‘केरल के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया’: चुनाव से पहले, कर्नाटक के वायनाड के लिए 10 करोड़ रुपये के अनुदान को भाजपा की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:24 मार्च, 2026, 14:58 IST चालू वित्तीय वर्ष में यह दूसरी बार है जब कर्नाटक कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने पड़ोसी राज्य केरल में पुनर्वास के लिए धन उपलब्ध कराया है। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया. (फाइल फोटो: पीटीआई) वायनाड जिले में भूस्खलन पुनर्वास के लिए अतिरिक्त 10 करोड़ रुपये जारी करने के कर्नाटक सरकार के फैसले की भारतीय जनता पार्टी ने आलोचना की है। यह कदम राज्य विधानसभा चुनाव से पहले उठाया गया है और विपक्ष इसे तुष्टीकरण की राजनीति के रूप में देख रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में यह दूसरी बार है जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने पड़ोसी राज्य में पुनर्वास के लिए धन मुहैया कराया है। अगस्त 2025 में, 2025-26 के लिए पूरक अनुमान की पहली किस्त के दौरान, मेप्पडी में 2024 के भूस्खलन से प्रभावित 100 परिवारों को समर्थन देने के लिए 10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। नवीनतम आवंटन सोमवार को विधानसभा में प्रस्तुत अनुपूरक अनुमान की तीसरी और अंतिम किस्त में शामिल किया गया, जो कि 14,767.89 करोड़ रुपये है। बीजेपी ने सिद्धारमैया पर साधा निशाना विपक्ष के नेता आर अशोक ने एक्स पर एक पोस्ट में अनुदान को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की आलोचना की। उन्हें “केरल के मुख्यमंत्री” के रूप में संदर्भित करते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि धनराशि “आलाकमान नेताओं को खुश करने और अपनी कुर्सी बचाने” के लिए थी। अशोक ने कहा कि अगर कर्नाटक में ऐसा “व्यापक हृदय वाला और संवेदनशील” मुख्यमंत्री होता, तो हर निर्वाचन क्षेत्र को पर्याप्त धन मिलता, उन्होंने कहा कि कन्नडिगा “केरल के लोगों की तरह भाग्यशाली नहीं थे”। क्या सिद्धारमैया कर्नाटक या केरल के मुख्यमंत्री हैं? ऐसे समय में जब कर्नाटक ठेकेदारों को बकाया चुकाने, कचरा प्रबंधन एजेंसियों को भुगतान करने, सरकारी स्कूलों की मरम्मत और अस्पतालों में दवाएं सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष कर रहा है। @INCKarnataka सरकार को किसी तरह एक और मिल गया है… pic.twitter.com/HDEOxRkfML – आर. अशोक (@RAshokaभाजपा) 24 मार्च 2026 मेप्पडी में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिसने राजनीतिक आलोचना को बढ़ा दिया है। सिद्धारमैया सरकार को पहले एक अलग घटना में मुआवजा देने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। फरवरी 2024 में, इसने वायनाड में हाथी के हमले के पीड़ित के लिए 15 लाख रुपये की घोषणा की। वन विभाग द्वारा पकड़े गए और रेडियो कॉलर लगाए गए जानवर ने जिले में एक व्यक्ति को मार डाला था, जो कर्नाटक के साथ अपनी उत्तरी सीमा साझा करता है। इस फैसले की बीजेपी ने भी आलोचना की थी. उस समय संसद में वायनाड का प्रतिनिधित्व राहुल गांधी ने किया था. जगह : कर्नाटक, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 24 मार्च, 2026, 14:58 IST समाचार राजनीति ‘केरल के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया’: चुनाव से पहले, कर्नाटक के वायनाड के लिए 10 करोड़ रुपये के अनुदान को भाजपा की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)वायनाड(टी)वायनाड पुनर्वास(टी)कर्नाटक बीजेपी(टी)कर्नाटक सरकार(टी)कर्नाटक कांग्रेस(टी)कर्नाटक पॉलिटॉक्स(टी)प्रियंका गांधी(टी)केरल सीएम सिद्धारमैया के लिए 10 करोड़ का अनुदान
सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज | symptoms of heart attack

