-इंजरी और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। स्विमिंग के बाद आंखों को साफ पानी से न धोने के कारण भी नुकसान हो सकता है। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- आंखों की सेफ्टी के लिए स्विमिंग से पहले, स्विमिंग के दौरान और स्विमिंग के बाद क्या करना चाहिए? जवाब- नीचे पॉइंटर्स से समझें– स्विमिंग से पहले साफ और सही फिटिंग वाले वॉटर-टाइट गॉगल्स पहनें। आई-मेकअप या ऑयली क्रीम हटाकर तैरें, ताकि केमिकल रिएक्शन कम हो। स्विमिंग पूल में अनावश्यक पानी के छींटों से आंखों को बचाएं। स्विमिंग के बाद आंखों को ठंडे, साफ पानी से हल्के से धोएं। जरूरत हो तो लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करें। नहाने के बाद शरीर पोछने के लिए अपना पर्सनल तौलिया रखें। भीड़ या गंदगी दिखे तो स्विमिंग न करना ही बेहतर है। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए- सवाल- अगर स्विमिंग के बाद आंखों में जलन, धुंधलापन या सूजन महसूस हो तो तुरंत क्या करें? जवाब- सबसे पहले आंखों को 5–10 मिनट तक साफ, ठंडे पानी से धोएं। आंखों को रगड़ने या जोर से दबाने से बचें। इससे सतह को नुकसान हो सकता है। कुछ देर के लिए स्क्रीन, धूप और तेज रोशनी से दूर रहें। आराम देने के लिए 10 मिनट तक ठंडी पट्टी (कोल्ड कम्प्रेस) लगा सकते हैं। कॉन्टैक्ट लेंस लगे हों तो तुरंत निकाल दें और साफ केस में रखें। आर्टिफिशियल टीयर्स ड्रॉप्स से ड्राईनेस व इरिटेशन कम हो सकता है। लक्षण बने रहें तो मेडिकल सलाह लेना जरूरी है। सवाल- डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी है? जवाब- कुछ स्थितियों में डॉक्टर को दिखाना जरूरी है- अगर आंखों में दर्द 24-48
Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक खांसी, छींक, थकान और बुखार। ये सब सर्दी-जुकाम और फ्लू के कॉमन लक्षण हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कई बार ये ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। मैकगिल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक 55 साल से कम उम्र की 1 से 5 महिलाओं को हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द बिल्कुल नहीं होता। उन्हें बस मामूली थकान, मतली या बुखार जैसे संकेत दिखते हैं। साइलेंट हार्ट अटैक में हार्ट तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है, लेकिन इसके संकेत हल्के या अस्पष्ट होते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को तनाव, थकान या फ्लू समझकर अनदेखा कर देते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार महिलाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट डिजीज है। वहीं वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, हर साल लगभग तीन में से एक महिला की मौत दिल की बीमारी से जुड़ी होती है। इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में हम बात करेंगे महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक की। साथ ही जानेंगे कि- महिलाओं में इसके संभावित संकेत क्या हो सकते हैं? किन महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा होता है? एक्सपर्ट: डॉ. हेमंत मदान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है? जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक भी एक तरह का हार्ट अटैक ही होता है। इसमें दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसा होने पर कोई साफ संकेत दिखाई नहीं देता, न महसूस होता है। साइलेंट हार्ट अटैक होने पर आर्टरीज में रुकावट पैदा होती है, जिससे हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान होने लगता है, लेकिन शरीर तेज दर्द के रूप में ‘अलार्म’ नहीं देता। कई बार यह इसलिए होता है क्योंकि नर्व्स की संवेदनशीलता कम हो जाती है। इसलिए दर्द महसूस नहीं होता या बहुत हल्का होता है। यानी अंदर से हार्ट को उतना ही नुकसान हो रहा होता है, जितना सामान्य हार्ट अटैक में होता है। बस फर्क इतना है कि शरीर आपको जोर से संकेत नहीं देता। इसलिए इसे ‘साइलेंट’ हार्ट अटैक कहा जाता है। सवाल– साइलेंट हार्ट अटैक और सामान्य हार्ट अटैक में क्या फर्क है? जवाब– इन दोनों के लक्षण, संकेतों और उसके फर्क को नीचे ग्राफिक से समझते हैं- सवाल– पुरुषों की तुलना में महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा कॉमन क्यों है? जवाब– नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– 1. ब्लॉकेज पैटर्न अलग होना महिला और पुरुष में ब्लॉकेज का पैटर्न अलग-अलग होता है। पुरुषों में बड़ी आर्टरी में “ब्लॉकेज” ज्यादा साफ होता है। महिलाओं के शरीर में बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है। 