Last Updated:March 24, 2026, 14:58 IST सीने में अचानक होने वाला दर्द एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है और समय पर इलाज न मिलने पर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है. मऊ. अक्सर देखा जाता है छोटी-छोटी समस्याओं को लोग नजर अंदाज करते हैं, लेकिन उन्हें या नहीं पता कि छोटी सी लापरवाही उनकी जान ले सकती है. वर्तमान में देखा जा रहा है लोगों के सीने में दर्द अधिक हो रहा है और इस दर्द को नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ जा रहा है. इस बीमारी को लेकर एक्सपर्ट क्या सलाह दे रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर अरमान अली बताते हैं कि सीने में दर्द कई कारणों से अचानक शुरू हो रही हैं, जिसमें ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं. यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है और यह बड़ी बीमारी बनती चली जा रही है और छोटी सी लापरवाही इस बीमारी में जान तक ले रह रही है, क्योंकि इस बीमारी में सीने में तीव्र गति से अचानक दर्द शुरू हो रहा है. इसमें लोगों को पसीना अधिक आना शुरू हो जा रहा है और उनकी सांस फूलने लगा रही हैं. यदि आप के सीने में अचानक दर्द शुरू हो रहा है तो किसी नजदीकी योग्य चिकित्सक को दिखाकर अपना इलाज शुरू कर दें नहीं आपकी समस्या बढ़ सकती है. छोटी सी लापरवाही में जा सकती है जानयदि इस बीमारी में आप लापरवाही बढ़ाते हैं तो अचानक सीने का दर्द हार्ट अटैक हो सकता है और दिल की गड़बड़ी की वजह से अचानक हृदय गति रुक सकती है और मौत भी हो सकती है. सीने के दर्द को हल्के में ना ले किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें, नहीं तो छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है. यदि आप बीपी, थायराइड या शुगर जैसी बीमारी से ग्रसित हो तो इस बीमारी में आप सावधानी बरतना जरूरी हैं क्योंकि इन बीमारियों में यह समस्या तेजी से आती है और लोगों के सीने में अचानक दर्द होने लगता है जो हृदय गति को रोक देता है. सीने में दर्द से बचने के लिए शुगर बीपी को करें मेंटेनइस समस्या से बचने के लिए यदि आप शुगर के पेशेंट हैं तो शुगर के अनुसार अपना खान-पान रखें, शुगर को मेंटेन रखें. यदि बीपी के मरीज है तो नमक कम खाएं यदि कोलेस्ट्रॉल ज्यादा रहता है तो नियमित व्यायाम करें. हाई-फाई डाइट को अवॉइड करें और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें. सीने का दर्द अचानक शुरू होता है और बहुत तीव्र गति से पहुंचता है यह दर्द अधिकतर कुछ सेकंड या मिनट का होता है, लेकिन कुछ लोगों का दर्द घंटे चला जाता है. जिसमें मरीज की हालत गंभीर बन जाती है और कभी-कभी जान चली जाती है. यदि छाती में दर्द के साथ पसीने आए तो यह हार्ट अटैक के कारण बन सकते हैं. ऐसे में सावधान रहें यदि सेने में दर्द शुरू हो तो किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:58 IST
ध्रुव राठी पर भड़के धुरंधर एक्टर:नवीन कौशिक बोले- फिल्म को हेट का सोर्स मत बनाओ, सिर्फ फ्लो एन्जॉय करो

यूट्यूबर ध्रुव राठी के धुरंधर 2 को प्रोपेगेंडा बताए जाने पर एक्टर नवीन कौशिक नाराज हो गए हैं। धुरंधर 1 में ‘डोंगा’ का किरदार निभाने वाले एक्टर नवीन कौशिक ने कहा है कि, जिंदगी का हर पहलू पॉलिटिक्स से जुड़ा है, चाहे वह नेशनल पॉलिटिक्स हो या आपसी रिश्ते। कोई भी अच्छी फिल्म किसी न किसी तरह की आइडियोलॉजी को जरूर दिखाएगी। उन्होंने आगे कहा कि फिल्म को नफरत फैलाने का जरिया नहीं बनाना चाहिए। सबके पास बोलने की आजादी है, मैं बहस कर सकता हूं। लेकिन फिल्म को हेट का सोर्स मत बनाओ। फिल्म है, इसे फिल्म के फ्लो में देखो और एन्जॉय करो। नवीन कौशिक ने यूट्यूब चैनल हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में ये बातें कहीं। ध्रुव राठी ने फिल्म को बताया ‘दिमाग की बकवास’ विवाद की शुरुआत यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक वीडियो से हुई, जिसमें उन्होंने डायरेक्टर आदित्य धर को ‘बीजेपी प्रचारक’ बताया। ध्रुव ने सोशल मीडिया पर लिखा, मैंने 3 महीने पहले ही आदित्य धर को प्रोपेगेंडा करने वाला कहा था। पिछली फिल्म में यह हल्का था, लेकिन इस बार वह ओवरकॉन्फिडेंस में खुलकर बोल गए हैं। अच्छी तरह से बनाया गया प्रोपेगेंडा खतरनाक होता है, लेकिन यह फिल्म तो अच्छी तरह बनी भी नहीं है। पहले भी आलोचना कर चुके ध्रुव राठी यह पहली बार नहीं है जब आदित्य धर की फिल्म पर सवाल उठे हों। पिछले साल दिसंबर 2025 में रिलीज हुई ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट को भी ध्रुव राठी ने ‘झूठा और वाहियात प्रोपेगेंडा’ बताया था। उस वक्त भी उन्होंने आदित्य धर पर झूठ बेचने का आरोप लगाया था। 