2. हॉर्मोन्स का फर्क महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन काफी हद तक हार्ट को प्रोटेक्ट करता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद उनमें यह जोखिम बढ़ जाता है। 3. दर्द महसूस करने का तरीका महिलाओं और पुरुषों में दर्द को महसूस करने का तरीका या पेन परसेप्शन भी अलग हो सकता है। महिलाओं को या तो दर्द कम महसूस होता है। या वो दर्द को इग्नोर करने की आदी होती हैं। 4. सारी स्टडीज पुरुषों पर हार्ट अटैक को लेकर लंबे समय तक हुई सारी स्टडीज पुरुषों पर आधारित रही हैं। इसलिए हमें महिलाओं के संबंध में ज्यादा जानकारी और डेटा ही नहीं है। सवाल- महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के संभावित संकेत क्या हो सकते हैं? जवाब– महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर बहुत हल्के या सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसलिए कई बार इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। ग्राफिक में इसके संकेत देखिए- सवाल– क्या सिर्फ थकान या कमजोरी भी साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकती है? जवाब– हां, हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अचानक और बिना कारण होने वाली ज्यादा थकान भी हार्ट प्रॉब्लम की ओर इशारा करती है। वहीं हार्ट फाउंडेशन से जुड़ी एक स्टडी में कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक से कुछ महीनों पहले तक लगातार ज्यादा थकान महसूस हो रही थी। सवाल- क्या मानसिक तनाव या डिप्रेशन भी साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है? जवाब– हां, लंबे समय तक तनाव या डिप्रेशन रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सवाल- किन महिलाओं को साइलेंट हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब– कुछ महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं कि किन्हें ज्यादा रिस्क रहता है- जिन्हें डायबिटीज है। जो मोटापे से ग्रस्त हैं। जो फिजिकल एक्टिविटी नहीं करतीं। जो स्मोकिंग करती हैं। जो ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं। जिन्हें डिप्रेशन है। जिन्हें ऑटोइम्यून डिजीज (जैसे-लूपस या रूमेटॉइड आर्थराइटिस) है। जिन्हें PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) है। जिन्हें प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्पलिकेशन्स (जैसे- प्री-एक्लेम्प्सिया) हैं। जिनका ब्लड प्रेशर हाई रहता है। जिनका मेनोपॉज हो चुका है। जिनका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है। इन लोगों को अपनी हार्ट हेल्थ पर खास ध्यान देना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। सवाल- क्या हॉर्मोनल बदलाव (जैसे मेनोपॉज) के बाद महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है? जवाब– हां, इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्तर कम होना है। एस्ट्रोजेन वो हॉर्मोन है, जो प्रजनन उम्र में महिलाओं के हार्ट और ब्लड वेसेल्स की सुरक्षा करता है। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव शरीर के ‘पेन सिग्नल’ को भी प्रभावित कर सकते हैं। सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक का कोई भी संकेत दिखने पर महिलाओं को तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब– इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि बिना देर किए तुरंत मेडिकल मदद ली जाए और नजदीकी अस्पताल में जाकर हार्ट से जुड़ी जांच कराई जाए। पॉइंटर्स से समझते हैं- सांस फूले या अचानक बहुत असहजता महसूस हो तो इसे इग्नोर न करें। लक्षण दिखने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद से अस्पताल पहुंचें। अपने लक्षणों के बारे में किसी करीबी या आसपास मौजूद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें। अगर घर में अकेले रहते हैं तो पैनिक बटन लगवाकर रखें। ऐसी किसी भी इमरजेंसी कंडीशन में पैनिक बटन दबाएं। अगर घर में एस्पिरिन (300mg) है तो एक गोली चबा लें। इसे निगलें नहीं, धीरे-धीरे चबाएं। दरअसल
Actress Meenakshi Thapa Kidnapping And Murder Full Story, was working in kareena kapoor’s film