5 दिन और 800 करोड़ से ज्यादा की कमाई प्रोपेगेंडा के आरोपों और आलोचनाओं के बावजूद फिल्म की कमाई की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। भारत में फिल्म ने 5 दिनों में 519.12 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। फिल्म ने रिलीज के पांचवें दिन यानी सोमवार को भारत में 65 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, फिल्म ने दुनियाभर में 800 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है और फिल्म छावा और पीके के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल में वोटर लिस्ट पर मतदान! आधी रात जारी की गई ऐतिहासिक सूची से बढ़ा तनाव, कितने नाम जुड़े-कटे अब भी रहस्य

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सांस्कृतिक कलाकारों की सूची ने राज्य की राजनीति में नया तूफ़ान खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग ने सोमवार 23 मार्च की आधी रात को सबसे पहले एसआईआर मतदाता सूची जारी की, लेकिन अब तक साफ नहीं किया गया कि कुल कितने जिलों का नाम जोड़ा या हटाया गया है, इस अनिश्चितता ने राजनीतिक समीकरण के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जंग को तेजी से कर दिया है। 28 फरवरी को जारी अंतिम कलाकार सूची में करीब 60 लाख नाम एडजुडिकेशन के तहत कलाकार दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर 705 शहीद अधिकारियों के इन मामलों की समीक्षा के लिए सुझाव दिया गया है। मुख्य अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि अब तक लगभग 29 लाख लाख का निर्णय लिया जा चुका है, जबकि शेष मामलों की प्रक्रिया जारी है। गॉडफादर ने सवाल उठाया रूढ़िवादी कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोलकाता के मेयर और मंत्री फिरहाद हकीम ने लगाया आरोप. उन्होंने कहा, ‘देखा गया है कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 40 फीसदी आबादी के ताले गिरे हुए हैं. संविधान हमें वोट देने का अधिकार देता है और जो संविधान विरोध करता है, वह भारत का है। अगर चुनाव आयोग भारत के खिलाफ है तो हम उच्च न्यायालय का रुख करेंगे और उसे हटाने की मांग करेंगे, क्योंकि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक को मतदान का अवसर मिले।’ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का जवाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने भी इस प्रक्रिया को मंदिर पर्यवेक्षण में बताया। उन्होंने कहा, ‘प्रतिनिधि सूची सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और कोलकाता उच्च न्यायालय के अधिकारियों की जांच की तैयारी की जा चुकी है। नामकरण स्तर पर नवीन के साथ क्षेत्र-वार नामांकन पर बैठकें हो रही हैं। इन बैठकों में सीमित पुस्तकालयों को बुलाया जा रहा है और विशेष क्षेत्रों व विभागों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।’ भाजपा प्रत्याशी प्रत्याशी टिबरेवाल ने सूची जारी करते हुए कहा, “नाम आधी रात के बाद के हैं, नाम नहीं हैं। आप सुबह देखिए या शाम को, वही नाम रहते हैं। जो समर्थक शामिल थे, उन्हें अब हटा दिया गया है। लोकतंत्र में केवल वैध समर्थकों को वोट देने का अधिकार है, अवैध लोगों को नहीं।” सूची पर राजनीति फ्लोरिडा को अपना स्टेटस जांचने के लिए बूथ-स्टार की सूची डाउनलोड करने को कहा गया है, लेकिन कई लोगों ने तकनीकी समस्याओं की शिकायत की है। जिन अभियोजकों का नाम उजागर किया गया है, उन्हें 15 दिनों के भीतर न्यायिक न्यायाधिकरण में अपील करने का अधिकार दिया गया है। सूची सूची यह विवाद राजनीति को और तीखा बना सकती है। एक ओर बीजेपी इसे ‘फर्जी वोटरों की सफ़ाई’ बता रही है, वहीं टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला दे रही है। अब संस्था चुनाव आयोग के अगले कदम पर गौर कर रही है। अंतिम आँकड़े और आगे जारी करने वाली योजनाएँ ही तय करती हैं कि यह विवाद थमेगा या अल्पमत बॉट को और तेज़ करेगा। इस्लामिक यूरोपियन को देखते हुए राज्य भर में सुरक्षा एपिसोड जारी किया गया है। 294 अरुणाचल प्रदेश के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है, जबकि प्राथमिक 4 मई को होगा। ये भी पढ़ें: हैदराबाद पेट्रोल संकट: पेट्रोल पंप पर नो स्टॉक के बिल, देश के राज्यों में ईरान जंग का असर, पढ़ें पूरी रिपोर्ट (टैग्सटूट्रांसलेट)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल मतदाता सूची विवाद(टी)एसआईआर अनुपूरक सूची(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)चुनाव आयोग भारत(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)वेस्ट बंगाल चुनावी सूची(टी)एसआईआर लिस्ट(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)चुनाव आयोग भारत(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026
फतेहगढ़ साहिब के वकील की कनाडा में मौत:कार चलाते समय आया हार्ट अटैक, तीन साल पहले परिवार के साथ विदेश गए

फतेहगढ़ साहिब के 42 वर्षीय वकील हर्षविंदर सिंह चीमा का कनाडा में निधन हो गया है। उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई। इस खबर से फतेहगढ़ साहिब के अधिवक्ताओं और उनके परिचितों में शोक की लहर फैल गई है। हर्षविंदर सिंह चीमा लगभग तीन साल पहले अपने परिवार के साथ कनाडा चले गए थे, जहां उनकी पत्नी और बच्चे भी उनके साथ रह रहे थे। कार चलाते समय हर्षविंदर सिंह को अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। उनके पैतृक शहर और साथी वकीलों तक यह खबर पहुंचने पर गहरा शोक व्यक्त किया। कोर्ट कॉम्प्लेक्स में श्रद्धांजलि सभा इस दुखद घटना के बाद, फतेहगढ़ साहिब कोर्ट कॉम्प्लेक्स में वकीलों ने शोक व्यक्त किया। बार एसोसिएशन ने शोक प्रस्ताव पारित किया और बार रूम में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। वकीलों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। शोक के तौर पर आज अदालतों में ‘नो वर्क’ रखा गया। एडवोकेट अमरदीप सिंह धारणी ने बताया कि हर्षविंदर सिंह चीमा एक मेहनती और मिलनसार अधिवक्ता थे, जिन्होंने फतेहगढ़ साहिब में लंबे समय तक वकालत की और अपनी पहचान बनाई। उन्होंने उनके आकस्मिक निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार कनाडा में ही किया जाएगा, क्योंकि उनका पूरा परिवार वहीं रहता है।
RCB Yash Dayal IPL 2026 Update; Rape Case

स्पोर्ट्स डेस्क43 मिनट पहले कॉपी लिंक यश दयाल को पिछले साल की नीलामी से पहले RCB ने 5 करोड़ रुपए में रिटेन किया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के तेज गेंदबाज यश दयाल इस सीजन टीम से नहीं जुड़ेंगे। टीम के डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट मोहम्मद बोबाट ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यश निजी कारणों से इस सीजन में नहीं खेलेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि खिलाड़ी अभी भी टीम के साथ कॉन्ट्रैक्ट में बने हुए हैं। यश को पिछले साल की नीलामी से पहले RCB ने 5 करोड़ रुपए में रिटेन किया था। उन्होंने 2022 में गुजरात टाइटंस के साथ IPL डेब्यू किया था और उसी साल टीम के साथ खिताब भी जीता था। 2 बार रेप के आरोप लग चुके यश दयाल इस समय दो अलग-अलग मामलों में यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे हैं। गाजियाबाद की एक महिला ने आरोप लगाया है कि दयाल ने शादी का झांसा देकर पांच साल तक उसका भावनात्मक और शारीरिक शोषण किया। इस शिकायत के बाद उनके खिलाफ रेप का मामला दर्ज हुआ। इसके अलावा जयपुर में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का भी आरोप लगाया गया है। आरोप है कि दयाल ने क्रिकेट में मदद का भरोसा देकर 17 साल की लड़की के साथ 2023 में दुष्कर्म किया। इस मामले में जयपुर के सांगानेर सदर थाने में FIR दर्ज है। यश ने श्वेता पुंडीर से शादी की 13 मार्च को खबर आई थी कि यश ने कंटेंट क्रिएटर श्वेता पुंडीर से शादी कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने 4 फरवरी को उत्तर प्रदेश के नोएडा में परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में सात फेरे लिए थे। शादी में क्रिकेट जगत से किसी के शामिल होने की खबर नहीं थी। श्वेता पुंडीर दिल्ली की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और व्लॉगर हैं। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 5.87 लाख फॉलोअर्स हैं। वे इंटरकॉन्टिनेंटल लीजेंड्स लीग में ब्रॉडकास्टर के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। 2023 सीजन में रिंकू ने लगातार 5 छक्के जड़े 2023 में कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज रिंकू सिंह ने उनके एक ओवर में लगातार पांच छक्के लगाए थे, जिसके बाद वह चर्चा में आए। 2024 में उन्हें भारत और बांग्लादेश के बीच घरेलू टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया में पहली बार चुना गया था, हालांकि अभी तक उन्होंने इंटरनेशनल डेब्यू नहीं किया है। ————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… बेंगलुरु भगदड़ के मृतकों को अनूठी श्रद्धांजलि, चिन्नास्वामी स्टेडियम में 11 सीटें हमेशा खाली रखी जाएंगी बेंगलुरु के एम चिन्नस्वामी स्टेडियम में खेले जाने वाले IPL और इंटरनेशनल मैचों में 11 सीटें हमेशा खाली रखी जाएंगी। वहीं, स्टेडियम के एंट्री गेट पर स्मारक पट्टिका (मेमोरियल प्लाक) और हर मैच से पहले एक मिनट का मौन भी रखा जाएगा, जिसमें दोनों टीमें हिस्सा लेंगी। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
लाल-काले शहतूत ने खींचा ध्यान, गर्मियों में सिर्फ 20 दिन मिलता ये खास फल; गजब के फायदे

Last Updated:March 24, 2026, 14:21 IST Mulberry Benefits: विटामिन सी से भरपूर होने के चलते शहतूत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. फाइबर की वजह से गैस, कब्ज और अपच से राहत मिलती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन सुधारने में मददगार हैं. खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा में गर्मी की शुरुआत होते ही बाजारों में शहतूत लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है. लाल और काले रंग का यह छोटा सा फल भले ही दिखने में साधारण लगे लेकिन इसके फायदे इतने जबरदस्त हैं कि लोग सालभर इसका इंतजार करते हैं. शहतूत एक मौसमी फल है, जो गर्मियों में करीब 15 से 20 दिन ही बाजार में देखने को मिलता है. यही वजह है कि इसका सीजन आते ही इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह फल ज्यादातर जंगलों या पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से उगता है और सीमित मात्रा में ही बाजार तक पहुंच पाता है. शहतूत का स्वाद मीठा, हल्का खट्टा और थोड़ा कसैला होता है, जो इसे और भी खास बनाता है. इसमें छिलका या बड़े बीज नहीं होते, इसलिए इसे सीधे खा सकते हैं. बच्चे हों या बड़े, हर किसी को इसका स्वाद पसंद आता है. सेहत का खजाना शहतूतडॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, शहतूत में विटामिन सी, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. शहतूत के फायदेशहतूत विटामिन सी से भरपूर होने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. फाइबर की वजह से कब्ज, गैस और अपच से राहत मिलती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं. शहतूत में मौजूद तत्व शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं. यह स्किन को ग्लो देता है