5 मिनट पहलेलेखक: ईफत कुरैशी और वर्षा राय कॉपी लिंक बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के 10वें और आखिरी केस में जानिए एक्ट्रेस मीनाक्षी थापा हत्याकांड की निर्मम कहानी। साल 2012 में मीनाक्षी मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन में काम कर रही थीं। फिल्म की लीड एक्ट्रेस करीना कपूर थीं। तभी अचानक उनकी किडनैपिंग हुई। एक्ट्रेस की तलाश पुलिस को इलाहाबाद तक ले पहुंची, जहां एक्ट्रेस नहीं बल्कि उनका सड़ता हुआ कंकाल मिला और सिर कहां गया, ये आज भी सामने नहीं आ सका। मार्च 2012 की बात है, देहरादून की रहनेवालीं मीनाक्षी थापा हीरोइन बनने का सपने लिए सपनों की नगरीं मुंबई पहुंचीं। शुरुआती संघर्ष के बाद उन्हें पहले छोटे-मोटे एड में काम मिला और फिर बॉलीवुड फिल्मों में बतौर साइड एक्ट्रेस या जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम मिलने लगा। 2011 में उन्हें टिस्का चोपड़ा, सतीश कौशिक, निशिकांत कामत स्टारर फिल्म 404 में काम मिला। मीनाक्षी इंडस्ट्री में अच्छी पकड़ बनाने लगी थीं। उनका सालों पुराना ख्वाब धीरे-धीरे ही सही लेकिन पूरा हो रहा था। फिल्म पकाई में छोटा सा रोल करने के बाद उन्हें मधुर भंडारकर स्टारर फिल्म हीरोइन में एक छोटा सा रोल मिला। ये फिल्म पहले ही चर्चा में थी। पहले इसमें ऐश्वर्या राय लीड रोल निभाने वाली थीं। कांस फिल्म फेस्विटल में मधुर भंडारकर ने इसकी घोषणा भी कर दी थी, लेकिन प्रेग्नेंट होने के बाद ऐश्वर्या ने फिल्म छोड़ दी। कास्टिंग में बदलाव से फिल्म की शूटिंग टालनी पड़ी और फिर करीना कपूर को साइन किया गया। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। मीनाक्षी रोज काम पर निकलने से पहले मां से बात करती थीं। मीनाक्षी की मां कमला थापा, देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। उनका एक भाई नवराज आर्मी में था और उसकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। छोटे भाई का नाम विक्की था। एक बड़ी बहन हेमू भी थी, जिसकी शादी अजय थापा से हो चुकी थी। साल 2012 में मीनाक्षी थापा महज 26 साल की थीं। 14 मार्च 2012 तक सब ठीक था। 15 मार्च को मीनाक्षी ने मां को कॉल नहीं किया। कुछ देर बाद जब मां ने उन्हें कॉल किया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। मां को लगा कि वो व्यस्त होंगी, तो उन्होंने भी ये बात नजरअंदाज कर दी। 16 मार्च की तारीख लग गई, लेकिन मीनाक्षी का कॉल अब भी नहीं आया। कॉल करने पर अब भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। अब मां की घबराहट बढ़ने लगी। उन्होंने तुरंत बेटे नवराज को इसकी जानकारी दी। भाई ने भी मीनाक्षी से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। घर वाले परेशान थे कि 17 मार्च की दोपहर को मां के मोबाइल नंबर पर मीनाक्षी के नंबर से एक मैसेज आया। उसमें लिखा था- अपनी बेटी को जिंदा देखना है तो 15 लाख रुपए देने पड़ेंगे। कुछ देर बार एक और मैसेज मिला- अगर इस बात की खबर पुलिस को दी तो तुम्हारी बेटी की अश्लील फिल्में बनाकर इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी और पूरे देहरादून में भी सर्कुलेट की जाएंगी। कुछ देर बाद ही उसी मोबाइल नंबर से मीनाक्षी का अकाउंट नंबर भी आया, किडनैपर्स ने उसी अकाउंट में पैसे डालने को कहा था। मीनाक्षी, देहरादून के एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती थीं। घर में इतनी कमाई नहीं थी कि वो 15 लाख जितनी बड़ी रकम दे सकें। मीनाक्षी के भाई के पास 60 हजार ही थे, उन्होंने पहले 30 हजार रुपए दिए हुए अकाउंट नंबर पर भेजे और फिर शाम तक 30 हजार और ट्रांसफर कर दिए। पैसे दिए जाने के बाद उस नंबर से लगातार चेतावनी दी जाने लगी कि 15 लाख रुपए मिलने के बाद ही वो मीनाक्षी को छोड़ेंगे। अगर रकम नहीं दी, तो अंजाम बुरा होगा। भाई और मां किसी भी हालत में मीनाक्षी को सुरक्षित देखना चाहते थे। लगातार आ रहीं चेतावनी को देखते हुए उन्होंने फैसला किया कि वो अपना घर बेचकर फिरौती की रकम चुका देंगे। उससे पहले भाई नवराज ने किडनैपर्स को मैसेज किया कि वो रकम दे देंगे, लेकिन उससे पहले वो मीनाक्षी से बात करना चाहते हैं। इस पर किडनैपर्स ने रिस्पॉन्स देना बंद कर दिया। भाई नवराज को शक हुआ, उन्होंने बहन के नंबर पर कई कॉल किए, लेकिन रिस्पॉन्स तब भी नहीं मिला। नवराज की चिंता और बढ़ने लगी। वो छुट्टी लेकर सीधे मुंबई पहुंचे। उन्होंने अंबोली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। लेकिन पुलिस ने केस को सीरियसली नहीं लिया। मीनाक्षी के परिवार ने बाल ठाकरे से मांगी मदद जांच में तेजी लाने के लिए मीनाक्षी के भाई नवराज, बाल ठाकरे से मदद मांगने उनके दफ्तर पहुंचे। उनकी बाल ठाकरे से तो मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन ऑफिस पर्सन ने उन्हें कमिश्नर के पास भेजा। कमिश्नर अरुप पटनायक को पूरी कहानी सुनाई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस सीबीआई को सौंप दिया। क्राइम ब्रांच की टीम ने मीनाक्षी के करीबी दोस्त आलोक शर्मा से पूछताछ की। आलोक ने उन्हें बताया कि 13 मार्च को ही मीनाक्षी से मिले थे। मीनाक्षी को किसी फिल्म की शूटिंग के लिए शहर से बाहर जाना था। उनके कहने पर आलोक उन्हें मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक ड्रॉप करने गए थे। मीनाक्षी स्टेशन में दो दोस्तों से मिलीं और उनके साथ रवाना हो गईं। वो दो लोग कौन थे और वो सभी कहां जा रहे थे, इसकी आलोक को कोई जानकारी नहीं थी। आलोक के अलावा क्राइम ब्रांच ने मीनाक्षी के सभी दोस्तों और उनके लोखंडवाला के सुरेश नगर स्थित घर के पड़ोसियों से भी पूछताछ की। मीनाक्षी के साथ दो और दोस्त थे लापता जांच के अनुसार, आलोक ने जिन दो दोस्तों के साथ मीनाक्षी को स्टेशन में देखा था, वो अमित कुमार जयसवाल (36 साल) और प्रीति एल्विन सुरीन (26 साल) थीं। मीनाक्षी दो दोस्तों अमित कुमार जयसवाल और प्रीति सुरीन से बेहद करीब थीं। अमित और प्रीति भी स्ट्रगलिंग एक्टर्स थे। वो दोनों भी मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम कर रहे थे। सेट पर तीनों साथ समय बिताते थे। जांच में ये भी सामने आया कि सिर्फ मीनाक्षी ही नहीं बल्कि प्रीति और अमित भी कुछ दिनों से शूटिंग में नहीं आए
Actress Meenakshi Thapa Kidnapping And Murder Full Story, was working in kareena kapoor’s film

1 घंटे पहलेलेखक: ईफत कुरैशी और वर्षा राय कॉपी लिंक बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के 10वें और आखिरी केस में जानिए एक्ट्रेस मीनाक्षी थापा हत्याकांड की निर्मम कहानी। साल 2012 में मीनाक्षी मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन में काम कर रही थीं। फिल्म की लीड एक्ट्रेस करीना कपूर थीं। तभी अचानक उनकी किडनैपिंग हुई। एक्ट्रेस की तलाश पुलिस को इलाहाबाद तक ले पहुंची, जहां एक्ट्रेस नहीं बल्कि उनका सड़ता हुआ कंकाल मिला और सिर कहां गया, ये आज भी सामने नहीं आ सका। मार्च 2012 की बात है, देहरादून की रहनेवालीं मीनाक्षी थापा हीरोइन बनने का सपने लिए सपनों की नगरीं मुंबई पहुंचीं। शुरुआती संघर्ष के बाद उन्हें पहले छोटे-मोटे एड में काम मिला और फिर बॉलीवुड फिल्मों में बतौर साइड एक्ट्रेस या जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम मिलने लगा। 2011 में उन्हें टिस्का चोपड़ा, सतीश कौशिक, निशिकांत कामत स्टारर फिल्म 404 में काम मिला। मीनाक्षी इंडस्ट्री में अच्छी पकड़ बनाने लगी थीं। उनका सालों पुराना ख्वाब धीरे-धीरे ही सही लेकिन पूरा हो रहा था। फिल्म पकाई में छोटा सा रोल करने के बाद उन्हें मधुर भंडारकर स्टारर फिल्म हीरोइन में एक छोटा सा रोल मिला। ये फिल्म पहले ही चर्चा में थी। पहले इसमें ऐश्वर्या राय लीड रोल निभाने वाली थीं। कांस फिल्म फेस्विटल में मधुर भंडारकर ने इसकी घोषणा भी कर दी थी, लेकिन प्रेग्नेंट होने के बाद ऐश्वर्या ने फिल्म छोड़ दी। कास्टिंग में बदलाव से फिल्म की शूटिंग टालनी पड़ी और फिर करीना कपूर को साइन किया गया। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। मीनाक्षी रोज काम पर निकलने से पहले मां से बात करती थीं। मीनाक्षी की मां कमला थापा, देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। उनका एक भाई नवराज आर्मी में था और उसकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। छोटे भाई का नाम विक्की था। एक बड़ी बहन हेमू भी थी, जिसकी शादी अजय थापा से हो चुकी थी। साल 2012 में मीनाक्षी थापा महज 26 साल की थीं। 14 मार्च 2012 तक सब ठीक था। 15 मार्च को मीनाक्षी ने मां को कॉल नहीं किया। कुछ देर बाद जब मां ने उन्हें कॉल किया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। मां को लगा कि वो व्यस्त होंगी, तो उन्होंने भी ये बात नजरअंदाज कर दी। 16 मार्च की तारीख लग गई, लेकिन मीनाक्षी का कॉल अब भी नहीं आया। कॉल करने पर अब भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था। अब मां की घबराहट बढ़ने लगी। उन्होंने तुरंत बेटे नवराज को इसकी जानकारी दी। भाई ने भी मीनाक्षी से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। घर वाले परेशान थे कि 17 मार्च की दोपहर को मां के मोबाइल नंबर पर मीनाक्षी के नंबर से एक मैसेज आया। उसमें लिखा था- अपनी बेटी को जिंदा देखना है तो 15 लाख रुपए देने पड़ेंगे। कुछ देर बार एक और मैसेज मिला- अगर इस बात की खबर पुलिस को दी तो तुम्हारी बेटी की अश्लील फिल्में बनाकर इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी और पूरे देहरादून में भी सर्कुलेट की जाएंगी। कुछ देर बाद ही उसी मोबाइल नंबर से मीनाक्षी का अकाउंट नंबर भी आया, किडनैपर्स ने उसी अकाउंट में पैसे डालने को कहा था। मीनाक्षी, देहरादून के एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखती थीं। घर में इतनी कमाई नहीं थी कि वो 15 लाख जितनी बड़ी रकम दे सकें। मीनाक्षी के भाई के पास 60 हजार ही थे, उन्होंने पहले 30 हजार रुपए दिए हुए अकाउंट नंबर पर भेजे और फिर शाम तक 30 हजार और ट्रांसफर कर दिए। पैसे दिए जाने के बाद उस नंबर से लगातार चेतावनी दी जाने लगी कि 15 लाख रुपए मिलने के बाद