और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मददगार है. वहीं कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने से वजन घटाने में मदद मिलती है. शरीर को देता है ठंडकगर्मी में शरीर को ठंडा रखना सबसे जरूरी होता है. ऐसे में शहतूत काफी फायदेमंद माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर को राहत मिलती है और डिहाइड्रेशन से भी बचाव होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना आधा से एक कप ताजा शहतूत खाना सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है. शहतूत सिर्फ एक फल नहीं बल्कि गर्मियों का नैचुरल हेल्थ टॉनिक है. कम समय के लिए मिलने वाला यह फल स्वाद और सेहत दोनों का जबरदस्त कॉम्बिनेशन है, इसलिए मौका मिले तो इसे जरूर ट्राई करें. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Khandwa,Madhya Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:21 IST
घर की चारदीवारी से निकलकर मैदान में उतरेंगे 150 दिव्यांग-खिलाड़ी:27 मार्च से दून में शुरू होंगे पैरालंपिक गेम्स; सभी 13 जिलों से खिलाड़ी करेंगे प्रतिभाग

उत्तराखंड के दिव्यांग खिलाड़ियों (पैरा एथलीट्स) के लिए अच्छी खबर है। पैरालंपिक एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के तत्वावधान में 27 से 29 मार्च तक देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम में तीसरे ‘उत्तराखंड राज्य पैरालंपिक गेम्स’ का आयोजन होने जा रहा है। इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रदेश के सभी 13 जिलों से लगभग 150 पैरा खिलाड़ी अपना दमखम दिखाएंगे। आयोजन की खास बात यह है कि इस बार पेट्रोलियम स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड (PSPB) इन खेलों को प्रायोजित कर रहा है, जिससे सीमित संसाधनों वाले पहाड़ के पैरा खिलाड़ियों को एक बड़ा मंच मिलेगा। प्रतियोगिता की 4 खास बातें पहाड़ के दिव्यांग बच्चों को मिल रही नई जिंदगी आयोजन सचिव प्रेम कुमार ने बताया कि पैरालंपिक एसोसिएशन पिछले 20 सालों से राज्य में पैरा स्पोर्ट्स के विकास के लिए काम कर रहा है। अब तक राज्य के 300 से ज्यादा दिव्यांगजनों को पैरालंपिक खेलों से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने बताया, “दिव्यांग लोगों को अमूमन घरों से बाहर ही नहीं निकाला जाता। इन खेलों के माध्यम से पहाड़ के बच्चे घर की चारदीवारी से बाहर निकले हैं। आज ये बच्चे बेंगलुरु, चेन्नई, गांधीनगर और दिल्ली जैसे शहरों में जा रहे हैं और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करना सीख रहे हैं।” केंद्र के उपक्रमों का मिल रहा साथ, राज्य सरकार से भी सहयोग की अपील एसोसिएशन ने बताया कि पिछले आयोजनों में ONGC का सहयोग मिला था, वहीं इस बार PSPB आगे आया है। आयोजकों का कहना है कि वे केंद्र सरकार के बड़े उपक्रमों का पैसा राज्य के हित और गरीब बच्चों के खेलों के लिए ला रहे हैं। वहीं, इस आयोजन के लिए उत्तराखंड सरकार को भी पत्र लिखकर सहयोग मांगा गया है और सरकार की तरफ से सकारात्मक मदद की उम्मीद जताई जा रही है।
MDR TB क्या है: लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के 5 ज़रूरी रूल्स.

World TB Day: आमतौर पर टयूबरक्यूलोसिस की बीमारी का इलाज 6 या 9 महीने तक लंबा चलता है और यह ठीक हो जाती है. लेकिन एक ऐसी टीबी भी होती है जिस पर इस बीमारी की सबसे असरदार दवाएं बेअसर हो जाती हैं. यह होती है मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट यानि एमडीआर टीबी. नेशनल ट्यूबरक्यूलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के आंकड़े बताते हैं कि भारत में यह बीमारी इतनी आम है कि इस बीमारी से पीड़ित दुनिया के एक चौथाई मरीज इसी देश में रहते हैं. हालांकि इसे रोकने के लिए देशभर में पूरा मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर काम कर रहा है और इसके लिए पूरी तरह निशुल्क इलाज दिया जाता है.