ही वो मीनाक्षी को छोड़ेंगे। अगर रकम नहीं दी, तो अंजाम बुरा होगा। भाई और मां किसी भी हालत में मीनाक्षी को सुरक्षित देखना चाहते थे। लगातार आ रहीं चेतावनी को देखते हुए उन्होंने फैसला किया कि वो अपना घर बेचकर फिरौती की रकम चुका देंगे। उससे पहले भाई नवराज ने किडनैपर्स को मैसेज किया कि वो रकम दे देंगे, लेकिन उससे पहले वो मीनाक्षी से बात करना चाहते हैं। इस पर किडनैपर्स ने रिस्पॉन्स देना बंद कर दिया। भाई नवराज को शक हुआ, उन्होंने बहन के नंबर पर कई कॉल किए, लेकिन रिस्पॉन्स तब भी नहीं मिला। नवराज की चिंता और बढ़ने लगी। वो छुट्टी लेकर सीधे मुंबई पहुंचे। उन्होंने अंबोली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की। लेकिन पुलिस ने केस को सीरियसली नहीं लिया। मीनाक्षी के परिवार ने बाल ठाकरे से मांगी मदद जांच में तेजी लाने के लिए मीनाक्षी के भाई नवराज, बाल ठाकरे से मदद मांगने उनके दफ्तर पहुंचे। उनकी बाल ठाकरे से तो मुलाकात नहीं हो सकी, लेकिन ऑफिस पर्सन ने उन्हें कमिश्नर के पास भेजा। कमिश्नर अरुप पटनायक को पूरी कहानी सुनाई तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए केस सीबीआई को सौंप दिया। क्राइम ब्रांच की टीम ने मीनाक्षी के करीबी दोस्त आलोक शर्मा से पूछताछ की। आलोक ने उन्हें बताया कि 13 मार्च को ही मीनाक्षी से मिले थे। मीनाक्षी को किसी फिल्म की शूटिंग के लिए शहर से बाहर जाना था। उनके कहने पर आलोक उन्हें मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक ड्रॉप करने गए थे। मीनाक्षी स्टेशन में दो दोस्तों से मिलीं और उनके साथ रवाना हो गईं। वो दो लोग कौन थे और वो सभी कहां जा रहे थे, इसकी आलोक को कोई जानकारी नहीं थी। आलोक के अलावा क्राइम ब्रांच ने मीनाक्षी के सभी दोस्तों और उनके लोखंडवाला के सुरेश नगर स्थित घर के पड़ोसियों से भी पूछताछ की। मीनाक्षी के साथ दो और दोस्त थे लापता जांच के अनुसार, आलोक ने जिन दो दोस्तों के साथ मीनाक्षी को स्टेशन में देखा था, वो अमित कुमार जयसवाल (36 साल) और प्रीति एल्विन सुरीन (26 साल) थीं। मीनाक्षी दो दोस्तों अमित कुमार जयसवाल और प्रीति सुरीन से बेहद करीब थीं। अमित और प्रीति भी स्ट्रगलिंग एक्टर्स थे। वो दोनों भी मधुर भंडारकर की फिल्म हीरोइन में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम कर रहे थे। सेट पर तीनों साथ समय बिताते थे। जांच में ये भी सामने आया कि सिर्फ मीनाक्षी ही नहीं बल्कि प्रीति और अमित भी कुछ दिनों से शूटिंग में नहीं आए
केजरीवाल बोले- मोदी बतौर पीएम 2026 पूरा नहीं कर पाएंगे:मोदी और शाह का साम्राज्य खत्म होने वाला है, पॉपुलैरिटी पाताललोक में पहुंची

दिल्ली के पूर्व सीएम और AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर 2026 पूरा नहीं कर पाएंगे। मेरा दिल और राजनीतिक समझ कहती है कि मोदी और अमित शाह जाने वाले है। केजरीवाल ने कहा कि मोदी जी की पॉपुलैरिटी आज पाताल लोक पहुंच चुकी है। उनका साम्राज्य जाने वाला है। केजरीवाल ने यह बात शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय रावत की किताब लॉन्च के दौरान दिल्ली में कही। इस दौरान कई विपक्षी नेता मौजूद थे। ‘सोशल मीडिया पर कंट्रोल खत्म, आलोचना बढ़ी’ केजरीवाल ने कहा कि पहले सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना दबा दी जाती थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। जनता के बीच वे इतने अलोकप्रिय हो चुके हैं कि हजारों-लाखों ट्रोल्स बैठाने के बावजूद सोशल मीडिया पर नेरैटिव कंट्रोल नहीं कर पा रहे है। उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी एक पोस्ट डालते हैं, आप उसके नीचे कमेंट्स पढ़ लो। एक समय ऐसा होता था जब इनकी पूरी मशीनरी मिलकर एक भी नेगेटिव कमेंट आता था तो उसको डिलीट या म्यूट कर देते थे। लेकिन अब तो मोदी जी एक ट्वीट करते हैं तो नीचे (कमेंट बॉक्स) में सिर्फ गालियां मिलती हैं और इसके अलावा कुछ नहीं होता। केजरीवाल ने कहा कि एक समय था जब मोदी जी के खिलाफ कोई मीम बना देता था तो उसको जेल हो जाती थी। लेकिन अब इतने मीम बन रहे हैं कि किस-किस को जेल में डालेंगे। सोशल मीडिया का पूरा माहौल और इको-सिस्टम ही बदल चुका है और वही आपको बताता है कि मोदी जी की पॉपुलैरिटी आज पाताल लोक पहुंच चुकी है।” केजरीवाल ने कहा- बेईमानी से चुनाव जीत रहे है बीजेपी के चुनाव जीतने पर केजरीवाल ने कहा कि चुनाव बेईमानी से जीत रहे हैं। उसका सबसे बड़ा जीता जागता उदाहरण मैं हूं। मैं नई दिल्ली विधानसभा से चुनाव लड़ा। मेरे जेल जाने से पहले मेरी विधानसभा में जब मैं पिछली बार लड़ा था तो 1 लाख 48 हजार वोट थे। जब मैं जेल से लौटकर आया तो 1 लाख 6 हजार वोट बचे थे। 42 हजार वोट इन्होंने पीछे से कटवा दिए। यानी कि मेरी विधानसभा के लगभग 30 फीसदी वोट कटवा दिए और 3 हजार वोट से जीत गए। पिछली बार मैं 30 हजार वोट से जीता था। ये इसी तरह से जीत रहे हैं, वोट जोड़ते हैं, डिलीट करवाते हैं और फर्जी वोट डलवाते हैं। जब देश को इन दोनों (पीएम मोदी और अमित शाह) से मुक्ति मिलेगी तो एक संतुष्टि यह होगी कि इस लड़ाई में हमने भी योगदान दिया और हम भी जेल गए थे। मिडिल ईस्ट संकट को लेकर केंद्र पर सवाल इससे पहले केजरीवाल ने X पर पोस्ट कर मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध से पैदा हालात को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में गिरावट है, एलपीजी की कमी से कई कारोबार प्रभावित हुए हैं और लोग गर्मी में सिलेंडर के लिए कतारों में खड़े हैं। साथ ही प्रवासी मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है और रुपया भी निचले स्तर पर है। जब दुनिया को पहले से अंदेशा था, तो सरकार ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की और हर संकट का बोझ आम लोगों पर ही क्यों पड़ता है। ED और चुनाव आयोग को लेकर दूसरे विपक्षी नेताओं का बयान… इस कार्यक्रम में मौजूद अन्य विपक्षी नेताओं ने भी केंद्र सरकार और एजेंसियों पर सवाल उठाए। किताब के लेखक संजय राउत ने अपने जेल के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने वहां बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कहा, “हम इंतजार करेंगे, जो जिम्मेदार हैं, उन्हें भी एक दिन जेल जाना होगा।”
2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। इन बिलों के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। इससे लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है। वहीं महिला सांसदों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 273 हो जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर सहमति बनाने के लिए सोमवार को एनडीए और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक की। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते पेश किए जा सकते हैं। दरअसल, 2023 में महिला आरक्षण कानून संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। इसके तहत महिला आरक्षण नई जनगणना के बाद लागू होना है। अब सरकार का प्रस्ताव है कि नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए। इससे प्रोसेस में तय समय पर पूरी हो सकेगी और आरक्षण लागू किया जा सकेगा। दो बिल लाए जाएंगे, संविधान संशोधन भी शामिल इस बदलाव के लिए सरकार दो बिल लाएगी। एक बिल के जरिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा, जबकि दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा होगा। इसे पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होगा। इसी वजह से सरकार विपक्ष का समर्थन जुटाने में लगी है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए कई नेताओं से बैठकें की हैं। इनमें वाईएसआर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे। बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) से भी बातचीत हुई है, जबकि कांग्रेस से चर्चा बाकी है। सहमति बनने पर बिल इसी हफ्ते संसद में पेश किए जा सकते हैं। लोकसभा में 816 सीटों की हो सकती है, 273 महिलाओं के लिए आरक्षण प्रस्ताव के मुताबिक लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। इसके बाद करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। आरक्षण का ढांचा ऐसा होगा, जिसमें एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को उनके कोटे के भीतर हिस्सा मिलेगा। ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं है। इसी फॉर्मूले पर राज्यों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाने और महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की योजना है, ताकि पूरे देश में एक जैसा ढांचा रहे। 2023 में पास हुआ था कानून, अभी लागू नहीं महिला आरक्षण कानून 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इसकी मंजूरी दे चुकी हैं। लोकसभा में यह बिल लगभग सर्वसम्मति से और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पास हुआ था। हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है। इसकी लागू होने की तारीख केंद्र सरकार अधिसूचना के जरिए तय करेगी और जरूरत पड़ने पर संसद इसमें संशोधन कर सकती है। महिलाओं के लिए राजनीतिक आरक्षण की मांग की टाइम लाइन 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिलाओं के लिए राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसमें बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। संविधान सभा की बहसों में भी महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। तब इसे यह कहकर खारिज कर दिया गया था कि लोकतंत्र में खुद-ब-खुद सभी समूहों को प्रतिनिधित्व मिलेगा। 