बावजूद इसके यह बीमारी हर साल हजारों लोगों को लील जाती है. आखिर यह बीमारी क्या है? देशभर में मुफ्त इलाज और जनजागरुकता के बाद भी यह इतनी घातक क्यों है और इसके मरीजों की संख्या ज्यादा क्यों है, एक्सपर्ट से जानते हैं… नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्यूबरक्यूलोसिस एंड रेस्पिरेटरी डिजीज की डायरेक्टर डॉ. उपासना अग्रवाल. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्यूबरक्यूलोसिस एंड रेस्पिरेटरी डिजीज, नई दिल्ली की डायरेक्टर डॉक्टर उपासना अग्रवाल बताती हैं, ‘मल्टीड्रग रेजिस्टेंस टीबी सामान्य ड्रग सेंसिटिव टीबी या प्राइमरी टीबी से थोड़ी अलग और ज्यादा घातक होती है. इस टीबी का बैक्टीरिया टीबी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सबसे असरदार प्रमुख शुरुआती दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो जाता है. ये दवाएं आइसोनियाजिड (Isoniazid), रिफैम्पिसिन (Rifampin), पाइराजाइनामाइड (Pyrazinamide), और ईथाम्बुटोल (Ethambutol) चारों या इनमें से कोई दो भी हो सकती हैं.’ डॉ. अग्रवाल बताती हैं कि ड्रग रेजिस्टेंट टीबी आमतौर पर आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन इन दो दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होती है लेकिन कुछ केसेज में कई अन्य दवाओं के प्रति भी बैक्टीरिया रेजिस्टेंट हो जाता है और वह मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट केस होता है.ऐसी स्थिति में मरीज का इलाज इन दवाओं के बजाय सेकेंडरी दवाओं से किया जाता है. भारत के नेशनल ट्यूबरक्यूलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के अनुसार देश में हर साल मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के 147000 मामले सामने आते हैं. भारत में किसी भी प्रकार की टीबी का इलाज एकदम मुफ्त मौजूद हैं इसके बावजूद एमडीआर से 13 से 14 फीसदी लोगों की मौत सालाना हो जाती है. ‘हालांकि इस बीमारी को लेकर अच्छी बात ये है कि यह पूरी तरह ठीक हो सकती है और भारत में इसका एकदम मुफ्त इलाज हर जिला स्तर पर सरकारी अस्पतालों में मौजूद है. लेकिन इसका इलाज 6 से 9 महीने या कई मामलों में 18 महीने तक भी लंबा खिंचता है, ऐसे में कई बार मरीज इतने लंबे इलाज में धैर्य खो देता है जो उसके लिए नुकसानदेह होता है और यह जानलेवा हो जाती है.’ इस बीमारी की ये हैं कठिनाई . इस टीबी की मृत्यु दर काफी हाई है. . इसमें सबसे इफैक्टिव चार दवाएं काम नहीं करती हैं. . मरीज की बेसलाइन हालत ज्यादा खराब होती है. . लंबे इलाज के चलते कुछ मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं. डॉ. उपासना कहती हैं, चूंकि यह बीमारी आमतौर पर सेकेंडरी है और सामान्य टीबी या ड्रग सेंसिटिव टीबी के इलाज में आई कमियों के बाद सामने आती है तो अगर टीबी के मरीज इन चीजों का ध्यान रखें तो इसे रोका भी जा सकता है. एमडीआर टीबी कंट्रोल करने के ये हैं 5 रूल्स . प्राइमरी या ड्रग सेंसिटिव टीबी का इलाज अगर एक बार शुरू हो गया है तो उसे किसी भी कीमत पर बीच में न छोड़ें. . टीबी के इलाज के साथ बताए गए परहेजों का कड़ाई से पालन करना है. . अगर टीबी की दवाएं टीबी के प्रकार को देखते हुए 6 या 9 महीने के लिए दी गई हैं तो उस अवधि को पूरा होने तक दवाएं जारी रखें. . बीच-बीच में दवा लेने में गैप न करें. यानि कुछ दिनों के लिए डोज छोड़ दी फिर लेना शुरू कर दी आदि. मरीज एक भी डोज का गैप न करें. . इलाज के दौरान किसी भी रुकावट को न आने दें. अगर कोई दूसरी बीमारी हो भी रही हो तो भी टीबी के इलाज को बीच में न रोकें. इस दवा को लेते रहें और डॉक्टर से अन्य बीमारी का इलाज भी ले सकते हैं. आइए इस बीमारी के बारे में और विस्तार से जानते हैं.. मल्टीड्रग रेजिस्टेंट टीबी क्या होती है? मल्टीड्रग रेजिस्टेंस टीबी वह होती है जिसमें टीबी का बैक्टीरिया टीबी के इलाज के लिए दी जाने वाली चारों सबसे असरदार प्राइमरी दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट हो जाता है. तब इसे दूसरी दवाओं से ठीक किया जाता है. भारत में एमडीआर टीबी के कितने मरीज हैं?नेशनल ट्यूबरक्यूलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के आंकड़ों के अनुसार भारत में एमडीआर से पीड़ित करीब 147000 नए मरीज सालाना आते हैं. यह संख्या दुनिया के कुल टीबी मरीजों की एक चौथाई है, यानि इस टीबी के करीब 25 फीसदी केस अकेले भारत में हैं. नए या पुराने किन मरीजों में यह टीबी ज्यादा है?एमडीआर टीबी के 26 फीसदी मरीज वे हैं जो पहले से इलाज ले रहे हैं, जबकि 3 फीसदी से ज्यादा फ्रेश मरीजों में एमडीआर टीबी देखने को मिल रही है. क्या यह टीबी घातक है?सेंसिटिव टीबी के मुकाबले एमडीआर इसलिए घातक हो जाती है क्योंकि इसका बैक्टीरिया चारों फर्स्ट लाइन ड्रग यानि प्राइमरी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाता है. इसके इलाज के लिए सेकेंडरी दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं. इसके ठीक होने की संभावना भी 57 फीसदी है, जबकि इसमें जान जाने का खतरा 13 से 14 फीसदी है. चार फर्स्ट लाइन ड्रग कौन सी हैं?सेंसिटिव टीबी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली चार प्राइमरी फर्स्ट लाइन ड्रग हैं, आइसोनियाजिड (Isoniazid), रिफैम्पिसिन (Rifampin), पाइराजाइनामाइड (Pyrazinamide), और ईथाम्बुटोल (Ethambutol), इन्हें RIPE रेजिमेन भी कहा जाता है. क्या ये टीबी ठीक हो सकती है?डॉ. उपासना कहती हैं कि इस टीबी को भी ठीक किया जा सकता है. इसके इलाज के लिए भी दवाएं हैं. यह टीबी प्राइमरी दवा के प्रति रेजिस्टेंट होती है लेकिन सेकेंडरी दवाओं से इसका इलाज होता है. कितने दिन चलता है इसका इलाज?आमतौर पर ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के लिए 6 से 9 महीने का इलाज पर्याप्त होता है, लेकिन कुछ केसेज में यह इलाज 18 महीनों तक भी चलाना होता है.
असम विधानसभा चुनाव 2026: असम चुनाव के लिए 9 अप्रैल को छुट्टी, वोटिंग के लिए घोषित की गई विशेष सुविधा

असम में विधानसभा चुनाव को लेकर सार्वभौम पार्टी तेज हो गई है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने 9 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया है। आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, मतदान वाले दिन सरकारी और गैर-सरकारी ग्राहकों के साथ-साथ औद्योगिक संस्थान, शहरी स्थानीय निकाय, बैंक और सभी व्यावसायिक रेस्तरां बंदे। सामान्य प्रशासन विभाग के आयुक्त एवं सचिव एमएस मणिवन्न की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह सार्वजनिक अवकाश नेगोशिबल टीचर्स अधिनियम, 1881 की धारा 25 के तहत घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य बिना किसी बाधा के मतदान प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर देना है। श्रम कल्याण विभाग की अधिसूचना इसी के साथ कल्याण श्रम विभाग ने भी अलग से अधिसूचना जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि 9 अप्रैल को सभी फैक्ट्रियां, चाय बागान, विश्रामगृह और सार्वजनिक मनोरंजन या एंटरटेनमेंट में पेड हॉलिडे रहेंगे। इस तरह के लाखों कलाकारों और कर्मचारियों को मतदान में भाग लेने के लिए समय मिल गया। असम की 126 राधा विधानसभा के लिए इसी दिन मतदान होगा, जबकि असम की 4 मई को होगी। चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन दोनों मिलकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। छुट्टी की घोषणा को इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. चुनाव में कई बड़े मुद्दे, दांव पर राजनीतिक रूप से अहम इस चुनाव में कई बड़े मुद्दे दांव पर हैं. ऐसे में सरकार का यह कदम लोकतांत्रिक साझेदारी सुनिश्चित करने और प्रेरणा देने के आह्वान से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तालिबान के बीच अब नजरें 9 अप्रैल की वोटिंग और 4 मई की स्टालिन पर टिकी हैं। ये भी पढ़ें: असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘अगर गौरव पाकिस्तान में चुनावी लड़ाई लड़ें तो…’, हिमंत बिस्वा सरमा ने किया दावा, क्यों ली मौज?