1947: फ्रीडम फाइटर रेणुका रे ने उम्मीद जताई कि भारत की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों के सत्ता में आने के बाद महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की गारंटी दी जाएगी। हालांकि यह उम्मीद पूरी नहीं हुई और महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व सीमित ही रहा। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया, जिसमें महिलाओं की घटती राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डाला गया। हालांकि समिति के कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया, उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की गई थी। 1988: महिलाओं के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perpective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। 1996: एचडी देवेगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद, उनकी सरकार अल्पमत में आ गई और 11वीं लोकसभा भंग हो गई 1998: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने 12वीं लोकसभा में 84वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में विधेयक को फिर से पेश किया। इसके विरोध में एक राजद सांसद ने विधेयक को फाड़ दिया। विधेयक फिर से लैप्स हो गया, क्योंकि वाजपेयी सरकार के अल्पमत में आने के साथ 12वीं लोकसभा भंग हो गई थी। 1999: NDA सरकार ने 13वीं लोकसभा में एक बार फिर विधेयक पेश किया, लेकिन सरकार फिर से इस मुद्दे पर आम सहमति जुटाने में नाकाम रही। NDA सरकार ने 2002 और 2003 में दो बार लोकसभा में विधेयक लाया, लेकिन कांग्रेस और वामपंथी दलों ने समर्थन का आश्वासन दिए जाने के बाद भी इसे पारित नहीं कराया जा सका। 2004: सत्ता में आने के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार ने साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) में अपने वादे के तहत बिल पारित करने की अपनी मंशा की घोषणा की। 2008: मनमोहन सिंह सरकार ने विधेयक राज्यसभा में पेश किया और 9 मई, 2008 को इसे कानून और न्याय पर स्थायी समिति को भेजा गया। 2009: स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और विधेयक को समाजवादी पार्टी, जेडीयू और राजद के विरोध के
इंदौर में शहीदों की स्मृति में निकली मशाल यात्रा:कई मंचों से पुष्प वर्षा कर दी गई श्रद्धांजलि; देशभक्ति के नारों की गूंज

शहीद दिवस के अवसर पर शहर का पश्चिम क्षेत्र देशभक्ति के जज्बे से सराबोर नजर आया। क्रांतिकारी भगतसिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की स्मृति में निकली पारंपरिक मशाल यात्रा इस वर्ष भी भव्यता और उत्साह के साथ आयोजित की गई। मशाल यात्रा की अगुवाई मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने की, जिसमें हजारों नागरिक शामिल हुए। फूटी कोठी (संत सेवालाल ब्रिज) से प्रारंभ हुई यात्रा महाराणा प्रताप चौक तक पहुंची। हाथों में जलती मशालें, भगवा ध्वज और “भारत माता की जय” के नारों के बीच शहर की सड़कों पर देशभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। यात्रा मार्ग पर कई मंच लगे थे, जहां 50 से अधिक संस्थाओं और कई समाजों ने पुष्पवर्षा कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा और बुजुर्ग हर आयु वर्ग की भागीदारी ने आयोजन को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया। पूरा मार्ग देशभक्ति गीतों और नारों से गूंजता रहा। आयोजकों ने कहा कि शहीदों के बलिदान को याद रखना और नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ना ही इस मशाल यात्रा का उद्देश्य है। कार्यक्रम के समापन पर शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
लालच में आकर बैंक खाते किराए पर दिए, 2 गिरफ्तार:साइबर क्राइम की टीम ने मध्यप्रदेश के बड़वानी व देवास से पकड़े म्यूल अकाउंट होल्डर

ग्वालियर में गत्ता फैक्ट्री मालिक को क्रिप्टों करेंसी का लालच देकर 1.41 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी करने वाले मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा है। साइबर क्राइम की टीम ने मध्य प्रदेश के सेंधवा बड़वानी व देवास के पास से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके अकाउंट में ठगी के 14 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पूछताछ में पता लगा है कि इनके अकाउंट “म्यूल खाते’ हैं। मतलब यह इनके नाम पर है, लेकिन इन्होंने ठगों को यह किराए पर दिए हुए हैं। दिसंबर 2025 में कारोबारी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड हुआ था। तभी से पुलिस लगातार पड़ताल कर उन लोगों की तलाश कर रही है, जिनके अकाउंट में यह पैसा गया था। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि पिंटो पार्क में फैक्ट्री संचालित करने वाले दुर्गाशंकर नागर पुत्र जयनारायण नागर निवासी मुरार एन्क्लेव रेजीडेंसी, गोला का मंदिर को ई-मेल के जरिए क्रिप्टो करेंसी में इन्वेस्टमेंट का झांसा दिया गया। गोल्ड डीजीएम कॉइन फिक्स डॉट कॉम कंपनी में रुपए इन्वेस्टमेंट करने की बात कही गई। दुर्गाशंकर नागर इनके झांसे में आ गए और रुपए इन्वेस्टमेंट करने लगे। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि जब दुर्गाशंकर नागर को कुछ शक हुआ तो अपने इन्वेस्टमेंट किए गए रुपए वापस मांगे तो आरोपियों ने ऑनलाइन तरीके से दिखाया कि आपके रुपए निरंतर बढ़ रहे हैं। इस तरह से आरोपियों ने दुर्गाशंकर नागर से दो महीने में 1 करोड़ 41 लाख 17 हजार रुपए तमाम बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। कारोबारी इसके बाद जब भी पैसे वापस मांगते तो ठग कुछ न कुछ बहाना बना देते और रुपए देने से मना करने लगे। इसके बाद दुर्गाशंकर नागर क्राइम बांच थाने पहुंचे और मामला कायम कराया। मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने पर मिली सफलता एसएसपी धर्मवीर सिंह ने इस मामले को साइबर विंग को सौंपा और सीएसपी मनीष यादव को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द आरोपी गिरफ्त में होने चाहिए। सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि मामला जब हाथ में आया तो सबसे पहले बारीकी से अध्ययन किया कि कहां-कहां किन बैंक खातों में रुपए ट्रांसफर हुए हैं। उसके बाद जब कुछ डिटेल मिली तो तुरंत बैंक खाते जिनके नाम पर थे उनके मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की जाने लगी। कुछ दिन पहले आरोपी जुब्रान खान तथा अकरम खान के बारे में पता चला कि यह दोनों सेंधवा बड़वानी तथा देवास के आस-पास हैं। तत्काल टीम इनकी धरपकड़ के लिए रवाना की गई। दोनों को रात में हाइवे से दबोच लिया है। दोनों खातों में गए थे ठगी के 14 लाख रुपए पुलिस ने बताया कि पकड़े गए आरोपी जुब्रान खान पुत्र आलम शेख निवासी देवास के खाते में 9 लाख 30 हजार रुपए तथा अकरम खान पुत्र इस्लाम खान के खाते में 5 लाख रुपए पहुंचे थे। ये दोनों पहली लेयर के आरोपी हैं जिन्होंने कुछ रुपए के लिए अपने खाते किराए पर अपराधियों को दिए थे। सीएसपी मनीष यादव ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया जाएगा।
ग्वालियर में संदिग्ध हालात में महिला को लगी गोली:घर की सफाई करते समय कंधे में लगी गोली, सीटी स्कैन में पता लगा

ग्वालियर में एक महिला को घर में सफाई करते समय कंधे पर गोली लगी है। घटना 15 मार्च सुबह 9 बजे खेरियामोदी की है। महिला को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। वहां सीटी स्केन रिपोर्ट में कंधे में बुलेट लगी होने की बात सामने आई है। अस्पताल से पुलिस को सूचना दी गई थी। महिला के परिजन ने 22 मार्च को बिजौली थाना आकर मामले की शिकायत की है। जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। घर में सफाई करते समय महिला को गोली लगने की घटना की परिस्थितियां संदिग्ध नजर आ रही हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बिजौली थाना स्थित खेरियामोदी निवासी 51 वर्षीय रामायणी पत्नी बल्लू पाल 15 मार्च की सुबह अपने घर की सफाई कर रही थीं। सफाई करने के दौरान उन्हें बाएं कंधे में जलन व तेज दर्द होने लगा और खून भी बह रहा था। जिसके बाद महिला वहीं गिर पड़ी। परिजन को बात बताई तो परिजन ने समझा कि सफाई करने के दौरान किसी सामान से चोट लग गई होगी। जब खून बहना बंद नहीं हुआ और दर्द बढ़ने लगा तो परिजन रामायणी देवी को निजी नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। नर्सिंग होम में कुछ दिन तक इलाज चलता रहा, लेकिन दर्द में कुछ फायदा नहीं हुआ। इसके बाद रामायणी देवी की एक्स-रे व सीटी स्केन कराई गई। सीटी स्केन जांच में पता चला कि गोली लगी है। हाथ में लगी गोली, पेट में पहुंची रामायणी देवी के गोली बाएं हाथ के ऊपरी हिस्से में लगी थी, धीरे-धीरे खिसककर उनके पेट में पहुंच गई। रविवार रात को उनका ऑपरेशन हुआ है। हालांकि यह जानकारी नहीं मिल सकी है कि बाएं हाथ में लगी गोली पेट तक कैसे पहुंच गई और वह अभी निकली है कि नहीं। गोली कहां से आकर लगी और किसने चलाई है यह पता नहीं चल सका है। मामला संदिग्ध है, जांच जारी इस मामले में बिजौली थाना में पदस्थ एसआई राहुल सिंह का कहना है कि महिला को गोली उसके घर में सफाई करते समय लगी। घटना के 7 दिन बाद पुलिस को इसकी सूचना मिली, तो प्राथमिकी दर्ज की गई है। परिजन को पता नहीं लगा कि गोली लगी है, वह तो सिटी स्कैन की जांच के बाद पता चला। कई बातें ऐसी हैं जो उलझा रही हैं। मामले की विस्तार से जांच की जा रही है।








